Basant Panchami 2026: सरस्वती पूजा के अगले दिन विसर्जन क्यों जरूरी है? शास्त्रों में छिपा बड़ा रहस्यIt takes 4 minutes... to read this article !

बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के बाद विसर्जन को लेकर लोगों में रहता है बड़ा भ्रम। क्या अगले दिन मूर्ति विसर्जन जरूरी है या कई दिनों तक रखना शुभ होता है? जानिए शास्त्रों, परंपराओं और पंचांग के अनुसार सही जवाब।

बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और ज्ञान-ऊर्जा से भरपूर पर्व है। यह दिन मां सरस्वती के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। विद्या, बुद्धि, वाणी, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए इस दिन घर-घर में पूजा, हवन और मूर्ति स्थापना की जाती है।

लेकिन पूजा के बाद एक प्रश्न लगभग हर भक्त के मन में उठता है —

क्या सरस्वती पूजा के अगले दिन मूर्ति का विसर्जन करना सही है?

क्या मूर्ति को कई दिनों तक घर में रखना अशुभ माना जाता है?

इस लेख में हम शास्त्र, पुराण, पंचांग, लोक परंपरा और आधुनिक धार्मिक मान्यताओं के आधार पर इस सवाल का विस्तार से उत्तर देंगे।

बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व

बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जिसे मां सरस्वती के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। माघ मास की शुक्ल पंचमी को आने वाला यह पर्व ज्ञान, बुद्धि, विद्या, कला और वाणी की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने, पीले फूल अर्पित करने और विद्या आरंभ करने की परंपरा है।

बसंत पंचमी पर सरस्वती मूर्ति स्थापना का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त होती है। यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र की स्थापना से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बच्चों की शिक्षा में प्रगति होती है।

मूर्ति स्थापना के नियम:
  • उत्तर या पूर्व दिशा में स्थापना

  • पीले या सफेद वस्त्र

  • स्वच्छ और शांत स्थान

  • मिट्टी की मूर्ति को प्राथमिकता

क्या सरस्वती पूजा के अगले दिन विसर्जन करना सही है?

यह सवाल लगभग हर भक्त के मन में आता है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार इसका उत्तर है — हां।

धर्मग्रंथों के अनुसार बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा एक दिवसीय अनुष्ठान मानी जाती है। पूजा के अगले दिन यानी षष्ठी तिथि को मूर्ति विसर्जन करना ही सबसे उचित और शास्त्रसम्मत माना गया है।

शास्त्र क्या कहते हैं?

धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु ग्रंथों के अनुसार:

“पंचम्यां पूज्यते देवी

षष्ठ्यां विसर्जनं शुभम्।”

अर्थात पंचमी को पूजा और षष्ठी को विसर्जन करना ही शुभ फल देता है।

अगले दिन विसर्जन क्यों आवश्यक माना गया है?

इसके पीछे तीन मुख्य कारण माने जाते हैं:

1. पूजा का विधिवत समापन

हर पूजा का एक आरंभ और समापन होता है। विसर्जन पूजा के पूर्ण होने का संकेत है।

2. देवी ऊर्जा का संतुलन

मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा के बाद देवी की ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। लंबे समय तक बिना नियमित पूजा मूर्ति रखने से ऊर्जा असंतुलित हो सकती है।

3. गृहस्थ धर्म की मर्यादा

मां सरस्वती ब्रह्मचर्य और संयम की देवी हैं, इसलिए उन्हें सीमित समय तक घर में आमंत्रित करना ही उचित माना गया है।

सरस्वती मूर्ति विसर्जन का शुभ समय

शुभ समय:

  • षष्ठी तिथि

  • सूर्योदय के बाद

  • दोपहर से पहले

अशुभ समय:

  • सूर्यास्त के बाद

  • रात्रि में

  • राहुकाल में

विसर्जन की सही विधि

विसर्जन से पहले मां सरस्वती की अंतिम पूजा करें। धूप, दीप, पुष्प और भोग अर्पित करें। इसके बाद “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करते हुए मूर्ति को सम्मानपूर्वक विसर्जित करें।

यदि नदी या तालाब उपलब्ध न हो, तो घर में बड़े पात्र में जल भरकर विसर्जन किया जा सकता है और बाद में उस जल को पौधों में प्रवाहित करें।

पर्यावरण का रखें ध्यान

आज के समय में पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

  • मिट्टी की मूर्ति का उपयोग करें

  • रासायनिक रंगों से बचें

  • प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों का प्रयोग न करें

अगर अगले दिन विसर्जन न हो पाए तो क्या करें?

यदि किसी कारणवश अगले दिन विसर्जन संभव न हो, तो:

  • बसंत पंचमी के दिन ही शाम से पहले विसर्जन कर सकते हैं

  • मूर्ति को कई दिनों तक बिना पूजा के न रखें

निष्कर्ष

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है समय पर मूर्ति विसर्जन। शास्त्रों के अनुसार पूजा के अगले दिन विसर्जन करने से देवी की कृपा बनी रहती है और घर में विद्या, बुद्धि और शांति का वास होता है।

FAQ ( अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न )

Q. क्या सरस्वती पूजा की मूर्ति कई दिन तक रख सकते हैं?

नहीं, शास्त्रों के अनुसार अगले दिन विसर्जन करना ही उचित है।

Q. क्या फोटो या चित्र का भी विसर्जन जरूरी है?

नहीं, केवल मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।

Q. विसर्जन का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

षष्ठी तिथि में सूर्योदय के बाद।

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