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Ashadha Gupt Navratri 2026: Date, Puja Vidhi, Katha, Mahatva, Niyam और Upay; जानें संपूर्ण जानकारीIt takes 14 minutes... to read this article !

सनातन धर्म में शक्ति स्वरूपा माता जगदम्बा की उपासना का सबसे पावन समय ‘नवरात्रि’ माना जाता है। वर्ष भर में कुल चार बार नवरात्रि का पर्व आता है। इनमें से चैत्र और आश्विन (शारदीय) मास की नवरात्रि को ‘प्रकट नवरात्रि’ कहा जाता है, जो पूरे देश में उत्सव के रूप में मनाई जाती है। लेकिन, इनके अलावा माघ और आषाढ़ महीने में आने वाली नवरात्रि को ‘गुप्त नवरात्रि’ (Gupt Navratri) कहा जाता है।

गुप्त नवरात्रि दिखावे या उत्सव का नहीं, बल्कि पूर्ण एकांत, मौन और तांत्रिक सिद्धियों को प्राप्त करने का महापर्व है। इस दौरान माता के 9 सात्विक स्वरूपों की बजाय 10 उग्र और रहस्यमयी ‘महाविद्याओं’ की साधना की जाती है। साल 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026 से हो रहा है।

यदि आप अपनी सोई हुई किस्मत को जगाना चाहते हैं, असाध्य रोगों से मुक्ति पाना चाहते हैं, या शत्रुओं और मुकदमों पर विजय प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह समय आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस विस्तृत लेख में हम “Ashadha Gupt Navratri 2026: Date, Puja Vidhi, Katha, Mahatva, Niyam और Upay; जानें संपूर्ण जानकारी” विषय पर गहराई से चर्चा करेंगे, ताकि एक आम गृहस्थ भी इस पावन अवसर का पूर्ण लाभ उठा सके।

1. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: तिथियां और कलश स्थापना मुहूर्त (Date & Timings)

तांत्रिक साधनाओं के इस महापर्व की शुरुआत हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। साल 2026 में इसका शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:

  • प्रतिपदा तिथि का आरंभ: 14 जुलाई 2026 की देर रात से।

  • प्रतिपदा तिथि का समापन: 15 जुलाई 2026 की रात।

  • गुप्त नवरात्रि का आरंभ (कलश स्थापना): 15 जुलाई 2026 (बुधवार)

  • नवमी तिथि (समापन/पारण): 23 जुलाई 2026 (गुरुवार)

कलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त: किसी भी नवरात्रि का पूर्ण फल तभी मिलता है जब कलश की स्थापना सही मुहूर्त में की जाए। 15 जुलाई 2026 को सुबह 05:40 बजे से लेकर 10:30 बजे तक और दोपहर 11:58 से 12:50 (अभिजित मुहूर्त) के बीच कलश स्थापना करना सबसे उत्तम और सिद्धिदायक रहेगा।

2. गुप्त नवरात्रि का महत्व (Mahatva)

गुप्त नवरात्रि को तंत्र-मंत्र, यंत्र साधना और कुण्डलिनी जागरण का सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। इसका महत्व निम्नलिखित कारणों से अद्वितीय है:

  • तीव्र और शीघ्र फल की प्राप्ति: कलियुग में जहां सामान्य पूजा का फल मिलने में समय लगता है, वहीं गुप्त नवरात्रि में की गई साधना का फल बहुत तेजी से (Instant) मिलता है। ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) इस दौरान पृथ्वी पर सर्वाधिक सक्रिय होती है।

  • 10 महाविद्याओं की जाग्रत अवस्था: इस दौरान 10 महाविद्याएं पृथ्वी पर जाग्रत अवस्था में होती हैं। तांत्रिक और अघोरी श्मशान में बैठकर वामाचार से सिद्धियां प्राप्त करते हैं, जबकि गृहस्थ दक्षिणाचार (सात्विक मार्ग) से अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

  • शत्रु नाश और कोर्ट केस में विजय: मां बगलामुखी और मां काली की साधना गुप्त शत्रुओं को समूल नष्ट करने और बड़ी से बड़ी कानूनी बाधाओं (Court cases) से मुक्ति दिलाने में अचूक मानी जाती है।

  • असाध्य रोगों से मुक्ति: जिन बीमारियों में दवाइयां काम करना बंद कर देती हैं, वहां गुप्त नवरात्रि में महामृत्युंजय मंत्र और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ संजीवनी का कार्य करता है।

  • गोपनीयता का विज्ञान: इस नवरात्रि का मूल सिद्धांत ‘गोपनीयता’ है। जब हम अपनी इच्छाओं और साधना को दूसरों से छिपाकर रखते हैं, तो हमारी आध्यात्मिक ऊर्जा (Spiritual Energy) बाहर बिखरने के बजाय हमारे संकल्प पर केंद्रित हो जाती है।

3. दस महाविद्याएं: स्वरूप और उनका रहस्य (The 10 Mahavidyas)

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में माता पार्वती के जिन 10 तांत्रिक और उग्र स्वरूपों की पूजा होती है, वे इस प्रकार हैं:

  1. मां काली (Maa Kali): यह 10 महाविद्याओं में प्रथम हैं। यह समय (काल) की स्वामिनी हैं। अकाल मृत्यु, काले जादू और भयंकर शत्रुओं से रक्षा के लिए इनकी साधना की जाती है।

  2. मां तारा (Maa Tara): श्मशान में निवास करने वाली मां तारा आर्थिक संकट से उबारने, वाक्-सिद्धि और असीम धन-संपदा प्रदान करने वाली देवी हैं।

  3. मां त्रिपुर सुंदरी (Shodashi): 16 वर्ष की अत्यंत खूबसूरत देवी जो तीनों लोकों के सौंदर्य का प्रतीक हैं। सुखी दांपत्य जीवन, प्रेम और आकर्षण के लिए इनकी पूजा होती है।

  4. मां भुवनेश्वरी (Maa Bhuvaneshwari): संपूर्ण ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाली देवी। मकान, संपत्ति, भूमि और राजनीति में सर्वोच्च पद पाने के लिए यह साधना अचूक है।

  5. मां छिन्नमस्ता (Maa Chhinnamasta): अपना ही मस्तक काटकर रक्त पीने वाली यह देवी कुण्डलिनी शक्ति को जाग्रत करने और काम-वासना व अहंकार को नष्ट करने की सबसे बड़ी शक्ति हैं।

  6. मां त्रिपुर भैरवी (Maa Tripura Bhairavi): काल और मृत्यु के भय को खत्म करने वाली देवी। जो इनकी साधना करता है, उसे दुनिया की कोई भी ताकत डरा नहीं सकती।

  7. मां धूमावती (Maa Dhumavati): यह विधवा स्वरूप में पूजी जाती हैं। दरिद्रता, दुर्भाग्य और बुरी नजर का नाश करने के लिए इनकी साधना की जाती है।

  8. मां बगलामुखी (Maa Bagalamukhi): पीले वस्त्रों वाली स्तंभन की देवी। विरोधियों की जुबान बंद करने और मुकदमों में जीत के लिए इनकी पूजा की जाती है।

  9. मां मातंगी (Maa Matangi): यह जूठे भोजन (उच्छिष्ट) से प्रसन्न होने वाली देवी हैं। कला, गायन, संगीत और तीव्र वशीकरण के लिए इनकी साधना की जाती है।

  10. मां कमला (Maa Kamala): मां लक्ष्मी का तांत्रिक स्वरूप। जो इंसान भयंकर कर्ज में डूबा हो, मां कमला की साधना उसे रातों-रात करोड़पति बना सकती है।

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4. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पूजा विधि (Puja Vidhi & Kalash Sthapana)

एक आम गृहस्थ को गुप्त नवरात्रि में उग्र तांत्रिक साधना के बजाय ‘सात्विक मार्ग’ (दक्षिणाचार) से पूजा करनी चाहिए। पूजा की विस्तृत विधि इस प्रकार है:

कलश स्थापना विधि (Ghatasthapana)

  1. स्थान शुद्धि: 15 जुलाई की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को साफ करके गंगाजल छिड़कें।

  2. चौकी स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और माता दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

  3. जौ बोना (खेतरी): मिट्टी के एक चौड़े बर्तन में साफ मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं।

  4. कलश तैयार करना: मिट्टी या तांबे के कलश पर स्वास्तिक बनाएं। उसके गले में कलावा (मौली) बांधें। कलश में शुद्ध जल, गंगाजल, एक सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ और दूर्वा डालें।

  5. नारियल स्थापना: कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 पत्ते रखें। एक जटा वाले नारियल पर लाल चुनरी लपेटकर उसे पत्तों के ऊपर रख दें (नारियल का मुख आपकी ओर हो)।

  6. संकल्प: हाथ में अक्षत और जल लेकर गुप्त नवरात्रि के 9 दिनों की पूजा का संकल्प लें और कलश को जौ वाले बर्तन के बीच में स्थापित कर दें।

दैनिक पूजा विधि (Daily Puja)

  • अखंड ज्योति: 9 दिनों तक माता के सामने गाय के घी या तिल के तेल की अखंड ज्योति जलाएं।

  • नवार्ण मंत्र का जाप: प्रतिदिन सुबह और रात को (विशेषकर रात 10 बजे के बाद) लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का 108 बार जाप करें।

  • दुर्गा सप्तशती पाठ: समय हो तो प्रतिदिन ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ करें। यदि समय कम है तो केवल ‘सिद्ध कुंजिका स्तोत्र’ का पाठ कर लें, यह संपूर्ण सप्तशती के बराबर फल देता है।

  • सात्विक भोग: माता को प्रतिदिन बताशे, लौंग, लाल पुष्प (गुड़हल या गुलाब) और सात्विक मिष्ठान्न का भोग लगाएं।

5. गुप्त नवरात्रि की प्रामाणिक व्रत कथा (Vrat Katha)

गुप्त नवरात्रि के जन्म और इसके महत्व को दर्शाने वाली शृंगी ऋषि की एक अत्यंत प्रसिद्ध कथा है, जो इस प्रकार है:

प्राचीन काल में एक बार शृंगी ऋषि अपने आश्रम में ध्यानमग्न थे। तभी वहां एक गरीब और अत्यंत दुखी ब्राह्मण आया। उसने ऋषि के चरण पकड़ लिए और रोते हुए कहा— “हे मुनिश्रेष्ठ! मेरा परिवार भयंकर दरिद्रता और बीमारियों से घिर गया है। मेरे बच्चे भूखे मर रहे हैं। मैं माता जगदम्बा की पूजा करना चाहता हूं, लेकिन लोग कहते हैं कि देवी की पूजा केवल चैत्र और शारदीय नवरात्रि में ही फलदायी होती है। मेरे पास इतना समय और धन नहीं है कि मैं उन नवरात्रियों में कोई भव्य अनुष्ठान कर सकूं। कृपया मुझे कोई ऐसा मार्ग बताएं जिससे मेरी दरिद्रता तत्काल दूर हो जाए।”

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ब्राह्मण की करुण पुकार सुनकर शृंगी ऋषि को उस पर दया आ गई। उन्होंने कहा— “हे विप्र! यह सत्य है कि आम जनमानस केवल दो प्रकट नवरात्रियों (चैत्र और शारदीय) को ही जानता है। लेकिन सनातन धर्म में साल में चार नवरात्रियां होती हैं। इनमें माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रियों को ‘गुप्त नवरात्रि’ कहा जाता है। यह साधना और तंत्र-मंत्र का अत्यंत रहस्यमयी समय है।”

ऋषि ने आगे कहा— “गुप्त नवरात्रि में माता के 9 सात्विक स्वरूपों की नहीं, बल्कि 10 महाविद्याओं की पूजा होती है। यदि कोई व्यक्ति भयंकर संकट में हो, कर्ज में डूबा हो या अकाल मृत्यु के डर से ग्रसित हो, तो उसे आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में माता की उपासना करनी चाहिए। इसमें भव्य पंडाल, दिखावे या बहुत अधिक धन की आवश्यकता नहीं होती। इसमें केवल ‘एकांत, मौन और सात्विकता’ की आवश्यकता होती है।”

मुनि ने ब्राह्मण को ‘नवार्ण मंत्र’ (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) की दीक्षा दी और कहा कि 9 रातों तक एकांत में बैठकर बिना किसी को बताए इस मंत्र का जाप करो। ब्राह्मण ने शृंगी ऋषि की आज्ञा मानकर आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में पूर्ण निष्ठा, ब्रह्मचर्य और एकांत के साथ माता की आराधना की।

उसकी गुप्त और सच्ची साधना से माता जगदम्बा अत्यंत प्रसन्न हुईं। नवमी की रात माता ने उसे दर्शन दिए और उसके सभी कष्टों को हर लिया। कुछ ही समय में वह ब्राह्मण अपार धन-संपत्ति का स्वामी बन गया और उसका परिवार सुखी हो गया।

कथा का सार: इस कथा से यह सिद्ध होता है कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए दिखावे या भव्यता की जरूरत नहीं है। सच्ची श्रद्धा और गुप्त रूप से की गई साधना का फल सबसे तीव्र होता है।

6. गुप्त नवरात्रि के कड़े नियम और सावधानियां (Strict Niyam)

“Ashadha Gupt Navratri 2026: Date, Puja Vidhi, Katha, Mahatva, Niyam और Upay; जानें संपूर्ण जानकारी” के इस चरण में नियमों का पालन करना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। थोड़ी सी भी लापरवाही पूजा को खंडित कर सकती है:

क्या करें (Do’s):

  • गोपनीयता बनाए रखें: यह सबसे बड़ा नियम है। आप कितने व्रत रख रहे हैं, कौन सा मंत्र जप रहे हैं, यह बात आपके घर के बाहर किसी को भी (मित्र या पड़ोसी को) पता नहीं चलनी चाहिए।

  • पूर्ण ब्रह्मचर्य: 9 दिनों तक पूर्ण शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का पालन करें।

  • लाल या पीले वस्त्र: पूजा के समय हमेशा लाल, पीले, गुलाबी या सफेद सूती वस्त्र धारण करें।

  • जमीन पर शयन: साधक को इन 9 दिनों में पलंग का त्याग कर जमीन पर चटाई बिछाकर सोना चाहिए।

क्या न करें (Don’ts):

  • तामसिक भोजन वर्जित: घर में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और अंडे का प्रवेश पूर्ण रूप से बंद होना चाहिए। सात्विक आहार (जैसे सेंधा नमक, कुट्टू, फल, दूध) ही लें।

  • काले रंग से बचें: पूजा के दौरान काले या गहरे नीले रंग के कपड़े भूलकर भी न पहनें।

  • बाल और नाखून काटना मना है: पूरे 9 दिनों तक दाढ़ी बनाना, बाल कटवाना और नाखून काटना सख्त वर्जित है।

  • क्रोध और निंदा: मंत्र जाप से शरीर में ऊर्जा पैदा होती है। यदि आप गुस्सा करते हैं या किसी को गाली देते हैं, तो वह तांत्रिक ऊर्जा नकारात्मक रूप ले लेती है और आपको ही नुकसान पहुंचाती है। मन शांत रखें।

7. मनोकामना पूर्ति के लिए 7 अचूक गुप्त उपाय (Powerful Upay)

गुप्त नवरात्रि के दौरान किए गए टोटके और उपाय कभी खाली नहीं जाते। अपनी समस्या के अनुसार आप इन 9 दिनों में कोई भी उपाय कर सकते हैं:

I. अपार धन प्राप्ति और कर्ज मुक्ति के लिए

  • पीली कौड़ी का उपाय: शुक्रवार या अष्टमी की रात पूजा के समय 5 पीली कौड़ियां, 5 कमलगट्टे और 5 गोमती चक्र माता की तस्वीर के सामने रखें। इन पर केसर का तिलक करें और “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद…” मंत्र का 108 बार जाप करें। पूजा के बाद इन्हें लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या गल्ले में रख दें।

  • श्री सूक्तम का पाठ: रात 10 से 12 बजे के बीच एकांत में बैठकर घी का दीपक जलाएं और ‘श्री सूक्तम’ का 11 बार पाठ करें। बड़े से बड़ा कर्ज चमत्कारिक रूप से उतर जाएगा।

II. नौकरी में प्रमोशन और व्यापार वृद्धि के लिए

  • पान के पत्ते का उपाय: गुप्त नवरात्रि के किसी भी दिन एक साबुत पान का पत्ता लें। उस पर गुलाब जल और सिंदूर से ‘स्वास्तिक’ बनाएं। इस पर थोड़े से चावल रखकर माता के चरणों में अर्पित कर दें। नौकरी की रुकावटें दूर हो जाएंगी।

  • हल्दी की गांठ: 7 साबुत हल्दी की गांठों को पीले कपड़े में बांधकर “ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः” का जाप करें और इसे अपने ऑफिस या दुकान के मुख्य द्वार पर टांग दें। व्यापार में ग्राहकों की लाइन लग जाएगी।

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III. नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए

  • लौंग और कपूर: प्रतिदिन शाम के समय एक मिट्टी के दीये में 2 कपूर की टिकिया और 2 साबुत लौंग (फूल वाली) जलाएं। इसका धुआं पूरे घर में घुमाएं। इससे घर का वास्तु दोष और दरिद्रता जलकर भस्म हो जाती है।

IV. विवाह में आ रही बाधाएं दूर करने के लिए

  • मां त्रिपुर सुंदरी का उपाय: जिन युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो रहा है, वे गुप्त नवरात्रि के 9 दिनों तक पीले वस्त्र पहनकर माता को लाल गुलाब अर्पित करें और “पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्” (लड़कों के लिए) या मां गौरी के मंत्रों (लड़कियों के लिए) का 108 बार जाप करें।

V. कोर्ट केस और शत्रुओं पर विजय के लिए

  • मां बगलामुखी का उपाय: पीले कपड़े पहनकर, उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। माता को हल्दी की गांठें और पीले फूल अर्पित करें। रुद्राक्ष या हल्दी की माला से “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय…” मंत्र का जाप करें। शत्रु स्वतः ही घुटने टेक देंगे।

8. कन्या पूजन और पारण विधि (Fast Breaking)

गुप्त नवरात्रि का समापन कन्या पूजन के साथ ही पूर्ण माना जाता है:

  • 22 जुलाई (अष्टमी) या 23 जुलाई 2026 (नवमी) के दिन 9 छोटी कन्याओं (जिनकी उम्र 10 वर्ष से कम हो) को आदरपूर्वक अपने घर आमंत्रित करें।

  • उनके चरण धोकर उन्हें साफ आसन पर बिठाएं।

  • उन्हें सात्विक भोजन (हलवा, चना और पूड़ी) कराएं।

  • कन्याओं को माता का साक्षात स्वरूप मानकर उनके पैर छुएं और उन्हें श्रृंगार का सामान, वस्त्र, लाल चुनरी और दक्षिणा देकर विदा करें।

  • कन्या पूजन संपन्न होने के बाद ही साधक को स्वयं अन्न-जल ग्रहण करके अपना व्रत (पारण) खोलना चाहिए।

सनातन परंपरा में समय और ग्रहों के गोचर का विशेष महत्व है। “Ashadha Gupt Navratri 2026: Date, Puja Vidhi, Katha, Mahatva, Niyam और Upay; जानें संपूर्ण जानकारी” — इस लेख के माध्यम से अब यह स्पष्ट हो गया है कि यह 9 दिनों का समय केवल उपवास रखने का नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर सोई हुई अनंत शक्तियों को जाग्रत करने का अवसर है।

आने वाली 15 जुलाई 2026 से जब यह जादुई पर्व शुरू हो, तो बिना किसी दिखावे के, पूर्ण एकांत और सात्विकता के साथ माता जगदम्बा के चरणों में अपना ध्यान लगाएं। 10 महाविद्याएं केवल तांत्रिकों के लिए नहीं हैं; एक शुद्ध हृदय वाला गृहस्थ भी यदि नवार्ण मंत्र या सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के माध्यम से उन्हें पुकारता है, तो माता उसकी हर विपत्ति को दूर करती हैं। इन 9 दिनों में किए गए आपके जप, तप और उपाय आपके जीवन को नई दिशा देंगे और आपको सुख, शांति, समृद्धि व अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी।

जय माता दी! ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. साल 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब से शुरू हो रही है?

साल 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई (बुधवार) को कलश स्थापना के साथ आरंभ होगी और 23 जुलाई (गुरुवार) को नवमी तिथि के दिन इसका समापन होगा।

2. क्या आम गृहस्थ लोग भी गुप्त नवरात्रि की पूजा और व्रत कर सकते हैं?

बिल्कुल कर सकते हैं। गृहस्थों को ‘दक्षिणाचार’ (सात्विक मार्ग) से माता की आराधना करनी चाहिए। वे नवार्ण मंत्र का जाप, दुर्गा सप्तशती का पाठ और सात्विक आहार लेकर इस नवरात्रि का पूर्ण पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

3. गुप्त नवरात्रि की पूजा मुख्य रूप से रात में ही क्यों की जाती है?

गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना का पर्व है। रात का समय ‘निशिता काल’ कहलाता है। इस समय कोलाहल शांत होता है, मन एकाग्र होता है और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह तीव्र होता है, जिससे मंत्र बहुत जल्दी सिद्ध होते हैं।

4. 10 महाविद्याओं में सबसे उग्र देवी कौन सी हैं?

वैसे तो सभी महाविद्याएं अत्यंत शक्तिशाली हैं, लेकिन मां छिन्नमस्ता, मां धूमावती और मां काली के स्वरूप को सबसे अधिक उग्र, भयानक और रहस्यमयी माना जाता है।

5. क्या महिलाएं मासिक धर्म (Periods) में गुप्त नवरात्रि के उपाय कर सकती हैं?

मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को माता की मूर्ति स्पर्श करने, दीपक जलाने और कलश के पास जाने की मनाही होती है। वे एक स्थान पर बैठकर मानसिक रूप से (मन ही मन) नवार्ण मंत्र का जाप कर सकती हैं। भौतिक उपाय वे घर के किसी अन्य सदस्य से करवा सकती हैं।

6. यदि गुप्त नवरात्रि में कोई नियम टूट जाए तो क्या करें?

ईश्वर भावना के भूखे होते हैं। यदि अज्ञानतावश या भूल से कोई नियम टूट जाए (जैसे अनजाने में कुछ खा लेना), तो तुरंत माता से हृदय से क्षमा मांगें और अपनी साधना जारी रखें। जानबूझकर नियम तोड़ना वर्जित है।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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