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Nirjala Ekadashi 2026: व्रत में भूलकर भी न करें ये 7 भयंकर गलतियां, वरना खंडित हो जाएगा महाव्रत! (Fasting Warning)It takes 11 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार, एक वर्ष में कुल 24 एकादशियां आती हैं। इन सभी एकादशियों में भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना की जाती है। लेकिन, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली ‘निर्जला एकादशी’ (Nirjala Ekadashi) का स्थान इन सभी में सबसे सर्वोच्च और पवित्र माना गया है।

साल 2026 में निर्जला एकादशी का यह पावन महाव्रत 25 जून (गुरुवार) को रखा जाएगा। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ‘निर्जला’—अर्थात बिना जल (पानी) के। भीषण गर्मी और तपती लू के बीच, 24 घंटे से अधिक समय तक बिना अन्न और जल की एक बूंद ग्रहण किए इस व्रत का पालन करना एक अत्यंत कठोर तपस्या के समान है।

इसे ‘भीमसेनी एकादशी’ या ‘पांडव एकादशी’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति साल भर की अन्य एकादशियों का उपवास नहीं कर पाता, यदि वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत पूरी निष्ठा से रख ले, तो उसे सभी 24 एकादशियों का पुण्य एक साथ प्राप्त हो जाता है और मृत्यु के पश्चात सीधे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

लेकिन, इस महाव्रत के नियम अत्यंत कड़े हैं। अक्सर लोग अज्ञानतावश या अनजाने में कुछ ऐसे कार्य कर बैठते हैं, जिससे उनका यह कठिन तप खंडित हो जाता है और उन्हें व्रत का पुण्य नहीं मिल पाता। इस विस्तृत लेख में, हम आपको उन 7 सबसे बड़ी गलतियों के बारे में गहराई से बताएंगे, जिन्हें आपको निर्जला एकादशी के दिन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

निर्जला एकादशी 2026: व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां (7 Strict Don’ts)

उपवास का अर्थ केवल स्वयं को भूखा-प्यासा रखना नहीं है, बल्कि ‘उप’ (समीप) + ‘वास’ (रहना) अर्थात ईश्वर के समीप रहना है। जब आप ईश्वर के समीप होते हैं, तो आपके आचरण में पूर्ण पवित्रता होनी चाहिए। आइए जानते हैं वे 7 कार्य जो एकादशी के दिन पूर्णतः वर्जित हैं:

गलती 1: चावल (Rice) का सेवन या घर में चावल पकाना

सनातन धर्म में एकादशी के दिन चावल का सेवन करना ‘महापाप’ की श्रेणी में रखा गया है।

  • नियम: जो लोग व्रत रख रहे हैं, उनके लिए तो अन्न पूर्णतः वर्जित है ही, लेकिन जो लोग व्रत नहीं भी रख रहे हैं, उन्हें भी एकादशी के दिन घर में चावल नहीं पकाना चाहिए और न ही खाना चाहिए।

  • धार्मिक मान्यता: पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि मेधा ने माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए शरीर का त्याग कर दिया था और उनके शरीर का अंश धरती में समा गया था। उसी अंश से जौ और चावल की उत्पत्ति हुई। इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना महर्षि मेधा के मांस और रक्त का सेवन करने के समान माना गया है।

गलती 2: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना या जल चढ़ाना

भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी माता से जुड़ी गलतियां भारी पड़ सकती हैं।

  • नियम: एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। भगवान को भोग लगाने के लिए तुलसी दल दशमी (एक दिन पहले) को ही तोड़कर रख लेने चाहिए।

  • जल न चढ़ाएं: धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन माता तुलसी भी भगवान विष्णु के लिए ‘निर्जला व्रत’ रखती हैं। यदि आप इस दिन उन्हें जल अर्पित करते हैं, तो उनका व्रत खंडित हो जाता है, जिससे भगवान विष्णु रुष्ट हो जाते हैं।

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गलती 3: दिन के समय या गोधूलि बेला में शयन (सोना)

एकादशी का दिन तपस्या और जागरण का दिन है।

  • नियम: व्रत रखने वाले साधक को एकादशी के दिन सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त के समय (गोधूलि बेला) बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए।

  • क्यों है वर्जित? दिन में सोने से शरीर में आलस्य और तमोगुण बढ़ता है। एकादशी के दिन शरीर में एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। यदि आप सो जाते हैं, तो वह ऊर्जा नष्ट हो जाती है। यदि आपको भयंकर गर्मी या कमजोरी के कारण थकान महसूस हो रही है, तो आप जमीन पर साफ चटाई बिछाकर विश्राम कर सकते हैं, लेकिन गहरी नींद में सोने से बचना चाहिए। रात में भी ‘रात्रि जागरण’ का विधान है।

गलती 4: काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र धारण करना

पूजा-पाठ और व्रतों में रंगों का भी बहुत बड़ा महत्व होता है।

  • नियम: निर्जला एकादशी के दिन काले (Black) या गहरे नीले (Dark Blue) रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। काला रंग नकारात्मकता और तमोगुण का प्रतीक है।

  • क्या पहनें? भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए एकादशी के दिन स्नान के पश्चात स्वच्छ पीले, हल्के संतरी (Orange) या सफेद रंग के वस्त्र धारण करना सबसे शुभ माना जाता है। इससे मन शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

गलती 5: क्रोध करना, अपशब्द बोलना या किसी की निंदा करना

यह निर्जला एकादशी की ‘मानसिक तपस्या’ है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

  • नियम: यदि आप बिना पानी पिए अपने शरीर को तो कष्ट दे रहे हैं, लेकिन आपका मन दूसरों के प्रति ईर्ष्या, क्रोध या छल-कपट से भरा है, तो ऐसा व्रत भगवान विष्णु कभी स्वीकार नहीं करते।

  • मानसिक संयम: एकादशी के दिन किसी पर अकारण क्रोध न करें, गाली-गलौज न करें, झूठ न बोलें और किसी की पीठ पीछे निंदा (चुगली) न करें। यदि हो सके तो कुछ घंटों का ‘मौन व्रत’ धारण करें, इससे गले में खुश्की भी नहीं होगी और प्यास भी कम लगेगी। मन ही मन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करते रहें।

गलती 6: कुल्ला करते समय जल को पेट में निगलना

निर्जला एकादशी में पानी पीना सख्त मना है, लेकिन सुबह स्नान या पूजा से पहले मुंह साफ करना भी जरूरी है। यहीं पर सबसे ज्यादा गलती होती है।

  • नियम: आप साधारण हर्बल मंजन या उंगली से दांत साफ कर सकते हैं और कुल्ला (Rinsing) कर सकते हैं। लेकिन, आपको इस बात का 100% ध्यान रखना होगा कि पानी की एक भी बूंद गलती से भी आपके गले के नीचे (पेट में) न जाए।

  • आचमन का नियम: पूजा के समय ‘आचमन’ किया जाता है। आचमन में हथेली (गोकर्ण मुद्रा) में केवल उतना ही जल लिया जाता है, जिसमें एक राई का दाना (Mustard seed) डूब सके। इससे अधिक जल यदि गले से नीचे उतरा, तो व्रत उसी क्षण खंडित माना जाएगा।

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गलती 7: तामसिक आचरण और बाल/नाखून काटना

पवित्रता केवल मन की ही नहीं, बल्कि शरीर और घर की भी होनी चाहिए।

  • तामसिक भोजन का त्याग: एकादशी से एक दिन पहले (दशमी तिथि यानी 24 जून की रात) से ही घर में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा (शराब) और अंडे का प्रवेश पूर्ण रूप से बंद हो जाना चाहिए। घर के किसी भी सदस्य को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

  • शारीरिक अशुद्धि: एकादशी के दिन बाल काटना (Haircut), दाढ़ी बनाना (Shaving) और नाखून काटना (Nail cutting) शास्त्रों में बहुत अशुभ माना गया है। महिलाओं को इस दिन अपने बाल भी नहीं धोने चाहिए। साथ ही, ब्रह्मचर्य का पूर्ण रूप से पालन करना अत्यंत अनिवार्य है।

भीमसेनी एकादशी क्यों कहा जाता है? (The Story Behind Nirjala Ekadashi)

निर्जला एकादशी के महत्व को समझने के लिए महाभारत काल की यह कथा जानना आवश्यक है।

एक बार महाबली भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास जी से कहा— “हे मुनिश्रेष्ठ! मेरे सभी भाई (युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव), माता कुंती और द्रौपदी महीने की दोनों एकादशियों का उपवास करते हैं और मुझे भी करने को कहते हैं। लेकिन मेरे पेट में ‘वृक’ नामक अग्नि है। मैं दान दे सकता हूं, भगवान की पूजा कर सकता हूं, लेकिन मैं भूख बर्दाश्त नहीं कर सकता। बिना भोजन के रहना मेरे लिए असंभव है।”

महर्षि वेदव्यास जी ने कहा— “हे भीम! यदि तुम स्वर्ग की प्राप्ति चाहते हो और नरक से बचना चाहते हो, तो एकादशी को अन्न मत खाओ।”

भीम ने अपनी लाचारी जताते हुए कोई ऐसा व्रत मांगा जो साल में केवल एक बार करना पड़े। तब महर्षि ने उन्हें ‘ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी’ (निर्जला एकादशी) का व्रत रखने को कहा, जिसमें अन्न तो क्या, पानी भी नहीं पीना होता है।

भीमसेन ने महर्षि की आज्ञा मानकर यह कठोर व्रत रखा। भयंकर गर्मी में बिना पानी के भीमसेन का विशाल शरीर मूर्छित होने लगा, लेकिन उन्होंने अपना संकल्प नहीं तोड़ा और रात भर भगवान का स्मरण किया। अगले दिन द्वादशी को गंगाजल से उनका व्रत खोला गया। तभी से इस पावन एकादशी को ‘भीमसेनी एकादशी’ कहा जाने लगा।

25 जून 2026 को पूजा की सही विधि (Puja Vidhi)

यदि आप 25 जून को निर्जला एकादशी का महाव्रत रख रहे हैं, तो भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा इस विधि से करें:

  1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह 4:00 से 5:00 बजे के बीच उठकर स्नान करें। पानी में थोड़ा सा गंगाजल अवश्य मिलाएं।

  2. पीले वस्त्र: भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, अतः स्नान के बाद स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।

  3. व्रत का संकल्प: भगवान विष्णु के समक्ष खड़े होकर हाथ में थोड़े से तिल और जल लेकर निर्जल व्रत का संकल्प लें।

  4. पंचामृत अभिषेक: लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु या शालिग्राम जी की प्रतिमा स्थापित करें और उन्हें पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं।

  5. तुलसी और भोग: भगवान को पीले फूल, पीले फल (केला, आम) और पीली मिठाई का भोग लगाएं। भोग में ‘तुलसी दल’ (जो एक दिन पहले तोड़ा गया हो) अवश्य रखें।

  6. कथा और आरती: निर्जला एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें और अंत में घी के दीपक से कपूर आरती करें।

निर्जला एकादशी पर महादान का महत्व (Importance of Daan)

इस व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब एकादशी के दिन या अगले दिन पारण के समय सामर्थ्य अनुसार ‘दान’ किया जाए। चिलचिलाती धूप और गर्मी के कारण इस दिन शीतलता देने वाली वस्तुओं के दान का महत्व स्वर्ण दान से भी बड़ा माना गया है।

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क्या दान करें?

  • जल कलश: शुद्ध जल से भरा हुआ मिट्टी का नया घड़ा (मटका), जिसमें थोड़ी चीनी या बताशे हों। यह सबसे बड़ा दान है।

  • छाता (Umbrella): काले छाते का दान करने से शनि दोष और राहु की पीड़ा शांत होती है।

  • रसदार फल: खरबूजा, तरबूज, आम और खीरा का दान करें।

  • सत्तू: जौ या चने का सत्तू दान करने से पितृ अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

  • जूते-चप्पल: तपती सड़क पर चलने वाले किसी गरीब को खड़ाऊं या चप्पल दान करें।

व्रत का पारण (Fast Breaking) का समय और नियम

निर्जला एकादशी का व्रत 24 घंटे का होता है, और इसे अगले दिन ‘द्वादशी तिथि’ को खोला जाता है।

  • पारण की तारीख और समय: 25 जून को रखे गए व्रत का पारण 26 जून 2026 (शुक्रवार) को किया जाएगा। पारण का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 05:40 से 08:20 बजे के बीच है।

  • हरि वासर का नियम: व्रत का पारण कभी भी ‘हरि वासर’ (द्वादशी तिथि के शुरुआती एक-चौथाई हिस्से) में नहीं करना चाहिए। हरि वासर समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलें।

  • पारण कैसे करें? 26 जून की सुबह पुनः स्नान करें। भगवान की आरती करें। किसी योग्य ब्राह्मण या गरीब को जल कलश और दक्षिणा का दान करें। इसके पश्चात भगवान विष्णु के चरणों का चरणामृत (तुलसी मिश्रित जल) पीकर अपना निर्जल व्रत खोलें और फिर सात्विक भोजन ग्रहण करें।

Nirjala Ekadashi 2026 हमारे भीतर संयम, सहनशीलता और आध्यात्मिक चेतना जगाने का सबसे पवित्र अवसर है। जब हम भयंकर गर्मी में बिना एक बूंद जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं, तो हमें उन गरीब लोगों और बेजुबान जानवरों की प्यास का अहसास होता है, जिन्हें चिलचिलाती धूप में पानी नसीब नहीं होता।

“व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां” — यह बात हमें यह सिखाने के लिए है कि ईश्वर को हमारे भूखे रहने से प्रसन्नता नहीं मिलती, बल्कि हमारे विचारों और कर्मों की शुद्धि से मिलती है। चावल न खाना, जल न पीना, क्रोध न करना, प्रकृति (तुलसी) का सम्मान करना और दान करना— ये सभी क्रियाएं हमें एक बेहतर इंसान बनाती हैं। साल 2026 की इस निर्जला एकादशी पर पूर्ण निष्ठा और श्रद्धा के साथ भगवान वासुदेव का ध्यान करें। भगवान श्री हरि विष्णु आपके सभी पापों का नाश कर आपको सुख, समृद्धि और मोक्ष का अखंड आशीर्वाद प्रदान करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. निर्जला एकादशी 2026 का उपवास किस दिन रखा जाएगा?

साल 2026 में ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी का महाव्रत 25 जून, गुरुवार के दिन रखा जाएगा।

2. क्या एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में पानी डाल सकते हैं?

नहीं, एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और जल चढ़ाने से उनका व्रत टूट जाता है।

3. जो लोग बिना पानी के नहीं रह सकते, वे क्या करें?

बीमार व्यक्ति, वृद्ध, बच्चे और गर्भवती महिलाओं को ‘निर्जल’ व्रत नहीं रखना चाहिए। वे भगवान से क्षमा मांगकर फलाहार और जल (सजल व्रत) ग्रहण कर सकते हैं। सच्ची निष्ठा से किया गया सजल व्रत भी फलदायी होता है।

4. एकादशी के दिन यदि घर में कोई व्रत नहीं है, तो क्या वे चावल खा सकते हैं?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन घर में चावल पकाना और खाना पूर्ण रूप से वर्जित है, चाहे घर के किसी सदस्य ने व्रत रखा हो या नहीं। इस दिन घर में पूर्ण सात्विकता होनी चाहिए।

5. निर्जला एकादशी पर क्या दान करना सबसे शुभ होता है?

चूंकि यह व्रत प्यास से जुड़ा है, इसलिए इस दिन ‘जल से भरा मिट्टी का कलश’, खरबूजा, सत्तू और काला छाता दान करना ‘महादान’ माना जाता है। इससे पितृ दोष दूर होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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