12 February 2026 Panchang in Hindi: 12 फरवरी 2026 पंचांग पढ़ें और जानें आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और गुरुवार के विशेष उपाय। कृष्ण पक्ष एकादशी व्रत, शुभ समय और वैदिक ज्योतिष अनुसार दिन का संपूर्ण धार्मिक महत्व हिंदी में
12 फरवरी 2026 का दिव्य पंचांग और दिव्य संदेश — समय की साधना, तिथि-योग, नक्षत्र और जीवन का मार्गदर्शन
ज्योतिष शास्त्र प्राचीन वैदिक वेदों का ही विस्तार है — यह जीवन के कर्म, दर्शन, साधना, ग्रह-नक्षत्रों के द्वार खोलकर हमें जीवन की गूढ़ता और ईश्वर-भावना तक पहुँचने का मार्ग दिखाता है। पंचांग (दिनचर्या ग्रह-काल गणना) केवल समय की सूची नहीं है, बल्कि यह उस जीवन-ऊर्जा (प्राण) का दर्पण है जिस पर हम अपने आज को योग्य, शुभ और सुस्पष्ट बना सकें।
12 फरवरी 2026 गुरुवार के दिन का पंचांग ध्यानपूर्वक देखा जाए तो यह दिन कृष्ण पक्ष की दशमी से एकादशी तक का पुल है, जो धार्मिकता, संयम, और अनुभूत आत्मज्ञान को बनाए रखने का समय प्रदान करता है।
वैदिक पंचांग का विश्लेषण: समय, तिथि, नक्षत्र और योग
तिथि (Tithi) — कृष्ण पक्ष दशमी से एकादशी तक
आज सुबह तक कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि चली और दोपहर के करीब एकादशी तिथि प्रारंभ हो गई। एकादशी विष्णु-भक्ति को समर्पित होती है — यह भोजन का संयम, मन का संयम और ध्यान का समय है। Ekadashi vrat का अर्थ केवल भोज-नियंत्रण नहीं, बल्कि मन और इन्द्रियों का संयम है जो कृष्ण लीला के अनुसरण में आत्म-ज्ञान को जागृत करता है।
नक्षत्र (Nakshatra) — ज्येष्ठा से मूल (Aaj Ka Nakshatra 12 February 2026)
हमारा दिन पहले ज्येष्ठा नक्षत्र से आरंभ होता है, जो विजय, अधिकार, संकल्प-शक्ति और आत्म-बोध के लिए प्रसिद्ध है। दोपहर के बाद मूल नक्षत्र आरंभ होता है, जिसमें जीवन के मूल कारणों की खोज और आध्यात्मिक सत्य की अनुभूति होती है।
योग (Yoga)
आज का प्रमुख योग है हर्षण योग, जो मन में आनंद, स्पष्टता और संतुलन का ज्ञान देता है। ध्यान और साधना के लिए यह योग अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
करण (Karana)
करण विश्टि और बावा हैं — ये कन्या और शिव की सिद्धियाँ प्रसारित करने वाला हिस्सा है, जो कर्मफल की स्पष्टता देता है।
वार (Vara)
आज गुरुवार है, जिसे भगवान विष्णु का वार माना गया है। गुरुवार का प्रभाव ज्ञान, दया, मार्गदर्शन और ज्ञानी गुरु शक्ति के अनुसार जीवन में संतुलन स्थापित करने के लिए श्रेष्ठ होता है।
शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहु-काल
दिन में राहु-काल, यमगंड, गुलिक, दुरमुहूर्त जैसे समय होते हैं जिन्हें वैदिक मान्यता में अशुभ कार्यों से परहेज करने हेतु माना जाता है। वहीं अभिजीत मुहूर्त और ब्रह्म मुहूर्त जैसे पल अत्यंत शुभ फल देने वाले हैं यदि साधना, पूजा या अध्ययन हेतु उपयोग में लाए जाएँ।
पंचांग के आध्यात्मिक संकेत — जीवन ज्ञान का संदेश
एकादशी — शरीर से आत्मा की ओर यात्रा
एकादशी का दिन केवल उपवास का नहीं बल्कि मन, वाणी और कर्मों का नियंत्रित स्वरूप हासिल करने का पर्व है। जैसे भगवद्-गीता में कहा गया है —
“त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म न विद्यते तदाऽमृतत्वमश्नुते।”
अर्थात् शरीर त्यागने के बाद जन्म-मरण का चक्र नहीं, आत्मा का शाश्वत ज्ञान मिलता है।
ज्येष्ठा नक्षत्र — विजयी शक्ति का संदेश
ज्येष्ठा नक्षत्र स्वयं इंद्र का नक्षत्र है। यह ज्ञान, विजय, आत्म-भविष्य-दर्शी शक्तियों और अधिकार का द्योतक है। आज इसके प्रभाव से मन में स्पष्टता, दृढ़ निर्णय और आत्म-विश्वास का संचार होता है।
मूल नक्षत्र — आधार में स्थिरता
मूल नक्षत्र जीवन की मूल गहराई से परिचित कराता है — यह अंतर्मन की खोज, वैराग्य, और आत्म-विश्लेषण का संकेत है। यह उस ज्ञान-मार्ग की ओर लेकर जाता है जहाँ व्यक्ति स्वयं को पाता है।
ग्रह-काल के अनुसार आज के दिशा-निर्देश
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ब्रह्म मुहूर्त (5:28 – 6:16 AM)
ध्यान, जप, मंत्र उच्चारण के लिये श्रेष्ठ समय। पूर्व दिशा में बैठे, ईश्वर का ध्यान केंद्रित करें।
वैदिक मंत्रों में सबसे श्रेष्ठ — “ॐ नमो नारायणाय” — का स्मरण आत्मा का शुद्धिकरण करता है। -
अभिजीत मुहूर्त (12:18 – 1:03 PM)
नये कार्य, अध्ययन, पूजा-पाठ तथा जीवन-निर्णय लेने का अनुकूल समय। -
राहु-काल / यमगंड / गुलिक
इन समयों में वैदिक मान्यता यह कहती है कि भक्ति कार्य के अतिरिक्त कोई बड़ा निर्णय, वित्तीय कार्य या यात्रा नहीं करना चाहिए।
Scripture अनुसार आज के गुरुवार के दिन विशेष साधना
गुरुवार का दिन बृहस्पति गुरु की कृपा का दिन है। भगवद्-गीता में भगवान कृष्ण ने स्वयं कहा —
“बुद्धयः समान -धर्मज्ञा,” यानी जो धर्म-ज्ञान से जुड़े, वे संसार को समझते हैं। गुरु बृहस्पति के स्मरण से धर्म, शिक्षा, विवेक और आत्म-ज्ञान को बल मिलता है।
आज तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा या विष्णु सहस्रनाम के स्मरण से मन में स्थिरता, श्रद्धा और जीवन की गहनता का बोध होगा।
आज के जीवन-उपाय — शास्त्र सम्मत और बुद्धि-पूर्ण
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एकादशी व्रत का पालन — दिनभर संयम, मन का ध्यान, शास्त्र पठन।
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ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान एवं मंत्र जप — जीवन में स्पष्टता और मानसिक शांति।
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गुरु स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ — जीवन में संतुलन एवं दिमाग की शुद्धि।
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राहु-काल में साधना एवं संकीर्तन — अशुभ समय को भी शुभ बनाता है।
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दान — अनाज, वस्त्र, शिक्षा देने से पुण्य मिलता है।
आध्यात्मिक संदेश
12 फरवरी 2026 का यह दिव्य पंचांग हमें केवल तिथि-नक्षत्र नहीं बताता है, बल्कि जीवन को धार्मिकता, संयम, साधना और शांति के उच्च मार्ग पर ले जाने की ओर प्रेरित करता है। आज के योग हमें कर्म की गहनता, गुरुवचन का पालन और आत्मज्ञान का शोध प्रदान करते हैं।
जैसे गुरु-शास्त्र कहता है:
“योगः कर्मसु कौशलम्।”
अर्थात् कर्म ही साधना बन जाए तो वही जीवन में कौशल और धीरज दोनों देता है।
ॐ शान्ति शान्ति शान्ति।
FAQs (12 फरवरी 2026 पंचांग)
1. 12 फरवरी 2026 को कौन सी तिथि है?
इस दिन कृष्ण पक्ष की दशमी से एकादशी तिथि का संयोग है।
2. 12 फरवरी 2026 का नक्षत्र क्या है?
दिन की शुरुआत ज्येष्ठा नक्षत्र से होकर बाद में मूल नक्षत्र में प्रवेश होता है।
3. 12 फरवरी 2026 को कौन सा व्रत है?
इस दिन एकादशी व्रत का पालन किया जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है।
4. 12 फरवरी 2026 का राहुकाल कब है?
गुरुवार के अनुसार राहुकाल दोपहर के समय आता है। सटीक समय स्थानानुसार भिन्न हो सकता है।
5. 12 फरवरी 2026 का अभिजीत मुहूर्त कब है?
अभिजीत मुहूर्त मध्याह्न के आसपास होता है और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
6. क्या 12 फरवरी 2026 को नया कार्य शुरू करना शुभ है?
अभिजीत मुहूर्त या शुभ चौघड़िया में कार्य प्रारंभ करना उत्तम रहेगा।
7. 12 फरवरी 2026 को चंद्रमा किस राशि में रहेगा?
इस दिन चंद्रमा वृश्चिक से धनु राशि की ओर गति करता है।
8. एकादशी व्रत पारण कब करें?
पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में प्रातःकाल निर्धारित समय पर करना चाहिए।
9. 12 फरवरी 2026 के लिए शुभ रंग क्या है?
गुरुवार के प्रभाव से पीला और हल्का केसरिया रंग शुभ माना जाता है।
10. 12 फरवरी 2026 को कौन सा मंत्र लाभकारी रहेगा?
‘ॐ नमो नारायणाय’ और ‘ॐ गुरवे नमः’ मंत्र का जप शुभ फल प्रदान करता है।
Disclaimer: यह पंचांग वैदिक गणनाओं पर आधारित सामान्य धार्मिक जानकारी है। स्थान और समय के अनुसार मुहूर्त में अंतर संभव है। किसी विशेष अनुष्ठान हेतु योग्य पंडित या ज्योतिषाचार्य से परामर्श करें।