श्री षण्मुख पञ्चरत्न स्तुतिः | Sri Shanmukha Pancharatna StutiIt takes 1 minutes... to read this article !

Sri Shanmukha Pancharatna Stuti: श्री षण्मुख पन्चरत्न स्तुति एक महान संस्कृत स्तोत्र है जिसमें भगवान श्री गणपति/कार्तिकेय (षण्मुख) की पाँचरत्न स्तुतियाँ एकत्रित हैं। यह भक्ति-प्रधान स्तुति भक्तों को शुभफल, मनोकामना पूर्ति, शक्ति, बुद्धि और आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।

स्फुरद्विद्युद्वल्लीवलयितमगोत्सङ्गवसतिं
भवाप्पित्तप्लुष्टानमितकरुणाजीवनवशात् ।
अवन्तं भक्तानामुदयकरमम्भोधर इति
प्रमोदादावासं व्यतनुत मयूरोऽस्य सविधे ॥ १ ॥

सुब्रह्मण्यो यो भवेज्ज्ञानशक्त्या
सिद्धं तस्मिन्देवसेनापतित्वम् ।
इत्थं शक्तिं देवसेनापतित्वं
सुब्रह्मण्यो बिभ्रदेष व्यनक्ति ॥ २ ॥

पक्षोऽनिर्वचनीयो दक्षिण इति धियमशेषजनतायाः ।
जनयति बर्ही दक्षिणनिर्वचनायोग्यपक्षयुक्तोऽयम् ॥ ३ ॥

यः पक्षमनिर्वचनं याति समवलम्ब्य दृश्यते तेन ।
ब्रह्म परात्परममलं सुब्रह्मण्याभिधं परं ज्योतिः ॥ ४ ॥

षण्मुखं हसन्मुखं सुखाम्बुराशिखेलनं
सन्मुनीन्द्रसेव्यमानपादपङ्कजं सदा ।
मन्मथादिशत्रुवर्गनाशकं कृपाम्बुधिं
मन्महे मुदा हृदि प्रपन्नकल्पभूरुहम् ॥ ५ ॥

इति जगद्गुरु शृङ्गेरीपीठाधिप श्रीचन्द्रशेखरभारती श्रीपादैः विरचिता श्रीषण्मुखपञ्चरत्नस्तुतिः ।

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