Holashtak 2026 Kab Se Hai: होलाष्टक 24 फरवरी 2026 फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से शुरू, जानें होली पंचांगIt takes 5 minutes... to read this article !

Holashtak 2026 कब से शुरू होगा? होलाष्टक की पूरी जानकारी, शुभ मुहूर्त, होलिका दहन समय, वर्जित कार्य, ज्योतिषीय प्रभाव, उपाय और पंचांग एक ही जगह पढ़ें।

हिंदू पंचांग के अनुसार होलाष्टक वह पवित्र काल है जो होली (होली) महापर्व से ठीक 8 दिन पहले प्रारंभ होता है और होली की पूर्णिमा (होलिका दहन) तक चलता है। इस अवधि को धार्मिक मान्यताओं में अशुभ और विशेष नियमों वाला समय माना जाता है। इसे “होली + अष्टक” (अर्थात् 8 दिन) कहा जाता है।

भारतीय ज्योतिष में कुछ समय ऐसे होते हैं जो कर्म से अधिक संयम सिखाते हैं। होलाष्टक उन्हीं विशेष अवधियों में से एक है। यह केवल “शुभ कार्य न करने” का नियम नहीं है, बल्कि यह समय है जब ग्रहों की उग्र स्थिति, नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव, और आत्मिक परीक्षा अपने चरम पर मानी जाती है।

होलाष्टक के 8 दिन व्यक्ति के

  • मन

  • निर्णय

  • संबंध

  • और कर्मफल

सब पर प्रभाव डालते हैं।

इसीलिए ज्योतिष शास्त्र में इसे Silent Karma Period भी कहा गया है।

होलाष्टक 2026: होलाष्टक का महत्व

होलाष्टक का धार्मिक अर्थ

“होला” शब्द होली से जुड़ा है और “अष्टक” का अर्थ है आठ दिन। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह समय भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद की कठिनाइयों का प्रतीक है, जब हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को धार्मिक स्थिरता के लिए परीक्षाओं से गुज़ारा था। इस अवधि में नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव अधीक माना जाता है और इसलिए शुभ कार्यों पर नियंत्रण लगाने की परंपरा है।

होलाष्टक 2026 Date & Time (पंचांग आधारित)

होलाष्टक 2026 कब से शुरू होगा?
  • प्रारंभ तिथि: 24 फरवरी 2026 (मंगलवार)

  • तिथि: फाल्गुन शुक्ल अष्टमी

  • समाप्ति: 03 मार्च 2026 (मंगलवार)

  • तिथि: फाल्गुन पूर्णिमा

कुल अवधि: 8 दिन

होलिका दहन 2026: शुभ मुहूर्त (Exact Timing)

होलिका दहन की तिथि
  • दिन: 03 मार्च 2026, मंगलवार

शुभ मुहूर्त (India Standard Time)
  • सायंकाल शुभ समय: 06:08 PM से 08:35 PM तक

भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना जाता है।

होली 2026 Date

  • धुलेंडी / रंगों वाली होली: 04 मार्च 2026, बुधवार

होलाष्टक 2026: पंचांग आधारित विस्तार

पंचांग में होलाष्टक का महत्व

पंचांग के अनुसार होलाष्टक उस अवधि को कहा जाता है जब शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक समय चलता है। यह प्रायः 8 दिनों को दर्शाता है और इसी कारण इसे होलाष्टक कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव को अधिक माना जाता है, इसलिए सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

Holashtak 2026: किन कार्यों की होती है वर्जना

वर्जित कार्य सूची (Do’s & Don’ts)

होलाष्टक के दौरान निम्न कार्य अत्यंत अशुभ और वर्जित माने जाते हैं:

  1. विवाह / विवाह समारोह – मांगलिक कार्यों से परहेज़।

  2. नामकरण संस्कार (नामकरण) – शुभ संस्कार टालें।

  3. जनेऊ संस्कार – धार्मिक अनुष्ठानों से बचें।

  4. गृह प्रवेश – नया घर प्रवेश नहीं करें।

  5. व्यापार / नया व्यवसाय शुरू करना – व्यवसाय संबंधी शुभ प्रारंभ अस्वीकार।

  6. यज्ञ-हवन – श्राद्ध या यज्ञ जैसे कर्मों से परहेज़।

  7. अनजान व्यक्तियों से वस्तुएँ ग्रहण / ग्रहण-दान – नकारात्मक ऊर्जा से बचें।

इन दिनों संयम, सेवा, ध्यान और व्रत से अधिक धार्मिक अनुशासन का पालन करना श्रेष्ठ माना जाता है।

होलाष्टक का ज्योतिषीय रहस्य (Astrological Insight)

ज्योतिष के अनुसार होलाष्टक के दौरान:

  • सूर्य और मंगल की ऊर्जा उग्र होती है

  • चंद्रमा भावनात्मक अस्थिरता पैदा करता है

  • राहु-केतु भ्रम और जल्दबाज़ी बढ़ाते हैं

इसी कारण इस अवधि में:

  • नए रिश्ते

  • नए अनुबंध

  • बड़े निर्णय

टालना श्रेष्ठ माना जाता है।

होलाष्टक 2026: धार्मिक और पौराणिक कथाएँ

कथा-1: प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप

पौराणिक मान्यता के अनुसार जब राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु के भक्त होने के कारण कठिनाइयों में डाला, तब अष्टमी से पूर्णिमा तक कठिन परीक्षण का समय चला। इसी अवधि को होलाष्टक कहा जाता है।

कथा-2: कामदेव और भगवान शिव

एक अन्य कथा में कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग की और शिवजी ने कामदेव को भस्म कर दिया था। इस घटना का स्मरण भी होलाष्टक से जोड़ा जाता है।

इन कथाओं के कारण होलाष्टक को आध्यात्मिक परीक्षा और धैर्य का समय माना जाता है।

होलाष्टक 2026: पूजा और उपाय

होलाष्टक में क्या करें
  • ध्यान और साधना — ध्यान, मंत्र जाप और जप ध्यान से मानसिक शांति।

  • दान-पुण्य — दान और परोपकार का विशेष महत्व।

  • व्रत और संयम — भोजन संयम, धर्माचार्य अध्ययन।

  • गृह व्यक्ति पूजा — घर के देव-पूजन में श्रद्धा।

होलाष्टक 2026: होली से पहले का महत्व

होलाष्टक केवल वर्जित समय नहीं, बल्कि आध्यात्मिक तैयारी का काल भी है। इससे व्यक्ति को अपनी आत्मा, मन और शरीर को होली के पावन दिन के लिए शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरने का अवसर मिलता है।

होलाष्टक विशेष उपाय (Astro Tips)

मानसिक शांति के लिए
  • प्रतिदिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जप

ग्रह दोष शांति हेतु
  • मंगलवार और शनिवार को दीपदान

नकारात्मक ऊर्जा से बचाव
  • घर के मुख्य द्वार पर हल्दी-कुमकुम से स्वस्तिक

FAQs – Holashtak 2026

1. क्या होलाष्टक में पूजा कर सकते हैं?

हाँ, पूजा-पाठ, जप, साधना पूरी तरह शुभ मानी जाती है।

2. क्या नौकरी जॉइन करना अशुभ है?

यदि संभव हो तो टालना बेहतर, पर मजबूरी में दोष नहीं लगता।

3. क्या यह पूरे भारत में मान्य है?

हाँ, यह उत्तर और मध्य भारत में विशेष रूप से मान्य है।

होलाष्टक 2026 के बारे मैं अंतिम ज्योतिषीय फैसला

होलाष्टक 2026 24 फरवरी से प्रारंभ होकर 03 मार्च 2026 तक रहेगा, इसके अंतर्गत होलिका दहन 03 मार्च को होगा और धुलैण्डी होली 04 मार्च को मनाई जाएगी। इस अवधि में शुभ कार्यों से परहेज़ करना चाहिए और धार्मिक अनुशासन का पालन करना श्रेष्ठ माना जाता है।

Holashtak 2026 केवल परहेज़ का समय नहीं, बल्कि कर्म सुधारने और आत्मशुद्धि का दुर्लभ अवसर है। जो व्यक्ति इस अवधि को समझदारी से बिताता है, उसकी होली केवल रंगों की नहीं, जीवन में सकारात्मक बदलाव की होली बन जाती है।

हमारी एडिटोरियल टीम अनुभवी वैदिक एवं तांत्रिक साधकों का एक समर्पित समूह है, जिन्होंने वर्षों तक वेद, तंत्र और प्राचीन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया है। इन ग्रंथों में वर्णित साधनाओं का विधिवत पुरश्चरण कर, व्यावहारिक अनुभव के साथ ज्ञान को आत्मसात किया गया है। Sadhanas.in पर प्रकाशित प्रत्येक लेख और साधना शुद्ध रूप से प्राचीन शास्त्रों एवं प्रमाणिक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है, ताकि साधकों को प्रामाणिक, सुरक्षित और सही मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।

error: Content is protected !!