अंतरिक्ष में होने वाली खगोलीय घटनाओं को लेकर मानव मन में हमेशा से ही एक गहरी उत्सुकता रही है। इनमें से सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) और चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) सबसे प्रमुख और रोमांचक घटनाएं मानी जाती हैं। विज्ञान की दृष्टि से जहां यह सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की लुका-छिपी का एक अद्भुत नजारा है, वहीं धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण का सीधा प्रभाव मानव जीवन, प्रकृति और राशियों पर पड़ता है।
साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि इस वर्ष कुल चार ग्रहण (दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण) लगने वाले हैं। पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगेगा, जो एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। इसके बाद साल का दूसरा चंद्र ग्रहण अगस्त महीने में लगेगा। जो लोग खगोल विज्ञान में रुचि रखते हैं और जो लोग ज्योतिषीय मान्यताओं का पालन करते हैं, वे इस बात को लेकर बेहद उत्सुक हैं कि 2026 का दूसरा Chandra Grahan इस दिन लगेगा! जानें भारत में दिखेगा या नहीं।
इस विस्तृत और शोधपूर्ण लेख में हम आपको साल 2026 के दूसरे चंद्र ग्रहण की सटीक तारीख, समय, भारत में इसकी दृश्यता, सूतक काल के नियम, और इसके वैज्ञानिक व ज्योतिषीय प्रभावों के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे।
2026 के दूसरे चंद्र ग्रहण की सटीक तिथि और समय (Date and Time of 2nd Lunar Eclipse 2026)
खगोलीय गणनाओं (Astronomical Calculations) के अनुसार, साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026, शुक्रवार के दिन लगेगा। यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण (Deep Partial Lunar Eclipse) होगा। आंशिक होने के बावजूद यह ग्रहण बहुत खास है, क्योंकि इस दौरान चंद्रमा का लगभग 93% से 96% हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया (Umbra) से ढक जाएगा।
आइए समय-सारणी के माध्यम से समझते हैं कि यह ग्रहण भारतीय समयानुसार (Indian Standard Time – IST) और विश्वव्यापी समय (UTC) के अनुसार कब से कब तक रहेगा:
| ग्रहण की अवस्था (Eclipse Phase) | विश्वव्यापी समय (UTC) – 28 अगस्त | भारतीय समयानुसार (IST) – 28 अगस्त |
| उपच्छाया ग्रहण प्रारंभ (Penumbral Eclipse Begins) | 01:23 AM | सुबह 06:53 बजे |
| आंशिक चंद्र ग्रहण प्रारंभ (Partial Eclipse Begins) | 02:33 AM | सुबह 08:03 बजे |
| परम ग्रास / अधिकतम ग्रहण (Greatest Eclipse) | 04:12 AM | सुबह 09:42 बजे |
| आंशिक चंद्र ग्रहण समाप्त (Partial Eclipse Ends) | 05:52 AM | सुबह 11:22 बजे |
| उपच्छाया ग्रहण समाप्त (Penumbral Eclipse Ends) | 07:01 AM | दोपहर 12:31 बजे |
नोट: ग्रहण की कुल अवधि (उपच्छाया सहित) लगभग 5 घंटे 38 मिनट की होगी, जबकि मुख्य आंशिक ग्रहण की अवधि लगभग 3 घंटे 18 मिनट रहेगी।
क्या 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा? (Visibility of Lunar Eclipse in India)
जब भी कोई ग्रहण लगने वाला होता है, तो भारत के लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या यह ग्रहण हमारे देश में नजर आएगा?
सीधा और स्पष्ट जवाब है: नहीं। 28 अगस्त 2026 को लगने वाला साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
भारत में दिखाई न देने का वैज्ञानिक कारण:
ऊपर दी गई समय-सारणी (Time Table) को ध्यान से देखने पर आप समझ सकते हैं कि भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह 08:03 बजे से शुरू होकर दोपहर 11:22 बजे (मुख्य आंशिक चरण) तक रहेगा। हम सभी जानते हैं कि भारत में इस समय दिन का उजाला होता है और सूर्य आकाश में चमक रहा होता है।
चंद्र ग्रहण केवल तभी देखा जा सकता है जब वह आपके स्थान पर रात के समय (यानी चंद्रमा क्षितिज के ऊपर हो) घटित हो रहा हो। क्योंकि भारत में उस समय चंद्रमा क्षितिज (Horizon) के नीचे अस्त हो चुका होगा, इसलिए यह अद्भुत खगोलीय घटना भारतवासियों की आंखों से ओझल रहेगी।
सूतक काल से जुड़ी जरूरी जानकारी (Sutak Kaal of 2026 Second Chandra Grahan)
सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में ‘सूतक काल’ (Sutak Kaal) का विशेष महत्व है। सूतक काल उस अशुभ समयावधि को कहा जाता है जो ग्रहण शुरू होने से कुछ घंटे पहले लग जाती है। चंद्र ग्रहण के मामले में सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले लग जाता है। सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्य, मंदिर में प्रवेश और भोजन पकाने व खाने की मनाही होती है।
क्या 28 अगस्त 2026 के चंद्र ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा?
ज्योतिष शास्त्र का एक स्पष्ट और सर्वमान्य नियम है: “यत्र दृश्यते, तत्र फल्यते।” इसका अर्थ है कि ग्रहण जिस स्थान पर दिखाई देता है, केवल वहीं उसका सूतक काल और धार्मिक प्रभाव मान्य होता है।
चूंकि 28 अगस्त 2026 का यह आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान (Visible) नहीं होगा, इसलिए भारत में इस ग्रहण का कोई सूतक काल मान्य नहीं होगा।
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भारत के सभी मंदिर खुले रहेंगे।
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पूजा-पाठ और दैनिक अनुष्ठान अपने निर्धारित समय पर किए जा सकेंगे।
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भोजन बनाने, खाने या गर्भवती महिलाओं के लिए किसी भी प्रकार के कठोर नियमों का पालन करना अनिवार्य नहीं होगा।
दुनिया भर में कहां-कहां देखा जा सकेगा यह चंद्र ग्रहण? (Global Visibility)
यद्यपि भारत के खगोल प्रेमियों को इस ग्रहण के सीधे दर्शन नहीं हो पाएंगे, लेकिन दुनिया के एक बड़े हिस्से में यह चंद्र ग्रहण एक भव्य नजारे के रूप में दिखाई देगा।
Time and Date और नासा (NASA) की खगोलीय रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 अगस्त 2026 का गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से पश्चिमी गोलार्ध (Western Hemisphere) के देशों में शानदार ढंग से नजर आएगा।
ग्रहण दिखाई देने वाले प्रमुख क्षेत्र:
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उत्तरी अमेरिका (North America): अमेरिका, कनाडा, और मैक्सिको के लगभग सभी हिस्सों में इस ग्रहण का पूरा चक्र देखा जा सकेगा।
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दक्षिणी अमेरिका (South America): ब्राजील, अर्जेंटीना, चिली आदि देशों में यह बहुत साफ दिखाई देगा।
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यूरोप (Europe): पश्चिमी यूरोप के देश जैसे स्पेन, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम (UK), फ्रांस और आइसलैंड में ग्रहण नजर आएगा।
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अफ्रीका (Africa): पश्चिमी और उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में चंद्रमा ढकता हुआ दिखाई देगा।
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महासागर (Oceans): प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के पूर्वी हिस्से और अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) के क्षेत्रों में भी यह दृश्यमान होगा।
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अंटार्कटिका (Antarctica): बर्फीले महाद्वीप अंटार्कटिका के कई हिस्सों से भी इसका नजारा लिया जा सकेगा।
रोचक तथ्य: दुनिया की लगभग 12% आबादी (करीब 98 करोड़ लोग) इस चंद्र ग्रहण के सभी चरणों (Penumbral & Partial) को देखने में सक्षम होगी।
आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) क्या होता है? वैज्ञानिक दृष्टिकोण
चंद्र ग्रहण एक बेहद तार्किक और खगोलीय प्रक्रिया है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि आंशिक चंद्र ग्रहण कैसे होता है:
ब्रह्मांड में पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है, और चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाता है। इस परिक्रमा के दौरान एक क्षण ऐसा आता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा (Straight Line) में आ जाते हैं, जिसमें पृथ्वी ठीक बीच में होती है।
इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने लगती है और सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता।
पृथ्वी की दो प्रकार की परछाइयां होती हैं:
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उपच्छाया (Penumbra): यह बाहरी और हल्की छाया होती है। जब चंद्रमा इसमें से गुजरता है, तो उसकी चमक थोड़ी कम हो जाती है (Penumbral Eclipse)।
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प्रच्छाया / मुख्य छाया (Umbra): यह अंदर की गहरी और घनी छाया होती है। जब चंद्रमा का कुछ हिस्सा इस गहरी छाया में प्रवेश करता है, तो उसे आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) कहते हैं। यदि पूरा चंद्रमा इस गहरी छाया में आ जाए, तो उसे ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ (Total Lunar Eclipse) कहा जाता है।
28 अगस्त 2026 को चंद्रमा का लगभग 93.19% से 96% हिस्सा पृथ्वी की इसी गहरी छाया (Umbra) में प्रवेश करेगा, जिससे यह एक “गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण” बन जाएगा।
क्या इस चंद्र ग्रहण पर ‘ब्लड मून’ (Blood Moon) जैसी स्थिति बनेगी?
जब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है, तो चंद्रमा पृथ्वी की पूरी छाया में आ जाता है। ऐसे में पृथ्वी के वायुमंडल (Atmosphere) से छनकर सूर्य की जो लाल किरणें (Red Wavelengths) चंद्रमा तक पहुंचती हैं, वे उसे एक सुर्ख लाल रंग दे देती हैं। इसी घटना को ब्लड मून (Blood Moon) कहा जाता है।
28 अगस्त 2026 के ग्रहण के संदर्भ में:
चूंकि यह पूर्ण नहीं बल्कि आंशिक चंद्र ग्रहण है, इसलिए इसे तकनीकी रूप से “ट्रू ब्लड मून” (True Blood Moon) नहीं कहा जा सकता। हालांकि, क्योंकि चंद्रमा का 96% हिस्सा पृथ्वी की छाया में होगा, इसलिए ग्रहण के चरम समय (Maximum Eclipse) पर चंद्रमा का ढका हुआ विशाल हिस्सा एक हल्का लाल-नारंगी (Reddish-Orange) आभा लिए हुए दिखाई दे सकता है। इसे पश्चिमी देशों में “स्टर्जन मून” (Sturgeon Moon) ग्रहण के नाम से भी पुकारा जाएगा क्योंकि अगस्त महीने की पूर्णिमा को ‘स्टर्जन पूर्णिमा’ कहा जाता है।
2026 में लगने वाले सभी ग्रहणों की पूरी सूची (List of Eclipses in 2026)
अगर आप साल 2026 में होने वाली खगोलीय घटनाओं की योजना बना रहे हैं, तो आपको इस वर्ष लगने वाले सभी सूर्य और चंद्र ग्रहणों की जानकारी होनी चाहिए। साल 2026 में कुल 4 ग्रहण लगेंगे:
| क्रम | ग्रहण का प्रकार | दिनांक (Date) | भारतीय समय (IST) अनुमानित | भारत में दृश्यता (Visibility in India) |
| 1. | वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) | 17 फरवरी 2026 | शाम 07:48 से मध्यरात्रि 01:27 तक | नहीं दिखेगा (रात होने के कारण) |
| 2. | पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) | 3 मार्च 2026 | दोपहर 03:20 से रात 07:53 तक | आंशिक रूप से दिखेगा (चंद्रोदय के समय) |
| 3. | पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) | 12 अगस्त 2026 | रात 09:04 से मध्यरात्रि 02:27 तक | नहीं दिखेगा (रात होने के कारण) |
| 4. | आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) | 28 अगस्त 2026 | सुबह 08:03 से 11:22 तक | नहीं दिखेगा (दिन होने के कारण) |
उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि 2026 में केवल 3 मार्च का पहला चंद्र ग्रहण ही भारत के कुछ पूर्वी और मध्य हिस्सों में चंद्रमा के उदित होते समय (Moonrise) बहुत ही कम समय के लिए देखा जा सकेगा।
चंद्र ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव और राशियों पर असर (Astrological Impact)
यद्यपि विज्ञान चंद्र ग्रहण को मात्र एक छाया की घटना मानता है, किंतु भारतीय ज्योतिष शास्त्र (Vedic Astrology) में इसका बहुत गहरा अर्थ है। ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा हमारे ‘मन’ (Mind), ‘माता’ (Mother), और ‘जल’ (Water Elements) का कारक ग्रह है।
भले ही 28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा और इसका सूतक मान्य नहीं होगा, फिर भी ब्रह्मांड में होने वाली इस उथल-पुथल का सूक्ष्म प्रभाव पृथ्वी के सभी जीवों पर पड़ता है। ग्रहण के समय राहु और केतु का प्रभाव बढ़ जाता है।
आइए जानते हैं कि इस ग्रहण का विभिन्न राशियों (Zodiac Signs) पर सामान्य प्रभाव कैसा रह सकता है:
1. मेष, सिंह, और धनु (अग्नि तत्व राशियां)
इन राशियों के जातकों को ग्रहण के आस-पास अपने क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। मानसिक उलझन या तनाव महसूस हो सकता है। कोई बड़ा आर्थिक फैसला लेने से बचें। शिव आराधना आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगी।
2. वृषभ, कन्या, और मकर (पृथ्वी तत्व राशियां)
इन राशियों के लिए ग्रहण का प्रभाव मिला-जुला रहेगा। करियर से जुड़े मामलों में कुछ बाधाएं आ सकती हैं लेकिन धैर्य से काम लेने पर सफलता मिलेगी। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें, खासकर पेट और पाचन तंत्र का।
3. मिथुन, तुला, और कुंभ (वायु तत्व राशियां)
रिश्तों में गलतफहमियां पनप सकती हैं। जीवनसाथी या व्यावसायिक साझेदार (Partner) के साथ तालमेल बनाकर चलें। यात्रा के दौरान सावधानी बरतें। ध्यान (Meditation) और प्राणायाम आपको मानसिक शांति देंगे।
4. कर्क, वृश्चिक, और मीन (जल तत्व राशियां)
चूंकि चंद्रमा जल तत्व का स्वामी है, इसलिए इन राशियों पर ग्रहण का सबसे अधिक भावनात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मन में अज्ञात भय, उदासी या ओवरथिंकिंग (Overthinking) की समस्या हो सकती है। भगवान चंद्र देव के बीज मंत्र या ॐ नमः शिवाय का जाप सर्वोत्तम उपाय है।
ज्योतिषीय उपाय: ग्रहण के दिन और उसके अगले दिन किसी भी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को सफेद चीजें (जैसे- चावल, दूध, चीनी, या सफेद वस्त्र) दान करने से ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव दूर होता है।
चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें? (Do’s and Don’ts During Chandra Grahan)
हालांकि 28 अगस्त 2026 का ग्रहण भारत में मान्य नहीं है, फिर भी जो लोग आध्यात्मिक नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं, वे ग्रहण की वैश्विक अवधि (भारतीय समयानुसार सुबह 8:03 से 11:22 बजे तक) के दौरान कुछ सामान्य सावधानियां बरत सकते हैं:
ग्रहण के दौरान क्या करें? (Do’s)
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मंत्र जाप: ग्रहण के समय किया गया मंत्र जाप आम दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है। आप महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र या अपने इष्ट देव के मंत्र का मानसिक जाप कर सकते हैं।
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दान-पुण्य: ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करके जरूरतमंदों को दान देना बहुत ही शुभ माना जाता है।
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तुलसी के पत्ते का उपयोग: यदि घर में पका हुआ भोजन या पीने का पानी रखा है, तो ग्रहण शुरू होने से पहले उसमें तुलसी दल (Tulsi Leaves) डाल दें। वैज्ञानिक तौर पर भी तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो नकारात्मक किरणों के प्रभाव को नष्ट करते हैं।
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सफाई और स्नान: ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल छिड़कें और स्वयं भी ताजे पानी से स्नान करें।
ग्रहण के दौरान क्या न करें? (Don’ts)
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भोजन करने से बचें: मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा और बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं, इसलिए इस दौरान पकाने और खाने से बचना चाहिए। (बीमार, वृद्ध और बच्चों पर यह नियम लागू नहीं होता)।
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खुली आंखों से ग्रहण न देखें: हालांकि चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों से देखना सूर्य ग्रहण जितना खतरनाक नहीं होता, फिर भी आंखों की सुरक्षा के लिए टेलीस्कोप या विशेष चश्मों का उपयोग करना बेहतर होता है।
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क्रोध और विवाद: ग्रहण के समय मानसिक स्थिति संवेदनशील होती है। इस समय किसी से झगड़ा, वाद-विवाद या क्रोध करने से बचना चाहिए।
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शुभ कार्यों की शुरुआत: इस अवधि के दौरान कोई नया व्यापार, सगाई, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य न करें।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां (Precautions for Pregnant Women)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण की किरणें गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को घबराने या कठोर नियमों का पालन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। फिर भी, यदि वे चाहें तो अपनी संतुष्टि के लिए कुछ सामान्य नियम मान सकती हैं:
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नुकीली चीजों का प्रयोग न करें: ग्रहण की अवधि (सुबह 8:03 से 11:22 बजे) के दौरान चाकू, कैंची, सुई या ब्लेड का उपयोग करने से बचें।
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बाहर निकलने से बचें: कोशिश करें कि इस समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न जाएं।
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सकारात्मक रहें: मन को शांत रखें, अच्छे और आध्यात्मिक विचार पढ़ें या सुनें। तनाव बिल्कुल न लें।
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तुलसी का लेप: कुछ मान्यताओं में गर्भवती महिलाओं के पेट पर हल्का सा तुलसी या चंदन का लेप लगाने की सलाह दी जाती है ताकि नकारात्मक ऊर्जा से बचाव हो सके।
पौराणिक मान्यताएं: राहु-केतु और चंद्र ग्रहण की कथा (Mythological Connection)
विज्ञान जहां ग्रहण को छाया का खेल मानता है, वहीं हिंदू धर्म में इसके पीछे समुद्र मंथन की एक बहुत ही रोचक कथा जुड़ी हुई है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तो उसमें से ‘अमृत कलश’ निकला। अमृत बंटवारे को लेकर जब विवाद हुआ, तब भगवान विष्णु ने ‘मोहिनी’ नाम की एक अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप धारण किया। मोहिनी ने देवताओं और असुरों को अलग-अलग पंक्तियों में बिठाया और देवताओं को अमृत पिलाना शुरू किया।
उसी समय ‘स्वरभानु’ नाम का एक चालाक असुर देवताओं का रूप धारण करके देवताओं की पंक्ति में बैठ गया और उसने भी अमृत पी लिया। सूर्य देव और चंद्र देव ने उस असुर को पहचान लिया और तुरंत भगवान विष्णु (मोहिनी) को इसके बारे में बता दिया।
क्रोधित होकर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उस असुर का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन अमृत पी लेने के कारण वह मरा नहीं। उसका सिर ‘राहु’ (Rahu) कहलाया और धड़ ‘केतु’ (Ketu) बन गया।
कहा जाता है कि सूर्य और चंद्रमा ने स्वरभानु की पोल खोली थी, इसी दुश्मनी का बदला लेने के लिए राहु और केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को निगलने का प्रयास करते हैं। जब वे उन्हें निगलते हैं, तो उसी घटना को ग्रहण (Eclipse) कहा जाता है। हालांकि राहु का धड़ नहीं है, इसलिए कुछ ही समय बाद चंद्रमा उसके गले से बाहर आ जाता है और ग्रहण समाप्त हो जाता है।
साल 2026 खगोलीय घटनाओं के प्रेमियों के लिए एक अद्भुत साल है। 2026 का दूसरा Chandra Grahan 28 अगस्त को लगेगा, जो एक बहुत ही गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। भले ही यह रोमांचक घटना भारत के समयानुसार दिन के उजाले में होने के कारण भारत में दिखाई नहीं देगी और इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा, लेकिन इसका खगोलीय और वैश्विक महत्व तनिक भी कम नहीं है।
अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के लोग इस प्राकृतिक चमत्कार का गवाह बनेंगे। भारतीय विज्ञान और ज्योतिष प्रेमी इस घटना को विभिन्न स्पेस एजेंसियों, जैसे नासा (NASA) या टाइम एंड डेट (Time and Date) की वेबसाइट्स पर लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए देख सकेंगे।
ग्रहण प्रकृति का एक चक्र है जो हमें याद दिलाता है कि ब्रह्मांड में सब कुछ एक सटीक ज्यामिति और नियम से बंधा हुआ है। इसे भय या अंधविश्वास से जोड़ने के बजाय, एक अद्भुत खगोलीय नृत्य के रूप में देखा और समझा जाना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs – Frequently Asked Questions)
1. 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण किस तारीख को लगेगा?
उत्तर: साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026, शुक्रवार के दिन लगेगा। यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा जिसमें चंद्रमा का लगभग 96% हिस्सा पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा।
2. क्या 28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
उत्तर: नहीं, यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह 08:03 बजे शुरू होकर सुबह 11:22 बजे तक रहेगा। इस दौरान भारत में दिन का समय होगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे (अस्त) होगा, इसलिए इसे नहीं देखा जा सकेगा।
3. क्या इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा?
उत्तर: ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, जो ग्रहण जिस क्षेत्र में दिखाई नहीं देता, वहां उसका सूतक काल भी लागू नहीं होता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, अतः इसका कोई सूतक काल (मंदिर बंदी, पूजा निषेध आदि) भारत में मान्य नहीं होगा।
4. 2026 में कुल कितने सूर्य और चंद्र ग्रहण लगेंगे?
उत्तर: साल 2026 में कुल 4 ग्रहण लगेंगे। 17 फरवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण, 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण, 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा।
5. क्या चंद्र ग्रहण के दौरान नग्न आंखों से चंद्रमा को देखना सुरक्षित है?
उत्तर: हां, सूर्य ग्रहण के विपरीत चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों (Naked Eyes) से देखना पूरी तरह सुरक्षित होता है। इससे आंखों की रोशनी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। आप इसे बिना किसी विशेष चश्मे या उपकरण के सीधे देख सकते हैं। (हालांकि यह विशिष्ट ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा)।