श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् | श्री अष्टविनायक स्तोत्रम साधना विधि | Sri Ashtavinayak Stotram | Sri Ashtavinayak Stotram Sadhana VidhiIt takes 2 minutes... to read this article !

श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् भगवान श्री अष्टविनायक का सबसे प्रसिद्ध स्तोत्र है। अष्टविनायक मंदिरों में शामिल आठ पवित्र मंदिरों में से हर एक में पढ़े जाने वाले श्लोकों का संग्रह है जो भगवान गणेश से संबंधित अधिकांश अवसरों पर पढ़ा जाता है।। हर श्लोक का अपना महत्व है और यह शांति और समृद्धि लाता है।

॥ श्री गणेशाय नमः ॥

श्री अष्टविनायकस्तोत्रम्

स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथ मढे चिन्तामणिस्थेवरे ।

लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥

विकल्प (Alternative)

स्वस्ति श्रीगणनायकं गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदं  बल्लाळं मुरुडं विनायकं मढं चिन्तामणीस्थेवरम् ।

लेण्याद्रिं गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरं ग्रामे रांजणसंस्थितं गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥

श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् एक स्तोत्र है, जिसका अर्थ है भगवान अष्टविनायक की महिमा और स्तुति। श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् भगवान गणेश का एक शक्तिशाली वैदिक स्तोत्र है जो जीवन की बाधाओं को दूर करते हैं। जो लोग भक्ति के साथ श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् का पाठ करते हैं, वे अपने सभी पापों से मुक्त होकर रुद्र-लोक की ओर जाते हैं।

श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् का पाठ करने की विधि:-

  • श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् का पाठ करने के लिए एकांत स्थान का चयन करना चाहिए।
  • श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् का पाठ आरम्भ करने से पूर्व स्नान अवश्य करें।
  • अष्टविनायक स्तोत्रम् का पाठ करने के लिए कुशासन, रेशमी आसन, ऊनी आदि में से किसी एक आसन का प्रयोग करें।
  • आसन पर बैठने के बाद अपने ऊपर गंगा जल छिड़कें।
  • गणेश जी की प्रतिमा सामने रखकर घी का दीपक जलाएं। फिर पथ का आरम्भ करें।

श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् सिद्ध करने की विधि:-

  • श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् का सिद्ध मुहूर्त मैं 1100 पाठ कर सिद्ध करें।
  • श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् सिद्ध करने पर प्रतिदिन 11 पाठ अवश्य करें ।
  • भोग मैं गणपति के प्रिय लड्डू रखे। पाठ के बाद प्रशाद छोटे बच्चों मैं बाँट दें ।
  • प्रयोग करने के लिए श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् का शुद्ध जल सामने रखकर 11 पाठ करें ।
  • अभिमंत्रित जल को घर एवं अपने व्यापारिक स्थल मैं छिड़कें।

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