श्री प्रत्यङ्गिरा आपन्निवारण स्तुतिः मूल पाठ, विधि व नियम | Sri Pratyangira Apannivarana StutiIt takes 2 minutes... to read this article !

श्री प्रत्यङ्गिरा आपन्निवारण स्तुतिः पाठ करने की सही विधि, नियम, समय, लाभ और शास्त्रीय महत्व जानें।

श्री प्रत्यङ्गिरा आपन्निवारण स्तुतिः मूल पाठ

प्रत्यङ्गिरे महाकृत्ये दुस्तरापन्निवारिणि ।
सकलापन्निवृत्तिं मे सर्वदा कुरु सर्वदे ॥ १ ॥

प्रत्यङ्गिरे जगन्मातर्जयश्री परमेश्वरि ।
तीव्रदारिद्र्यदुःखं मे क्षिप्रमेव हराम्बिके ॥ २ ॥

प्रत्यङ्गिरे महामाये भीमे भीमपराक्रमे ।
मम शत्रूनशेषांस्त्वं दुष्टान्नाशय नाशय ॥ ३ ॥

प्रत्यङ्गिरे महदेवि ज्वालामालोज्ज्वलानने ।
क्रूरग्रहानशेषान् त्वं दह खादाग्निलोचने ॥ ४ ॥

प्रत्यङ्गिरे महाघोरे परमन्त्रांश्च कृत्रिमान् ।
परकृत्या यन्त्र तन्त्रजालं छेदय छेदय ॥ ५ ॥

प्रत्यङ्गिरे विशालाक्षि परात्परतरे शिवे ।
देहि मे पुत्रपौत्रादि पारम्पर्योछ्छ्रितां श्रियम् ॥ ६ ॥

प्रत्यङ्गिरे महादुर्गे भोगमोक्षफलप्रदे ।
सकलाभीष्टसिद्धिं मे देहि सर्वेश्वरेश्वरि ॥ ७ ॥

प्रत्यङ्गिरे महादेवि महादेवमनःप्रिये ।
मङ्गलं मे प्रयच्छाशु मनसा त्वां नमाम्यहम् ॥ ८ ॥

इति श्री प्रत्यङ्गिरा आपन्निवारण स्तुतिः ।

श्री प्रत्यङ्गिरा आपन्निवारण स्तुतिः पाठ की विधि

1. पाठ का समय
  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल
  • संबंधित देवता का वार विशेष फलदायी
  • विशेष मुहूर्त, ग्रहण काल, जयंती पर सर्वोत्तम
2. आसन व दिशा
  • कुश या ऊनी आसन
  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख
3. पूजा सामग्री
  • श्री प्रत्यङ्गिरा आपन्निवारण की प्रतिमा या चित्र
  • दीपक, धूप, पुष्प
  • पीला या लाल वस्त्र

श्री प्रत्यङ्गिरा आपन्निवारण स्तुतिः पाठ के नियम

  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • मन, वाणी और शरीर से शुद्ध रहें
  • पाठ के समय मौन और एकाग्रता आवश्यक
  • स्तुति का पाठ कम से कम 11 बार
  • भय या संकट में 108 बार पाठ विशेष लाभ देता है

श्री प्रत्यङ्गिरा आपन्निवारण स्तुतिः के लाभ

  • अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा
  • शत्रु बाधा और षड्यंत्र से सुरक्षा
  • ग्रह दोष और राहु-केतु शांति
  • मानसिक भय, अवसाद और अनिद्रा से मुक्ति
  • घर और साधक के चारों ओर सुरक्षा कवच

विशेष साधना उपाय

यदि किसी व्यक्ति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव या भय बना रहता है, तो 21 दिनों तक नियमित रूप से दीपक जलाकर श्री प्रत्यङ्गिरा आपन्निवारण स्तुतिः का पाठ करें। यह साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पाठ अधूरा न छोड़ें
  • क्रोध या अशुद्ध अवस्था में पाठ न करें
  • स्तुति का उच्चारण स्पष्ट हो

श्री प्रत्यङ्गिरा आपन्निवारण स्तुतिः केवल एक स्तोत्र नहीं बल्कि दिव्य सुरक्षा कवच है। शास्त्रों में वर्णित विधि से किया गया पाठ साधक को भयमुक्त, सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।

हमारी एडिटोरियल टीम अनुभवी वैदिक एवं तांत्रिक साधकों का एक समर्पित समूह है, जिन्होंने वर्षों तक वेद, तंत्र और प्राचीन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया है। इन ग्रंथों में वर्णित साधनाओं का विधिवत पुरश्चरण कर, व्यावहारिक अनुभव के साथ ज्ञान को आत्मसात किया गया है। Sadhanas.in पर प्रकाशित प्रत्येक लेख और साधना शुद्ध रूप से प्राचीन शास्त्रों एवं प्रमाणिक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है, ताकि साधकों को प्रामाणिक, सुरक्षित और सही मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।

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