Shri Shirdi Sainath Shasranamavali (श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली): पाठ कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियांIt takes 84 minutes... to read this article !

सनातन धर्म, भक्ति मार्ग और संत परंपरा के अनंत आध्यात्मिक आकाश में, जब बात असीम करुणा, ‘श्रद्धा और सबूरी’ (Faith and Patience), चमत्कारिक रोगों से मुक्ति, और बिना किसी भेदभाव के हर प्राणी पर प्रेम लुटाने की आती है, तो श्री शिरडी साईनाथ (Shri Shirdi Sainath) का स्मरण सर्वोपरि है। “सबका मालिक एक” (God is One) का उद्घोष करने वाले साईं बाबा कोई साधारण फकीर नहीं, बल्कि साक्षात दत्तात्रेय (ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सम्मिलित स्वरूप) के अवतार माने जाते हैं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शिरडी की एक जर्जर मस्जिद (द्वारकामाई) में बिताया, भिक्षा मांगकर भोजन किया, लेकिन अपने दर पर आने वाले लाखों भक्तों को अपार धन, स्वास्थ्य और आत्मिक शांति का दान दिया।

मनुष्य का जीवन कई बार अकारण पैदा हुए संकटों, लाइलाज बीमारियों, भयंकर आर्थिक कष्टों, मानसिक अवसाद (Depression), मुकदमों, और जीवन की दिशाहीनता से घिर जाता है। जब सारे दरवाजे बंद हो जाएं, सगे-संबंधी साथ छोड़ दें, और कोई रास्ता न सूझे, तब श्री साईं बाबा की शरण में जाना साक्षात उस ब्रह्मांडीय प्रकाश को पुकारना है, जो भक्त की एक पुकार पर नंगे पैर दौड़ा चला आता है। बाबा ने स्वयं वचन दिया है: “मेरे शिरडी की मिट्टी में जो पैर रखेगा, उसके दुःख दूर हो जाएंगे। जो मेरी शरण में आएगा, उसकी मैं हमेशा रक्षा करूँगा।”

साईं बाबा की इसी अजेय ऊर्जा, उनके अनंत वात्सल्य, और उनकी त्वरित (Instant) रक्षा-शक्ति को अपने भीतर जाग्रत करने के लिए सिद्ध संतों और साईं भक्तों ने उनके एक हज़ार (1000) परम पवित्र, जाग्रत और अत्यंत कल्याणकारी नामों का संकलन किया है, जिसे शास्त्रों में ‘श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली’ (Shri Shirdi Sainath Shasranamavali) के नाम से जाना जाता है।

‘सहस्रनामावली’ का अर्थ है— एक हज़ार नामों की वह पवित्र श्रृंखला जिसका उपयोग भगवान के अर्चन (पूजा, पुष्प या उदी अर्पित करने) और नाम-जप के लिए किया जाता है (जिसमें प्रत्येक नाम के अंत में ‘नमः’ लगाया जाता है, जैसे- ॐ श्री साईंनाथाय नमः, ॐ दत्तात्रेयाय नमः)। यह कोई साधारण स्तुति नहीं है; यह एक ऐसा जाग्रत महामंत्र, एक ऐसा अभेद्य आध्यात्मिक कवच है, जो जीवन के भयंकर से भयंकर संकटों, रोगों और कर्म बंधनों को पल भर में भस्म कर देता है और हृदय में साक्षात साईं बाबा की उपस्थिति का अहसास कराता है।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली हिंदी  |  Shri Shirdi Sainath Shasranamavali

ॐ श्री साई अखण्डसच्चिदानन्दाय नमः ।

ॐ श्री साई अखिलजीववत्सलयाय नमः ।

ॐ श्री साई अखिलवस्तुविस्ताराय नमः ।

ॐ श्री साई अक्बराज्ञाभिवन्दिताय नमः ।

ॐ श्री साई अखिलचेतनाऽऽविष्टाय नमः ।

ॐ श्री साई अखिलवेदसंप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई अखिलाण्डेशरूपेऽपि पिण्डे पिण्डे प्रतिष्ठिताय नमः ।

ॐ श्री साई अग्रण्ये नमः ।

ॐ श्री साई अग्र्यभूम्ने नमः ।

ॐ श्री साई अगणितगुणाय नमः । १० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अघौघसन्निवर्तिने नमः ।

ॐ श्री साई अचिन्त्यमहिम्ने नमः ।

ॐ श्री साई अचलाय नमः ।

ॐ श्री साई अच्युताय नमः ।

ॐ श्री साई अजाय नमः ।

ॐ श्री साई अजातशत्रवे नमः ।

ॐ श्री साई अज्ञानतिमिरान्धस्य चक्षुरुन्मीलनक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई आजन्मस्थितिनाशाय नमः ।

ॐ श्री साई अणिमादिविभूषिताय नमः ।

ॐ श्री साई अत्युन्नतधुनिज्वालामाज्ञयैव निवर्तकाय नमः । २० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अत्युल्बणमहासर्पादपि भक्तसुरक्षित्रे नमः ।

ॐ श्री साई अतितीव्रतपस्तप्ताय नमः ।

ॐ श्री साई अतिनम्रस्वभावकाय नमः ।

ॐ श्री साई अन्नदानसदानिष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई अतिथिभुक्तशेषभुजे नमः ।

ॐ श्री साई अदृश्यलोकसञ्चारिणे नमः ।

ॐ श्री साई अदृष्टपूर्वदर्शित्रे नमः ।

ॐ श्री साई अद्वैतवस्तुतत्त्वज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई अद्वैतानन्दवर्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई अद्भुतानन्तशक्तये नमः । ३० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अधिष्ठानाय नमः ।

ॐ श्री साई अधोक्षजाय नमः ।

ॐ श्री साई अधर्मतरुच्छेत्रे नमः ।

ॐ श्री साई अधियज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई अधिभूताय नमः ।

ॐ श्री साई अधिदैवाय नमः ।

ॐ श्री साई अध्यक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई अनघाय नमः ।

ॐ श्री साई अनन्तनाम्ने नमः ।

ॐ श्री साई अनन्तगुणभूषणाय नमः । ४० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अनन्तमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई अनन्ताय नमः ।

ॐ श्री साई अनन्तशक्तिसंयुताय नमः ।

ॐ श्री साई अनन्ताश्चर्यवीर्याय नमः ।

ॐ श्री साई अनर्घ (अनह्लक) अतिमानिताय नमः ।

ॐ श्री साई अनवरतसमाधिस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई अनाथपरिरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई अनन्यप्रेमसंहृष्टगुरुपादविलीनहृदे नमः ।

ॐ श्री साई अनादृताष्टसिद्धये नमः ।

ॐ श्री साई अनामयपदप्रदाय नमः । ५० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अनादिमत्परब्रह्मणे नमः ।

ॐ श्री साई अनाहतदिवाकराय नमः ।

ॐ श्री साई अनिर्देश्यवपुषे नमः ।

ॐ श्री साई अनिमेषेक्षितप्रजाय नमः ।

ॐ श्री साई अनुग्रहार्थमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई अनुवर्तितवेङ्कूशाय नमः । वेङ्कटेशाय

ॐ श्री साई अनेकदिव्यमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई अनेकाद्भुतदर्शनाय नमः ।

ॐ श्री साई अनेकजन्मजं पापं स्मृतिमात्रेण हारकाय नमः ।

ॐ श्री साई अनेकजन्मवृत्तान्तं सविस्तारमुदीरयते नमः । ६० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अनेकजन्मसंप्राप्तकर्मबन्धविदारणाय नमः ।

ॐ श्री साई अनेकजन्मसंसिद्धशक्तिज्ञानस्वरूपवते नमः ।

ॐ श्री साई अन्तर्बहिश्च सर्वत्र व्याप्ताखिलचराचराय नमः ।

ॐ श्री साई अन्तर्हृदय आकाशाय नमः ।

ॐ श्री साई अन्तकाले रक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई अन्तर्यामिने नमः ।

ॐ श्री साई अन्तरात्मने नमः ।

ॐ श्री साई अन्नवस्त्रेप्सितप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई अपराजितशक्तये नमः ।

ॐ श्री साई अपरिग्रहभूषिताय नमः । ७० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अपवर्गप्रदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई अपवर्गमयाय नमः ।

ॐ श्री साई अपान्तरात्मरूपेण स्रष्टुरिष्टप्रवर्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई अपावृतकृपागाराय नमः ।

ॐ श्री साई अपारज्ञानशक्तिमते नमः ।

ॐ श्री साई अपार्थिवदेहस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई अपाम्पुष्पनिबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई अप्रपञ्चाय नमः ।

ॐ श्री साई अप्रमत्ताय नमः ।

ॐ श्री साई अप्रमेयगुणाकाराय नमः । ८० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अप्राकृतवपुषे नमः ।

ॐ श्री साई अप्राकृतपराक्रमाय नमः ।

ॐ श्री साई अप्राथितेष्टदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई अब्दुल्लादि परागतये नमः ।

ॐ श्री साई अभयं सर्वभूतेभ्यो ददामीति व्रतिने नमः ।

ॐ श्री साई अभिमानातिदूराय नमः ।

ॐ श्री साई अभिषेकचमत्कृतये नमः ।

ॐ श्री साई अभीष्टवरवर्षिणे नमः ।

ॐ श्री साई अभीक्ष्णदिव्यशक्तिभृते नमः ।

ॐ श्री साई अभेदानन्दसन्धात्रे नमः । ९० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अमर्त्याय नमः ।

ॐ श्री साई अमृतवाक्सृतये नमः ।

ॐ श्री साई अरविन्ददलाक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई अमितपराक्रमाय नमः ।

ॐ श्री साई अरिषड्वर्गनाशिने नमः ।

ॐ श्री साई अरिष्टघ्नाय नमः ।

ॐ श्री साई अर्हःसत्तमये नमः ।

ॐ श्री साई अलभ्यलाभसन्धात्रे नमः ।

ॐ श्री साई अल्पदानसुतोषिताय नमः ।

ॐ श्री साई अल्लानाम सदावक्त्रे नमः । १०० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अलम्बुध्या स्वलङ्कृताय नमः ।

ॐ श्री साई अवतारित सर्वेशाय नमः ।

ॐ श्री साई अवधीरितवैभवाय नमः ।

ॐ श्री साई अवलम्ब्यपदाब्जाय नमः ।

ॐ श्री साई अवलियेतिविश्रुताय नमः ।

ॐ श्री साई अवधूताखिलोपाधये नमः ।

ॐ श्री साई अविशिष्टाय नमः ।

ॐ श्री साई अवशिष्टस्वकार्यार्थे त्यक्तदेहं प्रविष्टवते नमः ।

ॐ श्री साई अवाक्पाणिपादोरवे नमः ।

ॐ श्री साई अवाङ्गमानसगोचराय नमः । ११० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अवाप्तसर्वकामोऽपि कर्मण्येव प्रतिष्टिताय नमः ।

ॐ श्री साई अविच्छिन्नाग्निहोत्राय नमः ।

ॐ श्री साई अविच्छिन्नसुखप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई अवेक्षितदिगन्तस्थप्रजापालननिष्ठिताय नमः ।

ॐ श्री साई अव्याजकरुणासिन्धवे नमः ।

ॐ श्री साई अव्याहतेष्टि देशगाय नमः ।

ॐ श्री साई अव्याहृतोपदेशाय नमः ।

ॐ श्री साई अव्याहतसुखप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई अशक्यशक्यकर्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई अशुभाशयशुद्धीकृते नमः । १२० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अशेषभूतहृत्स्थानणवे नमः ।

ॐ श्री साई अशोकमोहश‍ृङ्खलाय नमः ।

ॐ श्री साई अष्टैश्वर्ययुतत्यागिने नमः ।

ॐ श्री साई अष्टसिद्धिपराङ्मुखाय नमः ।

ॐ श्री साई असंयोगयुक्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई असङ्गदृढशास्त्रभृते नमः ।

ॐ श्री साई असङ्ख्येयावतारेषु ऋणानुबन्धिरक्षिताय नमः ।

ॐ श्री साई अहम्ब्रह्मस्थितप्रज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई अहम्भावविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई अहन्त्वञ्च त्वमेवाहमिति तत्त्वप्रभोधकाय नमः । १३० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई अहेतुककृपासिन्धवे नमः ।

ॐ श्री साई अहिंसानिरताय नमः ।

ॐ श्री साई अक्षीणसौहृदाय नमः ।

ॐ श्री साई अक्षयाय नमः ।

ॐ श्री साई अक्षयसुखप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई अक्षरादपि कूटस्थादुत्तमपुरुषोत्तमाय नमः ।

ॐ श्री साई आखुवाहनमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई आगमाद्यन्तसन्नुताय नमः ।

ॐ श्री साई आगमातीतसद्भावाय नमः ।

ॐ श्री साई आचार्यपरमाय नमः । १४० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई आत्मानुभवसन्तुष्टाय नमः ।

ॐ श्री साई आत्मविद्याविशारदाय नमः ।

ॐ श्री साई आत्मानन्दप्रकाशाय नमः ।

ॐ श्री साई आत्मैव परमात्मदृशे नमः ।

ॐ श्री साई ॐ श्रीसाई आत्मैकसर्वभूतात्मने नमः ।

ॐ श्री साई आत्मारामाय नमः ।

ॐ श्री साई आत्मवते नमः ।

ॐ श्री साई आदित्यमध्यवर्तिने नमः ।

ॐ श्री साई आदिमध्यान्तवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई आनन्दपरमानन्दाय नमः । १५० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई आनन्दप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई आनाकमादृताज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई आनतावननिर्वृतये नमः ।

ॐ श्री साई आपदामपहर्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई आपद्बान्धवाय नमः ।

ॐ श्री साई आफ्रिकागतवैद्याय परमानन्ददायकाय नमः ।

ॐ श्री साई आयुरारोग्यदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई आर्तत्राणपरायणाय नमः ।

ॐ श्री साई आरोपनापवादैश्च मायायोगवियोगकृते नमः ।

ॐ श्री साई आविष्कृत तिरोधत्त बहुरूपविडम्बनाय नमः । १६० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई आर्द्रचित्तेन भक्तानां सदानुग्रहवर्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई आशापाशविमुक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई आशापाशविमोचकाय नमः ।

ॐ श्री साई इच्छाधीनजगत्सर्वाय नमः ।

ॐ श्री साई इच्छाधीनवपुषे नमः ।

ॐ श्री साई इष्टेप्सितार्थदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई इच्छामोहनिवर्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई इच्छोत्थदुःखसञ्छेत्रे नमः ।

ॐ श्री साई इन्द्रियारातिदर्पघ्ने नमः ।

ॐ श्री साई इन्दिरारमणाह्लादिनामसहस्रपूतहृदे नमः । १७० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई इन्दीवरदलज्योतिर्लोचनालङ्कृताननाय नमः ।

ॐ श्री साई इन्दुशीतलभाषिणे नमः ।

ॐ श्री साई इन्दुवत्प्रियदर्शनाय नमः ।

ॐ श्री साई इष्टापूर्तशतैर्लब्धाय नमः ।

ॐ श्री साई इष्टदैवस्वरूपधृते नमः ।

ॐ श्री साई इष्टिकादानसुप्रीताय नमः ।

ॐ श्री साई इष्टिकालयरक्षित्रे नमः ।

ॐ श्री साई ईशासक्तमनोबुद्धये नमः ।

ॐ श्री साई ईशाराधनतत्पराय नमः ।

ॐ श्री साई ईशिताखिलदेवाय नमः । १८० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई ईशावास्यार्थसूचकाय नमः ।

ॐ श्री साई उच्चारणाधृते भक्तहृदान्त उपदेशकाय नमः ।

ॐ श्री साई उत्तमोत्तममार्गिणे नमः ।

ॐ श्री साई उत्तमोत्तारकर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई उदासीनवदासीनाय नमः ।

ॐ श्री साई उद्धरामीत्युदीरकाय नमः ।

ॐ श्री साई उद्धवाय मया प्रोक्तम्भागवतमिति ब्रुवते नमः ।

ॐ श्री साई उन्मत्तश्वाभिगोप्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई उन्मत्तवेषनामधृते नमः ।

ॐ श्री साई उपद्रवनिवारिणे नमः । १९० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई उपांशुजपबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई उमेशामेशयुक्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्जितभक्तिलक्षणाय नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्जितवाक्प्रदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्ध्वरेतसे नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं भस्मसात्कराय नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्ध्वगतिविधात्रे नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्ध्वबद्धद्विकेतनाय नमः ।

ॐ श्री साई ऋजवे नमः ।

ॐ श्री साई ऋतम्बरप्रज्ञाय नमः । २०० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई ऋणक्लिष्टधनप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई ऋणानुबद्धजन्तुनां ऋणमुक्त्यै फलप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई ॐ श्रीसाई एकाकिने नमः ।

ॐ श्री साई एकभक्तये नमः ।

ॐ श्री साई एकवाक्कायमानसाय नमः ।

ॐ श्री साई एकादश्यां स्वभक्तानां स्वतनोकृतनिष्कृतये नमः ।

ॐ श्री साई एकाक्षरपरज्ञानिने नमः ।

ॐ श्री साई एकात्मा सर्वदेशदृशे नमः ।

ॐ श्री साई एकेश्वरप्रतीतये नमः ।

ॐ श्री साई एकरीत्यादृताखिलाय नमः । २१० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई ऐक्यानन्दगतद्वन्द्वाय नमः ।

ॐ श्री साई ऐक्यानन्दविधायकाय नमः ।

ॐ श्री साई ऐक्यकृते नमः ।

ॐ श्री साई ऐक्यभूतात्मने नमः ।

ॐ श्री साई ऐहिकामुष्मिकप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई ओङ्कारादराय नमः ।

ॐ श्री साई ओजस्विने नमः ।

ॐ श्री साई औषधीकृतभस्मदाय नमः ।

ॐ श्री साई कथाकीर्तनापद्धत्यां नारदानुष्ठितं स्तुवते नमः ।

ॐ श्री साई कपर्दे क्लेशनाशिने नमः । २२० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई कबीरदास अवतारकाय नमः ।

ॐ श्री साई कपर्दे पुत्ररक्षार्थमनुभूततदामयाय नमः ।

ॐ श्री साई कमलाऽऽश्लिष्टपादाब्जाय नमः ।

ॐ श्री साई कमलायतलोचनाय नमः ।

ॐ श्री साई कन्दर्पदर्पविध्वंसिने नमः ।

ॐ श्री साई कमनीयगुणालयाय नमः ।

ॐ श्री साई कर्ताऽकर्ताऽन्यथाकर्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई कर्मयुक्तोप्यकर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई कर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई कर्मनिर्मुक्ताय नमः । २३० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई कर्माऽकर्मविचक्षणाय नमः ।

ॐ श्री साई कर्मबीजक्षयङ्कर्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई कर्मनिर्मूलनक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई कर्मव्याधिव्यपोहिने नमः ।

ॐ श्री साई कर्मबन्धविनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई कलिमलापहारिणे नमः ।

ॐ श्री साई कलौ प्रत्यक्षदेवताय नमः ।

ॐ श्री साई कलियुगावताराय नमः ।

ॐ श्री साई कल्युत्थभवभञ्जनाय नमः ।

ॐ श्री साई कल्याणानन्तनाम्ने नमः । २४० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई कल्याणगुणभूषणाय नमः ।

ॐ श्री साई कविदासगणुत्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई कष्टनाशकरौषधाय नमः ।

ॐ श्री साई काकादीक्षितरक्षायां धुरीणोऽहमितीरकाय नमः ।

ॐ श्री साई कानाभिलादपि दासगनुं त्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई कानने पानदानकृते नमः ।

ॐ श्री साई कामजिते नमः ।

ॐ श्री साई कामरूपिणे नमः ।

ॐ श्री साई कामसङ्कल्पवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई कामितार्थप्रदात्रे नमः । २५० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई कामादिशत्रुनाशनाय नमः ।

ॐ श्री साई काम्यकर्म सुसन्यस्ताय नमः ।

ॐ श्री साई कामेराशक्तिनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई कालाय नमः ।

ॐ श्री साई कालकालाय नमः ।

ॐ श्री साई कालातीताय नमः ।

ॐ श्री साई कालकृते नमः ।

ॐ श्री साई कालदर्पविनाशिने नमः ।

ॐ श्री साई कालरा तर्जनक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई कालशुनकदत्तान्नं ज्वरंहरेदिति ब्रुवते नमः । २६० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई कालाग्निसदृशक्रोधाय नमः ।

ॐ श्री साई काशिरामसुरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई कीर्तिव्याप्तदिगन्ताय नमः ।

ॐ श्री साई कुप्नीवीतकलेवराय नमः ।

ॐ श्री साई कुम्बाराग्निशिशुत्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई कुष्ठरोगनिवारकाय नमः ।

ॐ श्री साई कूटस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई कृतज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई कृत्स्नक्षेत्रप्रकाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई कृत्स्नज्ञाय नमः । २७० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई कृपापूर्णाय नमः ।

ॐ श्री साई कृपया पालितार्भकाय नमः ।

ॐ श्री साई कृष्णरामशिवात्रेयमारुत्यादिस्वरूपधृते नमः ।

ॐ श्री साई केवलात्मानुभूतये नमः ।

ॐ श्री साई कैवल्यपददायकाय नमः ।

ॐ श्री साई कोविदाय नमः ।

ॐ श्री साई कोमलाङ्गाय नमः ।

ॐ श्री साई कोपव्याजशुभप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई कोऽहमिति दिवानक्तं विचारमनुशासकाय नमः ।

ॐ श्री साई क्लिष्टरक्षाधुरीणाय नमः । २८० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई क्रोधजिते नमः ।

ॐ श्री साई क्लेशनाशनाय नमः ।

ॐ श्री साई गगनसौक्ष्म्यविस्ताराय नमः ।

ॐ श्री साई गम्भीरमधुरस्वनाय नमः ।

ॐ श्री साई गङ्गातीरनिवासिने नमः ।

ॐ श्री साई गङ्गोत्पत्तिपदाम्बुजाय नमः ।

ॐ श्री साई गङ्गागिरिरिति ख्यातयतिश्रेष्ठेन संस्तुताय नमः ।

ॐ श्री साई गन्धपुष्पाक्षतैः पूज्याय नमः ।

ॐ श्री साई गतिविदे नमः ।

ॐ श्री साई गतिसूचकाय नमः । २९० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई गह्वरेष्ठपुराणाय नमः ।

ॐ श्री साई गर्वमात्सर्यवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई गाननृत्यविनोदाय नमः ।

ॐ श्री साई गालवङ्कर्वरप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई गिरीशसदृशत्यागिने नमः ।

ॐ श्री साई गीताचार्याय नमः ।

ॐ श्री साई गीताद्भुतार्थवक्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई गीतारहस्यसंप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई गीताज्ञानमयाय नमः ।

ॐ श्री साई गीतापूर्णोपदेशकाय नमः । ३०० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई गुणातीताय नमः ।

ॐ श्री साई गुणात्मने नमः ।

ॐ श्री साई गुणदोषविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई गुणागुणेषु वर्तन्त इत्यनासक्तिसुस्तिराय नमः ।

ॐ श्री साई गुप्ताय नमः ।

ॐ श्री साई गुहाहिताय नमः ।

ॐ श्री साई गूढाय नमः ।

ॐ श्री साई गुप्तसर्वनिबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई गुर्वङ्घ्रितीव्रभक्तिचेतदेवालयमितीरयते नमः ।

ॐ श्री साई गुरवे नमः । ३१० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई गुरुतमाय नमः ।

ॐ श्री साई गुह्याय नमः ।

ॐ श्री साई गुरुपादपरायणाय नमः ।

ॐ श्री साई गुर्वीशाङ्घ्रिसदाध्यात्रे नमः ।

ॐ श्री साई गुरुसन्तोषवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई गुरुप्रेमसमालब्धपरिपूर्णस्वरूपवते नमः ।

ॐ श्री साई गुरूपासनसंसिद्धाय नमः ।

ॐ श्री साई गुरुमार्गप्रवर्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई गुर्वात्मदेवताबुद्ध्या ब्रह्मानन्दमयाय नमः ।

ॐ श्री साई गुरोस्समाधिपार्श्वस्थनिम्बच्छायानिवासकृते नमः । ३२० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई गुरुवेङ्कूशसंप्राप्तवस्त्रेष्टिका सदाधृताय नमः ।

ॐ श्री साई गुरुपरम्पराऽऽदिष्टसर्वत्यागपरायणाय नमः ।

ॐ श्री साई गुरुपरम्पराप्राप्तसच्चिदानन्दमूर्तिमते नमः ।

ॐ श्री साई गृहहीनमहाराजाय नमः ।

ॐ श्री साई गृहमेधिपराश्रयाय नमः ।

ॐ श्री साई गोपींस्त्राता यथा कृष्णस्तथा नाच्ने कुलावनाय नमः ।

ॐ श्री साई गोपालगुण्डूरायादि पुत्रपौत्रादिवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई गोष्पदीकृतकष्टाब्धये नमः ।

ॐ श्री साई गोदावरीतटागताय नमः ।

ॐ श्री साई चतुर्भुजाय नमः । ३३० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई चतुर्बाहुनिवारितनृसङ्कटाय नमः ।

ॐ श्री साई चमत्कारैः सङ्क्लिष्टैर्भक्तिज्ञानविवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई चन्दनालेपारुष्टानां दुष्टानां धर्षणक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई चन्दोर्करादि भक्तानांसदापालननिष्ठिताय नमः ।

ॐ श्री साई चराचरपरिव्याप्ताय नमः ।

ॐ श्री साई चर्मदाहेऽप्यविकृयाय नमः ।

ॐ श्री साई चान्दभायाख्य पाटेलार्थं चमत्कारसहायकृते नमः ।

ॐ श्री साई चिन्तामग्नपरित्राणे तस्य सर्वभारंवहाय नमः ।

ॐ श्री साई चित्रातिचित्र चारित्राय नमः ।

ॐ श्री साई चिन्मयानन्दाय नमः । ३४० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई चिरवासकृतैर्बन्धैः शिर्डिग्रामं पुनर्गताय नमः ।

ॐ श्री साई चोराद्याहृतवस्तूनि दत्तान्येवेतिहर्षिताय नमः ।

ॐ श्री साई छिन्नसंशयाय नमः ।

ॐ श्री साई छिन्नसंसारबन्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई जगत्पित्रे नमः ।

ॐ श्री साई जगन्मात्रे नमः ।

ॐ श्री साई जगत्त्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई जगद्धिताय नमः ।

ॐ श्री साई जगत्स्रष्ट्रे नमः ।

ॐ श्री साई जगत्साक्षिणे नमः । ३५० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई जगद्व्यापिने नमः ।

ॐ श्री साई जगद्गुरवे नमः ।

ॐ श्री साई जगत्प्रभवे नमः ।

ॐ श्री साई जगन्नाथाय नमः ।

ॐ श्री साई जगदेकदिवाकराय नमः ।

ॐ श्री साई जगन्मोहचमत्काराय नमः ।

ॐ श्री साई जगन्नाटकसूत्रधृते नमः ।

ॐ श्री साई जगन्मङ्गलकर्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई जगन्मायेति बोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई जडोन्मत्तपिशाचाभोप्यन्तःसच्चित्सुखस्थिताय नमः । ३६० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई जन्मबन्धविनिर्मुक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई जन्मसाफल्यमन्त्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई जन्मजन्मान्तरज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई जन्मनाशरहस्यविदे नमः ।

ॐ श्री साई जप्तनामसुसन्तुष्टहरिप्रत्यक्षभाविताय नमः ।

ॐ श्री साई जनजल्पमनाद्यत्य(मनाकृष्ट) जपसिद्धिमहाद्युतये नमः ।

ॐ श्री साई जपप्रेरितभक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई जप्यनाम्ने नमः ।

ॐ श्री साई जनेश्वराय नमः ।

ॐ श्री साई जलहीनस्थले खिन्नभक्तार्थं जलसृष्टिकृते नमः । ३७० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई जवारालीति मौलानासेवनेऽक्लिष्टमानसाय नमः ।

ॐ श्री साई जातग्रामान्तगुरोर्वासं तस्मात्पूर्वस्थलं व्रजते नमः ।

ॐ श्री साई जातिभेदमतैर्भेद इति भेदतिरस्कृताय नमः ।

ॐ श्री साई जातिविद्याधनैश्चापि हीनानार्द्रहृदावनाय नमः ।

ॐ श्री साई जाम्बूनदपरित्यागिने नमः ।

ॐ श्री साई जागरूकावितप्रजाय नमः ।

ॐ श्री साई जायापत्यगृहक्षेत्रस्वजनस्वार्थवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई जितद्वैतमहामोहाय नमः ।

ॐ श्री साई जितक्रोधाय नमः ।

ॐ श्री साई जितेन्द्रियाय नमः । ३८० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई जितकन्दर्पदर्पाय नमः ।

ॐ श्री साई जितात्मने नमः ।

ॐ श्री साई जितषड्रिपवे नमः ।

ॐ श्री साई जीर्णहूणालयस्थाने पूर्वजन्मकृतं स्मरते नमः ।

ॐ श्री साई जीर्णहूणालयं चाद्य सर्वमर्त्यालयङ्कराय नमः ।

ॐ श्री साई जीर्णवस्त्रसमं मत्वा देहं त्यक्त्वा सुखं स्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई जीर्णवस्त्रसमं पश्यन् त्यक्त्वा देहं प्रविष्टवते नमः ।

ॐ श्री साई जीवन्मुक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई जीवानां मुक्तिसद्गतिदायकाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्योतिषशास्त्ररहस्यज्ञाय नमः । ३९० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई ज्योतिर्ज्ञानप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्योत्स्ना सूर्यं दृशा पश्यते नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानभास्करमूर्तिमते नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानसर्वरहस्याय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञातब्रह्मपरात्पराय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानभक्तिप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानविज्ञाननिश्चयाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानशक्तिसमारूढाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानयोगव्यवस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानाग्निदग्धकर्मणे नमः । ४०० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई ज्ञाननिर्धूतकल्मषाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानवैराग्यसन्धात्रे नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानसञ्छिन्नसंशयाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानापास्तमहामोहाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानीत्यात्मैव निश्चयाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानेश्वरी पठद्दैवप्रतिबन्धनिवारकाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञेयाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानगम्याय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञातसर्वपरं मताय नमः । ४१० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई ज्योतिषां प्रथमज्योतिषे नमः ।

ॐ श्री साई ज्योतिर्हीनद्युतिप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई तपस्सन्दीप्ततेजस्विने नमः ।

ॐ श्री साई तप्तकाञ्चनसन्निभाय नमः ।

ॐ श्री साई तत्त्वज्ञानार्थदर्शिने नमः ।

ॐ श्री साई तत्त्वमस्यादिलक्षिताय नमः ।

ॐ श्री साई तत्त्वविदे नमः ।

ॐ श्री साई तत्त्वमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई तन्द्राऽऽलस्यविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई तत्त्वमालाधराय नमः । ४२० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई तत्त्वसारविशारदाय नमः ।

ॐ श्री साई तर्जितान्तकदूताय नमः ।

ॐ श्री साई तमसःपराय नमः ।

ॐ श्री साई तात्यागणपतिप्रेष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई तात्यानूल्कर्गतिप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई तारकब्रह्मनाम्ने नमः ।

ॐ श्री साई तमोरजोविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई तामरसदलाक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई ताराबाय्यसुरक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई तिलकपूजिताङ्घ्रये नमः । ४३० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई तिर्यग्जन्तुगतिप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई तीर्थकृतनिवासाय नमः ।

ॐ श्री साई तीर्थपादाय नमः ।

ॐ श्री साई तीव्रभक्ति नृसिंहादिभक्तालीभूर्यनुग्रहाय नमः ।

ॐ श्री साई तीव्रप्रेमविरागाप्तवेङ्कटेशकृपानिधये नमः ।

ॐ श्री साई तुल्यप्रियाप्रियाय नमः ।

ॐ श्री साई तुल्यनिन्दाऽऽत्मसंस्तुतये नमः ।

ॐ श्री साई तुल्याधिकविहीनाय नमः ।

ॐ श्री साई तुष्टसज्जनसंवृताय नमः ।

ॐ श्री साई तृप्तात्मने नमः । ४४० ।

ॐ श्री साई तृषाहीनाय नमः ।

ॐ श्री साई तृणीकृतजगद्वसवे नमः ।

ॐ श्री साई तैलीकृतजलपूर्णदीपसञ्ज्वलितालयाय नमः ।

ॐ श्री साई त्रिकालज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई त्रिमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई त्रिगुणातीताय नमः ।

ॐ श्री साई त्रियामायोगनिष्ठात्मा दशदिग्भक्तपालकाय नमः ।

ॐ श्री साई त्रिवर्गमोक्षसन्धात्रे नमः ।

ॐ श्री साई त्रिपुटिरहितस्थितये नमः ।

ॐ श्री साई त्रिलोकस्वेच्छासञ्चारिणे नमः । ४५० ।

ॐ श्री साई त्रैलोक्यतिमिरापहाय नमः ।

ॐ श्री साई त्यक्तकर्मफलासङ्गाय नमः ।

ॐ श्री साई त्यक्तभोगसदासुखिने नमः ।

ॐ श्री साई त्यक्तदेहात्मबुद्धये नमः ।

ॐ श्री साई त्यक्तसर्वपरिग्रहाय नमः ।

ॐ श्री साई त्यक्त्वा मायामयं सर्वं स्वे महिम्नि सदा स्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई दण्डधृते नमः ।

ॐ श्री साई दण्डनार्हाणां दुष्टवृत्तेर्निवर्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई दम्भदर्पातिदूराय नमः ।

ॐ श्री साई दक्षिणामूर्तये नमः । ४६० ।

ॐ श्री साई दक्षिणादानकर्तृभ्यो दशधाप्रतिदायकाय नमः ।

ॐ श्री साई दक्षिणाप्रार्थनाद्वारा शुभकृत्तत्त्वबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई दयापराय नमः ।

ॐ श्री साई दयासिन्धवे नमः ।

ॐ श्री साई दत्तात्रेयाय नमः ।

ॐ श्री साई दरिद्रोऽयं धनीवेति भेदाचारविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई दहराकाशभानवे नमः ।

ॐ श्री साई दग्धहस्तार्भकावनाय नमः ।

ॐ श्री साई दारिद्र्यदुःखभीतिघ्नाय नमः ।

ॐ श्री साई दामोदरवरप्रदाय नमः । ४७० ।

ॐ श्री साई दानशौण्डाय नमः ।

ॐ श्री साई दान्ताय नमः ।

ॐ श्री साई दानैश्चान्यान् वशं नयते नमः ।

ॐ श्री साई दानमार्गस्खलत्पादनानाचन्दोर्करावनाय नमः ।

ॐ श्री साई दिव्यज्ञानप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई दिव्यमङ्गलविग्रहाय नमः ।

ॐ श्री साई दीनदयापराय नमः ।

ॐ श्री साई दीर्घदृशे नमः ।

ॐ श्री साई दीनवत्सलाय नमः ।

ॐ श्री साई दुष्टानां दमने शक्ताय नमः । ४८० ।

ॐ श्री साई दुरादर्षतपोबलाय नमः ।

ॐ श्री साई दुर्भिक्षोऽप्यन्नदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई दुदृष्टविनाशकृते नमः ।

ॐ श्री साई दुःखशोकभयद्वेषमोहाद्यशुभनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई दुष्टनिग्रह-शिष्टानुग्रहरूपमहाव्रताय नमः ।

ॐ श्री साई दुष्टमूर्खजडादिनामप्रकाशस्वरूपवते नमः ।

ॐ श्री साई दुष्टजन्तुपरित्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई दूरवर्तिसमस्तदृशे नमः ।

ॐ श्री साई दृश्यं नश्यं न विश्वास्यमिति बुद्धिप्रबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई दृश्यं सर्वं हि चैतन्यमित्यानन्दप्रतिष्ठाय नमः । ४९० ।

ॐ श्री साई देहे विगलिताशाय नमः ।

ॐ श्री साई देहयात्रार्थं अन्नभुजे नमः ।

ॐ श्री साई देहो गेहस्ततो मान्तु निन्ये गुरुरितीरकाय नमः ।

ॐ श्री साई देहात्मबुद्धिहीनाय नमः ।

ॐ श्री साई देहमोहप्रभञ्जनाय नमः ।

ॐ श्री साई देहो देवालयस्तस्मिन् देवं पश्येदित्युदीरयते नमः ।

ॐ श्री साई दैवीसम्पत्प्रपूर्णाय नमः ।

ॐ श्री साई देशोद्धारसहायकृते नमः ।

ॐ श्री साई द्वन्द्वमोहविनिर्मुक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई द्वन्द्वातीतविमत्सराय नमः । ५०० ।

ॐ श्री साई द्वारकामायिवासिने (द्वारकामयि) नमः ।

ॐ श्री साई द्वेषद्रोहविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई द्वैताद्वैतविशिष्ठदीन् काले स्थाने विबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई धनहीनान् धनाढ्यांश्च समदृष्ट्यैव रक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई धनदेनसमत्यागाय नमः ।

ॐ श्री साई धरणीधरसन्निभाय नमः ।

ॐ श्री साई धर्मज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई धर्मसेतवे नमः ।

ॐ श्री साई धर्मस्थापनसम्भवाय नमः ।

ॐ श्री साई धुमाले उपासनी पत्न्योः निर्वाणे सद्गतिप्रदाय नमः । ५१० ।

ये भी पढ़ें:  Shri Mallari Sahasranama (श्री मल्लारी सहस्रनाम): पाठ कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियां

ॐ श्री साई धूपखेडा पटेल चान्दभाय नष्टाश्वस्थानसूचकाय नमः ।

ॐ श्री साई धूमयानात् पतत्पाथेवार पत्नी सुरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई ध्यानावस्थितचेतसे नमः ।

ॐ श्री साई धृत्युत्साहसमन्विताय नमः ।

ॐ श्री साई नतजनावनाय नमः ।

ॐ श्री साई नरलोकमनोरमाय नमः ।

ॐ श्री साई नष्टदृष्टिप्रदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई नरलोकविडम्बनाय नमः ।

ॐ श्री साई नागसर्पे मयूरे च समारूढषडाननाय नमः ।

ॐ श्री साई नाना चान्दोर्करं आहूय तत्सद्गत्यै कृतोद्यमया नमः । ५२० ।

ॐ श्री साई नाना निंहोणकस्यान्ते स्वाङ्घ्रिध्यानलयप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई नानादेशाभिधाकाराय नमः ।

ॐ श्री साई नानाविधिसमर्चिताय नमः ।

ॐ श्री साई नारायणमहाराज संश्लाघितपदाम्बुजाय नमः ।

ॐ श्री साई नारायणपराय नमः ।

ॐ श्री साई नामवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई निगृहितेन्द्रियग्रामाय नमः ।

ॐ श्री साई निगमागम अगोचराय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यसर्वगतस्थाणवे नमः ।

ॐ श्री साई नित्यतृप्ताय नमः । ५३० ।

ॐ श्री साई निराश्रयाय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यान्नदानधर्मिष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यानन्दप्रवाहकाय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यमङ्गलधाम्ने नमः ।

ॐ श्री साई नित्याग्निहोत्रवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यकर्मनियोक्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई नित्यसत्त्वस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई निम्बपादपमूलस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई निरन्तराग्निरक्षित्रे नमः ।

ॐ श्री साई निस्पृहा नमः । ५४० ।

ॐ श्री साई निर्विकल्पाय नमः ।

ॐ श्री साई निरङ्कुशगतागतये नमः ।

ॐ श्री साई निर्जितकामनादोषाय नमः ।

ॐ श्री साई निराशाय नमः ।

ॐ श्री साई निरञ्जनाय नमः ।

ॐ श्री साई निर्विकल्पसमाधिस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई निरपेक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई निर्गुणाय नमः ।

ॐ श्री साई निर्द्वन्द्वाय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यसत्त्वस्थाय नमः । ५५० ।

ॐ श्री साई निर्विकाराय नमः ।

ॐ श्री साई निश्चलाय नमः ।

ॐ श्री साई निरालम्बाय नमः ।

ॐ श्री साई निराकाराय नमः ।

ॐ श्री साई निवृत्तगुणदोषकाय नमः ।

ॐ श्री साई नूल्कर विजयानन्द माहिषां दत्तसद्गतये नमः ।

ॐ श्री साई नरसिंह गनूदास दत्त प्रचारसाधनाय नमः ।

ॐ श्री साई नैष्ठिकब्रह्मचर्याय नमः ।

ॐ श्री साई नैष्कर्म्यपरिनिष्ठिताय नमः ।

ॐ श्री साई पण्डरीपाण्डुरङ्गाख्याय नमः । ५६० ।

ॐ श्री साई पाटिल तात्याजी मातुलाय नमः ।

ॐ श्री साई पतितपावनाय नमः ।

ॐ श्री साई पत्रिग्रामसमुद्भवाय नमः ।

ॐ श्री साई पदविसृष्टगङ्गाम्भसे नमः ।

ॐ श्री साई पदाम्बुजनतावनाय नमः ।

ॐ श्री साई परब्रह्मस्वरूपिणे नमः ।

ॐ श्री साई परमकरुणालयाय नमः ।

ॐ श्री साई परतत्त्वप्रदीपाय नमः ।

ॐ श्री साई परमार्थनिवेदकाय नमः ।

ॐ श्री साई परमानन्दनिस्यन्दाय नमः । ५७० ।

ॐ श्री साई परञ्ज्योतिषे नमः ।

ॐ श्री साई परात्पराय नमः ।

ॐ श्री साई परमेष्ठिने नमः ।

ॐ श्री साई परन्धाम्ने नमः ।

ॐ श्री साई परमेश्वराय नमः ।

ॐ श्री साई परमसद्गुरवे नमः ।

ॐ श्री साई परमाचार्याय नमः ।

ॐ श्री साई परधर्मभयाद्भक्तान् स्वे स्वे धर्मे नियोजकाय नमः ।

ॐ श्री साई परार्थैकान्तसम्भूतये नमः ।

ॐ श्री साई परमात्मने नमः । ५८० ।

ॐ श्री साई परागतये नमः ।

ॐ श्री साई पापतापौघसंहारिणे नमः ।

ॐ श्री साई पामरव्याजपण्डिताय नमः ।

ॐ श्री साई पापाद्दासं समाकृष्य पुण्यमार्गप्रवर्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई पिपीलिकासुखान्नदाय नमः ।

ॐ श्री साई पिशाचे च व्यवस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई पुत्रकामेष्ठि यागादेः ऋते सन्तानवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई पुनरुज्जीवितप्रेताय नमः ।

ॐ श्री साई पुनरावृत्तिनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई पुनःपुनरिहागम्य भक्तेभ्यः सद्गतिप्रदाय नमः । ५९० ।

ॐ श्री साई पुण्डरीकायताक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः ।

ॐ श्री साई पुरन्दरादि भक्ताग्र्यपरित्राणधुरन्धराय नमः ।

ॐ श्री साई पुराणपुरुषाय नमः ।

ॐ श्री साई पुरीशाय नमः ।

ॐ श्री साई पुरुषोत्तमाय नमः ।

ॐ श्री साई पूजापराङ्मुखाय नमः ।

ॐ श्री साई पूर्णाय नमः ।

ॐ श्री साई पूर्णवैराग्यशोभिताय नमः ।

ॐ श्री साई पूर्णानन्दस्वरूपिणे नमः । ६०० ।

ॐ श्री साई पूर्णकृपानिधये नमः ।

ॐ श्री साई पूर्णचन्द्रसमाह्लादिने नमः ।

ॐ श्री साई पूर्णकामाय नमः ।

ॐ श्री साई पूर्वजाय नमः ।

ॐ श्री साई प्रणतपालनोद्युक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई प्रणतार्तिहराय नमः ।

ॐ श्री साई प्रत्यक्षदेवतामूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई प्रत्यगात्मनिदर्शकाय नमः ।

ॐ श्री साई प्रपन्नपारिजाताय नमः ।

ॐ श्री साई प्रपन्नानां परागतये नमः । ६१० ।

ॐ श्री साई प्रमाणातीतचिन्मूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई प्रमादाभिधमृत्युजिते नमः ।

ॐ श्री साई प्रसन्नवदनाय नमः ।

ॐ श्री साई प्रसादाभिमुखद्युतये नमः ।

ॐ श्री साई प्रशस्तवाचे नमः ।

ॐ श्री साई प्रशान्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई प्रियसत्यमुदाहरते नमः ।

ॐ श्री साई प्रेमदाय नमः ।

ॐ श्री साई प्रेमवश्याय नमः ।

ॐ श्री साई प्रेममार्गैकसाधनाय नमः । ६२० ।

ॐ श्री साई बहुरूपनिगूढात्मने नमः ।

ॐ श्री साई बलदृप्तदमक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई बलातिदर्प भय्याजि महागर्वविभञ्जनाय नमः ।

ॐ श्री साई बुधसन्तोषदाय नमः ।

ॐ श्री साई बुद्धाय नमः ।

ॐ श्री साई बुधजनावनाय नमः ।

ॐ श्री साई बृहद्बन्धविमोक्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई बृहद्भारवहक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मकुलसमुद्भूताय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मचारिव्रतस्थिताय नमः । ६३० ।

ॐ श्री साई ब्रह्मानन्दामृतमग्नाय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मानन्दाय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मानन्दलसद्दृष्टये नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मवादिने नमः ।

ॐ श्री साई बृहच्छ्रवसे नमः ।

ॐ श्री साई ब्राह्मणस्त्रीविसृष्टोल्कातर्जितश्वाऽऽकृतये नमः ।

ॐ श्री साई ब्राह्मणानां मशीदिस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मण्याय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मवित्तमाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तदासगणु प्राणमानवृत्त्यादिरक्षकाय नमः । ६४० ।

ॐ श्री साई भक्तात्यन्तहितैषिणे नमः ।

ॐ श्री साई भक्ताश्रितदयापराय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तार्थे धृतदेहाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तार्थे दग्धहस्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तपरागतये नमः ।

ॐ श्री साई भक्तवत्सलाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तमानसवासिने नमः ।

ॐ श्री साई भक्तातिसुलभाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तभवाब्धिपोताय नमः ।

ॐ श्री साई भगवते नमः । ६५० ।

ॐ श्री साई भजतां सुहृदे नमः ।

ॐ श्री साई भक्तसर्वस्वहारिणे नमः ।

ॐ श्री साई भक्तानुग्रहकातराय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तरास्न्यादि सर्वेषां अमोघाभयसंप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तावनसमर्थाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तावनधुरन्धराय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तभावपराधीनाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तात्यन्तहितौषधाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तावनप्रतिज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई भजतां इष्टकामदुहे नमः । ६६० ।

ॐ श्री साई भक्तहृत्पद्मवासिने नमः ।

ॐ श्री साई भक्तिमार्गप्रदर्शकाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्ताशयविहारिणे नमः ।

ॐ श्री साई भक्तसर्वमलापहाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तबोधैकनिष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तानां सद्गतिप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई भद्रमार्गप्रदर्शिने नमः ।

ॐ श्री साई भद्रं भद्रमिति ब्रुवते नमः ।

ॐ श्री साई भद्रश्रवसे नमः ।

ॐ श्री साई भन्नूमाइसाध्वीहितशासनाय नमः । ६७० ।

ॐ श्री साई भयसन्त्रस्तकपर्दे अमोघाभयवरप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई भयहीनाय नमः ।

ॐ श्री साई भयत्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई भयकृते नमः ।

ॐ श्री साई भयनाशनाय नमः ।

ॐ श्री साई भववारिधिपोताय नमः ।

ॐ श्री साई भवलुण्ठनकोविदाय नमः ।

ॐ श्री साई भस्मदानेन निरस्ताधिव्याधिदुःखाशुभाखिलाय नमः ।

ॐ श्री साई भस्मसात्कृतभक्तारये नमः ।

ॐ श्री साई भस्मसात्कृतमन्मथाय नमः । ६८० ।

ॐ श्री साई भस्मपूतमशीदिस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई भस्मदग्धाखिलामयाय नमः ।

ॐ श्री साई भागोजि कुष्ठरोगघ्नाय नमः ।

ॐ श्री साई भाषाखिलसुवेदिताय नमः ।

ॐ श्री साई भाष्यकृते नमः ।

ॐ श्री साई भावगम्याय नमः ।

ॐ श्री साई भारसर्वपरिग्रहाय नमः ।

ॐ श्री साई भागवतसहायाय नमः ।

ॐ श्री साई भावनाशून्यतः सुखिने नमः ।

ॐ श्री साई भागवतप्रधानाय नमः । ६९० ।

ॐ श्री साई भागवतोत्तमाय नमः ।

ॐ श्री साई भाटे द्वेषं समाकृष्य भक्तिं तस्मै प्रदत्तवते नमः ।

ॐ श्री साई भिल्लरूपेण दत्ताम्भसे नमः ।

ॐ श्री साई भिक्षान्नदानशेषभुजे नमः ।

ॐ श्री साई भिक्षाधर्ममहाराजाय नमः ।

ॐ श्री साई भिक्षौघदत्तभोजनाय नमः ।

ॐ श्री साई भीमाजि क्षयपापघ्ने नमः ।

ॐ श्री साई भीमबलान्विताय नमः ।

ॐ श्री साई भीतानां भीतिनाशिने नमः ।

ॐ श्री साई भीषणभीषणाय नमः । ७०० ।

ॐ श्री साई भीषाचालितसुर्याग्निमघवन्मृत्युमारुताय नमः ।

ॐ श्री साई भुक्तिमुक्तिप्रदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई भुजगाद्रक्षितप्रजाय नमः ।

ॐ श्री साई भुजङ्गरूपमाविश्य सहस्रजनपूजिताय नमः ।

ॐ श्री साई भुक्त्वा भोजनदातॄणां दग्धप्रागुत्तर अशुभाय नमः ।

ॐ श्री साई भूटिद्वरा गृहं बद्ध्वा कृतसर्वमतालयाय नमः ।

ॐ श्री साई भूभृतसम उपकारिणे नमः ।

ॐ श्री साई ॐ श्रीसाई भूम्ने नमः ।

ॐ श्री साई भूशयाय नमः ।

ॐ श्री साई भूतशरण्यभूताय नमः । ७१० ।

ॐ श्री साई भूतात्मने नमः ।

ॐ श्री साई भूतभावनाय नमः ।

ॐ श्री साई भूतप्रेतपिशाचादीन् धर्ममार्गे नियोजयते नमः ।

ॐ श्री साई भृत्यस्य भृत्यसेवाकृते नमः ।

ॐ श्री साई भृत्य भारवहाय नमः ।

ॐ श्री साई भेकं दत्तवरं स्मृत्वा सर्पास्यादपि रक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई भोगैश्वैर्येषु असक्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई भैषज्ये भिषजांवराय नमः ।

ॐ श्री साई मर्करूपेण भक्तस्य रक्षणे तेन ताडिताय नमः ।

ॐ श्री साई मन्त्रघोषमशीदिस्थाय नमः । ७२० ।

ॐ श्री साई मदाभिमानवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई मधुपानभृशासक्तिं दिव्यशक्त्या व्यपोहकाय नमः ।

ॐ श्री साई मशीध्यां तुलसीपूजां अग्निहोत्रं च शासकाय नमः ।

ॐ श्री साई महावाक्यसुधामग्नाय नमः ।

ॐ श्री साई महाभागवताय नमः ।

ॐ श्री साई महानुभाव तेजस्विने नमः ।

ॐ श्री साई महायोगेश्वराय नमः ।

ॐ श्री साई महाभयपरित्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई महात्मने नमः ।

ॐ श्री साई महाबलाय नमः । ७३० ।

ॐ श्री साई माधवराय देशपाण्डे सख्युः साहाय्यकृते नमः ।

ॐ श्री साई मानापमानयोस्तुल्याय नमः ।

ॐ श्री साई मार्गबन्धवे नमः ।

ॐ श्री साई मारुतये नमः ।

ॐ श्री साई मायामानुष रूपेण गूढैश्वर्यपरात्पराय नमः ।

ॐ श्री साई मार्गस्थदेवसत्कारः कार्य इत्यानुशसित्रे नमः ।

ॐ श्री साई मारीग्रस्थ बूटीत्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई मार्जालोच्छिष्ठभोजनाय नमः ।

ॐ श्री साई मिरीकरं सर्पगण्डात् दैवाज्ञाप्ताद्विमोचयते नमः ।

ॐ श्री साई मितवाचे नमः । ७४० ।

ॐ श्री साई मितभुजे नमः ।

ॐ श्री साई मित्रे शत्रौ सदा समाय नमः ।

ॐ श्री साई मीनाताइ प्रसूत्यर्थं प्रेषिताय रथं ददते नमः ।

ॐ श्री साई मुक्तसङ्गैः आनंवादिने (आनमिताय) नमः ।

ॐ श्री साई मुक्तसंसृतिबन्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई मुहुर्देवावतारादि नामोच्चारणनिर्वृताय नमः ।

ॐ श्री साई मूर्तिपूजानुशास्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई मूर्तिमानपि अमूर्तिमते नमः ।

ॐ श्री साई मूलेशास्त्रिणः गुरोर्घोलपमहाराजस्य रूपधृते नमः ।

ॐ श्री साई मृतसूनुं समाकृष्य पूर्वमातरि योजयते नमः । ७५० ।

ॐ श्री साई मृदालयनिवासिने नमः ।

ॐ श्री साई मृत्युभीतिव्यपोहकाय नमः ।

ॐ श्री साई मेघश्यामाय-पूजार्थं शिवलिङ्गमुपाहरते नमः ।

ॐ श्री साई मोहकलिलतीर्णाय नमः ।

ॐ श्री साई मोहसंशयनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई मोहिनीराजपूजायां कुल्कर्ण्यप्पा नियोजकाय नमः ।

ॐ श्री साई मोक्षमार्गसहायाय नमः ।

ॐ श्री साई मौनव्याख्याप्रबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई यज्ञदानतपोनिष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई यज्ञशिष्ठान्नभोजनाय नमः । ७६० ।

ॐ श्री साई यतेन्द्रियमनोबुद्धये नमः ।

ॐ श्री साई यतिधर्मसुपालकाय नमः ।

ॐ श्री साई यतो वाचो निवर्तन्ते तदानन्दसुनिष्ठिताय नमः ।

ॐ श्री साई यत्नातिशयसेवाप्तगुरुपूर्णकृपाबलाय नमः ।

ॐ श्री साई यथेच्छसूक्ष्मसञ्चारिने नमः ।

ॐ श्री साई यथेष्टदानधर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई यन्त्रारूढं जगत्सर्वमायया भ्रामयत्प्रभवे नमः ।

ॐ श्री साई यमकिङ्करसन्त्रस्तसामन्तस्य सहायकृते नमः ।

ॐ श्री साई यमदूतपरिक्लिष्टपुरन्दरेऽसुरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई यमभीतीविनाशिने नमः । ७७० ।

ॐ श्री साई यवनालयभूषणाय नमः ।

ॐ श्री साई यशसापि महाराजाय नमः ।

ॐ श्री साई यशःपूरितभारताय नमः ।

ॐ श्री साई यक्षराक्षसपिशाचानां सानिध्यदेव नाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई युक्तभोजननिद्राय नमः ।

ॐ श्री साई युगान्तरचरित्रविदे नमः ।

ॐ श्री साई योगशक्तिजितस्वप्नाय नमः ।

ॐ श्री साई योगमायासमावृताय नमः ।

ॐ श्री साई योगवीक्षणसन्दत्तपरमानन्दमूर्तिमते नमः ।

ॐ श्री साई योगिभिर्ध्यानगम्याय नमः । ७८० ।

ॐ श्री साई योगक्षेमवहाय नमः ।

ॐ श्री साई रथस्य रजताश्वेषु हृतेष्वम्लानमानसाय नमः ।

ॐ श्री साई रसाय नमः ।

ॐ श्री साई रससाराज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई रसनारसजिते नमः ।

ॐ श्री साई रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तितमहायशसे नमः ।

ॐ श्री साई रक्षणात्पोषणात्सर्वपितृमातृगुरुप्रभवे नमः ।

ॐ श्री साई रागद्वेषवियुक्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई राकाचन्द्रसमाननाय नमः ।

ॐ श्री साई राजीवलोचनाय नमः । ७९० ।

ॐ श्री साई राजभिश्चाभिवन्दिताय नमः ।

ॐ श्री साई रामभक्तिप्रपूर्णाय नमः ।

ॐ श्री साई रामरूपप्रदर्शकाय नमः ।

ॐ श्री साई रामसारूप्यलब्धाय नमः ।

ॐ श्री साई रामसाइ इति विश्रुताय नमः ।

ॐ श्री साई रामदूतमयाय नमः ।

ॐ श्री साई राममन्त्रोपदेशकाय नमः ।

ॐ श्री साई राममूर्त्या आविर्भूतवते (राममूर्त्यादिशङ्कर्त्रे) नमः ।

ॐ श्री साई रासनेकुलवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई रुद्रतुल्यप्रकोपाय नमः । ८०० ।

ॐ श्री साई रुद्रकोपदमक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई रुद्रविष्णुकृताभेदाय नमः ।

ॐ श्री साई रूपिणि रूप्यमोहजिते नमः ।

ॐ श्री साई रूपेऽरूपे चिदात्मानं पश्यध्वमिति बोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई रूपात् रूपान्तरं यतोऽमृत इत्यभयप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई रेगे शिशोः तथान्धस्य सदा सद्गतिदायकाय नमः ।

ॐ श्री साई रोगदारिद्र्यदुःखादीन् भस्मदानेन वारयते नमः ।

ॐ श्री साई रोदनातार्द्रचित्ताय नमः ।

ॐ श्री साई रोमहर्षात्वाकृतये नमः ।

ॐ श्री साई लघ्वाशिने नमः । ८१० ।

ॐ श्री साई लघुनिद्राय नमः ।

ॐ श्री साई लब्धाश्वग्रामणिस्तुताय नमः ।

ॐ श्री साई लगुडोद्धृतरोहिल्लास्तम्भनाद्दर्पनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई ललिताद्भुतचारित्राय नमः ।

ॐ श्री साई लक्ष्मीनारायणाय नमः ।

ॐ श्री साई लीलामानुषदेहस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई लीलामानुषकर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई लेलेशास्त्रि श्रुतिप्रीत्या मशीदि वेदघोषणाय नमः ।

ॐ श्री साई लोकाभिरामाय नमः ।

ॐ श्री साई लोकेशाय नमः । ८२० ।

ॐ श्री साई लोलुप्त्वविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई लोकेषु विहरंश्चापि सच्चिदानन्दसंस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई लोनीवारण्यगणूदासं महापायाद्विमोचकाय नमः ।

ॐ श्री साई वस्त्रवद्वपुं वीक्ष्य स्वेच्छात्यक्तकलेवराय नमः ।

ॐ श्री साई वस्त्रवद्देहमुत्सृज्य पुनर्देहं प्रविष्टवते नमः ।

ॐ श्री साई वन्ध्यादोषविमुक्त्यर्थं तद्वस्त्रे नारिकेलदाय नमः ।

ॐ श्री साई वासुदेवैकसन्तुष्टये नमः ।

ॐ श्री साई वादद्वेष अप्रियाय नमः ।

ॐ श्री साई विद्याविनयसम्पन्नाय नमः ।

ॐ श्री साई विधेयात्मने नमः । ८३० ।

ॐ श्री साई वीर्यवते नमः ।

ॐ श्री साई विविक्तदेशसेविने नमः ।

ॐ श्री साई विश्वभावनभाविताय नमः ।

ॐ श्री साई विश्वमङ्गलमाङ्गल्याय नमः ।

ॐ श्री साई विषयात्संहृतेन्द्रियाय नमः ।

ॐ श्री साई वीतरागभयक्रोधाय नमः ।

ॐ श्री साई वृद्धान्ध ईक्षणसंप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई वेदान्ताम्बुजसूर्याय नमः ।

ॐ श्री साई वेदिस्थाग्निविवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई वैराग्यपूर्णचारित्राय नमः । ८४० ।

ॐ श्री साई वैकुण्ठप्रियकर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई वैहायसगतये नमः ।

ॐ श्री साई व्यामोहप्रशमौषधाय नमः ।

ॐ श्री साई शत्रुच्छेदैकमन्त्राय नमः ।

ॐ श्री साई शरणागतवत्सलाय नमः ।

ॐ श्री साई शरणागतभीमाजीश्वान्धभेकादिरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई शरीरस्थ अशरीरस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई शरीरानेकसम्भृताय नमः ।

ॐ श्री साई शाश्वतपरार्थसर्वेहाय नमः ।

ॐ श्री साई शरीरकर्मकेवलाय नमः । ८५० ।

ॐ श्री साई शाश्वतधर्मगोप्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई शान्तिदान्तिविभूषिताय नमः ।

ॐ श्री साई शिरस्तम्भितगङ्गाम्भसे नमः ।

ॐ श्री साई शान्ताकाराय नमः ।

ॐ श्री साई शिष्टधर्ममनुप्राप्य मौलानपादसेविताय नमः ।

ॐ श्री साई शिवदाय नमः ।

ॐ श्री साई शिवरूपाय नमः ।

ॐ श्री साई शिवशक्तियुताय नमः ।

ॐ श्री साई शिरीयानसुतोद्वाहं यथोक्तं परिपूरयते नमः ।

ॐ श्री साई शीतोष्णसुखदुःखेषु समाय नमः । ८६० ।

ॐ श्री साई शीतलवाक्सुधाय नमः ।

ॐ श्री साई शिर्डिन्यस्तगुरोर्देहाय नमः ।

ॐ श्री साई शिर्डित्यक्तकलेवराय नमः ।

ॐ श्री साई शुक्लाम्बरधराय नमः ।

ॐ श्री साई शुद्धसत्त्वगुणस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई शुद्धज्ञानस्वरूपाय नमः ।

ॐ श्री साई शुभाऽशुभविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई शुभ्रमार्गेण तद्विष्णोः परमं पदं नॄन् नेत्रे नमः ।

ॐ श्री साई शेलुगुरुकुले वासिने नमः ।

ॐ श्री साई शेषशायिने नमः । ८७० ।

ॐ श्री साई श्रीकान्ताय नमः ।

ॐ श्री साई श्रीकराय नमः ।

ॐ श्री साई श्रीमते नमः ।

ॐ श्री साई श्रेष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई श्रेयोविधायकाय नमः ।

ॐ श्री साई श्रुतिस्मृतिशिरोरत्नविभूषितपदाम्बुजाय नमः ।

ॐ श्री साई श्रेयान् स्वधर्म इत्युक्त्वा स्वस्वधर्मनियोजकाय नमः ।

ॐ श्री साई सखाराम सच्छिष्याय नमः ।

ॐ श्री साई सकलाश्रयकामदुहे नमः ।

ॐ श्री साई सगुणनिर्गुणब्रह्मणे नमः । ८८० ।

ॐ श्री साई सज्जनमानसव्योमराजमानसुधाकराय नमः ।

ॐ श्री साई सत्कर्मनिरताय नमः ।

ॐ श्री साई सत्सन्तानवरप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यव्रताय नमः ।

ॐ श्री साई सत्याय नमः ।

ॐ श्री साई सत्सुलभोऽन्यदुर्लभाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यवाचे नमः ।

ॐ श्री साई सत्यसङ्कल्पाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यधर्मपरायणाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यपराक्रमाय नमः । ८९० ।

ॐ श्री साई सत्यद्रष्ट्रे नमः ।

ॐ श्री साई सनातनाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यनारायणाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यतत्त्वप्रभोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्पुरुषाय नमः ।

ॐ श्री साई सदाचाराय नमः ।

ॐ श्री साई सदा परहिते रताय नमः ।

ॐ श्री साई सदा क्षिप्तनिजानन्दाय नमः ।

ॐ श्री साई सदानन्दाय नमः ।

ॐ श्री साई सद्गुरवे नमः । ९०० ।

ॐ श्री साई सदा जनहितोद्युक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई सदात्मने नमः ।

ॐ श्री साई सदाशिवाय नमः ।

ॐ श्री साई सदाऽऽर्द्रचिताय नमः ।

ॐ श्री साई सद्रूपिणे नमः ।

ॐ श्री साई सदाश्रयाय नमः ।

ॐ श्री साई सदाजिताय नमः ।

ॐ श्री साई सन्यासयोगयुक्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई सन्मार्गस्थापनव्रताय नमः ।

ॐ श्री साई सबीजं फलमादाय निर्बीजपरिणामकाय नमः । ९१० ।

ॐ श्री साई समदुःखसुखस्वस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई समलोष्टाश्मकाञ्चनाय नमः ।

ॐ श्री साई समर्थसद्गुरुश्रेष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई समानरहिताय नमः ।

ॐ श्री साई समाश्रितजनत्राणव्रतपालनतत्पराय नमः ।

ॐ श्री साई समुद्रसमगाम्भीर्याय नमः ।

ॐ श्री साई सङ्कल्परहिताय नमः ।

ॐ श्री साई संसारतापहार्यङ्घ्रये नमः ।

ॐ श्री साई संसारवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई संसारोत्तारनाम्ने नमः । ९२० ।

ॐ श्री साई सरोजदलकोमलाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्पादिभयहारिणे नमः ।

ॐ श्री साई सर्परूपेऽप्यवस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वकर्मफलत्यागिने नमः ।

ॐ श्री साई सर्वत्र समवस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वतःपाणिपादाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वतोऽक्षिशिरोमुखाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वतःश्रुतिमन्मूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई सर्वमावृत्य संस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वधर्मसमत्रात्रे नमः । ९३० ।

ॐ श्री साई सर्वधर्मसुपूजिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वधर्मान् परित्यज्य गुर्विशं शरणं गताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वधीसाक्षिभूताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वनामाभिसूचिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतान्तरात्मने नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूताशयस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतादिवासाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतहिते रताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतात्मभूतात्मने नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतसहृदे नमः । ९४० ।

ॐ श्री साई सर्वभूतनिशोन्निद्राय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतसमादृताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वविदे नमः ।

ॐ श्री साई सर्वस्मै नमः ।

ॐ श्री साई सर्वमत सुसम्मताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वब्रह्ममयं द्रष्ट्रे नमः ।

ॐ श्री साई सर्वशक्त्युपबृंहिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वसङ्कल्पसन्यासिने नमः ।

ॐ श्री साई सर्वसङ्गविवर्जिताय नमः । ९५० ।

ॐ श्री साई सर्वलोकशरण्याय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वलोकमहेश्वराय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वेशाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वरूपिणे नमः ।

ॐ श्री साई सर्वशत्रुनिर्वहनाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वैश्वर्यैकमन्त्राय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वेप्सितफलप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वोपकारिणे नमः ।

ॐ श्री साई सर्वोपास्यपदाम्बुजाय नमः ।

ॐ श्री साई सहस्रशिर्षमूर्तये नमः । ९६० ।

ॐ श्री साई सहस्राक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई सहस्रपादे नमः ।

ॐ श्री साई सहस्रनामविश्वासिने नमः ।

ॐ श्री साई सहस्रनामलक्षिताय नमः ।

ॐ श्री साई साकारोऽपि निराकाराय नमः ।

ॐ श्री साई साकारार्चासुमानिताय नमः ।

ॐ श्री साई साधुजनपरित्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई साधुपोषकाय नमः ।

ॐ श्री साई सालोक्यसार्ष्टिसामीप्यसायुज्यपददायकाय नमः ।

ॐ श्री साई साईरामाय नमः । ९७० ।

ॐ श्री साई साईनाथाय नमः ।

ॐ श्री साई साईशाय नमः ।

ॐ श्री साई साईसत्तमाय नमः ।

ॐ श्री साई साक्षात्कृतहरिप्रीत्या सर्वशक्तियुताय नमः ।

ॐ श्री साई साक्षात्कारप्रदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई साक्षान्मन्मथमर्दनाय नमः ।

ॐ श्री साई सायिने नमः ।

ॐ श्री साई साईदेवाय नमः ।

ॐ श्री साई सिद्धेशाय नमः ।

ॐ श्री साई सिद्धसङ्कल्पाय नमः । ९८० ।

ॐ श्री साई सिद्धिदाय नमः ।

ॐ श्री साई सिद्धवाङ्ग्मुखाय नमः ।

ॐ श्री साई सुकृतदुष्कृतातीताय नमः ।

ॐ श्री साई सुखेषु विगतस्पृहाय नमः ।

ॐ श्री साई सुखदुःखसमाय नमः ।

ॐ श्री साई सुधास्यन्दिमुखोज्वलाय नमः ।

ॐ श्री साई स्वेच्छामात्रजडद्देहाय नमः ।

ॐ श्री साई स्वेच्छोपात्ततनवे नमः ।

ॐ श्री साई स्वीकृतभक्तरोगाय नमः ।

ॐ श्री साई स्वे महिम्नि प्रतिष्टिताय नमः । ९९० ।

ॐ श्री साई हरिसाटे तथा नानाङ्कामादेः परिरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई हर्षामर्षभयोद्वेगैर्निर्मुक्तविमलाशयाय नमः ।

ॐ श्री साई हिन्दूमुस्लिंसमूहांश्च मैत्रीकरणतत्पराय नमः ।

ॐ श्री साई हूङ्कारेणैव सुक्षिप्रं स्तब्धप्रचण्डमारुताय नमः ।

ॐ श्री साई हृदयग्रन्थिभेदिने नमः ।

ॐ श्री साई हृदयग्रन्थिवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई क्षान्तानन्तदौर्जन्याय नमः ।

ॐ श्री साई क्षितिपालादिसेविताय नमः ।

ॐ श्री साई क्षिप्रप्रसाददात्रे नमः ।

ॐ श्री साई क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिकाय नमः । १०० ।

० ।

ॐ श्री साई श्रीसाई चरणं शरणं मम ।

श्री साई चरणं शरणं मम ।श्री सायिनाथसहस्रनामावलिः ३

ॐ श्री साई अखण्डसच्चिदानन्दाय नमः ।

ॐ श्री साई अखिलजीववत्सलयाय नमः ।

ॐ श्री साई अखिलवस्तुविस्ताराय नमः ।

ॐ श्री साई अक्बराज्ञाभिवन्दिताय नमः ।

ॐ श्री साई अखिलचेतनाऽऽविष्टाय नमः ।

ॐ श्री साई अखिलवेदसंप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई अखिलाण्डेशरूपेऽपि पिण्डे पिण्डे प्रतिष्ठिताय नमः ।

ॐ श्री साई अग्रण्ये नमः ।

ॐ श्री साई अग्र्यभूम्ने नमः ।

ॐ श्री साई अगणितगुणाय नमः । १० ।

ॐ श्री साई अघौघसन्निवर्तिने नमः ।

ॐ श्री साई अचिन्त्यमहिम्ने नमः ।

ॐ श्री साई अचलाय नमः ।

ॐ श्री साई अच्युताय नमः ।

ॐ श्री साई अजाय नमः ।

ॐ श्री साई अजातशत्रवे नमः ।

ॐ श्री साई अज्ञानतिमिरान्धस्य चक्षुरुन्मीलनक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई आजन्मस्थितिनाशाय नमः ।

ॐ श्री साई अणिमादिविभूषिताय नमः ।

ॐ श्री साई अत्युन्नतधुनिज्वालामाज्ञयैव निवर्तकाय नमः । २० ।

ॐ श्री साई अत्युल्बणमहासर्पादपि भक्तसुरक्षित्रे नमः ।

ॐ श्री साई अतितीव्रतपस्तप्ताय नमः ।

ॐ श्री साई अतिनम्रस्वभावकाय नमः ।

ॐ श्री साई अन्नदानसदानिष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई अतिथिभुक्तशेषभुजे नमः ।

ॐ श्री साई अदृश्यलोकसञ्चारिणे नमः ।

ॐ श्री साई अदृष्टपूर्वदर्शित्रे नमः ।

ॐ श्री साई अद्वैतवस्तुतत्त्वज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई अद्वैतानन्दवर्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई अद्भुतानन्तशक्तये नमः । ३० ।

ॐ श्री साई अधिष्ठानाय नमः ।

ॐ श्री साई अधोक्षजाय नमः ।

ॐ श्री साई अधर्मतरुच्छेत्रे नमः ।

ॐ श्री साई अधियज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई अधिभूताय नमः ।

ॐ श्री साई अधिदैवाय नमः ।

ॐ श्री साई अध्यक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई अनघाय नमः ।

ॐ श्री साई अनन्तनाम्ने नमः ।

ॐ श्री साई अनन्तगुणभूषणाय नमः । ४० ।

ॐ श्री साई अनन्तमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई अनन्ताय नमः ।

ॐ श्री साई अनन्तशक्तिसंयुताय नमः ।

ॐ श्री साई अनन्ताश्चर्यवीर्याय नमः ।

ॐ श्री साई अनर्घ (अनह्लक) अतिमानिताय नमः ।

ॐ श्री साई अनवरतसमाधिस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई अनाथपरिरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई अनन्यप्रेमसंहृष्टगुरुपादविलीनहृदे नमः ।

ॐ श्री साई अनादृताष्टसिद्धये नमः ।

ॐ श्री साई अनामयपदप्रदाय नमः । ५० ।

ॐ श्री साई अनादिमत्परब्रह्मणे नमः ।

ॐ श्री साई अनाहतदिवाकराय नमः ।

ॐ श्री साई अनिर्देश्यवपुषे नमः ।

ॐ श्री साई अनिमेषेक्षितप्रजाय नमः ।

ॐ श्री साई अनुग्रहार्थमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई अनुवर्तितवेङ्कूशाय नमः । वेङ्कटेशाय

ॐ श्री साई अनेकदिव्यमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई अनेकाद्भुतदर्शनाय नमः ।

ॐ श्री साई अनेकजन्मजं पापं स्मृतिमात्रेण हारकाय नमः ।

ॐ श्री साई अनेकजन्मवृत्तान्तं सविस्तारमुदीरयते नमः । ६० ।

ॐ श्री साई अनेकजन्मसंप्राप्तकर्मबन्धविदारणाय नमः ।

ॐ श्री साई अनेकजन्मसंसिद्धशक्तिज्ञानस्वरूपवते नमः ।

ॐ श्री साई अन्तर्बहिश्च सर्वत्र व्याप्ताखिलचराचराय नमः ।

ॐ श्री साई अन्तर्हृदय आकाशाय नमः ।

ॐ श्री साई अन्तकाले रक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई अन्तर्यामिने नमः ।

ॐ श्री साई अन्तरात्मने नमः ।

ॐ श्री साई अन्नवस्त्रेप्सितप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई अपराजितशक्तये नमः ।

ॐ श्री साई अपरिग्रहभूषिताय नमः । ७० ।

ॐ श्री साई अपवर्गप्रदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई अपवर्गमयाय नमः ।

ॐ श्री साई अपान्तरात्मरूपेण स्रष्टुरिष्टप्रवर्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई अपावृतकृपागाराय नमः ।

ॐ श्री साई अपारज्ञानशक्तिमते नमः ।

ॐ श्री साई अपार्थिवदेहस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई अपाम्पुष्पनिबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई अप्रपञ्चाय नमः ।

ॐ श्री साई अप्रमत्ताय नमः ।

ॐ श्री साई अप्रमेयगुणाकाराय नमः । ८० ।

ॐ श्री साई अप्राकृतवपुषे नमः ।

ॐ श्री साई अप्राकृतपराक्रमाय नमः ।

ॐ श्री साई अप्राथितेष्टदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई अब्दुल्लादि परागतये नमः ।

ॐ श्री साई अभयं सर्वभूतेभ्यो ददामीति व्रतिने नमः ।

ॐ श्री साई अभिमानातिदूराय नमः ।

ॐ श्री साई अभिषेकचमत्कृतये नमः ।

ॐ श्री साई अभीष्टवरवर्षिणे नमः ।

ॐ श्री साई अभीक्ष्णदिव्यशक्तिभृते नमः ।

ॐ श्री साई अभेदानन्दसन्धात्रे नमः । ९० ।

ॐ श्री साई अमर्त्याय नमः ।

ॐ श्री साई अमृतवाक्सृतये नमः ।

ॐ श्री साई अरविन्ददलाक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई अमितपराक्रमाय नमः ।

ॐ श्री साई अरिषड्वर्गनाशिने नमः ।

ॐ श्री साई अरिष्टघ्नाय नमः ।

ॐ श्री साई अर्हःसत्तमये नमः ।

ये भी पढ़ें:  Shri Padmavati Sahasranama Stotra (श्री पद्मावती सहस्रनाम स्तोत्र): पाठ कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियां

ॐ श्री साई अलभ्यलाभसन्धात्रे नमः ।

ॐ श्री साई अल्पदानसुतोषिताय नमः ।

ॐ श्री साई अल्लानाम सदावक्त्रे नमः । १०० ।

ॐ श्री साई अलम्बुध्या स्वलङ्कृताय नमः ।

ॐ श्री साई अवतारित सर्वेशाय नमः ।

ॐ श्री साई अवधीरितवैभवाय नमः ।

ॐ श्री साई अवलम्ब्यपदाब्जाय नमः ।

ॐ श्री साई अवलियेतिविश्रुताय नमः ।

ॐ श्री साई अवधूताखिलोपाधये नमः ।

ॐ श्री साई अविशिष्टाय नमः ।

ॐ श्री साई अवशिष्टस्वकार्यार्थे त्यक्तदेहं प्रविष्टवते नमः ।

ॐ श्री साई अवाक्पाणिपादोरवे नमः ।

ॐ श्री साई अवाङ्गमानसगोचराय नमः । ११० ।

ॐ श्री साई अवाप्तसर्वकामोऽपि कर्मण्येव प्रतिष्टिताय नमः ।

ॐ श्री साई अविच्छिन्नाग्निहोत्राय नमः ।

ॐ श्री साई अविच्छिन्नसुखप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई अवेक्षितदिगन्तस्थप्रजापालननिष्ठिताय नमः ।

ॐ श्री साई अव्याजकरुणासिन्धवे नमः ।

ॐ श्री साई अव्याहतेष्टि देशगाय नमः ।

ॐ श्री साई अव्याहृतोपदेशाय नमः ।

ॐ श्री साई अव्याहतसुखप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई अशक्यशक्यकर्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई अशुभाशयशुद्धीकृते नमः । १२० ।

ॐ श्री साई अशेषभूतहृत्स्थानणवे नमः ।

ॐ श्री साई अशोकमोहश‍ृङ्खलाय नमः ।

ॐ श्री साई अष्टैश्वर्ययुतत्यागिने नमः ।

ॐ श्री साई अष्टसिद्धिपराङ्मुखाय नमः ।

ॐ श्री साई असंयोगयुक्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई असङ्गदृढशास्त्रभृते नमः ।

ॐ श्री साई असङ्ख्येयावतारेषु ऋणानुबन्धिरक्षिताय नमः ।

ॐ श्री साई अहम्ब्रह्मस्थितप्रज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई अहम्भावविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई अहन्त्वञ्च त्वमेवाहमिति तत्त्वप्रभोधकाय नमः । १३० ।

ॐ श्री साई अहेतुककृपासिन्धवे नमः ।

ॐ श्री साई अहिंसानिरताय नमः ।

ॐ श्री साई अक्षीणसौहृदाय नमः ।

ॐ श्री साई अक्षयाय नमः ।

ॐ श्री साई अक्षयसुखप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई अक्षरादपि कूटस्थादुत्तमपुरुषोत्तमाय नमः ।

ॐ श्री साई आखुवाहनमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई आगमाद्यन्तसन्नुताय नमः ।

ॐ श्री साई आगमातीतसद्भावाय नमः ।

ॐ श्री साई आचार्यपरमाय नमः । १४० ।

ॐ श्री साई आत्मानुभवसन्तुष्टाय नमः ।

ॐ श्री साई आत्मविद्याविशारदाय नमः ।

ॐ श्री साई आत्मानन्दप्रकाशाय नमः ।

ॐ श्री साई आत्मैव परमात्मदृशे नमः ।

ॐ श्री साई ॐ श्रीसाई आत्मैकसर्वभूतात्मने नमः ।

ॐ श्री साई आत्मारामाय नमः ।

ॐ श्री साई आत्मवते नमः ।

ॐ श्री साई आदित्यमध्यवर्तिने नमः ।

ॐ श्री साई आदिमध्यान्तवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई आनन्दपरमानन्दाय नमः । १५० ।

ॐ श्री साई आनन्दप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई आनाकमादृताज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई आनतावननिर्वृतये नमः ।

ॐ श्री साई आपदामपहर्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई आपद्बान्धवाय नमः ।

ॐ श्री साई आफ्रिकागतवैद्याय परमानन्ददायकाय नमः ।

ॐ श्री साई आयुरारोग्यदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई आर्तत्राणपरायणाय नमः ।

ॐ श्री साई आरोपनापवादैश्च मायायोगवियोगकृते नमः ।

ॐ श्री साई आविष्कृत तिरोधत्त बहुरूपविडम्बनाय नमः । १६० ।

ॐ श्री साई आर्द्रचित्तेन भक्तानां सदानुग्रहवर्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई आशापाशविमुक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई आशापाशविमोचकाय नमः ।

ॐ श्री साई इच्छाधीनजगत्सर्वाय नमः ।

ॐ श्री साई इच्छाधीनवपुषे नमः ।

ॐ श्री साई इष्टेप्सितार्थदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई इच्छामोहनिवर्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई इच्छोत्थदुःखसञ्छेत्रे नमः ।

ॐ श्री साई इन्द्रियारातिदर्पघ्ने नमः ।

ॐ श्री साई इन्दिरारमणाह्लादिनामसहस्रपूतहृदे नमः । १७० ।

ॐ श्री साई इन्दीवरदलज्योतिर्लोचनालङ्कृताननाय नमः ।

ॐ श्री साई इन्दुशीतलभाषिणे नमः ।

ॐ श्री साई इन्दुवत्प्रियदर्शनाय नमः ।

ॐ श्री साई इष्टापूर्तशतैर्लब्धाय नमः ।

ॐ श्री साई इष्टदैवस्वरूपधृते नमः ।

ॐ श्री साई इष्टिकादानसुप्रीताय नमः ।

ॐ श्री साई इष्टिकालयरक्षित्रे नमः ।

ॐ श्री साई ईशासक्तमनोबुद्धये नमः ।

ॐ श्री साई ईशाराधनतत्पराय नमः ।

ॐ श्री साई ईशिताखिलदेवाय नमः । १८० ।

ॐ श्री साई ईशावास्यार्थसूचकाय नमः ।

ॐ श्री साई उच्चारणाधृते भक्तहृदान्त उपदेशकाय नमः ।

ॐ श्री साई उत्तमोत्तममार्गिणे नमः ।

ॐ श्री साई उत्तमोत्तारकर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई उदासीनवदासीनाय नमः ।

ॐ श्री साई उद्धरामीत्युदीरकाय नमः ।

ॐ श्री साई उद्धवाय मया प्रोक्तम्भागवतमिति ब्रुवते नमः ।

ॐ श्री साई उन्मत्तश्वाभिगोप्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई उन्मत्तवेषनामधृते नमः ।

ॐ श्री साई उपद्रवनिवारिणे नमः । १९० ।

ॐ श्री साई उपांशुजपबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई उमेशामेशयुक्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्जितभक्तिलक्षणाय नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्जितवाक्प्रदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्ध्वरेतसे नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं भस्मसात्कराय नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्ध्वगतिविधात्रे नमः ।

ॐ श्री साई ऊर्ध्वबद्धद्विकेतनाय नमः ।

ॐ श्री साई ऋजवे नमः ।

ॐ श्री साई ऋतम्बरप्रज्ञाय नमः । २०० ।

ॐ श्री साई ऋणक्लिष्टधनप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई ऋणानुबद्धजन्तुनां ऋणमुक्त्यै फलप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई ॐ श्रीसाई एकाकिने नमः ।

ॐ श्री साई एकभक्तये नमः ।

ॐ श्री साई एकवाक्कायमानसाय नमः ।

ॐ श्री साई एकादश्यां स्वभक्तानां स्वतनोकृतनिष्कृतये नमः ।

ॐ श्री साई एकाक्षरपरज्ञानिने नमः ।

ॐ श्री साई एकात्मा सर्वदेशदृशे नमः ।

ॐ श्री साई एकेश्वरप्रतीतये नमः ।

ॐ श्री साई एकरीत्यादृताखिलाय नमः । २१० ।

ॐ श्री साई ऐक्यानन्दगतद्वन्द्वाय नमः ।

ॐ श्री साई ऐक्यानन्दविधायकाय नमः ।

ॐ श्री साई ऐक्यकृते नमः ।

ॐ श्री साई ऐक्यभूतात्मने नमः ।

ॐ श्री साई ऐहिकामुष्मिकप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई ओङ्कारादराय नमः ।

ॐ श्री साई ओजस्विने नमः ।

ॐ श्री साई औषधीकृतभस्मदाय नमः ।

ॐ श्री साई कथाकीर्तनापद्धत्यां नारदानुष्ठितं स्तुवते नमः ।

ॐ श्री साई कपर्दे क्लेशनाशिने नमः । २२० ।

ॐ श्री साई कबीरदास अवतारकाय नमः ।

ॐ श्री साई कपर्दे पुत्ररक्षार्थमनुभूततदामयाय नमः ।

ॐ श्री साई कमलाऽऽश्लिष्टपादाब्जाय नमः ।

ॐ श्री साई कमलायतलोचनाय नमः ।

ॐ श्री साई कन्दर्पदर्पविध्वंसिने नमः ।

ॐ श्री साई कमनीयगुणालयाय नमः ।

ॐ श्री साई कर्ताऽकर्ताऽन्यथाकर्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई कर्मयुक्तोप्यकर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई कर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई कर्मनिर्मुक्ताय नमः । २३० ।

ॐ श्री साई कर्माऽकर्मविचक्षणाय नमः ।

ॐ श्री साई कर्मबीजक्षयङ्कर्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई कर्मनिर्मूलनक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई कर्मव्याधिव्यपोहिने नमः ।

ॐ श्री साई कर्मबन्धविनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई कलिमलापहारिणे नमः ।

ॐ श्री साई कलौ प्रत्यक्षदेवताय नमः ।

ॐ श्री साई कलियुगावताराय नमः ।

ॐ श्री साई कल्युत्थभवभञ्जनाय नमः ।

ॐ श्री साई कल्याणानन्तनाम्ने नमः । २४० ।

ॐ श्री साई कल्याणगुणभूषणाय नमः ।

ॐ श्री साई कविदासगणुत्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई कष्टनाशकरौषधाय नमः ।

ॐ श्री साई काकादीक्षितरक्षायां धुरीणोऽहमितीरकाय नमः ।

ॐ श्री साई कानाभिलादपि दासगनुं त्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई कानने पानदानकृते नमः ।

ॐ श्री साई कामजिते नमः ।

ॐ श्री साई कामरूपिणे नमः ।

ॐ श्री साई कामसङ्कल्पवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई कामितार्थप्रदात्रे नमः । २५० ।

ॐ श्री साई कामादिशत्रुनाशनाय नमः ।

ॐ श्री साई काम्यकर्म सुसन्यस्ताय नमः ।

ॐ श्री साई कामेराशक्तिनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई कालाय नमः ।

ॐ श्री साई कालकालाय नमः ।

ॐ श्री साई कालातीताय नमः ।

ॐ श्री साई कालकृते नमः ।

ॐ श्री साई कालदर्पविनाशिने नमः ।

ॐ श्री साई कालरा तर्जनक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई कालशुनकदत्तान्नं ज्वरंहरेदिति ब्रुवते नमः । २६० ।

ॐ श्री साई कालाग्निसदृशक्रोधाय नमः ।

ॐ श्री साई काशिरामसुरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई कीर्तिव्याप्तदिगन्ताय नमः ।

ॐ श्री साई कुप्नीवीतकलेवराय नमः ।

ॐ श्री साई कुम्बाराग्निशिशुत्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई कुष्ठरोगनिवारकाय नमः ।

ॐ श्री साई कूटस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई कृतज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई कृत्स्नक्षेत्रप्रकाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई कृत्स्नज्ञाय नमः । २७० ।

ॐ श्री साई कृपापूर्णाय नमः ।

ॐ श्री साई कृपया पालितार्भकाय नमः ।

ॐ श्री साई कृष्णरामशिवात्रेयमारुत्यादिस्वरूपधृते नमः ।

ॐ श्री साई केवलात्मानुभूतये नमः ।

ॐ श्री साई कैवल्यपददायकाय नमः ।

ॐ श्री साई कोविदाय नमः ।

ॐ श्री साई कोमलाङ्गाय नमः ।

ॐ श्री साई कोपव्याजशुभप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई कोऽहमिति दिवानक्तं विचारमनुशासकाय नमः ।

ॐ श्री साई क्लिष्टरक्षाधुरीणाय नमः । २८० ।

ॐ श्री साई क्रोधजिते नमः ।

ॐ श्री साई क्लेशनाशनाय नमः ।

ॐ श्री साई गगनसौक्ष्म्यविस्ताराय नमः ।

ॐ श्री साई गम्भीरमधुरस्वनाय नमः ।

ॐ श्री साई गङ्गातीरनिवासिने नमः ।

ॐ श्री साई गङ्गोत्पत्तिपदाम्बुजाय नमः ।

ॐ श्री साई गङ्गागिरिरिति ख्यातयतिश्रेष्ठेन संस्तुताय नमः ।

ॐ श्री साई गन्धपुष्पाक्षतैः पूज्याय नमः ।

ॐ श्री साई गतिविदे नमः ।

ॐ श्री साई गतिसूचकाय नमः । २९० ।

ॐ श्री साई गह्वरेष्ठपुराणाय नमः ।

ॐ श्री साई गर्वमात्सर्यवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई गाननृत्यविनोदाय नमः ।

ॐ श्री साई गालवङ्कर्वरप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई गिरीशसदृशत्यागिने नमः ।

ॐ श्री साई गीताचार्याय नमः ।

ॐ श्री साई गीताद्भुतार्थवक्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई गीतारहस्यसंप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई गीताज्ञानमयाय नमः ।

ॐ श्री साई गीतापूर्णोपदेशकाय नमः । ३०० ।

ॐ श्री साई गुणातीताय नमः ।

ॐ श्री साई गुणात्मने नमः ।

ॐ श्री साई गुणदोषविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई गुणागुणेषु वर्तन्त इत्यनासक्तिसुस्तिराय नमः ।

ॐ श्री साई गुप्ताय नमः ।

ॐ श्री साई गुहाहिताय नमः ।

ॐ श्री साई गूढाय नमः ।

ॐ श्री साई गुप्तसर्वनिबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई गुर्वङ्घ्रितीव्रभक्तिचेतदेवालयमितीरयते नमः ।

ॐ श्री साई गुरवे नमः । ३१० ।

ॐ श्री साई गुरुतमाय नमः ।

ॐ श्री साई गुह्याय नमः ।

ॐ श्री साई गुरुपादपरायणाय नमः ।

ॐ श्री साई गुर्वीशाङ्घ्रिसदाध्यात्रे नमः ।

ॐ श्री साई गुरुसन्तोषवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई गुरुप्रेमसमालब्धपरिपूर्णस्वरूपवते नमः ।

ॐ श्री साई गुरूपासनसंसिद्धाय नमः ।

ॐ श्री साई गुरुमार्गप्रवर्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई गुर्वात्मदेवताबुद्ध्या ब्रह्मानन्दमयाय नमः ।

ॐ श्री साई गुरोस्समाधिपार्श्वस्थनिम्बच्छायानिवासकृते नमः । ३२० ।

ॐ श्री साई गुरुवेङ्कूशसंप्राप्तवस्त्रेष्टिका सदाधृताय नमः ।

ॐ श्री साई गुरुपरम्पराऽऽदिष्टसर्वत्यागपरायणाय नमः ।

ॐ श्री साई गुरुपरम्पराप्राप्तसच्चिदानन्दमूर्तिमते नमः ।

ॐ श्री साई गृहहीनमहाराजाय नमः ।

ॐ श्री साई गृहमेधिपराश्रयाय नमः ।

ॐ श्री साई गोपींस्त्राता यथा कृष्णस्तथा नाच्ने कुलावनाय नमः ।

ॐ श्री साई गोपालगुण्डूरायादि पुत्रपौत्रादिवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई गोष्पदीकृतकष्टाब्धये नमः ।

ॐ श्री साई गोदावरीतटागताय नमः ।

ॐ श्री साई चतुर्भुजाय नमः । ३३० ।

ॐ श्री साई चतुर्बाहुनिवारितनृसङ्कटाय नमः ।

ॐ श्री साई चमत्कारैः सङ्क्लिष्टैर्भक्तिज्ञानविवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई चन्दनालेपारुष्टानां दुष्टानां धर्षणक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई चन्दोर्करादि भक्तानांसदापालननिष्ठिताय नमः ।

ॐ श्री साई चराचरपरिव्याप्ताय नमः ।

ॐ श्री साई चर्मदाहेऽप्यविकृयाय नमः ।

ॐ श्री साई चान्दभायाख्य पाटेलार्थं चमत्कारसहायकृते नमः ।

ॐ श्री साई चिन्तामग्नपरित्राणे तस्य सर्वभारंवहाय नमः ।

ॐ श्री साई चित्रातिचित्र चारित्राय नमः ।

ॐ श्री साई चिन्मयानन्दाय नमः । ३४० ।

ॐ श्री साई चिरवासकृतैर्बन्धैः शिर्डिग्रामं पुनर्गताय नमः ।

ॐ श्री साई चोराद्याहृतवस्तूनि दत्तान्येवेतिहर्षिताय नमः ।

ॐ श्री साई छिन्नसंशयाय नमः ।

ॐ श्री साई छिन्नसंसारबन्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई जगत्पित्रे नमः ।

ॐ श्री साई जगन्मात्रे नमः ।

ॐ श्री साई जगत्त्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई जगद्धिताय नमः ।

ॐ श्री साई जगत्स्रष्ट्रे नमः ।

ॐ श्री साई जगत्साक्षिणे नमः । ३५० ।

ॐ श्री साई जगद्व्यापिने नमः ।

ॐ श्री साई जगद्गुरवे नमः ।

ॐ श्री साई जगत्प्रभवे नमः ।

ॐ श्री साई जगन्नाथाय नमः ।

ॐ श्री साई जगदेकदिवाकराय नमः ।

ॐ श्री साई जगन्मोहचमत्काराय नमः ।

ॐ श्री साई जगन्नाटकसूत्रधृते नमः ।

ॐ श्री साई जगन्मङ्गलकर्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई जगन्मायेति बोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई जडोन्मत्तपिशाचाभोप्यन्तःसच्चित्सुखस्थिताय नमः । ३६० ।

ॐ श्री साई जन्मबन्धविनिर्मुक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई जन्मसाफल्यमन्त्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई जन्मजन्मान्तरज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई जन्मनाशरहस्यविदे नमः ।

ॐ श्री साई जप्तनामसुसन्तुष्टहरिप्रत्यक्षभाविताय नमः ।

ॐ श्री साई जनजल्पमनाद्यत्य(मनाकृष्ट) जपसिद्धिमहाद्युतये नमः ।

ॐ श्री साई जपप्रेरितभक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई जप्यनाम्ने नमः ।

ॐ श्री साई जनेश्वराय नमः ।

ॐ श्री साई जलहीनस्थले खिन्नभक्तार्थं जलसृष्टिकृते नमः । ३७० ।

ॐ श्री साई जवारालीति मौलानासेवनेऽक्लिष्टमानसाय नमः ।

ॐ श्री साई जातग्रामान्तगुरोर्वासं तस्मात्पूर्वस्थलं व्रजते नमः ।

ॐ श्री साई जातिभेदमतैर्भेद इति भेदतिरस्कृताय नमः ।

ॐ श्री साई जातिविद्याधनैश्चापि हीनानार्द्रहृदावनाय नमः ।

ॐ श्री साई जाम्बूनदपरित्यागिने नमः ।

ॐ श्री साई जागरूकावितप्रजाय नमः ।

ॐ श्री साई जायापत्यगृहक्षेत्रस्वजनस्वार्थवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई जितद्वैतमहामोहाय नमः ।

ॐ श्री साई जितक्रोधाय नमः ।

ॐ श्री साई जितेन्द्रियाय नमः । ३८० ।

ॐ श्री साई जितकन्दर्पदर्पाय नमः ।

ॐ श्री साई जितात्मने नमः ।

ॐ श्री साई जितषड्रिपवे नमः ।

ॐ श्री साई जीर्णहूणालयस्थाने पूर्वजन्मकृतं स्मरते नमः ।

ॐ श्री साई जीर्णहूणालयं चाद्य सर्वमर्त्यालयङ्कराय नमः ।

ॐ श्री साई जीर्णवस्त्रसमं मत्वा देहं त्यक्त्वा सुखं स्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई जीर्णवस्त्रसमं पश्यन् त्यक्त्वा देहं प्रविष्टवते नमः ।

ॐ श्री साई जीवन्मुक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई जीवानां मुक्तिसद्गतिदायकाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्योतिषशास्त्ररहस्यज्ञाय नमः । ३९० ।

ॐ श्री साई ज्योतिर्ज्ञानप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्योत्स्ना सूर्यं दृशा पश्यते नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानभास्करमूर्तिमते नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानसर्वरहस्याय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञातब्रह्मपरात्पराय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानभक्तिप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानविज्ञाननिश्चयाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानशक्तिसमारूढाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानयोगव्यवस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानाग्निदग्धकर्मणे नमः । ४०० ।

ॐ श्री साई ज्ञाननिर्धूतकल्मषाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानवैराग्यसन्धात्रे नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानसञ्छिन्नसंशयाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानापास्तमहामोहाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानीत्यात्मैव निश्चयाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानेश्वरी पठद्दैवप्रतिबन्धनिवारकाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञेयाय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञानगम्याय नमः ।

ॐ श्री साई ज्ञातसर्वपरं मताय नमः । ४१० ।

ॐ श्री साई ज्योतिषां प्रथमज्योतिषे नमः ।

ॐ श्री साई ज्योतिर्हीनद्युतिप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई तपस्सन्दीप्ततेजस्विने नमः ।

ॐ श्री साई तप्तकाञ्चनसन्निभाय नमः ।

ॐ श्री साई तत्त्वज्ञानार्थदर्शिने नमः ।

ॐ श्री साई तत्त्वमस्यादिलक्षिताय नमः ।

ॐ श्री साई तत्त्वविदे नमः ।

ॐ श्री साई तत्त्वमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई तन्द्राऽऽलस्यविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई तत्त्वमालाधराय नमः । ४२० ।

ॐ श्री साई तत्त्वसारविशारदाय नमः ।

ॐ श्री साई तर्जितान्तकदूताय नमः ।

ॐ श्री साई तमसःपराय नमः ।

ॐ श्री साई तात्यागणपतिप्रेष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई तात्यानूल्कर्गतिप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई तारकब्रह्मनाम्ने नमः ।

ॐ श्री साई तमोरजोविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई तामरसदलाक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई ताराबाय्यसुरक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई तिलकपूजिताङ्घ्रये नमः । ४३० ।

ॐ श्री साई तिर्यग्जन्तुगतिप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई तीर्थकृतनिवासाय नमः ।

ॐ श्री साई तीर्थपादाय नमः ।

ॐ श्री साई तीव्रभक्ति नृसिंहादिभक्तालीभूर्यनुग्रहाय नमः ।

ॐ श्री साई तीव्रप्रेमविरागाप्तवेङ्कटेशकृपानिधये नमः ।

ॐ श्री साई तुल्यप्रियाप्रियाय नमः ।

ॐ श्री साई तुल्यनिन्दाऽऽत्मसंस्तुतये नमः ।

ॐ श्री साई तुल्याधिकविहीनाय नमः ।

ॐ श्री साई तुष्टसज्जनसंवृताय नमः ।

ॐ श्री साई तृप्तात्मने नमः । ४४० ।

ॐ श्री साई तृषाहीनाय नमः ।

ॐ श्री साई तृणीकृतजगद्वसवे नमः ।

ॐ श्री साई तैलीकृतजलपूर्णदीपसञ्ज्वलितालयाय नमः ।

ॐ श्री साई त्रिकालज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई त्रिमूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई त्रिगुणातीताय नमः ।

ॐ श्री साई त्रियामायोगनिष्ठात्मा दशदिग्भक्तपालकाय नमः ।

ॐ श्री साई त्रिवर्गमोक्षसन्धात्रे नमः ।

ॐ श्री साई त्रिपुटिरहितस्थितये नमः ।

ॐ श्री साई त्रिलोकस्वेच्छासञ्चारिणे नमः । ४५० ।

ॐ श्री साई त्रैलोक्यतिमिरापहाय नमः ।

ॐ श्री साई त्यक्तकर्मफलासङ्गाय नमः ।

ॐ श्री साई त्यक्तभोगसदासुखिने नमः ।

ॐ श्री साई त्यक्तदेहात्मबुद्धये नमः ।

ॐ श्री साई त्यक्तसर्वपरिग्रहाय नमः ।

ॐ श्री साई त्यक्त्वा मायामयं सर्वं स्वे महिम्नि सदा स्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई दण्डधृते नमः ।

ॐ श्री साई दण्डनार्हाणां दुष्टवृत्तेर्निवर्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई दम्भदर्पातिदूराय नमः ।

ॐ श्री साई दक्षिणामूर्तये नमः । ४६० ।

ॐ श्री साई दक्षिणादानकर्तृभ्यो दशधाप्रतिदायकाय नमः ।

ॐ श्री साई दक्षिणाप्रार्थनाद्वारा शुभकृत्तत्त्वबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई दयापराय नमः ।

ॐ श्री साई दयासिन्धवे नमः ।

ॐ श्री साई दत्तात्रेयाय नमः ।

ॐ श्री साई दरिद्रोऽयं धनीवेति भेदाचारविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई दहराकाशभानवे नमः ।

ॐ श्री साई दग्धहस्तार्भकावनाय नमः ।

ॐ श्री साई दारिद्र्यदुःखभीतिघ्नाय नमः ।

ॐ श्री साई दामोदरवरप्रदाय नमः । ४७० ।

ॐ श्री साई दानशौण्डाय नमः ।

ॐ श्री साई दान्ताय नमः ।

ॐ श्री साई दानैश्चान्यान् वशं नयते नमः ।

ॐ श्री साई दानमार्गस्खलत्पादनानाचन्दोर्करावनाय नमः ।

ॐ श्री साई दिव्यज्ञानप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई दिव्यमङ्गलविग्रहाय नमः ।

ॐ श्री साई दीनदयापराय नमः ।

ॐ श्री साई दीर्घदृशे नमः ।

ॐ श्री साई दीनवत्सलाय नमः ।

ॐ श्री साई दुष्टानां दमने शक्ताय नमः । ४८० ।

ॐ श्री साई दुरादर्षतपोबलाय नमः ।

ॐ श्री साई दुर्भिक्षोऽप्यन्नदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई दुदृष्टविनाशकृते नमः ।

ॐ श्री साई दुःखशोकभयद्वेषमोहाद्यशुभनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई दुष्टनिग्रह-शिष्टानुग्रहरूपमहाव्रताय नमः ।

ॐ श्री साई दुष्टमूर्खजडादिनामप्रकाशस्वरूपवते नमः ।

ॐ श्री साई दुष्टजन्तुपरित्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई दूरवर्तिसमस्तदृशे नमः ।

ॐ श्री साई दृश्यं नश्यं न विश्वास्यमिति बुद्धिप्रबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई दृश्यं सर्वं हि चैतन्यमित्यानन्दप्रतिष्ठाय नमः । ४९० ।

ॐ श्री साई देहे विगलिताशाय नमः ।

ॐ श्री साई देहयात्रार्थं अन्नभुजे नमः ।

ॐ श्री साई देहो गेहस्ततो मान्तु निन्ये गुरुरितीरकाय नमः ।

ॐ श्री साई देहात्मबुद्धिहीनाय नमः ।

ॐ श्री साई देहमोहप्रभञ्जनाय नमः ।

ॐ श्री साई देहो देवालयस्तस्मिन् देवं पश्येदित्युदीरयते नमः ।

ॐ श्री साई दैवीसम्पत्प्रपूर्णाय नमः ।

ॐ श्री साई देशोद्धारसहायकृते नमः ।

ॐ श्री साई द्वन्द्वमोहविनिर्मुक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई द्वन्द्वातीतविमत्सराय नमः । ५०० ।

ॐ श्री साई द्वारकामायिवासिने (द्वारकामयि) नमः ।

ॐ श्री साई द्वेषद्रोहविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई द्वैताद्वैतविशिष्ठदीन् काले स्थाने विबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई धनहीनान् धनाढ्यांश्च समदृष्ट्यैव रक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई धनदेनसमत्यागाय नमः ।

ॐ श्री साई धरणीधरसन्निभाय नमः ।

ॐ श्री साई धर्मज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई धर्मसेतवे नमः ।

ॐ श्री साई धर्मस्थापनसम्भवाय नमः ।

ॐ श्री साई धुमाले उपासनी पत्न्योः निर्वाणे सद्गतिप्रदाय नमः । ५१० ।

ॐ श्री साई धूपखेडा पटेल चान्दभाय नष्टाश्वस्थानसूचकाय नमः ।

ॐ श्री साई धूमयानात् पतत्पाथेवार पत्नी सुरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई ध्यानावस्थितचेतसे नमः ।

ॐ श्री साई धृत्युत्साहसमन्विताय नमः ।

ॐ श्री साई नतजनावनाय नमः ।

ॐ श्री साई नरलोकमनोरमाय नमः ।

ॐ श्री साई नष्टदृष्टिप्रदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई नरलोकविडम्बनाय नमः ।

ॐ श्री साई नागसर्पे मयूरे च समारूढषडाननाय नमः ।

ॐ श्री साई नाना चान्दोर्करं आहूय तत्सद्गत्यै कृतोद्यमया नमः । ५२० ।

ॐ श्री साई नाना निंहोणकस्यान्ते स्वाङ्घ्रिध्यानलयप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई नानादेशाभिधाकाराय नमः ।

ॐ श्री साई नानाविधिसमर्चिताय नमः ।

ॐ श्री साई नारायणमहाराज संश्लाघितपदाम्बुजाय नमः ।

ॐ श्री साई नारायणपराय नमः ।

ॐ श्री साई नामवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई निगृहितेन्द्रियग्रामाय नमः ।

ॐ श्री साई निगमागम अगोचराय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यसर्वगतस्थाणवे नमः ।

ॐ श्री साई नित्यतृप्ताय नमः । ५३० ।

ॐ श्री साई निराश्रयाय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यान्नदानधर्मिष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यानन्दप्रवाहकाय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यमङ्गलधाम्ने नमः ।

ॐ श्री साई नित्याग्निहोत्रवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यकर्मनियोक्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई नित्यसत्त्वस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई निम्बपादपमूलस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई निरन्तराग्निरक्षित्रे नमः ।

ॐ श्री साई निस्पृहा नमः । ५४० ।

ॐ श्री साई निर्विकल्पाय नमः ।

ॐ श्री साई निरङ्कुशगतागतये नमः ।

ॐ श्री साई निर्जितकामनादोषाय नमः ।

ॐ श्री साई निराशाय नमः ।

ॐ श्री साई निरञ्जनाय नमः ।

ॐ श्री साई निर्विकल्पसमाधिस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई निरपेक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई निर्गुणाय नमः ।

ॐ श्री साई निर्द्वन्द्वाय नमः ।

ॐ श्री साई नित्यसत्त्वस्थाय नमः । ५५० ।

ॐ श्री साई निर्विकाराय नमः ।

ॐ श्री साई निश्चलाय नमः ।

ॐ श्री साई निरालम्बाय नमः ।

ॐ श्री साई निराकाराय नमः ।

ॐ श्री साई निवृत्तगुणदोषकाय नमः ।

ॐ श्री साई नूल्कर विजयानन्द माहिषां दत्तसद्गतये नमः ।

ॐ श्री साई नरसिंह गनूदास दत्त प्रचारसाधनाय नमः ।

ॐ श्री साई नैष्ठिकब्रह्मचर्याय नमः ।

ॐ श्री साई नैष्कर्म्यपरिनिष्ठिताय नमः ।

ॐ श्री साई पण्डरीपाण्डुरङ्गाख्याय नमः । ५६० ।

ॐ श्री साई पाटिल तात्याजी मातुलाय नमः ।

ॐ श्री साई पतितपावनाय नमः ।

ॐ श्री साई पत्रिग्रामसमुद्भवाय नमः ।

ॐ श्री साई पदविसृष्टगङ्गाम्भसे नमः ।

ॐ श्री साई पदाम्बुजनतावनाय नमः ।

ॐ श्री साई परब्रह्मस्वरूपिणे नमः ।

ॐ श्री साई परमकरुणालयाय नमः ।

ॐ श्री साई परतत्त्वप्रदीपाय नमः ।

ॐ श्री साई परमार्थनिवेदकाय नमः ।

ॐ श्री साई परमानन्दनिस्यन्दाय नमः । ५७० ।

ॐ श्री साई परञ्ज्योतिषे नमः ।

ॐ श्री साई परात्पराय नमः ।

ॐ श्री साई परमेष्ठिने नमः ।

ॐ श्री साई परन्धाम्ने नमः ।

ॐ श्री साई परमेश्वराय नमः ।

ॐ श्री साई परमसद्गुरवे नमः ।

ॐ श्री साई परमाचार्याय नमः ।

ॐ श्री साई परधर्मभयाद्भक्तान् स्वे स्वे धर्मे नियोजकाय नमः ।

ॐ श्री साई परार्थैकान्तसम्भूतये नमः ।

ॐ श्री साई परमात्मने नमः । ५८० ।

ॐ श्री साई परागतये नमः ।

ॐ श्री साई पापतापौघसंहारिणे नमः ।

ॐ श्री साई पामरव्याजपण्डिताय नमः ।

ॐ श्री साई पापाद्दासं समाकृष्य पुण्यमार्गप्रवर्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई पिपीलिकासुखान्नदाय नमः ।

ॐ श्री साई पिशाचे च व्यवस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई पुत्रकामेष्ठि यागादेः ऋते सन्तानवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई पुनरुज्जीवितप्रेताय नमः ।

ॐ श्री साई पुनरावृत्तिनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई पुनःपुनरिहागम्य भक्तेभ्यः सद्गतिप्रदाय नमः । ५९० ।

ॐ श्री साई पुण्डरीकायताक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः ।

ॐ श्री साई पुरन्दरादि भक्ताग्र्यपरित्राणधुरन्धराय नमः ।

ॐ श्री साई पुराणपुरुषाय नमः ।

ॐ श्री साई पुरीशाय नमः ।

ॐ श्री साई पुरुषोत्तमाय नमः ।

ॐ श्री साई पूजापराङ्मुखाय नमः ।

ॐ श्री साई पूर्णाय नमः ।

ॐ श्री साई पूर्णवैराग्यशोभिताय नमः ।

ॐ श्री साई पूर्णानन्दस्वरूपिणे नमः । ६०० ।

ॐ श्री साई पूर्णकृपानिधये नमः ।

ॐ श्री साई पूर्णचन्द्रसमाह्लादिने नमः ।

ॐ श्री साई पूर्णकामाय नमः ।

ॐ श्री साई पूर्वजाय नमः ।

ॐ श्री साई प्रणतपालनोद्युक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई प्रणतार्तिहराय नमः ।

ॐ श्री साई प्रत्यक्षदेवतामूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई प्रत्यगात्मनिदर्शकाय नमः ।

ॐ श्री साई प्रपन्नपारिजाताय नमः ।

ॐ श्री साई प्रपन्नानां परागतये नमः । ६१० ।

ॐ श्री साई प्रमाणातीतचिन्मूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई प्रमादाभिधमृत्युजिते नमः ।

ॐ श्री साई प्रसन्नवदनाय नमः ।

ॐ श्री साई प्रसादाभिमुखद्युतये नमः ।

ॐ श्री साई प्रशस्तवाचे नमः ।

ॐ श्री साई प्रशान्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई प्रियसत्यमुदाहरते नमः ।

ॐ श्री साई प्रेमदाय नमः ।

ॐ श्री साई प्रेमवश्याय नमः ।

ॐ श्री साई प्रेममार्गैकसाधनाय नमः । ६२० ।

ॐ श्री साई बहुरूपनिगूढात्मने नमः ।

ॐ श्री साई बलदृप्तदमक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई बलातिदर्प भय्याजि महागर्वविभञ्जनाय नमः ।

ॐ श्री साई बुधसन्तोषदाय नमः ।

ॐ श्री साई बुद्धाय नमः ।

ॐ श्री साई बुधजनावनाय नमः ।

ॐ श्री साई बृहद्बन्धविमोक्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई बृहद्भारवहक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मकुलसमुद्भूताय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मचारिव्रतस्थिताय नमः । ६३० ।

ॐ श्री साई ब्रह्मानन्दामृतमग्नाय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मानन्दाय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मानन्दलसद्दृष्टये नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मवादिने नमः ।

ॐ श्री साई बृहच्छ्रवसे नमः ।

ॐ श्री साई ब्राह्मणस्त्रीविसृष्टोल्कातर्जितश्वाऽऽकृतये नमः ।

ॐ श्री साई ब्राह्मणानां मशीदिस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मण्याय नमः ।

ॐ श्री साई ब्रह्मवित्तमाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तदासगणु प्राणमानवृत्त्यादिरक्षकाय नमः । ६४० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई भक्तात्यन्तहितैषिणे नमः ।

ॐ श्री साई भक्ताश्रितदयापराय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तार्थे धृतदेहाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तार्थे दग्धहस्तकाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तपरागतये नमः ।

ॐ श्री साई भक्तवत्सलाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तमानसवासिने नमः ।

ॐ श्री साई भक्तातिसुलभाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तभवाब्धिपोताय नमः ।

ॐ श्री साई भगवते नमः । ६५० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई भजतां सुहृदे नमः ।

ॐ श्री साई भक्तसर्वस्वहारिणे नमः ।

ॐ श्री साई भक्तानुग्रहकातराय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तरास्न्यादि सर्वेषां अमोघाभयसंप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तावनसमर्थाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तावनधुरन्धराय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तभावपराधीनाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तात्यन्तहितौषधाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तावनप्रतिज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई भजतां इष्टकामदुहे नमः । ६६० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई भक्तहृत्पद्मवासिने नमः ।

ॐ श्री साई भक्तिमार्गप्रदर्शकाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्ताशयविहारिणे नमः ।

ॐ श्री साई भक्तसर्वमलापहाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तबोधैकनिष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई भक्तानां सद्गतिप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई भद्रमार्गप्रदर्शिने नमः ।

ॐ श्री साई भद्रं भद्रमिति ब्रुवते नमः ।

ॐ श्री साई भद्रश्रवसे नमः ।

ॐ श्री साई भन्नूमाइसाध्वीहितशासनाय नमः । ६७० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई भयसन्त्रस्तकपर्दे अमोघाभयवरप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई भयहीनाय नमः ।

ॐ श्री साई भयत्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई भयकृते नमः ।

ॐ श्री साई भयनाशनाय नमः ।

ॐ श्री साई भववारिधिपोताय नमः ।

ॐ श्री साई भवलुण्ठनकोविदाय नमः ।

ॐ श्री साई भस्मदानेन निरस्ताधिव्याधिदुःखाशुभाखिलाय नमः ।

ॐ श्री साई भस्मसात्कृतभक्तारये नमः ।

ॐ श्री साई भस्मसात्कृतमन्मथाय नमः । ६८० ।

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली

ॐ श्री साई भस्मपूतमशीदिस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई भस्मदग्धाखिलामयाय नमः ।

ॐ श्री साई भागोजि कुष्ठरोगघ्नाय नमः ।

ॐ श्री साई भाषाखिलसुवेदिताय नमः ।

ये भी पढ़ें:  Purushottama Sahasranamavali (पुरुषोत्तम सहस्रनामावली): पाठ कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियां

ॐ श्री साई भाष्यकृते नमः ।

ॐ श्री साई भावगम्याय नमः ।

ॐ श्री साई भारसर्वपरिग्रहाय नमः ।

ॐ श्री साई भागवतसहायाय नमः ।

ॐ श्री साई भावनाशून्यतः सुखिने नमः ।

ॐ श्री साई भागवतप्रधानाय नमः । ६९० ।

ॐ श्री साई भागवतोत्तमाय नमः ।

ॐ श्री साई भाटे द्वेषं समाकृष्य भक्तिं तस्मै प्रदत्तवते नमः ।

ॐ श्री साई भिल्लरूपेण दत्ताम्भसे नमः ।

ॐ श्री साई भिक्षान्नदानशेषभुजे नमः ।

ॐ श्री साई भिक्षाधर्ममहाराजाय नमः ।

ॐ श्री साई भिक्षौघदत्तभोजनाय नमः ।

ॐ श्री साई भीमाजि क्षयपापघ्ने नमः ।

ॐ श्री साई भीमबलान्विताय नमः ।

ॐ श्री साई भीतानां भीतिनाशिने नमः ।

ॐ श्री साई भीषणभीषणाय नमः । ७०० ।

ॐ श्री साई भीषाचालितसुर्याग्निमघवन्मृत्युमारुताय नमः ।

ॐ श्री साई भुक्तिमुक्तिप्रदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई भुजगाद्रक्षितप्रजाय नमः ।

ॐ श्री साई भुजङ्गरूपमाविश्य सहस्रजनपूजिताय नमः ।

ॐ श्री साई भुक्त्वा भोजनदातॄणां दग्धप्रागुत्तर अशुभाय नमः ।

ॐ श्री साई भूटिद्वरा गृहं बद्ध्वा कृतसर्वमतालयाय नमः ।

ॐ श्री साई भूभृतसम उपकारिणे नमः ।

ॐ श्री साई ॐ श्रीसाई भूम्ने नमः ।

ॐ श्री साई भूशयाय नमः ।

ॐ श्री साई भूतशरण्यभूताय नमः । ७१० ।

ॐ श्री साई भूतात्मने नमः ।

ॐ श्री साई भूतभावनाय नमः ।

ॐ श्री साई भूतप्रेतपिशाचादीन् धर्ममार्गे नियोजयते नमः ।

ॐ श्री साई भृत्यस्य भृत्यसेवाकृते नमः ।

ॐ श्री साई भृत्य भारवहाय नमः ।

ॐ श्री साई भेकं दत्तवरं स्मृत्वा सर्पास्यादपि रक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई भोगैश्वैर्येषु असक्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई भैषज्ये भिषजांवराय नमः ।

ॐ श्री साई मर्करूपेण भक्तस्य रक्षणे तेन ताडिताय नमः ।

ॐ श्री साई मन्त्रघोषमशीदिस्थाय नमः । ७२० ।

ॐ श्री साई मदाभिमानवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई मधुपानभृशासक्तिं दिव्यशक्त्या व्यपोहकाय नमः ।

ॐ श्री साई मशीध्यां तुलसीपूजां अग्निहोत्रं च शासकाय नमः ।

ॐ श्री साई महावाक्यसुधामग्नाय नमः ।

ॐ श्री साई महाभागवताय नमः ।

ॐ श्री साई महानुभाव तेजस्विने नमः ।

ॐ श्री साई महायोगेश्वराय नमः ।

ॐ श्री साई महाभयपरित्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई महात्मने नमः ।

ॐ श्री साई महाबलाय नमः । ७३० ।

ॐ श्री साई माधवराय देशपाण्डे सख्युः साहाय्यकृते नमः ।

ॐ श्री साई मानापमानयोस्तुल्याय नमः ।

ॐ श्री साई मार्गबन्धवे नमः ।

ॐ श्री साई मारुतये नमः ।

ॐ श्री साई मायामानुष रूपेण गूढैश्वर्यपरात्पराय नमः ।

ॐ श्री साई मार्गस्थदेवसत्कारः कार्य इत्यानुशसित्रे नमः ।

ॐ श्री साई मारीग्रस्थ बूटीत्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई मार्जालोच्छिष्ठभोजनाय नमः ।

ॐ श्री साई मिरीकरं सर्पगण्डात् दैवाज्ञाप्ताद्विमोचयते नमः ।

ॐ श्री साई मितवाचे नमः । ७४० ।

ॐ श्री साई मितभुजे नमः ।

ॐ श्री साई मित्रे शत्रौ सदा समाय नमः ।

ॐ श्री साई मीनाताइ प्रसूत्यर्थं प्रेषिताय रथं ददते नमः ।

ॐ श्री साई मुक्तसङ्गैः आनंवादिने (आनमिताय) नमः ।

ॐ श्री साई मुक्तसंसृतिबन्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई मुहुर्देवावतारादि नामोच्चारणनिर्वृताय नमः ।

ॐ श्री साई मूर्तिपूजानुशास्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई मूर्तिमानपि अमूर्तिमते नमः ।

ॐ श्री साई मूलेशास्त्रिणः गुरोर्घोलपमहाराजस्य रूपधृते नमः ।

ॐ श्री साई मृतसूनुं समाकृष्य पूर्वमातरि योजयते नमः । ७५० ।

ॐ श्री साई मृदालयनिवासिने नमः ।

ॐ श्री साई मृत्युभीतिव्यपोहकाय नमः ।

ॐ श्री साई मेघश्यामाय-पूजार्थं शिवलिङ्गमुपाहरते नमः ।

ॐ श्री साई मोहकलिलतीर्णाय नमः ।

ॐ श्री साई मोहसंशयनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई मोहिनीराजपूजायां कुल्कर्ण्यप्पा नियोजकाय नमः ।

ॐ श्री साई मोक्षमार्गसहायाय नमः ।

ॐ श्री साई मौनव्याख्याप्रबोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई यज्ञदानतपोनिष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई यज्ञशिष्ठान्नभोजनाय नमः । ७६० ।

ॐ श्री साई यतेन्द्रियमनोबुद्धये नमः ।

ॐ श्री साई यतिधर्मसुपालकाय नमः ।

ॐ श्री साई यतो वाचो निवर्तन्ते तदानन्दसुनिष्ठिताय नमः ।

ॐ श्री साई यत्नातिशयसेवाप्तगुरुपूर्णकृपाबलाय नमः ।

ॐ श्री साई यथेच्छसूक्ष्मसञ्चारिने नमः ।

ॐ श्री साई यथेष्टदानधर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई यन्त्रारूढं जगत्सर्वमायया भ्रामयत्प्रभवे नमः ।

ॐ श्री साई यमकिङ्करसन्त्रस्तसामन्तस्य सहायकृते नमः ।

ॐ श्री साई यमदूतपरिक्लिष्टपुरन्दरेऽसुरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई यमभीतीविनाशिने नमः । ७७० ।

ॐ श्री साई यवनालयभूषणाय नमः ।

ॐ श्री साई यशसापि महाराजाय नमः ।

ॐ श्री साई यशःपूरितभारताय नमः ।

ॐ श्री साई यक्षराक्षसपिशाचानां सानिध्यदेव नाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई युक्तभोजननिद्राय नमः ।

ॐ श्री साई युगान्तरचरित्रविदे नमः ।

ॐ श्री साई योगशक्तिजितस्वप्नाय नमः ।

ॐ श्री साई योगमायासमावृताय नमः ।

ॐ श्री साई योगवीक्षणसन्दत्तपरमानन्दमूर्तिमते नमः ।

ॐ श्री साई योगिभिर्ध्यानगम्याय नमः । ७८० ।

ॐ श्री साई योगक्षेमवहाय नमः ।

ॐ श्री साई रथस्य रजताश्वेषु हृतेष्वम्लानमानसाय नमः ।

ॐ श्री साई रसाय नमः ।

ॐ श्री साई रससाराज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई रसनारसजिते नमः ।

ॐ श्री साई रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तितमहायशसे नमः ।

ॐ श्री साई रक्षणात्पोषणात्सर्वपितृमातृगुरुप्रभवे नमः ।

ॐ श्री साई रागद्वेषवियुक्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई राकाचन्द्रसमाननाय नमः ।

ॐ श्री साई राजीवलोचनाय नमः । ७९० ।

ॐ श्री साई राजभिश्चाभिवन्दिताय नमः ।

ॐ श्री साई रामभक्तिप्रपूर्णाय नमः ।

ॐ श्री साई रामरूपप्रदर्शकाय नमः ।

ॐ श्री साई रामसारूप्यलब्धाय नमः ।

ॐ श्री साई रामसाइ इति विश्रुताय नमः ।

ॐ श्री साई रामदूतमयाय नमः ।

ॐ श्री साई राममन्त्रोपदेशकाय नमः ।

ॐ श्री साई राममूर्त्या आविर्भूतवते (राममूर्त्यादिशङ्कर्त्रे) नमः ।

ॐ श्री साई रासनेकुलवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई रुद्रतुल्यप्रकोपाय नमः । ८०० ।

ॐ श्री साई रुद्रकोपदमक्षमाय नमः ।

ॐ श्री साई रुद्रविष्णुकृताभेदाय नमः ।

ॐ श्री साई रूपिणि रूप्यमोहजिते नमः ।

ॐ श्री साई रूपेऽरूपे चिदात्मानं पश्यध्वमिति बोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई रूपात् रूपान्तरं यतोऽमृत इत्यभयप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई रेगे शिशोः तथान्धस्य सदा सद्गतिदायकाय नमः ।

ॐ श्री साई रोगदारिद्र्यदुःखादीन् भस्मदानेन वारयते नमः ।

ॐ श्री साई रोदनातार्द्रचित्ताय नमः ।

ॐ श्री साई रोमहर्षात्वाकृतये नमः ।

ॐ श्री साई लघ्वाशिने नमः । ८१० ।

ॐ श्री साई लघुनिद्राय नमः ।

ॐ श्री साई लब्धाश्वग्रामणिस्तुताय नमः ।

ॐ श्री साई लगुडोद्धृतरोहिल्लास्तम्भनाद्दर्पनाशकाय नमः ।

ॐ श्री साई ललिताद्भुतचारित्राय नमः ।

ॐ श्री साई लक्ष्मीनारायणाय नमः ।

ॐ श्री साई लीलामानुषदेहस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई लीलामानुषकर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई लेलेशास्त्रि श्रुतिप्रीत्या मशीदि वेदघोषणाय नमः ।

ॐ श्री साई लोकाभिरामाय नमः ।

ॐ श्री साई लोकेशाय नमः । ८२० ।

ॐ श्री साई लोलुप्त्वविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई लोकेषु विहरंश्चापि सच्चिदानन्दसंस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई लोनीवारण्यगणूदासं महापायाद्विमोचकाय नमः ।

ॐ श्री साई वस्त्रवद्वपुं वीक्ष्य स्वेच्छात्यक्तकलेवराय नमः ।

ॐ श्री साई वस्त्रवद्देहमुत्सृज्य पुनर्देहं प्रविष्टवते नमः ।

ॐ श्री साई वन्ध्यादोषविमुक्त्यर्थं तद्वस्त्रे नारिकेलदाय नमः ।

ॐ श्री साई वासुदेवैकसन्तुष्टये नमः ।

ॐ श्री साई वादद्वेष अप्रियाय नमः ।

ॐ श्री साई विद्याविनयसम्पन्नाय नमः ।

ॐ श्री साई विधेयात्मने नमः । ८३० ।

ॐ श्री साई वीर्यवते नमः ।

ॐ श्री साई विविक्तदेशसेविने नमः ।

ॐ श्री साई विश्वभावनभाविताय नमः ।

ॐ श्री साई विश्वमङ्गलमाङ्गल्याय नमः ।

ॐ श्री साई विषयात्संहृतेन्द्रियाय नमः ।

ॐ श्री साई वीतरागभयक्रोधाय नमः ।

ॐ श्री साई वृद्धान्ध ईक्षणसंप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई वेदान्ताम्बुजसूर्याय नमः ।

ॐ श्री साई वेदिस्थाग्निविवर्धनाय नमः ।

ॐ श्री साई वैराग्यपूर्णचारित्राय नमः । ८४० ।

ॐ श्री साई वैकुण्ठप्रियकर्मकृते नमः ।

ॐ श्री साई वैहायसगतये नमः ।

ॐ श्री साई व्यामोहप्रशमौषधाय नमः ।

ॐ श्री साई शत्रुच्छेदैकमन्त्राय नमः ।

ॐ श्री साई शरणागतवत्सलाय नमः ।

ॐ श्री साई शरणागतभीमाजीश्वान्धभेकादिरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई शरीरस्थ अशरीरस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई शरीरानेकसम्भृताय नमः ।

ॐ श्री साई शाश्वतपरार्थसर्वेहाय नमः ।

ॐ श्री साई शरीरकर्मकेवलाय नमः । ८५० ।

ॐ श्री साई शाश्वतधर्मगोप्त्रे नमः ।

ॐ श्री साई शान्तिदान्तिविभूषिताय नमः ।

ॐ श्री साई शिरस्तम्भितगङ्गाम्भसे नमः ।

ॐ श्री साई शान्ताकाराय नमः ।

ॐ श्री साई शिष्टधर्ममनुप्राप्य मौलानपादसेविताय नमः ।

ॐ श्री साई शिवदाय नमः ।

ॐ श्री साई शिवरूपाय नमः ।

ॐ श्री साई शिवशक्तियुताय नमः ।

ॐ श्री साई शिरीयानसुतोद्वाहं यथोक्तं परिपूरयते नमः ।

ॐ श्री साई शीतोष्णसुखदुःखेषु समाय नमः । ८६० ।

ॐ श्री साई शीतलवाक्सुधाय नमः ।

ॐ श्री साई शिर्डिन्यस्तगुरोर्देहाय नमः ।

ॐ श्री साई शिर्डित्यक्तकलेवराय नमः ।

ॐ श्री साई शुक्लाम्बरधराय नमः ।

ॐ श्री साई शुद्धसत्त्वगुणस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई शुद्धज्ञानस्वरूपाय नमः ।

ॐ श्री साई शुभाऽशुभविवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई शुभ्रमार्गेण तद्विष्णोः परमं पदं नॄन् नेत्रे नमः ।

ॐ श्री साई शेलुगुरुकुले वासिने नमः ।

ॐ श्री साई शेषशायिने नमः । ८७० ।

ॐ श्री साई श्रीकान्ताय नमः ।

ॐ श्री साई श्रीकराय नमः ।

ॐ श्री साई श्रीमते नमः ।

ॐ श्री साई श्रेष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई श्रेयोविधायकाय नमः ।

ॐ श्री साई श्रुतिस्मृतिशिरोरत्नविभूषितपदाम्बुजाय नमः ।

ॐ श्री साई श्रेयान् स्वधर्म इत्युक्त्वा स्वस्वधर्मनियोजकाय नमः ।

ॐ श्री साई सखाराम सच्छिष्याय नमः ।

ॐ श्री साई सकलाश्रयकामदुहे नमः ।

ॐ श्री साई सगुणनिर्गुणब्रह्मणे नमः । ८८० ।

ॐ श्री साई सज्जनमानसव्योमराजमानसुधाकराय नमः ।

ॐ श्री साई सत्कर्मनिरताय नमः ।

ॐ श्री साई सत्सन्तानवरप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यव्रताय नमः ।

ॐ श्री साई सत्याय नमः ।

ॐ श्री साई सत्सुलभोऽन्यदुर्लभाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यवाचे नमः ।

ॐ श्री साई सत्यसङ्कल्पाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यधर्मपरायणाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यपराक्रमाय नमः । ८९० ।

ॐ श्री साई सत्यद्रष्ट्रे नमः ।

ॐ श्री साई सनातनाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यनारायणाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्यतत्त्वप्रभोधकाय नमः ।

ॐ श्री साई सत्पुरुषाय नमः ।

ॐ श्री साई सदाचाराय नमः ।

ॐ श्री साई सदा परहिते रताय नमः ।

ॐ श्री साई सदा क्षिप्तनिजानन्दाय नमः ।

ॐ श्री साई सदानन्दाय नमः ।

ॐ श्री साई सद्गुरवे नमः । ९०० ।

ॐ श्री साई सदा जनहितोद्युक्ताय नमः ।

ॐ श्री साई सदात्मने नमः ।

ॐ श्री साई सदाशिवाय नमः ।

ॐ श्री साई सदाऽऽर्द्रचिताय नमः ।

ॐ श्री साई सद्रूपिणे नमः ।

ॐ श्री साई सदाश्रयाय नमः ।

ॐ श्री साई सदाजिताय नमः ।

ॐ श्री साई सन्यासयोगयुक्तात्मने नमः ।

ॐ श्री साई सन्मार्गस्थापनव्रताय नमः ।

ॐ श्री साई सबीजं फलमादाय निर्बीजपरिणामकाय नमः । ९१० ।

ॐ श्री साई समदुःखसुखस्वस्थाय नमः ।

ॐ श्री साई समलोष्टाश्मकाञ्चनाय नमः ।

ॐ श्री साई समर्थसद्गुरुश्रेष्ठाय नमः ।

ॐ श्री साई समानरहिताय नमः ।

ॐ श्री साई समाश्रितजनत्राणव्रतपालनतत्पराय नमः ।

ॐ श्री साई समुद्रसमगाम्भीर्याय नमः ।

ॐ श्री साई सङ्कल्परहिताय नमः ।

ॐ श्री साई संसारतापहार्यङ्घ्रये नमः ।

ॐ श्री साई संसारवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई संसारोत्तारनाम्ने नमः । ९२० ।

ॐ श्री साई सरोजदलकोमलाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्पादिभयहारिणे नमः ।

ॐ श्री साई सर्परूपेऽप्यवस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वकर्मफलत्यागिने नमः ।

ॐ श्री साई सर्वत्र समवस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वतःपाणिपादाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वतोऽक्षिशिरोमुखाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वतःश्रुतिमन्मूर्तये नमः ।

ॐ श्री साई सर्वमावृत्य संस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वधर्मसमत्रात्रे नमः । ९३० ।

ॐ श्री साई सर्वधर्मसुपूजिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वधर्मान् परित्यज्य गुर्विशं शरणं गताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वधीसाक्षिभूताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वनामाभिसूचिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतान्तरात्मने नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूताशयस्थिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतादिवासाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतहिते रताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतात्मभूतात्मने नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतसहृदे नमः । ९४० ।

ॐ श्री साई सर्वभूतनिशोन्निद्राय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वभूतसमादृताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वज्ञाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वविदे नमः ।

ॐ श्री साई सर्वस्मै नमः ।

ॐ श्री साई सर्वमत सुसम्मताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वब्रह्ममयं द्रष्ट्रे नमः ।

ॐ श्री साई सर्वशक्त्युपबृंहिताय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वसङ्कल्पसन्यासिने नमः ।

ॐ श्री साई सर्वसङ्गविवर्जिताय नमः । ९५० ।

ॐ श्री साई सर्वलोकशरण्याय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वलोकमहेश्वराय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वेशाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वरूपिणे नमः ।

ॐ श्री साई सर्वशत्रुनिर्वहनाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वैश्वर्यैकमन्त्राय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वेप्सितफलप्रदाय नमः ।

ॐ श्री साई सर्वोपकारिणे नमः ।

ॐ श्री साई सर्वोपास्यपदाम्बुजाय नमः ।

ॐ श्री साई सहस्रशिर्षमूर्तये नमः । ९६० ।

ॐ श्री साई सहस्राक्षाय नमः ।

ॐ श्री साई सहस्रपादे नमः ।

ॐ श्री साई सहस्रनामविश्वासिने नमः ।

ॐ श्री साई सहस्रनामलक्षिताय नमः ।

ॐ श्री साई साकारोऽपि निराकाराय नमः ।

ॐ श्री साई साकारार्चासुमानिताय नमः ।

ॐ श्री साई साधुजनपरित्रात्रे नमः ।

ॐ श्री साई साधुपोषकाय नमः ।

ॐ श्री साई सालोक्यसार्ष्टिसामीप्यसायुज्यपददायकाय नमः ।

ॐ श्री साई साईरामाय नमः । ९७० ।

ॐ श्री साई साईनाथाय नमः ।

ॐ श्री साई साईशाय नमः ।

ॐ श्री साई साईसत्तमाय नमः ।

ॐ श्री साई साक्षात्कृतहरिप्रीत्या सर्वशक्तियुताय नमः ।

ॐ श्री साई साक्षात्कारप्रदात्रे नमः ।

ॐ श्री साई साक्षान्मन्मथमर्दनाय नमः ।

ॐ श्री साई सायिने नमः ।

ॐ श्री साई साईदेवाय नमः ।

ॐ श्री साई सिद्धेशाय नमः ।

ॐ श्री साई सिद्धसङ्कल्पाय नमः । ९८० ।

ॐ श्री साई सिद्धिदाय नमः ।

ॐ श्री साई सिद्धवाङ्ग्मुखाय नमः ।

ॐ श्री साई सुकृतदुष्कृतातीताय नमः ।

ॐ श्री साई सुखेषु विगतस्पृहाय नमः ।

ॐ श्री साई सुखदुःखसमाय नमः ।

ॐ श्री साई सुधास्यन्दिमुखोज्वलाय नमः ।

ॐ श्री साई स्वेच्छामात्रजडद्देहाय नमः ।

ॐ श्री साई स्वेच्छोपात्ततनवे नमः ।

ॐ श्री साई स्वीकृतभक्तरोगाय नमः ।

ॐ श्री साई स्वे महिम्नि प्रतिष्टिताय नमः । ९९० ।

ॐ श्री साई हरिसाटे तथा नानाङ्कामादेः परिरक्षकाय नमः ।

ॐ श्री साई हर्षामर्षभयोद्वेगैर्निर्मुक्तविमलाशयाय नमः ।

ॐ श्री साई हिन्दूमुस्लिंसमूहांश्च मैत्रीकरणतत्पराय नमः ।

ॐ श्री साई हूङ्कारेणैव सुक्षिप्रं स्तब्धप्रचण्डमारुताय नमः ।

ॐ श्री साई हृदयग्रन्थिभेदिने नमः ।

ॐ श्री साई हृदयग्रन्थिवर्जिताय नमः ।

ॐ श्री साई क्षान्तानन्तदौर्जन्याय नमः ।

ॐ श्री साई क्षितिपालादिसेविताय नमः ।

ॐ श्री साई क्षिप्रप्रसाददात्रे नमः ।

ॐ श्री साई क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिकाय नमः । १००० ।

ॐ श्री साई श्रीसाई चरणं शरणं मम ।

श्री साई चरणं शरणं मम ।

॥ इति श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली सम्पूर्ण ॥

इस अत्यंत विस्तृत, दार्शनिक और ज्ञानवर्धक लेख में हम गहराई से जानेंगे कि श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली का तात्विक और आध्यात्मिक महत्व क्या है, इसके नित्य पाठ या अर्चन से जीवन में कौन से अकल्पनीय चमत्कार होते हैं, और इसे सिद्ध करने की प्रामाणिक साधना विधि, नियम व सावधानियां क्या हैं।

1. श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली का दार्शनिक और आध्यात्मिक महत्व

इस महान सहस्रनामावली की प्रचंड ऊर्जा, इसके पीछे छिपे भक्ति दर्शन और ‘साईं-तत्व’ को समझने के लिए हमें ‘श्रद्धा और सबूरी’, उदी (पवित्र भस्म) के रहस्य, और सहस्रनाम के नाद-विज्ञान को गहराई से समझना होगा।

‘श्रद्धा’ और ‘सबूरी’ का तात्विक और मनोवैज्ञानिक रहस्य

साईं बाबा ने अपने भक्तों से कभी कोई कठोर तपस्या, यज्ञ या करोड़ों का दान नहीं मांगा। उन्होंने केवल दो सिक्के मांगे— ‘श्रद्धा’ (अटूट विश्वास) और ‘सबूरी’ (धैर्य)। जब साधक श्री साईनाथ सहस्रनामावली के 1000 नामों का गान करता है, तो उसके भीतर का संशय (Doubt) और उतावलापन नष्ट हो जाता है। ये हज़ार नाम साधक के मन में यह दृढ़ विश्वास पैदा करते हैं कि “मेरा साईं मेरे साथ है, वह सब ठीक कर देगा।” यह श्रद्धा ही वह चाबी है जो असंभव को संभव कर देती है।

साईं बाबा: सर्व-देवता स्वरूप (The Universal Form)

सहस्रनामावली में साईं बाबा को राम, कृष्ण, शिव, मारुति (हनुमान), और दत्तात्रेय के रूप में संबोधित किया गया है। बाबा ने कई बार अपने भक्तों को उनके इष्ट देवता के रूप में दर्शन दिए थे। इसका दार्शनिक अर्थ यह है कि परमात्मा एक ही है। जब आप इन 1000 नामों का जप करते हैं, तो आप वास्तव में ब्रह्मांड के सभी देवी-देवताओं की एक साथ पूजा कर रहे होते हैं। यह पाठ धार्मिक कट्टरता और भेदभाव को मिटाकर हृदय को विशाल बनाता है।

‘सहस्रनाम’ का नाद-विज्ञान और ‘उदी’ (Udi – Sacred Ash)

‘1000’ की संख्या को पूर्णता और अनंतता का प्रतीक माना जाता है। श्री साईं के ये हज़ार नाम वास्तव में 1000 ब्रह्मांडीय आवृत्तियां (Cosmic Frequencies) हैं। बाबा द्वारकामाई में जो धूनी (अग्नि) जलाते थे, उसकी भस्म (उदी) आज भी लाखों लोगों के असाध्य रोग ठीक कर रही है। जब साधक पूर्ण नाद (ध्वनि) के साथ इन 1000 नामों का उच्चारण करते हुए साईं बाबा को उदी या पुष्प अर्पित करता है, तो उसके घर के आभामंडल (Aura) में एक श्वेत और स्वर्णिम रंग का सुरक्षा-कवच बन जाता है।

2. श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली पाठ के अकल्पनीय और चमत्कारिक लाभ (Benefits)

श्री शिरडी साईं बाबा साक्षात करुणा, आरोग्य, वात्सल्य, और परम शांति के प्रदाता हैं। जो साधक पूर्ण निष्ठा, सात्विकता, पवित्रता, और एक निश्छल हृदय के साथ प्रतिदिन या गुरुवार के दिन इस नामावली का पाठ या अर्चन करता है, उसे जीवन में निम्नलिखित अमोघ और चमत्कारी लाभ प्राप्त होते हैं:

स्वास्थ्य, रोग-मुक्ति और प्राण-रक्षा (Health & Healing)

  • असाध्य रोगों (Incurable Diseases) से चमत्कारी मुक्ति: साईं बाबा सबसे बड़े ‘वैद्य’ हैं। जो लोग कैंसर, हृदय रोग, या ऐसी बीमारियों से पीड़ित हैं जिनका डॉक्टर भी इलाज नहीं कर पा रहे, उनके लिए यह सहस्रनाम साक्षात संजीवनी है। इन नामों का जप कर यदि बाबा की उदी पानी में मिलाकर पी जाए, तो भयंकर बीमारियां शांत हो जाती हैं।

  • अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा: यह पाठ एक अभेद्य सुरक्षा कवच है। बाबा ने कहा था, “मेरे रहते मेरे भक्त को कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।” इस पाठ से अकाल मृत्यु का भय और अचानक होने वाली दुर्घटनाएं टल जाती हैं।

  • संतान प्राप्ति: जो दंपत्ति निःसंतान हैं, वे यदि पूर्ण श्रद्धा से साईं बाबा के इन 1000 नामों का अर्चन करें, तो बाबा की झोली से उन्हें उत्तम और संस्कारी संतान की प्राप्ति अवश्य होती है।

आर्थिक, व्यापारिक और भौतिक लाभ (Wealth & Employment)

  • नौकरी (Job) और व्यापार में अप्रत्याशित सफलता: जो युवा लंबे समय से बेरोजगार हैं या जिनके व्यापार में लगातार घाटा हो रहा है, श्री साईनाथ की कृपा उनके बंद रास्ते खोल देती है। बाबा को फकीर माना जाता है, लेकिन वे अपने भक्तों को कुबेर बना देते हैं।

  • भयंकर कर्जों (Debts) से तुरंत मुक्ति: जो व्यक्ति भारी कर्जों के बोझ तले दब चुका है, इस पाठ से उसके लिए आय के नए स्रोत खुल जाते हैं और वह शीघ्र ऋण-मुक्त हो जाता है। घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं रहती।

  • मुकदमों (Court Cases) में विजय: यदि आप किसी झूठे आरोप या विवाद में फंस गए हैं, तो बाबा का स्मरण आपको न्याय दिलाता है और सम्मान की रक्षा करता है।

मानसिक और आध्यात्मिक लाभ (Mental Peace & Spiritual Bliss)

  • डिप्रेशन, तनाव और अज्ञात भय से मुक्ति: आधुनिक जीवन के भयंकर अवसाद (Depression) और चिंताओं को यह पाठ जड़ से मिटा देता है। साधक के हृदय में एक असीम शांति का संचार होता है।

  • क्षमा और मन की शुद्धि: बाबा सब पर करुणा करते हैं। उनके 1000 नाम जपने से हमारे भीतर का क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या भस्म हो जाती है। हम दूसरों को क्षमा करना सीख जाते हैं।

3. श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली की प्रामाणिक साधना और पाठ विधि (Sadhana Vidhi)

श्री साईं बाबा की उपासना में किसी कठोर कर्मकांड या दिखावे की आवश्यकता नहीं होती। वे केवल भाव के भूखे हैं। फिर भी, इस सिद्ध नामावली का पूर्ण और त्वरित फल प्राप्त करने के लिए संत परंपरा में बताई गई इस प्रामाणिक और सात्विक विधि का पालन करना अत्यंत चमत्कारी होता है:

उत्तम दिन, तिथि और मुहूर्त

  • दिन: श्री साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार (Thursday – गुरु का दिन) सबसे श्रेष्ठ और सर्वाधिक जाग्रत माना जाता है। बाबा को साक्षात दत्तात्रेय (गुरु) माना जाता है।

  • विशेष तिथियां: गुरु पूर्णिमा, दशहरा (विजयादशमी – बाबा का महासमाधि दिवस), रामनवमी, और दत्तात्रेय जयंती के दिन इस सहस्रनामावली का पाठ करना हज़ारों गुणा अधिक फलदायी होता है।

  • समय: साईं साधना का सबसे उत्तम समय प्रातःकाल (सूर्योदय के समय) या ‘संध्याकाल’ (जब मंदिरों में आरती होती है) होता है। वैसे बाबा का नाम 24 घंटे में कभी भी लिया जा सकता है।

दिशा, आसन और वस्त्र का विधान

  • दिशा: पाठ करते समय अपना मुख सदैव पूर्व (East) या उत्तर (North) की ओर रखें।

  • आसन: बैठने के लिए पीले (Yellow), सफेद, या लाल रंग के आसन का प्रयोग करें।

  • वस्त्र: स्नान करके पूर्ण रूप से स्वच्छ हो जाएं। पूजा में पीले या श्वेत (सफेद) रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ परिणाम देता है।

पीठ की स्थापना और पूजन सामग्री (Setup)

सामग्री / विधान विवरण
प्रतिमा / चित्र एक स्वच्छ लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर श्री साईं बाबा का अत्यंत सुंदर चित्र या पीतल/मार्बल की मूर्ति स्थापित करें। चित्र ऐसा हो जिसमें बाबा मुस्कुरा रहे हों या आशीर्वाद दे रहे हों।
दीपक और धूनी बाबा के समक्ष गाय के शुद्ध घी का या तिल के तेल का एक अखंड दीप प्रज्वलित करें। चंदन या गुलाब की सात्विक धूप/अगरबत्ती जलाएं। यदि संभव हो तो एक छोटे से पात्र में कंडे (Cow dung) जलाकर धूनी प्रज्वलित करें।
तिलक और शृंगार श्री साईं बाबा को पीला चंदन (अष्टगंध), उदी (भस्म) और गुलाब जल अर्पित करें। स्वयं के मस्तक पर भी साईं की उदी का तिलक अवश्य धारण करें।
पुष्प और नैवेद्य उन्हें पीले और श्वेत पुष्प (गेंदा, चमेली, गुलाब) अत्यंत प्रिय हैं।

दृढ़ संकल्प (Sankalpa)

पाठ आरंभ करने से पूर्व दाएँ हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत (हल्दी से रंगे हुए), और एक पीला पुष्प लें। अपना नाम, गोत्र, स्थान और पाठ का स्पष्ट उद्देश्य बोलें (उदाहरण: “हे कलियुग के साक्षात देव श्री साईनाथ, मैं अपने जीवन से समस्त संकटों, रोगों, आर्थिक कष्टों के समूल नाश, अखंड सुख-शांति तथा आपकी अहैतुकी कृपा के लिए श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली का 9, 11 या 21 गुरुवार तक पाठ/पुष्पार्चन करने का संकल्प लेता/लेती हूँ”), और फिर जल को ज़मीन पर छोड़ दें।

सहस्रनामावली का पाठ और पुष्पार्चन/उदी-अर्चन विधि (Chanting Method & Archana)

  • सर्वप्रथम विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश और माता सरस्वती का मानसिक स्मरण कर उन्हें साष्टांग प्रणाम करें।

  • अपने इष्ट देव और श्री साईं बाबा के श्रीचरणों का ध्यान करें।

  • बाबा के मूल मंत्र “ॐ श्री साईंनाथाय नमः” की कम से कम 11 बार या एक माला (रुद्राक्ष या तुलसी की माला पर) अवश्य जपें।

  • अब पूर्ण एकाग्रता, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर और भीतर एक असीम शांति का अनुभव करते हुए ‘श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली’ का सस्वर पाठ आरंभ करें।

  • सहस्रार्चन / उदी-अर्चन विधि (चमत्कारिक उपाय): चूँकि यह ‘नामावली’ है, अतः अत्यंत शीघ्र फल प्राप्ति के लिए, प्रत्येक नाम के उच्चारण (जैसे— ॐ श्री साईंनाथाय नमः, ॐ परमेश्वराय नमः, ॐ शिर्डीवासिने नमः) के साथ बाबा के चित्र या मूर्ति पर एक पीला पुष्प, या पीला अक्षत, या चुटकी भर ‘उदी’ (शिरडी की भस्म) अर्पित करें। यह 1000 नामों के साथ 1000 बार किया जाता है। मनोकामना पूर्ण करने का यह सबसे शक्तिशाली साईं उपाय है।

क्षमा प्रार्थना और सात्विक भोग (Naivedya)

ध्यान दें: बाबा को कोई भी सात्विक वस्तु प्रेम से खिलाई जाए, वे खा लेते हैं। बाबा को पेड़े, बेसन के लड्डू, पालक (बाबा को अत्यंत प्रिय थी), रोटी, या खिचड़ी का भोग लगाएं। अंत में कर्पूर जलाकर साईं बाबा की आरती (आरती साईं बाबा, सौख्यदातार जीवा…) गाएं। पूजा के अंत में हाथ जोड़कर साष्टांग दंडवत प्रणाम करते हुए पूजा-पाठ में हुई किसी भी अशुद्धि या उच्चारण की भूल के लिए क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।

4. साधना के अत्यंत संवेदनशील और अनिवार्य नियम (Strict Rules for Sadhana)

श्री साईं बाबा परम दयालु हैं, वे कोई तांत्रिक देव नहीं हैं, परंतु उनकी साधना का मूल आधार ‘मानवीय संवेदनाएं’ और ‘पवित्रता’ है। इस साधना का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है:

  1. दीन-दुखियों और जीवों की सेवा (The Ultimate Sai Rule): यह साईं साधना का सबसे बड़ा नियम है। बाबा ने कहा था कि जो कोई भूखा प्राणी तुम्हारे द्वार पर आए, वह मेरा ही रूप है। यदि आप सहस्रनामावली का पाठ कर रहे हैं, तो आपको प्रतिदिन या कम से कम गुरुवार को किसी भूखे इंसान, कुत्ते, गाय या पक्षी को भोजन अवश्य कराना चाहिए। जो जीवों को भूखा भगाता है या मारता है, उसकी पूजा बाबा कभी स्वीकार नहीं करते।

  2. पूर्ण सात्विक जीवन (Sattvic Diet): अनुष्ठान की अवधि के दौरान साधक को घर में और अपने आहार में मांस (Meat), मदिरा (Alcohol), अंडे का पूर्णतः त्याग कर देना चाहिए। गुरुवार के दिन तो भूलकर भी मांसाहार या नशा नहीं करना चाहिए।

  3. धार्मिक सहिष्णुता (Respecting all Religions): साईं बाबा मस्जिद में रहे और राम-कृष्ण का नाम भी लिया। जो व्यक्ति हिंदू-मुस्लिम या किसी भी जाति-पाति के नाम पर लोगों से घृणा करता है, उस पर बाबा कभी प्रसन्न नहीं होते। सबके भीतर ईश्वर को देखना साईं साधना की पहली शर्त है।

  4. सबूरी (धैर्य – Patience): कई बार परीक्षा की घड़ी आती है। पाठ शुरू करते ही चमत्कार की उम्मीद न करें। बाबा कभी-कभी भक्त के धैर्य की परीक्षा लेते हैं। इसलिए मन में यह भाव रखें कि “मेरा साईं जब सही समय होगा, मुझे अवश्य देगा।”

  5. ब्रह्मचर्य और पवित्रता: संकल्पित अनुष्ठान (जैसे 21 गुरुवार का व्रत या 11 दिन का पाठ) के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।

5. उपासना में ध्यान रखने योग्य विशेष सावधानियां (Precautions)

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली एक अत्यंत जाग्रत और पवित्र स्तोत्र है, अतः इसकी साधना करते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं:

  • सकाम या प्रतिशोध की भावना का निषेध (No Harmful Motives): यह स्तुति आपकी आध्यात्मिक उन्नति, सुख-शांति, रोग-मुक्ति और संकटों से रक्षा के लिए है। किसी निर्दोष व्यक्ति का अकारण अहित करने, उसे नुकसान पहुँचाने, या अपना व्यक्तिगत बदला लेने की नीयत से इसका पाठ भूलकर भी न करें। बाबा सबके हैं, वे किसी का बुरा नहीं करते। गलत मंशा से किया गया पाठ निष्फल हो जाता है।

  • उदी (Udi) का पूर्ण सम्मान: शिरडी की भस्म (उदी) कोई साधारण राख नहीं है, यह साक्षात साईं बाबा का स्वरूप है। उदी को कभी गंदे हाथों से न छुएं, उसे पैरों में न गिरने दें और अत्यंत पवित्र स्थान पर रखें।

  • शारीरिक अपवित्रता का ध्यान: बिना स्नान किए, गंदे वस्त्र पहनकर, जूठे मुंह, या अशुद्ध अवस्था (सूतक, पातक) में सहस्रनामावली की पुस्तक, उदी, या बाबा की मूर्ति का स्पर्श सर्वथा वर्जित है। महिलाओं को अपने मासिक धर्म (Menstruation) के दिनों में इस पाठ और पूजा कक्ष से पूर्णतः दूर रहना चाहिए। वे उन दिनों में केवल मन ही मन ‘ॐ साईं राम’ का मानसिक स्मरण कर सकती हैं।

  • अहंकार का शमन: जब बाबा की कृपा से आपको धन, स्वास्थ्य या समाज में पद मिल जाए, तो यह अहंकार न करें कि “मैंने अपनी मेहनत से पाया है।” हमेशा कहें कि “यह मेरे साईं की कृपा है।” अहंकार आते ही बाबा की कृपा रुक जाती है।

6. आधुनिक युग में श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली की असीम प्रासंगिकता (Relevance in Modern Era)

आज का आधुनिक युग अत्यधिक ‘तनाव’ (Stress), ‘अस्थिरता’ (Instability), ‘स्वार्थ’, ‘रिश्तों के टूटने’ (Broken Relationships), और ‘गलाकाट प्रतिस्पर्धा’ का युग है। लोग भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ में दिन-रात भाग रहे हैं, लेकिन जीवन से ‘शांति’ (Peace), ‘धैर्य’ (Patience), और ‘संतोष’ पूरी तरह गायब हो चुके हैं।

आज के समय में इंसान डिप्रेशन (Depression), एंग्जायटी (Anxiety), और भविष्य के डर का शिकार हो रहा है। अस्पतालों की लाइनें लंबी हैं और कोर्ट-कचहरी में भाई-भाई लड़ रहे हैं।

‘श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली’ आधुनिक इंसान के इन्ही ‘पारिवारिक संकटों’, ‘मानसिक भटकाव’, और ‘स्वास्थ्य संकटों’ का सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक उपचार (Psychological Healing) है:

  1. मानसिक शक्ति और तनाव से मुक्ति (Stress Management): जब आप 1000 नामों का नाद-जप करते हैं, तो आपके भीतर का सारा डर और ओवरथिंकिंग (Overthinking) खत्म हो जाती है। यह पाठ आपको यह विश्वास दिलाता है कि “एक परम शक्ति है जो मेरा खयाल रख रही है।” यह विचार सबसे बड़ा स्ट्रेस-बस्टर है।

  2. धैर्य और सहनशीलता (Patience – Saburi): आज के इंस्टेंट (Instant) ज़माने में लोगों में धैर्य नहीं है, जिससे रिश्ते और करियर बर्बाद हो रहे हैं। साईं बाबा का ‘सबूरी’ का मंत्र मनुष्य को बुरे वक्त में टिके रहना और संयम रखना सिखाता है।

  3. हीलिंग और डिजिटल डिटॉक्स (Emotional Healing): आज हर कोई सोशल मीडिया के कारण दूसरों से अपनी तुलना कर रहा है। बाबा का यह पाठ आपको ‘स्वयं से जुड़ने’ में मदद करता है। यह डिप्रेशन से बाहर निकालकर जीवन में सकारात्मकता (Positivity) लाता है।

  4. सेवा भाव का विकास: आधुनिक कॉर्पोरेट कल्चर में इंसान बहुत स्वार्थी हो गया है। बाबा की साधना हमें ‘दूसरों को खिलाकर खाने’ का गुण सिखाती है, जिससे समाज में प्रेम और परोपकार की भावना बढ़ती है।

Shri Shirdi Sainath Shasranamavali (श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली) केवल 1000 संस्कृत या मराठी शब्दों का एक काव्यात्मक संकलन नहीं है; यह उस परब्रह्म फकीर, परम कृपालु गुरु, और करुणा के सागर का साक्षात वांग्मय स्वरूप है, जिसके एक आशीर्वाद से पत्थर भी सोना बन जाता है और अकाल मृत्यु भी लौट जाती है। जब एक साधक अपने सारे लौकिक ज्ञान, अहंकार और मानसिक जटिलताओं को त्यागकर, पूर्ण शरणागति के साथ इस नामावली को बाबा के चरणों में समर्पित करता है, तो श्री साईं नाथ स्वयं उसे अपनी गोद में उठा लेते हैं।

श्री शिरडी साईं बाबा अत्यंत कृपालु, भक्त-वत्सल, और अपने निश्छल भक्तों के लिए परम दयामयी और संकट-मोचक हैं। जब भी आपको लगे कि आप जीवन के भौतिक संघर्षों में पूरी तरह टूट चुके हैं, भयंकर बीमारियों ने आपको घेर लिया है, कर्जे का भारी बोझ है, या आपका मन अत्यंत अशांत है, तो गुरुवार की सुबह पीले आसन पर बैठें, घी का दीपक प्रज्वलित करें, बाबा को पीले पुष्प व उदी अर्पित करें, और पूर्ण निर्भयता व असीम प्रेम के साथ इस महास्तोत्र का गान करते हुए अपने ‘साईं देवा’ को पुकारें।

आप स्वयं अनुभव करेंगे कि बाबा के इन पावन 1000 नामों के नाद ने आपके जीवन की सारी बाधाओं, बीमारियों और भयों को उखाड़ फेंका है, और साक्षात श्री शिरडी साईनाथ ने आपके जीवन को अपार विजय, निरोगी काया, पारिवारिक सुख, और परम शांति के दिव्य प्रकाश से आलोकित कर दिया है। अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक राजाधिराज योगीराज परब्रह्म श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय!

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावलीः अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली क्या है और इसका क्या महत्व है?

श्री शिरडी साईनाथ सहस्रनामावली कलियुग के साक्षात परब्रह्म श्री शिरडी साईं बाबा के 1000 परम पवित्र, जाग्रत और शक्तिशाली नामों का एक सिद्ध संकलन है (जिसमें प्रत्येक नाम के अंत में ‘नमः’ लगता है)। इसका महत्व इसलिए सर्वोपरि है क्योंकि यह नामावली जीवन के भयंकर संकटों, असाध्य रोगों, और आर्थिक तंगी को जड़ से समाप्त कर साधक को अभेद्य सुरक्षा, मानसिक शांति और साईं बाबा की प्रत्यक्ष कृपा प्रदान करती है।

2. इस सहस्रनामावली का पाठ या ‘उदी-अर्चन’ करने से जीवन में कौन सा सबसे बड़ा चमत्कारी लाभ मिलता है?

इस नामावली का सबसे प्रत्यक्ष और त्वरित लाभ ‘असाध्य रोगों (लालायज बीमारियों) से मुक्ति’, ‘भारी कर्जों और बेरोजगारी का नाश’, और ‘मानसिक अवसाद (Depression) व डर से छुटकारा’ है। इसके नियमित पाठ और उदी-अर्चन से घर में हमेशा साईं बाबा की उपस्थिति का अहसास होता है, और साधक के जीवन के रुके हुए काम अचानक बनने लगते हैं।

3. क्या कोई भी व्यक्ति (बिना जाति-धर्म के भेद के) श्री साईं सहस्रनामावली का पाठ कर सकता है?

जी हाँ, बिल्कुल! साईं बाबा का मूल मंत्र ही ‘सबका मालिक एक’ है। उनके दरबार में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई या किसी भी जाति का कोई भेदभाव नहीं है। कोई भी व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ इस नामावली का पाठ कर सकता है। साईं साधना में केवल हृदय का सच्चा ‘भाव’ और ‘समर्पण’ देखा जाता है।

4. साईं बाबा की आराधना के लिए सप्ताह का कौन सा दिन और समय सर्वोत्तम माना गया है?

श्री साईं बाबा की आराधना के लिए ‘गुरुवार’ (Thursday – सद्गुरु का दिन) सबसे श्रेष्ठ और जाग्रत माना जाता है। गुरु पूर्णिमा, रामनवमी, और विजयादशमी (बाबा का महासमाधि दिवस) के दिन इसका पाठ अनंत फलदायी होता है। इसका पाठ प्रातःकाल (सूर्योदय के समय) या ‘संध्याकाल’ (गोधूलि बेला) पीले या श्वेत वस्त्र धारण कर, पूर्व दिशा की ओर मुख करके करना सर्वाधिक उत्तम है।

5. श्री साईनाथ सहस्रनामावली की इस साधना को करते समय सबसे बड़ा और अनिवार्य नियम क्या है?

इस साधना का सबसे बड़ा और अनिवार्य नियम ‘भूखे जीवों को भोजन कराना’ (अन्नदान) और ‘श्रद्धा व सबूरी’ (अटूट विश्वास और धैर्य) रखना है। जो व्यक्ति गरीबों, जानवरों या पक्षियों को सताता है, उसकी पूजा बाबा कभी स्वीकार नहीं करते। इसके अतिरिक्त, पूजा में ‘उदी’ (शिरडी की पवित्र भस्म) का प्रयोग अत्यंत फलदायी माना जाता है, तथा अनुष्ठान के दौरान पूर्ण सात्विकता (मांस-मदिरा का त्याग) और ब्रह्मचर्य का पालन करना इस साधना के मूलभूत नियम हैं।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

error: Content is protected !!