श्री भद्रकाली स्तुतिः मूल पाठ, विधि व नियम | Sri Bhadrakali StutiIt takes 2 minutes... to read this article !

श्री भद्रकाली स्तुतिः का मूल संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ, पाठ विधि व नियम विस्तार से जानें। Sri Bhadrakali Stuti के लाभ, महत्व, जप का सही समय और पूजा विधि सहित संपूर्ण जानकारी।

श्री भद्रकाली स्तुतिः मूल पाठ

ब्रह्मविष्णु ऊचतुः ।
नमामि त्वां विश्वकर्त्रीं परेशीं
नित्यामाद्यां सत्यविज्ञानरूपाम् ।
वाचातीतां निर्गुणां चातिसूक्ष्मां
ज्ञानातीतां शुद्धविज्ञानगम्याम् ॥ १ ॥

पूर्णां शुद्धां विश्वरूपां सुरूपां
देवीं वन्द्यां विश्ववन्द्यामपि त्वाम् ।
सर्वान्तःस्थामुत्तमस्थानसंस्था-
-मीडे कालीं विश्वसम्पालयित्रीम् ॥ २ ॥

मायातीतां मायिनीं वापि मायां
भीमां श्यामां भीमनेत्रां सुरेशीम् ।
विद्यां सिद्धां सर्वभूताशयस्था-
-मीडे कालीं विश्वसंहारकर्त्रीम् ॥ ३ ॥

नो ते रूपं वेत्ति शीलं न धाम
नो वा ध्यानम् नापि मन्त्रं महेशि ।
सत्तारूपे त्वां प्रपद्ये शरण्ये
विश्वाराध्ये सर्वलोकैकहेतुम् ॥ ४ ॥

द्यौस्ते शीर्षं नाभिदेशो नभश्च
चक्षूंषि ते चन्द्रसूर्यानलास्ते ।
उन्मेषास्ते सुप्रबोधो दिवा च
रात्रिर्मातश्चक्षुषोस्ते निमेषम् ॥ ५ ॥

वाक्यं देवा भूमिरेषा नितम्बं
पादौ गुल्फं जानुजङ्घस्त्वधस्ते ।
प्रीतिर्धर्मोऽधर्मकार्यं हि कोपः
सृष्टिर्बोधः संहृतिस्ते तु निद्रा ॥ ६ ॥

अग्निर्जिह्वा ब्राह्मणास्ते मुखाब्जं
सन्ध्ये द्वे ते भ्रूयुगं विश्वमूर्तिः ।
श्वासो वायुर्बाहवो लोकपालाः
क्रीडा सृष्टिः संस्थितिः संहृतिस्ते ॥ ७ ॥

एवम्भूतां देवि विश्वात्मिकां त्वां
कालीं वन्दे ब्रह्मविद्यास्वरूपाम् ।
मातः पूर्णे ब्रह्मविज्ञानगम्ये
दुर्गेऽपारे साररूपे प्रसीद ॥ ८ ॥

इति श्रीमहाभागवते महापुराणे ब्रह्मविष्णुकृता श्री भद्रकाली स्तुतिः ।

श्री भद्रकाली स्तुतिः पाठ की विधि

1. पाठ का समय
  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल
  • संबंधित देवता का वार विशेष फलदायी
  • विशेष मुहूर्त, ग्रहण काल, जयंती पर सर्वोत्तम
2. आसन व दिशा
  • कुश या ऊनी आसन
  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख
3. पूजा सामग्री
  • श्री भद्रकाली की प्रतिमा या चित्र
  • दीपक, धूप, पुष्प
  • पीला या लाल वस्त्र

श्री भद्रकाली स्तुतिः पाठ के नियम

  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • मन, वाणी और शरीर से शुद्ध रहें
  • पाठ के समय मौन और एकाग्रता आवश्यक
  • स्तुति का पाठ कम से कम 11 बार
  • भय या संकट में 108 बार पाठ विशेष लाभ देता है

श्री भद्रकाली स्तुतिः के लाभ

  • अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा
  • शत्रु बाधा और षड्यंत्र से सुरक्षा
  • ग्रह दोष और राहु-केतु शांति
  • मानसिक भय, अवसाद और अनिद्रा से मुक्ति
  • घर और साधक के चारों ओर सुरक्षा कवच

विशेष साधना उपाय

यदि किसी व्यक्ति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव या भय बना रहता है, तो 21 दिनों तक नियमित रूप से दीपक जलाकर श्री भद्रकाली स्तुतिः का पाठ करें। यह साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पाठ अधूरा न छोड़ें
  • क्रोध या अशुद्ध अवस्था में पाठ न करें
  • स्तुति का उच्चारण स्पष्ट हो

श्री भद्रकाली स्तुतिः केवल एक स्तुतिः नहीं बल्कि दिव्य सुरक्षा कवच है। शास्त्रों में वर्णित विधि से किया गया पाठ साधक को भयमुक्त, सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।

हमारी एडिटोरियल टीम अनुभवी वैदिक एवं तांत्रिक साधकों का एक समर्पित समूह है, जिन्होंने वर्षों तक वेद, तंत्र और प्राचीन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया है। इन ग्रंथों में वर्णित साधनाओं का विधिवत पुरश्चरण कर, व्यावहारिक अनुभव के साथ ज्ञान को आत्मसात किया गया है। Sadhanas.in पर प्रकाशित प्रत्येक लेख और साधना शुद्ध रूप से प्राचीन शास्त्रों एवं प्रमाणिक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है, ताकि साधकों को प्रामाणिक, सुरक्षित और सही मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।

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