श्री नृसिंह स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) मूल पाठ, विधि व नियम | Prahlada Krutha Narasimha StutiIt takes 3 minutes... to read this article !

श्री नृसिंह स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) पाठ करने की सही विधि, नियम, समय, लाभ और शास्त्रीय महत्व जानें।

श्री नृसिंह स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) मूल पाठ

भगवत् स्तुतिः (प्रह्लाद कृतं)

प्रह्लाद उवाच ।
नमस्ते पुण्डरीकाक्ष नमस्ते पुरुषोत्तम ।
नमस्ते सर्वलोकात्मन् नमस्ते तिग्मचक्रिणे ॥ १ ॥

नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च ।
जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः ॥ २ ॥

ब्रह्मत्वे सृजते विश्वं स्थितौ पालयते पुनः ।
रुद्ररूपाय कल्पान्ते नमस्तुभ्यं त्रिमूर्तये ॥ ३ ॥

देवा यक्षासुराः सिद्धा नागा गन्धर्वकिन्नराः ।
पिशाचा राक्षसाश्चैव मनुष्याः पशवस्तथा ॥ ४ ॥

पक्षिणः स्थावराश्चैव पिपीलिकसरीसृपाः ।
भूम्यापोऽग्निर्नभो वायुः शब्दः स्पर्शस्तथा रसः ॥ ५ ॥

रूपं गन्धो मनो बुद्धिरात्मा कालस्तथा गुणाः ।
एतेषां परमार्थश्च सर्वमेतत्त्वमच्युत ॥ ६ ॥

विद्याविद्ये भवान् सत्यमसत्यं त्वं विषामृते ।
प्रवृत्तं च निवृत्तं च कर्म वेदोदितं भवान् ॥ ७ ॥

समस्तकर्मभोक्ता च कर्मोपकरणानि च ।
त्वमेव विष्णो सर्वाणि सर्वकर्मफलं च यत् ॥ ८ ॥

मय्यन्यत्र तथाऽशेषभूतेषु भुवनेषु च ।
तवैव व्याप्तिरैश्वर्यगुणसंसूचिकी प्रभो ॥ ९ ॥

त्वां योगिनश्चिन्तयन्ति त्वां यजन्ति च याजकाः ।
हव्यकव्यभुगेकस्त्वं पितृदेवस्वरूपधृक् ॥ १० ॥

रूपं महत्ते स्थितमत्र विश्वं
ततश्च सूक्ष्मं जगदेतदीश ।
रूपाणि सर्वाणि च भूतभेदा-
-स्तेष्वन्तरात्माख्यमतीव सूक्ष्मम् ॥ ११ ॥

तस्माच्च सूक्ष्मादिविशेषणाना-
-मगोचरे यत्परमात्मरूपम् ।
किमप्यचिन्त्यं तव रूपमस्ति
तस्मै नमस्ते पुरुषोत्तमाय ॥ १२ ॥

सर्वभूतेषु सर्वात्मन् या शक्तिरपरा तव ।
गुणाश्रया नमस्तस्यै शाश्वतायै सुरेश्वर ॥ १३ ॥

यातीतगोचरा वाचां मनसां चाविशेषणा ।
ज्ञानिज्ञानपरिच्छेद्या तां वन्दे चेश्वरीं पराम् ॥ १४ ॥

ओं नमो वासुदेवाय तस्मै भगवते सदा ।
व्यतिरिक्तं न यस्यास्ति व्यतिरिक्तोऽखिलस्य यः ॥ १५ ॥

नमस्तस्मै नमस्तस्मै नमस्तस्मै महात्मने ।
नाम रूपं न यस्यैको योऽस्तित्वेनोपलभ्यते ॥ १६ ॥

यस्यावताररूपाणि समर्चन्ति दिवौकसः ।
अपश्यन्तः परं रूपं नमस्तस्मै महात्मने ॥ १७ ॥

योऽन्तस्तिष्ठन्नशेषस्य पश्यतीशः शुभाशुभम् ।
तं सर्वसाक्षिणं विश्वं नमस्ये परमेश्वरम् ॥ १८ ॥

नमोऽस्तु विष्णवे तस्मै यस्याभिन्नमिदं जगत् ।
ध्येयः स जगतामाद्यः स प्रसीदतु मेऽव्ययः ॥ १९ ॥

यत्रोतमेतत् प्रोतं च विश्वमक्षरमव्ययम् ।
आधारभूतः सर्वस्य स प्रसीदतु मे हरिः ॥ २० ॥

ओं नमो विष्णवे तस्मै नमस्तस्मै पुनः पुनः ।
यत्र सर्वं यतः सर्वं यः सर्वं सर्वसंश्रयः ॥ २१ ॥

सर्वगत्वादनन्तस्य स एवाहमवस्थितः ।
मत्तः सर्वमहं सर्वं मयि सर्वं सनातने ॥ २२ ॥

अहमेवाक्षयो नित्यः परमात्माऽऽत्मसंश्रयः ।
ब्रह्मसञ्ज्ञोऽहमेवाग्रे तथाऽन्ते च परः पुमान् ॥ २३ ॥

इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमांशे एकोनविंशोऽध्याये प्रह्लाद कृत भगवत् स्तुतिः ।

श्री नृसिंह स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) पाठ की विधि

1. पाठ का समय
  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल
  • संबंधित देवता का वार विशेष फलदायी
  • विशेष मुहूर्त, ग्रहण काल, जयंती पर सर्वोत्तम
2. आसन व दिशा
  • कुश या ऊनी आसन
  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख
3. पूजा सामग्री
  • श्री नृसिंह भगवान की प्रतिमा या चित्र
  • दीपक, धूप, पुष्प
  • पीला या लाल वस्त्र

श्री नृसिंह स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) पाठ के नियम

  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • मन, वाणी और शरीर से शुद्ध रहें
  • पाठ के समय मौन और एकाग्रता आवश्यक
  • स्तुति का पाठ कम से कम 11 बार
  • भय या संकट में 108 बार पाठ विशेष लाभ देता है

श्री नृसिंह स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) के लाभ

  • अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा
  • शत्रु बाधा और षड्यंत्र से सुरक्षा
  • ग्रह दोष और राहु-केतु शांति
  • मानसिक भय, अवसाद और अनिद्रा से मुक्ति
  • घर और साधक के चारों ओर सुरक्षा कवच

विशेष साधना उपाय

यदि किसी व्यक्ति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव या भय बना रहता है, तो 21 दिनों तक नियमित रूप से दीपक जलाकर श्री नृसिंह स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) का पाठ करें। यह साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पाठ अधूरा न छोड़ें
  • क्रोध या अशुद्ध अवस्था में पाठ न करें
  • स्तुति का उच्चारण स्पष्ट हो

श्री नृसिंह स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) केवल एक स्तोत्र नहीं बल्कि दिव्य सुरक्षा कवच है। शास्त्रों में वर्णित विधि से किया गया पाठ साधक को भयमुक्त, सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।

 

 

हमारी एडिटोरियल टीम अनुभवी वैदिक एवं तांत्रिक साधकों का एक समर्पित समूह है, जिन्होंने वर्षों तक वेद, तंत्र और प्राचीन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया है। इन ग्रंथों में वर्णित साधनाओं का विधिवत पुरश्चरण कर, व्यावहारिक अनुभव के साथ ज्ञान को आत्मसात किया गया है। Sadhanas.in पर प्रकाशित प्रत्येक लेख और साधना शुद्ध रूप से प्राचीन शास्त्रों एवं प्रमाणिक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है, ताकि साधकों को प्रामाणिक, सुरक्षित और सही मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।

error: Content is protected !!