Mahashivratri 2026 Aaj 15 February 2026 शाम 5:04 बजे से, जानें सही मुहूर्त, पूर्ण पूजा व रुद्राभिषेक विधि (शास्त्रसम्मत क्रम)It takes 10 minutes... to read this article !

What is the exact Nishita Kaal for Mahashivratri 2026? महाशिवरात्रि 2026 कब है? जानिए सही तिथि, निशीथ काल का शुभ मुहूर्त, जलाभिषेक का समय, संपूर्ण व्रत नियम, चार प्रहर पूजा विधि, शिवलिंग अभिषेक प्रक्रिया और प्रभावशाली मंत्र। इस विस्तृत आध्यात्मिक मार्गदर्शिका में शिव पुराण अनुसार पूजा करने की सही विधि और व्रत पारण का समय विस्तार से समझें।

महाशिवरात्रि 2026 – शिव कृपा पाने के लिए क्या करें और क्या न करें

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और शक्तिशाली पर्वों में से एक है। यह दिवस भगवान शिव की अनंत उपासना, ध्यान, व्रत, जप और आत्म-अनुशासन का प्रतिनिधित्व करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन शिव की अनुग्रह शक्ति विशेष रूप से प्रबल होती है और भक्त को आत्म-शुद्धि, मानसिक समता एवं दिव्य अनुभूति प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि इस पावन रात्रि में शिव-शक्ति का ऐक्य होता है, जो इतिहास और पुराणों में भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन के रूप में वर्णित है।

महाशिवरात्रि 2026 – तिथि, दिन और समय (Mahashivratri 2026 date and time)

दिनांक: 15–16 फरवरी 2026

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी शाम 5:04 बजे

चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी शाम 5:34 बजे

विशेष पूजा समय (निशीथ काल) Nishita Kaal Timing 2026: लगभग 12:37 AM से 1:32 AM तक – यह समय भगवान शिव की पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

महाशिवरात्रि व्रत कैसे रखें? चार प्रहर पूजा और पारण समय जानिए

महाशिवरात्रि व्रत केवल उपवास ही नहीं, बल्कि आत्म-नियमन, ध्यान और चेतना का विस्तार है। यह व्रत ब्रह्मचर्य, संयम और दिव्य समर्पण का प्रतिनिधि माना जाता है। शिव पुराण में वर्णित है कि इस दिन शिव की उपासना न केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति करती है, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा की शुद्धि का मार्ग भी है। शिवलिंग पर रात्रि भर जलाभिषेक, मंत्र जप और ध्यान करने से व्यक्ति के भीतर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।

(Mahashivratri Puja Vidhi 2026) पूजा-विधि (Step by Step)

1. पवित्रता और प्रारम्भ
  • प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्वच्छ स्नान करें।

  • साफ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।

  • मन को शांत कर व्रत का संकल्प लें।

2. शिवलिंग की स्थापना
  • यदि घर में शिवलिंग है तो उसे साफ स्थान पर स्थापित करें।

  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से धीरे-धीरे अभिषेक करें।

  • पंचामृत के पश्चात शुद्ध जल से भी अभिषेक करना चाहिए।

  • शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत शुभ माना गया है।

3. समर्पण सामग्री
  • **बेलपत्र (सबसे प्रिय)

  • धतूरा तथा सफेद पुष्प

  • गुड़, नारियल, भांग (धार्मिक परंपरा अनुसार)

  • धूप-दीप, अगरबत्ती

  • फल और प्रसाद**

4. मंत्रजप और आराधना
  • सबसे प्रभावशाली मंत्र है – “ॐ नमः शिवाय”

  • इसके साथ-साथ “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…” (महामृत्युंजय मंत्र) का जाप भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

5. रात्रि जागरण
  • रात्रि के प्रथम प्रहर से चौथे प्रहर तक शिव की कथा का पाठ, जप और ध्यान करना चाहिए।

  • रात्रि जागरण का लक्ष्य आत्म-चिंतन, ब्रह्म चेतना और मनोबल का उत्थान है।

शुभ मुहूर्त और पूजा के पांच प्रमुख प्रहर (Mahashivratri 4 Prahar Puja Muhurta)

प्रहर समय (लगभग)
प्रथम प्रहर शाम 6:11 बजे से रात 9:38 बजे तक
द्वितीय प्रहर रात 9:38 बजे से 1:04 बजे तक
निशीथ काल लगभग 12:37 AM से 1:32 AM (विशेष पूजा काल)
तृतीय प्रहर लगभग 1:04 AM से 4:31 AM तक
चौथा प्रहर लगभग 4:31 AM से 7:57 AM तक

शास्त्रों में कहा गया है कि विशेष रूप से निशीथ काल में भगवान शिव की उपासना अत्यंत फलदायी होती है क्योंकि यह समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा के उच्चतम स्तर से जुड़ा हुआ माना जाता है।

शिव मंत्र सूची (Shiva Mantra List)

Best mantra to chant on Mahashivratri: शिव-साधना में मंत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि चेतना को जागृत करने वाले बीज हैं। शिव पुराण तथा यजुर्वेद में शिव-उपासना के अनेक मंत्रों का उल्लेख मिलता है। साधक अपनी क्षमता, समय और संकल्प के अनुसार इनमें से किसी एक या अधिक मंत्रों का जप कर सकता है।

1. पंचाक्षरी मंत्र

“ॐ नमः शिवाय”

महत्त्व: यह शिव-भक्ति का मूल मंत्र है। पंचतत्त्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का संतुलन स्थापित करता है।

जप संख्या: 108, 1008 या निरंतर मानसिक जप।

लाभ: मन की शांति, भय का नाश, आध्यात्मिक स्थिरता।

2. महामृत्युंजय मंत्र

“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”

स्रोत: यजुर्वेद।

महत्त्व: आरोग्य, आयु-वृद्धि और संकट निवारण हेतु श्रेष्ठ।

जप विधि: रुद्राक्ष माला से 108 बार।

विशेष: रोग, शोक या ग्रहबाधा में अत्यंत प्रभावी माना गया है।

3. शिव गायत्री मंत्र

“ॐ तत्पुरुषाय विद्महे

महादेवाय धीमहि

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥”

महत्त्व: बुद्धि को दिव्यता की ओर प्रेरित करता है।

लाभ: आध्यात्मिक उन्नति और ध्यान में एकाग्रता।

4. रुद्र मंत्र (नमकम् अंश)

“ॐ नमो भगवते रुद्राय”

यह मंत्र रुद्र के उग्र रूप को शांति में परिवर्तित करने की साधना है। रुद्राभिषेक में इसका विशेष स्थान है।

5. शिव ध्यान मंत्र

“करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा…”

यह क्षमायाचना मंत्र है, जिससे साधक अपने दोषों का परित्याग करता है।

6. बीज मंत्र

“हौं”

यह शिव का बीजाक्षर है, जो आंतरिक ऊर्जा जागरण से संबंधित है। इसे योग्य गुरु से दीक्षा लेकर ही साधना में अपनाना श्रेष्ठ है।

रुद्राभिषेक विधि (शास्त्रसम्मत क्रम) (How to perform Rudrabhishek at home step by step)

रुद्राभिषेक शिव-पूजन का अत्यंत प्रभावशाली अनुष्ठान है। इसका उल्लेख शिव पुराण तथा यजुर्वेद के श्री रुद्रम में मिलता है।

1. पूर्व तैयारी
  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।

  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।

  • संकल्प लें (अपना नाम, गोत्र, उद्देश्य उच्चारित करें)।

2. पूजन सामग्री
  • शिवलिंग

  • गंगाजल या शुद्ध जल

  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)

  • बेलपत्र (तीन पत्तों वाला)

  • सफेद पुष्प

  • धूप, दीप

  • चंदन, अक्षत

  • रुद्राक्ष माला

3. अभिषेक क्रम
(1) जलाभिषेक

“ॐ नमः शिवाय” का जप करते हुए शुद्ध जल अर्पित करें।

(2) पंचामृत अभिषेक

दूध → दही → घी → शहद → शक्कर क्रम से अर्पित करें।

प्रत्येक अर्पण के समय महामृत्युंजय मंत्र या रुद्र मंत्र का जप करें।

(3) पुनः शुद्ध जल स्नान

पंचामृत के बाद स्वच्छ जल से स्नान कराएं।

(4) श्रृंगार

चंदन, बेलपत्र, पुष्प अर्पित करें।

धूप-दीप दिखाएं।

4. रुद्र पाठ

यदि संभव हो तो “श्री रुद्रम” (नमकम्-चमकम्) का पाठ करें।

अन्यथा कम से कम 108 बार “ॐ नमः शिवाय” जप करें।

5. आरती और प्रार्थना

शिव आरती करें और अंत में क्षमायाचना प्रार्थना अवश्य करें।

साधना के बाद प्रसाद वितरित करें।

रुद्राभिषेक के आध्यात्मिक लाभ
  • नकारात्मक ऊर्जा का शमन

  • ग्रहदोष शांति

  • मानसिक तनाव में कमी

  • आत्मबल और निर्णय क्षमता में वृद्धि

  • पारिवारिक सौहार्द

विशेष सावधानियाँ
  • बेलपत्र उल्टा न चढ़ाएं।

  • केतकी पुष्प अर्पित न करें (शास्त्रीय निषेध)।

  • अभिषेक करते समय मन शांत और पवित्र रखें।

संपूर्ण श्री रुद्रम पाठ क्रम (नमकम्–चमकम्)
(A) पूर्वाङ्ग (आरंभिक तैयारी)
  1. आचमन, प्राणायाम, शुद्धि।

  2. गणेश ध्यान व गुरुवंदना।

  3. संकल्प (नाम, गोत्र, तिथि, उद्देश्य)।

  4. शिव ध्यान मंत्र से आवाहन।

(B) नमकम् (११ अनुवाक)
  • “नमस्ते रुद्र मन्यव…” से प्रारंभ।

  • 11 अनुवाक क्रमशः उच्चारित करें।

  • प्रत्येक अनुवाक के अंत में “नमः” भावपूर्वक अर्पित करें।

  • अभिषेक करते हुए जल/पंचामृत अर्पण किया जा सकता है।

(C) चमकम् (११ अनुवाक)
  • “अग्नाविष्णू सजोष्टसा…” से प्रारंभ।

  • 11 अनुवाकों में “च मे” की कामना-रूप प्रार्थना आती है।

  • अंत में शांति-पाठ।

(D) समापन
  • महामृत्युंजय जप (108 बार)।

  • शिव आरती, क्षमायाचना, प्रसाद वितरण।

नोट: यदि पूर्ण पाठ संभव न हो, तो केवल नमकम् के 11 अनुवाक या कम से कम “ॐ नमो भगवते रुद्राय” का 108 जप करें।

108 शिव नामावली (संक्षिप्त, जपयोग्य सूची)

  1. ॐ शिवाय नमः

  2. ॐ महेश्वराय नमः

  3. ॐ शम्भवे नमः

  4. ॐ पिनाकिने नमः

  5. ॐ शशिशेखराय नमः

  6. ॐ वामदेवाय नमः

  7. ॐ विरूपाक्षाय नमः

  8. ॐ कपर्दिने नमः

  9. ॐ नीललोहिताय नमः

  10. ॐ शंकराय नमः

  11. ॐ शूलपाणये नमः

  12. ॐ खट्वाङ्गिने नमः

  13. ॐ विष्णुवल्लभाय नमः

  14. ॐ अम्बिकानाथाय नमः

  15. ॐ श्रीकण्ठाय नमः

  16. ॐ भक्तवत्सलाय नमः

  17. ॐ भवाय नमः

  18. ॐ शर्वाय नमः

  19. ॐ त्रिलोकेशाय नमः

  20. ॐ शितिकण्ठाय नमः

  21. ॐ शिवप्रियाय नमः

  22. ॐ उग्राय नमः

  23. ॐ कपालीने नमः

  24. ॐ कामारये नमः

  25. ॐ अन्धकासुरसूदनाय नमः

  26. ॐ गङ्गाधराय नमः

  27. ॐ ललाटाक्षाय नमः

  28. ॐ कालकालाय नमः

  29. ॐ कृपानिधये नमः

  30. ॐ भीमाय नमः

  31. ॐ परशुहस्ताय नमः

  32. ॐ मृगपाणये नमः

  33. ॐ जटाधराय नमः

  34. ॐ कैलासवासिने नमः

  35. ॐ कवचिने नमः

  36. ॐ कठोराय नमः

  37. ॐ त्रिपुरान्तकाय नमः

  38. ॐ वृषाङ्काय नमः

  39. ॐ वृषभारूढाय नमः

  40. ॐ भस्मोद्धूलितविग्रहाय नमः

  41. ॐ सामप्रियाय नमः

  42. ॐ सर्वमयाय नमः

  43. ॐ त्रयीमूर्तये नमः

  44. ॐ अनीश्वराय नमः

  45. ॐ सर्वज्ञाय नमः

  46. ॐ परमात्मने नमः

  47. ॐ सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः

  48. ॐ हविषे नमः

  49. ॐ यज्ञमयाय नमः

  50. ॐ सोमाय नमः

  51. ॐ पंचवक्त्राय नमः

  52. ॐ सदाशिवाय नमः

  53. ॐ विश्वेश्वराय नमः

  54. ॐ वीरभद्राय नमः

  55. ॐ गणनाथाय नमः

  56. ॐ प्रजापतये नमः

  57. ॐ हिरण्यरेतसे नमः

  58. ॐ दुर्धर्षाय नमः

  59. ॐ गिरिशाय नमः

  60. ॐ अनघाय नमः

  61. ॐ भुजंगभूषणाय नमः

  62. ॐ गिरिधन्वने नमः

  63. ॐ गिरिप्रियाय नमः

  64. ॐ कृत्तिवाससे नमः

  65. ॐ पुरारातये नमः

  66. ॐ भगवान्ते नमः

  67. ॐ प्रमथाधिपाय नमः

  68. ॐ मृत्युञ्जयाय नमः

  69. ॐ सूक्ष्मतनवे नमः

  70. ॐ जगद्व्यापिने नमः

  71. ॐ जगद्गुरवे नमः

  72. ॐ व्योमकेशाय नमः

  73. ॐ महासेनजनकाय नमः

  74. ॐ चारुविक्रमाय नमः

  75. ॐ रुद्राय नमः

  76. ॐ भूतपतये नमः

  77. ॐ स्थाणवे नमः

  78. ॐ अहिर्बुध्न्याय नमः

  79. ॐ दिगम्बराय नमः

  80. ॐ अष्टमूर्तये नमः

  81. ॐ अनेकात्मने नमः

  82. ॐ सात्त्विकाय नमः

  83. ॐ शुद्धविग्रहाय नमः

  84. ॐ शाश्वताय नमः

  85. ॐ खण्डपरशवे नमः

  86. ॐ अजाय नमः

  87. ॐ पाशविमोचकाय नमः

  88. ॐ मृडाय नमः

  89. ॐ पशुपतये नमः

  90. ॐ देवदेवाय नमः

  91. ॐ महादेवाय नमः

  92. ॐ अव्ययाय नमः

  93. ॐ हरये नमः

  94. ॐ पूषदन्तभिदे नमः

  95. ॐ दक्षाध्वरहराय नमः

  96. ॐ भगनेत्रभिदे नमः

  97. ॐ अव्यक्ताय नमः

  98. ॐ सहस्राक्षाय नमः

  99. ॐ सहस्रपदे नमः

  100. ॐ अपवर्गप्रदाय नमः

  101. ॐ अनन्ताय नमः

  102. ॐ तारकाय नमः

  103. ॐ परमेश्वराय नमः

  104. ॐ ईशानाय नमः

  105. ॐ नटराजाय नमः

  106. ॐ त्र्यम्बकाय नमः

  107. ॐ ओंकाररूपाय नमः

  108. ॐ शिवशक्त्यात्मकाय नमः

(जप विधि: प्रत्येक नाम पर अक्षत या पुष्प अर्पित करें।)

महाशिवरात्रि विशेष रुद्राभिषेक संकल्प मंत्र

संकल्प-पाठ (उदाहरण) Mahashivratri sankalp mantra in Sanskrit :

“मम उपात्त समस्त दुरितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वर प्रीत्यर्थं, फाल्गुन मासे, कृष्ण पक्षे, चतुर्दश्यां, महाशिवरात्रि पुण्यकाले, (अपना नाम, गोत्र) अहं रुद्राभिषेकं करिष्ये। मम परिवारस्य आयुरारोग्य-ऐश्वर्य-विद्या-विवेक-भक्ति-सिद्ध्यर्थं, सर्वदोष-निवारणार्थं, मोक्षप्राप्त्यर्थं च।”

इसके बाद “ॐ नमो भगवते रुद्राय” कहते हुए अभिषेक प्रारंभ करें।

निर्देश
  • उच्चारण शुद्ध रखने का प्रयास करें; संदेह हो तो आचार्य से सीखें।

  • अभिषेक के समय मन स्थिर और भाव निर्मल रखें।

  • जप की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है आंतरिक समर्पण।

महाशिवरात्रि व्रत का पारण और नियम (Mahashivratri 2026 fasting method for beginners)

  • व्रत का पारण 16 फरवरी की सुबह 7:57 AM से 1:04 PM के बीच किया जाना श्रेष्ठ माना जाता है।

  • व्रत के दौरान संयम, सत्य, और ध्यान पर विशेष ध्यान दें।

  • व्रत के साथ कथा-श्रवण, मंत्रजप और ध्यान का समायोजन करना शुभ फलक दे सकता है।

आध्यात्मिक संदेश – शिवलिंग का अर्थ (Scientific significance of Shivling worship)

शिवलिंग केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि अस्तित्व का प्रतीक है – यह ब्रह्मांडीय चेतना, अनंत ऊर्जा और निराकार ईश्वर का चिह्न है। शिवलिंग के प्रति भक्ति, समर्पण और ध्यान का अर्थ है अपने भीतर की अनंत चेतना से संपर्क स्थापित करना। शिव पूजा केवल कर्मकांड नहीं बल्कि आत्म-अनुभव है।

अंतिम विचार

महाशिवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं, यह आध्यात्मिक जागृति का अवसर है। इस पावन रात्रि में शिव की उपासना, मंत्र जप, ध्यान और शुद्ध व्रत से न केवल सांसारिक फलों की प्राप्ति होती है बल्कि आत्मिक शांति, मानसिक उत्कर्ष और दिव्य जीवनशक्ति का अनुभव संभव होता है।

शिव की आराधना का सार यह है – मन को निर्मल करो, चेतना को एकाग्र करो, और आत्मा में शिव की प्रीति जागृत करो।

हर हर महादेव!

FAQs (When is Mahashivratri 2026?)

Q1. महाशिवरात्रि 2026 कब है?

महाशिवरात्रि 2026 फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को 15–16 फरवरी के बीच मनाई जाएगी।

Q2. महाशिवरात्रि 2026 में निशीथ काल कब है?

लगभग मध्य रात्रि 12:37 AM से 1:32 AM तक निशीथ काल विशेष पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

Q3. शिवलिंग पर जलाभिषेक का सही समय क्या है?

चारों प्रहर में अभिषेक किया जा सकता है, परंतु निशीथ काल सर्वाधिक शुभ माना जाता है।

Q4. महाशिवरात्रि व्रत के मुख्य नियम क्या हैं?

उपवास, संयम, ब्रह्मचर्य, मंत्रजप, रात्रि जागरण और पारण सही समय पर करना आवश्यक है।

Q5. महाशिवरात्रि पर कौन सा मंत्र सबसे प्रभावशाली है?

“ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जप अत्यंत फलदायी माना जाता है।

Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित है। तिथि एवं मुहूर्त स्थान विशेष के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। कृपया स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि अवश्य करें।

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