Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026: फाल्गुन मास की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 पर जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और चंद्रमा उदय का सही समय। इस दिन भगवान गणेश की आराधना से जीवन के संकट दूर होते हैं और समृद्धि मिलती है।
फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी 2026 – परिचय और महत्व
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसे विशेष रूप से भगवान गणेश के उपासकों द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार संकष्टी चतुर्थी वह दिन है जब संकट और बाधाओं का नाश होता है। इस दिन का व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति आती है।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन विशेष है। चंद्रमा की स्थिति इस दिन विशेष फल प्रदान करती है। इस दिन व्रती सूर्योदय से लेकर चंद्रमा उदय तक कठोर व्रत रखते हैं। पारंपरिक पूजा विधि और मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और बुद्धि का विकास होता है।
क्यों कहते हैं इसे ‘संकष्टी’?
‘संकष्टी’ शब्द का अर्थ है संकट मोचन या संकट निवारक। हिंदू धर्म में माना गया है कि भगवान गणेश, जो विघ्नहर्ता के रूप में जाने जाते हैं, हर प्रकार की बाधाओं को दूर करने की क्षमता रखते हैं। इसलिए इस दिन गणेश जी की पूजा करने से विवाह, शिक्षा, व्यवसाय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
2026 में संकष्टी चतुर्थी का विशेष दिन
इस वर्ष, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी 2026, गुरुवार को पड़ रही है। इसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन का व्रत विशेष रूप से फलदायी माना जाता है क्योंकि यह शुभ दिन, शुभ मुहूर्त और चंद्रमा उदय के सही समय पर आता है।
संकष्टी चतुर्थी और चंद्र
संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है चंद्रमा अर्घ्य और पूजा। धार्मिक मान्यता है कि चंद्रमा का आशीर्वाद प्राप्त करने से मानसिक तनाव, भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इस दिन चंद्रमा उदय के समय व्रत पारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
संकष्टी चतुर्थी का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि और चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के जीवन में बाधाओं और अवरोधों को प्रभावित करती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए इस दिन उनका पूजन और मंत्र जाप करने से शुभ ग्रहों का प्रभाव बढ़ता है और अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है।
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ग्रहों का संतुलन: व्रत और पूजा के माध्यम से ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
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सफलता और करियर: यह दिन नए कार्य शुरू करने या व्यवसायिक निर्णय लेने के लिए अत्यंत शुभ है।
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शुभ स्वास्थ्य: मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
फाल्गुन मास की विशेषता
फाल्गुन मास वसंत ऋतु का प्रतीक है। इस मास में प्रकृति में हरियाली और नवजीवन का संचार होता है। फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में भी नयी ऊर्जा और सकारात्मकता आती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किए गए व्रत और पूजा का फल तुरंत मिलता है।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख
संकष्टी चतुर्थी का वर्णन गणेश पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। पुराणों में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक व्रत करता है, उसके जीवन की सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं।
“संकष्टी चतुर्थी व्रत से बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है। यह व्रत भक्त को सभी प्रकार के संकटों से मुक्त करता है।” – गणेश पुराण
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 – पूजा विधि और मंत्र
संकष्टी चतुर्थी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा, मंत्रों का जाप और चंद्रमा अर्घ्य करना है। इस दिन व्रत रखने वाला व्यक्ति दिनभर संयमित जीवन शैली अपनाता है, जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
संकष्टी चतुर्थी के लिए तैयारी
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साफ-सफाई: व्रत रखने वाले को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। घर और पूजा स्थल को भी साफ करना आवश्यक है।
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पूजा स्थान: पूजा के लिए एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। गणेश जी की मूर्ति या चित्र को स्थायी रूप से इस स्थान पर स्थापित करें।
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सामग्री: पूजा के लिए आपको निम्न सामग्री की आवश्यकता होगी:
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लाल कपड़ा
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गणेश जी की मूर्ति या चित्र
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गंगाजल और जलदान
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अक्षत (अखरोट) और दूर्वा
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सिंदूर और हल्दी
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फूल (विशेष रूप से लाल और पीले)
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दीपक और धूप
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मोदक, लड्डू या किसी अन्य भोग का सामान
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पूजा विधि – Step by Step
1. संकल्प और मंत्र जाप
सुबह स्नान करने के बाद, व्रती गणेश जी के समक्ष व्रत संकल्प ले। संकल्प करते समय ये मंत्र उच्चारित करें:
“ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः”
“ॐ गं गणपतये नमः”
इस मंत्र का जाप 21, 51 या 108 बार किया जा सकता है। ध्यान रखें कि मन पूरी तरह भगवान गणेश पर केंद्रित हो।
2. अभिषेक और पूजन
गणेश जी का अभिषेक गंगाजल, दूध या चंदन के लेपन से करें। उसके बाद मूर्ति या चित्र के सामने फूल, अक्षत और दूर्वा अर्पित करें। दीपक जलाएँ और धूप से गणेश जी का पूजन करें।
3. भोग अर्पण
गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। धार्मिक मान्यता है कि मोदक भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय हैं। भोग अर्पित करते समय श्रद्धा और भक्ति भाव बनाए रखें।
चंद्रमा अर्घ्य और पारण
संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है चंद्रमा अर्घ्य। चंद्रमा उदय होने पर ही व्रत का पारण किया जाता है।
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चंद्रमा उदय: 5 फरवरी 2026, रात 09:10
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व्रत पारण समय: रात 09:10 से 11:00 तक
चंद्रमा को जल अर्पित करते समय ये मंत्र बोलें:
“ॐ चंद्रमणे नमः। आप मेरे जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य लाएं।”
पारण के बाद हल्का भोजन करें और अगले दिन सामान्य जीवन की ओर लौटें।
मंत्रों का महत्व
संकष्टी चतुर्थी व्रत में मंत्र जाप अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक मंत्र का अलग प्रभाव होता है:
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ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः
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यह मंत्र सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।
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ॐ गं गणपतये नमः
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विघ्नहर्ता गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए।
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मंत्र का जाप करते समय मन, वाणी और कर्म का तीनों स्तर पर संयम रखना चाहिए।
पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
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व्रत के दिन मांस, मादक पदार्थ और अनियमित भोजन से परहेज करें।
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पूजा करते समय सकारात्मक विचारों और भक्ति भाव को बनाए रखें।
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चंद्रमा उदय के बाद ही पारण करें।
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व्रत कथा को पढ़ने या सुनने से व्रत के लाभ दोगुने हो जाते हैं।
संकष्टी चतुर्थी भोग और प्रसाद की विधि
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मोदक: चावल के आटे और गुड़ या नारियल की भराई वाला मोदक।
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लड्डू: बेसन या सूजी का लड्डू।
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फल और जल: ताजे फल और शुद्ध जल भी अर्पित करें।
भोग अर्पित करने के बाद इसे पूजा स्थल के पास तीन बार परिक्रमा करके गणेश जी को समर्पित करें।
धार्मिक मान्यता और लाभ
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से:
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जीवन की बाधाएं और संकट दूर होते हैं
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मानसिक शांति और स्थिरता मिलती है
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व्यवसाय और शिक्षा में सफलता मिलती है
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स्वास्थ्य और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है
इस दिन की पूजा सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी लाभकारी मानी जाती है।
संकष्टी चतुर्थी की कथा, पूजा का विज्ञान और ज्योतिषीय लाभ
संकष्टी चतुर्थी केवल एक व्रत या पूजा नहीं है। यह जीवन के संकटों को दूर करने, मानसिक शांति लाने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन का महत्व धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिष शास्त्र दोनों में स्पष्ट रूप से वर्णित है।
संकष्टी चतुर्थी की कथा
संकष्टी चतुर्थी की कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश और चंद्रमा के बीच एक घटना घटी। कथा इस प्रकार है:
एक बार भगवान गणेश अपने भोग का आनंद ले रहे थे। उनके खाने की इच्छा देखकर चंद्रमा ने उनका मज़ाक उड़ाया। गणेश जी ने इस पर क्रोधित होकर चंद्रमा को शाप दे दिया कि जो भी व्यक्ति संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत करेगा और चंद्रमा को अर्घ्य देगा, उसके जीवन के सारे संकट दूर होंगे।
कथा के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम के साथ संकष्टी चतुर्थी व्रत करता है, वह गणेश जी की कृपा से संकटों से मुक्त होता है और जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त करता है।
पूजा का विज्ञान और आध्यात्मिक महत्व
संकष्टी चतुर्थी की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इसका विज्ञान और मानसिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है:
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ध्यान और मानसिक शांति:
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मंत्र जाप और ध्यान से मानसिक तनाव दूर होता है।
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गणेश जी की आराधना से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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सकारात्मक विचारों का निर्माण:
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व्रत के दौरान संयमित आहार और भक्ति भाव से व्यक्ति का मन धैर्यवान और नियंत्रित बनता है।
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नकारात्मक विचार और भय दूर होते हैं।
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ऊर्जा का संतुलन:
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चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति व्रत और पूजा के माध्यम से संतुलित होती है।
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विशेषकर चंद्रमा उदय के समय अर्घ्य देने से मानसिक ऊर्जा और बुद्धि में वृद्धि होती है।
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धार्मिक लाभ:
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जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
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परिवार में सुख-शांति और स्वास्थ्य में सुधार आता है।
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ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और चंद्रमा की स्थिति का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव होता है।
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ग्रहों का प्रभाव:
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व्रत और पूजा से ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
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विशेषकर चंद्रमा, बुध और शुक्र ग्रह की स्थिति लाभकारी बनती है।
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सफलता और करियर:
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संकष्टी चतुर्थी के दिन की पूजा से व्यवसाय, नौकरी और शिक्षा में सफलता मिलती है।
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यह दिन नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी अत्यंत शुभ है।
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स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति:
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चंद्रमा और गणेश मंत्र का जाप करने से मानसिक तनाव, भय और अनिद्रा दूर होते हैं।
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व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है।
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सकारात्मक ऊर्जा का संचार:
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पूजा के दौरान दीपक और धूप से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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घर में समृद्धि और सौभाग्य का वातावरण बनता है।
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संकष्टी चतुर्थी का आध्यात्मिक लाभ
संकष्टी चतुर्थी व्रत और पूजा से व्यक्ति के जीवन में कई आध्यात्मिक लाभ होते हैं:
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भक्ति भाव का विकास:
व्रत और मंत्र जाप से भक्ति और श्रद्धा का स्तर बढ़ता है। -
संकटमोचन:
जीवन की बाधाओं और मानसिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है। -
सकारात्मक मनोबल:
व्रत और पूजा से व्यक्ति में धैर्य, साहस और आत्मविश्वास आता है। -
कर्मों की शुद्धि:
संयमित जीवन और धार्मिक कर्म से व्यक्ति के पूर्व कर्मों का पुण्य मिलता है।
संकष्टी चतुर्थी और चंद्रमा का महत्व
चंद्रमा को हिंदू धर्म में मानसिक शांति और सुख-समृद्धि का दाता माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा उदय के समय व्रत पारण करने से:
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मानसिक तनाव कम होता है
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नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
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सफलता और सौभाग्य प्राप्त होता है
धार्मिक मान्यता है कि चंद्रमा उदय के समय अर्घ्य देने से गणेश जी की कृपा स्वतः मिलती है।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख
संकष्टी चतुर्थी का महत्व गणेश पुराण, स्कंद पुराण और वाराही पुराण में विस्तृत रूप से वर्णित है। इन ग्रंथों में बताया गया है कि जो व्यक्ति व्रत करता है और चंद्रमा को अर्घ्य देता है, उसके सभी संकट और बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।
“संकष्टी चतुर्थी का व्रत बुद्धि और समृद्धि देता है। जो व्यक्ति विधिपूर्वक यह व्रत करता है, उसके जीवन में सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।” – गणेश पुराण
फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी 2026 – शुभ मुहूर्त, चंद्रमा उदय और व्रत का टाइम टेबल
संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है सही समय (मुहूर्त) पर पूजा और पारण करना। ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक कर्म का समय और ग्रहों की स्थिति बहुत महत्व रखती है। यदि व्रत और पूजा सही समय पर किया जाए, तो इसके फल अत्यंत लाभकारी होते हैं।
1. फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी का तिथिकाल
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चतुर्थी तिथि प्रारम्भ: 4 फरवरी 2026, रात 01:28
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चतुर्थी तिथि समाप्त: 5 फरवरी 2026, रात 01:40
कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी तिथि का प्रारंभ और अंत शास्त्रों के अनुसार ही पूजा और पारण के समय को निर्धारित करता है।
2. चंद्रमा उदय का समय
संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है चंद्रमा अर्घ्य।
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चंद्रमा उदय: 5 फरवरी 2026, रात 09:10
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व्रत पारण समय: रात 09:10 से 11:00 तक
धार्मिक मान्यता है कि चंद्रमा उदय के समय अर्घ्य देने से सभी संकट दूर होते हैं और गणेश जी की कृपा स्वतः प्राप्त होती है।
3. शुभ मुहूर्त
संकष्टी चतुर्थी के दिन कुछ विशेष मुहूर्तों में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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उत्तम शुभ मुहूर्त: सुबह 06:31 – 07:54
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इस समय गणेश पूजन और मंत्र जाप करने से सफलता और समृद्धि जल्दी प्राप्त होती है।
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:41 – 12:26
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इस समय शुभ कार्य करने से ग्रहों का अनुकूल प्रभाव प्राप्त होता है।
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व्रत पारण का शुभ समय: रात 09:10 – 11:00
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चंद्रमा उदय के समय पारण करने से व्रत पूर्ण फलदायी होता है।
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4. संकष्टी चतुर्थी का पूरे दिन का टाइम टेबल
संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को दिनभर संयमित और नियमित जीवन शैली अपनानी चाहिए। यहाँ एक आदर्श टाइम टेबल दिया गया है:
| समय | कार्य |
|---|---|
| 05:30 – 06:30 | जल्दी उठें, स्नान करें और घर की सफाई करें |
| 06:31 – 07:54 | शुभ मुहूर्त में गणेश जी की स्थापना और पूजा करें |
| 08:00 – 09:30 | मंत्र जाप और व्रत कथा सुनें/पढ़ें |
| 10:00 – 11:30 | हल्का उपवास, फल या जल ग्रहण |
| 11:41 – 12:26 | अभिजीत मुहूर्त में पूजा/ध्यान और ग्रहों के अनुकूल उपाय करें |
| 12:30 – 17:00 | ध्यान, अध्यात्मिक पढ़ाई और परिवार के साथ समय बिताएं |
| 17:00 – 19:00 | पूजा स्थल को तैयार करें, दीपक, धूप और भोग रखें |
| 19:00 – 21:00 | संकष्टी व्रत की अंतिम तैयारी, चंद्रमा उदय का इंतजार |
| 21:10 – 23:00 | चंद्रमा उदय के समय अर्घ्य और व्रत पारण |
5. मुहूर्त और ग्रहों का वैज्ञानिक पहलू
ज्योतिष और पुराणों के अनुसार, शुभ मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति का महत्व निम्नलिखित है:
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सूर्योदय और उत्तम मुहूर्त:
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सुबह के समय ग्रहों की स्थिति लाभकारी होती है।
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इस समय पूजा और मंत्र जाप से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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अभिजीत मुहूर्त:
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दोपहर का समय विशेष रूप से कार्य, अध्ययन और ध्यान के लिए शुभ है।
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ग्रहों का यह योग कार्यों में सफलता और मानसिक शांति प्रदान करता है।
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चंद्रमा उदय:
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चंद्रमा का उदय मानसिक संतुलन, सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक है।
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चंद्रमा उदय के समय पारण करने से व्रत पूर्ण फलदायी होता है।
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6. व्रत का पालन करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
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सकारात्मक सोच: व्रत के दौरान नकारात्मक विचारों और तर्क-वितर्क से दूर रहें।
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संयमित आहार: व्रत के दौरान केवल फल, जल और हल्का भोजन ग्रहण करें।
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मन की शांति: पूजा और मंत्र जाप करते समय मन पूर्ण रूप से भगवान गणेश पर केंद्रित रखें।
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पारिवारिक सहभागिता: परिवार के सभी सदस्य यदि साथ व्रत और पूजा में भाग लें तो इसका आध्यात्मिक लाभ बढ़ता है।
7. संकष्टी चतुर्थी और ग्रहों का योग
ज्योतिषीय दृष्टि से, संकष्टी चतुर्थी में चंद्रमा और मंगल ग्रह का संयोजन विशेष रूप से लाभकारी होता है।
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चंद्रमा: मानसिक शांति, सुख और समृद्धि प्रदान करता है।
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मंगल: साहस और ऊर्जा का प्रतीक है।
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ग्रहों का संतुलन: इस दिन व्रत और पूजा करने से ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव कम होता है और जीवन में संतुलन आता है।
संकष्टी चतुर्थी 2026 – लाभ, उपाय और जीवन में समृद्धि
संकष्टी चतुर्थी केवल धार्मिक व्रत नहीं है। यह दिन जीवन में बाधाओं को दूर करने, मानसिक शांति लाने, स्वास्थ्य सुधारने और समृद्धि बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सेक्शन में हम विस्तार से जानेंगे कि संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से जीवन में किस प्रकार के लाभ मिलते हैं, कौन-कौन से उपाय करने चाहिए और भक्तों की सफल कहानियाँ।
1. संकष्टी चतुर्थी व्रत के प्रमुख लाभ
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संकटमोचन:
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नाम से ही स्पष्ट है कि ‘संकष्टी’ का अर्थ है संकटों का नाश।
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इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्तिगत और पारिवारिक संकटों से मुक्ति मिलती है।
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समृद्धि और धन वृद्धि:
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गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है। व्रत करने से व्यापार, नौकरी और वित्तीय मामलों में सुधार आता है।
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बुद्धि और निर्णय क्षमता:
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गणेश जी बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं।
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मंत्र जाप और पूजा से सही निर्णय लेने की शक्ति और मानसिक स्पष्टता मिलती है।
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स्वास्थ्य लाभ:
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संयमित आहार और व्रत के दौरान मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सुधरता है।
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चंद्रमा अर्घ्य और शुद्ध जल ग्रहण करने से मानसिक तनाव और भय कम होता है।
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परिवार और सामाजिक जीवन में सुख-शांति:
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संकष्टी चतुर्थी का व्रत केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं देता।
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परिवार और सामाजिक जीवन में संपर्क, सामंजस्य और सुख-शांति बढ़ती है।
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2. संकष्टी चतुर्थी व्रत के उपाय
संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने के साथ-साथ कुछ उपाय अपनाने से इसके लाभ दोगुने हो जाते हैं:
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व्रत कथा का अध्ययन:
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संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत लाभकारी है।
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कथा में भगवान गणेश और चंद्रमा की महिमा का वर्णन होता है।
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मंत्र जाप:
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मंत्रों का उच्चारण केवल मुख से नहीं, बल्कि मन और हृदय से होना चाहिए।
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उदाहरण:
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ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः
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ॐ गं गणपतये नमः
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भक्तिपूर्ण भोग अर्पण:
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मोदक, लड्डू और फल अर्पित करें।
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भोग के साथ श्रद्धा और भक्ति भाव बनाए रखें।
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चंद्रमा अर्घ्य:
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रात में चंद्रमा उदय होने पर जल अर्पित करें।
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इस समय व्रत पारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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संयमित जीवन:
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इस दिन अनियमित भोजन, मांस और मादक पदार्थ से परहेज करें।
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पूरे दिन सकारात्मक सोच और ध्यान केंद्रित करें।
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3. जीवन में समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए टिप्स
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व्यवसायिक सफलता:
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संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश पूजन करने के बाद नए कार्य की शुरुआत करें।
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व्यापार या नौकरी में सफलता के लिए सुबह के शुभ मुहूर्त में योजना बनाना लाभकारी है।
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शिक्षा और अध्ययन:
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विद्यार्थी इस दिन गणेश मंत्र का जाप करें और पूजा के समय पढ़ाई या ज्ञान अर्जन के लिए ध्यान लगाएं।
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स्वास्थ्य:
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मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए दिनभर ध्यान और साधना करें।
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चंद्रमा अर्घ्य के समय हल्का भोजन ग्रहण करना स्वास्थ्य के लिए शुभ है।
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संपर्क और सामाजिक जीवन:
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परिवार और मित्रों के साथ पूजा में भाग लेने से सामाजिक और पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं।
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4. FAQ (Frequently Asked Questions)
Q1: संकष्टी चतुर्थी व्रत किस समय से शुरू करना चाहिए?
A: व्रत सूर्योदय से प्रारंभ करें और चंद्रमा उदय के समय पारण करें।
Q2: क्या व्रत में फलाहार किया जा सकता है?
A: हाँ, फल, जल और हल्का भोजन लिया जा सकता है। मांस और मादक पदार्थ वर्जित हैं।
Q3: कौन-कौन से मंत्र जाप करना चाहिए?
A: मुख्य मंत्र हैं:
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ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः
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ॐ गं गणपतये नमः
Q4: क्या संकष्टी चतुर्थी का व्रत एक व्यक्ति कर सकता है या पूरे परिवार के लिए करना चाहिए?
A: यह व्यक्तिगत और पारिवारिक दोनों तरह से किया जा सकता है। परिवार के साथ करने से लाभ अधिक मिलता है।
Q5: चंद्रमा उदय का समय क्यों महत्वपूर्ण है?
A: चंद्रमा उदय का समय मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और व्रत पारण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
संकष्टी चतुर्थी के गणेश मंत्र – उच्चारण, जाप विधि और लाभ
संकष्टी चतुर्थी व्रत केवल पूजा और अर्घ्य तक सीमित नहीं है। इसका सबसे महत्वपूर्ण भाग है भगवान गणेश के मंत्रों का जाप। मंत्रों का सही उच्चारण और भक्ति भाव से जाप करने पर व्यक्ति के जीवन में संकट दूर होते हैं, मानसिक शांति मिलती है और समृद्धि आती है।
1. संकष्टी चतुर्थी के प्रमुख गणेश मंत्र
संकष्टी चतुर्थी पर कई प्रकार के गणेश मंत्रों का जाप किया जाता है। प्रत्येक मंत्र का अपना महत्व और फल है।
मंत्र 1: ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः
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अर्थ: यह मंत्र गणेश जी से सौभाग्य, समृद्धि और बुद्धि प्राप्त करने के लिए उच्चारित किया जाता है।
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लाभ:
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जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
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धन, बुद्धि और करियर में सफलता
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घर और परिवार में सुख-शांति
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मंत्र 2: ॐ गं गणपतये नमः
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अर्थ: यह मंत्र विघ्नों और बाधाओं के निवारण के लिए सबसे प्रभावशाली है।
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लाभ:
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मानसिक शांति
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सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति
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अध्ययन और व्यवसाय में सफलता
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मंत्र 3: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं गं गणपतये वासवदत्ताय नमः
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अर्थ: यह मंत्र शक्ति और साहस प्रदान करता है।
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लाभ:
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साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है
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व्यापारिक और व्यक्तिगत निर्णय में सफलता
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नकारात्मक ऊर्जा का नाश
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मंत्र 4: ॐ गम गणपतये नमः
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अर्थ: यह गणेश मंत्र सरल और प्रभावशाली है।
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लाभ:
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मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार
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घर में सौभाग्य और समृद्धि का आगमन
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धार्मिक और अध्यात्मिक उन्नति
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2. मंत्र जाप की विधि
मंत्र जाप करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है।
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समय का चयन:
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सबसे शुभ समय सुबह के शुभ मुहूर्त (06:31 – 07:54) या अभिजीत मुहूर्त (11:41 – 12:26) है।
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चंद्रमा उदय के समय मंत्र जाप करने से विशेष लाभ मिलता है।
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जाप की संख्या:
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मंत्र का जाप 21, 51 या 108 बार किया जा सकता है।
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जप के दौरान माला का प्रयोग करना लाभकारी होता है।
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ध्यान और भक्ति:
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मंत्र जाप करते समय मन पूरी तरह गणेश जी पर केंद्रित होना चाहिए।
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उच्चारण, मन और कर्म – इन तीनों का संयम होना आवश्यक है।
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स्थान और साधन:
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पूजा स्थल को साफ रखें।
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लाल कपड़ा, दीपक और धूप का प्रयोग करें।
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गंगाजल से अभिषेक करना लाभकारी है।
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3. मंत्र जाप के आध्यात्मिक और धार्मिक लाभ
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संकट मोचन:
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नियमित मंत्र जाप करने से जीवन की बाधाएँ और संकट दूर होते हैं।
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सकारात्मक मानसिक ऊर्जा:
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मंत्र जाप से मानसिक शांति, ध्यान और स्थिरता आती है।
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नकारात्मक विचारों और तनाव से मुक्ति मिलती है।
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सौभाग्य और समृद्धि:
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मंत्र जाप से घर में सुख-शांति और धन-संपत्ति बढ़ती है।
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व्यापार, नौकरी और शिक्षा में सफलता प्राप्त होती है।
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आध्यात्मिक उन्नति:
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मंत्र जाप और पूजा से व्यक्ति का धार्मिक और आध्यात्मिक विकास होता है।
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जीवन में संतुलन और विवेक की वृद्धि होती है।
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4. विशेष टिप्स मंत्र जाप के लिए
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सकारात्मक सोच: मंत्र जाप के दौरान नकारात्मक सोच से दूर रहें।
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नियमितता: संकष्टी चतुर्थी पर नियमित रूप से जाप करने से अधिक लाभ मिलता है।
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परिवार के साथ जाप: यदि परिवार के सदस्य साथ में जाप करें तो लाभ बढ़ जाता है।
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साफ-सुथरा वातावरण: पूजा स्थल साफ और शुद्ध हो, यह मंत्र के प्रभाव को बढ़ाता है।
5. गणेश मंत्रों का विज्ञान
ज्योतिष और आध्यात्मिक विज्ञान के अनुसार:
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मंत्र उच्चारण से ऊर्जा का संचार होता है।
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सकारात्मक तरंगें व्यक्ति के चारों ओर फैलती हैं।
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मंत्रों की ध्वनि कंपन शरीर और मस्तिष्क में सकारात्मक प्रभाव डालती है।
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नियमित जाप से स्नायु तनाव और नकारात्मक मानसिक प्रभाव कम होते हैं।
संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा – धार्मिक महत्व और लाभ
संकष्टी चतुर्थी का व्रत सिर्फ उपवास और पूजा तक सीमित नहीं है। इसके साथ जुड़ी व्रत कथा का सुनना या पढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कथा सुनने से व्रत का फल दोगुना हो जाता है और जीवन में संकट, बाधा और नकारात्मकता दूर होती है।
1. संकष्टी चतुर्थी की कथा – विस्तार से
संकष्टी चतुर्थी की कथा गणेश पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित है। कथा इस प्रकार है:
एक समय की बात है, भगवान गणेश अपने भोग का आनंद ले रहे थे। उनके भोग को देखकर चंद्रमा ने उनका मज़ाक उड़ाया। चंद्रमा ने गणेश जी को अपमानित करने का प्रयास किया। गणेश जी क्रोधित हुए और उन्होंने चंद्रमा को शाप दिया कि जो व्यक्ति संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत करेगा और चंद्रमा को अर्घ्य देगा, उसके जीवन से सभी संकट दूर होंगे और सौभाग्य प्राप्त होगा।
इसके बाद, इस दिन व्रत करने वाले भक्तों को गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त हुई। कथा में बताया गया है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत करने वाले भक्तों के घर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य आता है।
2. कथा का धार्मिक महत्व
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संकट निवारण:
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कथा स्पष्ट करती है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत जीवन के सभी संकटों और बाधाओं को नष्ट करता है।
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गणेश जी की कृपा:
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जो व्यक्ति व्रत और पूजा के साथ कथा सुनता या पढ़ता है, उसे गणेश जी की विशेष कृपा मिलती है।
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धार्मिक अनुशासन:
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कथा सुनने और पढ़ने से व्रत के प्रति श्रद्धा और अनुशासन बढ़ता है।
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यह व्यक्ति को आध्यात्मिक दृष्टि से मजबूत बनाता है।
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सकारात्मक मानसिकता:
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कथा में वर्णित घटनाओं और उदाहरणों से भक्ति, धैर्य और साहस का विकास होता है।
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मानसिक तनाव और भय कम होते हैं।
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3. व्रत के दौरान कथा सुनने या पढ़ने के लाभ
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धार्मिक पुण्य:
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कथा सुनने से व्यक्ति के पुण्य कर्मों में वृद्धि होती है।
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व्रत का पूर्ण फल:
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केवल उपवास या पूजा करने से नहीं, बल्कि कथा सुनने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
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सकारात्मक ऊर्जा:
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कथा सुनने से घर और पूजा स्थल में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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भक्ति भाव का विकास:
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कथा के माध्यम से भक्त का भक्ति भाव और श्रद्धा मजबूत होती है।
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4. संकष्टी चतुर्थी कथा – step by step पाठ
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सुबह स्नान और पूजा स्थल की सफाई के बाद, गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
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लाल कपड़ा बिछाएं और दीपक, धूप और भोग रखें।
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कथा को धीरे-धीरे और ध्यानपूर्वक पढ़ें या सुनें।
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कथा पढ़ते समय मंत्र जाप और भक्ति भाव बनाए रखें।
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रात में चंद्रमा उदय होने पर अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें।
5. कथा और जीवन में समृद्धि
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ने या सुनने से:
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जीवन की बाधाएं कम होती हैं।
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मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार आता है।
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व्यवसाय, शिक्षा और पारिवारिक जीवन में सफलता मिलती है।
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घर में सौभाग्य और समृद्धि आती है।
6. कथा सुनने के समय ध्यान रखने योग्य बातें
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कथा सुनते समय मन पूरी तरह भक्ति और श्रद्धा में लगा रहे।
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किसी भी प्रकार की विचलित या नकारात्मक सोच से बचें।
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कथा को परिवार के साथ सुनना अधिक लाभकारी माना जाता है।
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कथा के अंत में गणेश मंत्रों का जाप करें।
संकष्टी चतुर्थी की कथा सुनना या पढ़ना, पूजा और मंत्र जाप का अनिवार्य हिस्सा है। कथा से व्यक्ति को धार्मिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। यह व्रत संकटमोचन, समृद्धि और मानसिक शांति का सबसे प्रभावशाली साधन है।
संकष्टी चतुर्थी 2026 – सम्पूर्ण Step-by-Step व्रत गाइड
संकष्टी चतुर्थी का व्रत विधिपूर्वक और सही समय पर करने से जीवन में सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। यहाँ हम इसे एक step-by-step guide के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
1. व्रत से पहले की तैयारी
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साफ-सफाई और पूजा स्थल तैयार करें:
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घर और पूजा स्थल को साफ करें।
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पूजा के लिए चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
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गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
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पूजा सामग्री तैयार करें:
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लाल कपड़ा, दीपक, धूप, गंगाजल, अक्षत, दूर्वा, सिंदूर, हल्दी, फूल और भोग (मोदक, लड्डू, फल)।
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मन और भक्ति की तैयारी:
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व्रत के दिन सकारात्मक विचार रखें।
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मंत्र जाप और कथा सुनने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें।
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2. संकष्टी चतुर्थी व्रत का आरंभ
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सुबह उठकर स्नान करें।
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व्रत संकल्प लें:
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मन, वाणी और कर्म से संकल्प लें कि आप पूरे दिन व्रत करेंगे।
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उच्चारित करें:
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः
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गणेश मंत्र जाप करें:
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ॐ गं गणपतये नमः
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मंत्र का जाप 21, 51 या 108 बार करें।
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3. पूजा विधि Step-by-Step
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स्थापना:
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चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
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अभिषेक:
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गंगाजल, दूध या चंदन से मूर्ति का अभिषेक करें।
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पूजा सामग्री अर्पित करें:
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अक्षत, दूर्वा, सिंदूर, हल्दी और फूल अर्पित करें।
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दीपक और धूप जलाएं।
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भोग अर्पित करें:
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मोदक या लड्डू अर्पित करें।
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भक्तिपूर्ण मन से भोग अर्पित करें।
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मंत्र जाप और कथा सुनना:
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संकष्टी चतुर्थी कथा पढ़ें या सुनें।
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मंत्र जाप के साथ कथा का पाठ लाभकारी होता है।
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4. दिनभर व्रत पालन
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संयमित भोजन:
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केवल फल, जल और हल्का भोजन ग्रहण करें।
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मांस, मादक पदार्थ और अनियमित भोजन से परहेज करें।
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ध्यान और साधना:
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दिन में समय निकालकर ध्यान करें।
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सकारात्मक विचार और भक्ति भाव बनाए रखें।
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शुभ मुहूर्त में पूजा:
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सुबह का उत्तम मुहूर्त: 06:31 – 07:54
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अभिजीत मुहूर्त: 11:41 – 12:26
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5. चंद्रमा अर्घ्य और व्रत पारण
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चंद्रमा उदय: 5 फरवरी 2026, रात 09:10
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व्रत पारण: रात 09:10 – 11:00
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अर्घ्य देने की विधि:
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जल में हल्का फूल या दूर्वा डालकर चंद्रमा को अर्पित करें।
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मंत्र उच्चारित करें:
ॐ चंद्रमणे नमः
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पारण:
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अर्घ्य के बाद हल्का भोजन ग्रहण करें।
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व्रत समाप्त होने पर गणेश मंत्र का जाप करें।
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6. मंत्र जाप के दौरान ध्यान देने योग्य बातें
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मंत्र उच्चारण शुद्ध और स्पष्ट होना चाहिए।
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मंत्र जाप माला का उपयोग कर सकते हैं।
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जाप करते समय मन पूरी तरह भगवान गणेश पर केंद्रित होना चाहिए।
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मंत्र का उच्चारण, मन और कर्म – तीनों का संयम रखें।
7. संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ
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जीवन की बाधाओं और संकटों से मुक्ति।
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मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा।
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परिवार में सुख-शांति और सौभाग्य।
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शिक्षा, व्यवसाय और स्वास्थ्य में सुधार।
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आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति भाव में वृद्धि।
8. FAQ – संकष्टी चतुर्थी व्रत
Q1: व्रत किस समय से शुरू करें?
A: सूर्योदय से प्रारंभ करें और चंद्रमा उदय के समय पारण करें।
Q2: व्रत में फलाहार किया जा सकता है?
A: हाँ, फल, जल और हल्का भोजन किया जा सकता है।
Q3: मंत्र कितनी बार जाप करें?
A: 21, 51 या 108 बार।
Q4: परिवार के साथ व्रत करना चाहिए?
A: हाँ, परिवार के साथ व्रत और पूजा करने से लाभ अधिक होता है।
Q5: चंद्रमा उदय का समय क्यों महत्वपूर्ण है?
A: चंद्रमा उदय के समय अर्घ्य देने से मानसिक शांति, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
संकष्टी चतुर्थी 2026 का व्रत और पूजा जीवन में सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति लाने वाला है। इस step-by-step guide का पालन करके भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत कर सकता है और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त कर सकता है।