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Sawan 2026 कब से है?: सावन सोमवार व्रत, मंगला गौरी व्रत तिथियां और शिव पूजा विधान (Complete Info)It takes 13 minutes... to read this article !

सनातन धर्म में श्रावण मास (Shravan Month) का विशेष और सर्वोच्च स्थान है। यह वह पावन समय होता है जब प्रकृति स्वयं भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए आतुर रहती है और रिमझिम फुहारों से धरती को पवित्र करती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन साल का पांचवा महीना होता है, जो पूरी तरह से देवाधिदेव महादेव भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है।

सावन का महीना तपस्या, व्रत और आध्यात्मिक जागरण का सबसे बड़ा उत्सव है। शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास के दौरान जब भगवान श्री हरि विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, तब सृष्टि के पालन और संचालन का संपूर्ण दायरा भगवान शिव के हाथों में आ जाता है। इसीलिए सावन के इस पवित्र महीने में भोलेनाथ पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं और अपने भक्तों की प्रार्थनाओं को अति शीघ्र सुनते हैं।

वर्ष 2026 में सावन का महीना (Sawan 2026) कई मायनों में अत्यंत विशेष और अद्भुत संयोग लेकर आ रहा है। इस वर्ष शिवभक्तों को शिव आराधना के लिए बेहतरीन शुभ मुहूर्त, कई महत्वपूर्ण व्रत और परम फलदायी ‘सावन सोमवार’ (Sawan Somwar) प्राप्त होने वाले हैं। जो भक्त सच्चे मन से सावन सोमवार का व्रत करते हैं, महादेव उनकी झोली खुशियों से भर देते हैं।

इस विस्तृत लेख में हम गहराई से जानेंगे कि साल 2026 में सावन कब से शुरू हो रहा है (सावन 2026 कब से है), Sawan Monday Vrat Dates क्या हैं, मंगला गौरी व्रत 2026 की तिथियां, सावन शिवरात्रि कब है, और सावन व्रत के कठोर व आवश्यक नियम क्या हैं।

सावन 2026 कब से है? (Sawan 2026 Start and End Date)

भारत एक विशाल देश है और यहाँ पंचांग की गणना दो अलग-अलग विधियों—पूर्णिमान्त (Purnimanta) और अमान्त (Amavasyant) कैलेंडर—के आधार पर की जाती है। इसी कारण से उत्तर भारत और दक्षिण/पश्चिम भारत में सावन शुरू होने की तारीखों में लगभग 15 दिनों का अंतर होता है।

उत्तर भारत में सावन 2026 (पूर्णिमान्त कैलेंडर):

उत्तर भारत के प्रमुख राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और झारखंड में सावन का महीना आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के ठीक अगले दिन से प्रारंभ हो जाता है।

  • सावन आरंभ तिथि: 30 जुलाई 2026 (गुरुवार)

  • सावन समापन तिथि: 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)

इस वर्ष उत्तर भारत में सावन का महीना 30 दिनों का होगा और 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के दिन इसका समापन होगा। भगवान शिव की आराधना का यह पावन पर्व 30 जुलाई, गुरुवार के शुभ दिन से शुरू होकर भक्तों के जीवन में अपार सुख और समृद्धि लाएगा।

दक्षिण और पश्चिम भारत में सावन 2026 (अमान्त कैलेंडर):

महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों में अमान्त कैलेंडर का पालन किया जाता है। यहाँ आषाढ़ अमावस्या के बाद सावन का महीना शुरू होता है।

  • सावन आरंभ तिथि: 13 अगस्त 2026 (गुरुवार)

  • सावन समापन तिथि: 11 सितंबर 2026 (शुक्रवार)

पौराणिक कथा और Shravan Month का महत्व

सावन मास के इतने पवित्र होने के पीछे कई गूढ़ पौराणिक मान्यताएं हैं। शिव पुराण और अन्य शास्त्रों के अनुसार, सावन के महीने में ही ‘समुद्र मंथन’ की महान घटना घटी थी। जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन हुआ, तो उसमें से सबसे पहले ‘हलाहल’ नाम का भयंकर विष निकला। इस विष की ज्वाला इतनी तीव्र थी कि संपूर्ण ब्रह्मांड जलकर भस्म होने लगा था।

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सृष्टि को इस विनाश से बचाने के लिए, भगवान शिव ने उस पूरे विष को पी लिया और उसे अपने कंठ (गले) में ही रोक लिया। विष के तीव्र प्रभाव से महादेव का कंठ नीला पड़ गया, जिसके बाद से उन्हें ‘नीलकंठ’ कहा जाने लगा। विष की भीषण गर्मी और ताप को शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव पर निरंतर गंगाजल और शीतल जल अर्पित किया। यह घटना श्रावण मास में ही हुई थी। यही कारण है कि सावन के महीने में शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने की सदियों पुरानी परंपरा है, जिससे महादेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों के शारीरिक व मानसिक कष्ट हर लेते हैं।

इसके अलावा, एक अन्य मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए सावन के महीने में ही कठोर तपस्या और निराहार व्रत किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी स्वीकार किया। इसलिए यह महीना वैवाहिक जीवन में प्रेम, मधुरता लाने और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

Sawan Somwar 2026 – सावन सोमवार व्रत का महत्व

सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार को ‘सावन सोमवार’ (Sawan Somwar) कहा जाता है। सोमवार का दिन चंद्रमा का दिन होता है, और भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया हुआ है। इसलिए शिव जी को सोमवार का दिन अत्यंत प्रिय है।

इस साल सावन में शिवभक्तों को शिव आराधना के लिए उत्तर भारत में कुल 4 सावन सोमवार व्रत (Sawan Monday Vrat) प्राप्त होंगे। सावन सोमवार का व्रत रखने से जीवन की बड़ी से बड़ी आर्थिक और मानसिक परेशानी दूर हो जाती है, कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य वर मिलता है, और दांपत्य जीवन में आ रही दरारें भर जाती हैं।

Sawan Monday Vrat Dates 2026 (उत्तर भारत के लिए):

  • पहला सावन सोमवार व्रत: 3 अगस्त 2026

    यह सावन का पहला सोमवार होगा। इस दिन से ही बहुत से भक्त 16 सोमवार के व्रत (Solah Somvar Vrat) का संकल्प भी लेते हैं। इस दिन शिवालयों में रुद्राभिषेक का विशेष फल प्राप्त होता है।

  • दूसरा सावन सोमवार व्रत: 10 अगस्त 2026

    इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। बेलपत्र, भांग और धतूरा चढ़ाकर शिव जी को प्रसन्न किया जाता है।

  • तीसरा सावन सोमवार व्रत: 17 अगस्त 2026

    यह सोमवार अत्यंत ही दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। 17 अगस्त को सावन सोमवार के साथ-साथ ‘नाग पंचमी’ का पावन पर्व भी है। भगवान शिव अपने गले में वासुकि नाग को धारण करते हैं। सोमवार और नाग पंचमी का एक ही दिन पड़ना इस बात का संकेत है कि जो व्यक्ति इस दिन व्रत और रुद्राभिषेक करेगा, उसे ‘कालसर्प दोष’ और राहु-केतु के सभी दुष्प्रभावों से स्थायी मुक्ति मिल जाएगी।

  • चौथा सावन सोमवार व्रत: 24 अगस्त 2026

    यह उत्तर भारत के सावन मास का अंतिम सोमवार होगा। जिन लोगों ने 4 सावन सोमवार का संकल्प लिया होगा, वे इस दिन विधि-विधान से व्रत का उद्यापन करेंगे।

Sawan Monday Vrat Dates 2026 (दक्षिण और पश्चिम भारत के लिए):

  • पहला सावन सोमवार व्रत: 17 अगस्त 2026 (नाग पंचमी के महासंयोग के साथ)

  • दूसरा सावन सोमवार व्रत: 24 अगस्त 2026

  • तीसरा सावन सोमवार व्रत: 31 अगस्त 2026

  • चौथा सावन सोमवार व्रत: 7 सितंबर 2026

मंगला गौरी व्रत 2026 (Mangala Gauri Vrat 2026)

जहाँ सावन का सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, वहीं सावन का हर मंगलवार माता पार्वती (देवी गौरी) को समर्पित होता है। सावन के मंगलवार को रखे जाने वाले विशेष व्रत को ‘मंगला गौरी व्रत’ कहा जाता है।

सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं अच्छे और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए माता गौरी की आराधना करती हैं। ज्योतिष शास्त्र की मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत करने से कुंडली का भारी से भारी मांगलिक दोष (Mangal Dosh) शांत होता है और वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी बाधाएं व कलह दूर हो जाते हैं।

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मंगला गौरी व्रत 2026 की तिथियां (उत्तर भारत के अनुसार):

  • पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त 2026 (मंगलवार)

  • दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त 2026 (मंगलवार) – इस दिन सावन शिवरात्रि का भी अत्यंत शुभ संयोग है।

  • तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त 2026 (मंगलवार)

  • चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त 2026 (मंगलवार)

Shravan Month 2026 के प्रमुख त्योहार और शुभ संयोग

सावन का महीना केवल सोमवार और मंगलवार के व्रतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे 30 दिनों के दौरान कई बड़े और महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार मनाए जाते हैं। आइए वर्ष 2026 के सावन महीने में आने वाले प्रमुख त्योहारों पर नज़र डालते हैं:

1. सावन शिवरात्रि (Sawan Shivratri 2026) – 11 अगस्त 2026

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि होती है, लेकिन सावन के महीने में पड़ने वाली ‘सावन शिवरात्रि’ का महत्व फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि के बराबर ही माना जाता है। 11 अगस्त 2026 को मंगलवार के दिन यह पर्व पड़ेगा। कांवड़िए इसी दिन पवित्र नदियों से लाया गया गंगाजल भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में अर्पित करते हैं। जो लोग पूरे सावन व्रत नहीं रख पाते, वे केवल सावन शिवरात्रि का व्रत करके भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

2. हरियाली अमावस्या – 12 अगस्त 2026

सावन मास की अमावस्या को ‘हरियाली अमावस्या’ कहा जाता है। यह दिन प्रकृति की पूजा और वृक्षारोपण के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण और दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

3. हरियाली तीज – 15 अगस्त 2026

सुहागिन महिलाओं के लिए हरियाली तीज का त्योहार बहुत बड़ा माना जाता है। 15 अगस्त 2026 को महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाएंगी, हरे रंग की चूड़ियां पहनेंगी और निर्जला व्रत रखकर माता पार्वती व भगवान शिव की पूजा करेंगी। यह त्योहार पति-पत्नी के अटूट प्रेम और विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक है।

4. नाग पंचमी – 17 अगस्त 2026

जैसा कि पहले बताया गया है, 17 अगस्त को सावन सोमवार और नाग पंचमी का अद्भुत और दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है और उन्हें दूध अर्पित किया जाता है। शिव मंदिरों में चांदी या तांबे के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करने से सर्प भय और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

5. रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा – 28 अगस्त 2026

सावन महीने का समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा। इसी दिन भाई-बहन के प्रेम का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना और ब्राह्मणों को दान-पुण्य करना अत्यधिक लाभकारी होता है।

सावन पूजा और रुद्राभिषेक का सही विधान

सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा बहुत ही सरल और सहज है। महादेव भाव के भूखे हैं; वे मात्र एक लोटा जल और एक बेलपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। फिर भी, यदि आप सावन सोमवार का व्रत कर रहे हैं या घर पर अनुष्ठान कर रहे हैं, तो नीचे दी गई विधि का पालन करना अत्यंत शुभ रहेगा:

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सावन के दिनों में सुबह जल्दी (सूर्योदय से पूर्व) उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें।

  • स्वच्छ वस्त्र: पूजा के समय साफ और हल्के रंग के (विशेषकर सफेद, हरा, पीला या केसरिया) वस्त्र धारण करें। काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें।

  • शिवलिंग पर अभिषेक: एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें। (ध्यान रहे: यदि शिव जी को दूध चढ़ाना है तो उसके लिए तांबे की बजाय पीतल, स्टील या चांदी के पात्र का उपयोग करें)।

  • पूजा सामग्री: भगवान शिव को बेलपत्र (3 पत्तियों वाला, जो कटा-फटा न हो), धतूरा, सफेद फूल, भस्म, अक्षत (साबुत चावल) और चंदन अर्पित करें।

  • शिव परिवार की पूजा: केवल शिवलिंग की ही नहीं, बल्कि माता पार्वती, श्री गणेश, कार्तिकेय और नंदी जी की भी पूजा अवश्य करें। शिव परिवार की पूर्ण पूजा से ही सावन का फल प्राप्त होता है।

  • वर्जित सामग्रियां: भगवान शिव को तुलसी दल, हल्दी, कुमकुम (रोली), लाल फूल और शंख से जल कभी अर्पित नहीं करना चाहिए।

  • मंत्र जाप: पूजा के दौरान निरंतर ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का मानसिक जाप करते रहें।

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रुद्राभिषेक का महत्व:

सावन के महीने में घर या मंदिर में रुद्राभिषेक करवाना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। रुद्राभिषेक में पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), गन्ने का रस या सरसों के तेल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। अलग-अलग कामनाओं के लिए अलग-अलग द्रव्य से अभिषेक होता है। जैसे अपार धन प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से और असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए कुशा मिश्रित जल से रुद्राभिषेक करना चाहिए।

सावन व्रत के नियम (Do’s and Don’ts during Sawan)

सावन का महीना संयम, साधना और आत्म-नियंत्रण का महीना है। जो भी व्यक्ति सावन का व्रत रखता है, या जो व्रत नहीं भी रखते, उन्हें इस पवित्र मास में कुछ विशेष नियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए।

क्या करें (सावन के दिनों में):

  1. सात्विक भोजन: पूरे सावन माह में केवल सात्विक आहार ही लेना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस, अंडा और मदिरा (शराब) का पूर्ण रूप से त्याग करना अनिवार्य है।

  2. ब्रह्मचर्य का पालन: व्रत करने वाले स्त्री-पुरुषों को सावन के महीने में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। मन में किसी के प्रति बुरे विचार या कामुक भावनाएं नहीं लानी चाहिए।

  3. दान और परोपकार: भूखे लोगों को भोजन कराना, गौ माता को हरा चारा खिलाना और निर्धनों की मदद करना सावन में अत्यधिक शुभ होता है।

  4. भूमि शयन: यदि आप सावन सोमवार का संकल्पित व्रत कर रहे हैं, तो पलंग या गद्दे की जगह जमीन पर साफ चादर या चटाई बिछाकर सोना सबसे उत्तम माना जाता है।

क्या न करें (वर्जित कार्य):

  1. हरी पत्तेदार सब्जियां और बैंगन का त्याग: आयुर्वेद और शास्त्रों के अनुसार, सावन (बारिश) के मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियों (साग) और बैंगन में कीटाणु और सूक्ष्म जीव पनपने का खतरा सबसे अधिक रहता है। इसलिए सावन में साग और बैंगन खाने की सख्त मनाही होती है।

  2. कच्चे दूध का सीधा सेवन: सावन के महीने में भगवान शिव को कच्चा दूध अर्पित किया जाता है, इसलिए इस दौरान सादा कच्चा दूध पीने से बचना चाहिए।

  3. क्रोध और विवाद: महादेव को अति शांत स्वरूप माना जाता है। इस महीने में किसी पर अकारण क्रोध करना, अपशब्द कहना, या घर में कलह करना शिव की कृपा से वंचित कर सकता है। अपने व्यवहार में नम्रता लाएं।

  4. दाढ़ी-बाल काटना: जो लोग पूरे महीने का सावन व्रत रखते हैं या कांवड़ यात्रा पर जाते हैं, उन्हें बाल, दाढ़ी या नाखून काटने से परहेज करना चाहिए।

सावन 2026 में 2 बड़े ग्रहण का अद्भुत संयोग

साल 2026 का सावन महीना ज्योतिषीय और तांत्रिक नजरिए से बहुत ही शक्तिशाली है, क्योंकि इस एक ही महीने में दो बड़े ग्रहण लगने जा रहे हैं।

  1. सूर्य ग्रहण (12 अगस्त 2026): सावन अमावस्या (हरियाली अमावस्या) के दिन सूर्य ग्रहण लगेगा। यद्यपि भारत में इसका प्रभाव कुछ भी हो, लेकिन आध्यात्मिक साधना और मंत्र सिद्धि के लिए सावन अमावस्या का यह सूर्य ग्रहण अकल्पनीय शक्तियों को जाग्रत करने का समय होगा।

  2. चंद्र ग्रहण (28 अगस्त 2026): सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण लगने की प्रबल संभावना है। पूर्णिमा और सावन के अंतिम दिन लगने वाला यह चंद्र ग्रहण नदी स्नान, दान और ध्यान के लिए परम फलदायी सिद्ध होगा।

वर्ष 2026 का सावन (Sawan 2026) शिवभक्तों के लिए एक स्वर्णिम अवसर और उत्सव है। चाहे आप पूर्णिमान्त कैलेंडर (30 जुलाई से) के अनुसार व्रत करें या अमान्त कैलेंडर (13 अगस्त से) के अनुसार, महादेव की कृपा सभी पर समान रूप से बरसेगी।

4 सावन सोमवार (Sawan Somwar), 4 मंगला गौरी व्रत, सावन शिवरात्रि और नाग पंचमी के दुर्लभ संयोगों से भरा यह Shravan Month 2026 आपके जीवन की हर निराशा को आशा और सफलता में बदल देगा। सच्ची श्रद्धा, शुद्ध आचरण और मन में ‘ॐ नमः शिवाय’ के वास के साथ महादेव की पूजा करें। सावन सोमवार का व्रत आपके शरीर और आत्मा दोनों को शुद्ध कर जीवन के सभी संताप मिटा देगा।

भगवान नीलकंठ और माता पार्वती आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें। हर हर महादेव!

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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