Vijaya Ekadashi 2026 व्रत का रहस्य: क्यों श्रीराम ने लंका विजय से पहले रखा था यह व्रत जो शत्रुओं पर विजय दिलाता हैIt takes 7 minutes... to read this article !

Vijaya Ekadashi Vrat 2026: भगवान राम की कथा, पद्म पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित महत्व, तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि, ज्योतिषीय लाभ और जीवन में विजय प्राप्त करने के उपाय विस्तार से जानें।

विजया एकादशी: परिचय और महत्व

विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है। यह व्रत विजय, सफलता और शत्रु बाधा पर विजय का प्रतीक है।

व्रत करने वाले व्यक्ति को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों प्रकार के लाभ मिलते हैं।

पद्म पुराण और स्कंद पुराण में इसकी महिमा और कथा विस्तार से वर्णित है।

शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत का पालन करने वाला व्यक्ति जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों, शत्रुओं और मानसिक अस्थिरता से सुरक्षित रहता है।

वर्ष 2026 में विजया एकादशी 13 फरवरी, शुक्रवार को रखी जाएगी।

भगवान राम और विजया एकादशी की कथा

रामायण काल में जब श्रीराम लंका विजय के लिए समुद्र तट पर पहुंचे, तब सामने विशाल और भयानक समुद्र था। समुद्र में अनेक जलजीव और खतरनाक परिस्थितियां थीं।

कथा विस्तार:

श्रीराम ने लक्ष्मण से मार्गदर्शन माँगा, तो लक्ष्मण ने सुझाव दिया कि पास ही मुनि बकदाल्भ्य का आश्रम है। वहाँ जाकर मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

श्रीराम मुनि के आश्रम पहुँचे। मुनि ने श्रीराम को पहचानकर स्वागत किया और बताया कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करने से विजय सुनिश्चित होगी।

मुनि ने कहा:

“श्रीराम, यदि आप इस व्रत का पालन विधिपूर्वक करेंगे और भगवान विष्णु की पूजा करेंगे, तो समुद्र पार करना और लंका विजय संभव होगी।”

श्रीराम ने विधिपूर्वक व्रत किया।

व्रत का प्रभाव:

  • समुद्र पार करने का मार्ग प्रशस्त हुआ

  • वानर सेना को अद्भुत शक्ति मिली

  • रावण वध संभव हुआ

  • माता सीता की सुरक्षित वापसी हुई

इस कथा से सिद्ध होता है कि विजया एकादशी का व्रत शत्रु पर विजय और सफलता के लिए सर्वोत्तम साधन है।

विजया एकादशी का धार्मिक महत्व

व्रत करने से:

  • शत्रु बाधा समाप्त होती है

  • मानसिक भय और संशय दूर होते हैं

  • पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं

  • पुण्य और समृद्धि प्राप्त होती है

  • कार्यों में सफलता सुनिश्चित होती है

विशेष लाभ उन लोगों को होता है जो जीवन में बाधाओं, शत्रुता या असफलता का सामना कर रहे हैं।

पद्म पुराण में उल्लेख:

जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक विजया एकादशी का व्रत करता है, उसे राजयोग समान फल की प्राप्ति होती है।

स्कंद पुराण में उल्लेख:

विजया एकादशी का व्रत शत्रु बाधा और मानसिक तनाव से मुक्ति प्रदान करता है।

विजया एकादशी 2026 की तिथि और मुहूर्त (Vijaya Ekadashi 2026 Date)

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, सुबह 11:32

  • एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 1:30

  • व्रत की तिथि: 13 फरवरी 2026

  • अभिजीत मुहूर्त: 12:13 से 12:58

  • पारण समय: 14 फरवरी 2026, सुबह 7:00 से 9:14

विजया एकादशी व्रत विधि

  1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें

  2. भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें

  3. कलश स्थापना कर गंगाजल, अक्षत और चंदन से पूजा आरंभ करें

  4. पीले पुष्प, तुलसी दल, चने की दाल, मिठाई अर्पित करें

  5. विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें

  6. दिनभर सात्त्विक आहार या फलाहार रखें

  7. संध्या समय दीपक जलाकर कथा श्रवण करें

  8. द्वादशी तिथि में पारण करें

विजया एकादशी का ज्योतिषीय महत्व

  • कालसर्प दोष, ग्रह बाधा और मानसिक अशांति से मुक्ति

  • साहस, आत्मविश्वास और विजय योग में वृद्धि

  • मेष, सिंह, वृश्चिक और मकर राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी

विजया एकादशी और दान-पुण्य

  • इस दिन अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है

  • भिक्षुओं और गरीबों को दान करने से व्रत की महिमा बढ़ती है

व्रत के प्रकार और साधनाएं

  1. पूर्ण व्रत: फलाहार और जल

  2. अर्ध व्रत: हल्का भोजन और फल

  3. साधक व्रत: केवल फलाहार और जप

विजया एकादशी के मंत्र और साधना

  • विष्णु सहस्रनाम जप

  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र

  • ध्यान और साधना से मनोबल और निर्णय क्षमता में वृद्धि

विजया एकादशी कथा विस्तार (Ramayana आधारित)

समुद्र पार और युद्ध का विस्तार:

  • श्रीराम ने वानर सेना को एकत्र किया

  • समुद्र पार करने के लिए पुल बनाने की योजना बनाई

  • वानर सेना ने पृथ्वी से पत्थर और लकड़ी इकट्ठा की

  • समुद्र पर रामसेतु का निर्माण हुआ

  • रावण ने सेना भेजी पर श्रीराम और वानर सेना ने रक्षकों को पराजित किया

  • विजया एकादशी व्रत के प्रभाव से श्रीराम को अपार शक्ति और साहस प्राप्त हुआ

  • रावण वध और माता सीता की रिहाई सफल हुई

(यह कथा लगभग 1500+ शब्द में विस्तार से लिखी जा सकती है, संवाद और घटनाओं सहित)

विजया एकादशी का आधुनिक जीवन में महत्व

  • नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा में सफलता

  • प्रतियोगिता और शत्रु बाधा से विजय

  • मानसिक शक्ति, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि

  • जीवन में बाधाओं और तनाव से मुक्ति

विजया एकादशी 2026: Ramayana कथा विस्तार और युद्ध विवरण

जब श्रीराम और वानर सेना समुद्र तट पर पहुँची, तब सभी वानर अत्यंत चिंतित थे। रावण की सेना और विशाल समुद्र की बाधा देख सभी ने कहा:

“प्रभु, समुद्र इतना विशाल और खतरनाक है, इसे पार करना असंभव है।”

श्रीराम ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा:

“भय मत करो। जिस तरह धर्म की रक्षा के लिए हम खड़े हैं, उसी प्रकार विजय निश्चित है। हमें उचित मार्ग और साधना की आवश्यकता है।”

तत्पश्चात उन्होंने मुनि बकदाल्भ्य के आश्रम का मार्ग पकड़ा। मुनि ने कहा:

“श्रीराम, यदि आप फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत विधिपूर्वक रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, तो समुद्र पार करना संभव होगा।”

श्रीराम ने पूरी श्रद्धा के साथ व्रत किया और विष्णु पूजा की। व्रत के प्रभाव से वानर सेना को अपार शक्ति मिली और रामसेतु का निर्माण शुरू हुआ।

रामसेतु निर्माण और युद्ध

वानर सेना ने पत्थरों और लकड़ियों का पुल तैयार किया। समुद्र के राक्षस इसे तोड़ने आए, लेकिन श्रीराम और उनकी सेना ने उनका सामना वीरता से किया।

रावण ने स्वयं युद्ध का नेतृत्व किया।

संवाद उदाहरण:

रावण ने कहा:

“अरे वानरों, इस पुल को नष्ट करो और राम को रोक दो!”

हनुमान ने उत्तर दिया:

“हम धर्म की सेना हैं, विजय राम की होगी, तुम व्यर्थ प्रयास कर रहे हो।”

रावण की सेना के कई योद्धा मारे गए। अंत में श्रीराम ने रावण का वध किया और माता सीता को सुरक्षित लिया

इस पूरी कथा में विजया एकादशी के व्रत का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसने श्रीराम और वानर सेना को अद्भुत शक्ति प्रदान की।

विजया एकादशी में दान, मंत्र और साधना का महत्व

दान का महत्व

व्रत के दिन दान करने से पुण्य में वृद्धि होती है। विशेष रूप से:

  • अन्नदान: गरीब और भूखे लोगों को अनाज देने से धन और सुख की वृद्धि होती है।

  • वस्त्र दान: गरीबों को वस्त्र देने से जीवन में सम्मान और भक्ति की वृद्धि होती है।

  • धन दान: मंदिरों और धार्मिक कार्यों में धन देने से शत्रु बाधा दूर होती है।

शास्त्रीय उल्लेख:

पद्म पुराण में कहा गया है कि विजया एकादशी के दिन दान करने वाले का सभी पाप नष्ट हो जाता है और सभी कार्य सफल होते हैं।

मंत्र और साधना

विजया एकादशी पर मंत्र जाप अत्यंत फलदायी होता है।

  • मुख्य मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी अत्यंत शुभ है।

साधना का लाभ:

  • मनोबल और साहस में वृद्धि

  • मानसिक तनाव और भय से मुक्ति

  • कर्मों में सफलता और शत्रु बाधा पर विजय

  • आध्यात्मिक विकास और मोक्ष की प्राप्ति

व्रत और साधना का नियम
  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और शुद्ध वस्त्र पहनना

  • दिनभर सात्त्विक आहार या फलाहार

  • रात में दीपक जलाकर कथा श्रवण और भजन

  • द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण

साधना के अतिरिक्त लाभ:

  • इच्छाओं की पूर्ति

  • मनोकामनाओं की सिद्धि

  • जीवन में स्थायित्व और सफलता

आधुनिक जीवन में उपयोग

आज के समय में विजया एकादशी व्रत:

  • प्रतियोगिता में विजय पाने के लिए

  • व्यापारिक और पेशेवर मामलों में सफलता

  • मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए

  • कोर्ट, नौकरी और परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए

यह व्रत न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि व्यवहारिक जीवन में भी विजय और सफलता का उपाय है।

निष्कर्ष

विजया एकादशी 2026 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में विजय और सफलता पाने का शास्त्रीय मार्ग है। भगवान राम की कथा इस व्रत के महत्व को और स्पष्ट करती है। श्रद्धा, नियम और संयम के साथ व्रत करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव और विजय सुनिश्चित होती है।

FAQ (Vijaya Ekadashi 2026)

विजया एकादशी 2026 कब है?

13 फरवरी, शुक्रवार

भगवान राम ने क्यों किया था यह व्रत?

लंका विजय से पहले समुद्र पार करने और रावण पर विजय के लिए

व्रत विधि क्या है?

सुबह स्नान, पीले फूल, तुलसी दल, चने की दाल अर्पित करें, विष्णु सहस्रनाम जप

व्रत का ज्योतिषीय महत्व क्या है?

कालसर्प दोष, ग्रह बाधा और मानसिक अशांति से मुक्ति

पारण कब करना चाहिए?

द्वादशी तिथि, 14 फरवरी 2026, सुबह 7:00 से 9:14

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक ग्रंथों, शास्त्रों और मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी विशेष निर्णय से पहले विषय विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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