उच्छिष्ट गणपति अष्टोत्तर शतनामावली | श्रीउच्छिष्टगणनाथस्य अष्टोत्तरशतनामावलिः | Ucchista Ganapati Ashtottara ShatanamavaliIt takes 5 minutes... to read this article !

श्रीरुद्रयामलतन्त्रके अन्तर्गत महादेव-गौरी संवाद में यह श्री उच्छिष्ट गणपति अष्टोत्तर शतनामावली हमें प्राप्त होती है । इस शतनामावली में उच्छिष्ट गणपति के कुल एक सो आठ (108) मंत्र हैं जिनमें भगवान् उच्छिष्ट गणपति के 108 नाम है । जो मनुष्य श्रीउच्छिष्टगणनाथस्य अष्टोत्तरशतनामावलिः का पाठ करता है या श्रवण करता है उसकी भगवान् श्री उच्छिष्ट गणपति सर्वविध रक्षा करते हैं तथा उसको धन, वैभव एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।

श्रीउच्छिष्टगणनाथस्य अष्टोत्तरशतनामावलिः

ॐ वन्दारुजनमन्दारपादपाय नमो नमः ॐ । (1)
ॐ चन्द्रार्धशेखरप्राणतनयाय नमो नमः ॐ ।
ॐ शैलराजसुतोत्सङ्गमण्डनाय नमो नमः ॐ । वन्दनाय
ॐ वल्लीशवलयक्रीडाकुतुकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ श्रीनीलवाणीललितारसिकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ स्वानन्दभवनानन्दनिलयाय नमो नमः ॐ ।
ॐ चन्द्रमण्डलसन्दृष्यस्वरूपाय नमो नमः ॐ ।
ॐ क्षीराब्धिमध्यकल्पद्रुमूलस्थाय नमो नमः ॐ ।
ॐ सुरापगासिताम्भोजसंस्थिताय नमो नमः ॐ ।
ॐ सदनीकृतमार्ताण्डमण्डलाय नमो नमः ॐ । (10)
ॐ इक्षुसागरमध्यस्थमन्दिराय नमो नमः ॐ ।
ॐ चिन्तामणिपुराधीशसत्तमाय नमो नमः ॐ ।
ॐ जगत्सृष्टितिरोधानकारणाय नमो नमः ॐ ।
ॐ क्रीडार्थसृष्टभुवनत्रितयाय नमो नमः ॐ ।
ॐ शुण्डोद्धूतजलोद्भूतभुवनाय नमो नमः ॐ ।
ॐ चेतनाचेतनीभूतशरीराय नमो नमः ॐ ।
ॐ अणुमात्रशरीरान्तर्लसिताय नमो नमः ॐ ।
ॐ सर्ववश्यकरानन्तमन्त्रार्णाय नमो नमः ॐ ।
ॐ कुष्ठाद्यामयसन्दोहशमनाय नमो नमः ॐ ।
ॐ प्रतिवादिमुखस्तम्भकारकाय नमो नमः ॐ । 20
ॐ पराभिचारदुष्कर्मनाशकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ सकृन्मन्त्रजपध्यानमुक्तिदाय नमो नमः ॐ ।
ॐ निजभक्तविपद्रक्षादीक्षिताय नमो नमः ॐ ।
ॐ ध्यानामृतरसास्वाददायकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ गुह्यपूजारताभीष्टफलदाय नमो नमः ॐ । कुलीयपूजा
ॐ रूपौदार्यगुणाकृष्टत्रिलोकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ अष्टद्रव्यहविःप्रीतमानसाय नमो नमः ॐ ।
ॐ अवताराष्टकद्वन्द्वप्रदानाय नमो नमः ॐ । भवताराष्टक
ॐ भारतालेखनोद्भिन्नरदनाय नमो नमः ॐ ।
ॐ नारदोद्गीतरुचिरचरिताय नमो नमः ॐ । 30
ॐ निखिलाम्नायसङ्गुष्ठवैभवाय नमो नमः ॐ ।
ॐ बाणरावणचण्डीशपूजिताय नमो नमः ॐ ।
ॐ इन्द्रादिदेवतावृन्दरक्षकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ सप्तर्षिमानसालाननिश्चेष्टाय नमो नमः ॐ ।
ॐ आदित्यादिग्रहस्तोमदीपकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ मदनागमसत्तन्त्रपारगाय नमो नमः ॐ ।
ॐ उज्जीवितेशसन्दग्धमदनाय नमो नमः ॐ । कुञ्जीविते
ॐ शमीमहीरुहप्रीतमानसाय नमो नमः ॐ ।
ॐ जलतर्पणसम्प्रीतहृदयाय नमो नमः ॐ ।
ॐ कन्दुकीकृतकैलासशिखराय नमो नमः ॐ । 40
ॐ अथर्वशीर्षकारण्यमयूराय नमो नमः ॐ ।
ॐ कल्याणाचलश‍ृङ्गाग्रविहाराय नमो नमः ॐ ।
ॐ आतुनैन्द्रादिसामसंस्तुताय नमो नमः ॐ ।
ॐ ब्राह्म्यादिमातृनिवःपरीताय नमो नमः ॐ ।
ॐ चतुर्थावरणारक्षिदिगीशाय नमो नमः ॐ । रक्षिधीशाय
ॐ द्वाराविष्टनिधिद्वन्द्वशोभिताय नमो नमः ॐ ।
ॐ अनन्तपृथिवीकूर्मपीठाङ्गाय नमो नमः ॐ ।
ॐ तीव्रादियोगिनीवृन्दपीठस्थाय नमो नमः ॐ ।
ॐ जयादिनवपीठश्रीमण्डिताय नमो नमः ॐ ।
ॐ पञ्चावरणमध्यस्थसदनाय नमो नमः ॐ । 50
ॐ क्षेत्रपालगणेशादिद्वारपाय नमो नमः ॐ ।
ॐ महीरतीरमागौरीपार्श्वकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ मद्यप्रियादिविनयिविधेयाय नमो नमः ॐ ।
ॐ वाणीदुर्गांशभूतार्हकलत्राय नमो नमः ॐ । भूतार्ध
ॐ वरहस्तिपिशाचीहृन्नन्दनाय नमो नमः ॐ ।
ॐ योगिनीशचतुष्षष्टिसंयुताय नमो नमः ॐ ।
ॐ नवदुर्गाष्टवसुभिस्सेविताय नमो नमः ॐ ।
ॐ द्वात्रिंशद्भैरवव्यूहनायकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ ऐरावतादिदिग्दन्तिसंवृताय नमो नमः ॐ ।
ॐ कण्ठीरवमयूराखुवाहनाय नमो नमः ॐ । 60
ॐ मूषकाङ्कमहारक्तकेतनाय नमो नमः ॐ ।
ॐ कुम्भोदरकरन्यस्तपादाब्जाय नमो नमः ॐ ।
ॐ कान्ताकान्ततराङ्गस्थकराग्राय नमो नमः ॐ ।
ॐ अन्तस्थभुवनस्फीतजठराय नमो नमः ॐ ।
ॐ कर्पूरवीटिकासाररक्तोष्ठाय नमो नमः ॐ ।
ॐ श्वेतार्कमालासन्दीप्तकन्धराय नमो नमः ॐ ।
ॐ सोमसूर्यबृहद्भानुलोचनाय नमो नमः ॐ ।
ॐ सर्वसम्पत्प्रदामन्दकटाक्षाय नमो नमः ॐ ।
ॐ अतिवेलमदारक्तनयनाय नमो नमः ॐ ।
ॐ शशाङ्कार्धसमादीप्तमस्तकाय नमो नमः ॐ । 70
ॐ सर्पोपवीतहारादिभूषिताय नमो नमः ॐ ।
ॐ सिन्दूरितमहाकुम्भसुवेषाय नमो नमः ॐ ।
ॐ आशावसनतादृष्यसौन्दर्याय नमो नमः ॐ ।
ॐ कान्तालिङ्गनसञ्जातपुलकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ पाशाङ्कुशधनुर्बाणमण्डिताय नमो नमः ॐ ।
ॐ दिगन्तव्याप्तदानाम्बुसौरभाय नमो नमः ॐ ।
ॐ सायन्तनसहस्रांशुरक्ताङ्गाय नमो नमः ॐ ।
ॐ सम्पूर्णप्रणवाकारसुन्दराय नमो नमः ॐ ।
ॐ ब्रह्मादिकृतयज्ञाग्निसम्भूताय नमो नमः ॐ ।
ॐ सर्वामरप्रार्थनात्तविग्रहाय नमो नमः ॐ । 80
ॐ जनिमात्रसुरत्रासनाशकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ कलत्रीकृतमातङ्गकन्यकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ विद्यावदसुरप्राणनाशकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ सर्वमन्त्रसमाराध्यस्वरूपाय नमो नमः ॐ ।
ॐ षट्कोणयन्त्रपीठान्तर्लसिताय नमो नमः ॐ ।
ॐ चतुर्नवतिमन्त्रात्मविग्रहाय नमो नमः ॐ ।
ॐ हुङ्गङ्क्लाङ्ग्लाम्मुखानेकबीजार्णाय नमो नमः ॐ ।
ॐ बीजाक्षरत्रयान्तस्थशरीराय नमो नमः ॐ ।
ॐ हृल्लेखागुह्यमन्त्रान्तर्भाविताय नमो नमः ॐ । बीजमन्त्रान्तर्भाविताय
ॐ स्वाहान्तमातृकामालारूपाध्याय नमो नमः ॐ । 90
ॐ द्वात्रिंशदक्षरमयप्रतीकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ शोधनानर्थसन्मन्त्रविशेषाय नमो नमः ॐ ।
ॐ अष्टाङ्गयोगिनिर्वाणदायकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ प्राणेन्द्रियमनोबुद्धिप्रेरकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ मूलाधारवरक्षेत्रनायकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ चतुर्दलमहापद्मसंविष्टाय नमो नमः ॐ ।
ॐ मूलत्रिकोणसंशोभिपावकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ सुषुम्नारन्ध्रसञ्चारदेशिकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ षट्ग्रन्थिनिम्नतटिनीतारकाय नमो नमः ॐ ।
ॐ दहराकाशसंशोभिशशाङ्काय नमो नमः ॐ । 100
ॐ हिरण्मयपुराम्भोजनिलयाय नमो नमः ॐ ।
ॐ भ्रूमध्यकोमलारामकोकिलाय नमो नमः ॐ ।
ॐ षण्णवद्वादशान्तस्थमार्ताण्डाय नमो नमः ॐ ।
ॐ मनोन्मणीसुखावासनिर्वृताय नमो नमः ॐ ।
ॐ षोडशान्तमहापद्ममधुपाय नमो नमः ॐ ।
ॐ सहस्रारसुधासारसेचिताय नमो नमः ॐ ।
ॐ नादबिन्दुद्वयातीतस्वरूपाय नमो नमः ॐ ।
ॐ उच्छिष्टगणनाथाय महेशाय नमो नमः ॐ । 108

श्री उच्छिष्ट गणपति अष्टोत्तर शतनामावली प्रयोग करने की विधि:-

  • उच्छिष्ट गणपति यन्त्र पर इस अष्टोत्तर शतनामावली के मन्त्रों से आप तर्पण कर सकते है। तर्पण करने के लिए आप एक ताम्बे के लोटे मैं सुगन्धित जल बना लें और दूर्वा से गणपतिजी की प्रतिमा पर या यन्त्र पर एक एक मंत्र के साथ जल छिड़के।
  • उच्छिष्ट गणपति अष्टोत्तर शतनामावली से आप यज्ञ भी कर सकते है। हवन सामग्री या घी लेकर ताम्बे के हवन कुंड मैं अग्नि स्थापना करके आप एक एक मंत्र से आहुति दें सकते है।

श्री उच्छिष्ट गणपति अष्टोत्तर शतनामावली सिद्ध करने की विधि:-

  • श्री उच्छिष्ट गणपति अष्टोत्तर शतनामावली का सिद्ध मुहूर्त मैं 1100 पाठ कर सिद्ध करें।
  • श्री उच्छिष्ट गणपति अष्टोत्तर शतनामावली सिद्ध करने पर प्रतिदिन 11 पाठ अवश्य करें ।
  • उच्छिष्ट गणपति को लड्डू का भोग रखे। पाठ के बाद प्रशाद छोटे बच्चों मैं बाँट दें ।
  • प्रयोग करने के लिए श्री उच्छिष्ट गणपति अष्टोत्तर शतनामावली से हवन करें ।

जो शुद्ध चित्त से भक्तिपूर्वक समाहित होकर अत्यन्त प्रेम से श्री उच्छिष्ट गणपति अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ, हवन या अर्चन करता है, उसके यहाँ लक्ष्मी सदा निवास करती हैं । और श्री उच्छिष्ट गणपति उस साधक की दरिद्रता का समूल विनाश कर देते है।

 

हमारी एडिटोरियल टीम अनुभवी वैदिक एवं तांत्रिक साधकों का एक समर्पित समूह है, जिन्होंने वर्षों तक वेद, तंत्र और प्राचीन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया है। इन ग्रंथों में वर्णित साधनाओं का विधिवत पुरश्चरण कर, व्यावहारिक अनुभव के साथ ज्ञान को आत्मसात किया गया है। Sadhanas.in पर प्रकाशित प्रत्येक लेख और साधना शुद्ध रूप से प्राचीन शास्त्रों एवं प्रमाणिक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है, ताकि साधकों को प्रामाणिक, सुरक्षित और सही मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।

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