Sri Varaha Stuti (Varaha Puranam): ब्रह्मा कृत श्री वराह स्तुति एक पवित्र संस्कृत स्तोत्र है जिसमें भगवान विष्णु के वराह अवतार की महिमा, गुणों और भक्ति-भावपूर्ण स्तुति का वर्णन किया गया है। यह स्तुति पाठक को भक्ति, आध्यात्मिक शांति, धार्मिक श्रद्धा और वराह अवतार के दिव्य गुणों की अनुभूति प्रदान करती है।
श्री वराह स्तुतिः (वराहपुराणे)
ब्रह्मादय ऊचुः ।
जय देव महापोत्रिन् जय भूमिधराच्युत ।
हिरण्याक्षमहारक्षोविदारणविचक्षण ॥ १ ॥
त्वमनादिरनन्तश्च त्वत्तः परतरो न हि ।
त्वमेव सृष्टिकालेऽपि विधिर्भूत्वा चतुर्मुखः ॥ २ ॥
सृजस्येतज्जगत्सर्वं पासि विष्णुः समन्ततः । [विश्वं]
कालाग्निरुद्ररूपी च कल्पान्ते सर्वजन्तुषु ॥ ३ ॥
अन्तर्यामी भवान् देव सर्वकर्ता त्वमेव हि ।
निष्कृष्टं ब्रह्मणो रूपं न जानन्ति सुरास्तव ॥ ४ ॥
प्रसीद भगवन् विष्णो भूमिं स्थापय पूर्ववत् ।
सर्वप्राणिनिवासार्थमस्तुवन् विबुधव्रजाः ॥ ५ ॥