Falgun Maas 2026 Vivah Muhurat: फाल्गुन में विवाह के लिए क्यों माने जाते हैं ये 12 दिन अत्यंत शुभ, फुलेरा दूज अबूझ मुहूर्तIt takes 13 minutes... to read this article !

Falgun Maas 2026 Marriage Dates: फाल्गुन मास 2026 में विवाह के लिए कौन से 12 दिन सबसे शुभ हैं? जानिए फाल्गुन मास के विवाह मुहूर्त, फुलेरा दूज का महत्व, होलाष्टक नियम और शास्त्रों में बताए गए वैवाहिक योग।

फाल्गुन मास और वैवाहिक जीवन का गहरा संबंध

हिंदू धर्म में विवाह केवल सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना गया है। शास्त्रों में विवाह को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का आधार कहा गया है। इसी कारण विवाह के लिए समय, तिथि, नक्षत्र और ग्रह स्थिति का विशेष महत्व होता है।

इन सभी दृष्टियों से फाल्गुन मास को अत्यंत शुभ माना गया है।

वर्ष 2026 में फाल्गुन मास 2 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा और इस अवधि में विवाह के लिए 12 अत्यंत शुभ दिन प्राप्त हो रहे हैं।

फाल्गुन वह मास है जिसमें प्रकृति, मन और ग्रह—तीनों में सामंजस्य दिखाई देता है। यही कारण है कि शास्त्रों ने इसे विवाह, गृहस्थ जीवन और प्रेम संबंधों के लिए श्रेष्ठ बताया है।

फाल्गुन मास 2026: पंचांग अनुसार प्रारंभ और समापन

फाल्गुन मास 2026 की प्रमुख तिथियां
  • प्रारंभ: 2 फरवरी 2026, सोमवार

  • समापन: 3 मार्च 2026, मंगलवार (फाल्गुन पूर्णिमा)

  • महाशिवरात्रि: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी

  • होलिका दहन: 2 मार्च 2026

  • रंग वाली होली: 3 मार्च 2026

फाल्गुन मास का नाम फाल्गुनी नक्षत्र से पड़ा है। यह नक्षत्र विवाह, प्रेम, सौंदर्य और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ा माना जाता है।

शास्त्रों में फाल्गुन मास का विवाह के लिए महत्व

1. शिव–पार्वती तत्व का प्रभाव

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह फाल्गुन मास की ऊर्जा से गहराई से जुड़ा है।

शिव–पार्वती को आदर्श दांपत्य का प्रतीक माना गया है—जहाँ त्याग, प्रेम और संतुलन है।

फाल्गुन में विवाह करने वाले दंपति के जीवन में:

  • दांपत्य स्थिरता

  • आपसी समझ

  • मानसिक सामंजस्य

    स्वाभाविक रूप से विकसित होता है।

2. श्रीकृष्ण और राधा का प्रेम तत्व

ब्रह्मवैवर्त पुराण और भागवत पुराण में फाल्गुन को रास और प्रेम का मास कहा गया है।

श्रीकृष्ण और राधा का दिव्य प्रेम, होली और फाल्गुन से जुड़ा हुआ है।

इसी कारण:

  • प्रेम विवाह

  • दांपत्य में आकर्षण

  • भावनात्मक गहराई

    फाल्गुन मास में विवाह से अधिक सशक्त मानी जाती है।

ज्योतिषीय दृष्टि से फाल्गुन मास क्यों श्रेष्ठ है?

शुक्र ग्रह की अनुकूलता

विवाह का प्रमुख ग्रह शुक्र है।

फाल्गुन मास में शुक्र सामान्यतः:

  • शुभ राशि में

  • मित्र ग्रहों से युक्त

    या

  • नीचत्व से मुक्त

अवस्था में रहता है, जिससे वैवाहिक सुख बढ़ता है।

चंद्रमा की भावनात्मक स्थिरता

चंद्रमा मन का कारक ग्रह है।

फाल्गुन में चंद्रमा की गति और नक्षत्र स्थिति ऐसी होती है कि:

  • मन स्थिर रहता है

  • भावनात्मक निर्णय सही होते हैं

  • वैवाहिक रिश्तों में कोमलता आती है

फाल्गुन मास 2026 में विवाह के 12 अत्यंत शुभ मुहूर्त

अब आते हैं सबसे महत्वपूर्ण भाग पर।

शास्त्र, पंचांग और ग्रह स्थिति के अनुसार फाल्गुन मास 2026 में विवाह के लिए 12 श्रेष्ठ दिन निम्नलिखित हैं:

  1. 5 फरवरी 2026

  2. 6 फरवरी 2026

  3. 8 फरवरी 2026

  4. 10 फरवरी 2026

  5. 12 फरवरी 2026

  6. 14 फरवरी 2026

  7. 19 फरवरी 2026 – फुलेरा दूज (अबूझ मुहूर्त)

  8. 20 फरवरी 2026

  9. 21 फरवरी 2026

  10. 24 फरवरी 2026

  11. 25 फरवरी 2026

  12. 26 फरवरी 2026

इन तिथियों पर:

  • तिथि दोष नहीं

  • नक्षत्र शुभ

  • ग्रह योग अनुकूल

माने गए हैं।

फुलेरा दूज 2026: सबसे श्रेष्ठ अबूझ विवाह मुहूर्त

फुलेरा दूज क्या है?

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज कहा जाता है।

वर्ष 2026 में यह तिथि 19 फरवरी को पड़ रही है।

अबूझ मुहूर्त का शास्त्रीय अर्थ

अबूझ मुहूर्त का अर्थ होता है:

ऐसा समय जिसमें विवाह के लिए अलग से पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती।

धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु ग्रंथों में फुलेरा दूज को:

  • विवाह

  • गृह प्रवेश

  • नामकरण

  • व्यापार आरंभ

के लिए सर्वोत्तम बताया गया है।

फुलेरा दूज पर विवाह का फल

शास्त्रों के अनुसार:

  • दांपत्य जीवन में कलह कम

  • प्रेम और विश्वास अधिक

  • संतान सुख उत्तम

  • पारिवारिक समर्थन मजबूत

रहता है।

होलाष्टक 2026 और विवाह पर उसका प्रभाव

होलाष्टक क्या होता है?

होलिका दहन से आठ दिन पूर्व होलाष्टक प्रारंभ होता है।

2026 में होलाष्टक:

  • प्रारंभ: 24 फरवरी

  • समाप्ति: 3 मार्च

होलाष्टक में विवाह क्यों वर्जित है?

धर्मग्रंथों के अनुसार होलाष्टक में:

  • ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं

  • नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है

इस कारण:

  • विवाह

  • गृह प्रवेश

  • मुंडन

    जैसे संस्कार वर्जित माने गए हैं।

फाल्गुन मास में विवाह से पूर्व किए जाने वाले शास्त्रीय उपाय

संक्षेप में:

  • शिव–पार्वती पूजन

  • कन्यादान संकल्प

  • पीले वस्त्र दान

  • फुलेरा दूज पर पुष्प अर्पण

फाल्गुन मास 2026 के विवाह मुहूर्तों का विस्तृत ज्योतिषीय विश्लेषण

फाल्गुन मास में दिए गए 12 विवाह मुहूर्त केवल तिथियों की सूची नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे ग्रह, नक्षत्र और योगों का गहरा गणित कार्य करता है। शास्त्रों के अनुसार, विवाह तभी सफल माना जाता है जब समय प्रकृति और ग्रहों के साथ सामंजस्य में हो।

5 और 6 फरवरी 2026: स्थायित्व और समझ का योग

इन दोनों तिथियों पर:

  • चंद्रमा शुभ नक्षत्र में

  • शुक्र और गुरु में परस्पर दृष्टि

  • भद्रा और विष्टि का अभाव

यह योग उन दंपतियों के लिए श्रेष्ठ है जिनके लिए:

  • पारिवारिक सहमति महत्वपूर्ण है

  • संयुक्त परिवार में विवाह होना है

  • विवाह के बाद स्थिर जीवन की इच्छा है

इन तिथियों पर विवाह करने से दांपत्य में धैर्य, आपसी समझ और दीर्घकालिक स्थिरता आती है।

8 और 10 फरवरी 2026: प्रेम और आकर्षण बढ़ाने वाले दिन

इन तिथियों पर:

  • चंद्रमा और शुक्र की अनुकूल स्थिति

  • मन और भावनाओं पर सकारात्मक प्रभाव

यह विशेष रूप से:

  • प्रेम विवाह

  • आपसी सहमति से होने वाले रिश्ते

  • ऐसे विवाह जहाँ भावनात्मक जुड़ाव प्रमुख हो

के लिए श्रेष्ठ माने गए हैं।

शास्त्रों के अनुसार, इन दिनों पर विवाह करने से दांपत्य में:

  • आकर्षण बना रहता है

  • मनमुटाव कम होता है

  • भावनात्मक जुड़ाव गहरा होता है

12 और 14 फरवरी 2026: संतान सुख और पारिवारिक विस्तार का योग

इन तिथियों पर:

  • गुरु बलवान स्थिति में

  • पंचम भाव और नवम भाव सक्रिय

यह योग:

  • संतान सुख

  • वंश वृद्धि

  • पारिवारिक समृद्धि

से जुड़ा माना जाता है।

ऐसे दंपति जो विवाह के बाद संतुलित पारिवारिक जीवन चाहते हैं, उनके लिए ये तिथियाँ अत्यंत शुभ हैं।

19 फरवरी 2026: फुलेरा दूज का गूढ़ शास्त्रीय रहस्य

फुलेरा दूज केवल एक तिथि नहीं

फुलेरा दूज को शास्त्रों में कालातीत मुहूर्त कहा गया है।

इसका अर्थ है कि इस दिन:

  • ग्रहों की अशुभता प्रभावहीन हो जाती है

  • दोष स्वतः शमन की ओर जाते हैं

इसी कारण इसे अबूझ कहा गया है।

फुलेरा दूज और श्रीकृष्ण तत्व

ब्रह्मवैवर्त पुराण में उल्लेख मिलता है कि फुलेरा दूज:

  • श्रीकृष्ण की रास ऊर्जा

  • प्रेम और आनंद के विस्तार

    से जुड़ा हुआ दिन है।

इस दिन विवाह करने वाले दंपति के जीवन में:

  • प्रेम बना रहता है

  • संबंध बोझ नहीं बनते

  • जीवन में उत्साह बना रहता है

20 और 21 फरवरी 2026: कर्म और भाग्य का संतुलन

इन तिथियों पर:

  • शनि और गुरु का संतुलन

  • भाग्य और परिश्रम दोनों का योग

यह उन दंपतियों के लिए श्रेष्ठ है:

  • जो करियर और विवाह दोनों को संतुलित रखना चाहते हैं

  • जहाँ दोनों जीवनसाथी कार्यरत हों

इन दिनों पर विवाह करने से:

  • आर्थिक स्थिरता

  • आपसी सहयोग

  • जीवन में अनुशासन

बढ़ता है।

24, 25 और 26 फरवरी 2026: अंतिम शुभ अवसर

होलाष्टक से ठीक पहले आने वाली ये तिथियाँ:

  • अंतिम विवाह अवसर मानी जाती हैं

  • इनमें शीघ्र निर्णय आवश्यक होता है

इन दिनों पर विवाह करने से:

  • रुके हुए विवाह कार्य पूरे होते हैं

  • अचानक आई बाधाएँ दूर होती हैं

हालाँकि इन तिथियों पर विशेष सावधानी और योग्य आचार्य की सलाह आवश्यक मानी गई है।

होलाष्टक: विवाह निषेध का गहरा कारण

केवल परंपरा नहीं, ऊर्जा विज्ञान

होलाष्टक को केवल धार्मिक निषेध समझना अधूरा ज्ञान है।

शास्त्रों के अनुसार इस अवधि में:

  • ग्रह उग्र कंपन में होते हैं

  • अग्नि तत्व प्रबल रहता है

जिससे:

  • नए संबंधों में असंतुलन आ सकता है

  • भावनात्मक स्थिरता प्रभावित होती है

इसीलिए विवाह जैसे संस्कार इस समय वर्जित माने गए हैं।

फाल्गुन मास और प्रेम विवाह बनाम पारंपरिक विवाह

प्रेम विवाह के लिए फाल्गुन क्यों श्रेष्ठ?
  • चंद्र और शुक्र भावनात्मक ग्रह हैं

  • फाल्गुन में दोनों सक्रिय रहते हैं

इस कारण:

  • प्रेम विवाह में पारिवारिक स्वीकृति की संभावना बढ़ती है

  • रिश्तों में कठोरता कम होती है

पारंपरिक विवाह में लाभ
  • पारिवारिक ऊर्जा अनुकूल

  • कुल परंपरा से सामंजस्य

फाल्गुन में पारंपरिक विवाह करने से:

  • ससुराल और मायके दोनों में संतुलन

  • सामाजिक प्रतिष्ठा

बनी रहती है।

कुंडली दोष और फाल्गुन मास का प्रभाव

शास्त्रों में माना गया है कि फाल्गुन मास में:

  • मांगलिक दोष

  • चंद्र दोष

  • अल्प कालिक ग्रह बाधाएँ

कुछ हद तक निष्प्रभावी हो जाती हैं।

विशेषकर:

  • फुलेरा दूज

  • गुरु-शुक्र अनुकूल तिथियाँ

पर विवाह करने से दोषों का प्रभाव कम हो सकता है।

विवाह से पूर्व फाल्गुन मास में किए जाने वाले शास्त्रीय उपाय

1. शिव–पार्वती पूजन

दांपत्य सुख के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

2. कन्याओं को वस्त्र दान

विवाह बाधा दूर करने का शास्त्रीय उपाय।

3. फाल्गुन पूर्णिमा संकल्प

नए जीवन की सकारात्मक शुरुआत के लिए।

फाल्गुन मास का दांपत्य जीवन पर दीर्घकालिक प्रभाव

फाल्गुन में विवाह करने वाले दंपतियों में:

  • जीवन के प्रति उत्साह बना रहता है

  • रिश्ते बोझ नहीं बनते

  • प्रेम और जिम्मेदारी में संतुलन रहता है

यही कारण है कि शास्त्र फाल्गुन को गृहस्थ जीवन का पुष्पकाल कहते हैं।

फाल्गुन मास और विवाह संस्कार: शास्त्रीय दृष्टि से गूढ़ अर्थ

हिंदू धर्म में विवाह को संस्कार कहा गया है, और हर संस्कार का एक काल, दिशा और ऊर्जा होती है।

मनुस्मृति और धर्मसूत्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि विवाह यदि उचित मास में संपन्न हो, तो उसका प्रभाव केवल दंपति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक जाता है।

फाल्गुन मास को इसी कारण:

  • संस्कार सिद्ध मास

  • विवाह फलदायी काल

    कहा गया है।

फाल्गुन मास को “संस्कार सिद्ध मास” क्यों कहा गया?

शास्त्रों में तीन तत्वों को संस्कार सिद्धि के लिए आवश्यक बताया गया है:

  1. काल की शुद्धता

  2. ग्रहों की अनुकूलता

  3. मानसिक और प्राकृतिक संतुलन

फाल्गुन मास इन तीनों कसौटियों पर खरा उतरता है।

1. काल की शुद्धता

फाल्गुन हिंदू पंचांग का अंतिम मास है।

इसका अर्थ है:

  • पुराने कर्मों का समापन

  • नए जीवन चक्र की शुरुआत

विवाह जैसा संस्कार इसी “संक्रमण काल” में होने से:

  • पुराने दोषों का प्रभाव कम

  • नए जीवन की शुरुआत शुभ

मानी जाती है।

2. ग्रहों की अनुकूलता और विवाह योग

फाल्गुन मास में सामान्यतः:

  • शुक्र पाप ग्रहों से मुक्त

  • गुरु विवाह भाव को दृष्टि देता है

  • चंद्रमा फाल्गुनी नक्षत्र में भावनात्मक संतुलन देता है

यही कारण है कि इस मास में विवाह करने वाले दंपति के जीवन में:

  • आर्थिक संघर्ष कम

  • भावनात्मक स्थिरता अधिक

    देखी जाती है।

3. प्रकृति और मन का सामंजस्य

फाल्गुन में:

  • ऋतु परिवर्तन होता है

  • वातावरण उल्लासपूर्ण होता है

  • मानसिक जड़ता टूटती है

शास्त्रों में कहा गया है:

“यत्र प्रकृति हर्षिता, तत्र संस्कारः सिद्धति।”

अर्थात जहाँ प्रकृति प्रसन्न होती है, वहाँ किए गए संस्कार सफल होते हैं।

फाल्गुन मास 2026: विवाह के 12 शुभ दिनों का गूढ़ फल

अब हम उन 12 शुभ तिथियों को फलादेश की दृष्टि से समझते हैं।

1. 5 फरवरी 2026: दीर्घकालिक स्थिरता का योग

इस तिथि पर विवाह करने से:

  • जीवन में उतार-चढ़ाव कम

  • निर्णय क्षमता मजबूत

  • पारिवारिक सहयोग प्राप्त

होता है।

यह तिथि विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए श्रेष्ठ है:

  • जो विवाह के बाद व्यवसाय या नौकरी में स्थिरता चाहते हैं

  • जिनके परिवार संयुक्त हैं

2. 6 फरवरी 2026: आपसी समझ और संवाद का योग

इस दिन विवाह करने से:

  • संवाद की कमी नहीं होती

  • मतभेद सुलझने की क्षमता आती है

शास्त्रों में इसे वाक् सिद्धि योग से जोड़ा गया है।

3. 8 फरवरी 2026: प्रेम और आकर्षण का विस्तार

यह तिथि उन दंपतियों के लिए श्रेष्ठ मानी गई है:

  • जिनका विवाह प्रेम संबंध से हो रहा हो

  • जिनके बीच पहले से भावनात्मक जुड़ाव हो

इस दिन विवाह से:

  • आकर्षण दीर्घकालिक

  • नीरसता कम

होती है।

4. 10 फरवरी 2026: मानसिक संतुलन और सहनशीलता

इस तिथि का प्रभाव:

  • क्रोध नियंत्रण

  • धैर्य

  • परिस्थितियों को स्वीकार करने की क्षमता

पर पड़ता है।

5. 12 फरवरी 2026: संतान और वंश वृद्धि योग

गर्भाधान और संतान सुख से जुड़े योग इस दिन प्रबल होते हैं।

यह तिथि:

  • संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों

  • पारिवारिक विस्तार चाहने वालों

के लिए श्रेष्ठ मानी गई है।

6. 14 फरवरी 2026: दांपत्य में सौम्यता

यह तिथि दांपत्य में:

  • कोमलता

  • सम्मान

  • एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र

बढ़ाती है।

फुलेरा दूज 2026: कालातीत विवाह सिद्धांत

फुलेरा दूज और कर्म सिद्धांत

शास्त्रों के अनुसार, फुलेरा दूज पर:

  • काल दोष निष्क्रिय

  • ग्रह बाधाएँ शिथिल

हो जाती हैं।

इस कारण:

  • कुंडली मिलान की कठोरता कम

  • दोषों का प्रभाव न्यूनतम

रहता है।

फुलेरा दूज पर विवाह क्यों “सदैव शुभ” माना गया?

धर्मसिंधु ग्रंथ में उल्लेख है:

“फाल्गुन शुक्ल द्वितीया सर्वकर्मसु प्रशस्ता।”

अर्थात फाल्गुन शुक्ल द्वितीया सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम है।

होलाष्टक के बाद विवाह क्यों निषिद्ध है?

यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि ऊर्जा चक्र का नियम है।

होलाष्टक के दौरान:

  • सूर्य की उष्णता बढ़ती है

  • अग्नि तत्व प्रबल होता है

  • मानसिक अस्थिरता बढ़ती है

विवाह जैसे संस्कार के लिए:

  • शीतलता

  • स्थिरता

    आवश्यक होती है, जो होलाष्टक में बाधित होती है।

फाल्गुन मास में विवाह से पहले किए जाने वाले गूढ़ शास्त्रीय उपाय

1. शिव–पार्वती संयुक्त व्रत

विवाह से पूर्व 7 दिन:

  • शिव-पार्वती का ध्यान

  • “ॐ नमः शिवाय” जप

दांपत्य में स्थिरता लाता है।

2. कन्यादान संकल्प से पूर्व दान

शास्त्रों में कहा गया है:

  • विवाह से पहले किया गया दान

  • वैवाहिक जीवन में बाधाओं को कम करता है

विशेष रूप से:

  • अन्न दान

  • वस्त्र दान

    फलदायी माने गए हैं।

3. फाल्गुन पूर्णिमा का संकल्प

फाल्गुन पूर्णिमा पर:

  • पुराने दोष त्याग

  • नए जीवन की सकारात्मक कल्पना

करने से दांपत्य जीवन की दिशा शुभ होती है।

फाल्गुन मास में विवाह और गृहस्थ आश्रम की सफलता

गृहस्थ आश्रम को शास्त्रों में:

  • सभी आश्रमों का आधार

    कहा गया है।

फाल्गुन में विवाह करने वाले दंपति:

  • गृहस्थ धर्म को सहजता से निभाते हैं

  • पारिवारिक उत्तरदायित्व बोझ नहीं बनते

आधुनिक जीवन और फाल्गुन विवाह का सामंजस्य

आज के युग में:

  • करियर

  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता

  • मानसिक स्वास्थ्य

महत्वपूर्ण हैं।

फाल्गुन मास में विवाह:

  • इन सभी पहलुओं में संतुलन

  • तनाव कम

  • सामंजस्य अधिक

लाने में सहायक माना गया है।

Falgun Maas 2026 विवाह के लिए क्यों सर्वोत्तम है

फाल्गुन मास 2026:

  • शास्त्र सम्मत

  • ज्योतिषीय रूप से अनुकूल

  • सामाजिक रूप से स्वीकार्य

  • भावनात्मक रूप से संतुलित

मास है।

इन 12 शुभ तिथियों, विशेष रूप से फुलेरा दूज, पर किया गया विवाह:

  • केवल एक समारोह नहीं

  • बल्कि जीवनभर चलने वाले संतुलित दांपत्य का आधार

बनता है।

FAQ  

प्रश्न 1: फाल्गुन मास 2026 कब से कब तक रहेगा?

फाल्गुन मास 2026 की शुरुआत 2 फरवरी 2026, सोमवार से होगी और यह 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा एवं होली के साथ समाप्त होगा। यह हिंदू पंचांग का अंतिम महीना माना जाता है।

प्रश्न 2: क्या फाल्गुन मास विवाह के लिए शुभ माना जाता है?

हां, शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन मास विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान शुक्र और चंद्रमा की स्थिति दांपत्य सुख, प्रेम और सामंजस्य को बढ़ाने वाली होती है।

प्रश्न 3: फाल्गुन मास 2026 में विवाह के लिए कितने शुभ दिन हैं?

फाल्गुन मास 2026 में विवाह के लिए कुल 12 दिन शुभ माने गए हैं। इनमें 5 फरवरी से 26 फरवरी के बीच विशेष विवाह योग बन रहे हैं।

प्रश्न 4: फुलेरा दूज 2026 कब है और इसे अबूझ मुहूर्त क्यों कहते हैं?

फुलेरा दूज 19 फरवरी 2026 को है। इसे अबूझ मुहूर्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन विवाह के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न 5: क्या होलाष्टक में विवाह किया जा सकता है?

नहीं, होलाष्टक के दौरान विवाह और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा।

प्रश्न 6: फाल्गुन मास में विवाह करने से क्या लाभ होते हैं?

फाल्गुन मास में विवाह करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, स्थिरता, पारिवारिक सुख और आपसी समझ बढ़ती है। इसे शास्त्रों में शुभ फल देने वाला काल माना गया है।

प्रश्न 7: क्या फाल्गुन मास में सभी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं?

होलाष्टक को छोड़कर फाल्गुन मास में विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं, बशर्ते पंचांग अनुसार शुभ तिथि हो।

Disclaimer

यह लेख धार्मिक ग्रंथों, परंपराओं और ज्योतिषीय सिद्धांतों पर आधारित है। विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य अथवा विशेषज्ञ से व्यक्तिगत कुंडली अनुसार परामर्श अवश्य लें।

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