श्री वराह स्तुतिः (वराहपुराणे) | Sri Varaha Stuti (Varaha Puranam)It takes 1 minutes... to read this article !

Sri Varaha Stuti (Varaha Puranam): ब्रह्मा कृत श्री वराह स्तुति एक पवित्र संस्कृत स्तोत्र है जिसमें भगवान विष्णु के वराह अवतार की महिमा, गुणों और भक्ति-भावपूर्ण स्तुति का वर्णन किया गया है। यह स्तुति पाठक को भक्ति, आध्यात्मिक शांति, धार्मिक श्रद्धा और वराह अवतार के दिव्य गुणों की अनुभूति प्रदान करती है।

ब्रह्मादय ऊचुः ।
जय देव महापोत्रिन् जय भूमिधराच्युत ।
हिरण्याक्षमहारक्षोविदारणविचक्षण ॥ १ ॥

त्वमनादिरनन्तश्च त्वत्तः परतरो न हि ।
त्वमेव सृष्टिकालेऽपि विधिर्भूत्वा चतुर्मुखः ॥ २ ॥

सृजस्येतज्जगत्सर्वं पासि विष्णुः समन्ततः । [विश्वं]
कालाग्निरुद्ररूपी च कल्पान्ते सर्वजन्तुषु ॥ ३ ॥

अन्तर्यामी भवान् देव सर्वकर्ता त्वमेव हि ।
निष्कृष्टं ब्रह्मणो रूपं न जानन्ति सुरास्तव ॥ ४ ॥

प्रसीद भगवन् विष्णो भूमिं स्थापय पूर्ववत् ।
सर्वप्राणिनिवासार्थमस्तुवन् विबुधव्रजाः ॥ ५ ॥

इति श्रीवरहपुराणे वेङ्कटाचलमाहात्म्ये देवकृत श्री वराह स्तुतिः ।

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