श्री रुद्र स्तुतिः | Sri Rudra StutiIt takes 1 minutes... to read this article !

Sri Rudra Stuti: श्री रुद्र स्तुति एक पवित्र संस्कृत स्तोत्र है जिसमें भगवान शिव के रुद्र रूप की महिमा, शक्ति, करुणा और भक्तिपूर्ण गुणगान का सुंदर वर्णन किया गया है। यह स्तुति पाठकों को शिवभक्ति, आध्यात्मिक शांति और ईश्वर के अनुग्रह की अनुभूति प्रदान करती है।

नमो देवाय महते देवदेवाय शूलिने ।
त्र्यम्बकाय त्रिनेत्राय योगिनां पतये नमः ॥ १ ॥

नमोऽस्तु देवदेवाय महादेवाय वेधसे ।
शम्भवे स्थाणवे नित्यं शिवाय परमात्मने ॥ २ ॥

नमः सोमाय रुद्राय महाग्रासाय हेतवे ।
प्रपद्येहं विरूपाक्षं शरण्यं ब्रह्मचारिणम् ॥ ३ ॥

महादेवं महायोगमीशानं त्वम्बिकापतिम् ।
योगिनां योगदाकारं योगमायासमाहृतम् ॥ ४ ॥

योगिनां गुरुमाचार्यं योगगम्यं सनातनम् ।
संसारतारणं रुद्रं ब्रह्माणं ब्रह्मणोऽधिपम् ॥ ५ ॥

शाश्वतं सर्वगं शान्तं ब्रह्माणं ब्राह्मणप्रियम् ।
कपर्दिनं कलामूर्तिममूर्तिममरेश्वरम् ॥ ६ ॥

एकमूर्तिं महामूर्तिं वेदवेद्यं सतां गतिम् ।
नीलकण्ठं विश्वमूर्तिं व्यापिनं विश्वरेतसम् ॥ ७ ॥

कालाग्निं कालदहनं कामिनं कामनाशनम् ।
नमामि गिरिशं देवं चन्द्रावयवभूषणम् ॥ ८ ॥

त्रिलोचनं लेलिहानमादित्यं परमेष्ठिनम् ।
उग्रं पशुपतिं भीमं भास्करं तमसः परम् ॥ ९ ॥

इति श्रीकूर्मपुराणे व्यासोक्त रुद्रस्तुतिः ॥

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