Yashoda Jayanti 2026 Date: साल 2026 में यशोदा जयंती 7 फरवरी को है। जानें मां यशोदा और बाल कृष्ण की पूजा विधि, व्रत संकल्प, शुभ मुहूर्त, पुराणिक महत्व और संतान सुख के लिए उपाय।
परिचय: माता यशोदा का महत्व
हिंदू धर्म में माता यशोदा का स्थान अत्यंत पवित्र और आदर्श है। वे भगवान श्रीकृष्ण की जन्म माता हैं और उनके पालन-पोषण के अद्भुत उदाहरण हैं। यशोदा माता ने अपने पुत्र को प्रेम, अनुशासन और संस्कार के साथ पाला। उनका जीवन माता-पिता और बच्चों के लिए मार्गदर्शक है।
धार्मिक दृष्टिकोण:
माता यशोदा की पूजा करने से भक्तों के जीवन में शांति, सुख और संतान सुख आता है। वे भगवान कृष्ण के बाल रूप के पालन-पोषण का प्रतीक हैं, जिससे जीवन में नैतिकता और भक्ति का विकास होता है।
पुराणिक संदर्भ:
भागवत पुराण में वर्णित है कि यशोदा माता ने बालकृष्ण की बाल लीलाओं का पालन करते हुए उन्हें संस्कार दिए। माखन चोरी, नंदगांव की गोकुल लीलाएँ, और क्रीड़ा जैसी कथाएँ माता-पिता और बच्चों के बीच प्रेम और अनुशासन का प्रतीक हैं।
यशोदा जयंती (Yashoda Jayanti 2026) का धार्मिक महत्व
माता यशोदा का नाम श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। यशोदा जयंती पर पूजा करने से:
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संतान सुख की प्राप्ति होती है
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बच्चों का स्वास्थ्य और विकास उत्तम होता है
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घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है
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परिवार में नैतिक और धार्मिक संस्कार विकसित होते हैं
पुराणिक दृष्टांत:
भागवत पुराण (कृष्ण लीला अध्याय 10) में वर्णित है कि यशोदा माता ने भगवान कृष्ण को गोपाल रूप में देखा और उनकी बाल लीलाओं का स्मरण करते हुए भक्तों को आध्यात्मिक आनंद प्राप्त होता है।
फाल्गुन मास और पंचांग का महत्व
फाल्गुन मास का महत्व:
फाल्गुन मास हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस मास में कई व्रत और त्योहार आते हैं जैसे:
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रंग पंचमी
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होली
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यशोदा जयंती
यशोदा जयंती 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार:
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तिथि प्रारंभ: 7 फरवरी 2026, 1:18 AM
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तिथि समाप्त: 8 फरवरी 2026, 2:54 AM
इसलिए यशोदा जयंती 7 फरवरी को ही मनाई जाएगी।
शुभ मुहूर्त:
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पूजा का समय: सुबह 2:28 AM से 7:05 AM तक
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योग: सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग
इस समय में पूजा करने से मां यशोदा की कृपा विशेष रूप से प्राप्त होती है।
यशोदा जयंती पूजा विधि और व्रत संकल्प (Yashoda Jayanti Vrat Rules)
Step 1: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना शुभ माना गया है। स्नान के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
Step 2: व्रत संकल्प
पूजा से पहले मन में व्रत रखने का संकल्प लें। यह संकल्प मन की शुद्धि और भक्ति का प्रतीक है।
Step 3: पूजा स्थल तैयार करना
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घर की सफाई करें
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लाल कपड़ा बिछाएं
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यशोदा माता की तस्वीर या मूर्ति रखें, जिसमें गोद में बालकृष्ण हो
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यदि मूर्ति उपलब्ध न हो, तो भगवान कृष्ण की तस्वीर के सामने दीप जलाएँ
Step 4: पूजा सामग्री
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लाल चुनरी
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रोली, कुमकुम, धूप, दीप, फूल
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तुलसी के पत्ते
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माखन और केले का भोग
Step 5: पूजा विधि (Yashoda Jayanti Puja Vidhi)
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माता यशोदा की तस्वीर या मूर्ति पर लाल चुनरी चढ़ाएं
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रोली, कुमकुम और फूल अर्पित करें
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माखन और केले का भोग लगाएं
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गोपाल मंत्र का जाप करें
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भगवान कृष्ण की आरती करें
गोपाल मंत्र और भजन-सूची
प्रमुख मंत्र:
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गोपाल मंत्र: “ॐ गोपालाय नमः”
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बाल कृष्ण मंत्र: “ॐ बालकृष्णाय नमः”
भजन सुझाव:
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“मधुर मधुर मेरे कृष्णा”
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“गोविंदा गोविंदा”
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“यशोदा माता की आरती”
भजन और मंत्र जाप से मन शांत होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
संतान सुख और परिवार पर प्रभाव
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व्रत और पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है
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बच्चों का स्वास्थ्य और शिक्षा उत्तम होती है
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घर में खुशहाली, शांति और प्रेम बढ़ता है
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परिवार में नैतिक संस्कार का विकास होता है
आध्यात्मिक और मानसिक लाभ
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मानसिक शांति और तनाव में कमी
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सकारात्मक ऊर्जा का संचार
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जीवन में नैतिक और धार्मिक मूल्यों की वृद्धि
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माता यशोदा के प्रेम और कृपा का अनुभव
लोककथाएँ और पुराणिक दृष्टांत
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माखन चोरी की कथा:
यशोदा माता ने बालकृष्ण को माखन चोरी करते हुए देखा। यह कथा माता-पिता के प्रेम और बच्चों की मासूमियत का प्रतीक है। -
कृष्ण की लीला:
यशोदा माता के साथ कृष्ण की बाल लीलाओं का स्मरण भक्तों को आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है। -
गोवर्धन पूजा संबंध:
यशोदा माता ने कृष्ण को गोवर्धन पर्वत उठाते हुए देखा। यह भक्तों के लिए प्रेरणा है कि माता-पिता का आशीर्वाद हमेशा साथ रहता है।
साल 2026 की यशोदा जयंती 7 फरवरी को पड़ रही है। यह दिन माता यशोदा और भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा और व्रत के लिए अत्यंत शुभ है। अपने घर को साफ-सुथरा करके, मन में श्रद्धा भाव रखते हुए इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
यशोदा जयंती 2026: FAQ – पूजा, व्रत, शुभ मुहूर्त और संतान सुख
1. यशोदा जयंती 2026 कब है?
यशोदा जयंती 2026 फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को है। इस साल यह 7 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।
2. यशोदा जयंती का शुभ मुहूर्त क्या है?
पूजा का शुभ समय सुबह 2:28 AM से 7:05 AM तक है। इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग भी बना हुआ है, जिससे पूजा और व्रत अत्यधिक फलदायी होते हैं।
3. यशोदा जयंती पर पूजा कैसे करें?
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ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
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घर की सफाई के बाद लाल कपड़ा बिछाएँ।
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यशोदा माता की मूर्ति या तस्वीर रखें, जिसमें गोद में बालकृष्ण हो।
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रोली, कुमकुम, धूप, दीप, फूल, तुलसी और माखन-केले का भोग अर्पित करें।
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गोपाल मंत्र का जाप करें और आरती करें।
4. व्रत करने के क्या लाभ हैं?
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संतान सुख की प्राप्ति होती है।
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बच्चों का स्वास्थ्य और विकास उत्तम होता है।
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घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
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घर के सभी सदस्य आध्यात्मिक और नैतिक संस्कार विकसित करते हैं।
5. कौन-कौन से मंत्र और भजन इस दिन जाप किए जा सकते हैं?
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मुख्य मंत्र: ॐ गोपालाय नमः, ॐ बालकृष्णाय नमः
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लोकप्रिय भजन: “मधुर मधुर मेरे कृष्णा”, “गोविंदा गोविंदा”, “यशोदा माता की आरती”
6. यशोदा जयंती क्यों मनाई जाती है?
मां यशोदा भगवान श्रीकृष्ण की जन्म माता हैं। उनकी जयंती पर भक्त व्रत और पूजा करते हैं ताकि संतान सुख, बच्चों के अच्छे संस्कार और घर में सुख-शांति प्राप्त हो।
7. क्या बच्चे भी व्रत रख सकते हैं?
हां, छोटे बच्चे माता की कहानी सुनकर भक्ति कर सकते हैं और पूजा में भाग ले सकते हैं।
8. क्या पूरी रात जागरण करना जरूरी है?
नहीं, मुख्य पूजा और व्रत ब्राह्म मुहूर्त में करना शुभ माना गया है। जागरण optional है।
9. यशोदा माता की मूर्ति या तस्वीर नहीं हो तो क्या करें?
यदि मूर्ति उपलब्ध न हो, तो आप भगवान कृष्ण की तस्वीर के सामने दीप जलाकर पूजा कर सकते हैं।
10. पूजा के बाद भोग किसे अर्पित करें?
पूजा के बाद भोग माता यशोदा और भगवान कृष्ण को अर्पित करें। फिर भक्तिपूर्ण मन से भोजन करें।
11. पूजा के लिए कौन सा समय सबसे अच्छा है?
ब्राह्म मुहूर्त में पूजा करना सबसे शुभ माना गया है, ताकि दिनभर व्रत का पुण्य प्राप्त हो।
12. घर की साफ-सफाई क्यों जरूरी है?
साफ-सुथरा घर सकारात्मक ऊर्जा और माता यशोदा की कृपा प्राप्त करने के लिए जरूरी है।
13. लाल कपड़ा पूजा में क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
लाल रंग शक्ति, भक्ति और माता यशोदा का प्रतीक है। इसे पूजा स्थल पर बिछाना शुभ माना जाता है।
14. माखन और केले का भोग क्यों अर्पित किया जाता है?
माखन और केला भगवान कृष्ण के प्रिय भोजन हैं। भोग अर्पित करने से पूजा पूर्ण होती है और पुण्य प्राप्त होता है।
15. कौन से योग इस दिन बने हैं?
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बना है। यह पूजा और व्रत के लिए विशेष शुभ माना जाता है।
16. पूजा केवल घर में ही की जा सकती है या मंदिर में भी?
पूजा घर में और मंदिर में दोनों जगह की जा सकती है। घर में पूजा करना पूरी तरह से फलदायी है।
17. सबसे लोकप्रिय भजन कौन सा है?
“मधुर मधुर मेरे कृष्णा” और “गोविंदा गोविंदा” भजन सबसे लोकप्रिय हैं।
18. व्रत के दौरान क्या खा सकते हैं?
संपूर्ण दिन व्रत रखने के लिए केवल फल, दूध और भोग का सेवन किया जा सकता है।
19. आरती करना जरूरी है क्या?
हां, आरती करने से पूजा पूर्ण होती है और माता यशोदा की कृपा प्राप्त होती है।
20. संतान सुख के लिए क्या करें?
श्रद्धा से व्रत रखें, पूजा विधि का पालन करें और गोपाल मंत्र का जाप करें।