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Heramba Sankashti Chaturthi 2026: हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब है? जानें पूजा विधि, व्रत कथा और उपायIt takes 15 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ और ‘प्रथम पूज्य’ माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गजानन की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है। यूं तो हर महीने में दो चतुर्थी तिथियां आती हैं, लेकिन कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को ‘संकष्टी चतुर्थी’ (Sankashti Chaturthi) कहा जाता है। ‘संकष्टी’ का अर्थ है— संकटों को हरने वाली चतुर्थी। पूरे वर्ष में कुल 12 (या अधिक मास होने पर 13) संकष्टी चतुर्थी आती हैं, और हर चतुर्थी का अपना एक अलग नाम, अलग स्वरूप और अलग महत्व होता है।

इन्हीं में से एक अत्यंत शक्तिशाली और अद्भुत चतुर्थी है— हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी इस दिन भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से 11वें स्वरूप यानी ‘हेरम्ब महागणपति’ की पूजा की जाती है। यह स्वरूप इसलिए सबसे अनूठा है क्योंकि इसमें भगवान गणेश अपने परिचित वाहन ‘मूषक’ (चूहे) पर नहीं, बल्कि माता पार्वती के वाहन ‘सिंह’ (शेर) पर विराजमान होते हैं।

यदि आपके मन में भी यह प्रश्न है कि हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब है? और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है? तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। इस विस्तृत और शोधपरक लेख में हम वर्ष 2026 की भगवान गणेश के हेरम्ब स्वरूप की संकष्टी चतुर्थी की तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय के बारे में विस्तार से जानेंगे।

वर्ष 2026 में हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब है? (Heramba Sankashti Chaturthi 2026 Date & Timings)

भगवान गणेश के हेरम्ब स्वरूप की संकष्टी चतुर्थी की तिथि को लेकर कई बार पंचांगों के कारण भक्तों में दुविधा होती है। उत्तर भारत में मनाए जाने वाले ‘पूर्णिमंत पंचांग’ (महीना पूर्णिमा को समाप्त होता है) के अनुसार, यह संकष्टी चतुर्थी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आती है। वहीं, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में प्रचलित ‘अमावस्यांत पंचांग’ (महीना अमावस्या को समाप्त होता है) के अनुसार, इसे श्रावण (सावन) मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी कहा जाता है। नाम भले ही अलग हों, लेकिन पूरे देश में यह पर्व एक ही दिन मनाया जाता है।

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व 31 अगस्त 2026, सोमवार को मनाया जाएगा।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी 2026: शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय (Muhurat Table)

संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक रात में चंद्र दर्शन (चंद्रमा को अर्घ्य) न कर लिया जाए। यहाँ 31 अगस्त 2026 के लिए व्रत और पूजा के शुभ मुहूर्त की विस्तृत तालिका दी गई है:

विवरण (Event Details) तिथि और समय (Date & Time)
हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत की तिथि 31 अगस्त 2026 (सोमवार)
चतुर्थी तिथि का आरंभ 31 अगस्त 2026, प्रातः 08:50 बजे से
चतुर्थी तिथि की समाप्ति 1 सितंबर 2026, प्रातः 07:41 बजे तक
प्रातःकालीन गणेश पूजा मुहूर्त सुबह 09:10 बजे से 10:45 बजे तक
चंद्रोदय का समय (Moonrise Time) रात्रि लगभग 08:50 बजे (स्थानीय समयानुसार)
व्रत पारण का समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात

(नोट: चंद्रोदय के समय में आपके शहर (भौगोलिक स्थिति) के अनुसार 5 से 15 मिनट का अंतर आ सकता है। इसलिए अर्घ्य देने से पहले आसमान में चंद्रमा के उदय होने की पुष्टि अवश्य कर लें।)

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है? (Significance of Heramba Sankashti Chaturthi)

यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है कि आखिर हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है? जैसा कि हमने बताया, यह भाद्रपद/श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। इसका महत्व अन्य सभी संकष्टी चतुर्थियों से थोड़ा अलग और विशेष है।

‘हेरम्ब’ शब्द का अर्थ

संस्कृत साहित्य के अनुसार ‘हेरम्ब’ (Heramba) दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘हे’ (He) का अर्थ है— असहाय, कमजोर या दीन। और ‘रम्ब’ (Ramba) का अर्थ है— रक्षक या पालनहार। अतः ‘हेरम्ब’ का अर्थ है— “दीन-दुखियों और असहायों का रक्षक” जो व्यक्ति जीवन में चारों ओर से निराश हो चुका हो, जिसका आत्मविश्वास टूट गया हो, उसके लिए भगवान हेरम्ब की उपासना एक नई ऊर्जा और साहस लेकर आती है।

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हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व

  1. आत्मविश्वास और निडरता: चूँकि इस स्वरूप में भगवान गणेश शेर की सवारी करते हैं, जो साहस और निडरता का प्रतीक है, इसलिए इस दिन व्रत रखने से साधक के भीतर का हर प्रकार का डर (चाहे वह असफलता का हो या शत्रुओं का) समाप्त हो जाता है।

  2. शत्रुओं का नाश: शेर पर बैठे हुए पंचमुखी गजानन शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों के लिए अत्यंत उग्र माने जाते हैं। जो लोग अकारण कानूनी विवादों या गुप्त शत्रुओं से परेशान हैं, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए।

  3. माता पार्वती और शिव का संयुक्त आशीर्वाद: सिंह (शेर) माता भवानी का वाहन है। भगवान गणेश का सिंह पर विराजमान होना शिव (ज्ञान), पार्वती (शक्ति) और गणेश (बुद्धि) तीनों शक्तियों के मिलन को दर्शाता है।

  4. सर्वकार्य सिद्धि: मान्यता है कि हेरम्ब संकष्टी के दिन किए गए संकल्प कभी अधूरे नहीं रहते। यह व्रत व्यक्ति को दरिद्रता से निकालकर अपार ऐश्वर्य और मान-सम्मान दिलाता है।

भगवान गणेश का ‘हेरम्ब’ स्वरूप और उसका रहस्य (The Majestic Form of Heramba Ganapati)

भगवान गणेश के 32 स्वरूपों का वर्णन ‘मुद्गल पुराण’ और ‘गणेश कौस्तुभ’ में मिलता है, जिनमें हेरम्ब गजानन का 11वां स्वरूप है। यह स्वरूप अत्यंत रहस्यमयी, आलौकिक और तेजमय है।

हेरम्ब महागणपति के स्वरूप की विशेषताएं:

  • पंचमुखी (Five Faces): भगवान हेरम्ब के पांच मुख होते हैं। ये पांच मुख इस ब्रह्मांड के पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और भगवान शिव के पांच मुखों (सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष, ईशान) का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका मध्य मुख आकाश की ओर देखता है।

  • वाहन सिंह (Lion as Vahana): सामान्यतः गजानन का वाहन मूषक (चूहा) है, लेकिन हेरम्ब स्वरूप में वे एक विशाल और गर्जना करते हुए सिंह पर सवार होते हैं। सिंह शक्ति, शौर्य और राजसी सत्ता का प्रतीक है।

  • दस भुजाएं (Ten Arms): भगवान हेरम्ब की दस भुजाएं होती हैं। उनके हाथों में पाश (फंदा), अंकुश (गड़ासा), रुद्राक्ष की माला, परशु (कुल्हाड़ी), एक मुंड (कपाल), मोदक, और पसंदीदा फल (जैसे सेब या अनार) होता है।

  • वरद और अभय मुद्रा: उनके बाकी दो हाथ ‘अभय मुद्रा’ (भक्तों को डर से मुक्त करने की मुद्रा) और ‘वरद मुद्रा’ (वरदान देने की मुद्रा) में होते हैं।

  • रंग: हेरम्ब गजानन का रंग उदीयमान सूर्य (उगते हुए सूरज) के समान हल्का सुनहरा और लालिमा लिए हुए होता है।

भारत में हेरम्ब गणपति का कोई अलग से विशाल प्राचीन मंदिर नहीं है, लेकिन वाराणसी (काशी) के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में हेरम्ब महागणपति की एक प्राचीन मूर्ति स्थापित है, जहाँ श्रद्धालु दर्शन के लिए जाते हैं।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि (Heramba Sankashti Chaturthi Puja Vidhi)

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजा विधि बहुत ही पवित्रता और शास्त्र-सम्मत नियमों के साथ की जाती है। यदि आप 31 अगस्त 2026 को यह व्रत रख रहे हैं, तो नीचे दी गई चरणबद्ध विधि का पालन करें:

१. प्रातःकालीन पूजा और संकल्प (Morning Rituals)

  • स्नान और शुद्धि: व्रत के दिन सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त में) उठें। घर की साफ-सफाई करें और स्नान के जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

  • वस्त्र: भगवान गणेश को लाल और पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए पूजा के समय लाल, पीले या नारंगी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। काले या गहरे नीले वस्त्र न पहनें।

  • संकल्प लें: पूजा घर में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल, अक्षत (चावल) और पुष्प लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें— “हे विघ्नहर्ता हेरम्ब गजानन! मैं (अपना नाम और गोत्र बोलें), अपने जीवन के सभी संकटों के नाश और आपकी कृपा प्राप्ति हेतु आज हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का निर्जला/फलाहारी व्रत करने का संकल्प लेता/लेती हूँ।” (जल को जमीन पर छोड़ दें)।

२. चौकी की स्थापना और पंचोपचार पूजा

  • एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। यदि आपके पास पंचमुखी या शेर पर बैठे हेरम्ब गणपति का चित्र हो, तो वह सर्वोत्तम है।

  • सबसे पहले मूर्ति को शुद्ध जल और फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं। (चित्र हो तो केवल जल का छींटा दें)।

  • गजानन को लाल चंदन या सिंदूर का तिलक लगाएं। अक्षत और लाल पुष्प (विशेषकर गुड़हल का फूल) अर्पित करें।

  • दूर्वा घास: भगवान गणेश को 21 दूर्वा (हरी घास) की पत्तियां “ॐ हेरम्बाय नमः” कहते हुए अर्पित करें। दूर्वा के बिना गणेश पूजा अधूरी मानी जाती है।

  • भोग (नैवेद्य): भगवान को उनके प्रिय मोदक, मोतीचूर के लड्डू, केले और ऋतुफल का भोग लगाएं।

  • दीपक प्रज्वलित कर ‘संकटनाशन गणेश स्तोत्र’ और ‘गणेश चालीसा’ का पाठ करें। अंत में कपूर से आरती करें।

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३. व्रत के नियम (Fasting Rules)

  • यह व्रत चंद्रोदय तक रखा जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार इसे ‘निर्जला’ (बिना पानी के) या ‘फलाहारी’ (फल, दूध, साबूदाना आदि ग्रहण करके) रख सकते हैं।

  • व्रत में नमक और किसी भी प्रकार के अनाज (गेहूं, चावल, दाल) का सेवन पूर्णतः वर्जित होता है।

  • दिन भर मन ही मन “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का मानसिक जाप करते रहें।

४. रात्रि में चंद्रोदय पूजा और अर्घ्य (Evening Moon Worship)

  • पूजा विधि का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रात्रि में चंद्रमा की पूजा है। जब आसमान में चंद्रमा उदय हो जाए (31 अगस्त को लगभग 08:50 PM पर), तो घर की छत या बालकनी में जाएं।

  • एक चांदी या तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें। उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, सफेद फूल, सफेद चंदन और अक्षत (चावल) मिलाएं।

  • चंद्रमा की ओर मुख करके जल अर्पित (अर्घ्य) करें। अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जाप करें:

    “ॐ क्षीरार्णव सम्भूताय शशिनै नमः” या केवल “ॐ सोमाय नमः”

  • चंद्र देव से प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन में शीतलता और शांति बनाए रखें।

  • अर्घ्य देने के पश्चात भगवान गणेश को प्रणाम करें और फल, मिठाई या सात्विक भोजन ग्रहण कर अपना व्रत खोलें (पारण करें)।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी की पौराणिक व्रत कथा (Heramba Sankashti Chaturthi Vrat Katha)

किसी भी व्रत का पूर्ण फल तब तक प्राप्त नहीं होता, जब तक उसकी कथा को पूरे भक्ति भाव से न सुना जाए। हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा भगवान गणेश की महिमा और उनके रक्षक स्वरूप को दर्शाती है।

पौराणिक कथा:

प्राचीन काल में, कृतयुग (सतयुग) में मकरध्वज नामक एक अत्यंत प्रतापी और न्यायप्रिय राजा राज करता था। उसका राज्य बहुत समृद्ध था, लेकिन राजा को एक ही दुःख था कि उसकी कोई संतान नहीं थी। राजा ने कई यज्ञ, दान और तपस्याएं कीं, लेकिन उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हुई। इससे राजा का मन राजपाट से उचट गया और वह हमेशा उदास रहने लगा।

राजा की स्थिति देखकर उसके मंत्री भी चिंतित हो गए। एक दिन महर्षि लोमश राजा मकरध्वज के दरबार में पधारे। राजा ने महर्षि का सत्कार किया और हाथ जोड़कर अपने निःसंतान होने का दुःख प्रकट किया। राजा ने कहा, “हे मुनिवर! मेरे पास सब कुछ है, लेकिन मेरे बाद इस राज्य का कोई उत्तराधिकारी नहीं है। मैं ऐसा कौन सा पाप कर बैठा हूँ, जिसका दंड मुझे मिल रहा है? कृपया कोई मार्ग दिखाएं।”

महर्षि लोमश त्रिकालदर्शी थे। उन्होंने ध्यान लगाकर राजा के पूर्व जन्म को देखा और कहा, “हे राजन! पूर्व जन्म में तुम एक निर्दयी बहेलिए (शिकारी) थे। एक बार तुमने एक हिरणी का शिकार किया था, जो उस समय गर्भवती थी। तुम्हारी बाण से वह हिरणी और उसका अजन्मा बच्चा दोनों मारे गए। मरते समय उस हिरणी ने तुम्हें श्राप दिया था कि अगले जन्म में तुम राजा तो बनोगे, लेकिन संतान सुख के लिए हमेशा तरसोगे।”

यह सुनकर राजा मकरध्वज फूट-फूटकर रोने लगा और महर्षि के चरणों में गिरकर इस श्राप से मुक्ति का उपाय पूछने लगा।

महर्षि लोमश ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा, “राजन! निराश मत हो। भगवान गणेश सभी संकटों को हरने वाले हैं। तुम भाद्रपद (या श्रावण) मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली ‘हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी’ का व्रत करो। भगवान गजानन का हेरम्ब स्वरूप असहायों का रक्षक है। यदि तुम अपनी पत्नी के साथ पूरे विधि-विधान से इस दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान हेरम्ब की पूजा करोगे और रात्रि में चंद्र देव को अर्घ्य दोगे, तो गजानन तुम्हारे सभी पूर्व जन्म के पापों को नष्ट कर देंगे।”

महर्षि की आज्ञा मानकर राजा मकरध्वज और उनकी रानी ने भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी के दिन हेरम्ब संकष्टी का व्रत रखा। उन्होंने पंचमुखी, सिंह पर सवार भगवान हेरम्ब की स्वर्ण प्रतिमा बनवाई और पूरी श्रद्धा से उनका पूजन किया। रात में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण किया।

उन दोनों की सच्ची भक्ति और व्रत के प्रभाव से भगवान हेरम्ब प्रसन्न हुए। उसी रात स्वप्न में भगवान गणेश ने राजा को दर्शन दिए और उसे एक तेजस्वी पुत्र का वरदान दिया। समय आने पर रानी ने एक अत्यंत सुंदर और शूरवीर पुत्र को जन्म दिया। राजा का जीवन खुशियों से भर गया और उसने अपने पूरे राज्य में हर महीने संकष्टी चतुर्थी मनाने का आदेश दे दिया।

(कथा सुनने के बाद मन ही मन कहें: हे गजानन! जिस प्रकार आपने राजा मकरध्वज का संकट दूर कर उसकी मनोकामना पूर्ण की, उसी प्रकार इस कथा को पढ़ने, सुनने और हुंकारा भरने वाले सभी भक्तों के संकट दूर करना।)

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इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय (Special Remedies on Heramba Sankashti)

हेरम्ब गजानन अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। यदि आपके जीवन में किसी भी प्रकार की कोई विशेष बाधा आ रही है, तो 31 अगस्त 2026 को हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के दिन आप अपनी राशि और समस्या के अनुसार इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय आजमा सकते हैं:

१. आत्मविश्वास और निडरता बढ़ाने के लिए

यदि आप हमेशा किसी अनजाने डर, घबराहट या मानसिक तनाव (Depression) से घिरे रहते हैं, तो इस दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा (हरी घास) अर्पित करें। हर दूर्वा चढ़ाते समय “ॐ हेरम्बाय नमः” मंत्र का जाप करें। शेर पर सवार गणपति आपके मन से हर प्रकार का भय निकाल देंगे और आपमें गजब का आत्मविश्वास आएगा।

२. नौकरी और करियर में तरक्की के लिए

यदि आपकी नौकरी में अड़चनें आ रही हैं, बॉस से अनबन रहती है, या व्यापार में लगातार घाटा हो रहा है, तो हेरम्ब संकष्टी के दिन भगवान गणेश के मंदिर में जाकर उन्हें एक पीला रेशमी धागा (कलावा) और बेसन के लड्डू अर्पित करें। पूजा के बाद उस पीले धागे को अपने दाहिने हाथ की कलाई में बांध लें। यह धागा आपके लिए रक्षा कवच और सफलता की चाबी का काम करेगा।

३. शत्रुओं और विरोधियों को शांत करने के लिए

अकारण परेशान करने वाले शत्रुओं या कानूनी विवाद (Court Case) से मुक्ति पाने के लिए, इस दिन शाम के समय गजानन के सामने घी का चौमुखी दीपक जलाएं। उसके बाद ‘संकटनाशन गणेश स्तोत्र’ का 11 बार पाठ करें। हेरम्ब गणपति का आशीर्वाद आपके विरोधियों का मुंह बंद कर देगा और फैसला आपके पक्ष में होगा।

४. आर्थिक संकट (धन प्राप्ति) के लिए उपाय

लगातार पैसों की तंगी बनी हुई है या कर्ज का बोझ बढ़ गया है, तो इस चतुर्थी पर भगवान गणेश को गुड़ और गाय के शुद्ध घी का भोग लगाएं। पूजा के बाद इस गुड़-घी को किसी सफेद गाय को अपने हाथों से खिला दें। यह बहुत ही अचूक उपाय है, जिससे घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है और दरिद्रता दूर होती है।

५. विवाह में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए

जिन युवाओं के विवाह में बार-बार बाधाएं आ रही हैं या रिश्ता तय होकर टूट जाता है, उन्हें इस दिन भगवान गणेश को मीठा पान (बिना तंबाकू का) अर्पित करना चाहिए। उस पान के पत्ते पर सुपारी, लौंग, और हरी इलायची रखकर गजानन के चरणों में अर्पित करें और उनसे अपने सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें।

Heramba Sankashti Chaturthi 2026 एक ऐसा पावन और ऊर्जावान अवसर है, जो हमें यह सिखाता है कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि हमारे भीतर ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और सिंह के समान साहस है, तो हम किसी भी बाधा (विघ्न) को पार कर सकते हैं।

भगवान गणेश का यह हेरम्ब स्वरूप हमें संदेश देता है कि शक्ति (शेर) और बुद्धि (गणेश) का जब सही संतुलन होता है, तब संसार में कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रह जाता। 31 अगस्त 2026, सोमवार को आप भी पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत को धारण करें, चंद्र देव को अर्घ्य दें और अपने जीवन को सुख, समृद्धि और शांति से भरें।

“ॐ श्री हेरम्ब महागणपतये नमः”

(बोलो गजानन महाराज की जय!)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs on Heramba Sankashti Chaturthi)

प्रश्न 1: वर्ष 2026 में हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी कब है?

उत्तर: वर्ष 2026 में हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व 31 अगस्त 2026, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन चतुर्थी तिथि सुबह 08:50 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 07:41 बजे तक रहेगी।

प्रश्न 2: हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश के किस विशेष रूप की पूजा होती है?

उत्तर: इस दिन भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से 11वें स्वरूप यानी ‘हेरम्ब महागणपति’ की पूजा होती है। इस अद्भुत स्वरूप में भगवान गणेश के पांच मुख और दस भुजाएं होती हैं, और वे अपने चिर-परिचित वाहन मूषक (चूहे) के बजाय माता पार्वती के वाहन ‘सिंह’ (शेर) पर विराजमान होते हैं।

प्रश्न 3: क्या संकष्टी चतुर्थी का व्रत बिना चंद्रमा की पूजा किए खोला जा सकता है?

उत्तर: नहीं, संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश और चंद्र देव दोनों को समर्पित होता है। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत रात में चंद्रोदय (Moonrise) के बाद चंद्रमा को जल, अक्षत और पुष्प से अर्घ्य देने के पश्चात् ही खोला (पारण किया) जाता है। बिना चंद्र दर्शन के यह व्रत अपूर्ण माना जाता है।

प्रश्न 4: हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खाना चाहिए?

उत्तर: यह व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखा जाता है। श्रद्धालु इसे अपनी श्रद्धानुसार निर्जला (बिना पानी के) या फलाहारी रख सकते हैं। फलाहार में आप ताजे फल, दूध, दही, साबूदाने की खिचड़ी (बिना सेंधा नमक या केवल सेंधा नमक के साथ, स्थानीय परंपरा के अनुसार) और मेवे खा सकते हैं। इस व्रत में किसी भी प्रकार के अनाज (जैसे गेहूं, चावल) और साधारण नमक का सेवन पूर्णतः वर्जित है।

प्रश्न 5: हेरम्ब गजानन की सवारी सिंह (शेर) क्यों है?

उत्तर: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हेरम्ब स्वरूप दीन-दुखियों, कमजोरों और असहायों की रक्षा के लिए है। सिंह अदम्य साहस, शक्ति, राजसी प्रताप और निडरता का प्रतीक है। भगवान गणेश ने यह वाहन अपनी माता भवानी (पार्वती) से प्राप्त किया था, ताकि वे भक्तों के मन से भय को निकालकर उन्हें अभय (निडर) बना सकें और दुष्टों का संहार कर सकें।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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