श्री नृसिंह संस्तुतिः मूल पाठ, विधि व नियम | Sri Narasimha SamstutiIt takes 2 minutes... to read this article !

श्री नृसिंह संस्तुतिः का मूल संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ, पाठ विधि व नियम विस्तार से जानें। Sri Narasimha Samstuti के लाभ, महत्व, जप का सही समय और पूजा विधि सहित संपूर्ण जानकारी।

श्री नृसिंह संस्तुतिः मूल पाठ

भैरवाडम्बरं बाहुदंष्ट्रायुधं
चण्डकोपं महाज्वालमेकं प्रभुम् ।
शङ्खचक्राब्जहस्तं स्मरात्सुन्दरं
ह्युग्रमत्युष्णकान्तिं भजेऽहं मुहुः ॥ १ ॥

दिव्यसिंहं महाबाहुशौर्यान्वितं
रक्तनेत्रं महादेवमाशाम्बरम् ।
रौद्रमव्यक्तरूपं च दैत्याम्बरं
वीरमादित्यभासं भजेऽहं मुहुः ॥ २ ॥

मन्दहासं महेन्द्रेन्द्रमादिस्तुतं
हर्षदं श्मश्रुवन्तं स्थिरज्ञप्तिकम् ।
विश्वपालैर्विवन्द्यं वरेण्याग्रजं
नाशिताशेषदुःखं भजेऽहं मुहुः ॥ ३ ॥

सव्यजूटं सुरेशं वनेशायिनं
घोरमर्कप्रतापं महाभद्रकम् ।
दुर्निरीक्ष्यं सहस्राक्षमुग्रप्रभं
तेजसा सञ्ज्वलन्तं भजेऽहं मुहुः ॥ ४ ॥

सिंहवक्त्रं शरीरेण लोकाकृतिं
वारणं पीडनानां समेषां गुरुम् ।
तारणं लोकसिन्धोर्नराणां परं
मुख्यमस्वप्नकानां भजेऽहं मुहुः ॥ ५ ॥

पावनं पुण्यमूर्तिं सुसेव्यं हरिं
सर्वविज्ञं भवन्तं महावक्षसम् ।
योगिनन्दं च धीरं परं विक्रमं
देवदेवं नृसिंहं भजेऽहं मुहुः ॥ ६ ॥

सर्वमन्त्रैकरूपं सुरेशं शुभं
सिद्धिदं शाश्वतं सत्त्रिलोकेश्वरम् ।
वज्रहस्तेरुहं विश्वनिर्मापकं
भीषणं भूमिपालं भजेऽहं मुहुः ॥ ७ ॥

सर्वकारुण्यमूर्तिं शरण्यं सुरं
दिव्यतेजःसमानप्रभं दैवतम् ।
स्थूलकायं महावीरमैश्वर्यदं
भद्रमाद्यन्तवासं भजेऽहं मुहुः ॥ ८ ॥

भक्तवात्सल्यपूर्णं च सङ्कर्षणं
सर्वकामेश्वरं साधुचित्तस्थितम् ।
लोकपूज्यं स्थिरं चाच्युतं चोत्तमं
मृत्युमृत्युं विशालं भजेऽहं मुहुः ॥ ९ ॥

भक्तिपूर्णां कृपाकारणां संस्तुतिं
नित्यमेकैकवारं पठन् सज्जनः ।
सर्वदाऽऽप्नोति सिद्धिं नृसिंहात् कृपां
दीर्घमायुष्यमारोग्यमप्युत्तमम् ॥ १० ॥

इति श्री नृसिंह संस्तुतिः ।

श्री नृसिंह संस्तुतिः पाठ की विधि

1. पाठ का समय
  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल
  • संबंधित देवता का वार विशेष फलदायी
  • विशेष मुहूर्त, ग्रहण काल, जयंती पर सर्वोत्तम
2. आसन व दिशा
  • कुश या ऊनी आसन
  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख
3. पूजा सामग्री
  • श्री नृसिंह की प्रतिमा या चित्र
  • दीपक, धूप, पुष्प
  • पीला या लाल वस्त्र

श्री नृसिंह संस्तुतिः पाठ के नियम

  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • मन, वाणी और शरीर से शुद्ध रहें
  • पाठ के समय मौन और एकाग्रता आवश्यक
  • स्तुति का पाठ कम से कम 11 बार
  • भय या संकट में 108 बार पाठ विशेष लाभ देता है

श्री नृसिंह संस्तुतिः के लाभ

  • अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा
  • शत्रु बाधा और षड्यंत्र से सुरक्षा
  • ग्रह दोष और राहु-केतु शांति
  • मानसिक भय, अवसाद और अनिद्रा से मुक्ति
  • घर और साधक के चारों ओर सुरक्षा कवच

विशेष साधना उपाय

यदि किसी व्यक्ति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव या भय बना रहता है, तो 21 दिनों तक नियमित रूप से दीपक जलाकर श्री नृसिंह संस्तुतिः का पाठ करें। यह साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पाठ अधूरा न छोड़ें
  • क्रोध या अशुद्ध अवस्था में पाठ न करें
  • स्तुति का उच्चारण स्पष्ट हो

श्री नृसिंह संस्तुतिः केवल एक स्तुतिः नहीं बल्कि दिव्य सुरक्षा कवच है। शास्त्रों में वर्णित विधि से किया गया पाठ साधक को भयमुक्त, सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।

हमारी एडिटोरियल टीम अनुभवी वैदिक एवं तांत्रिक साधकों का एक समर्पित समूह है, जिन्होंने वर्षों तक वेद, तंत्र और प्राचीन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया है। इन ग्रंथों में वर्णित साधनाओं का विधिवत पुरश्चरण कर, व्यावहारिक अनुभव के साथ ज्ञान को आत्मसात किया गया है। Sadhanas.in पर प्रकाशित प्रत्येक लेख और साधना शुद्ध रूप से प्राचीन शास्त्रों एवं प्रमाणिक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है, ताकि साधकों को प्रामाणिक, सुरक्षित और सही मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।

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