Thursday Ke Upay: गुरुवार की शाम करें ये उपाय, धन-सौभाग्य बढ़ेगा, मिलेगी आर्थिक तंगी से स्थायी राहतIt takes 11 minutes... to read this article !

Guruwar Ke Upay In Hindi: गुरुवार की शाम के 5 ज्योतिष उपाय जानें, जिनका उल्लेख शास्त्रों में मिलता है। प्रदोष काल में किए गए ये उपाय विष्णु कृपा, धन-सौभाग्य और सुख-शांति बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।

गुरुवार का दिन क्यों है विशेष?

हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन का संबंध किसी न किसी देवता और ग्रह से बताया गया है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और गुरु ग्रह को समर्पित माना गया है। गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, धन, विवाह, संतान, नैतिकता और सौभाग्य का कारक कहा गया है। यही कारण है कि गुरुवार के दिन किए गए उपाय केवल भौतिक लाभ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जीवन के आध्यात्मिक पक्ष को भी मजबूत करते हैं।

विष्णु पुराण में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि:

“जहां धर्म, सत्य और संयम होता है, वहां भगवान विष्णु का वास होता है।”

गुरुवार का दिन धर्म और संयम से जुड़ा हुआ माना गया है, और इसी कारण इस दिन किए गए उपाय शीघ्र फल देने वाले माने जाते हैं।

प्रदोष काल का ज्योतिषीय और शास्त्रीय महत्व

प्रदोष काल क्या होता है?

सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है। शास्त्रों में यह समय देवताओं की विशेष कृपा का माना गया है।

हालांकि सामान्यतः प्रदोष व्रत शिव जी से जुड़ा होता है, लेकिन गुरुवार के प्रदोष काल में विष्णु पूजन अत्यंत शुभ फलदायक माना गया है।

शास्त्र क्या कहते हैं?

पद्म पुराण के अनुसार:

“प्रदोष समये यः पूजां करोति हरिं नरः।

स लभेत परं पुण्यं सर्वपापैः प्रमुच्यते॥”

अर्थात, जो व्यक्ति प्रदोष काल में भगवान विष्णु की पूजा करता है, वह पुण्य का भागी बनता है और उसके पापों का क्षय होता है।

गुरु ग्रह और गुरुवार का गहरा संबंध

ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को देवगुरु बृहस्पति कहा गया है। यह ग्रह व्यक्ति के जीवन में:

  • विवाह और वैवाहिक सुख

  • आर्थिक स्थिरता

  • सामाजिक मान-सम्मान

  • आध्यात्मिक उन्नति

  • संतान सुख

का प्रतिनिधित्व करता है।

जब कुंडली में गुरु कमजोर होता है, तब व्यक्ति को बार-बार आर्थिक नुकसान, निर्णय में भ्रम, विवाह में देरी और मानसिक अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। ऐसे में गुरुवार के उपाय गुरु को मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं।

उपाय 1: गुरुवार की शाम विष्णु दीपक जलाने का पूर्ण विधान

दीपक का धार्मिक महत्व

दीपक को शास्त्रों में ज्ञान, चेतना और ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक माना गया है। विष्णु पुराण में उल्लेख है कि दीपक जलाने से तमोगुण का नाश होता है।

विधि (Step-by-Step)
  1. गुरुवार को पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनें

  2. सूर्यास्त से ठीक पहले स्नान करें

  3. घर के पूजा स्थान को स्वच्छ करें

  4. गेहूं के आटे से दीपक बनाएं

  5. उसमें शुद्ध देसी घी डालें

  6. प्रदोष काल में भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं

मंत्र

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” – 108 बार

फल
  • मानसिक शांति

  • पारिवारिक स्थिरता

  • आर्थिक रुकावटों में कमी

  • गुरु ग्रह की मजबूती

उपाय 2: तुलसी और लक्ष्मी तत्व का रहस्य

तुलसी को केवल पौधा नहीं बल्कि देवी स्वरूप माना गया है। विष्णु पुराण के अनुसार:

“तुलसी दल मात्रेण जलस्य स्पर्शनेन च।

हरिर्हर्षमवाप्नोति लक्ष्म्या सह निवासतः॥”

अर्थात, तुलसी के स्पर्श मात्र से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों प्रसन्न होते हैं।

गुरुवार की शाम का विशेष उपाय
  • सूर्यास्त से पहले तुलसी के पास दीपक रखें

  • दीपक में घी या तिल का तेल प्रयोग करें

  • तुलसी को जल अर्पित करें (शाम में केवल दीपक, जल नहीं)

लाभ
  • धन आगमन के नए स्रोत

  • घर में सकारात्मक ऊर्जा

  • दरिद्र योग में कमी

उपाय 3: सूर्यास्त समय मंत्र जाप का वैज्ञानिक पक्ष

सूर्यास्त का समय दिन और रात के संधि काल का प्रतीक होता है। योग और आयुर्वेद में इसे ऊर्जा संतुलन का समय कहा गया है।

गुरुवार को विशेष क्यों?

गुरु और सूर्य दोनों को सत्व गुण का प्रतिनिधि माना गया है। इस समय किया गया मंत्र जाप मन को स्थिर करता है।

मंत्र विकल्प
  • गायत्री मंत्र

  • गुरु बीज मंत्र

  • विष्णु गायत्री

प्रभाव
  • आत्मविश्वास में वृद्धि

  • निर्णय क्षमता मजबूत

  • सामाजिक सम्मान में वृद्धि

उपाय 4: गुरुवार को स्वस्तिक और वास्तु शांति

स्वस्तिक को वेदों में मंगल, स्थिरता और शुभता का प्रतीक बताया गया है।

क्यों गुरुवार को?

गुरुवार को गुरु ग्रह सक्रिय होता है, जो वास्तु दोषों को शांत करने में सहायक माना गया है।

विधि
  • सूर्यास्त से पहले

  • मुख्य द्वार पर

  • हल्दी या सिंदूर से

  • स्वस्तिक बनाएं

परिणाम
  • गृह क्लेश में कमी

  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश

  • घर में सौहार्द

उपाय 5: गुरुवार की शाम धन नियम क्यों आवश्यक?

लक्ष्मी सूक्त के अनुसार, संध्या समय लक्ष्मी का भ्रमण काल माना गया है।

क्या न करें?
  • सूर्यास्त के बाद उधार न दें

  • धन खर्च न करें

  • कोई वस्तु दान न करें

क्यों?

यह समय धन स्थायित्व से जुड़ा माना गया है।

गुरुवार व्रत का शास्त्रीय महत्व

गुरुवार व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह गुरु ग्रह को संतुलित करने का शास्त्रसम्मत उपाय माना जाता है। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में गुरुवार व्रत का विस्तार से वर्णन मिलता है।

शास्त्रों के अनुसार गुरुवार व्रत क्यों करें?

“गुरौ पूजिते सर्वं पूजितं भवति ध्रुवम्।”

अर्थात, गुरु की पूजा से जीवन के सभी पक्ष स्वतः संतुलित होने लगते हैं।

गुरु ग्रह यदि कुंडली में शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति को:

  • स्थिर आय

  • उत्तम वैवाहिक जीवन

  • आध्यात्मिक झुकाव

  • समाज में सम्मान

प्राप्त होता है।

गुरुवार व्रत की संपूर्ण विधि (Step-by-Step)

1. व्रत का संकल्प

गुरुवार की सुबह स्नान कर पीले वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु का ध्यान कर संकल्प लें।

2. पूजा सामग्री
  • पीले फूल

  • चने की दाल

  • गुड़

  • हल्दी

  • केले

  • विष्णु या बृहस्पति की प्रतिमा

3. पूजा विधि
  • विष्णु सहस्रनाम या बृहस्पति स्तोत्र का पाठ

  • पीले पुष्प अर्पित करें

  • केले का भोग लगाएं

4. व्रत पारण

संध्या समय कथा सुनकर या पढ़कर फलाहार या पीले भोजन से व्रत खोलें।

गुरुवार व्रत कथा (संक्षिप्त लेकिन प्रामाणिक)

प्राचीन काल में एक निर्धन ब्राह्मण था, जो अत्यंत धर्मनिष्ठ था, लेकिन उसके घर में हमेशा दरिद्रता बनी रहती थी। एक दिन देवगुरु बृहस्पति ने उसे गुरुवार व्रत करने की सलाह दी।

ब्राह्मण ने श्रद्धा से गुरुवार व्रत प्रारंभ किया। कुछ ही समय में:

  • उसका आर्थिक संकट दूर हुआ

  • घर में सुख-शांति आई

  • समाज में सम्मान बढ़ा

यह कथा बताती है कि श्रद्धा और नियम से किया गया गुरुवार व्रत जीवन की दिशा बदल सकता है।

कुंडली अनुसार गुरुवार के उपाय

हर व्यक्ति की जन्मकुंडली अलग होती है। इसलिए गुरुवार के उपाय भी कुंडली के अनुसार अधिक प्रभावी होते हैं।

जब कुंडली में गुरु कमजोर हो

लक्षण:
  • बार-बार धन हानि

  • निर्णय में भ्रम

  • विवाह में देरी

  • गुरु या पिता से मतभेद

उपाय:
  • गुरुवार को पीली दाल का दान

  • विष्णु गायत्री मंत्र का जाप

  • केले के पेड़ की पूजा

गुरु यदि 6, 8 या 12 भाव में हो

यह स्थिति संघर्ष बढ़ाती है।

विशेष उपाय:
  • गुरुवार की शाम आटे का दीपक

  • गुरु बीज मंत्र 108 बार

  • गुरुवार को झूठ और कटु वचन से बचें

गुरु और राहु का संयोग (गुरु चांडाल योग)

यह योग व्यक्ति को भ्रमित निर्णयों की ओर ले जाता है।

शास्त्रीय उपाय:
  • गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम

  • पीले वस्त्रों का नियमित प्रयोग

  • सात गुरुवार तक व्रत

गुरुवार और पीले रंग का रहस्य

पीला रंग गुरु ग्रह का प्रतिनिधि रंग माना जाता है। यह रंग:

  • बुद्धि

  • ज्ञान

  • आशा

  • सकारात्मक सोच

का प्रतीक है।

क्या करें?
  • गुरुवार को पीले वस्त्र

  • पीले फूल

  • पीले फल का सेवन

क्या न करें?
  • काले या गहरे नीले वस्त्र

  • मांसाहार

  • नशा

गुरुवार और मानसिक शांति का संबंध

आधुनिक जीवन में तनाव, भ्रम और अस्थिरता आम समस्या बन चुकी है। ज्योतिष के अनुसार, यह गुरु असंतुलन का संकेत हो सकता है।

गुरुवार के उपाय क्यों काम करते हैं?

गुरु ग्रह मन, विवेक और आत्मा से जुड़ा होता है। गुरुवार के उपाय व्यक्ति को:

  • आंतरिक स्थिरता

  • स्पष्ट सोच

  • धैर्य

प्रदान करते हैं।

गुरुवार की शाम दीपक नियम (गूढ़ तथ्य)

बहुत से लोग दीपक जलाते हैं, लेकिन सही नियम नहीं जानते।

सही दिशा:
  • पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा

सही समय:
  • सूर्यास्त से 15–30 मिनट पहले

सही भाव:
  • बिना जल्दबाजी

  • शांत मन

गलत तरीके से किया गया उपाय फल को कम कर देता है।

FAQ’s

Q1. क्या गुरुवार के उपाय बिना व्रत के किए जा सकते हैं?

हाँ, श्रद्धा के साथ किए गए उपाय व्रत के बिना भी फलदायक माने जाते हैं।

Q2. कितने गुरुवार तक उपाय करें?

कम से कम 5 या 7 गुरुवार लगातार करें।

Q3. क्या महिलाएं गुरुवार व्रत कर सकती हैं?

हाँ, शास्त्रों में कोई निषेध नहीं है।

Q4. गुरुवार को दान क्या करें?

चना दाल, पीले वस्त्र, हल्दी, केले श्रेष्ठ माने गए हैं।

महत्वपूर्ण सावधानियां

  • गुरुवार को झूठ, छल और अहंकार से बचें

  • गुरु, पिता और शिक्षक का सम्मान करें

  • भोजन सात्विक रखें

उपाय तभी फल देते हैं जब आचरण भी गुरु तत्व के अनुरूप हो।

गुरुवार केवल एक दिन नहीं, बल्कि धर्म, विवेक और स्थिरता का प्रतीक है। गुरुवार की शाम किए गए उपाय व्यक्ति को बाहरी ही नहीं, आंतरिक समृद्धि भी प्रदान करते हैं।

विष्णु कृपा का अर्थ केवल धन नहीं, बल्कि:

  • संतुलित जीवन

  • शांत मन

  • सही निर्णय

भी है।

आधुनिक जीवन में गुरुवार के उपाय क्यों अधिक प्रासंगिक हैं

आज का मनुष्य पहले से अधिक सुविधाओं से घिरा है, फिर भी मानसिक अस्थिरता, निर्णयहीनता, आर्थिक असुरक्षा और रिश्तों में उलझाव बढ़ता जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे गुरु तत्व की कमजोरी से जोड़ा गया है।

गुरु ग्रह केवल धन या विवाह तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति के जीवन में:

  • नैतिक दृष्टि

  • सही-गलत की समझ

  • धैर्य और सहनशीलता

  • आध्यात्मिक संतुलन

का प्रतिनिधित्व करता है। जब यह तत्व कमजोर होता है, तब व्यक्ति को बार-बार सही निर्णय लेने में कठिनाई आती है, चाहे वह पढ़ा-लिखा और सक्षम ही क्यों न हो।

गुरुवार के उपाय इसलिए प्रभावी माने जाते हैं क्योंकि वे सीधे गुरु तत्व को सक्रिय करते हैं।

गुरुवार और कर्म सिद्धांत का गूढ़ संबंध

शास्त्रों में कहा गया है कि:

“गुरु कर्मफल प्रदाता नहीं, मार्गदर्शक होता है।”

अर्थात, गुरु ग्रह स्वयं फल नहीं देता, बल्कि व्यक्ति को सही दिशा दिखाता है। गुरुवार के उपाय व्यक्ति के कर्मों को शुद्ध करने में सहायक माने जाते हैं।

जब व्यक्ति:

  • सत्य बोलता है

  • संयम रखता है

  • अहंकार से बचता है

  • ज्ञान और धर्म का सम्मान करता है

तब गुरु तत्व स्वतः मजबूत होने लगता है। गुरुवार के उपाय इस प्रक्रिया को गति देते हैं।

गुरुवार के उपाय और मनोवैज्ञानिक प्रभाव

आधुनिक मनोविज्ञान भी यह मानता है कि किसी निश्चित दिन, निश्चित समय पर किए गए नियमित कर्म मन में स्थिरता और अनुशासन लाते हैं।

गुरुवार के उपायों से:

  • एक नियमित आध्यात्मिक दिनचर्या बनती है

  • मन को विश्राम और दिशा मिलती है

  • व्यक्ति के भीतर आशा का संचार होता है

यही कारण है कि इन उपायों का प्रभाव केवल आस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यवहारिक जीवन में भी दिखने लगता है।

गुरुवार के उपाय किन लोगों को अवश्य करने चाहिए

निम्न परिस्थितियों में गुरुवार के उपाय विशेष रूप से उपयोगी माने जाते हैं:

  • जिनके विवाह में देरी हो रही हो

  • जो आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहे हों

  • जिनका मन हमेशा भ्रमित रहता हो

  • जिन्हें बार-बार गलत निर्णयों का पछतावा होता हो

  • जिनका गुरु ग्रह कमजोर या पीड़ित हो

हालांकि, इन उपायों को किसी समस्या तक सीमित नहीं समझना चाहिए। इन्हें जीवन संतुलन के साधन के रूप में देखना अधिक उचित है।

गुरुवार और दान का शास्त्रीय विज्ञान

दान केवल देने की क्रिया नहीं है। शास्त्रों में दान को अहंकार विसर्जन का माध्यम बताया गया है।

गुरुवार को किए गए दान का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि यह गुरु तत्व से जुड़ा होता है।

श्रेष्ठ दान वस्तुएं
  • चने की दाल

  • पीले वस्त्र

  • हल्दी

  • पुस्तकें

  • भोजन

दान करते समय यह भाव होना चाहिए कि:

“मैं कुछ खो नहीं रहा, बल्कि अपने भीतर के लोभ को छोड़ रहा हूँ।”

यही भाव दान को फलदायक बनाता है।

गुरुवार को क्या न करें (शास्त्रीय निषेध)

बहुत से लोग उपाय तो करते हैं, लेकिन साथ ही ऐसे कर्म भी करते हैं जो गुरु तत्व को कमजोर कर देते हैं।

गुरुवार को विशेष रूप से इन बातों से बचना चाहिए:

  • झूठ बोलना

  • किसी गुरु, शिक्षक या बड़े का अपमान

  • नशा और तामसिक भोजन

  • क्रोध और कटु वाणी

  • बिना आवश्यकता उधार देना या लेना

ये सभी कर्म गुरु ग्रह के स्वभाव के विपरीत माने गए हैं।

गुरुवार और परिवारिक जीवन

ज्योतिष के अनुसार, गुरु ग्रह परिवार में:

  • समझदारी

  • सहनशीलता

  • मार्गदर्शन

का प्रतिनिधित्व करता है।

जब परिवार में बार-बार विवाद होते हैं, तो अक्सर गुरु तत्व कमजोर पाया जाता है। गुरुवार के उपाय घर के वातावरण को शांत और संतुलित बनाने में सहायक माने जाते हैं।

विशेष रूप से:

  • गुरुवार की शाम दीपक

  • तुलसी पूजन

  • सामूहिक मंत्र जाप

परिवारिक ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में ले जाते हैं।

गुरुवार के उपाय और आध्यात्मिक उन्नति

विष्णु उपासना केवल सांसारिक लाभ के लिए नहीं है। शास्त्रों में विष्णु को पालनकर्ता और संतुलनकर्ता कहा गया है।

गुरुवार की साधना व्यक्ति को:

  • धैर्य सिखाती है

  • आसक्ति को नियंत्रित करती है

  • कर्म और फल के बीच संतुलन सिखाती है

यही कारण है कि गुरुवार के उपाय लंबे समय में व्यक्ति के स्वभाव को भी परिष्कृत करते हैं।

निष्कर्ष

गुरुवार की शाम किए गए उपाय कोई चमत्कारी टोटके नहीं हैं, बल्कि शास्त्रसम्मत जीवन-अनुशासन हैं। इनका उद्देश्य व्यक्ति को बाहरी समृद्धि के साथ-साथ आंतरिक स्थिरता प्रदान करना है।

विष्णु कृपा का अर्थ केवल धन या सुख नहीं, बल्कि:

  • सही समय पर सही निर्णय

  • संतुलित दृष्टिकोण

  • शांत और स्पष्ट मन

भी है।

जो व्यक्ति गुरुवार को श्रद्धा, संयम और नियम के साथ अपनाता है, उसके जीवन में धीरे-धीरे स्थिरता स्वतः आने लगती है।

Disclaimer

यह लेख धार्मिक ग्रंथों, ज्योतिषीय परंपराओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी उपाय को अपनाने से पूर्व व्यक्तिगत विवेक और परिस्थिति का ध्यान रखें। यह सामग्री किसी प्रकार के चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय परामर्श का विकल्प नहीं है।

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