श्री परशुराम स्तुतिः | Sri Parashurama StutiIt takes 1 minutes... to read this article !

Sri Parashurama Stuti: श्री परशुराम स्तुति एक पवित्र संस्कृत स्तोत्र है जिसमें भगवान परशुराम की वीरता, भक्ति और गुणों का भक्तिपूर्ण वर्णन किया गया है। यह स्तुति पाठक को शक्ति, धर्म, भक्ति-भाव और आध्यात्मिक उन्नति की अनुभूति प्रदान करती है।

कुलाचला यस्य महीं द्विजेभ्यः
प्रयच्छतः सीमदृषत्त्वमापुः ।
बभूवुरुत्सर्गजलं समुद्राः
स रैणुकेयः श्रियमातनोतु ॥ १ ॥

नाशिष्यः किमभूद्भवः किमभवन्नापुत्रिणी रेणुका
नाभूद्विश्वमकार्मुकं किमिति वः प्रीणातु रामत्रपा ।
विप्राणां प्रतिमन्दिरं मणिगणोन्मिश्राणि दण्डाहते-
-र्नाब्धीनां स मया यमोऽपि महिषेणाम्भांसि नोद्वाहितः ॥ २ ॥

पायाद्वो जमदग्निवंशतिलको वीरव्रतालङ्कृतो
रामो नाम मुनीश्वरो नृपवधे भास्वत्कुठारायुधः ।
येनाशेषहताहिताङ्गरुधिरैः सन्तर्पिताः पूर्वजाः
भक्त्या चाश्वमखे समुद्रवसना भूर्हन्तकारीकृता ॥ ३ ॥

द्वारे कल्पतरुं गृहे सुरगवीं चिन्तामणीनङ्गदे
पीयूषं सरसीषु विप्रवदने विद्याश्चतस्रो दश ।
एवं कर्तुमयं तपस्यति भृगोर्वंशावतंसो मुनिः
पायाद्वोऽखिलराजकक्षयकरो भूदेवभूषामणिः ॥ ४ ॥

इति श्री परशुराम स्तुतिः ।

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