Lalita Jayanti 2026: जानिए तिथि, पूजन विधि, मंत्र, मुहूर्त और आध्यात्मिक महत्वIt takes 9 minutes... to read this article !

ललिता जयंती 2026 कब है? जानिए माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, आराधना का महत्व और आध्यात्मिक लाभ।

ललिता जयंती 2026 कब है?

जब अधर्म, अहंकार और नकारात्मक शक्तियाँ अपने चरम पर पहुँचीं, तब ब्रह्मांड ने जिस दिव्य शक्ति का आवाहन किया — वही हैं माँ ललिता त्रिपुर सुंदरीललिता जयंती 2026, जो 1 फरवरी 2026 (माघ शुक्ल पूर्णिमा, रविवार) को मनाई जाएगी, केवल एक तिथि नहीं बल्कि शक्ति, सौंदर्य और चेतना के प्राकट्य का दिव्य क्षण है। इस पावन दिन की गई साधना न केवल जीवन की बाधाओं को दूर करती है, बल्कि साधक को आंतरिक संतुलन, आकर्षण और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती है। यही कारण है कि ललिता जयंती को श्रीविद्या और तंत्र साधना का महासंयोग माना गया है।

ललिता जयंती हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और दिव्य पर्व है, जो आदि शक्ति माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। माँ ललिता को श्रीविद्या परंपरा की अधिष्ठात्री देवी, संपूर्ण ब्रह्मांड की संचालिका और परम सौंदर्य व चेतना का स्वरूप माना गया है। शास्त्रों के अनुसार माँ ललिता का प्राकट्य उस समय हुआ, जब सृष्टि में अधर्म, अहंकार और आसुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ गया था।

ललिता जयंती 2026 विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पर्व पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है, जो स्वयं आध्यात्मिक साधना, मंत्र जप और देवी उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी की पूजा, श्रीचक्र उपासना और ललिता सहस्रनाम पाठ करने से साधक को विशेष आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं।

ललिता जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, सौंदर्य, ज्ञान और आत्मबोध का उत्सव है। इस दिन की गई साधना से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं, विशेषकर शुक्र दोष, चंद्र दोष और वैवाहिक बाधाएं। इसलिए यह पर्व गृहस्थ, साधक, ज्योतिष प्रेमी और आध्यात्मिक साधकों – सभी के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

शुभ मुहूर्त (Lalita Jayanti Muhurat 2026)

कार्य समय
ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04:45 – 05:30
अभिजीत मुहूर्त 11:55 – 12:45
प्रदोष काल सायं 06:30 – 08:15
पूर्णिमा तिथि प्रातः से रात्रि तक

 

माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी कौन हैं?

माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी को श्रीविद्या परंपरा की सर्वोच्च देवी माना जाता है।

इन्हें निम्न नामों से भी जाना जाता है:

  • राजराजेश्वरी

  • कामेश्वरी

  • श्रीललिता

  • आदिपराशक्ति

  • षोडशी देवी

ललिता सहस्रनाम में इनके 1000 दिव्य नामों का वर्णन मिलता है।

त्रिपुर सुंदरी का आध्यात्मिक अर्थ

  • त्रि – तीन लोक

  • पुरा – शरीर, मन, आत्मा

  • सुंदरी – चेतना की परम सुंदर अवस्था

अर्थात जो तीनों लोकों और तीनों अवस्थाओं से परे हैं।

ललिता जयंती का धार्मिक और तांत्रिक महत्व

  • श्रीविद्या साधना का प्रमुख पर्व

  • तंत्र, मंत्र और योग का संगम

  • काम, अर्थ, धर्म और मोक्ष की प्राप्ति

  • स्त्री शक्ति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा की उपासना

यह पर्व विशेष रूप से साधकों, ज्योतिषियों और तांत्रिक उपासकों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

ललिता जयंती 2026 पूजा विधि (Step-by-Step)

1. प्रातःकाल स्नान
  • गंगाजल मिश्रित जल से स्नान

  • लाल या गुलाबी वस्त्र धारण करें

2. पूजा स्थान की तैयारी
  • श्रीचक्र या माँ की तस्वीर स्थापित करें

  • लाल कपड़ा बिछाएं

3. संकल्प

“मम सर्वसिद्ध्यर्थं माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी प्रसन्नार्थं पूजनं करिष्ये।”

4. षोडशोपचार पूजा
  • आसन

  • पाद्य

  • अर्घ्य

  • आचमन

  • स्नान

  • वस्त्र

  • गंध

  • पुष्प

  • धूप

  • दीप

  • नैवेद्य

  • ताम्बूल

  • आरती

माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी का विशेष मंत्र (Mantra Chanting)

बीज मंत्र

ॐ ऐं क्लीं सौः श्री ललितायै नमः

ललिता सहस्रनाम
  • 1 माला या 3 माला

  • रुद्राक्ष या स्फटिक माला

माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी को क्या नैवेद्य चढ़ाएं?

  • खीर

  • पंचामृत

  • लाल फल

  • बताशे

  • मिश्री

माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी व्रत नियम

  • फलाहार या सात्त्विक भोजन

  • ब्रह्मचर्य पालन

  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें

ललिता जयंती पर किए जाने वाले उपाय

धन वृद्धि
  • श्रीचक्र के समक्ष दीपक

  • शुक्रवार को कन्या पूजन

विवाह बाधा
  • गुलाबी पुष्प से अर्चना

  • 21 दिन मंत्र जाप

मानसिक शांति
  • चंद्रमा के दर्शन

  • सहस्रनाम पाठ

माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी की प्राकट्य कथा

देवी ललिता का ब्रह्मांडीय अवतरण

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जब सृष्टि में अधर्म, अहंकार और तामसिक शक्तियों का अत्यधिक प्रभाव बढ़ गया, तब देवताओं ने आदिशक्ति की उपासना की। उसी समय माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य साधारण नहीं था, बल्कि चैतन्य, सौंदर्य और परब्रह्म स्वरूप का दिव्य अवतरण था।

ललिता सहस्रनाम और ब्रह्माण्ड पुराण में वर्णन आता है कि माँ का प्राकट्य एक अग्निकुंड से हुआ, जिसे ‘कामकोटि पीठ’ कहा जाता है। यह अग्निकुंड स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश द्वारा यज्ञ के रूप में प्रज्वलित किया गया था।

माँ बाल्य अवस्था में नहीं, बल्कि पूर्ण षोडशी स्वरूप में प्रकट हुईं — अर्थात 16 वर्ष की दिव्य युवती, जो पूर्ण चेतना और सौंदर्य की प्रतीक हैं।

प्राकट्य का तात्त्विक अर्थ

यह कथा यह संकेत देती है कि जब साधक की चेतना पूर्ण होती है, तब देवी भीतर से प्रकट होती हैं। अग्निकुंड ज्ञानाग्नि का प्रतीक है और षोडशी अवस्था पूर्ण आत्मबोध का।

भंडासुर वध की संपूर्ण कथा

भंडासुर का जन्म और अत्याचार

भंडासुर का जन्म कामदेव की भस्म से हुआ था। शिव द्वारा कामदेव के दहन के बाद उसकी भस्म से यह राक्षस उत्पन्न हुआ। उसने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया कि कोई भी पुरुष उसे मार न सके।

वरदान मिलते ही भंडासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया। उसने देवताओं, ऋषियों और साधकों को कष्ट देना आरंभ किया और तांत्रिक शक्तियों का दुरुपयोग किया।

देवी ललिता का युद्ध

देवताओं की प्रार्थना पर माँ ललिता ने भंडासुर के वध का संकल्प लिया। उन्होंने एक दिव्य सेना बनाई, जिसमें योगिनियाँ, मातृकाएँ और शक्तियाँ सम्मिलित थीं।

माँ का रथ ‘चक्रराज’ था और धनुष ‘श्रीचाप’। उन्होंने केवल एक मुस्कान से भंडासुर का अंत कर दिया।

कथा का आध्यात्मिक संदेश

भंडासुर अहंकार का प्रतीक है और देवी की मुस्कान ज्ञान का। जब ज्ञान उदय होता है, अहंकार स्वतः नष्ट हो जाता है।

ललिता सहस्रनाम: चयनित श्लोक एवं अर्थ

श्लोक 1

श्री माँ श्री महाराज्ञी श्रीमत् सिंहासनेश्वरी

अर्थ: माँ सम्पूर्ण ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री रानी हैं, जो सिंहासन पर विराजमान हैं।

श्लोक 2

चिदग्निकुण्डसम्भूता देवकार्यसमुद्यता

अर्थ: देवी चैतन्य रूपी अग्निकुंड से उत्पन्न होकर देवताओं के कार्य को पूर्ण करती हैं।

श्लोक 3

कामेश्वरप्राणनाडी कामेश्वरविलासिनी

अर्थ: माँ शिव की प्राणशक्ति हैं और शिव के साथ लीला करती हैं।

(यहाँ आगे 20+ श्लोक उनके भावार्थ व साधना अर्थ सहित जोड़े जाएँगे)

ग्रह अनुसार माँ ललिता की पूजा विधि

सूर्य ग्रह दोष
  • मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं श्री सूर्यललितायै नमः

  • उपाय: रविवार को लाल पुष्प अर्पित करें

चंद्र ग्रह दोष
  • मंत्र: ॐ सौः चंद्रललितायै नमः

  • उपाय: पूर्णिमा को खीर का भोग

मंगल ग्रह दोष
  • मंत्र: ॐ क्लीं मंगलललितायै नमः

  • उपाय: मंगलवार को सिंदूर अर्पण

बुध ग्रह दोष
  • मंत्र: ॐ ऐं बुधललितायै नमः

  • उपाय: हरे वस्त्र और दूर्वा अर्पण

गुरु ग्रह दोष
  • मंत्र: ॐ ह्रीं गुरुललितायै नमः

  • उपाय: पीले पुष्प, हल्दी

शुक्र ग्रह दोष (अत्यंत महत्वपूर्ण)
  • मंत्र: ॐ ऐं क्लीं सौः श्रीललितायै नमः

  • उपाय: शुक्रवार को श्रीचक्र पूजन

शनि ग्रह दोष
  • मंत्र: ॐ ह्रीं शनिललितायै नमः

  • उपाय: तिल का दीपक

राहु-केतु दोष
  • मंत्र: ॐ सौः राहुललितायै नमः / ॐ सौः केतुललितायै नमः

  • उपाय: धूप और लोबान

ललिता जयंती विशेष साधना विधि

प्रारंभिक साधना विधि (Beginner Lalita Sadhana)

यह साधना गृहस्थ, सामान्य भक्त और पहली बार माँ ललिता की उपासना करने वालों के लिए उपयुक्त है। इसमें किसी गुरु दीक्षा की आवश्यकता नहीं होती।

समय: प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या सायं प्रदोष काल

आवश्यक सामग्री:

  • माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी का चित्र या श्रीचक्र

  • लाल या गुलाबी वस्त्र

  • घी का दीपक

  • गुलाब या कमल पुष्प

  • धूप, नैवेद्य

विधि:

  1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें

  2. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें

  3. दीप प्रज्वलित कर माँ का ध्यान करें

  4. निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें:

मंत्र: ॐ ऐं क्लीं सौः श्री ललितायै नमः

  1. अंत में क्षमा प्रार्थना और आरती करें

लाभ:

  • मानसिक शांति

  • वैवाहिक सौख्य

  • सौंदर्य, आकर्षण और आत्मविश्वास

उन्नत साधना विधि (Advanced Lalita Sadhana)

यह साधना उन साधकों के लिए है जो नियमित जप, ध्यान और संयम का पालन करते हैं। इसमें श्रीविद्या के तत्व सम्मिलित हैं।

समय: मध्यरात्रि या पूर्णिमा रात्रि

आवश्यक सामग्री:

  • श्रीचक्र (तांबे या स्फटिक का)

  • स्फटिक या रुद्राक्ष माला

  • पंचामृत

  • कुमकुम, केसर

विधि:

  1. पंचोपचार से श्रीचक्र पूजन

  2. ध्यान करें कि माँ चिदग्निकुंड से प्रकट हो रही हैं

  3. ललिता सहस्रनाम का पाठ (कम से कम 1 आवृत्ति)

  4. मंत्र जप:

मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं श्रीं सौः श्रीललिता त्रिपुरसुन्दर्यै नमः

  1. साधना के बाद मौन ध्यान

लाभ:

  • कुंडली दोष शमन

  • आकर्षण, वाणी और तेज में वृद्धि

  • आध्यात्मिक उन्नति

श्रीचक्र के 9 आवरण: देवी ललिता का गूढ़ तांत्रिक स्वरूप

श्रीचक्र को संपूर्ण ब्रह्मांड का ज्यामितीय स्वरूप माना गया है। माँ ललिता स्वयं श्रीचक्र में निवास करती हैं। इसके 9 आवरण साधना के 9 आध्यात्मिक सोपान हैं।

प्रथम आवरण – त्रैलोक्यमोहन चक्र
  • देवता: योगिनियाँ

  • सिद्धि: आकर्षण, वशीकरण (सात्त्विक)

  • मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रैलोक्यमोहन चक्रेश्वर्यै नमः

द्वितीय आवरण – सर्वाशापरिपूरक चक्र
  • सिद्धि: मनोकामना पूर्ति

  • यह आवरण इच्छाओं के शुद्धिकरण से जुड़ा है

तृतीय आवरण – सर्वसंक्षोभण चक्र
  • सिद्धि: नकारात्मक शक्तियों का नाश

  • साधक के भीतर जमी जड़ता को तोड़ता है

चतुर्थ आवरण – सर्वसौभाग्यदायक चक्र
  • सिद्धि: वैवाहिक सुख, सौंदर्य

पंचम आवरण – सर्वार्थसाधक चक्र
  • सिद्धि: धन, पद, प्रतिष्ठा

षष्ठ आवरण – सर्वरक्षाकर चक्र
  • सिद्धि: ग्रह बाधा से रक्षा

सप्तम आवरण – सर्वरोगहर चक्र
  • सिद्धि: मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य

अष्टम आवरण – सर्वसिद्धिप्रद चक्र
  • सिद्धि: आध्यात्मिक उन्नति

नवम आवरण – सर्वानंदमय चक्र
  • देवी स्वरूप: महात्रिपुरसुंदरी

  • यह मोक्ष का द्वार है

कुंडली दोष निवारण में ललिता उपासना का महत्व

माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी की पूजा को ज्योतिष में सर्वश्रेष्ठ दोष निवारक माना गया है, विशेषकर शुक्र, चंद्र और राहु-केतु से संबंधित दोषों के लिए।

शुक्र दोष निवारण
  • समस्या: विवाह में विलंब, प्रेम जीवन में अस्थिरता

  • उपाय: शुक्रवार को श्रीचक्र पूजन, गुलाबी पुष्प अर्पण

  • मंत्र: ॐ ऐं क्लीं सौः श्रीललितायै नमः (108 बार)

चंद्र दोष निवारण
  • समस्या: मानसिक अशांति, अवसाद

  • उपाय: पूर्णिमा को खीर का भोग

  • मंत्र: ॐ सौः चंद्रललितायै नमः

मंगल दोष (मांगलिक)
  • समस्या: विवाह बाधा, क्रोध

  • उपाय: मंगलवार को सिंदूर अर्पण

  • मंत्र: ॐ क्लीं मंगलललितायै नमः

राहु दोष
  • समस्या: भ्रम, अचानक हानि

  • उपाय: धूप-लोबान, मौन साधना

केतु दोष
  • समस्या: आध्यात्मिक भ्रम

  • उपाय: ध्यान और सहस्रनाम पाठ

शनि दोष
  • समस्या: विलंब, संघर्ष

  • उपाय: तिल के तेल का दीपक

ज्योतिषीय दृष्टि से ललिता जयंती का विशेष महत्व

  • यह तिथि शुक्र प्रधान होती है

  • पूर्णिमा होने से चंद्र बलवान होता है

  • स्त्री ग्रहों का संतुलन होता है

ललिता जयंती – FAQs

1. ललिता जयंती 2026 कब है?

ललिता जयंती 2026 फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाएगी।

2. क्या बिना गुरु दीक्षा के ललिता पूजा कर सकते हैं?

हाँ, ललिता सहस्रनाम, स्तोत्र और सामान्य मंत्र जप बिना गुरु दीक्षा के किए जा सकते हैं।

3. ललिता जयंती पर कौन सा मंत्र सबसे प्रभावी है?

ॐ ऐं क्लीं सौः श्री ललितायै नमः – यह मंत्र गृहस्थ और साधक दोनों के लिए श्रेष्ठ है।

4. ललिता जयंती पर व्रत करना आवश्यक है?

व्रत अनिवार्य नहीं है, परंतु सात्त्विक आहार और संयम अत्यंत फलदायी माना गया है।

5. ललिता उपासना से कौन से ग्रह दोष शांत होते हैं?

विशेष रूप से शुक्र, चंद्र और राहु-केतु दोष शांत होते हैं।

6. क्या ललिता जयंती पर श्रीचक्र पूजन किया जा सकता है?

हाँ, ललिता जयंती श्रीचक्र पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथि मानी जाती है।

7. ललिता सहस्रनाम कितनी बार पढ़ना चाहिए?

न्यूनतम 1 बार और विशेष साधना में 3 या 5 बार पाठ किया जा सकता है।

हमारी एडिटोरियल टीम अनुभवी वैदिक एवं तांत्रिक साधकों का एक समर्पित समूह है, जिन्होंने वर्षों तक वेद, तंत्र और प्राचीन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया है। इन ग्रंथों में वर्णित साधनाओं का विधिवत पुरश्चरण कर, व्यावहारिक अनुभव के साथ ज्ञान को आत्मसात किया गया है। Sadhanas.in पर प्रकाशित प्रत्येक लेख और साधना शुद्ध रूप से प्राचीन शास्त्रों एवं प्रमाणिक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है, ताकि साधकों को प्रामाणिक, सुरक्षित और सही मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।

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