माँ भुवनेश्वरी साधनाIt takes 2 minutes... to read this article !

माँ भुवनेश्वरी साधना की संपूर्ण शास्त्रीय विधि, मंत्र, साधना नियम और लाभ जानें। महाविद्या माँ भुवनेश्वरी साधना से स्थिरता, सौभाग्य और मानसिक विस्तार प्राप्त करें।

माँ भुवनेश्वरी साधना का परिचय

महाविद्या भुवनेश्वरी को सम्पूर्ण ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री शक्ति माना गया है। वे आकाश तत्व, विस्तार, संरक्षण और संतुलन की देवी हैं। जहाँ काली संहार का प्रतीक हैं, वहीं भुवनेश्वरी सृजन, व्यवस्था और संरक्षण का स्वरूप हैं।

माँ भुवनेश्वरी साधना साधक को जीवन की अव्यवस्था से निकालकर स्थिरता, स्पष्टता और व्यापक दृष्टि प्रदान करती है। यह साधना गृहस्थ और साधक दोनों के लिए अत्यंत कल्याणकारी मानी गई है।

माँ भुवनेश्वरी का तात्त्विक स्वरूप

माँ भुवनेश्वरी को “माया की अधिष्ठात्री” कहा गया है।

• वे पंचमहाभूतों में आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं

• समस्त दिशाएँ और लोक उनके भीतर स्थित माने जाते हैं

• वे सीमाओं को विस्तार में बदलने वाली शक्ति हैं

यह साधना व्यक्ति के सीमित सोच को व्यापक चेतना में परिवर्तित करती है।

शास्त्रीय संदर्भ

माँ भुवनेश्वरी साधना का उल्लेख निम्न ग्रंथों में मिलता है:

• तंत्रसार

• रुद्रयामल तंत्र

• ब्रह्माण्ड पुराण

• शक्तिसंगम तंत्र

शास्त्रों के अनुसार, यह साधना जीवन में संतुलन और संरक्षण स्थापित करती है।

माँ भुवनेश्वरी साधना का महत्व

• मानसिक और भावनात्मक स्थिरता

• जीवन में स्पष्टता और निर्णय शक्ति

• भय और असुरक्षा से मुक्ति

• गृहस्थ जीवन में संतुलन

• आध्यात्मिक विस्तार और शांति

साधना के लिए आवश्यक तैयारी

स्थान

• शांत, स्वच्छ और हवादार स्थान

• पूर्व या उत्तर दिशा में मुख

आसन

• सफेद या पीले वस्त्र

• कुशासन या ऊनी आसन

मानसिक तैयारी

• मन को शांत और ग्रहणशील बनाना

• नकारात्मक भावनाओं से दूरी

माँ भुवनेश्वरी साधना विधि

1. संकल्प

साधना का उद्देश्य स्पष्ट करें — स्थिरता, शांति, संरक्षण या आध्यात्मिक विकास।

2. ध्यान

देवी को आकाश समान विस्तृत, शांत और करुणामयी स्वरूप में ध्यान करें।

3. मंत्र जाप

माँ भुवनेश्वरी बीज मंत्र (सरल रूप)

“ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः”

• 108 या 1008 बार जाप

• स्फटिक या रुद्राक्ष माला

4. भाव साधना

मंत्र के साथ स्वयं को देवी की व्यापक चेतना में विलीन करने का भाव रखें।

साधना का समय

• ब्रह्म मुहूर्त सर्वोत्तम

• सोमवार और पूर्णिमा विशेष फलदायी

• नवरात्रि में साधना शीघ्र फल देती है

साधना के लाभ

मानसिक लाभ

• तनाव और भय में कमी

• निर्णय क्षमता में वृद्धि

• आत्मविश्वास और स्थिरता

भौतिक लाभ

• गृहस्थ जीवन में संतुलन

• कार्यक्षेत्र में स्पष्टता और सफलता

• नकारात्मक परिस्थितियों से सुरक्षा

आध्यात्मिक लाभ

• चेतना का विस्तार

• आंतरिक शांति और संतुलन

• साधक में धैर्य और विवेक

साधना में सावधानियाँ

• अधीरता और जल्दबाज़ी से बचें

• मंत्र का शुद्ध उच्चारण आवश्यक

• साधना को केवल भौतिक लाभ तक सीमित न करें

दीर्घकालिक प्रभाव

• जीवन में स्थायित्व और संतुलन

• मानसिक परिपक्वता

• व्यापक दृष्टिकोण का विकास

• भय और अस्थिरता से स्थायी मुक्ति

निष्कर्ष

माँ भुवनेश्वरी साधना जीवन को विस्तार, स्थिरता और संरक्षण प्रदान करने वाली साधना है। यह साधक को सीमाओं से ऊपर उठाकर व्यापक चेतना से जोड़ती है।

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