श्री विश्वकर्मा स्तुतिः | Sri Vishwakarma Stuti MantraIt takes 1 minutes... to read this article !

Sri Vishwakarma Stuti Mantra: श्री विश्वकर्मा स्तुति मन्त्र एक पारंपरिक संस्कृत स्तोत्र है जिसमें भगवान विश्वकर्मा — सृष्टि के दिव्य शिल्पी — की महिमा, कौशल, रचनात्मक ऊर्जा और भक्तिपूर्ण स्तुति का वर्णन किया गया है। यह स्तुति पाठक को कला, ज्ञान, कौशल और आध्यात्मिक शक्ति की अनुभूति प्रदान करती है।

श्री विश्वकर्मा स्तुतिः

पञ्चवक्त्रं जटाजूटं पञ्चादशविलोचनम् ।
सद्योजाताननं श्वेतं वामदेवं तु कृष्णकम् ॥ १

अघोरं रक्तवर्णं तत्पुरुषं पीतवर्णकम् ।
ईशानं श्यामवर्णं च शरीरं हेमवर्णकम् ॥ २

दशबाहुं महाकायं कर्णकुण्डलमण्डितम् ।
पीताम्बरं पुष्पमाला नागयज्ञोपवीतनम् ॥ ३

रुद्राक्षमालाभरणं व्याघ्रचर्मोत्तरीयकम् ।
अक्षमालां च पद्मं च नागशूलपिनाकिनम् ॥ ४

डमरुं वीणां बाणं च शङ्खचक्रकरान्वितम् ।
कोटिसूर्यप्रतीकाशं सर्वजीवदयापरम् ॥ ५

देवदेवं महादेवं विश्वकर्म जगद्गुरुम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ ६

अभीप्सितार्थसिद्ध्यर्थं पूजितो यस्सुरैरपि ।
सर्वविघ्नहरं देवं सर्वावज्ञाविवर्जितम् ॥ ७

आहुं प्रजानां भक्तानामत्यन्तं भक्तिपूर्वकम् ।
सृजन्तं विश्वकर्माणं नमो ब्रह्महिताय च ॥ ८

मन्त्रम् – ओम् विश्वकर्माय नमः ।

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