श्री शर्व स्तुतिः (कृष्णार्जुन कृतम्) | Sri Sharva Stuti (Krishna Arjuna Krutam)It takes 1 minutes... to read this article !

Sri Sharva Stuti (Krishna Arjuna Krutam): श्री शर्व स्तुति (कृष्णार्जुन कृतम्) एक दिव्य संस्कृत स्तोत्र है जिसमें भगवान शिव (शर्व/रुद्र) की महिमा का वर्णन है। यह स्तुति महाभारत के द्रोणपर्व के शार्व स्तुति अध्याय में श्रीकृष्ण और अर्जुन द्वारा भगवान शिव को समर्पित है, जो भक्तों को शिव भक्ति, शरणागति और आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।

कृष्णार्जुनावूचतुः ।
नमो भवाय शर्वाय रुद्राय वरदाय च ।
पशूनां पतये नित्यमुग्राय च कपर्दिने ।
महादेवाय भीमाय त्र्यम्बकाय च शान्तये ॥ १ ॥

ईशानाय भगघ्नाय नमोऽस्त्वन्धकघातिने ।
कुमारगुरवे तुभ्यं नीलग्रीवाय वेधसे ॥ २ ॥

पिनाकिने हविष्याय सत्याय विभवे सदा ।
विलोहिताय धूम्राय व्याधाय नपराजिते ॥ ३ ॥

नित्यं नीलशिखण्डाय शूलिने दिव्यचक्षुषे ।
होत्रे पोत्रे त्रिनेत्राय व्याधये वसुरेतसे ॥ ४ ॥

अचिन्त्यायाम्बिकाभर्त्रे सर्वदेवस्तुताय च ।
वृषध्वजाय मुण्डाय जटिने ब्रह्मचारिणे ॥ ५ ॥

तप्यमानाय सलिले ब्रह्मण्यायाजिताय च ।
विश्वात्मने विश्वसृजे विश्वमावृत्य तिष्ठते ॥ ६ ॥

नमो नमस्ते सेव्याय भूतानां प्रभवे सदा ।
ब्रह्मवक्त्राय सर्वाय शङ्कराय शिवाय च ॥ ७ ॥

नमोऽस्तु वाचस्पतये प्रजानां पतये नमः ।
नमो विश्वस्य पतये महतां पतये नमः ॥ ८ ॥

नमः सहस्रशिरसे सहस्रभुजमन्यवे ।
सहस्रनेत्रपादाय नमोऽसङ्ख्येयकर्मणे ॥ ९ ॥

नमो हिरण्यवर्णाय हिरण्यकवचाय च ।
भक्तानुकम्पिने नित्यं सिद्ध्यतां नो वरः प्रभो ॥ १० ॥

इति श्रीमन्महाभारते द्रोणपर्वणि अर्जुनस्वप्नदर्शने अशीतितमोऽध्याये शर्व स्तुतिः ॥

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