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Asht Lakshmi Mantra (अष्ट लक्ष्मी मन्त्र): जप कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियांIt takes 10 minutes... to read this article !

भारतीय सनातन परंपरा में माता लक्ष्मी को केवल धन और वैभव की देवी ही नहीं माना गया है, बल्कि उन्हें जीवन के आठ अलग-अलग आयामों (सुख, शांति, विद्या, शक्ति, विजय आदि) की अधिष्ठात्री देवी के रूप में भी पूजा जाता है। देवी लक्ष्मी के इन आठ स्वरूपों को सम्मिलित रूप से ‘अष्ट लक्ष्मी’ कहा जाता है।

अक्सर लोग केवल धन प्राप्ति के लिए माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं, लेकिन जीवन में यदि स्वास्थ्य, बुद्धि, साहस या पारिवारिक सुख न हो, तो केवल धन का कोई मोल नहीं रह जाता। जीवन के हर क्षेत्र में सर्वांगीण विकास और संपूर्णता प्राप्त करने के लिए अष्ट लक्ष्मी मन्त्र (Asht Lakshmi Mantra) का जप और अष्ट लक्ष्मी साधना सबसे अचूक और प्रभावशाली मार्ग माना गया है।

इस विस्तृत लेख में हम अष्ट लक्ष्मी मन्त्र, साधना की संपूर्ण विधि, नियम, इससे होने वाले लाभ, इसके महत्व और जप के दौरान रखी जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह जानकारी पूरी तरह से प्रामाणिक और आपके आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ाने वाली है।

अष्ट लक्ष्मी कौन हैं? (Who are the Asht Lakshmis?)

अष्ट लक्ष्मी, माता महालक्ष्मी के आठ विशेष स्वरूप हैं। जो भी साधक इन आठों स्वरूपों की एक साथ साधना करता है, उसे जीवन में किसी भी वस्तु का अभाव नहीं रहता। अष्ट लक्ष्मी के मन्त्रों का जप करने से पहले उनके स्वरूपों को समझना अत्यंत आवश्यक है:

1. आदि लक्ष्मी (Adi Lakshmi)

यह माता लक्ष्मी का सबसे प्राचीन और मूल स्वरूप है। इन्हें ऋषि भृगु की पुत्री माना जाता है। यह स्वरूप मोक्ष और आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला है।

  • मूल मन्त्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमलवासिन्यै स्वाहा॥

2. धन लक्ष्मी (Dhana Lakshmi)

धन लक्ष्मी आर्थिक समस्याओं को दूर कर जीवन में धन, संपत्ति और वैभव की वर्षा करती हैं। कर्ज मुक्ति के लिए इनकी विशेष रूप से आराधना की जाती है।

  • मूल मन्त्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥

3. धान्य लक्ष्मी (Dhanya Lakshmi)

धान्य का अर्थ है अन्न। यह स्वरूप सुनिश्चित करता है कि साधक के घर में कभी अन्न और जल की कमी न हो। यह किसानों और अन्नदाताओं की इष्ट देवी हैं।

  • मूल मन्त्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं धान्यलक्ष्म्यै नमः॥

4. गज लक्ष्मी (Gaja Lakshmi)

गज लक्ष्मी पशु-धन और राजसी सुख-सुविधाओं की देवी हैं। प्राचीन काल में गाय और हाथियों को सबसे बड़ा धन माना जाता था। आज के संदर्भ में यह वाहन सुख और राजसत्ता प्रदान करती हैं।

  • मूल मन्त्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गजलक्ष्म्यै नमः॥

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5. संतान लक्ष्मी (Santana Lakshmi)

संतान प्राप्ति और बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए माता संतान लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इनका स्वरूप मातृत्व और वात्सल्य से परिपूर्ण है।

  • मूल मन्त्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सन्तानलक्ष्म्यै नमः॥

6. धैर्य लक्ष्मी / वीर लक्ष्मी (Dhairya Lakshmi / Veera Lakshmi)

जीवन के कठिन समय में साहस, धैर्य और पराक्रम प्रदान करने वाली देवी वीर लक्ष्मी हैं। यह साधक को मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं।

  • मूल मन्त्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं वीरलक्ष्म्यै नमः॥

7. विजय लक्ष्मी / जय लक्ष्मी (Vijaya Lakshmi)

कोर्ट-कचहरी, वाद-विवाद, परीक्षा या किसी भी संघर्ष में विजय दिलाने वाली माता विजय लक्ष्मी हैं। यह हर क्षेत्र में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

  • मूल मन्त्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं विजयलक्ष्म्यै नमः॥

8. विद्या लक्ष्मी (Vidya Lakshmi)

ज्ञान, कला, कौशल और बुद्धि की देवी विद्या लक्ष्मी हैं। यह साधक को आत्मज्ञान और लौकिक ज्ञान दोनों प्रदान करती हैं।

  • मूल मन्त्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं विद्यालक्ष्म्यै नमः॥

अष्ट लक्ष्मी का संयुक्त महामंत्र (Asht Lakshmi Maha Mantra): यदि आप अलग-अलग मन्त्रों का जप नहीं कर सकते, तो आप इस सिद्ध मंत्र का जप कर सकते हैं: “ॐ ह्रीं श्रीं अष्टलक्ष्म्यै ह्रीं सिद्धये मम गृहे आगच्छागच्छ नमः स्वाहा।”

अष्ट लक्ष्मी मन्त्र का महत्व (Significance of Asht Lakshmi Mantra)

हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, अष्ट लक्ष्मी स्तोत्र और अष्ट लक्ष्मी मन्त्र का महत्व अवर्णनीय है।

  1. सर्वांगीण विकास: यह मन्त्र केवल बैंक बैलेंस नहीं बढ़ाता, बल्कि व्यक्ति को चरित्रवान, धैर्यवान और ज्ञानवान बनाता है।

  2. नकारात्मक ऊर्जा का नाश: अष्ट लक्ष्मी मन्त्र की ध्वनि से घर का वातावरण शुद्ध होता है और वास्तु दोष व नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

  3. कर्म और भाग्य का संतुलन: यह साधना व्यक्ति को कर्म करने के लिए प्रेरित करती है और भाग्य का बंद ताला खोलती है।

  4. ऋण से मुक्ति: जो लोग पुश्तैनी या भारी कर्ज तले दबे हैं, उनके लिए अष्ट लक्ष्मी साधना किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है।

अष्ट लक्ष्मी साधना विधि: जप कैसे करें? (Asht Lakshmi Mantra Jaap Vidhi)

अष्ट लक्ष्मी मंत्र का जप पूरी श्रद्धा और सही विधि-विधान के साथ किया जाना चाहिए। यदि आप पूर्ण लाभ चाहते हैं, तो नीचे दी गई चरण-दर-चरण (Step-by-step) विधि का पालन करें:

1. सही समय और दिन का चुनाव

  • अष्ट लक्ष्मी साधना के लिए शुक्रवार का दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

  • दीपावली, शरद पूर्णिमा, या किसी भी शुभ मुहूर्त (जैसे रवि पुष्य योग) में यह साधना शुरू की जा सकती है।

  • समय के लिए गोधूलि बेला (सूर्यास्त का समय) या ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) सबसे उत्तम है।

2. पूजा स्थल की तैयारी

  • घर के ईशान कोण (North-East direction) को साफ करके वहां एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें।

  • चौकी पर लाल या गुलाबी रंग का रेशमी वस्त्र बिछाएं।

  • उस पर माता अष्ट लक्ष्मी का चित्र या श्रीयंत्र स्थापित करें। (यदि अष्ट लक्ष्मी का चित्र न हो, तो माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का चित्र भी रख सकते हैं)।

3. आवश्यक पूजन सामग्री

  • शुद्ध घी का दीपक

  • गुलाब या कमल के फूल

  • कुमकुम, हल्दी, अक्षत (बिना टूटे चावल)

  • कमलगट्टे की माला (अथवा स्फटिक की माला)

  • नैवेद्य (खीर, बताशे या पंचमेवा)

  • गंगाजल और इत्र

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4. संकल्प (Sankalp)

किसी भी साधना की सफलता के लिए संकल्प बहुत आवश्यक है। दाएँ हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत और एक सिक्का लेकर अपना नाम, गोत्र और अपनी मनोकामना (जैसे कर्ज मुक्ति या धन प्राप्ति) बोलें और उस जल को माता के चरणों में छोड़ दें।

5. पूजन और ध्यान (Puja and Dhyan)

  • सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और उनसे साधना की निर्विघ्न पूर्णता का आशीर्वाद लें।

  • तत्पश्चात माता अष्ट लक्ष्मी को स्नान कराएं (यदि मूर्ति है तो) या चित्र पर गंगाजल छिड़कें।

  • माता को कुमकुम का तिलक लगाएं, इत्र अर्पित करें और लाल पुष्प चढ़ाएं।

  • धूप और शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।

6. मंत्र जप प्रक्रिया (Chanting Process)

  • कुशा या लाल ऊनी आसन पर पद्मासन या सुखासन में बैठें। आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

  • कमलगट्टे की माला या स्फटिक की माला से “ॐ ह्रीं श्रीं अष्टलक्ष्म्यै ह्रीं सिद्धये मम गृहे आगच्छागच्छ नमः स्वाहा” मंत्र का जप करें।

  • प्रतिदिन कम से कम 1 माला (108 बार) या 11 माला का जप करें।

  • जप के दौरान ध्यान माता लक्ष्मी के कमल रूपी चरणों में केंद्रित होना चाहिए।

7. आरती और क्षमा प्रार्थना

  • जप पूरा होने के बाद माता लक्ष्मी की आरती (ॐ जय लक्ष्मी माता) करें।

  • अंत में अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए माता से क्षमा मांगें।

अष्ट लक्ष्मी साधना के नियम (Rules for Asht Lakshmi Sadhana)

मंत्र शास्त्र में नियमों का बहुत महत्व है। बिना नियमों के की गई साधना अक्सर निष्फल हो जाती है। अष्ट लक्ष्मी मन्त्र जप के प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:

  1. पवित्रता और स्वच्छता: साधना के दिनों में शारीरिक और मानसिक पवित्रता बनाए रखें। स्नान के बाद स्वच्छ और धुले हुए (प्राथमिक रूप से लाल या हल्के रंग के) वस्त्र ही धारण करें।

  2. सात्विक आहार: जब तक आपका जप या अनुष्ठान चल रहा हो, मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन का पूर्ण रूप से त्याग करें।

  3. ब्रह्मचर्य का पालन: साधना काल के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है।

  4. समय और स्थान की स्थिरता: जिस समय और जिस स्थान पर आपने पहले दिन जप किया है, प्रतिदिन उसी समय और उसी स्थान पर जप करें। इसमें बदलाव करने से ऊर्जा का प्रवाह टूट जाता है।

  5. गोपनीयता: अपनी साधना, मन्त्र और अपने अनुभवों को किसी बाहरी व्यक्ति के सामने प्रकट न करें। गुप्त साधना अधिक फलीभूत होती है।

  6. स्त्री का सम्मान: माता लक्ष्मी उसी घर में वास करती हैं जहाँ महिलाओं (माँ, बहन, पत्नी, पुत्री) का सम्मान होता है। महिलाओं का अपमान करने वाले की साधना कभी सिद्ध नहीं होती।

अष्ट लक्ष्मी मन्त्र जप के लाभ (Benefits of Asht Lakshmi Mantra)

जो भी साधक निष्काम या सकाम भाव से अष्ट लक्ष्मी की उपासना करता है, उसके जीवन में निम्नलिखित चमत्कारी बदलाव आते हैं:

  • आर्थिक स्थिरता: आय के नए स्रोत खुलते हैं, रुका हुआ धन वापस मिलता है और दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है।

  • ऋण मुक्ति (Debt Relief): बड़े से बड़ा कर्ज उतारने के मार्ग प्रशस्त हो जाते हैं।

  • पारिवारिक सुख: घर-क्लेश समाप्त होता है और परिवार के सदस्यों में प्रेम व सौहार्द बढ़ता है।

  • संतान सुख: जो दंपत्ति संतान हीनता का दंश झेल रहे हैं, उन्हें संतान लक्ष्मी की कृपा से उत्तम और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति होती है।

  • आत्मविश्वास और सफलता: वीर लक्ष्मी और विजय लक्ष्मी की कृपा से साधक के भीतर गजब का आत्मविश्वास आता है, जिससे वह हर प्रतियोगिता और व्यापार में सफलता हासिल करता है।

  • रोगों से मुक्ति: अष्ट लक्ष्मी साधना से मानसिक अवसाद (Depression) और शारीरिक बीमारियां दूर होती हैं, जिससे एक स्वस्थ जीवन मिलता है।

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अष्ट लक्ष्मी मंत्र जप में सावधानियां (Precautions during Mantra Jaap)

अष्ट लक्ष्मी बहुत ही सौम्य देवी हैं, लेकिन मन्त्र जप ऊर्जा विज्ञान पर आधारित है, इसलिए कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक है:

  • गलत उच्चारण न करें: मन्त्र का उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए। यदि मन्त्र बोलने में कठिनाई हो, तो पहले इसे किसी योग्य गुरु से सुनें या ऑडियो के माध्यम से इसका सही उच्चारण सीखें।

  • क्रोध से बचें: साधना काल के दौरान क्रोध करना, किसी को अपशब्द कहना या झूठ बोलने से आपके द्वारा एकत्रित की गई सकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।

  • टूटी माला का प्रयोग न करें: जप के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कमलगट्टे या स्फटिक की माला खंडित (टूटी हुई) नहीं होनी चाहिए।

  • दीपक न बुझे: यह सुनिश्चित करें कि मंत्र जप के दौरान अखंड दीपक या आपका जलाया हुआ दीपक तेल/घी की कमी या हवा के कारण बीच में न बुझे।

  • अहंकार न करें: धन या सफलता मिलने पर अहंकार भूलकर भी न करें। अहंकार आते ही लक्ष्मी जी उस स्थान को छोड़ देती हैं।

अष्ट लक्ष्मी स्तुति (पाठ और श्रवण के लिए)

(नोट: आपके दैनिक पाठ और साधना को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए आप अपनी पूजा में आदि शंकराचार्य रचित ‘अष्टलक्ष्मी स्तोत्र’ का नियमित पाठ कर सकते हैं।)

अष्ट लक्ष्मी मन्त्र (Asht Lakshmi Mantra) केवल धन कमाने का शॉर्टकट (Shortcut) नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित, समृद्ध और शांतिपूर्ण बनाने का एक आध्यात्मिक मार्ग है। जब आप आदि, धन, धान्य, गज, संतान, धैर्य, विजय और विद्या—इन आठों लक्ष्मियों को अपने जीवन में आमंत्रित करते हैं, तो आपका जीवन सच्चे अर्थों में स्वर्ग बन जाता है।

याद रखें, माता लक्ष्मी उसी पर कृपा करती हैं जो कर्मठ (Hardworking) होता है। इसलिए मंत्र जप के साथ-साथ अपने कर्मों को भी श्रेष्ठ बनाए रखें। पूर्ण श्रद्धा, अटूट विश्वास और विधि-विधान से की गई अष्ट लक्ष्मी साधना कभी भी खाली नहीं जाती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. अष्ट लक्ष्मी मंत्र का जप किस समय करना चाहिए?

अष्ट लक्ष्मी मंत्र का जप करने के लिए सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:00 से 6:00 बजे के बीच) या फिर गोधूलि बेला (सूर्यास्त के समय) माना जाता है। शुक्रवार की शाम का समय विशेष रूप से फलदायी होता है।

Q2. क्या महिलाएं अष्ट लक्ष्मी मंत्र का जप कर सकती हैं?

हाँ, बिल्कुल। महिलाएं पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ अष्ट लक्ष्मी मंत्र का जप कर सकती हैं। केवल मासिक धर्म (Periods) के उन 4-5 दिनों में मंत्र का मानसिक जप किया जा सकता है, लेकिन पूजा स्थल को स्पर्श न करें।

Q3. मंत्र जप के लिए कौन सी माला सर्वोत्तम है?

माता लक्ष्मी के किसी भी मंत्र का जप करने के लिए ‘कमल गट्टे की माला’ (Kamal Gatta Mala) को सर्वोत्तम माना जाता है। यदि यह उपलब्ध न हो तो आप ‘स्फटिक की माला’ (Sphatik Mala) का उपयोग भी कर सकते हैं।

Q4. अष्ट लक्ष्मी साधना कितने दिनों की होती है?

सवा महीने (लगभग 41 दिन) का अनुष्ठान सबसे उत्तम माना जाता है। यदि आप कोई संकल्प लेते हैं, तो कम से कम 11, 21 या 41 दिनों तक नियमित रूप से एक निश्चित समय पर इस मंत्र का जप करें।

Q5. क्या बिना दीक्षा के यह मंत्र जपा जा सकता है?

हाँ, सामान्य अष्ट लक्ष्मी मंत्र और स्तोत्र का जप बिना किसी विशेष दीक्षा के किया जा सकता है। आप भगवान शिव या भगवान विष्णु को मानसिक रूप से अपना गुरु मानकर इस साधना को प्रारंभ कर सकते हैं।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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