श्री नृसिंह नख स्तुतिः का मूल संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ, पाठ विधि व नियम विस्तार से जानें। Sri Narasimha Nakha Stuti के लाभ, महत्व, जप का सही समय और पूजा विधि सहित संपूर्ण जानकारी।
श्री नृसिंह नख स्तुतिः मूल पाठ
पान्त्वस्मान् पुरुहूतवैरिबलवन्मातङ्गमाद्यद्घटा-
-कुम्भोच्चाद्रिविपाटनाधिकपटु प्रत्येक वज्रायिताः ।
श्रीमत्कण्ठीरवास्यप्रततसुनखरा दारितारातिदूर-
-प्रध्वस्तध्वान्तशान्तप्रविततमनसा भाविता भूरिभागैः ॥ १ ॥
लक्ष्मीकान्त समन्ततोऽपि कलयन् नैवेशितुस्ते समं
पश्याम्युत्तमवस्तु दूरतरतोपास्तं रसो योऽष्टमः ।
यद्रोषोत्करदक्षनेत्रकुटिलप्रान्तोत्थिताग्नि स्फुरत्
खद्योतोपमविस्फुलिङ्गभसिता ब्रह्मेशशक्रोत्कराः ॥ २ ॥
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्य विरचिता श्री नरसिंह नखस्तुतिः
श्री नृसिंह नख स्तुतिः पाठ की विधि
1. पाठ का समय
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल
- संबंधित देवता का वार विशेष फलदायी
- विशेष मुहूर्त, ग्रहण काल, जयंती पर सर्वोत्तम
2. आसन व दिशा
- कुश या ऊनी आसन
- उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख
3. पूजा सामग्री
- श्री नृसिंह नख की प्रतिमा या चित्र
- दीपक, धूप, पुष्प
- पीला या लाल वस्त्र
श्री नृसिंह नख स्तुतिः पाठ के नियम
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें
- मन, वाणी और शरीर से शुद्ध रहें
- पाठ के समय मौन और एकाग्रता आवश्यक
- स्तुति का पाठ कम से कम 11 बार
- भय या संकट में 108 बार पाठ विशेष लाभ देता है
श्री नृसिंह नख स्तुतिः के लाभ
- अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा
- शत्रु बाधा और षड्यंत्र से सुरक्षा
- ग्रह दोष और राहु-केतु शांति
- मानसिक भय, अवसाद और अनिद्रा से मुक्ति
- घर और साधक के चारों ओर सुरक्षा कवच
विशेष साधना उपाय
यदि किसी व्यक्ति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव या भय बना रहता है, तो 21 दिनों तक नियमित रूप से दीपक जलाकर श्री नृसिंह नख स्तुतिः का पाठ करें। यह साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- पाठ अधूरा न छोड़ें
- क्रोध या अशुद्ध अवस्था में पाठ न करें
- स्तुति का उच्चारण स्पष्ट हो
श्री नृसिंह नख स्तुतिः केवल एक स्तुतिः नहीं बल्कि दिव्य सुरक्षा कवच है। शास्त्रों में वर्णित विधि से किया गया पाठ साधक को भयमुक्त, सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।