Shri Sai Sahasranamavali (श्री साई सहस्रनामावली): Lyrics in Sanskrit, शिरडी वाले साईं नाथ की महास्तुति, सिद्ध पाठ विधि और अकल्पनीय लाभIt takes 33 minutes... to read this article !

सनातन धर्म और भारतीय संत परंपरा में शिरडी के साईं बाबा (Shirdi Sai Baba) का स्थान अद्वितीय है। साईं बाबा किसी एक धर्म, जाति या संप्रदाय के नहीं हैं; वे संपूर्ण मानवता के सद्गुरु हैं। उनका मूल मंत्र “सबका मालिक एक” और उनके दो मुख्य सिद्धांत “श्रद्धा” (Faith) और “सबूरी” (Patience) आज भी लाखों-करोड़ों भक्तों के जीवन का आधार हैं। जब भी कोई भक्त सच्चे मन से शिरडी वाले साईं नाथ को पुकारता है, तो बाबा किसी न किसी रूप में उसकी सहायता के लिए अवश्य दौड़े चले आते हैं।

जीवन के कठिनतम समय में, जब इंसान हर तरफ से निराश हो जाता है, बीमारियां शरीर को जकड़ लेती हैं, व्यापार में भारी नुकसान होता है या पारिवारिक कलह जीवन को नर्क बना देती है, तब ‘श्री साई सहस्रनामावली’ (Shri Sai Sahasranamavali) का पाठ एक अचूक संजीवनी का कार्य करता है। ‘सहस्रनामावली’ का अर्थ है सद्गुरु साईं बाबा के एक हजार (1000) अत्यंत पवित्र, शक्तिशाली और जाग्रत नामों की माला।

इस अत्यंत विस्तृत और ज्ञानवर्धक लेख में हम शिरडी साईं बाबा के ईश्वरीय स्वरूप का रहस्य, Shri Sai Sahasranamavali Lyrics in Sanskrit की आध्यात्मिक महिमा, इन 1000 नामों का अर्चन करने से मिलने वाले चमत्कारी लाभ, और इसे सिद्ध करने की प्रामाणिक विधि पर गहराई से चर्चा करेंगे।

शिरडी साईं बाबा: साक्षात परब्रह्म और सद्गुरु का स्वरूप

श्री साई सहस्रनामावली के रहस्य को समझने से पूर्व, साईं बाबा की महिमा को समझना अत्यंत आवश्यक है। साईं बाबा एक अवतारी पुरुष थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव ‘शिरडी’ में व्यतीत किया। उन्होंने फटे हुए वस्त्र (कफनी) पहने, भिक्षा मांगकर भोजन किया और एक जर्जर मस्जिद (जिसे वे ‘द्वारकामाई’ कहते थे) में निवास किया।

परंतु उनके पास असीम ईश्वरीय शक्तियां थीं। उन्होंने पानी से दीपक जलाए, असाध्य रोगों को अपनी चमत्कारी ‘उदी’ (पवित्र भस्म) से ठीक किया, और अपने भक्तों को यह अहसास दिलाया कि ईश्वर सर्वव्यापी है। बाबा ने अपने जीवन काल में ही अपने भक्तों को 11 वचन दिए थे, जिनमें सबसे प्रमुख है: “शिरडी में आएगा जो, आपद दूर भगाएगा वो” और “मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए।”

जब हम साईं बाबा के 1000 नामों का स्मरण करते हैं, तो हम वास्तव में उनके इन्हीं 11 वचनों और उनकी अनंत लीलाओं को अपने हृदय में जाग्रत कर रहे होते हैं।

सहस्रनामावली का महत्व: 1000 नामों की अमोघ शक्ति

‘सहस्रनाम स्तोत्र’ और ‘सहस्रनामावली’ में एक सूक्ष्म लेकिन बहुत महत्वपूर्ण अंतर है। स्तोत्र को श्लोकों (छंदों) के रूप में लगातार पढ़ा जाता है। लेकिन ‘सहस्रनामावली’ में भगवान के हर एक नाम को एक स्वतंत्र बीज मंत्र (Seed Mantra) की तरह उपयोग किया जाता है। इसके हर नाम के आगे ‘ॐ’ और अंत में ‘नमः’ लगा होता है (जैसे- ॐ साईं नाथाय नमः)।

संस्कृत भाषा देववाणी है। इसमें उच्चारण किए गए प्रत्येक वर्ण से ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Vibrations) उत्पन्न होती है। जब आप साईं बाबा के 1000 नामों का उच्चारण करते हुए उन्हें फूल या पवित्र ‘उदी’ अर्पित करते हैं, तो आपके शरीर, मन और घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। इन 1000 नामों में बाबा की करुणा, उनके चमत्कार, उनके द्वारा भक्तों को दिए गए अभयदान और उनके परम गुरु स्वरूप का पूरा वर्णन है।

Shri Sai Sahasranamavali | (श्री साई सहस्रनामावली – 1000 नामों का पवित्र संग्रह: Lyrics in Sanskrit)

(सनातन शास्त्रों की मर्यादा और लेख की लंबाई को ध्यान में रखते हुए, 1000 नामों की पूरी सूची किसी प्रामाणिक साईं चरित्र या स्तोत्र पुस्तक से पढ़नी चाहिए। यहाँ सहस्रार्चन की विधि, ध्यान मंत्र और कुछ प्रमुख सिद्ध नामों का उल्लेख किया जा रहा है, जिनसे अर्चन की शुरुआत होती है।)

सहस्रनामावली आरंभ करने से पूर्व का ध्यान मंत्र (Dhyana Sloka): अर्चन आरंभ करने से पूर्व दोनों हाथ जोड़कर बाबा के इस ध्यान मंत्र का पाठ करें:

सदा निम्बवृक्षस्य मूलाधिवासात्, सुधास्राविणं तिक्तमप्यप्रियं तम्। तरुं कल्पवृक्षाधिकं साधयन्तं, नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथम्॥

(अर्थ: जो सदा नीम के वृक्ष के मूल (नीचे) में निवास करते हैं, और जिनके निवास मात्र से उस कड़वे और अप्रिय वृक्ष से भी अमृत बहने लगा, तथा जिन्होंने उस नीम के पेड़ को कल्पवृक्ष से भी अधिक श्रेष्ठ बना दिया, ऐसे परमेश्वर और सद्गुरु श्री साईं नाथ को मैं नमस्कार करता हूँ।)

ॐ अखण्डसच्चिदानन्दाय नमः ।
ॐ अखिलजीववत्सलाय नमः ।
ॐ अखिलवस्तुविस्ताराय नमः ।
ॐ अक्बराज्ञाभिवन्दिताय नमः ।
ॐ अखिलचेतनाविष्टाय नमः ।
ॐ अखिलवेदसम्प्रदाय नमः ।
ॐ अखिलाण्डेशरूपोऽपि पिण्डे पिण्डे प्रतिष्ठिताय नमः ।
ॐ अग्रण्ये नमः ।
ॐ अग्र्यभूम्ने नमः ।
ॐ अगणितगुणाय नमः ।
ॐ अघौघसन्निवर्तिने नमः ।
ॐ अचिन्त्यमहिम्ने नमः ।
ॐ अचलाय नमः ।
ॐ अच्युताय नमः ।
ॐ अजाय नमः ।
ॐ अजातशत्रवे नमः ।
ॐ अज्ञानतिमिरान्धानां चक्षुरुन्मीलनक्षमाय नमः ।
ॐ आजन्मस्थितिनाशाय नमः ।
ॐ अणिमादिविभूषिताय नमः ।
ॐ अत्युन्नतधुनीज्वालामाज्ञयैवनिवर्तकाय नमः ॥ २०

ॐ अत्युल्बणमहासर्पादपिभक्तसुरक्षित्रे नमः ।
ॐ अतितीव्रतपस्तप्ताय नमः ।
ॐ अतिनम्रस्वभावकाय नमः ।
ॐ अन्नदानसदानिष्ठाय नमः ।
ॐ अतिथिभुक्तशेषभुजे नमः ।
ॐ अदृश्यलोकसञ्चारिणे नमः ।
ॐ अदृष्टपूर्वदर्शित्रे नमः ।
ॐ अद्वैतवस्तुतत्त्वज्ञाय नमः ।
ॐ अद्वैतानन्दवर्षकाय नमः ।
ॐ अद्भुतानन्तशक्तये नमः ।
ॐ अधिष्ठानाय नमः ।
ॐ अधोक्षजाय नमः ।
ॐ अधर्मतरुच्छेत्रे नमः ।
ॐ अधियज्ञाय नमः ।
ॐ अधिभूताय नमः ।
ॐ अधिदैवाय नमः ।
ॐ अध्यक्षाय नमः ।
ॐ अनघाय नमः ।
ॐ अनन्तनाम्ने नमः ।
ॐ अनन्तगुणभूषणाय नमः ॥ ४०

ॐ अनन्तमूर्तये नमः ।
ॐ अनन्ताय नमः ।
ॐ अनन्तशक्तिसम्युताय नमः ।
ॐ अनन्ताश्चर्यवीर्याय नमः ।
ॐ अनह्लक अतिमानिताय नमः ।
ॐ अनवरतसमाधिस्थाय नमः ।
ॐ अनाथपरिरक्षकाय नमः ।
ॐ अनन्यप्रेमसंहृष्टगुरुपादविलीनहृदे नमः ।
ॐ अनाधृताष्टसिद्धये नमः ।
ॐ अनामयपदप्रदाय नमः ।
ॐ अनादिमत्परब्रह्मणे नमः ।
ॐ अनाहतदिवाकराय नमः ।
ॐ अनिर्देश्यवपुषे नमः ।
ॐ अनिमेषेक्षितप्रजाय नमः ।
ॐ अनुग्रहार्थमूर्तये नमः ।
ॐ अनुवर्तितवेङ्कूशाय नमः ।
ॐ अनेकदिव्यमूर्तये नमः ।
ॐ अनेकाद्भुतदर्शनाय नमः ।
ॐ अनेकजन्मजम्पापंस्मृतिमात्रेणहारकाय नमः ।
ॐ अनेकजन्मवृत्तान्तंसविस्तारमुदीरयते नमः ॥ ६०

ॐ अनेकजन्मसम्प्राप्तकर्मबन्धविदारणाय नमः ।
ॐ अनेकजन्मसंसिद्धशक्तिज्ञानस्वरूपवते नमः ।
ॐ अन्तर्बहिश्चसर्वत्रायव्याप्ताखिलचराचराय नमः ।
ॐ अन्तर्हृदय आकाशाय नमः ।
ॐ अन्तकालेऽपि रक्षकाय नमः ।
ॐ अन्तर्यामिणे नमः ।
ॐ अन्तरात्मने नमः ।
ॐ अन्नवस्त्रेप्सितप्रदाय नमः ।
ॐ अपराजितशक्तये नमः ।
ॐ अपरिग्रहभूषिताय नमः ।
ॐ अपवर्गप्रदात्रे नमः ।
ॐ अपवर्गमयाय नमः ।
ॐ अपान्तरात्मरूपेण स्रष्टुरिष्टप्रवर्तकाय नमः ।
ॐ अपावृतकृपागाराय नमः ।
ॐ अपारज्ञानशक्तिमते नमः ।
ॐ अपार्थिवदेहस्थाय नमः ।
ॐ अपाम्पुष्पनिबोधकाय नमः ।
ॐ अप्रपञ्चाय नमः ।
ॐ अप्रमत्ताय नमः ।
ॐ अप्रमेयगुणाकाराय नमः ॥ ८०

ॐ अप्राकृतवपुषे नमः ।
ॐ अप्राकृतपराक्रमाय नमः ।
ॐ अप्रार्थितेष्टदात्रे नमः ।
ॐ अब्दुल्लादि परागतये नमः ।
ॐ अभयं सर्वभूतेभ्यो ददामीति व्रतिने नमः ।
ॐ अभिमानातिदूराय नमः ।
ॐ अभिषेकचमत्कृतये नमः ।
ॐ अभीष्टवरवर्षिणे नमः ।
ॐ अभीक्ष्णदिव्यशक्तिभृते नमः ।
ॐ अभेदानन्दसन्धात्रे नमः ।
ॐ अमर्त्याय नमः ।
ॐ अमृतवाक्सृतये नमः ।
ॐ अरविन्ददलाक्षाय नमः ।
ॐ अमितपराक्रमाय नमः ।
ॐ अरिषड्वर्गनाशिने नमः ।
ॐ अरिष्टघ्नाय नमः ।
ॐ अर्हसत्तमाय नमः ।
ॐ अलभ्यलाभसन्धात्रे नमः ।
ॐ अल्पदानसुतोषिताय नमः ।
ॐ अल्लानामसदावक्त्रे नमः ॥ १००

 

ॐ अलम्बुध्यास्वलङ्कृताय नमः ।
ॐ अवतारितसर्वेशाय नमः ।
ॐ अवधीरितवैभवाय नमः ।
ॐ अवलम्ब्यस्वपदाब्जाय नमः ।
ॐ अवलियेतिविश्रुताय नमः ।
ॐ अवधूताखिलोपाधये नमः ।
ॐ अविशिष्टाय नमः ।
ॐ अवशिष्टस्वकार्यार्थेत्यक्तदेहम्प्रविष्टवते नमः ।
ॐ अवाक्पाणिपादोरवे नमः ।
ॐ अवाङ्मानसगोचराय नमः ।
ॐ अवाप्तसर्वकामोऽपि कर्मण्येव प्रतिष्टिताय नमः ।
ॐ अविच्छिन्नाग्निहोत्राय नमः ।
ॐ अविच्छिन्नसुखप्रदाय नमः ।
ॐ अवेक्षितदिगन्तस्थप्रजापालननिष्ठिताय नमः ।
ॐ अव्याजकरुणासिन्धवे नमः ।
ॐ अव्याहतेष्टिदेशगाय नमः ।
ॐ अव्याहृतोपदेशाय नमः ।
ॐ अव्याहतसुखप्रदाय नमः ।
ॐ अशक्यशक्यकर्त्रे नमः ।
ॐ अशुभाशयशुद्धिकृते नमः ॥ १२०

ॐ अशेषभूतहृत्स्थाणवे नमः ।
ॐ अशोकमोहशृङ्खलाय नमः ।
ॐ अष्टैश्वर्ययुतत्यागिने नमः ।
ॐ अष्टसिद्धिपराङ्मुखाय नमः ।
ॐ असम्योगयुक्तात्मने नमः ।
ॐ असङ्गदृढशस्त्रभृते नमः ।
ॐ असङ्ख्येयावतारेषु ऋणानुबन्धिरक्षिताय नमः ।
ॐ अहम्ब्रह्मस्थितप्रज्ञाय नमः ।
ॐ अहम्भावविवर्जिताय नमः ।
ॐ अहं त्वं च त्वमेवाहमिति तत्त्वप्रबोधकाय नमः ।
ॐ अहेतुककृपासिन्धवे नमः ।
ॐ अहिंसानिरताय नमः ।
ॐ अक्षीणसौहृदाय नमः ।
ॐ अक्षयाय नमः ।
ॐ अक्षयसुखप्रदाय नमः ।
ॐ अक्षरादपि कूटस्थादुत्तम पुरुषोत्तमाय नमः ।
ॐ आखुवाहनमूर्तये नमः ।
ॐ आगमाद्यन्तसन्नुताय नमः ।
ॐ आगमातीतसद्भावाय नमः ।
ॐ आचार्यपरमाय नमः ॥ १४०

ॐ आत्मानुभवसन्तुष्टाय नमः ।
ॐ आत्मविद्याविशारदाय नमः ।
ॐ आत्मानन्दप्रकाशाय नमः ।
ॐ आत्मैवपरमात्मदृशे नमः ।
ॐ आत्मैकसर्वभूतात्मने नमः ।
ॐ आत्मारामाय नमः ।
ॐ आत्मवते नमः ।
ॐ आदित्यमध्यवर्तिने नमः ।
ॐ आदिमध्यान्तवर्जिताय नमः ।
ॐ आनन्दपरमानन्दाय नमः ।
ॐ आनन्दप्रदाय नमः ।
ॐ आनाकमादृताज्ञाय नमः ।
ॐ आनतावननिवृतये नमः ।
ॐ आपदामपहर्त्रे नमः ।
ॐ आपद्बान्धवाय नमः ।
ॐ आफ्रिकागतवैद्याय परमानन्ददायकाय नमः ।
ॐ आयुरारोग्यदात्रे नमः ।
ॐ आर्तत्राणपरायणाय नमः ।
ॐ आरोपणापवादैश्च मायायोगवियोगकृते नमः ।
ॐ आविष्कृत तिरोधत्त बहुरूपविडम्बनाय नमः ॥ १६०

ॐ आर्द्रचित्तेन भक्तानां सदानुग्रहवर्षकाय नमः ।
ॐ आशापाशविमुक्ताय नमः ।
ॐ आशापाशविमोचकाय नमः ।
ॐ इच्छाधीनजगत्सर्वाय नमः ।
ॐ इच्छाधीनवपुषे नमः ।
ॐ इष्टेप्सितार्थदात्रे नमः ।
ॐ इच्छामोहनिवर्तकाय नमः ।
ॐ इच्छोत्थदुःखसञ्छेत्रे नमः ।
ॐ इन्द्रियारातिदर्पघ्ने नमः ।
ॐ इन्दिरारमणाह्लादिनामसाहस्रपूतहृदे नमः ।
ॐ इन्दीवरदलज्योतिर्लोचनालङ्कृताननाय नमः ।
ॐ इन्दुशीतलभाषिणे नमः ।
ॐ इन्दुवत्प्रियदर्शनाय नमः ।
ॐ इष्टापूर्तशतैर्लब्धाय नमः ।
ॐ इष्टदैवस्वरूपधृते नमः ।
ॐ इष्टिकादानसुप्रीताय नमः ।
ॐ इष्टिकालयरक्षिताय नमः ।
ॐ ईशासक्तमनोबुद्धये नमः ।
ॐ ईशाराधनतत्पराय नमः ।
ॐ ईशिताखिलदेवाय नमः ॥ १८०

ॐ ईशावास्यार्थसूचकाय नमः ।
ॐ उच्चारणाधृते भक्तहृदान्त उपदेशकाय नमः ।
ॐ उत्तमोत्तममार्गिणे नमः ।
ॐ उत्तमोत्तारकर्मकृते नमः ।
ॐ उदासीनवदासीनाय नमः ।
ॐ उद्धरामीत्युदीरकाय नमः ।
ॐ उद्धवाय मया प्रोक्तं भागवतमिति ब्रुवते नमः ।
ॐ उन्मत्तश्वाभिगोप्त्रे नमः ।
ॐ उन्मत्तवेषनामधृते नमः ।
ॐ उपद्रवनिवारिणे नमः ।
ॐ उपांशुजपबोधकाय नमः ।
ॐ उमेशामेशयुक्तात्मने नमः ।
ॐ ऊर्जितभक्तिलक्षणाय नमः ।
ॐ ऊर्जितवाक्प्रदात्रे नमः ।
ॐ ऊर्ध्वरेतसे नमः ।
ॐ ऊर्ध्वमूलमधःशाखामश्वत्थं भस्मसात्कराय नमः ।
ॐ ऊर्ध्वगतिविधात्रे नमः ।
ॐ ऊर्ध्वबद्धद्विकेतनाय नमः ।
ॐ ऋजवे नमः ।
ॐ ऋतम्बरप्रज्ञाय नमः ॥ २००

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ॐ ऋणक्लिष्टधनप्रदाय नमः ।
ॐ ऋणानुबद्धजन्तुनां ऋणमुक्त्यै फलप्रदाय नमः ।
ॐ एकाकिने नमः ।
ॐ एकभक्तये नमः ।
ॐ एकवाक्कायमानसाय नमः ।
ॐ एकादश्यां स्वभक्तानां स्वतनोकृतनिष्कृतये नमः ।
ॐ एकाक्षरपरज्ञानिने नमः ।
ॐ एकात्मा सर्वदेशदृशे नमः ।
ॐ एकेश्वरप्रतीतये नमः ।
ॐ एकरीत्यादृताखिलाय नमः ।
ॐ ऐक्यानन्दगतद्वन्द्वाय नमः ।
ॐ ऐक्यानन्दविधायकाय नमः ।
ॐ ऐक्यकृते नमः ।
ॐ ऐक्यभूतात्मने नमः ।
ॐ ऐहिकामुष्मिकप्रदाय नमः ।
ॐ ओङ्कारादराय नमः ।
ॐ ओजस्विने नमः ।
ॐ औषधीकृतभस्मदाय नमः ।
ॐ कथाकीर्तनपद्धत्यां नारदानुष्ठितं स्तुवते नमः ।
ॐ कपर्दे क्लेशनाशिने नमः ॥ २२०

ॐ कबीर्दासावतारकाय नमः ।
ॐ कपर्दे पुत्ररक्षार्थमनुभूत तदामयाय नमः ।
ॐ कमलाश्लिष्टपादाब्जाय नमः ।
ॐ कमलायतलोचनाय नमः ।
ॐ कन्दर्पदर्पविध्वंसिने नमः ।
ॐ कमनीयगुणालयाय नमः ।
ॐ कर्ताऽकर्ता अन्यथाकर्त्रे नमः ।
ॐ कर्मयुक्तोप्यकर्मकृते नमः ।
ॐ कर्मकृते नमः ।
ॐ कर्मनिर्मुक्ताय नमः ।
ॐ कर्माऽकर्मविचक्षणाय नमः ।
ॐ कर्मबीजक्षयङ्कर्त्रे नमः ।
ॐ कर्मनिर्मूलनक्षमाय नमः ।
ॐ कर्मव्याधिव्यपोहिने नमः ।
ॐ कर्मबन्धविनाशकाय नमः ।
ॐ कलिमलापहारिणे नमः ।
ॐ कलौ प्रत्यक्षदैवताय नमः ।
ॐ कलियुगावताराय नमः ।
ॐ कल्युत्थभवभञ्जनाय नमः ।
ॐ कल्याणानन्तनाम्ने नमः ॥ २४०

ॐ कल्याणगुणभूषणाय नमः ।
ॐ कविदासगणुत्रात्रे नमः ।
ॐ कष्टनाशकरौषधाय नमः ।
ॐ काकादीक्षित रक्षायां धुरीणो अहमितीरकाय नमः ।
ॐ कानाभिलादपि त्रात्रे नमः ।
ॐ कानने पानदानकृते नमः ।
ॐ कामजिते नमः ।
ॐ कामरूपिणे नमः ।
ॐ कामसङ्कल्पवर्जिताय नमः ।
ॐ कामितार्थप्रदात्रे नमः ।
ॐ कामादिशत्रुनाशनाय नमः ।
ॐ काम्यकर्मसुसन्यस्ताय नमः ।
ॐ कामेराशक्तिनाशकाय नमः ।
ॐ कालाय नमः ।
ॐ कालकालाय नमः ।
ॐ कालातीताय नमः ।
ॐ कालकृते नमः ।
ॐ कालदर्पविनाशिने नमः ।
ॐ कालरातर्जनक्षमाय नमः ।
ॐ कालशुनकदत्तान्नं ज्वरं हरेदिति ब्रुवते नमः ॥ २६०

ॐ कालाग्निसदृशक्रोधाय नमः ।
ॐ काशीरामसुरक्षकाय नमः ।
ॐ कीर्तिव्याप्तदिगन्ताय नमः ।
ॐ कुप्नीवीतकलेबराय नमः ।
ॐ कुम्बाराग्निशिशुत्रात्रे नमः ।
ॐ कुष्ठरोगनिवारकाय नमः ।
ॐ कूटस्थाय नमः ।
ॐ कृतज्ञाय नमः ।
ॐ कृत्स्नक्षेत्रप्रकाशकाय नमः ।
ॐ कृत्स्नज्ञाय नमः ।
ॐ कृपापूर्णाय नमः ।
ॐ कृपयापालितार्भकाय नमः ।
ॐ कृष्णरामशिवात्रेयमारुत्यादिस्वरूपधृते नमः ।
ॐ केवलात्मानुभूतये नमः ।
ॐ कैवल्यपददायकाय नमः ।
ॐ कोविदाय नमः ।
ॐ कोमलाङ्गाय नमः ।
ॐ कोपव्याजशुभप्रदाय नमः ।
ॐ कोऽहमिति दिवानक्तं विचारमनुशासकाय नमः ।
ॐ क्लिष्टरक्षाधुरीणाय नमः ॥ २८०

ॐ क्रोधजिते नमः ।
ॐ क्लेशनाशनाय नमः ।
ॐ गगनसौक्ष्म्यविस्ताराय नमः ।
ॐ गम्भीरमधुरस्वनाय नमः ।
ॐ गङ्गातीरनिवासिने नमः ।
ॐ गङ्गोत्पत्तिपदाम्बुजाय नमः ।
ॐ गङ्गागिरिरितिख्यात यतिश्रेष्ठेन संस्तुताय नमः ।
ॐ गन्धपुष्पाक्षतौ पूज्याय नमः ।
ॐ गतिविदे नमः ।
ॐ गतिसूचकाय नमः ।
ॐ गह्वरेष्ठपुराणाय नमः ।
ॐ गर्वमात्सर्यवर्जिताय नमः ।
ॐ गाननृत्यविनोदाय नमः ।
ॐ गालवण्कर्वरप्रदाय नमः ।
ॐ गिरीशसदृशत्यागिने नमः ।
ॐ गीताचार्याय नमः ।
ॐ गीताद्भुतार्थवक्त्रे नमः ।
ॐ गीतारहस्यसम्प्रदाय नमः ।
ॐ गीताज्ञानमयाय नमः ।
ॐ गीतापूर्णोपदेशकाय नमः ॥ ३००

ॐ गुणातीताय नमः ।
ॐ गुणात्मने नमः ।
ॐ गुणदोषविवर्जिताय नमः ।
ॐ गुणागुणेषु वर्तन्त इत्यनासक्ति सुस्थिराय नमः ।
ॐ गुप्ताय नमः ।
ॐ गुहाहिताय नमः ।
ॐ गूढाय नमः ।
ॐ गुप्तसर्वनिबोधकाय नमः ।
ॐ गुर्वङ्घ्रितीव्रभक्तिश्चेत्तदेवालमितीरयते नमः ।
ॐ गुरवे नमः ।
ॐ गुरुतमाय नमः ।
ॐ गुह्याय नमः ।
ॐ गुरुपादपरायणाय नमः ।
ॐ गुर्वीशाङ्घ्रिसदाध्यात्रे नमः ।
ॐ गुरुसन्तोषवर्धनाय नमः ।
ॐ गुरुप्रेमसमालब्धपरिपूर्णस्वरूपवते नमः ।
ॐ गुरूपासनसंसिद्धाय नमः ।
ॐ गुरुमार्गप्रवर्तकाय नमः ।
ॐ गुर्वात्मदेवताबुद्ध्या ब्रह्मानन्दमयाय नमः ।
ॐ गुरोस्समाधिपार्श्वस्थनिम्बच्छायानिवासकृते नमः ॥ ३२०

ॐ गुरुवेङ्कुश सम्प्राप्तवस्त्रेष्टिका सदाधृताय नमः ।
ॐ गुरुपरम्परादिष्टसर्वत्यागपरायणाय नमः ।
ॐ गुरुपरम्पराप्राप्तसच्चिदानन्दमूर्तिमते नमः ।
ॐ गृहहीनमहाराजाय नमः ।
ॐ गृहमेधिपराश्रयाय नमः ।
ॐ गोपींस्त्राता यथा कृष्ण नाच्ने कुलावनाय नमः ।
ॐ गोपालगुण्डूरायादि पुत्रपौत्रादिवर्धनाय नमः ।
ॐ गोष्पदीकृतकष्टाब्धये नमः ।
ॐ गोदावरीतटागताय नमः ।
ॐ चतुर्भुजाय नमः ।
ॐ चतुर्बाहुनिवारितनृसङ्कटाय नमः ।
ॐ चमत्कारैः सङ्क्लिष्टौर्भक्तिज्ञानविवर्धनाय नमः ।
ॐ चन्दनालेपारुष्टानां दुष्टानां धर्षणक्षमाय नमः ।
ॐ चन्दोर्करादि भक्तानां सदापालननिष्ठिताय नमः ।
ॐ चराचरपरिव्याप्ताय नमः ।
ॐ चर्मदाहेप्यविक्रियाय नमः ।
ॐ चान्द्भायाख्य पाटेलार्थं चमत्कार सहायकृते नमः ।
ॐ चिन्तामग्न परित्राणे तस्य सर्वभारं वहाय नमः ।
ॐ चित्रातिचित्रचारित्राय नमः ।
ॐ चिन्मयानन्दाय नमः ॥ ३४०

ॐ चिरवासकृतैर्बन्धैः शिर्डीग्रामं पुनर्गताय नमः ।
ॐ चोराद्याहृतवस्तूनिदत्तान्येवेतिहर्षिताय नमः ।
ॐ छिन्नसंशयाय नमः ।
ॐ छिन्नसंसारबन्धनाय नमः ।
ॐ जगत्पित्रे नमः ।
ॐ जगन्मात्रे नमः ।
ॐ जगत्त्रात्रे नमः ।
ॐ जगद्धिताय नमः ।
ॐ जगत्स्रष्टाय नमः ।
ॐ जगत्साक्षिणे नमः ।
ॐ जगद्व्यापिने नमः ।
ॐ जगद्गुरवे नमः ।
ॐ जगत्प्रभवे नमः ।
ॐ जगन्नाथाय नमः ।
ॐ जगदेकदिवाकराय नमः ।
ॐ जगन्मोहचमत्काराय नमः ।
ॐ जगन्नाटकसूत्रधृते नमः ।
ॐ जगन्मङ्गलकर्त्रे नमः ।
ॐ जगन्मायेतिबोधकाय नमः ।
ॐ जडोन्मत्तपिशाचाभोप्यन्तःसच्चित्सुखस्थिताय नमः ॥ ३६०

ॐ जन्मबन्धविनिर्मुक्ताय नमः ।
ॐ जन्मसाफल्यमन्त्रदाय नमः ।
ॐ जन्मजन्मान्तरज्ञाय नमः ।
ॐ जन्मनाशरहस्यविदे नमः ।
ॐ जनजल्पमनाद्यत्य जपसिद्धि महाद्युतये नमः ।
ॐ जप्तनामसुसन्तुष्टहरिप्रत्यक्षभाविताय नमः ।
ॐ जपप्रेरितभक्ताय नमः ।
ॐ जप्यनाम्ने नमः ।
ॐ जनेश्वराय नमः ।
ॐ जलहीनस्थले खिन्नभक्तार्थं जलसृष्टिकृते नमः ।
ॐ जवारालीति मौलानासेवने अक्लिष्टमानसाय नमः ।
ॐ जातग्रामाद्गुरोर्ग्रामं तस्मात्पूर्वस्थलं व्रजते नमः ।
ॐ जातिर्भेदमतैर्भेद इति भेदतिरस्कृताय नमः ।
ॐ जातिविद्याधनैश्चापि हीनानार्द्रहृदावनाय नमः ।
ॐ जाम्बूनदपरित्यागिने नमः ।
ॐ जागरूकावितप्रजाय नमः ।
ॐ जायापत्यगृहक्षेत्रस्वजनस्वार्थवर्जिताय नमः ।
ॐ जितद्वैतमहामोहाय नमः ।
ॐ जितक्रोधाय नमः ।
ॐ जितेन्द्रियाय नमः ॥ ३८०

ॐ जितकन्दर्पदर्पाय नमः ।
ॐ जितात्मने नमः ।
ॐ जितषड्रिपवे नमः ।
ॐ जीर्णहूणालयस्थाने पूर्वजन्मकृतं स्मरते नमः ।
ॐ जीर्णहूणालयं चाद्य सर्वमर्त्यालयङ्कराय नमः ।
ॐ जीर्णवस्त्रसमं मत्वा देहं त्यक्त्वा सुखं स्थिताय नमः ।
ॐ जीर्णवस्त्रसमं पश्यन् त्यक्त्वा देहं प्रविष्टवते नमः ।
ॐ जीवन्मुक्ताय नमः ।
ॐ जीवानां मुक्तिसद्गतिदायकाय नमः ।
ॐ ज्योतिश्शास्त्ररहस्यज्ञाय नमः ।
ॐ ज्योतिर्ज्ञानप्रदाय नमः ।
ॐ ज्योक्चसूर्यं दृशा पश्यते नमः ।
ॐ ज्ञानभास्करमूर्तिमते नमः ।
ॐ ज्ञातसर्वरहस्याय नमः ।
ॐ ज्ञातब्रह्मपरात्पराय नमः ।
ॐ ज्ञानभक्तिप्रदाय नमः ।
ॐ ज्ञानविज्ञाननिश्चयाय नमः ।
ॐ ज्ञानशक्तिसमारूढाय नमः ।
ॐ ज्ञानयोगव्यवस्थिताय नमः ।
ॐ ज्ञानाग्निदग्धकर्मणे नमः ॥ ४००

ॐ ज्ञाननिर्धूतकल्मषाय नमः ।
ॐ ज्ञानवैराग्यसन्धात्रे नमः ।
ॐ ज्ञानसञ्छिन्नसंशयाय नमः ।
ॐ ज्ञानापास्तमहामोहाय नमः ।
ॐ ज्ञानीत्यात्मैव निश्चयाय नमः ।
ॐ ज्ञानेश्वरीपठद्दैवप्रतिबन्धनिवारकाय नमः ।
ॐ ज्ञानाय नमः ।
ॐ ज्ञेयाय नमः ।
ॐ ज्ञानगम्याय नमः ।
ॐ ज्ञातसर्व परं मताय नमः ।
ॐ ज्योतिषां प्रथमज्योतिषे नमः ।
ॐ ज्योतिर्हीनद्युतिप्रदाय नमः ।
ॐ तपस्सन्दीप्ततेजस्विने नमः ।
ॐ तप्तकाञ्चनसन्निभाय नमः ।
ॐ तत्त्वज्ञानार्थदर्शिने नमः ।
ॐ तत्त्वमस्यादिलक्षिताय नमः ।
ॐ तत्त्वविदे नमः ।
ॐ तत्त्वमूर्तये नमः ।
ॐ तन्द्रालस्यविवर्जिताय नमः ।
ॐ तत्त्वमालाधराय नमः ॥ ४२०

ॐ तत्त्वसारविशारदाय नमः ।
ॐ तर्जितान्तकदूताय नमः ।
ॐ तमसः पराय नमः ।
ॐ तात्यागणपतिप्रेष्ठाय नमः ।
ॐ तात्यानूल्कर्गतिप्रदाय नमः ।
ॐ तारकब्रह्मनाम्ने नमः ।
ॐ तमोरजोविवर्जिताय नमः ।
ॐ तामरसदलाक्षाय नमः ।
ॐ ताराबाय्यासुरक्षाय नमः ।
ॐ तिलकपूजिताङ्घ्रये नमः ।
ॐ तिर्यग्जन्तुगतिप्रदाय नमः ।
ॐ तीर्थकृतनिवासाय नमः ।
ॐ तीर्थपादाय नमः ।
ॐ तीव्रभक्तिनृसिंहादिभक्तालीभूर्यनुग्रहाय नमः ।
ॐ तीव्रप्रेमविरागाप्तवेङ्कटेशकृपानिधये नमः ।
ॐ तुल्यप्रियाऽप्रियाय नमः ।
ॐ तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतये नमः ।
ॐ तुल्याधिकविहीनाय नमः ।
ॐ तुष्टसज्जनसंवृताय नमः ।
ॐ तृप्तात्मने नमः ॥ ४४०

ॐ तृषाहीनाय नमः ।
ॐ तृणीकृतजगद्वसवे नमः ।
ॐ तैलीकृतजलापूर्णदीपसञ्ज्वलितालयाय नमः ।
ॐ त्रिकालज्ञाय नमः ।
ॐ त्रिमूर्तये नमः ।
ॐ त्रिगुणातीताय नमः ।
ॐ त्रियामायोगनिष्ठात्मा दशदिग्भक्तपालकाय नमः ।
ॐ त्रिवर्गमोक्षसन्धात्रे नमः ।
ॐ त्रिपुटीरहितस्थितये नमः ।
ॐ त्रिलोकस्वेच्छसञ्चारिणे नमः ।
ॐ त्रैलोक्यतिमिरापहाय नमः ।
ॐ त्यक्तकर्मफलासङ्गाय नमः ।
ॐ त्यक्तभोगसदासुखिने नमः ।
ॐ त्यक्तदेहात्मबुद्धये नमः ।
ॐ त्यक्तसर्वपरिग्रहाय नमः ।
ॐ त्यक्त्वा मायामयं सर्वं स्वे महिम्नि सदास्थिताय नमः ।
ॐ दण्डधृते नमः ।
ॐ दण्डनार्हाणां दुष्टवृत्तेर्निवर्तकाय नमः ।
ॐ दम्भदर्पातिदूराय नमः ।
ॐ दक्षिणामूर्तये नमः ॥ ४६०

ॐ दक्षिणादानकर्तृभ्यो दशधाप्रतिदायकाय नमः ।
ॐ दक्षिणाप्रार्थनाद्वारा शुभकृत्तत्त्वबोधकाय नमः ।
ॐ दयापराय नमः ।
ॐ दयासिन्धवे नमः ।
ॐ दत्तात्रेयाय नमः ।
ॐ दरिद्रोऽयं धनीवेति भेदाचारविवर्जिताय नमः ।
ॐ दहराकाशभानवे नमः ।
ॐ दग्धहस्तार्भकावनाय नमः ।
ॐ दारिद्र्यदुःखभीतिघ्नाय नमः ।
ॐ दामोदरवरप्रदाय नमः ।
ॐ दानशौण्डाय नमः ।
ॐ दान्ताय नमः ।
ॐ दानैश्चान्यान् वशं नयते नमः ।
ॐ दानमार्गस्खलत्पादनानाचान्दोर्करावनाय नमः ।
ॐ दिव्यज्ञानप्रदाय नमः ।
ॐ दिव्यमङ्गलविग्रहाय नमः ।
ॐ दीनदयापराय नमः ।
ॐ दीर्घदृशे नमः ।
ॐ दीनवत्सलाय नमः ।
ॐ दुष्टानां दमने शक्ताय नमः ॥ ४८०

ॐ दुराधर्षतपोबलाय नमः ।
ॐ दुर्भिक्षोप्यन्नदात्रे नमः ।
ॐ दुरादृष्टविनाशकृते नमः ।
ॐ दुःखशोकभयद्वेषमोहाद्यशुभनाशकाय नमः ।
ॐ दुष्टनिग्रहशिष्टानुग्रहरूपमहाव्रताय नमः ।
ॐ दुष्टमूर्खजडादीनामप्रकाशस्वरूपवते नमः ।
ॐ दुष्टजन्तुपरित्रात्रे नमः ।
ॐ दूरवर्तिसमस्तदृशे नमः ।
ॐ दृश्यं नश्यं न विश्वास्यमिति बुद्धि प्रबोधकाय नमः ।
ॐ दृश्यं सर्वं हि चैतन्यमित्यानन्द प्रतिष्ठाय नमः ।
ॐ देहे विगलिताशाय नमः ।
ॐ देहयात्रार्थमन्नभुजे नमः ।
ॐ देहो गेहस्ततो मान्तु निन्ये गुरुरितीरकाय नमः ।
ॐ देहात्मबुद्धिहीनाय नमः ।
ॐ देहमोहप्रभञ्जनाय नमः ।
ॐ देहो देवालयस्तस्मिन् देवं पश्येत्युदीरयते नमः ।
ॐ दैवीसम्पत्प्रपूर्णाय नमः ।
ॐ देशोद्धारसहायकृते नमः ।
ॐ द्वन्द्वमोहविनिर्मुक्ताय नमः ।
ॐ द्वन्द्वातीतविमत्सराय नमः ॥ ५००

ॐ द्वारकामायिवासिने नमः ।
ॐ द्वेषद्रोहविवर्जिताय नमः ।
ॐ द्वैताद्वैतविशिष्ठादीन् काले स्थाने विबोधकाय नमः ।
ॐ धनहीनां धनाड्यां च समदृष्ट्यैव रक्षकाय नमः ।
ॐ धनदेनसमत्यागिने नमः ।
ॐ धरणीधरसन्निभाय नमः ।
ॐ धर्मज्ञाय नमः ।
ॐ धर्मसेतवे नमः ।
ॐ धर्मस्थापनसम्भवाय नमः ।
ॐ धुमालेउपासनीपत्न्यो निर्वाणे सद्गतिप्रदाय नमः ।
ॐ धूपखेडा पटेल् चान्द्भाय् नष्टाश्व स्थानसूचकाय नमः ।
ॐ धूमयान पतत्पाथेवारपत्नी सुरक्षकाय नमः ।
ॐ ध्यानावस्थितचेतसे नमः ।
ॐ धृत्युत्साहसमन्विताय नमः ।
ॐ नतजनावनाय नमः ।
ॐ नरलोकमनोरमाय नमः ।
ॐ नष्टदृष्टिप्रदात्रे नमः ।
ॐ नरलोकविडम्बनाय नमः ।
ॐ नागसर्पे मयूरे च समारूढ षडाननाय नमः ।
ॐ नानाचान्दोर्कमाहूय तत्सद्गत्यै कृतोद्यमाय नमः ॥ ५२०

ॐ नानानिम्होण्करस्यान्ते स्वाङ्घ्रि ध्यानलयप्रदाय नमः ।
ॐ नानादेशाभिधाकाराय नमः ।
ॐ नानाविधिसमर्चिताय नमः ।
ॐ नारायणमहाराजसंश्लाघितपदाम्बुजाय नमः ।
ॐ नारायणपराय नमः ।
ॐ नामवर्जिताय नमः ।
ॐ निगृहितेन्द्रियग्रामाय नमः ।
ॐ निगमागमगोचराय नमः ।
ॐ नित्यसर्वगतस्थाणवे नमः ।
ॐ नित्यतृप्ताय नमः ।
ॐ निराश्रयाय नमः ।
ॐ नित्यान्नदानधर्मिष्ठाय नमः ।
ॐ नित्यानन्दप्रवाहकाय नमः ।
ॐ नित्यमङ्गलधाम्ने नमः ।
ॐ नित्याग्निहोत्रवर्धनाय नमः ।
ॐ नित्यकर्मनियोक्त्रे नमः ।
ॐ नित्यसत्त्वस्थिताय नमः ।
ॐ निम्बपादपमूलस्थाय नमः ।
ॐ निरन्तराग्निरक्षित्रे नमः ।
ॐ निस्पृहाय नमः ॥ ५४०

ॐ निर्विकल्पाय नमः ।
ॐ निरङ्कुशगतागतये नमः ।
ॐ निर्जितकामनादोषाय नमः ।
ॐ निराशाय नमः ।
ॐ निरञ्जनाय नमः ।
ॐ निर्विकल्पसमाधिस्थाय नमः ।
ॐ निरपेक्षाय नमः ।
ॐ निर्गुणाय नमः ।
ॐ निर्द्वन्द्वाय नमः ।
ॐ नित्यसत्त्वस्थाय नमः ।
ॐ निर्विकाराय नमः ।
ॐ निश्चलाय नमः ।
ॐ निरालम्बाय नमः ।
ॐ निराकाराय नमः ।
ॐ निवृत्तगुणदोषकाय नमः ।
ॐ नूल्कर विजयानन्द माहिषां गतिदायकाय नमः ।
ॐ नरसिंह गणूदास दत्त प्रचारसाधनाय नमः ।
ॐ नैष्ठिकब्रह्मचर्याय नमः ।
ॐ नैष्कर्म्यपरिनिष्ठिताय नमः ।
ॐ पण्डरीपाण्डुरङ्गाख्याय नमः ॥ ५६०

ॐ पाटिल् तात्याजी मातुलाय नमः ।
ॐ पतितपावनाय नमः ।
ॐ पत्रिग्रामसमुद्भवाय नमः ।
ॐ पदविसृष्टगङ्गाम्भसे नमः ।
ॐ पदाम्बुजनतावनाय नमः ।
ॐ परब्रह्मस्वरूपिणे नमः ।
ॐ परमकरुणालयाय नमः ।
ॐ परतत्त्वप्रदीपाय नमः ।
ॐ परमार्थनिवेदकाय नमः ।
ॐ परमानन्दनिस्यन्दाय नमः ।
ॐ परञ्ज्योतिषे नमः ।
ॐ परात्पराय नमः ।
ॐ परमेष्ठिने नमः ।
ॐ परन्धाम्ने नमः ।
ॐ परमेश्वराय नमः ।
ॐ परमसद्गुरवे नमः ।
ॐ परमाचार्याय नमः ।
ॐ परधर्मभयाद्भक्तान् स्वे स्वे धर्मे नियोजकाय नमः ।
ॐ परार्थैकान्तसम्भूतये नमः ।
ॐ परमात्मने नमः ॥ ५८०

ॐ परागतये नमः ।
ॐ पापतापौघसंहारिणे नमः ।
ॐ पामरव्याजपण्डिताय नमः ।
ॐ पापाद्दासं समाकृष्य पुण्यमार्ग प्रवर्तकाय नमः ।
ॐ पिपीलिकासुखान्नदाय नमः ।
ॐ पिशाचेश्व व्यवस्थिताय नमः ।
ॐ पुत्रकामेष्ठि यागादे ऋते सन्तानवर्धनाय नमः ।
ॐ पुनरुज्जीवितप्रेताय नमः ।
ॐ पुनरावृत्तिनाशकाय नमः ।
ॐ पुनः पुनरिहागम्य भक्तेभ्यः सद्गतिप्रदाय नमः ।
ॐ पुण्डरीकायताक्षाय नमः ।
ॐ पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः ।
ॐ पुरन्दरादिभक्ताग्र्यपरित्राणधुरन्धराय नमः ।
ॐ पुराणपुरुषाय नमः ।
ॐ पुरीशाय नमः ।
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः ।
ॐ पूजापराङ्मुखाय नमः ।
ॐ पूर्णाय नमः ।
ॐ पूर्णवैराग्यशोभिताय नमः ।
ॐ पूर्णानन्दस्वरूपिणे नमः ॥ ६००

ॐ पूर्णकृपानिधये नमः ।
ॐ पूर्णचन्द्रसमाह्लादिने नमः ।
ॐ पूर्णकामाय नमः ।
ॐ पूर्वजाय नमः ।
ॐ प्रणतपालनोद्युक्ताय नमः ।
ॐ प्रणतार्तिहराय नमः ।
ॐ प्रत्यक्षदेवतामूर्तये नमः ।
ॐ प्रत्यगात्मनिदर्शकाय नमः ।
ॐ प्रपन्नपारिजाताय नमः ।
ॐ प्रपन्नानां परागतये नमः ।
ॐ प्रमाणातीतचिन्मूर्तये नमः ।
ॐ प्रमादाभिधमृत्युजिते नमः ।
ॐ प्रसन्नवदनाय नमः ।
ॐ प्रसादाभिमुखद्युतये नमः ।
ॐ प्रशस्तवाचे नमः ।
ॐ प्रशान्तात्मने नमः ।
ॐ प्रियसत्यमुदाहरते नमः ।
ॐ प्रेमदाय नमः ।
ॐ प्रेमवश्याय नमः ।
ॐ प्रेममार्गैकसाधनाय नमः ॥ ६२०

ॐ बहुरूपनिगूढात्मने नमः ।
ॐ बलदृप्तदमक्षमाय नमः ।
ॐ बलातिदर्पभय्याजि महागर्वविभञ्जनाय नमः ।
ॐ बुधसन्तोषदाय नमः ।
ॐ बुद्धाय नमः ।
ॐ बुधजनावनाय नमः ।
ॐ बृहद्बन्धविमोक्त्रे नमः ।
ॐ बृहद्भारवहक्षमाय नमः ।
ॐ ब्रह्मकुलसमुद्भूताय नमः ।
ॐ ब्रह्मचारिव्रतस्थिताय नमः ।
ॐ ब्रह्मानन्दामृतेमग्नाय नमः ।
ॐ ब्रह्मानन्दाय नमः ।
ॐ ब्रह्मानन्दलसद्दृष्टये नमः ।
ॐ ब्रह्मवादिने नमः ।
ॐ बृहच्छ्रवसे नमः ।
ॐ ब्राह्मणस्त्रीविसृष्टोल्कातर्जितश्वाकृतये नमः ।
ॐ ब्राह्मणानां मशीदिस्थाय नमः ।
ॐ ब्रह्मण्याय नमः ।
ॐ ब्रह्मवित्तमाय नमः ।
ॐ भक्तदासगणूप्राणमानवृत्त्यादिरक्षकाय नमः ॥ ६४०

ॐ भक्तात्यन्तहितैषिणे नमः ।
ॐ भक्ताश्रितदयापराय नमः ।
ॐ भक्तार्थे धृतदेहाय नमः ।
ॐ भक्तार्थे दग्धहस्तकाय नमः ।
ॐ भक्तपरागतये नमः ।
ॐ भक्तवत्सलाय नमः ।
ॐ भक्तमानसवासिने नमः ।
ॐ भक्तातिसुलभाय नमः ।
ॐ भक्तभवाब्धिपोताय नमः ।
ॐ भगवते नमः ।
ॐ भजतां सुहृदे नमः ।
ॐ भक्तसर्वस्वहारिणे नमः ।
ॐ भक्तानुग्रहकातराय नमः ।
ॐ भक्तरास्न्यादि सर्वेषां अमोघाभयसम्प्रदाय नमः ।
ॐ भक्तावनसमर्थाय नमः ।
ॐ भक्तावनधुरन्धराय नमः ।
ॐ भक्तभावपराधीनाय नमः ।
ॐ भक्तात्यन्तहितौषधाय नमः ।
ॐ भक्तावनप्रतिज्ञाय नमः ।
ॐ भजतामिष्टकामधुहे नमः ॥ ६६०

ॐ भक्तहृत्पद्मवासिने नमः ।
ॐ भक्तिमार्गप्रदर्शकाय नमः ।
ॐ भक्ताशयविहारिणे नमः ।
ॐ भक्तसर्वमलापहाय नमः ।
ॐ भक्तबोधैकनिष्ठाय नमः ।
ॐ भक्तानां सद्गतिप्रदाय नमः ।
ॐ भद्रमार्गप्रदर्शिने नमः ।
ॐ भद्रं भद्रमिति ब्रुवते नमः ।
ॐ भद्रश्रवसे नमः ।
ॐ भन्नूमायि साध्वीमहितशासनाय नमः ।
ॐ भयसन्त्रस्त कापर्दे अमोघाभयवरप्रदाय नमः ।
ॐ भयहीनाय नमः ।
ॐ भयत्रात्रे नमः ।
ॐ भयकृते नमः ।
ॐ भयनाशनाय नमः ।
ॐ भववारिधिपोताय नमः ।
ॐ भवलुण्ठनकोविदाय नमः ।
ॐ भस्मदाननिरस्ताधिव्याधिदुःखाऽशुभाऽखिलाय नमः ।
ॐ भस्मसात्कृतभक्तारये नमः ।
ॐ भस्मसात्कृतमन्मथाय नमः ॥ ६८०

ॐ भस्मपूतमशीदिस्थाय नमः ।
ॐ भस्मदग्धाखिलामयाय नमः ।
ॐ भागोजि कुष्ठरोगघ्नाय नमः ।
ॐ भाषाखिलसुवेदिताय नमः ।
ॐ भाष्यकृते नमः ।
ॐ भावगम्याय नमः ।
ॐ भारसर्वपरिग्रहाय नमः ।
ॐ भागवतसहायाय नमः ।
ॐ भावना शून्यतः सुखिने नमः ।
ॐ भागवतप्रधानाय नमः ।
ॐ भागवतोत्तमाय नमः ।
ॐ भाटेद्वेषं समाकृष्य भक्तिं तस्मै प्रदत्तवते नमः ।
ॐ भिल्लरूपेण दत्ताम्भसे नमः ।
ॐ भिक्षान्नदानशेषभुजे नमः ।
ॐ भिक्षाधर्ममहाराजाय नमः ।
ॐ भिक्षौघदत्तभोजनाय नमः ।
ॐ भीमाजी क्षयपापघ्ने नमः ।
ॐ भीमबलान्विताय नमः ।
ॐ भीतानां भीतिनाशिने नमः ।
ॐ भीषणभीषणाय नमः ॥ ७००

ॐ भीषाचालितसुर्याग्निमघवन्मृत्युमारुताय नमः ।
ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदात्रे नमः ।
ॐ भुजगाद्रक्षितप्रजाय नमः ।
ॐ भुजङ्गरूपमाविश्य सहस्रजनपूजिताय नमः ।
ॐ भुक्त्वा भोजनदातॄणां दग्धप्रागुत्तराऽशुभाय नमः ।
ॐ भूटिद्वारा गृहं बद्ध्वा कृतसर्वमतालयाय नमः ।
ॐ भूभृत्समोपकारिणे नमः ।
ॐ भूम्ने नमः ।
ॐ भूशयाय नमः ।
ॐ भूतशरण्यभूताय नमः ।
ॐ भूतात्मने नमः ।
ॐ भूतभावनाय नमः ।
ॐ भूतप्रेतपिशाचादीन् धर्ममार्गे नियोजयते नमः ।
ॐ भृत्यस्यभृत्यसेवाकृते नमः ।
ॐ भृत्यभारवहाय नमः ।
ॐ भेकं दत्त वरं स्मृत्वा सर्पस्यादपि रक्षकाय नमः ।
ॐ भोगैश्वर्येष्वसक्तात्मने नमः ।
ॐ भैषज्येभिषजां वराय नमः ।
ॐ मर्करूपेण भक्तस्य रक्षणे तेन ताडिताय नमः ।
ॐ मन्त्रघोषमशीदिस्थाय नमः ॥ ७२०

ॐ मदाभिमानवर्जिताय नमः ।
ॐ मधुपानभृशासक्तिं दिव्यशक्त्य व्यपोहकाय नमः ।
ॐ मशीध्यां तुलसीपूजां अग्निहोत्रं च शासकाय नमः ।
ॐ महावाक्यसुधामग्नाय नमः ।
ॐ महाभागवताय नमः ।
ॐ महानुभावतेजस्विने नमः ।
ॐ महायोगेश्वराय नमः ।
ॐ महाभयपरित्रात्रे नमः ।
ॐ महात्मने नमः ।
ॐ महाबलाय नमः ।
ॐ माधवरायदेश्पाण्डे सख्युः साहाय्यकृते नमः ।
ॐ मानापमानयोस्तुल्याय नमः ।
ॐ मार्गबन्धवे नमः ।
ॐ मारुतये नमः ।
ॐ मायामानुष रूपेण गूढैश्वर्यपरात्पराय नमः ।
ॐ मार्गस्थदेवसत्कारः कार्य इत्यनुशासित्रे नमः ।
ॐ मारीग्रस्थ बूटीत्रात्रे नमः ।
ॐ मार्जालोच्छिष्ठभोजनाय नमः ।
ॐ मिरीकरं सर्पगण्डात् दैवाज्ञाप्ताद्विमोचयते नमः ।
ॐ मितवाचे नमः ॥ ७४०

ॐ मितभुजे नमः ।
ॐ मित्रेशत्रौसदासमाय नमः ।
ॐ मीनातायी प्रसूत्यर्थं प्रेषिताय रथं ददते नमः ।
ॐ मुक्तसङ्ग आनंवादिने नमः ।
ॐ मुक्तसंसृतिबन्धनाय नमः ।
ॐ मुहुर्देवावतारादि नामोच्चारण निवृताय नमः ।
ॐ मूर्तिपूजानुशास्त्रे नमः ।
ॐ मूर्तिमानप्यमूर्तिमते नमः ।
ॐ मूलेशास्त्री गुरोर्घोलप महाराजस्य रूपधृते नमः ।
ॐ मृतसूनुं समाकृष्य पूर्वमातरि योजयते नमः ।
ॐ मृदालयनिवासिने नमः ।
ॐ मृत्युभीतिव्यपोहकाय नमः ।
ॐ मेघश्यामायपूजार्थं शिवलिङ्गमुपाहरते नमः ।
ॐ मोहकलिलतीर्णाय नमः ।
ॐ मोहसंशयनाशकाय नमः ।
ॐ मोहिनीराजपूजायां कुल्कर्ण्यप्पा नियोजकाय नमः ।
ॐ मोक्षमार्गसहायाय नमः ।
ॐ मौनव्याख्याप्रबोधकाय नमः ।
ॐ यज्ञदानतपोनिष्ठाय नमः ।
ॐ यज्ञशिष्ठान्नभोजनाय नमः ॥ ७६०

ॐ यतीन्द्रियमनोबुद्धये नमः ।
ॐ यतिधर्मसुपालकाय नमः ।
ॐ यतो वाचो निवर्तन्ते तदानन्द सुनिष्ठिताय नमः ।
ॐ यत्नातिशयसेवाप्त गुरुपूर्णकृपाबलाय नमः ।
ॐ यथेच्छसूक्ष्मसञ्चारिणे नमः ।
ॐ यथेष्टदानधर्मकृते नमः ।
ॐ यन्त्रारूढं जगत्सर्वं मायया भ्रामयत्प्रभवे नमः ।
ॐ यमकिङ्करसन्त्रस्त सामन्तस्य सहायकृते नमः ।
ॐ यमदूतपरिक्लिष्टपुरन्दरसुरक्षकाय नमः ।
ॐ यमभीतिविनाशिने नमः ।
ॐ यवनालयभूषणाय नमः ।
ॐ यशसापिमहाराजाय नमः ।
ॐ यशःपूरितभारताय नमः ।
ॐ यक्षरक्षःपिशाचानां सान्निध्यादेवनाशकाय नमः ।
ॐ युक्तभोजननिद्राय नमः ।
ॐ युगान्तरचरित्रविदे नमः ।
ॐ योगशक्तिजितस्वप्नाय नमः ।
ॐ योगमायासमावृताय नमः ।
ॐ योगवीक्षणसन्दत्तपरमानन्दमूर्तिमते नमः ।
ॐ योगिभिर्ध्यानगम्याय नमः ॥ ७८०

ॐ योगक्षेमवहाय नमः ।
ॐ रथस्य रजताश्वेषु हृतेष्वम्लान मानसाय नमः ।
ॐ रसाय नमः ।
ॐ रससारज्ञाय नमः ।
ॐ रसनारसजिते नमः ।
ॐ रसोप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तित महायशसे नमः ।
ॐ रक्षणात्पोषणात् सर्वपितृमातृगुरुप्रभवे नमः ।
ॐ रागद्वेषवियुक्तात्मने नमः ।
ॐ राकाचन्द्रसमाननाय नमः ।
ॐ राजीवलोचनाय नमः ।
ॐ राजभिश्चाभिवन्दिताय नमः ।
ॐ रामभक्तिप्रपूर्णाय नमः ।
ॐ रामरूपप्रदर्शकाय नमः ।
ॐ रामसारूप्यलब्धाय नमः ।
ॐ रामसायीति विश्रुताय नमः ।
ॐ रामदूतमयाय नमः ।
ॐ राममन्त्रोपदेशकाय नमः ।
ॐ राममूर्त्यादिशङ्कर्त्रे नमः ।
ॐ रासनेकुलवर्धनाय नमः ।
ॐ रुद्रतुल्यप्रकोपाय नमः ॥ ८००

ॐ रुद्रकोपदमक्षमाय नमः ।
ॐ रुद्रविष्णुकृताभेदाय नमः ।
ॐ रूपिणीरूप्यमोहजिते नमः ।
ॐ रूपेरूपे चिदात्मानं पश्यध्वमिति बोधकाय नमः ।
ॐ रूपाद्रूपान्तरं यातोऽमृत इत्यभयप्रदाय नमः ।
ॐ रेगे शिशोः तथान्धस्य सतां गति विधायकाय नमः ।
ॐ रोगदारिद्र्यदुःखादीन् भस्मदानेन वारयते नमः ।
ॐ रोदनातार्द्रचित्ताय नमः ।
ॐ रोमहर्षादवाकृतये नमः ।
ॐ लघ्वाशिने नमः ।
ॐ लघुनिद्राय नमः ।
ॐ लब्धाश्वग्रामणिस्तुताय नमः ।
ॐ लगुडोद्धृतरोहिल्लास्तम्भनाद्दर्पनाशकाय नमः ।
ॐ ललिताद्भुतचारित्राय नमः ।
ॐ लक्ष्मीनारायणाय नमः ।
ॐ लीलामानुषदेहस्थाय नमः ।
ॐ लीलामानुषकर्मकृते नमः ।
ॐ लेलेशास्त्रि श्रुतिप्रीत्या मशीदि वेदघोषणाय नमः ।
ॐ लोकाभिरामाय नमः ।
ॐ लोकेशाय नमः ॥ ८२०

ॐ लोलुपत्वविवर्जिताय नमः ।
ॐ लोकेषु विहरंश्चापि सच्चिदानन्दसंस्थिताय नमः ।
ॐ लोणिवार्ण्यगणूदासं महापायाद्विमोचकाय नमः ।
ॐ वस्त्रवद्वपुरुद्वीक्ष्य स्वेच्छत्यक्तकलेबराय नमः ।
ॐ वस्त्रवद्देहमुत्सृज्य पुनर्देहं प्रविष्टवते नमः ।
ॐ वन्ध्यादोषविमुक्त्यर्थं तद्वस्त्रे नारिकेलदाय नमः ।
ॐ वासुदेवैकसन्तुष्टये नमः ।
ॐ वादद्वेषमदायाऽप्रियाय नमः ।
ॐ विद्याविनयसम्पन्नाय नमः ।
ॐ विधेयात्मने नमः ।
ॐ वीर्यवते नमः ।
ॐ विविक्तदेशसेविने नमः ।
ॐ विश्वभावनभाविताय नमः ।
ॐ विश्वमङ्गलमाङ्गल्याय नमः ।
ॐ विषयात् संहृतेन्द्रियाय नमः ।
ॐ वीतरागभयक्रोधाय नमः ।
ॐ वृद्धान्धेक्षणसम्प्रदाय नमः ।
ॐ वेदान्ताम्बुजसूर्याय नमः ।
ॐ वेदिस्थाग्निविवर्धनाय नमः ।
ॐ वैराग्यपूर्णचारित्राय नमः ॥ ८४०

ॐ वैकुण्ठप्रियकर्मकृते नमः ।
ॐ वैहायसगतये नमः ।
ॐ व्यामोहप्रशमौषधाय नमः ।
ॐ शत्रुच्छेदैकमन्त्राय नमः ।
ॐ शरणागतवत्सलाय नमः ।
ॐ शरणागतभीमाजीश्वान्धभेकादिरक्षकाय नमः ।
ॐ शरीरस्थाशरीरस्थाय नमः ।
ॐ शरीरानेकसम्भृताय नमः ।
ॐ शश्वत्परार्थसर्वेहाय नमः ।
ॐ शरीरकर्मकेवलाय नमः ।
ॐ शाश्वतधर्मगोप्त्रे नमः ।
ॐ शान्तिदान्तिविभूषिताय नमः ।
ॐ शिरस्तम्भितगङ्गाम्भसे नमः ।
ॐ शान्ताकाराय नमः ।
ॐ शिष्टधर्ममनुप्राप्य मौलाना पादसेविताय नमः ।
ॐ शिवदाय नमः ।
ॐ शिवरूपाय नमः ।
ॐ शिवशक्तियुताय नमः ।
ॐ शिरीयानसुतोद्वाहं यथोक्तं परिपूरयते नमः ।
ॐ शीतोष्णसुखदुःखेषु समाय नमः ॥ ८६०

ॐ शीतलवाक्सुधाय नमः ।
ॐ शिर्डिन्यस्तगुरोर्देहाय नमः ।
ॐ शिर्डित्यक्तकलेबराय नमः ।
ॐ शुक्लाम्बरधराय नमः ।
ॐ शुद्धसत्त्वगुणस्थिताय नमः ।
ॐ शुद्धज्ञानस्वरूपाय नमः ।
ॐ शुभाशुभविवर्जिताय नमः ।
ॐ शुभ्रमार्गेण नेता नॄन् तद्विष्णोः परमं पदाय नमः ।
ॐ शेलुगुरुकुलेवासिने नमः ।
ॐ शेषशायिने नमः ।
ॐ श्रीकण्ठाय नमः ।
ॐ श्रीकराय नमः ।
ॐ श्रीमते नमः ।
ॐ श्रेष्ठाय नमः ।
ॐ श्रेयोविधायकाय नमः ।
ॐ श्रुतिस्मृतिशिरोरत्नविभूषितपदाम्बुजाय नमः ।
ॐ श्रेयान् स्वधर्म इत्युक्त्वा स्वेस्वेधर्मनियोजकाय नमः ।
ॐ सखारामसशिष्याय नमः ।
ॐ सकलाश्रयकामदुहे नमः ।
ॐ सगुणोनिर्गुणाय नमः ॥ ८८०

ॐ सच्चिदानन्दमूर्तिमते नमः ।
ॐ सज्जनमानसव्योमराजमानसुधाकराय नमः ।
ॐ सत्कर्मनिरताय नमः ।
ॐ सत्सन्तानवरप्रदाय नमः ।
ॐ सत्यव्रताय नमः ।
ॐ सत्याय नमः ।
ॐ सत्सुलभोऽन्यदुर्लभाय नमः ।
ॐ सत्यवाचे नमः ।
ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमः ।
ॐ सत्यधर्मपरायणाय नमः ।
ॐ सत्यपराक्रमाय नमः ।
ॐ सत्यद्रष्ट्रे नमः ।
ॐ सनातनाय नमः ।
ॐ सत्यनारायणाय नमः ।
ॐ सत्यतत्त्वप्रबोधकाय नमः ।
ॐ सत्पुरुषाय नमः ।
ॐ सदाचाराय नमः ।
ॐ सदापरहितेरताय नमः ।
ॐ सदाक्षिप्तनिजानन्दाय नमः ।
ॐ सदानन्दाय नमः ॥ ९००

ॐ सद्गुरवे नमः ।
ॐ सदाजनहितोद्युक्ताय नमः ।
ॐ सदात्मने नमः ।
ॐ सदाशिवाय नमः ।
ॐ सदार्द्रचित्ताय नमः ।
ॐ सद्रूपिणे नमः ।
ॐ सदाश्रयाय नमः ।
ॐ सदाजिताय नमः ।
ॐ सन्यासयोगयुक्तात्मने नमः ।
ॐ सन्मार्गस्थापनव्रताय नमः ।
ॐ सबीजं फलमादाय निर्बीजं परिणामकाय नमः ।
ॐ समदुःखसुखस्वस्थाय नमः ।
ॐ समलोष्टाश्मकाञ्चनाय नमः ।
ॐ समर्थसद्गुरुश्रेष्ठाय नमः ।
ॐ समानरहिताय नमः ।
ॐ समाश्रितजनत्राणव्रतपालनतत्पराय नमः ।
ॐ समुद्रसमगाम्भीर्याय नमः ।
ॐ सङ्कल्परहिताय नमः ।
ॐ संसारतापहार्यङ्घ्रये नमः ।
ॐ संसारवर्जिताय नमः ॥ ९२०

ॐ संसारोत्तारनाम्ने नमः ।
ॐ सरोजदलकोमलाय नमः ।
ॐ सर्पादिभयहारिणे नमः ।
ॐ सर्परूपेप्यवस्थिताय नमः ।
ॐ सर्वकर्मफलत्यागिने नमः ।
ॐ सर्वत्रसमवस्थिताय नमः ।
ॐ सर्वतःपाणिपादाय नमः ।
ॐ सर्वतोऽक्षिशिरोमुखाय नमः ।
ॐ सर्वतःश्रुतिमन्मूर्तये नमः ।
ॐ सर्वमावृत्यसंस्थिताय नमः ।
ॐ सर्वधर्मसमत्रात्रे नमः ।
ॐ सर्वधर्मसुपूजिताय नमः ।
ॐ सर्वधर्मान् परित्यज्य गुर्वीशं शरणं गताय नमः ।
ॐ सर्वधीसाक्षिभूताय नमः ।
ॐ सर्वनामाभिसूचिताय नमः ।
ॐ सर्वभूतान्तरात्मने नमः ।
ॐ सर्वभूताशयस्थिताय नमः ।
ॐ सर्वभूतादिवासाय नमः ।
ॐ सर्वभूतहितेरताय नमः ।
ॐ सर्वभूतात्मभूतात्मने नमः ॥ ९४०

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ॐ सर्वभूतसुहृदे नमः ।
ॐ सर्वभूतनिशोन्निद्राय नमः ।
ॐ सर्वभूतसमादृताय नमः ।
ॐ सर्वज्ञाय नमः ।
ॐ सर्वविदे नमः ।
ॐ सर्वस्मै नमः ।
ॐ सर्वमतसुसम्मताय नमः ।
ॐ सर्वब्रह्ममयं द्रष्ट्रे नमः ।
ॐ सर्वशक्त्युपबृंहिताय नमः ।
ॐ सर्वसङ्कल्पसन्यासिने नमः ।
ॐ सर्वसङ्गविवर्जिताय नमः ।
ॐ सर्वलोकशरण्याय नमः ।
ॐ सर्वलोकमहेश्वराय नमः ।
ॐ सर्वेशाय नमः ।
ॐ सर्वरूपिणे नमः ।
ॐ सर्वशत्रुनिबर्हणाय नमः ।
ॐ सर्वैश्वर्यैकमन्त्राय नमः ।
ॐ सर्वेप्सितफलप्रदाय नमः ।
ॐ सर्वोपकारकारिणे नमः ।
ॐ सर्वोपास्यपदाम्बुजाय नमः ॥ ९६०

ॐ सहस्रशिर्षमूर्तये नमः ।
ॐ सहस्राक्षाय नमः ।
ॐ सहस्रपदे नमः ।
ॐ सहस्रनामसुश्लाघिने नमः ।
ॐ सहस्रनामलक्षिताय नमः ।
ॐ साकारोपि निराकाराय नमः ।
ॐ साकारार्चासुमानिताय नमः ।
ॐ साधुजनपरित्रात्रे नमः ।
ॐ साधुपोषकस्तथैवाय नमः ।
ॐ सायीति सज्जानैः प्रोक्तः सायीदेवाय नमः ।
ॐ सायीरामाय नमः ।
ॐ सायिनाथाय नमः ।
ॐ सायीशाय नमः ।
ॐ सायिसत्तमाय नमः ।
ॐ सालोक्यसार्ष्टिसामीप्यसायुज्यपददायकाय नमः ।
ॐ साक्षात्कृतहरिप्रीत्या सर्वशक्तियुताय नमः ।
ॐ साक्षात्कारप्रदात्रे नमः ।
ॐ साक्षान्मन्मथमर्दनाय नमः ।
ॐ सिद्धेशाय नमः ।
ॐ सिद्धसङ्कल्पाय नमः ॥ ९८०

ॐ सिद्धिदाय नमः ।
ॐ सिद्धवाङ्मुखाय नमः ।
ॐ सुकृतदुष्कृतातीताय नमः ।
ॐ सुखेषुविगतस्पृहाय नमः ।
ॐ सुखदुःखसमाय नमः ।
ॐ सुधास्यन्दिमुखोज्वलाय नमः ।
ॐ स्वेच्छामात्रजडद्देहाय नमः ।
ॐ स्वेच्छोपात्ततनवे नमः ।
ॐ स्वीकृतभक्तरोगाय नमः ।
ॐ स्वेमहिम्निप्रतिष्ठिताय नमः ।
ॐ हरिसाठे तथा नानां कामादेः परिरक्षकाय नमः ।
ॐ हर्षामर्षभयोद्वेगैर्निर्मुक्तविमलाशयाय नमः ।
ॐ हिन्दुमुस्लिंसमूहानां मैत्रीकरणतत्पराय नमः ।
ॐ हूङ्कारेणैव सुक्षिप्रं स्तब्धप्रचण्डमारुताय नमः ।
ॐ हृदयग्रन्थिभेदिने नमः ।
ॐ हृदयग्रन्थिवर्जिताय नमः ।
ॐ क्षान्तानन्तदौर्जन्याय नमः ।
ॐ क्षितिपालादिसेविताय नमः ।
ॐ क्षिप्रप्रसाददात्रे नमः ।
ॐ क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिकाय नमः ॥ १०००

इति श्री साई सहस्रनामावली ॥

(इसी क्रम में साईं बाबा के 1000 नामों का उच्चारण करते हुए पीले पुष्प, अक्षत या उदी अर्पित की जाती है।)

श्री साई सहस्रनामावली पाठ के अचूक और चमत्कारी लाभ (Benefits)

साईं बाबा करुणा के सागर हैं। वे केवल ‘भाव’ के भूखे हैं। जो भी साधक पूर्ण श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) के साथ उनके 1000 नामों का पाठ या अर्चन करता है, बाबा उसके जीवन की हर बाधा को स्वयं अपने ऊपर ले लेते हैं। इसके अकल्पनीय लाभ इस प्रकार हैं:

1. असाध्य रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ (Health & Healing)

साईं बाबा की ‘उदी’ (द्वारकामाई की धूनी की राख) अपने आप में एक चमत्कार है। जब कोई बीमार व्यक्ति या उसके परिवार का सदस्य 1000 नामों का पाठ करते हुए बाबा के चित्र पर उदी चढ़ाता है, और पाठ के बाद उस उदी को प्रसाद रूप में जल के साथ ग्रहण करता है, तो बड़े से बड़ा और असाध्य रोग भी चमत्कारिक रूप से ठीक होने लगता है।

2. मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन का नाश (Peace of Mind)

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में डिप्रेशन, चिंता और मानसिक तनाव आम बात हो गई है। साईं बाबा के 1000 नामों का पाठ मन की चंचलता को शांत करता है। “ॐ श्री साईं नाथाय नमः” की ध्वनि मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और अज्ञात भय (Phobias) को जड़ से समाप्त कर देती है।

3. आर्थिक संकट, कर्ज और नौकरी की समस्याओं का समाधान

“मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए।” साईं बाबा का यह वचन अक्षरशः सत्य है। जो व्यक्ति कर्ज के बोझ तले दबा है, व्यापार में लगातार घाटा हो रहा है या नौकरी नहीं मिल रही है, उसे लगातार 9 गुरुवार तक श्री साई सहस्रनामावली का अनुष्ठान करना चाहिए। बाबा की कृपा से धन आगमन के नए मार्ग स्वतः ही खुल जाते हैं।

4. पारिवारिक क्लेश और विवादों का अंत

साईं बाबा ने हमेशा प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया। यदि परिवार के सदस्यों के बीच वैचारिक मतभेद हैं, पति-पत्नी में कलह रहती है, तो साईं बाबा के सहस्रनाम का पाठ घर के वातावरण को एकदम शांत और पवित्र बना देता है। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।

5. नवग्रह शांति और बुरी शक्तियों से बचाव

साईं बाबा स्वयं परब्रह्म हैं। उनकी उपासना करने वाले को शनि, राहु या केतु जैसे ग्रहों से भयभीत होने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके अतिरिक्त, जिस घर में बाबा के 1000 नामों का पाठ होता है, वहां कभी भी तंत्र-मंत्र, काला जादू या नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव नहीं हो सकता।

श्री साई सहस्रनामावली की प्रामाणिक अर्चन और पाठ विधि (Authentic Puja Vidhi)

सद्गुरु साईं नाथ की पूजा बहुत ही सरल और आडंबर-रहित है। वे किसी महंगे प्रसाद या कठिन अनुष्ठान की मांग नहीं करते, वे केवल आपकी ‘सच्ची भक्ति’ चाहते हैं। फिर भी, सहस्रार्चन का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करना सबसे उत्तम है:

1. उत्तम दिन, समय और मास (Best Time)

साईं बाबा की आराधना और इस पाठ को आरंभ करने के लिए गुरुवार (Thursday) का दिन सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसे प्रातःकाल (सुबह स्नान के बाद) या गोधूलि बेला (शाम के समय) किया जा सकता है। लगातार 9 गुरुवार का व्रत और पाठ अत्यंत फलदायी होता है।

2. आसन, वस्त्र और दिशा

स्नान करके शुद्ध हो जाएं। साईं बाबा को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए पीले वस्त्र धारण करना बहुत शुभ होता है। अपना मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर रखें। बैठने के लिए पीले या लाल रंग के स्वच्छ आसन का प्रयोग करें।

3. पूजन सामग्री और स्थापना

एक छोटी सी लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर शिरडी साईं बाबा की मूर्ति या तस्वीर (विशेषकर जिसमें वे आशीर्वाद दे रहे हों या पत्थर पर बैठे हों) स्थापित करें। बाबा के समक्ष गाय के शुद्ध घी का एक दीपक प्रज्वलित करें और धूप या अगरबत्ती जलाएं।

4. संकल्प (Sankalpa)

दाएँ हाथ में थोड़ा सा जल और एक पीला फूल लेकर अपने नाम, गोत्र और पाठ का उद्देश्य (जैसे- रोग से मुक्ति, कर्ज मुक्ति या नौकरी की प्राप्ति) बोलकर संकल्प लें और जल ज़मीन पर छोड़ दें।

5. सहस्रार्चन की चमत्कारी विधि (1000 आहुतियां/पुष्पांजलि)

अपने पास 1000 पीले फूल (जैसे गेंदा या कनेर), पीले रंगे हुए अक्षत (चावल), या शिरडी की पवित्र ‘उदी’ (भस्म) रख लें। अब सहस्रनामावली का एक-एक नाम (जैसे ॐ दीनबन्धवे नमः) पढ़ें और एक फूल या थोड़ी सी उदी बाबा के चरणों में अर्पित करें। 1000 नामों के साथ 1000 बार अर्पण करने की यह विधि ‘सहस्रार्चन’ कहलाती है।

6. भोग (नैवेद्य) और आरती

पाठ पूर्ण होने के बाद बाबा को कोई भी सात्विक भोग लगाएं। उन्हें पालक, मीठा हलवा, खिचड़ी, या पेड़े बहुत पसंद हैं। अंत में साईं बाबा की आरती गाएं (आरती साईं बाबा, सौख्यदातार जीवा…) और क्षमा प्रार्थना करें। सबसे महत्वपूर्ण कार्य: पाठ के बाद कम से कम किसी एक गरीब या भूखे व्यक्ति को भोजन अवश्य कराएं या किसी कुत्ते/गाय को रोटी दें।

बाबा की पूजा में ‘श्रद्धा’ और ‘सबूरी’ का महत्व (Rules & Precautions)

साईं बाबा के सहस्रनाम का पाठ करते समय किसी बहुत कड़े तांत्रिक नियम की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनके दो शब्दों का पालन करना अनिवार्य है:

  • श्रद्धा (Unwavering Faith): पाठ करते समय मन में कोई शंका नहीं होनी चाहिए कि ‘मेरा काम होगा या नहीं?’ बाबा पर पूर्ण विश्वास रखें कि उन्होंने आपकी पुकार सुन ली है।

  • सबूरी (Patience): पाठ करने के तुरंत बाद चमत्कार की उम्मीद में व्याकुल न हों। बाबा जानते हैं कि आपके लिए क्या और कब सही है। इसलिए धैर्य (Patience) बनाए रखें।

  • परोपकार और जीवों पर दया: साईं बाबा ने कहा था, “जो भूखों को भोजन कराता है, वह साक्षात मुझे भोजन कराता है।” यदि आप 1000 नामों का पाठ करते हैं लेकिन किसी भूखे को देखकर मुंह फेर लेते हैं, तो बाबा कभी प्रसन्न नहीं होंगे।

  • सात्विकता: यदि आप 9 गुरुवार का व्रत और पाठ कर रहे हैं, तो इन दिनों में मांस, मदिरा और किसी भी प्रकार के नशे से पूरी तरह दूर रहें।

Shri Sai Sahasranamavali केवल संस्कृत के 1000 नामों की सूची नहीं है; यह एक भक्त और भगवान के बीच का एक सीधा संवाद है। शिरडी के साईं बाबा इतने दयालु हैं कि यदि आप अनजाने में किसी नाम का गलत उच्चारण भी कर दें, तो भी वे आपके भावों को समझकर आपको गले लगा लेते हैं।

जब भी आपको लगे कि यह दुनिया आपके खिलाफ है, आपके अपने ही आपको धोखा दे रहे हैं, और सफलता के सभी दरवाजे बंद हो चुके हैं, तो बस एक बार आँखें बंद करके ‘ॐ साईं राम’ बोलें और इस सहस्रनामावली का पाठ आरंभ करें। द्वारकामाई की पवित्र अग्नि (धूनी) आपके जीवन के सारे पापों और कष्टों को जलाकर भस्म कर देगी, और उदी आपके जीवन को खुशियों से महका देगी। अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक, राजाधिराज, योगीराज, परब्रह्म श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईं नाथ महाराज की जय!

श्री साई सहस्रनामावली: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. श्री साई सहस्रनामावली का पाठ करने का सबसे अच्छा दिन कौन सा है?

साईं बाबा स्वयं एक ‘सद्गुरु’ हैं, इसलिए उनके किसी भी पाठ या पूजा के लिए गुरुवार (Thursday) का दिन सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। इसके अलावा गुरु पूर्णिमा, विजयादशमी (बाबा का महासमाधि दिवस), और रामनवमी के दिन इसका पाठ करना अत्यंत विशेष होता है।

2. क्या मैं बिना संस्कृत जाने सहस्रनामावली का पाठ कर सकता हूँ?

जी हाँ, बिल्कुल। साईं बाबा कभी भाषा या पांडित्य के भूखे नहीं रहे। वे केवल आपके हृदय का ‘भाव’ देखते हैं। यदि आप संस्कृत के कठिन नामों का उच्चारण नहीं कर पाते, तो आप देवनागरी (हिंदी) लिपि में लिखे नामों को धीरे-धीरे पढ़ सकते हैं।

3. सहस्रार्चन के दौरान बाबा को क्या अर्पित करना सबसे शुभ होता है?

साईं बाबा के 1000 नामों का अर्चन करते समय प्रत्येक नाम के साथ पीले रंग के पुष्प (जैसे गेंदा), पीले चंदन से रंगे हुए चावल (अक्षत), या सबसे उत्तम—शिरडी की पवित्र ‘उदी’ (भस्म) अर्पित करना अत्यंत चमत्कारी परिणाम देता है।

4. क्या इस पाठ के दौरान व्रत रखना अनिवार्य है?

सहस्रनामावली का पाठ करने के लिए व्रत रखना अनिवार्य नहीं है। आप सामान्य भोजन (सात्विक) ग्रहण करते हुए भी इसका पाठ कर सकते हैं। हालांकि, कई भक्त अपनी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए 9 गुरुवार का व्रत रखते हैं और व्रत के दिन यह पाठ करते हैं, जो बहुत ही शक्तिशाली उपाय है।

5. महिलाओं के लिए साईं पूजा या पाठ के क्या नियम हैं?

सनातन धर्म और साईं दरबार में स्त्री-पुरुष का कोई भेद नहीं है। महिलाएं पूरी श्रद्धा, सात्विकता और पवित्रता के साथ घर पर साईं सहस्रनामावली का पाठ कर सकती हैं। केवल मासिक धर्म (Periods) के दौरान मूर्ति को स्पर्श करने और पाठ करने से बचना चाहिए; उस दौरान मन ही मन ‘ॐ साईं राम’ का मानसिक जाप किया जा सकता है।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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