February 2026 Teej Tyohar List/Calendar: जानें कब है महाशिवरात्रि, एकादशी और पूर्णिमा सभी व्रत-त्योहार की पूरी सूची व सटीक तिथियांIt takes 7 minutes... to read this article !

February 2026 Hindu Calendar में जानिए महाशिवरात्रि, एकादशी, प्रदोष व्रत, माघ पूर्णिमा और फरवरी के सभी व्रत-त्योहार की शास्त्रसम्मत तिथियां।

February Calendar 2026: महाशिवरात्रि, एकादशी और फरवरी के सभी व्रत-त्योहार

सनातन धर्म में समय केवल तिथि नहीं बल्कि साधना का माध्यम माना गया है। शास्त्रों में वर्णित प्रत्येक तिथि किसी न किसी देव शक्ति से जुड़ी होती है। फरवरी 2026 का महीना विशेष रूप से शिव और विष्णु उपासना के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस महीने माघ पूर्णिमा, महाशिवरात्रि, विजया एकादशी, आमलकी एकादशी और शनि प्रदोष जैसे महाव्रत पड़ रहे हैं।

माघ पूर्णिमा व्रत – 01 फरवरी 2026

पद्म पुराण और विष्णु पुराण में माघ मास को स्नान-दान के लिए सर्वोत्तम बताया गया है। 01 फरवरी 2026 को माघ पूर्णिमा है। इस दिन गंगा स्नान, तिल-दान और भगवान विष्णु की पूजा विशेष फल प्रदान करती है। चंद्र उदय सायं 05:23 बजे होगा।

महाशिवरात्रि 2026 – 15 फरवरी

शिव पुराण के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि महाशिवरात्रि कहलाती है। 15 फरवरी 2026 को यह महाव्रत पड़ेगा।

निशीथ काल: रात्रि 11:52 से 16 फरवरी 12:42 पूर्वाह्न तक।

इस काल में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप विशेष सिद्धिदायक माने गए हैं।

प्रदोष व्रत – 14 फरवरी 2026

त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है, जिसका वर्णन स्कंद पुराण में मिलता है। 14 फरवरी 2026, शनिवार को शनि प्रदोष व्रत रहेगा, जो कर्म दोष और शनि पीड़ा शांति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

एकादशी व्रत – फरवरी 2026

गरुड़ पुराण के अनुसार एकादशी व्रत से विष्णु कृपा प्राप्त होती है।

  • 13 फरवरी 2026: विजया एकादशी

  • 27 फरवरी 2026: आमलकी एकादशी

    दोनों ही व्रत मोक्ष और रोग नाश के लिए श्रेष्ठ माने गए हैं।

February 2026 Festival & Vrat Details (पंचांग अनुसार)

सनातन धर्म में पंचांग केवल तिथियों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, कर्म और मोक्ष से जोड़ने वाला मार्गदर्शक माना गया है। फरवरी 2026 का महीना विशेष रूप से शिव उपासना, विष्णु भक्ति, दान-पुण्य, संयम और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस महीने माघ पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि और आमलकी एकादशी तक अनेक महाव्रत और पर्व पड़ रहे हैं, जिनका उल्लेख विभिन्न पुराणों और धर्मग्रंथों में मिलता है।

माघ पूर्णिमा व्रत – 01 फरवरी 2026

माघ मास को शास्त्रों में “देव मास” की संज्ञा दी गई है। पद्म पुराण, विष्णु पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन किया गया स्नान, दान और जप अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

इस दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है। जो व्यक्ति नदी स्नान न कर सके, वह घर पर ही गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर सकता है।

माघ पूर्णिमा भगवान विष्णु और चंद्र देव को समर्पित होती है। चंद्रमा का पूर्ण स्वरूप मन और भावनाओं की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, घी और कंबल दान विशेष फलदायी होता है। इसी दिन माघ स्नान का समापन भी होता है।

शबेबरात – 04 फरवरी 2026

शबेबरात इस्लामिक परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे इबादत, तौबा और आत्मशुद्धि की रात माना जाता है। भारत जैसे सांस्कृतिक विविधता वाले देश में यह पर्व धार्मिक सहिष्णुता और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। इस रात को लोग अल्लाह से क्षमा और आने वाले वर्ष के लिए रहमत की दुआ करते हैं।

संकष्टी चतुर्थी – 05 फरवरी 2026

संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित व्रत है। गणेश पुराण के अनुसार इस दिन उपवास रखने और चंद्र दर्शन के बाद व्रत पारण करने से जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं।

यह व्रत विशेष रूप से ऋण, रोग, मानसिक तनाव और कार्यों में आ रही रुकावटों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। चंद्र दर्शन के समय गणपति को दूर्वा, लड्डू और अक्षत अर्पित किए जाते हैं।

यशोदा जयंती – 07 फरवरी 2026

यशोदा जयंती भगवान श्रीकृष्ण की माता यशोदा के वात्सल्य भाव का प्रतीक पर्व है। यह पर्व मातृत्व, प्रेम और त्याग का संदेश देता है। इस दिन माता यशोदा और बाल गोपाल की पूजा करने से संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि की कामना पूर्ण होती है।

भानु सप्तमी व शबरी जयंती – 08 फरवरी 2026

भानु सप्तमी सूर्य देव को समर्पित होती है। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन सूर्य की पूजा करने से आरोग्य, तेज और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

इसी दिन शबरी जयंती भी मनाई जाती है। शबरी का जीवन निष्काम भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण है। भगवान राम द्वारा शबरी के जूठे बेर स्वीकार करना भक्ति की सर्वोच्चता को दर्शाता है।

कालाष्टमी व जानकी जयंती – 09 फरवरी 2026

कालाष्टमी भगवान कालभैरव की उपासना का दिन है। कालभैरव को समय और न्याय का देवता माना जाता है। इस दिन पूजा करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और आकस्मिक संकटों से रक्षा होती है।

इसी तिथि को जानकी जयंती भी मनाई जाती है, जो माता सीता के त्याग, धैर्य और पतिव्रता धर्म का स्मरण कराती है।

रामदास नवमी – 11 फरवरी 2026

रामदास नवमी संत समर्थ रामदास की जयंती के रूप में मनाई जाती है। यह दिन भक्ति, राष्ट्रधर्म और आत्मबल की प्रेरणा देता है।

स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती – 12 फरवरी 2026

आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती वैदिक धर्म, सत्य और समाज सुधार के विचारों को स्मरण करने का दिन है।

विजया एकादशी – 13 फरवरी 2026

गरुड़ पुराण के अनुसार विजया एकादशी रखने से व्यक्ति को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व इसी एकादशी का व्रत किया था।

यह व्रत शत्रु बाधा, भय और रोग नाश के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

शनि प्रदोष व्रत – 14 फरवरी 2026

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। शनिवार को पड़ने के कारण यह शनि प्रदोष व्रत कहलाता है।

स्कंद पुराण के अनुसार इस दिन शिव पूजा से शनि दोष, कर्म बाधा और दीर्घकालिक समस्याओं से राहत मिलती है।

महाशिवरात्रि – 15 फरवरी 2026

महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के मिलन का पर्व माना गया है। शिव पुराण में वर्णित है कि इस रात्रि में की गई उपासना जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करती है।

रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पण और महामृत्युंजय जाप से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

फाल्गुन अमावस्या व सूर्य ग्रहण – 17 फरवरी 2026

फाल्गुन अमावस्या पितृ तर्पण और श्राद्ध के लिए महत्वपूर्ण होती है। सूर्य ग्रहण के कारण यह तिथि और भी विशेष हो जाती है। ग्रहण काल में जप, ध्यान और दान श्रेष्ठ फल प्रदान करते हैं।

फुलैरा दूज – 19 फरवरी 2026

फुलैरा दूज राधा-कृष्ण के प्रेम और आनंद का प्रतीक पर्व है। यह होली के आगमन का संकेत देता है और भक्ति के साथ उल्लास का संदेश देता है।

आमलकी एकादशी – 27 फरवरी 2026

आंवले के वृक्ष की पूजा के साथ की जाने वाली आमलकी एकादशी आरोग्य, दीर्घायु और विष्णु कृपा प्रदान करती है। ब्रह्मांड पुराण में इस एकादशी को विशेष फलदायी बताया गया है।

पंचांग निष्कर्ष

फरवरी 2026 साधना, व्रत और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ महीना है। यदि इन तिथियों पर विधि-विधान से उपासना की जाए तो ग्रह दोष, मानसिक बाधा और जीवन के अवरोधों से मुक्ति मिलती है।

फरवरी 2026 का महीना व्रत, साधना, दान और आत्मिक उन्नति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ है। यदि इन तिथियों को पंचांगानुसार विधि-विधान से मनाया जाए, तो जीवन में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का संचार होता है।

Frequently Asked Questions (FAQ) – February 2026 Festival & Vrat

Q1. फरवरी 2026 में महाशिवरात्रि कब है?

उत्तर: फरवरी 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी। शिव पुराण के अनुसार इस दिन रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र जाप विशेष फलदायी माना गया है।

Q2. फरवरी 2026 में कौन-कौन सी एकादशी व्रत पड़ेंगी?

उत्तर: फरवरी 2026 में दो एकादशी व्रत पड़ेंगे—

  • विजया एकादशी: 13 फरवरी 2026

  • आमलकी एकादशी: 27 फरवरी 2026

    गरुड़ पुराण के अनुसार इन व्रतों से विष्णु कृपा, विजय और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

Q3. माघ पूर्णिमा 2026 की तिथि क्या है?

उत्तर: माघ पूर्णिमा 01 फरवरी 2026 को है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की पूजा विशेष पुण्य प्रदान करती है। इसी दिन माघ स्नान का समापन होता है।

Q4. फरवरी 2026 में प्रदोष व्रत कब है?

उत्तर: प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026 (शनिवार) को पड़ेगा। शनिवार होने के कारण यह शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा, जो शनि दोष शांति और शिव कृपा के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।

Q5. क्या फरवरी 2026 में सूर्य ग्रहण है?

उत्तर: हाँ, 17 फरवरी 2026 को सूर्य ग्रहण लगेगा। यह फाल्गुन अमावस्या के दिन होगा। ग्रहण काल में जप, ध्यान और दान श्रेष्ठ फल प्रदान करते हैं।

Q6. फुलैरा दूज 2026 में कब मनाई जाएगी?

उत्तर: फुलैरा दूज 19 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह राधा-कृष्ण के प्रेम और आनंद का प्रतीक पर्व है और होली उत्सव की शुरुआत का संकेत देता है।

Q7. आमलकी एकादशी का क्या महत्व है?

उत्तर: आमलकी एकादशी भगवान विष्णु और आंवला वृक्ष को समर्पित होती है। ब्रह्मांड पुराण के अनुसार इस व्रत से दीर्घायु, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Disclaimer: यह जानकारी पंचांग, पुराण और सामान्य धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। स्थानीय पंचांग अनुसार तिथियों में आंशिक अंतर संभव है।

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