श्री शिव स्तुतिः (देव कृतम्) | Deva Krita Shiva StutiIt takes 1 minutes... to read this article !

Deva Krita Shiva Stuti: देव-कृत शिव स्तुति एक भक्ति-प्रधान संस्कृत स्तोत्र है जिसमें देवताओं द्वारा भगवान शिव की महिमा, शक्ति, लीलाएँ और भक्तिपूर्ण स्तुति का सुंदर वर्णन किया गया है। यह स्तुति पाठक को शिव भक्ति, आध्यात्मिक शांति, अनुग्रह और दिव्य अनुभूति प्रदान करती है।

देवा ऊचुः ।
नमः सहस्रनेत्राय नमस्ते शूलपाणिने ।
नमः खट्वाङ्गहस्ताय नमस्ते दण्डधारिणे ॥ १ ॥

त्वं देवहुतभुग्ज्वाला कोटिभानुसमप्रभः ।
अदर्शने वयं देव मूढविज्ञानतोधुना ॥ २ ॥

नमस्त्रिनेत्रार्तिहराय शम्भो
त्रिशूलपाणे विकृतास्यरूप ।
समस्त देवेश्वर शुद्धभाव
प्रसीद रुद्राऽच्युत सर्वभाव ॥ ३ ॥

भगास्य दन्तान्तक भीमरूप
प्रलम्ब भोगीन्द्र लुलुन्तकण्ठ ।
विशालदेहाच्युत नीलकण्ठ
प्रसीद विश्वेश्वर विश्वमूर्ते ॥ ४ ॥

भगाक्षि संस्फोटन दक्षकर्मा
गृहाण भागं मखतः प्रधानम् ।
प्रसीद देवेश्वर नीलकण्ठ
प्रपाहि नः सर्वगुणोपपन्न ॥ ५ ॥

सीताङ्गरागा प्रतिपन्नमूर्ते
कपालधारिंस्त्रिपुरघ्नदेव ।
प्रपाहि नः सर्वभयेषु चैकं
उमापते पुष्करनालजन्म ॥ ६ ॥

पश्यामि ते देहगतान् सुरेश
सर्गारयोवेदवराननन्त ।
साङ्गन् सविद्यान् सपदक्रमांश्च
सर्वान्निलीनांस्त्वयि देवदेव ॥ ७ ॥

भव शर्व महादेव पिनाकिन् रुद्र ते हर ।
नताः स्म सर्वे विश्वेश त्राहि नः परमेश्वर ॥ ८ ॥

इति श्रीवराहपुराणान्तर्गत देवकृत शिवस्तुतिः ।

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