सनातन धर्म की शाक्त परंपरा (शक्ति उपासना) में ‘दस महाविद्याओं’ का सर्वोच्च और सबसे रहस्यमयी स्थान है। इन दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं— माता बगलामुखी (Maa Baglamukhi), जिन्हें ‘माता पीताम्बरा’ के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र शास्त्र में माता बगलामुखी को ‘स्तम्भन’ (Paralyze या रोक देने वाली) की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। वे ब्रह्मांड की वह सर्वोच्च शक्ति हैं जो शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और गति को पल भर में जड़ (शून्य) कर देती हैं।
आज के कलियुग में, जहाँ मनुष्य कदम-कदम पर ईर्ष्या, धोखे, अकारण शत्रुता और झूठे मुकदमों (Court Cases) का सामना कर रहा है, वहाँ माता बगलामुखी की साधना एक अभेद्य रक्षा कवच का कार्य करती है। जब जीवन में हर तरफ से रास्ते बंद हो जाएं, विरोधी हावी हो जाएं और कोई भी मानवीय उपाय काम न करे, तब ‘मां बगलामुखी सहस्रनामावली’ (Maa Baglamukhi Sahasranamavali) का तांत्रिक पाठ अचूक ब्रह्मास्त्र सिद्ध होता है।
‘सहस्रनामावली’ का अर्थ है माता पीताम्बरा के एक हजार (1000) अत्यंत पवित्र, शक्तिशाली और सिद्ध नामों का अर्चन। इस अत्यंत विस्तृत, गूढ़ और ज्ञानवर्धक लेख में हम जानेंगे कि माता बगलामुखी का रहस्य क्या है, Maa Baglamukhi Sahasranamavali Lyrics in Sanskrit के पाठ की आध्यात्मिक महिमा क्या है, इन 1000 नामों का अर्चन करने से मिलने वाले चमत्कारी लाभ क्या हैं, और इसे सिद्ध करने की प्रामाणिक तांत्रिक व वैदिक विधि क्या है।
माता बगलामुखी (पीताम्बरा) का प्राकट्य और उनका अद्भुत रहस्य
‘बगलामुखी’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द ‘वल्गा’ से हुई है, जिसका अर्थ होता है— ‘लगाम’ (Bridle)। जिस प्रकार लगाम से एक अनियंत्रित घोड़े को वश में किया जाता है, उसी प्रकार माता बगलामुखी शत्रुओं की जीभ, विचार और उनके बुरे कर्मों पर लगाम लगा देती हैं। चूँकि माता को पीला रंग अत्यंत प्रिय है और उनका वर्ण (रंग) भी स्वर्ण के समान पीला है, इसलिए वे ‘पीताम्बरा’ कहलाती हैं।
प्राकट्य की कथा: स्वतंत्र तंत्र और अन्य आगम ग्रंथों के अनुसार, सतयुग में एक बार ब्रह्मांड में भयानक तूफान आया, जिससे संपूर्ण सृष्टि नष्ट होने के कगार पर पहुँच गई। भगवान विष्णु चिंतित होकर सौराष्ट्र देश (गुजरात) में हरिद्रा सरोवर (हल्दी के तालाब) के तट पर गए और महात्रिपुरसुंदरी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की।
मंगलवार की मध्य रात्रि (चतुर्दशी तिथि) को हरिद्रा सरोवर से एक अत्यंत तेजस्विनी देवी प्रकट हुईं। उन्होंने पीले वस्त्र धारण किए हुए थे। वे ही माता बगलामुखी थीं। उन्होंने अपनी शक्ति से उस भयंकर तूफान का ‘स्तम्भन’ (उसे रोक दिया) कर दिया और सृष्टि की रक्षा की।
स्वरूप का तांत्रिक प्रतीकवाद: माता बगलामुखी एक हाथ में शत्रु की जीभ पकड़े हुए हैं और दूसरे हाथ में गदा (मुद्गर) उठाए हुए हैं। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि वे भक्तों के बाहरी शत्रुओं के साथ-साथ उनके भीतर के शत्रुओं (क्रोध, लोभ, मोह, अज्ञान और व्यर्थ बोलने की आदत) का भी नाश कर रही हैं।
सहस्रनामावली का महत्व: 1000 सिद्ध नामों की तांत्रिक शक्ति
तंत्र शास्त्र में ‘सहस्रनाम स्तोत्र’ और ‘सहस्रनामावली’ के उपयोग में गहरा अंतर है। स्तोत्र का अर्थ है माता के 1000 नामों को श्लोकों की तरह लयबद्ध रूप से पढ़ना। जबकि ‘सहस्रनामावली’ एक तांत्रिक अर्चन विधि है। इसमें माता के हर एक नाम को एक ‘बीज मंत्र’ की तरह प्रयोग किया जाता है।
सहस्रनामावली के प्रत्येक नाम के आरंभ में ‘ॐ’ और अंत में ‘नमः’ लगा होता है (जैसे- ॐ पीताम्बरायै नमः)। जब साधक माता के इन 1000 अलग-अलग स्वरूपों, शक्तियों और गुणों का संस्कृत में उच्चारण करते हुए उन्हें पीली वस्तुएं (जैसे पीले फूल, हल्दी की गांठ या पीली सरसों) अर्पित करता है, तो उसके आभामंडल में प्रचंड ‘पीत ऊर्जा’ (Yellow Energy) उत्पन्न होती है, जो ब्रह्मांड की किसी भी शत्रु बाधा को भस्म कर सकती है।
Maa Baglamukhi Sahasranamavali | (मां बगलामुखी सहस्रनामावली: Lyrics in Sanskrit)
(अत्यंत गोपनीय तांत्रिक विद्या होने के कारण और लेख की मर्यादा को बनाए रखने के लिए, माता बगलामुखी के संपूर्ण 1000 नामों की सूची किसी योग्य गुरु या प्रामाणिक तांत्रिक ग्रंथ (जैसे ‘सांख्यायन तंत्र’ या ‘बगलामुखी रहस्य’) से ही प्राप्त करनी चाहिए। यहाँ हम सहस्रार्चन की विधि, सिद्ध ध्यान मंत्र और अर्चन के लिए कुछ प्रमुख जाग्रत नामों का उल्लेख कर रहे हैं, जिनसे साधना की शुरुआत होती है।)
सहस्रनामावली अर्चन से पूर्व का सिद्ध ध्यान मंत्र (Dhyana Mantra):
माता पीताम्बरा के 1000 नामों का अर्चन शुरू करने से पूर्व आँखें बंद करके पीले पुष्प हाथ में लें और माता के इस प्रचंड स्वरूप का ध्यान करें:
सौवर्णासनसंस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीम्। हेमाभांगरुचिं शशांकमुकुटां सच्चम्पकस्रग्युताम्॥ हस्तैर्मुद्गरपाशवज्ररसनाः सम्बिभ्रतीं भूषणैः। व्याप्तांगीं बगलामुखीं त्रिजगतां संस्तम्भिनीं चिन्तये॥
(अर्थ: जो सोने के सिंहासन पर विराजमान हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो पीले वस्त्रों में सुशोभित हैं, जिनका वर्ण सुवर्ण के समान है, जिनके मस्तक पर चंद्रमा का मुकुट है और जो चंपा के पीले फूलों की माला पहने हुए हैं। जिन्होंने अपने हाथों में मुद्गर (गदा), पाश, वज्र और शत्रु की जीभ धारण की हुई है। जो त्रिलोकी को स्तम्भित करने वाली हैं, ऐसी माता बगलामुखी का मैं ध्यान करता हूँ।)
ॐ ब्रह्मास्त्रब्रह्मविद्यायै नमः ।
ॐ ब्रह्ममात्रे नमः ।
ॐ सनातन्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मेश्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मकैवल्यबगलायै नमः ।
ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः ।
ॐ नित्यानन्दायै नमः ।
ॐ नित्यसिद्धायै नमः ।
ॐ नित्यरूपायै नमः ।
ॐ निरामयायै नमः ।
ॐ सन्धारिण्यै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ कटाक्षक्षेमकारिण्यै नमः ।
ॐ कमलायै नमः ।
ॐ विमलायै नमः ।
ॐ नीलरत्नकान्तिगुणाश्रितायै नमः ।
ॐ कामप्रियायै नमः ।
ॐ कामरतायै नमः ।
ॐ कामकामस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ मङ्गलायै नमः । २०
ॐ विजयायै नमः ।
ॐ जायायै नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलकारिण्यै नमः ।
ॐ कामिन्यै नमः ।
ॐ कामिनीकाम्यायै नमः ।
ॐ कामुकायै नमः ।
ॐ कामचारिण्यै नमः ।
ॐ कामप्रियायै नमः ।
ॐ कामरतायै नमः ।
ॐ कामकामस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ कामाख्यायै नमः ।
ॐ कामबीजस्थायै नमः ।
ॐ कामपीठनिवासिन्यै नमः ।
ॐ कामदायै नमः ।
ॐ कामहायै नमः ।
ॐ काल्यै नमः ।
ॐ कपाल्यै नमः ।
ॐ करालिकायै नमः ।
ॐ कंसार्यै नमः ।
ॐ कमलायै नमः । ४०
ॐ कामायै नमः ।
ॐ कैलासेश्वरवल्लभायै नमः ।
ॐ कात्यायन्यै नमः ।
ॐ केशवायै नमः ।
ॐ करुणायै नमः ।
ॐ कामकेलिभुजे नमः ।
ॐ क्रियाकीर्त्यै नमः ।
ॐ कृत्तिकायै नमः ।
ॐ काशिकायै नमः ।
ॐ मथुरायै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ कालाक्ष्यै नमः ।
ॐ कालिका काल्यै नमः ।
ॐ धवलाननसुन्दर्यै नमः ।
ॐ खेचर्यै नमः ।
ॐ खमूर्त्यै नमः ।
ॐ क्षुद्राऽक्षुद्रक्षुधावरायै नमः ।
ॐ खड्गहस्तायै नमः ।
ॐ खड्गरतायै नमः ।
ॐ खड्गिन्यै नमः । ६०
ॐ खर्परप्रियायै नमः ।
ॐ गङ्गायै नमः ।
ॐ गौर्यै नमः ।
ॐ गामिन्यै नमः ।
ॐ गीतायै नमः ।
ॐ गोत्रविवर्धिन्यै नमः ।
ॐ गोधरायै नमः ।
ॐ गोकरायै नमः ।
ॐ गोधायै नमः ।
ॐ गन्धर्वपुरवासिन्यै नमः ।
ॐ गन्धर्वायै नमः ।
ॐ गन्धर्वकलागोपन्यै नमः ।
ॐ गरुडासनायै नमः ।
ॐ गोविन्दभावायै नमः ।
ॐ गोविन्दायै नमः ।
ॐ गान्धार्यै नमः ।
ॐ गन्धमादिन्यै नमः ।
ॐ गौराङ्ग्यै नमः ।
ॐ गोपिकामूर्तये नमः ।
ॐ गोपीगोष्ठनिवासिन्यै नमः । ८०
ॐ गन्धायै नमः ।
ॐ गजेन्द्रगामान्यायै नमः ।
ॐ गदाधरप्रियाग्रहायै नमः ।
ॐ घोरघोरायै नमः ।
ॐ घोररूपायै नमः ।
ॐ घनश्रोण्यै नमः ।
ॐ घनप्रभायै नमः ।
ॐ दैत्येन्द्रप्रबलायै नमः ।
ॐ घण्टावादिन्यै नमः ।
ॐ घोरनिस्वनायै नमः ।
ॐ डाकिन्यै नमः ।
ॐ उमायै नमः ।
ॐ उपेन्द्रायै नमः ।
ॐ उर्वश्यै नमः ।
ॐ उरगासनायै नमः ।
ॐ उत्तमायै नमः ।
ॐ उन्नतायै नमः ।
ॐ उन्नायै नमः ।
ॐ उत्तमस्थानवासिन्यै नमः ।
ॐ चामुण्डायै नमः । १००
ॐ मुण्डिकायै नमः ।
ॐ चण्ड्यै नमः ।
ॐ चण्डदर्पहरायै नमः ।
ॐ उग्रचण्डायै नमः ।
ॐ चण्डचण्डायै नमः ।
ॐ चण्डदैत्यविनाशिन्यै नमः ।
ॐ चण्डरूपायै नमः ।
ॐ प्रचण्डायै नमः ।
ॐ चण्डाचण्डशरीरिण्यै नमः ।
ॐ चतुर्भुजायै नमः ।
ॐ प्रचण्डायै नमः ।
ॐ चराचरनिवासिन्यै नमः ।
ॐ क्षत्रप्रायःशिरोवाहायै नमः ।
ॐ छलाछलतरायै नमः ।
ॐ छल्यै नमः ।
ॐ क्षत्ररूपायै नमः ।
ॐ क्षत्रधरायै नमः ।
ॐ क्षत्रियक्षयकारिण्यै नमः ।
ॐ जयायै नमः ।
ॐ जयदुर्गायै नमः । १२०
ॐ जयन्त्यै नमः ।
ॐ परायै जयदायै नमः ।
ॐ जायिनीजयिन्यै नमः ।
ॐ ज्योत्स्नाजटाधरप्रियायै नमः ।
ॐ अजितायै नमः ।
ॐ जितेन्द्रियायै नमः ।
ॐ जितक्रोधायै नमः ।
ॐ जयमानायै नमः ।
ॐ जनेश्वर्यै नमः ।
ॐ जितमृत्यवे नमः ।
ॐ जरातीतायै नमः ।
ॐ जाह्नव्यै नमः ।
ॐ जनकात्मजायै नमः ।
ॐ झङ्कारायै नमः ।
ॐ झञ्झरीझण्टायै नमः ।
ॐ झङ्कारीझकशोभिन्यै नमः ।
ॐ झखाझमेशायै नमः ।
ॐ झङ्कारीयोनिकल्याणदायिन्यै नमः ।
ॐ झर्झरायै नमः ।
ॐ झमुरीझारायै नमः । १४०
ॐ झराझरतरायै परायै नमः ।
ॐ झञ्झाझमेतायै नमः ।
ॐ झङ्कारीझणाकल्याणदायिन्यै नमः ।
ॐ ङमुनामानसीचिन्त्यायै नमः ।
ॐ ङमुनाशङ्करप्रियायै नमः ।
ॐ टङ्कारीटिटिकायै नमः ।
ॐ टीकाटङ्किन्यै नमः ।
ॐ टवर्गगायै नमः ।
ॐ टापाटोपायै नमः ।
ॐ टटपत्यै नमः ।
ॐ टमन्यै नमः ।
ॐ टमनप्रियायै नमः ।
ॐ ठकारधारिण्यै नमः ।
ॐ ठीकाठङ्कर्यै नमः ।
ॐ ठिकरप्रियायै नमः ।
ॐ ठेकठासायै नमः ।
ॐ ठकरतीठामिन्यै नमः ।
ॐ ठमनप्रियायै नमः ।
ॐ डारहायै नमः ।
ॐ डाकिन्यै नमः । १६०
ॐ डाराडामरायै नमः ।
ॐ डामरप्रियायै नमः ।
ॐ डखिनीडडयुक्तायै नमः ।
ॐ डमरूकरवल्लभायै नमः ।
ॐ ढक्काढक्कीढक्कनादायै नमः ।
ॐ ढोलशब्दप्रबोधिन्यै नमः ।
ॐ ढामिनीढामनप्रीतायै नमः ।
ॐ ढगतन्त्रप्रकाशिन्यै नमः ।
ॐ अनेकरूपिण्यै नमः ।
ॐ अम्बायै नमः ।
ॐ अणिमासिद्धिदायिन्यै नमः ।
ॐ आमन्त्रिण्यै नमः ।
ॐ अणुकर्यै नमः ।
ॐ अणुमद्भानुसंस्थितायै नमः ।
ॐ तारातन्त्रवत्यै नमः ।
ॐ तन्त्रतत्त्वरूपायै नमः ।
ॐ तपस्विन्यै नमः ।
ॐ तरङ्गिण्यै नमः ।
ॐ तत्त्वपरायै नमः ।
ॐ तन्त्रिकातन्त्रविग्रहायै नमः । १८०
ॐ तपोरूपायै नमः ।
ॐ तत्त्वदात्र्यै नमः ।
ॐ तपःप्रीतिप्रधर्षिण्यै नमः ।
ॐ तन्त्रयन्त्रार्चनपरायै नमः ।
ॐ तलातलनिवासिन्यै नमः ।
ॐ तल्पदायै नमः ।
ॐ अल्पदायै नमः ।
ॐ कामास्थिरायै नमः ।
ॐ स्थिरतरायै नमः ।
ॐ स्थित्यै नमः ।
ॐ स्थाणुप्रियायै नमः ।
ॐ स्थितिपरायै नमः ।
ॐ स्थितास्थानप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ दिगम्बरायै नमः ।
ॐ दयारूपायै नमः ।
ॐ दावाग्निदमनीदमायै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ दुर्गपरादेव्यै नमः ।
ॐ दुष्टदैत्यविनाशिन्यै नमः ।
ॐ दमनप्रमदायै नमः । २००
ॐ दैत्यदयादानपरायणायै नमः ।
ॐ दुर्गार्तिनाशिन्यै नमः ।
ॐ दान्तायै नमः ।
ॐ दम्भिन्यै नमः ।
ॐ दम्भवर्जितायै नमः ।
ॐ दिगम्बरप्रियायै नमः ।
ॐ दम्भायै नमः ।
ॐ दैत्यदम्भविदारिण्यै नमः ।
ॐ दमनाशनसौन्दर्यायै नमः ।
ॐ दानवेन्द्रविनाशिन्यै नमः ।
ॐ दयाधरायै नमः ।
ॐ दमन्यै नमः ।
ॐ दर्भपत्रविलासिन्यै नमः ।
ॐ धरणीधारिण्यै नमः ।
ॐ धात्र्यै नमः ।
ॐ धराधरधरप्रियायै नमः ।
ॐ धराधरसुतायै देव्यै नमः ।
ॐ सुधर्माधर्मचारिण्यै नमः ।
ॐ धर्मज्ञायै नमः ।
ॐ धवलाधूलायै नमः । २२०
ॐ धनदायै नमः ।
ॐ धनवर्धिन्यै नमः ।
ॐ धीरायै नमः ।
ॐ अधीरायै नमः ।
ॐ धीरतरायै नमः ।
ॐ धीरसिद्धिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ धन्वन्तरिधराधीरायै नमः ।
ॐ ध्येयध्यानस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ नारायण्यै नमः ।
ॐ नारसिंह्यै नमः ।
ॐ नित्यानन्दनरोत्तमायै नमः ।
ॐ नक्ताऽनक्तवत्यै नमः ।
ॐ नित्यायै नमः ।
ॐ नीलजीमूतसन्निभायै नमः ।
ॐ नीलाङ्ग्यै नमः ।
ॐ नीलवस्त्रायै नमः ।
ॐ नीलपर्वतवासिन्यै नमः ।
ॐ सुनीलपुष्पखचितायै नमः ।
ॐ नीलजम्बूसमप्रभायै नमः ।
ॐ नित्याख्यायै नमः । २४०
ॐ षोडश्यै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ नित्यानित्यसुखावहायै नमः ।
ॐ नर्मदायै नमः ।
ॐ नन्दनानन्दायै नमः ।
ॐ नन्दानन्दविवर्धिन्यै नमः ।
ॐ यशोदानन्दतनयायै नमः ।
ॐ नन्दनोद्यानवासिन्यै नमः ।
ॐ नागान्तकायै नमः ।
ॐ नागवृद्धायै नमः ।
ॐ नागपत्न्यै नमः ।
ॐ नागिन्यै नमः ।
ॐ नमिताशेषजनतायै नमः ।
ॐ नमस्कारवत्यै नमः ।
ॐ नमसे नमः ।
ॐ पीताम्बरायै नमः ।
ॐ पार्वत्यै नमः ।
ॐ पीताम्बरविभूषितायै नमः ।
ॐ पीतमाल्याम्बरधरायै नमः ।
ॐ पीताभायै नमः । २६०
ॐ पिङ्गमूर्धजायै नमः ।
ॐ पीतपुष्पार्चनरतायै नमः ।
ॐ पीतपुष्पसमर्चितायै नमः ।
ॐ परप्रभायै नमः ।
ॐ पितृपत्यै नमः ।
ॐ परसैन्यविनाशिन्यै नमः ।
ॐ परमायै नमः ।
ॐ परतन्त्रायै नमः ।
ॐ परमन्त्रायै नमः ।
ॐ परात्परायै नमः ।
ॐ परायै विद्यायै नमः ।
ॐ परायै सिद्ध्यै नमः ।
ॐ परास्थानप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ पुष्पायै नमः ।
ॐ नित्यं पुष्पवत्यै नमः ।
ॐ पुष्पमालाविभूषितायै नमः ।
ॐ पुरातनायै नमः ।
ॐ पूर्वपरायै नमः ।
ॐ परसिद्धिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ पीतानितम्बिन्यै नमः । २८०
ॐ पीतापीनोन्नतपयस्तन्यै नमः ।
ॐ प्रेमाप्रमध्यमाशेषायै नमः ।
ॐ पद्मपत्रविलासिन्यै नमः ।
ॐ पद्मावत्यै नमः ।
ॐ पद्मनेत्रायै नमः ।
ॐ पद्मायै नमः ।
ॐ पद्ममुखीपरायै नमः ।
ॐ पद्मासनायै नमः ।
ॐ पद्मप्रियायै नमः ।
ॐ पद्मरागस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ पावन्यै नमः ।
ॐ पालिकायै नमः ।
ॐ पात्र्यै नमः ।
ॐ परदायै नमः ।
ॐ वरदायै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ प्रेतसंस्थायै नमः ।
ॐ परानन्दायै नमः ।
ॐ परब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ जिनेश्वरप्रियायै देव्यै नमः । ३००
ॐ पशुरक्तरतप्रियायै नमः ।
ॐ पशुमांसप्रियायै नमः ।
ॐ अपर्णायै नमः ।
ॐ परामृतपरायणायै नमः ।
ॐ पाशिन्यै नमः ।
ॐ पाशिकायै नमः ।
ॐ पशुघ्न्यै नमः ।
ॐ पशुभाषिण्यै नमः ।
ॐ फुल्लारविन्दवदन्यै नमः ।
ॐ फुल्लोत्पलशरीरिण्यै नमः ।
ॐ परानन्दप्रदायै नमः ।
ॐ वीणायै नमः ।
ॐ पशुपाशविनाशिन्यै नमः ।
ॐ फूत्कारायै नमः ।
ॐ फूत्परायै नमः ।
ॐ फेण्यै नमः ।
ॐ फुल्लेन्दीवरलोचनायै नमः ।
ॐ फट्मन्त्रायै नमः ।
ॐ स्फटिकायै नमः ।
ॐ स्वाहायै नमः । ३२०
ॐ स्फोटायै नमः ।
ॐ फट्स्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ स्फाटिकाघुटिकायै नमः ।
ॐ घोरायै नमः ।
ॐ स्फटिकाद्रिस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ वराङ्गनायै नमः ।
ॐ वरधरायै नमः ।
ॐ वाराह्यै नमः ।
ॐ वासुकीवरायै नमः ।
ॐ बिन्दुस्थायै नमः ।
ॐ बिन्दुनीवाण्यै नमः ।
ॐ बिन्दुचक्रनिवासिन्यै नमः ।
ॐ विद्याधर्यै नमः ।
ॐ विशालाक्ष्यै नमः ।
ॐ काशीवासिजनप्रियायै नमः ।
ॐ वेदविद्यायै नमः ।
ॐ विरूपाक्ष्यै नमः ।
ॐ विश्वयुजे नमः ।
ॐ बहुरूपिण्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मशक्त्यै नमः । ३४०
ॐ विष्णुशक्त्यै नमः ।
ॐ पञ्चवक्त्रायै नमः ।
ॐ शिवप्रियायै नमः ।
ॐ वैकुण्ठवासिन्यै देव्यै नमः ।
ॐ वैकुण्ठपददायिन्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मरूपायै नमः ।
ॐ विष्णुरूपायै नमः ।
ॐ परब्रह्ममहेश्वर्यै नमः ।
ॐ भवप्रियायै नमः ।
ॐ भवोद्भवायै नमः ।
ॐ भवरूपायै नमः ।
ॐ भवोत्तमायै नमः ।
ॐ भवपारायै नमः ।
ॐ भवाधारायै नमः ।
ॐ भाग्यवत्प्रियकारिण्यै नमः ।
ॐ भद्रायै नमः ।
ॐ सुभद्रायै नमः ।
ॐ भवदायै नमः ।
ॐ शुम्भदैत्यविनाशिन्यै नमः ।
ॐ भवान्यै नमः । ३६०
ॐ भैरव्यै नमः ।
ॐ भीमायै नमः ।
ॐ भद्रकाल्यै नमः ।
ॐ सुभद्रिकायै नमः ।
ॐ भगिन्यै नमः ।
ॐ भगरूपायै नमः ।
ॐ भगमानायै नमः ।
ॐ भगोत्तमायै नमः ।
ॐ भगप्रियायै नमः ।
ॐ भगवत्यै नमः ।
ॐ भगवासायै नमः ।
ॐ भगाकरायै नमः ।
ॐ भगसृष्टायै नमः ।
ॐ भाग्यवत्यै नमः ।
ॐ भगरूपायै नमः ।
ॐ भगासिन्यै नमः ।
ॐ भगलिङ्गप्रियायै देव्यै नमः ।
ॐ भगलिङ्गपरायणायै नमः ।
ॐ भगलिङ्गस्वरूपायै नमः ।
ॐ भगलिङ्गविनोदिन्यै नमः । ३८०
ॐ भगलिङ्गरतायै देव्यै नमः ।
ॐ भगलिङ्गनिवासिन्यै नमः ।
ॐ भगमालायै नमः ।
ॐ भगकलायै नमः ।
ॐ भगाधारायै नमः ।
ॐ भगाम्बरायै नमः ।
ॐ भगवेगायै नमः ।
ॐ भगाभूषायै नमः ।
ॐ भगेन्द्रायै नमः ।
ॐ भाग्यरूपिण्यै नमः ।
ॐ भगलिङ्गाङ्गसम्भोगायै नमः ।
ॐ भगलिङ्गासवावहायै नमः ।
ॐ भगलिङ्गसमाधुर्यायै नमः ।
ॐ भगलिङ्गनिवेशितायै नमः ।
ॐ भगलिङ्गसुपूजायै नमः ।
ॐ भगलिङ्गसमन्वितायै नमः ।
ॐ भगलिङ्गविरक्तायै नमः ।
ॐ भगलिङ्गसमावृतायै नमः ।
ॐ माधव्यै नमः ।
ॐ माधवीमान्यायै नमः । ४००
ॐ मधुरायै नमः ।
ॐ मधुमानिन्यै नमः ।
ॐ मन्दहासायै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ मोहिन्यै नमः ।
ॐ महदुत्तमायै नमः ।
ॐ महामोहायै नमः ।
ॐ महाविद्यायै नमः ।
ॐ महाघोरायै नमः ।
ॐ महास्मृत्यै नमः ।
ॐ मनस्विन्यै नमः ।
ॐ मानवत्यै नमः ।
ॐ मोदिन्यै नमः ।
ॐ मधुराननायै नमः ।
ॐ मेनकायै नमः ।
ॐ मानिनीमान्यायै नमः ।
ॐ मणिरत्नविभूषणायै नमः ।
ॐ मल्लिकामौलिकामालायै नमः ।
ॐ मालाधरमदोत्तमायै नमः ।
ॐ मदनासुन्दर्यै नमः । ४२०
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ मधुमत्तायै नमः ।
ॐ मधुप्रियायै नमः ।
ॐ मत्तहंसासमोन्नासायै नमः ।
ॐ मत्तसिंहमहासन्यै नमः ।
ॐ महेन्द्रवल्लभायै नमः ।
ॐ भीमायै नमः ।
ॐ मौल्यं च मिथुनात्मजायै नमः ।
ॐ महाकाल्या महाकाल्यै नमः ।
ॐ महाबुद्ध्यै नमः ।
ॐ महोत्कटायै नमः ।
ॐ माहेश्वर्यै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ महिषासुरघातिन्यै नमः ।
ॐ मधुरायै कीर्तिमत्तायै नमः ।
ॐ मत्तमातङ्गगामिन्यै नमः ।
ॐ मदप्रियायै नमः ।
ॐ मांसरतायै नमः ।
ॐ मत्तयुक्कामकारिण्यै नमः ।
ॐ मैथुन्यवल्लभायै देव्यै नमः । ४४०
ॐ महानन्दायै नमः ।
ॐ महोत्सवायै नमः ।
ॐ मरीचये नमः ।
ॐ मारत्यै नमः ।
ॐ मायायै नमः ।
ॐ मनोबुद्धिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ मोहायै नमः ।
ॐ मोक्षायै नमः ।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।
ॐ महत्पदप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ यमरूपायै नमः ।
ॐ यमुनायै नमः ।
ॐ जयन्त्यै नमः ।
ॐ जयप्रदायै नमः ।
ॐ याम्यायै नमः ।
ॐ यमवत्यै नमः ।
ॐ युद्धायै नमः ।
ॐ यदोः कुलविवर्धिन्यै नमः ।
ॐ रमारामायै नमः ।
ॐ रामपत्न्यै नमः । ४६०
ॐ रत्नमालारतिप्रियायै नमः ।
ॐ रत्नसिंहासनस्थायै नमः ।
ॐ रत्नाभरणमण्डितायै नमः ।
ॐ रमण्यै नमः ।
ॐ रमणीयायै नमः ।
ॐ रत्यारसपरायणायै नमः ।
ॐ रतानन्दायै नमः ।
ॐ रतवत्यै नमः ।
ॐ रघूणां कुलवर्धिन्यै नमः ।
ॐ रमणारिपरिभ्राज्यायै नमः ।
ॐ रैधायै नमः ।
ॐ राधिकरत्नजायै नमः ।
ॐ रावीरसस्वरूपायै नमः ।
ॐ रात्रिराजसुखावहायै नमः ।
ॐ ऋतुजायै नमः ।
ॐ ऋतुदायै नमः ।
ॐ ऋद्धायै नमः ।
ॐ ऋतुरूपायै नमः ।
ॐ ऋतुप्रियायै नमः ।
ॐ रक्तप्रियायै नमः । ४८०
ॐ रक्तवत्यै नमः ।
ॐ रङ्गिण्यै नमः ।
ॐ रक्तदन्तिकायै नमः ।
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ लज्जायै नमः ।
ॐ लतिकायै नमः ।
ॐ लीलालग्नानिताक्षिण्यै नमः ।
ॐ लीलायै नमः ।
ॐ लीलावत्यै नमः ।
ॐ लोमहर्षाह्लादनपट्टिकायै नमः ।
ॐ ब्रह्मस्थितायै नमः ।
ॐ ब्रह्मरूपायै नमः ।
ॐ ब्रह्मणा वेदवन्दितायै नमः ।
ॐ ब्रह्मोद्भवायै नमः ।
ॐ ब्रह्मकलायै नमः ।
ॐ ब्रह्माण्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मबोधिन्यै नमः ।
ॐ वेदाङ्गनायै नमः ।
ॐ वेदरूपायै नमः ।
ॐ वनितायै नमः । ५००
ॐ विनतावसायै नमः ।
ॐ बालायै नमः ।
ॐ युवत्यै नमः ।
ॐ वृद्धायै नमः ।
ॐ ब्रह्मकर्मपरायणायै नमः ।
ॐ विन्ध्यस्थायै नमः ।
ॐ विन्ध्यवास्यै नमः ।
ॐ बिन्दुयुक् बिन्दुभूषणायै नमः ।
ॐ विद्यावत्यै नमः ।
ॐ वेदधार्यै नमः ।
ॐ व्यापिकायै नमः ।
ॐ बर्हिण्यै कलायै नमः ।
ॐ वामाचारप्रियायै नमः ।
ॐ वह्नये नमः ।
ॐ वामाचारपरायणायै नमः ।
ॐ वामाचाररतायै देव्यै नमः ।
ॐ वामदेवप्रियोत्तमायै नमः ।
ॐ बुद्धेन्द्रियायै नमः ।
ॐ विबुद्धायै नमः ।
ॐ बुद्धाचरणमालिन्यै नमः । ५२०
ॐ बन्धमोचनकर्त्र्यै नमः ।
ॐ वारुणायै नमः ।
ॐ वरुणालयायै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ शिवप्रियायै नमः ।
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ शुद्धाङ्ग्यै नमः ।
ॐ शुक्लवर्णिकायै नमः ।
ॐ शुक्लपुष्पप्रियायै नमः ।
ॐ शुक्लायै नमः ।
ॐ शिवधर्मपरायणायै नमः ।
ॐ शुक्लस्थायै नमः ।
ॐ शुक्लिन्यै नमः ।
ॐ शुक्लरूपशुक्लपशुप्रियायै नमः ।
ॐ शुक्रस्थायै नमः ।
ॐ शुक्रिण्यै नमः ।
ॐ शुक्रायै नमः ।
ॐ शुक्ररूपायै नमः ।
ॐ शुक्रिकायै नमः ।
ॐ षण्मुख्यै नमः । ५४०
ॐ षडङ्गायै नमः ।
ॐ षट्चक्रविनिवासिन्यै नमः ।
ॐ षड्ग्रन्थियुक्तायै नमः ।
ॐ षोढायै नमः ।
ॐ षण्मात्रे नमः ।
ॐ षडात्मिकायै नमः ।
ॐ षडङ्गयुवत्यै देव्यै नमः ।
ॐ षडङ्गप्रकृत्यै नमः ।
ॐ वश्यै नमः ।
ॐ षडाननायै नमः ।
ॐ षड्रसायै नमः ।
ॐ षष्ठीषष्ठेश्वरीप्रियायै नमः ।
ॐ षड्जवादायै नमः ।
ॐ षोडश्यै नमः ।
ॐ षोढान्यासस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ षट्चक्रभेदनकर्यै नमः ।
ॐ षट्चक्रस्थस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ षोडशस्वररूपायै नमः ।
ॐ षण्मुख्यै नमः ।
ॐ षट्पदान्वितायै नमः । ५६०
ॐ सनकादिस्वरूपायै नमः ।
ॐ शिवधर्मपरायणायै नमः ।
ॐ सिद्धसप्तस्वर्यै नमः ।
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ सुरमात्रे नमः ।
ॐ सुरोत्तमायै नमः ।
ॐ सिद्धविद्यायै नमः ।
ॐ सिद्धमात्रे नमः ।
ॐ सिद्धाऽसिद्धस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ हरायै नमः ।
ॐ हरिप्रियाहारायै नमः ।
ॐ हरिणीहारयुजे नमः ।
ॐ हरिरूपायै नमः ।
ॐ हरिधरायै नमः ।
ॐ हरिणाक्ष्यै नमः ।
ॐ हरिप्रियायै नमः ।
ॐ हेतुप्रियायै नमः ।
ॐ हेतुरतायै नमः ।
ॐ हिताऽहितस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ क्षमायै नमः । ५८०
ॐ क्षमावत्यै नमः ।
ॐ क्षीतायै नमः ।
ॐ क्षुद्रघण्टाविभूषणायै नमः ।
ॐ क्षयङ्कर्यै नमः ।
ॐ क्षितीशायै नमः ।
ॐ क्षीणमध्यसुशोभनायै नमः ।
ॐ अजायै नमः ।
ॐ अनन्तायै नमः ।
ॐ अपर्णायै नमः ।
ॐ अहल्याशेषशायिन्यै नमः ।
ॐ साधूनां स्वान्तर्गतायै नमः ।
ॐ अन्तरानन्दरूपिण्यै नमः ।
ॐ अरूपायै नमः ।
ॐ अमलायै नमः ।
ॐ अर्धायै नमः ।
ॐ अनन्तगुणशालिन्यै नमः ।
ॐ स्वविद्यायै नमः ।
ॐ विद्यकाविद्यायै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ चार्वीन्दुलोचनायै नमः । ६००
ॐ अपराजितायै नमः ।
ॐ जातवेदायै नमः ।
ॐ अजपायै नमः ।
ॐ अमरावत्यै नमः ।
ॐ अल्पायै नमः ।
ॐ स्वल्पायै नमः ।
ॐ अनल्पाद्यायै नमः ।
ॐ अणिमासिद्धिदायिन्यै नमः ।
ॐ अष्टसिद्धिप्रदायै देव्यै नमः ।
ॐ रूपलक्षणसम्युतायै नमः ।
ॐ अरविन्दमुखायै देव्यै नमः ।
ॐ भोगसौख्यप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ आदिविद्यायै नमः ।
ॐ आदिभूतायै नमः ।
ॐ आदिसिद्धिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ सीत्काररूपिण्यै देव्यै नमः ।
ॐ सर्वासनविभूषितायै नमः ।
ॐ इन्द्रप्रियायै नमः ।
ॐ इन्द्राण्यै नमः ।
ॐ इन्द्रप्रस्थनिवासिन्यै नमः । ६२०
ॐ इन्द्राक्ष्यै नमः ।
ॐ इन्द्रवज्रायै नमः ।
ॐ इन्द्रमद्योक्षण्यै नमः ।
ॐ ईलाकामनिवासायै नमः ।
ॐ ईश्वर्यै नमः ।
ॐ ईश्वरवल्लभायै नमः ।
ॐ जनन्यै नमः ।
ॐ ईश्वर्यै नमः ।
ॐ दीनाभेदायै नमः ।
ॐ ईश्वरकर्मकृते नमः ।
ॐ उमायै नमः ।
ॐ कात्यायन्यै नमः ।
ॐ ऊर्ध्वायै नमः ।
ॐ मीनायै नमः ।
ॐ उत्तरवासिन्यै नमः ।
ॐ उमापतिप्रियायै देव्यै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ ओङ्काररूपिण्यै नमः ।
ॐ उरगेन्द्रशिरोरत्नायै नमः ।
ॐ उरगाय नमः । ६४०
ॐ उरगवल्लभायै नमः ।
ॐ उद्यानवासिनीमालायै नमः ।
ॐ प्रशस्तमणिभूषणायै नमः ।
ॐ ऊर्ध्वदन्तायै नमः ।
ॐ उत्तमाङ्ग्यै नमः ।
ॐ उत्तमायै नमः ।
ॐ ऊर्ध्वकेशिन्यै नमः ।
ॐ उमासिद्धिप्रदायै नमः ।
ॐ उरगासनसंस्थितायै नमः ।
ॐ ऋषिपुत्र्यै नमः ।
ॐ ऋषिच्छन्दायै नमः ।
ॐ ऋषिसिद्धिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ उत्सवोत्सवसीमन्तायै नमः ।
ॐ कामिकायै नमः ।
ॐ गुणान्वितायै नमः ।
ॐ एलायै नमः ।
ॐ एकारविद्यायै नमः ।
ॐ एणीविद्याधरायै नमः ।
ॐ ओङ्कारवलयोपेतायै नमः ।
ॐ ओङ्कारपरमायै कलायै नमः । ६६०
ॐ ॐवदवदवाण्यै नमः ।
ॐ ओङ्काराक्षरमण्डितायै नमः ।
ॐ ऐन्द्र्यै नमः ।
ॐ कुलिशहस्तायै नमः ।
ॐ ॐलोकपरवासिन्यै नमः ।
ॐ ओङ्कारमध्यबीजायै नमः ।
ॐ ॐनमोरूपधारिण्यै नमः ।
ॐ परब्रह्मस्वरूपायै नमः ।
ॐ अंशुकायै नमः ।
ॐ अंशुकवल्लभायै नमः ।
ॐ ओङ्कारायै नमः ।
ॐ अःफट् मन्त्रायै नमः ।
ॐ अक्षाक्षरविभूषितायै नमः ।
ॐ अमन्त्रायै नमः ।
ॐ मन्त्ररूपायै नमः ।
ॐ पदशोभासमन्वितायै नमः ।
ॐ प्रणवोङ्काररूपायै नमः ।
ॐ प्रणवोच्चारभाजे नमः ।
ॐ ह्रीङ्काररूपायै नमः ।
ॐ ह्रीङ्कार्यै नमः । ६८०
ॐ वाग्बीजाक्षरभूषणायै नमः ।
ॐ हृल्लेखासिद्धियोगायै नमः ।
ॐ हृत्पद्मासनसंस्थितायै नमः ।
ॐ बीजाख्यायै नमः ।
ॐ नेत्रहृदयायै नमः ।
ॐ ह्रीम्बीजायै नमः ।
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः ।
ॐ क्लीङ्कामराजायै नमः ।
ॐ क्लिन्नायै नमः ।
ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः ।
ॐ क्लीङ्क्लीङ्क्लींरूपिकायै देव्यै नमः ।
ॐ क्रीङ्क्रीङ्क्रींनामधारिण्यै नमः ।
ॐ कमलाशक्तिबीजायै नमः ।
ॐ पाशाङ्कुशविभूषितायै नमः ।
ॐ श्रींश्रीङ्कारायै नमः ।
ॐ महाविद्यायै नमः ।
ॐ श्रद्धायै नमः ।
ॐ श्रद्धावत्यै नमः ।
ॐ ॐऐंक्लींह्रींश्रींपरायै नमः ।
ॐ क्लीङ्कार्यै नमः । ७००
ॐ परमायै कलायै नमः ।
ॐ ह्रींक्लींश्रीङ्कारस्वरूपायै नमः ।
ॐ सर्वकर्मफलप्रदायै नमः ।
ॐ सर्वाढ्यायै नमः ।
ॐ सर्वदेव्यै नमः ।
ॐ सर्वसिद्धिप्रदायै नमः ।
ॐ सर्वज्ञायै नमः ।
ॐ सर्वशक्त्यै नमः ।
ॐ वाग्विभूतिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ सर्वमोक्षप्रदायै देव्यै नमः ।
ॐ सर्वभोगप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ गुणेन्द्रवल्लभायै वामायै नमः ।
ॐ सर्वशक्तिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ सर्वानन्दमय्यै नमः ।
ॐ सर्वसिद्धिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ सर्वचक्रेश्वर्यै देव्यै नमः ।
ॐ सर्वसिद्धेश्वर्यै नमः ।
ॐ सर्वप्रियङ्कर्यै नमः ।
ॐ सर्वसौख्यप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ सर्वानन्दप्रदायै देव्यै नमः । ७२०
ॐ ब्रह्मानन्दप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ मनोवाञ्छितदात्र्यै नमः ।
ॐ मनोबुद्धिसमन्वितायै नमः ।
ॐ अकारादिक्षकारान्तायै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ दुर्गार्तिनाशिन्यै नमः ।
ॐ पद्मनेत्रायै नमः ।
ॐ सुनेत्रायै नमः ।
ॐ स्वधास्वाहावषट्कर्यै नमः ।
ॐ स्ववर्गायै नमः ।
ॐ देववर्गायै नमः ।
ॐ तवर्गायै नमः ।
ॐ समन्वितायै नमः ।
ॐ अन्तस्थायै नमः ।
ॐ वेश्मरूपायै नमः ।
ॐ नवदुर्गायै नमः ।
ॐ नरोत्तमायै नमः ।
ॐ तत्त्वसिद्धिप्रदायै नमः ।
ॐ नीलायै नमः ।
ॐ नीलपताकिन्यै नमः । ७४०
ॐ नित्यरूपायै नमः ।
ॐ निशाकार्यै नमः ।
ॐ स्तम्भिन्यै नमः ।
ॐ मोहिन्यै नमः ।
ॐ वशङ्कर्यै नमः ।
ॐ उच्चाट्यै नमः ।
ॐ उन्माद्यै नमः ।
ॐ कर्षिण्यै नमः ।
ॐ मातङ्ग्यै नमः ।
ॐ मधुमत्तायै नमः ।
ॐ अणिमायै नमः ।
ॐ लघिमायै नमः ।
ॐ सिद्धायै नमः ।
ॐ मोक्षप्रदायै नित्यायै नमः ।
ॐ नित्यानन्दप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ रक्ताङ्ग्यै नमः ।
ॐ रक्तनेत्रायै नमः ।
ॐ रक्तचन्दनभूषितायै नमः ।
ॐ स्वल्पसिद्ध्यै नमः ।
ॐ सुकल्पायै नमः । ७६०
ॐ दिव्यचारणशुक्रभायै नमः ।
ॐ सङ्क्रान्त्यै नमः ।
ॐ सर्वविद्यायै नमः ।
ॐ सप्तवासरभूषितायै नमः ।
ॐ प्रथमायै नमः ।
ॐ द्वितीयायै नमः ।
ॐ तृतीयायै नमः ।
ॐ चतुर्थिकायै नमः ।
ॐ पञ्चम्यै नमः ।
ॐ षष्ठ्यै नमः ।
ॐ विशुद्धायै सप्तम्यै नमः ।
ॐ अष्टम्यै नमः ।
ॐ नवम्यै नमः ।
ॐ दशम्यै नमः ।
ॐ एकादश्यै नमः ।
ॐ द्वादश्यै नमः ।
ॐ त्रयोदश्यै नमः ।
ॐ चतुर्दश्यै नमः ।
ॐ पूर्णिमायै नमः ।
ॐ अमावास्यायै नमः । ७८०
ॐ पूर्वायै नमः ।
ॐ उत्तरायै नमः ।
ॐ परिपूर्णिमायै नमः ।
ॐ खड्गिन्यै नमः ।
ॐ चक्रिण्यै नमः ।
ॐ घोरायै नमः ।
ॐ गदिन्यै नमः ।
ॐ शूलिन्यै नमः ।
ॐ भुशुण्ड्यै नमः ।
ॐ चापिन्यै नमः ।
ॐ बाणायै नमः ।
ॐ सर्वायुधविभूषणायै नमः ।
ॐ कुलेश्वर्यै नमः ।
ॐ कुलवत्यै नमः ।
ॐ कुलाचारपरायणायै नमः ।
ॐ कुलकर्मसुरक्तायै नमः ।
ॐ कुलाचारप्रवर्धिन्यै नमः ।
ॐ कीर्त्यै नमः ।
ॐ श्रिये नमः ।
ॐ रमायै नमः । ८००
ॐ रामायै नमः ।
ॐ धर्मायै नमः ।
ॐ क्षमायै नमः ।
ॐ धृत्यै नमः ।
ॐ स्मृत्यै नमः ।
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ कल्पवृक्षनिवासिन्यै नमः ।
ॐ उग्रायै नमः ।
ॐ उग्रप्रभायै नमः ।
ॐ गौर्यै नमः ।
ॐ वेदविद्याविबोधिन्यै नमः ।
ॐ साध्यायै नमः ।
ॐ सिद्धायै नमः ।
ॐ सुसिद्धायै नमः ।
ॐ विप्ररूपायै नमः ।
ॐ काल्यै नमः ।
ॐ कराल्यै काल्यायै नमः ।
ॐ कालदैत्यविनाशिन्यै नमः ।
ॐ कौलिन्यै नमः ।
ॐ कालिक्यै नमः । ८२०
ॐ कचटतपवर्गिकायै नमः ।
ॐ जयिन्यै नमः ।
ॐ जययुक्तायै नमः ।
ॐ जयदायै नमः ।
ॐ जृम्भिण्यै नमः ।
ॐ स्राविण्यै नमः ।
ॐ द्राविण्यै देव्यै नमः ।
ॐ भेरुण्डायै नमः ।
ॐ विन्ध्यवासिन्यै नमः ।
ॐ ज्योतिर्भूतायै नमः ।
ॐ जयदायै नमः ।
ॐ ज्वालामालासमाकुलायै नमः ।
ॐ भिन्नाभिन्नप्रकाशायै नमः ।
ॐ विभिन्नाभिन्नरूपिण्यै नमः ।
ॐ अश्विन्यै नमः ।
ॐ भरण्यै नमः ।
ॐ नक्षत्रसम्भवानिलायै नमः ।
ॐ काश्यप्यै नमः ।
ॐ विनताख्यातायै नमः ।
ॐ दितिजायै नमः । ८४०
ॐ अदित्यै नमः ।
ॐ कीर्त्यै नमः ।
ॐ कामप्रियायै देव्यै नमः ।
ॐ कीर्त्यकीर्तिविवर्धिन्यै नमः ।
ॐ सद्योमांससमालब्धायै नमः ।
ॐ सद्यश्छिन्नासिशङ्करायै नमः ।
ॐ दक्षिणायै दिशे नमः ।
ॐ उत्तरायै दिशे नमः ।
ॐ पूर्वायै दिशे नमः ।
ॐ पश्चिमायै दिशे नमः ।
ॐ अग्निनैरृतिवायव्येशान्यादिशे नमः ।
ॐ ऊर्ध्वाङ्गायै नमः ।
ॐ अधोगतायै नमः ।
ॐ श्वेतायै नमः ।
ॐ कृष्णायै नमः ।
ॐ रक्तायै नमः ।
ॐ पीतकायै नमः ।
ॐ चतुर्वर्गायै नमः ।
ॐ चतुर्वर्णायै नमः ।
ॐ चतुर्मात्रात्मिकाक्षरायै नमः । ८६०
ॐ चतुर्मुख्यै नमः ।
ॐ चतुर्वेदायै नमः ।
ॐ चतुर्विद्यायै नमः ।
ॐ चतुर्मुखायै नमः ।
ॐ चतुर्गणायै नमः ।
ॐ चतुर्मात्रे नमः ।
ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः ।
ॐ धात्रीविधात्रीमिथुनायै नमः ।
ॐ नारीनायकवासिन्यै नमः ।
ॐ सुरामुदामुदवत्यै नमः ।
ॐ मोदिन्यै नमः ।
ॐ मेनकात्मजायै नमः ।
ॐ ऊर्ध्वकाल्यै नमः ।
ॐ सिद्धिकाल्यै नमः ।
ॐ दक्षिणाकालिकायै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ नीलसरस्वत्यै नमः ।
ॐ बगलायै नमः ।
ॐ छिन्नमस्तकायै नमः ।
ॐ सर्वेश्वर्यै नमः । ८८०
ॐ सिद्धविद्यायै परायै नमः ।
ॐ परमदेवतायै नमः ।
ॐ हिङ्गुलायै नमः ।
ॐ हिङ्गुलाङ्ग्यै नमः ।
ॐ हिङ्गुलाधरवासिन्यै नमः ।
ॐ हिङ्गुलोत्तमवर्णाभायै नमः ।
ॐ हिङ्गुलाभरणायै नमः ।
ॐ जाग्रत्यै नमः ।
ॐ जगन्मात्रे नमः ।
ॐ जगदीश्वरवल्लभायै नमः ।
ॐ जनार्दनप्रियायै देव्यै नमः ।
ॐ जययुक्तायै नमः ।
ॐ जयप्रदायै नमः ।
ॐ जगदानन्दकर्यै नमः ।
ॐ जगदाह्लादकारिण्यै नमः ।
ॐ ज्ञानदानकर्यै नमः ।
ॐ यज्ञायै नमः ।
ॐ जानक्यै नमः ।
ॐ जनकप्रियायै नमः ।
ॐ जयन्त्यै नमः । ९००
ॐ जयदायै नित्यायै नमः ।
ॐ ज्वलदग्निसमप्रभायै नमः ।
ॐ विद्याधरायै नमः ।
ॐ बिम्बोष्ठ्यै नमः ।
ॐ कैलासाचलवासिन्यै नमः ।
ॐ विभवायै नमः ।
ॐ वडवाग्न्यै नमः ।
ॐ अग्निहोत्रफलप्रदायै नमः ।
ॐ मन्त्ररूपायै परायै देव्यै नमः ।
ॐ गुरुरूपिण्यै नमः ।
ॐ गयायै नमः ।
ॐ गङ्गायै नमः ।
ॐ गोमत्यै नमः ।
ॐ प्रभासायै नमः ।
ॐ पुष्करायै नमः ।
ॐ विन्ध्याचलरतायै देव्यै नमः ।
ॐ विन्ध्याचलनिवासिन्यै नमः ।
ॐ बह्वै नमः ।
ॐ बहुसुन्दर्यै नमः ।
ॐ कंसासुरविनाशिन्यै नमः । ९२०
ॐ शूलिन्यै नमः ।
ॐ शूलहस्तायै नमः ।
ॐ वज्रायै नमः ।
ॐ वज्रहरायै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ शान्तिकर्यै नमः ।
ॐ ब्रह्माण्यै नमः ।
ॐ ब्राह्मणप्रियायै नमः ।
ॐ सर्वलोकप्रणेत्र्यै नमः ।
ॐ सर्वरोगहरायै नमः ।
ॐ मङ्गलायै नमः ।
ॐ शोभनायै नमः ।
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ निष्कलायै नमः ।
ॐ परमायै कलायै नमः ।
ॐ विश्वेश्वर्यै नमः ।
ॐ विश्वमात्रे नमः ।
ॐ ललितावासिताननायै नमः ।
ॐ सदाशिवायै नमः । ९४०
ॐ उमायै नमः ।
ॐ क्षेमायै नमः ।
ॐ चण्डिकायै नमः ।
ॐ चण्डविक्रमायै नमः ।
ॐ सर्वदेवमय्यै देव्यै नमः ।
ॐ सर्वागमभयापहायै नमः ।
ॐ ब्रह्मेशविष्णुनमितायै नमः ।
ॐ सर्वकल्याणकारिण्यै नमः ।
ॐ योगिन्यै नमः ।
ॐ योगमात्रे नमः ।
ॐ योगीन्द्रहृदयस्थितायै नमः ।
ॐ योगिजायायै नमः ।
ॐ योगवत्यै नमः ।
ॐ योगीन्द्रानन्दयोगिन्यै नमः ।
ॐ इन्द्रादिनमितायै देव्यै नमः ।
ॐ ईश्वर्यै नमः ।
ॐ ईश्वरप्रियायै नमः ।
ॐ विशुद्धिदायै नमः ।
ॐ भयहरायै नमः ।
ॐ भक्तद्वेषिभयङ्कर्यै नमः । ९६०
ॐ भववेषायै नमः ।
ॐ कामिन्यै नमः ।
ॐ भेरुण्डायै नमः ।
ॐ भयकारिण्यै नमः ।
ॐ बलभद्रप्रियाकारायै नमः ।
ॐ संसारार्णवतारिण्यै नमः ।
ॐ पञ्चभूतायै नमः ।
ॐ सर्वभूतायै नमः ।
ॐ विभूत्यै नमः ।
ॐ भूतिधारिण्यै नमः ।
ॐ सिंहवाहायै नमः ।
ॐ महामोहायै नमः ।
ॐ मोहपाशविनाशिन्यै नमः ।
ॐ मन्दुरायै नमः ।
ॐ मदिरायै नमः ।
ॐ मुद्राऽमुद्रायै नमः ।
ॐ मुद्गरधारिण्यै नमः ।
ॐ सावित्र्यै नमः ।
ॐ महादेव्यै नमः ।
ॐ परप्रियविनायिकायै नमः । ९८०
ॐ यमदूत्यै नमः ।
ॐ पिङ्गाक्ष्यै नमः ।
ॐ वैष्णव्यै नमः ।
ॐ शङ्कर्यै नमः ।
ॐ चन्द्रप्रियायै नमः ।
ॐ चन्द्ररतायै नमः ।
ॐ चन्दनारण्यवासिन्यै नमः ।
ॐ चन्दनेन्द्रसमायुक्तायै नमः ।
ॐ चण्डदैत्यविनाशिन्यै नमः ।
ॐ सर्वेश्वर्यै नमः ।
ॐ यक्षिण्यै नमः ।
ॐ किरात्यै नमः ।
ॐ राक्षस्यै नमः ।
ॐ महाभोगवत्यै देव्यै नमः ।
ॐ महामोक्षप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ विश्वहन्त्र्यै नमः ।
ॐ विश्वरूपायै नमः ।
ॐ विश्वसंहारकारिण्यै नमः ।
ॐ सर्वलोकानां धात्र्यै नमः ।
ॐ हितकारणकामिन्यै नमः । १०००
ॐ कमलायै नमः ।
ॐ सूक्ष्मदायै देव्यै नमः ।
ॐ धात्र्यै नमः ।
ॐ हरविनाशिन्यै नमः ।
ॐ सुरेन्द्रपूजिता सिद्धायै नमः ।
ॐ महातेजोवत्यै नमः ।
ॐ परारूपवत्यै देव्यै नमः ।
ॐ त्रैलोक्याकर्षकारिण्यै नमः । १००८
इति श्री बगलामुखी सहस्रनामावली ॥
(इसी क्रम में माता बगलामुखी के पूरे 1000 नामों का उच्चारण करते हुए पीले फूल, पीली सरसों या हल्दी अर्पित की जाती है।)
मां बगलामुखी सहस्रनामावली अर्चन के अचूक और अकल्पनीय लाभ (Benefits)
माता बगलामुखी की साधना को ‘ब्रह्मास्त्र विद्या’ कहा जाता है। जिस प्रकार ब्रह्मास्त्र का कोई तोड़ नहीं होता, उसी प्रकार माता पीताम्बरा के 1000 नामों के अनुष्ठान को ब्रह्मांड की कोई शक्ति नहीं रोक सकती। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
1. मुकदमों (Court Cases) और कानूनी विवादों में महाविजय
यह माता बगलामुखी साधना का सबसे प्रसिद्ध लाभ है। “ॐ राजद्वारजयप्रदायै नमः” अर्थात् राजद्वार (कोर्ट-कचहरी) में विजय दिलाने वाली। जो व्यक्ति झूठे मुकदमों में फंस गया हो, जिस पर बिना अपराध के आरोप लगे हों, यदि वह इस सहस्रनामावली का अनुष्ठान कर ले, तो न्यायाधीश (Judge) की बुद्धि भी उसके पक्ष में हो जाती है और विरोधियों के पास अदालत में बोलने के लिए शब्द ही नहीं बचते।
2. शत्रुओं का पूर्ण स्तम्भन और विरोधियों का नाश (Vak Stambhan)
जब विरोधी आपको बर्बाद करने पर तुल जाएं, तो माता बगलामुखी की शरण में जाना ही एकमात्र विकल्प है। माता बगलामुखी शत्रुओं का ‘वाक् स्तम्भन’ (जीभ रोक देना) और ‘बुद्धि स्तम्भन’ (सोचने की क्षमता शून्य कर देना) कर देती हैं। आपके शत्रु स्वयं ही अपनी गलतियों से नष्ट हो जाते हैं या आपसे शत्रुता भूलकर मित्र बन जाते हैं।
3. काले जादू, तंत्र-मंत्र और बुरी नज़र का सर्वनाश
माता के 1000 नामों के पाठ से उत्पन्न ‘पीली ऊर्जा’ किसी भी प्रकार के ‘मारण’, ‘उच्चाटन’, ‘वशीकरण’ या ‘विद्वेषण’ जैसे तांत्रिक प्रयोगों को तुरंत नष्ट कर देती है। जिस घर में माता बगलामुखी का अर्चन होता है, वहां भूत-पिशाच, डाकिनी-शाकिनी और ऊपरी बाधाएं फटक भी नहीं सकतीं।
4. वाक् सिद्धि और वाद-विवाद में सफलता
जो लोग राजनीति (Politics), वकालत (Law), मीडिया या सार्वजनिक जीवन में हैं, उनके लिए यह साधना वरदान है। माता की कृपा से साधक को ‘वाक् सिद्धि’ प्राप्त होती है। वह जो भी बोलता है, लोग उसे मंत्रमुग्ध होकर सुनते हैं। वाद-विवाद और डिबेट में उसे कोई हरा नहीं सकता।
5. अपार धन-संपत्ति और स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति
यह एक रहस्य है कि माता पीताम्बरा केवल शत्रुओं का नाश ही नहीं करतीं, बल्कि वे साक्षात महालक्ष्मी का ही एक उग्र स्वरूप हैं। पीला रंग भगवान विष्णु और स्वर्ण (सोने) का प्रतीक है। जो साधक पूर्ण सात्विकता से माता के 1000 नामों का पाठ करता है, उसके घर में स्वर्ण और स्थिर लक्ष्मी का निवास हो जाता है। सारे कर्जे स्वतः ही उतरने लगते हैं।
मां बगलामुखी सहस्रनामावली की प्रामाणिक तांत्रिक और वैदिक अर्चन विधि (Authentic Puja Vidhi)
दस महाविद्याओं की साधना कभी भी बिना नियमों के नहीं की जाती। माता बगलामुखी अत्यंत उग्र और त्वरित फल देने वाली देवी हैं। उनके 1000 नामों का सहस्रार्चन पूर्ण तांत्रिक विधि और शुद्धता के साथ ही किया जाना चाहिए:
1. उत्तम दिन, तिथि और मुहूर्त (Best Time)
माता बगलामुखी की साधना आरंभ करने के लिए गुरुवार (Thursday), मंगलवार (Tuesday), चतुर्दशी तिथि, अष्टमी या नवरात्रि का दिन सबसे शुभ होता है। बगलामुखी साधना के लिए दिन की बजाय रात्रि का समय (निशीथ काल) सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। मध्य रात्रि 10 बजे से लेकर 2 बजे के बीच किया गया पाठ अचूक फल देता है।
2. वस्त्र, दिशा और आसन का विधान
माता को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। स्नान करके पूर्णतः शुद्ध हो जाएं। पीले रंग के वस्त्र (बिना सिले हुए जैसे धोती या साड़ी) धारण करें। पूजा करते समय अपना मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर रखें। बैठने के लिए पीले रंग के ऊनी आसन या कुशा के आसन (जिस पर पीला कपड़ा बिछा हो) का प्रयोग करें।
3. पूजन सामग्री और कलश स्थापना
एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर माता बगलामुखी (पीताम्बरा) का चित्र या सिद्ध ‘बगलामुखी यंत्र’ स्थापित करें। गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का एक अखंड दीपक जलाएं, जिसमें रुई की बत्ती में थोड़ी सी हल्दी लगा लें। धूप-अगरबत्ती प्रज्वलित करें।
4. दृढ़ संकल्प (Sankalpa) और विनियोग
यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है। तांत्रिक पूजा बिना संकल्प के शून्य है। दाएँ हाथ में थोड़ा सा जल, पीले चावल (हल्दी से रंगे हुए अक्षत) और पीला फूल लेकर अपना नाम, गोत्र और पाठ का स्पष्ट उद्देश्य (जैसे- अमुक शत्रु की शांति, कोर्ट केस में विजय या रोग नाश) बोलें। फिर जल धरती पर छोड़ दें।
5. सहस्रार्चन की ब्रह्मास्त्र विधि (1000 आहुतियां/पुष्पांजलि)
अपने पास एक पात्र में 1000 की संख्या में पीली सरसों (Yellow Mustard), हल्दी की गांठें, चने की दाल (Bengal Gram), या पीले पुष्प (जैसे गेंदा, चंपा या कनेर) रख लें। अब माता का एक नाम बोलें (जैसे- ॐ महादुष्टविनाशिन्यै नमः) और थोड़ी सी पीली सरसों या एक पीला फूल माता के यंत्र/चित्र के सामने अर्पित करें। 1000 नामों के साथ 1000 बार अर्पण करने की यह विधि ‘सहस्रार्चन’ कहलाती है।
6. सात्विक भोग (नैवेद्य) और आरती
अर्चन पूर्ण होने के बाद माता को केवल पीले रंग का भोग लगाएं। इसमें बेसन के लड्डू, बूंदी, पीला पेड़ा, चने की दाल और गुड़, या केले शामिल हो सकते हैं। अंत में माता की आरती करें और सबसे अंत में ‘क्षमा प्रार्थना’ अवश्य पढ़ें, क्योंकि अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगना आवश्यक है।
माता बगलामुखी साधना के कठोर नियम और सावधानियां (Strict Rules & Precautions)
महाविद्या साधना दोधारी तलवार की तरह होती है। यदि नियमों का पालन न किया जाए, तो ऊर्जा पलट भी सकती है। इसलिए इन सावधानियों का कठोरता से पालन करें:
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गुरु दीक्षा का महत्व: महाविद्याओं की साधना, विशेषकर जब आप किसी शत्रु के विनाश (सकाम प्रयोग) के लिए कर रहे हों, तो बिना योग्य गुरु के मार्गदर्शन के नहीं करनी चाहिए। भगवान शिव (महाकाल) और गुरु की आज्ञा लेकर ही पाठ शुरू करें।
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सत्कर्म और शुद्ध भावना: यदि आप किसी निर्दोष व्यक्ति का बुरा करने के लिए, या अपने लालच के लिए माता बगलामुखी का प्रयोग करेंगे, तो माता उस निर्दोष को तो बचा लेंगी, लेकिन आपका सर्वनाश हो जाएगा। यह साधना केवल रक्षा (Defense) के लिए है, अकारण आक्रमण (Offense) के लिए नहीं।
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पूर्ण सात्विकता: जब तक आपका अनुष्ठान (जैसे 11, 21 या 36 दिन का) चल रहा है, तब तक मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और किसी भी प्रकार के नशे का पूर्णतया त्याग करें।
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ब्रह्मचर्य: अनुष्ठान के दौरान मन, वचन और कर्म से कठोर ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
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गोपनीयता (Secrecy): अपनी साधना, अपने इष्ट और अपने उद्देश्य को पूरी तरह गुप्त रखें। जो साधना जितनी गुप्त रहती है, वह उतनी ही जल्दी सिद्ध होती है।
Maa Baglamukhi Sahasranamavali कोई सामान्य संस्कृत का पाठ नहीं है; यह एक ऐसा जाग्रत ब्रह्मास्त्र है जो जीवन के सबसे बड़े तूफानों को पल भर में शांत कर सकता है। जब चारों तरफ से दुश्मनों ने घेर लिया हो, न्याय की कोई उम्मीद न बची हो और इंसान पूरी तरह टूट चुका हो, तब माता पीताम्बरा अपनी पीली छटा के साथ भक्त की रक्षा के लिए प्रकट होती हैं।
माता बगलामुखी अपने भक्तों के लिए उसी प्रकार ममतामयी हैं जैसे एक माँ अपने बच्चे के लिए होती है, और दुश्मनों के लिए वे साक्षात काल हैं। पीले वस्त्र पहनकर, पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और निर्भयता के साथ माता के इन 1000 नामों का ध्यान और अर्चन करें। आप स्वयं देखेंगे कि जो शत्रु कल तक आग उगल रहे थे, वे आज आपके सामने नतमस्तक हैं। जय माता पीताम्बरा! जय बगलामुखी माई!
मां बगलामुखी सहस्रनामावली: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या कोई सामान्य गृहस्थ व्यक्ति मां बगलामुखी सहस्रनामावली का पाठ कर सकता है?
जी हाँ, कोई भी सामान्य गृहस्थ अपने परिवार की रक्षा, अकारण उत्पन्न हुए शत्रुओं की शांति, मुकदमों में विजय और धन-धान्य की प्राप्ति के लिए पूर्ण सात्विकता और पवित्रता के साथ इसका पाठ कर सकता है। शर्त केवल इतनी है कि इसका उद्देश्य किसी निर्दोष को कष्ट पहुंचाना नहीं होना चाहिए।
2. सहस्रनामावली का पाठ शुरू करने के लिए कौन सा दिन सबसे शुभ माना जाता है?
माता पीताम्बरा की आराधना और 1000 नामों का पाठ आरंभ करने के लिए गुरुवार (Thursday) का दिन सबसे श्रेष्ठ है। इसके अलावा किसी भी महीने की चतुर्दशी, अष्टमी तिथि, मंगलवार या नवरात्रि के दिनों में भी इस साधना को शुरू किया जा सकता है।
3. सहस्रार्चन (1000 आहुतियों) के समय माता को क्या अर्पित करना सबसे फलदायी होता है?
माता बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। प्रत्येक नाम के उच्चारण के साथ पीली सरसों (Yellow mustard), चने की दाल, साबुत हल्दी की गांठें, या पीले पुष्प (जैसे गेंदा या कनेर) अर्पित करना सबसे अधिक शक्तिशाली और त्वरित फल देने वाला माना जाता है।
4. क्या इस साधना के लिए गुरु दीक्षा अनिवार्य है?
यदि आप माता बगलामुखी की विशुद्ध तांत्रिक साधना, मारण या उच्चाटन जैसे उग्र प्रयोगों के लिए कर रहे हैं, तो गुरु दीक्षा पूर्णतः अनिवार्य है। परंतु, यदि आप केवल भक्ति भाव, अपनी सुरक्षा और सामान्य संकटों को टालने के लिए अर्चन कर रहे हैं, तो भगवान शिव को गुरु मानकर (मानसिक रूप से) इसे किया जा सकता है।
5. सहस्रनाम स्तोत्र और सहस्रनामावली में मुख्य रूप से क्या अंतर है?
‘सहस्रनाम स्तोत्र’ में माता के 1000 नामों को श्लोकों (छंदों) के रूप में गूंथा जाता है जिसे केवल पढ़ा जाता है। जबकि ‘सहस्रनामावली’ में हर नाम एक स्वतंत्र बीज मंत्र होता है (जैसे ॐ पीताम्बरायै नमः)। इसका उपयोग मुख्य रूप से माता को 1000 बार पुष्प या पीली सामग्री अर्पित करने (अर्चन) के लिए किया जाता है।