श्री धर्मशास्ता स्तुति दशकम् | Sri Dharma Sastha Stuti DasakamIt takes 1 minutes... to read this article !

Sri Dharma Sastha Stuti Dasakam: श्री धर्मशास्ता स्तुति दशकम् एक संस्कृत स्तुति है जिसमें धर्मशास्ता (भगवान अय्यप्पा / धर्मशास्ता) की महिमा, स्वरूप तथा भक्तों के कष्टों के निवारण का गुणगान किया गया है। यह भक्ति-प्रधान स्तोत्र दश पदों में प्रकट होकर ईश्वर की कृपा और भक्तिपूर्ण मन की शांति को प्रोत्साहित करता है।

आशानुरूपफलदं चरणारविन्द-
-भाजामपार करुणार्णव पूर्णचन्द्रम् ।
नाशाय सर्वविपदामपि नौमि नित्य-
-मीशानकेशवभवं भुवनैकनाथम् ॥ १ ॥

पिञ्छावली वलयिताकलितप्रसून-
-सञ्जातकान्तिभरभासुरकेशभारम् ।
शिञ्जानमञ्जुमणिभूषणरञ्जिताङ्गं
चन्द्रावतंसहरिनन्दनमाश्रयामि ॥ २ ॥

आलोलनीलललितालकहाररम्य-
-माकम्रनासमरुणाधरमायताक्षम् ।
आलम्बनं त्रिजगतां प्रमथाधिनाथ-
-मानम्रलोक हरिनन्दनमाश्रयामि ॥ ३ ॥

कर्णावलम्बि मणिकुण्डलभासमान-
-गण्डस्थलं समुदिताननपुण्डरीकम् ।
अर्णोजनाभहरयोरिव मूर्तिमन्तं
पुण्यातिरेकमिव भूतपतिं नमामि ॥ ४ ॥

उद्दण्डचारुभुजदण्डयुगाग्रसंस्थं
कोदण्डबाणमहितान्तमदान्तवीर्यम् ।
उद्यत्प्रभापटलदीप्रमदभ्रसारं
नित्यं प्रभापतिमहं प्रणतो भवामि ॥ ५ ॥

मालेयपङ्कसमलङ्कृतभासमान-
-दोरन्तरालतरलामलहारजालम् ।
नीलातिनिर्मलदुकूलधरं मुकुन्द-
-कालान्तकप्रतिनिधिं प्रणतोऽस्मि नित्यम् ॥ ६ ॥

यत्पादपङ्कजयुगं मुनयोऽप्यजस्रं
भक्त्या भजन्ति भवरोगनिवारणाय ।
पुत्रं पुरान्तकमुरान्तकयोरुदारं
नित्यं नमाम्यहममित्रकुलान्तकं तम् ॥ ७ ॥

कान्तं कलायकुसुमद्युतिलोभनीय-
-कान्तिप्रवाहविलसत्कमनीयरूपम् ।
कान्तातनूजसहितं निखिलामयौघ-
-शान्तिप्रदं प्रमथनाथमहं नमामि ॥ ८ ॥

भूतेश भूरिकरुणामृतपूरपूर्ण-
-वारान्निधे वरद भक्तजनैकबन्धो ।
पायाद्भवान् प्रणतमेनमपारघोर-
-संसारभीतमिह मामखिलामयेभ्यः ॥ ९ ॥

हे भूतनाथ भगवन् भवदीयचारु-
-पादाम्बुजे भवतु भक्तिरचञ्चला मे ।
नाथाय सर्वजगतां भजतां भवाब्धि-
-पोताय नित्यमखिलाङ्गभुवे नमस्ते ॥ १० ॥

इति श्री धर्मशास्ता स्तुति दशकम् ॥

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