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Meta Title: Shri Hariharaputra Sahasranamavali (श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली): Lyrics in Sanskrit, अचूक लाभ व विधि
Meta Description: Shri Hariharaputra Sahasranamavali: पढ़ें भगवान अय्यप्पा (हरिहरपुत्र) के 1000 नामों की असीम महिमा, सिद्ध पाठ व अर्चन विधि, और शनि दोष व संकटों को मिटाने वाले अचूक लाभ।
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Shri Hariharaputra Sahasranamavali (श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली): Lyrics in Sanskrit, भगवान अय्यप्पा के 1000 नामों की महास्तुति, सिद्ध पाठ विधि और अकल्पनीय लाभ
स्वामी शरणम् अय्यप्पा!
सनातन धर्म में जब भी शक्ति, भक्ति, ब्रह्मचर्य और कठोर तपस्या की बात आती है, तो दक्षिण भारत के सर्वोच्च आराध्य देव भगवान श्री हरिहरपुत्र (Swami Ayyappa) का नाम सबसे ऊपर आता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है— ‘हरि’ (भगवान विष्णु) और ‘हर’ (भगवान शिव) के संयुक्त तेज से उत्पन्न पुत्र को ‘हरिहरपुत्र’ या ‘धर्म शास्ता’ कहा जाता है। केरल के शबरीमाला (Sabarimala) में विराजित भगवान अय्यप्पा अपने भक्तों के लिए कलियुग के प्रत्यक्ष देव हैं, जो पल भर में जीवन के घोर संकटों को हर लेते हैं।
जब जीवन में शनि देव की वक्र दृष्टि पड़ जाए, हर कार्य में बाधा आ रही हो, मानसिक शांति भंग हो गई हो और कोई भी मार्ग नज़र न आ रहा हो, तब ‘श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली’ (Shri Hariharaputra Sahasranamavali) का पाठ साधक के लिए एक अमोघ सुरक्षा कवच बन जाता है। ‘सहस्रनामावली’ का अर्थ है भगवान अय्यप्पा के एक हजार (1000) अत्यंत पवित्र, सिद्ध और जाग्रत नामों का अर्चन।
इस अत्यंत विस्तृत और गूढ़ लेख में हम भगवान हरिहरपुत्र (अय्यप्पा) के प्राकट्य का रहस्य, Shri Hariharaputra Sahasranamavali Lyrics in Sanskrit के पाठ की आध्यात्मिक महिमा, इन 1000 नामों का अर्चन करने से मिलने वाले चमत्कारी लाभ (विशेषकर शनि दोष निवारण), और इसे सिद्ध करने की प्रामाणिक वैदिक विधि पर गहराई से चर्चा करेंगे।
भगवान हरिहरपुत्र (अय्यप्पा) का अवतार और उनका अद्भुत रहस्य
श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली की गहराई में जाने से पूर्व, भगवान अय्यप्पा के प्राकट्य की कथा को जानना अत्यंत आवश्यक है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर के वध के बाद उसकी बहन ‘महिषी’ ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की और यह वरदान प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव और भगवान विष्णु के पुत्र के हाथों ही हो सकती है। महिषी को लगा कि यह असंभव है, क्योंकि शिव और विष्णु दोनों पुरुष हैं।
परंतु ब्रह्मांड को इस राक्षसी के आतंक से बचाने के लिए, समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने ‘मोहिनी’ (Mohini) का अति सुंदर स्त्री रूप धारण किया। भगवान शिव मोहिनी के रूप पर मोहित हो गए और उन दोनों के ईश्वरीय तेज के मिलन से एक दिव्य बालक का जन्म हुआ। क्योंकि इस बालक की उत्पत्ति हरि (विष्णु) और हर (शिव) से हुई थी, इसलिए इन्हें ‘हरिहरपुत्र’ कहा गया।
इनके गले में एक मणि (Bell) बांधी गई थी, जिसके कारण इनका एक नाम ‘मणिकंदन’ (Manikandan) भी पड़ा। बाद में पंदलम (Pandalam) के राजा राजशेखर ने इन्हें अपने पुत्र के रूप में पाला। बड़े होकर मणिकंदन ने महिषी का वध किया और शबरीमाला की पहाड़ियों पर চিরकाल के लिए तपस्या में लीन हो गए।
स्वरूप का रहस्य: भगवान अय्यप्पा योग मुद्रा में बैठते हैं। उनके घुटनों और कमर के चारों ओर एक पट्टा (योग पट्टम) बंधा होता है, जो उनके अखंड ब्रह्मचर्य और योग निद्रा का प्रतीक है।
सहस्रनामावली का महत्व: 1000 नामों की अमोघ शक्ति और रहस्य
‘सहस्रनाम स्तोत्र’ और ‘सहस्रनामावली’ में एक मूल अंतर है। स्तोत्र को श्लोकों की तरह पढ़ा जाता है, जबकि ‘सहस्रनामावली’ में भगवान के हर एक नाम को एक स्वतंत्र बीज मंत्र की तरह उपयोग किया जाता है। इसके हर नाम के आगे ‘ॐ’ और अंत में ‘नमः’ लगा होता है (जैसे- ॐ हरिहरपुत्राय नमः)।
संस्कृत भाषा देववाणी है। इसमें उच्चारण किए गए प्रत्येक वर्ण से ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Vibrations) उत्पन्न होती है। जब आप भगवान अय्यप्पा के 1000 नामों का उच्चारण करते हुए उन्हें फूल या भस्म अर्पित करते हैं, तो आपके शरीर की नाड़ियाँ शुद्ध हो जाती हैं। इन 1000 नामों में भगवान के बाल रूप, वीर रूप, योगी रूप और उनके द्वारा किए गए चमत्कारों का पूरा वर्णन है। यह अर्चन सीधे शबरीमाला में बैठे स्वामी अय्यप्पा के हृदय तक पहुँचता है।
Shri Hariharaputra Sahasranamavali | (श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली – 1000 नामों का पवित्र संग्रह: Lyrics in Sanskrit)
(सनातन शास्त्रों की मर्यादा, तंत्र की गोपनीयता और लेख की लंबाई को ध्यान में रखते हुए, 1000 नामों की पूर्ण सूची किसी प्रामाणिक स्तोत्र ग्रंथ या गुरु से प्राप्त करनी चाहिए। यहाँ सहस्रार्चन की विधि, ध्यान मंत्र और कुछ प्रमुख सिद्ध नामों का उल्लेख किया जा रहा है, जिनसे अर्चन की शुरुआत होती है।)
सहस्रनामावली आरंभ करने से पूर्व का ध्यान मंत्र (Dhyana Sloka):
ध्यायेद् उमापति रमापति भाग्यपुत्रं, वेतंड-वाहन-मनोहर-दिव्यमूर्तिम्। तारक-ब्रह्म-वरदं निज-भक्त-पालं, श्री भूतनाथ-मकरन्द-मयं हृदब्जे॥
(अर्थ: मैं उमापति (शिव) और रमापति (विष्णु) के भाग्यशाली पुत्र का ध्यान करता हूँ, जो सुंदर हाथी पर सवार हैं, जो तारक ब्रह्म हैं, वरदान देने वाले हैं, अपने भक्तों के रक्षक हैं, और जो भूतनाथ कहलाते हैं। ऐसे श्री हरिहरपुत्र मेरे हृदय कमल में निवास करें।)
ॐ शिवपुत्राय नमः ।
ॐ महातेजसे नमः ।
ॐ शिवकार्यधुरन्धराय नमः ।
ॐ शिवप्रदाय नमः ।
ॐ शिवज्ञानिने नमः ।
ॐ शैवधर्मसुरक्षकाय नमः ।
ॐ शङ्खधारिणे नमः ।
ॐ सुराध्यक्षाय नमः ।
ॐ चन्द्रमौलये नमः ।
ॐ सुरोत्तमाय नमः ।
ॐ कामेशाय नमः ।
ॐ कामतेजस्विने नमः ।
ॐ कामादिफलसम्युताय नमः ।
ॐ कल्याणाय नमः ।
ॐ कोमलाङ्गाय नमः ।
ॐ कल्याणफलदायकाय नमः ।
ॐ करुणाब्धये नमः ।
ॐ कर्मदक्षाय नमः ।
ॐ करुणारससागराय नमः ।
ॐ जगत्प्रियाय नमः । २०
ॐ जगद्रक्षाय नमः ।
ॐ जगदानन्ददायकाय नमः ।
ॐ जयादिशक्तिसंसेव्याय नमः ।
ॐ जनाह्लादाय नमः ।
ॐ जिगीषुकाय नमः ।
ॐ जितेन्द्रियाय नमः ।
ॐ जितक्रोधाय नमः ।
ॐ जितदेवारिसङ्घकाय नमः ।
ॐ जैमिन्यादृषिसंसेव्याय नमः ।
ॐ जरामरणनाशकाय नमः ।
ॐ जनार्दनसुताय नमः ।
ॐ ज्येष्ठाय नमः ।
ॐ ज्येष्ठादिगणसेविताय नमः ।
ॐ जन्महीनाय नमः ।
ॐ जितामित्राय नमः ।
ॐ जनकेनाभिपूजिताय नमः ।
ॐ परमेष्ठिने नमः ।
ॐ पशुपतये नमः ।
ॐ पङ्कजासनपूजिताय नमः ।
ॐ पुरहन्त्रे नमः । ४०
ॐ पुरत्रात्रे नमः ।
ॐ परमैश्वर्यदायकाय नमः ।
ॐ पवनादिसुरैः सेव्याय नमः ।
ॐ पञ्चब्रह्मपरायणाय नमः ।
ॐ पार्वतीतनयाय नमः ।
ॐ ब्रह्मणे नमः ।
ॐ परानन्दाय नमः ।
ॐ परात्पराय नमः ।
ॐ ब्रह्मिष्ठाय नमः ।
ॐ ज्ञाननिरताय नमः ।
ॐ गुणागुणनिरूपकाय नमः ।
ॐ गुणाध्यक्षाय नमः ।
ॐ गुणनिधये नमः ।
ॐ गोपालेनाभिपुजिताय नमः ।
ॐ गोरक्षकाय नमः ।
ॐ गोधनदाय नमः ।
ॐ गजारूढाय नमः ।
ॐ गजप्रियाय नमः ।
ॐ गजग्रीवाय नमः ।
ॐ गजस्कन्धाय नमः । ६०
ॐ गभस्तये नमः ।
ॐ गोपतये नमः ।
ॐ प्रभवे नमः ।
ॐ ग्रामपालाय नमः ।
ॐ गजाध्यक्षाय नमः ।
ॐ दिग्गजेनाभिपूजिताय नमः ।
ॐ गणाध्यक्षाय नमः ।
ॐ गणपतये नमः ।
ॐ गवां पतये नमः ।
ॐ अहर्पतये नमः ।
ॐ जटाधराय नमः ।
ॐ जलनिभाय नमः ।
ॐ जैमिन्यैरभिपूजिताय नमः ।
ॐ जलन्धरनिहन्त्रे नमः ।
ॐ शोणाक्षाय नमः ।
ॐ शोणवासकाय नमः ।
ॐ सुराधिपाय नमः ।
ॐ शोकहन्त्रे नमः ।
ॐ शोभाक्षाय नमः ।
ॐ सूर्यतेजसाय नमः । ८०
ॐ सुरार्चिताय नमः ।
ॐ सुरैर्वन्द्याय नमः ।
ॐ शोणाङ्गाय नमः ।
ॐ शाल्मलीपतये नमः ।
ॐ सुज्योतिषे नमः ।
ॐ शरवीरघ्नाय नमः ।
ॐ शरच्चन्द्रनिभाननाय नमः ।
ॐ सनकादिमुनिध्येयाय नमः ।
ॐ सर्वज्ञानप्रदाय नमः ।
ॐ विभवे नमः ।
ॐ हलायुधाय नमः ।
ॐ हंसनिभाय नमः ।
ॐ हाहाहूहूमुखस्तुताय नमः ।
ॐ हरये नमः ।
ॐ हरप्रियाय नमः ।
ॐ हंसाय नमः ।
ॐ हर्यक्षासनतत्पराय नमः ।
ॐ पावनाय नमः ।
ॐ पावकनिभाय नमः ।
ॐ भक्तपापविनाशनाय नमः । १००
ॐ भसिताङ्गाय नमः ।
ॐ भयत्रात्रे नमः ।
ॐ भानुमते नमः ।
ॐ भयनाशनाय नमः ।
ॐ त्रिपुण्ड्रकाय नमः ।
ॐ त्रिनयनाय नमः ।
ॐ त्रिपुण्ड्राङ्कितमस्तकाय नमः ।
ॐ त्रिपुरघ्नाय नमः ।
ॐ देववराय नमः ।
ॐ देवारिकुलनाशकाय नमः ।
ॐ देवसेनाधिपाय नमः ।
ॐ तेजसे नमः ।
ॐ तेजोराशये नमः ।
ॐ दशाननाय नमः ।
ॐ दारुणाय नमः ।
ॐ दोषहन्त्रे नमः ।
ॐ दोर्दण्डाय नमः ।
ॐ दण्डनायकाय नमः ।
ॐ धनुष्पाणये नमः ।
ॐ धराध्यक्षाय नमः । १२०
ॐ धनिकाय नमः ।
ॐ धर्मवत्सलाय नमः ।
ॐ धर्मज्ञाय नमः ।
ॐ धर्मनिरताय नमः ।
ॐ धनुः शास्त्रपरायणाय नमः ।
ॐ स्थूलकर्णाय नमः ।
ॐ स्थूलतनवे नमः ।
ॐ स्थूलाक्षाय नमः ।
ॐ स्थूलबाहुकाय नमः ।
ॐ तनूत्तमाय नमः ।
ॐ तनुत्राणाय नमः ।
ॐ तारकाय नमः ।
ॐ तेजसां पतये नमः ।
ॐ योगीश्वराय नमः ।
ॐ योगनिधये नमः ।
ॐ योगीशाय नमः ।
ॐ योगसंस्थिताय नमः ।
ॐ मन्दारवाटिकामत्ताय नमः ।
ॐ मलयाचलवासभुवे नमः ।
ॐ मन्दारकुसुमप्रख्याय नमः । १४०
ॐ मन्दमारुतसेविताय नमः ।
ॐ महाभासाय नमः ।
ॐ महावक्षसे नमः ।
ॐ मनोहरमदार्चिताय नमः ।
ॐ महोन्नताय नमः ।
ॐ महाकायाय नमः ।
ॐ महानेत्राय नमः ।
ॐ महाहनवे नमः ।
ॐ मरुत्पूज्याय नमः ।
ॐ मानधनाय नमः ।
ॐ मोहनाय नमः ।
ॐ मोक्षदायकाय नमः ।
ॐ मित्राय नमः ।
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ महौजस्विने नमः ।
ॐ महावर्षप्रदायकाय नमः ।
ॐ भाषकाय नमः ।
ॐ भाष्यशास्त्रज्ञाय नमः ।
ॐ भानुमते नमः ।
ॐ भानुतेजसे नमः । १६०
ॐ भिषजे नमः ।
ॐ भवानिपुत्राय नमः ।
ॐ भवतारणकारणाय नमः ।
ॐ नीलाम्बराय नमः ।
ॐ नीलनिभाय नमः ।
ॐ नीलग्रीवाय नमः ।
ॐ निरञ्जनाय नमः ।
ॐ नेत्रत्रयाय नमः ।
ॐ निषादज्ञाय नमः ।
ॐ नानारत्नोपशोभिताय नमः ।
ॐ रत्नप्रभाय नमः ।
ॐ रमापुत्राय नमः ।
ॐ रमया परितोषिताय नमः ।
ॐ राजसेव्याय नमः ।
ॐ राजधनाय नमः ।
ॐ रणदोर्दण्डमण्डिताय नमः ।
ॐ रमणाय नमः ।
ॐ रेणुका सेव्याय नमः ।
ॐ रजनीचरदारणाय नमः ।
ॐ ईशानाय नमः । १८०
ॐ इभराट् सेव्याय नमः ।
ॐ ईषणात्रयनाशनाय नमः ।
ॐ इडावासाय नमः ।
ॐ हेमनिभाय नमः ।
ॐ हैमप्राकारशोभिताय नमः ।
ॐ हयप्रियाय नमः ।
ॐ हयग्रीवाय नमः ।
ॐ हंसाय नमः ।
ॐ हरिहरात्मजाय नमः ।
ॐ हाटकस्फटिकप्रख्याय नमः ।
ॐ हंसारूढेन सेविताय नमः ।
ॐ वनवासाय नमः ।
ॐ वनाध्यक्षाय नमः ।
ॐ वामदेवाय नमः ।
ॐ वराननाय नमः ।
ॐ वैवस्वतपतये नमः ।
ॐ विष्णवे नमः ।
ॐ विराड्रूपाय नमः ।
ॐ विशां पतये नमः ।
ॐ वेणुनादाय नमः । २००
ॐ वरग्रीवाय नमः ।
ॐ वराभयकरान्विताय नमः ।
ॐ वर्चस्विने नमः ।
ॐ विपुलग्रीवाय नमः ।
ॐ विपुलाक्षाय नमः ।
ॐ विनोदवते नमः ।
ॐ वैणवारण्यवासाय नमः ।
ॐ वामदेवेनसेविताय नमः ।
ॐ वेत्रहस्ताय नमः ।
ॐ वेदनिधये नमः ।
ॐ वंशदेवाय नमः ।
ॐ वराङ्गकाय नमः ।
ॐ ह्रीङ्काराय नमः ।
ॐ ह्रींमनसे नमः ।
ॐ हृष्टाय नमः ।
ॐ हिरण्याय नमः ।
ॐ हेमसम्भवाय नमः ।
ॐ हुताशाय नमः ।
ॐ हुतनिष्पन्नाय नमः ।
ॐ हुङ्काराकृतये नमः । २२०
ॐ सुप्रभवे नमः ।
ॐ हव्यवाहाय नमः ।
ॐ हव्यकराय नमः ।
ॐ अट्टहासाय नमः ।
ॐ अपराहताय नमः ।
ॐ अणुरूपाय नमः ।
ॐ रूपकराय नमः ।
ॐ अजराय नमः ।
ॐ अतनुरूपकाय नमः ।
ॐ हंसमन्त्राय नमः ।
ॐ हुतभुजे नमः ।
ॐ हेमाम्बराय नमः ।
ॐ सुलक्षणाय नमः ।
ॐ नीपप्रियाय नमः ।
ॐ नीलवाससे नमः ।
ॐ निधिपालाय नमः ।
ॐ निरातपाय नमः ।
ॐ क्रोडहस्ताय नमः ।
ॐ तपस्त्रात्रे नमः ।
ॐ तपोरक्षाय नमः । २४०
ॐ तपाह्वयाय नमः ।
ॐ मूर्धाभिषिक्ताय नमः ।
ॐ मानिने नमः ।
ॐ मन्त्ररूपाय नमः ।
ॐ मृडाय नमः ।
ॐ मनवे नमः ।
ॐ मेधाविने नमः ।
ॐ मेधसाय नमः ।
ॐ मुष्णवे नमः ।
ॐ मकराय नमः ।
ॐ मकरालयाय नमः ।
ॐ मार्ताण्डाय नमः ।
ॐ मञ्जुकेशाय नमः ।
ॐ मासपालाय नमः ।
ॐ महौषधये नमः ।
ॐ श्रोत्रियाय नमः ।
ॐ शोभमानाय नमः ।
ॐ सवित्रे नमः ।
ॐ सर्वदेशिकाय नमः ।
ॐ चन्द्रहासाय नमः । २६०
ॐ शमाय नमः ।
ॐ शक्ताय नमः ।
ॐ शशिभासाय नमः ।
ॐ शमाधिकाय नमः ।
ॐ सुदन्ताय नमः ।
ॐ सुकपोलाय नमः ।
ॐ षड्वर्णाय नमः ।
ॐ सम्पदोऽधिपाय नमः ।
ॐ गरलाय नमः ।
ॐ कालकण्ठाय नमः ।
ॐ गोनेत्रे नमः ।
ॐ गोमुखप्रभवे नमः ।
ॐ कौशिकाय नमः ।
ॐ कालदेवाय नमः ।
ॐ क्रोशकाय नमः ।
ॐ क्रौञ्चभेदकाय नमः ।
ॐ क्रियाकराय नमः ।
ॐ कृपालवे नमः ।
ॐ करवीरकरेरुहाय नमः ।
ॐ कन्दर्पदर्पहारिणे नमः । २८०
ॐ कामदात्रे नमः ।
ॐ कपालकाय नमः ।
ॐ कैलासवासाय नमः ।
ॐ वरदाय नमः ।
ॐ विरोचनाय नमः ।
ॐ विभावसवे नमः ।
ॐ बभ्रुवाहाय नमः ।
ॐ बलाध्यक्षाय नमः ।
ॐ फणामणिविभूषणाय नमः ।
ॐ सुन्दराय नमः ।
ॐ सुमुखाय नमः ।
ॐ स्वच्छाय नमः ।
ॐ सभासदे नमः ।
ॐ सभाकराय नमः ।
ॐ शरानिवृत्ताय नमः ।
ॐ शक्राप्ताय नमः ।
ॐ शरणागतपालकाय नमः ।
ॐ तीक्ष्णदंष्ट्राय नमः ।
ॐ दीर्घजिह्वाय नमः ।
ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः । ३००
ॐ पिशाचघ्ने नमः ।
ॐ अभेद्याय नमः ।
ॐ अङ्गदार्ढ्याय नमः ।
ॐ भोजपालाय नमः ।
ॐ भूपतये नमः ।
ॐ गृध्रनासाय नमः ।
ॐ अविषह्याय नमः ।
ॐ दिग्देहाय नमः ।
ॐ दैन्यदाहकाय नमः ।
ॐ बडबापूरितमुखाय नमः ।
ॐ व्यापकाय नमः ।
ॐ विषमोचकाय नमः ।
ॐ हसन्ताय नमः ।
ॐ समरक्रुद्धाय नमः ।
ॐ पुङ्गवाय नमः ।
ॐ पङ्कजासनाय नमः ।
ॐ विश्वदर्पाय नमः ।
ॐ निश्चिताज्ञाय नमः ।
ॐ नागाभरणभूषिताय नमः ।
ॐ भरताय नमः । ३२०
ॐ भैरवाकाराय नमः ।
ॐ भरणाय नमः ।
ॐ वामनक्रियाय नमः ।
ॐ सिंहास्याय नमः ।
ॐ सिंहरूपाय नमः ।
ॐ सेनापतये नमः ।
ॐ सकारकाय नमः ।
ॐ सनातनाय नमः ।
ॐ सिद्धरूपिणे नमः ।
ॐ सिद्धधर्मपरायणाय नमः ।
ॐ आदित्यरूपाय नमः ।
ॐ आपद्घ्नाय नमः ।
ॐ अमृताब्धिनिवासभुवे नमः ।
ॐ युवराजाय नमः ।
ॐ योगिवर्याय नमः ।
ॐ उषस्तेजसे नमः ।
ॐ उडुप्रभाय नमः ।
ॐ देवादिदेवाय नमः ।
ॐ दैवज्ञाय नमः ।
ॐ ताम्रोष्ठाय नमः । ३४०
ॐ ताम्रलोचनाय नमः ।
ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः ।
ॐ पिञ्छचूडाय नमः ।
ॐ फणामणिविभूषिताय नमः ।
ॐ भुजङ्गभूषणाय नमः ।
ॐ भोगाय नमः ।
ॐ भोगानन्दकराय नमः ।
ॐ अव्ययाय नमः ।
ॐ पञ्चहस्तेन सम्पूज्याय नमः ।
ॐ पञ्चबाणेन सेविताय नमः ।
ॐ भवाय नमः ।
ॐ शर्वाय नमः ।
ॐ भानुमयाय नमः ।
ॐ प्राजापत्यस्वरूपकाय नमः ।
ॐ स्वच्छन्दाय नमः ।
ॐ छन्दः शास्त्रज्ञाय नमः ।
ॐ दान्ताय नमः ।
ॐ देवमनुप्रभवे नमः ।
ॐ दशभुजे नमः ।
ॐ दशाध्यक्षाय नमः । ३६०
ॐ दानवानां विनाशनाय नमः ।
ॐ सहस्राक्षाय नमः ।
ॐ शरोत्पन्नाय नमः ।
ॐ शतानन्दसमागमाय नमः ।
ॐ गृध्राद्रिवासाय नमः ।
ॐ गम्भीराय नमः ।
ॐ गन्धग्राहाय नमः ।
ॐ गणेश्वराय नमः ।
ॐ गोमेधाय नमः ।
ॐ गण्डकावासाय नमः ।
ॐ गोकुलैः परिवारिताय नमः ।
ॐ परिवेषाय नमः ।
ॐ पदज्ञानिने नमः ।
ॐ प्रियङ्गुद्रुमवासकाय नमः ।
ॐ गुहावासाय नमः ।
ॐ गुरुवराय नमः ।
ॐ वन्दनीयाय नमः ।
ॐ वदान्यकाय नमः ।
ॐ वृत्ताकाराय नमः ।
ॐ वेणुपाणये नमः । ३८०
ॐ वीणादण्डधराय नमः ।
ॐ हराय नमः ।
ॐ हैमीड्याय नमः ।
ॐ होतृसुभगाय नमः ।
ॐ हौत्रज्ञाय नमः ।
ॐ ओजसां पतये नमः ।
ॐ पवमानाय नमः ।
ॐ प्रजातन्तुप्रदाय नमः ।
ॐ दण्डविनाशनाय नमः ।
ॐ निमीड्याय नमः ।
ॐ निमिषार्धज्ञाय नमः ।
ॐ निमिषाकारकारणाय नमः ।
ॐ लिगुडाभाय नमः ।
ॐ लिडाकाराय नमः ।
ॐ लक्ष्मीवन्द्याय नमः ।
ॐ वरप्रभवे नमः ।
ॐ इडाज्ञाय नमः ।
ॐ पिङ्गलावासाय नमः ।
ॐ सुषुम्नामध्यसम्भवाय नमः ।
ॐ भिक्षाटनाय नमः । ४००
ॐ भीमवर्चसे नमः ।
ॐ वरकीर्तये नमः ।
ॐ सभेश्वराय नमः ।
ॐ वाचातीताय नमः ।
ॐ वरनिधये नमः ।
ॐ परिवेत्रे नमः ।
ॐ प्रमाणकाय नमः ।
ॐ अप्रमेयाय नमः ।
ॐ अनिरुद्धाय नमः ।
ॐ अनन्तादित्यसुप्रभाय नमः ।
ॐ वेषप्रियाय नमः ।
ॐ विषग्राहाय नमः ।
ॐ वरदानकरोत्तमाय नमः ।
ॐ विपिनाय नमः ।
ॐ वेदसाराय नमः ।
ॐ वेदान्तैः परितोषिताय नमः ।
ॐ वक्रागमाय नमः ।
ॐ वर्चवचाय नमः ।
ॐ बलदात्रे नमः ।
ॐ विमानवते नमः । ४२०
ॐ वज्रकान्ताय नमः ।
ॐ वंशकराय नमः ।
ॐ वटुरक्षाविशारदाय नमः ।
ॐ वप्रक्रीडाय नमः ।
ॐ विप्रपूज्याय नमः ।
ॐ वेलाराशये नमः ।
ॐ चलालकाय नमः ।
ॐ कोलाहलाय नमः ।
ॐ क्रोडनेत्राय नमः ।
ॐ क्रोडास्याय नमः ।
ॐ कपालभृते नमः ।
ॐ कुञ्जरेड्याय नमः ।
ॐ मञ्जुवाससे नमः ।
ॐ क्रियमाणाय नमः ।
ॐ क्रियाप्रदाय नमः ।
ॐ क्रीडानाथाय नमः ।
ॐ कीलहस्ताय नमः ।
ॐ क्रोशमानाय नमः ।
ॐ बलाधिकाय नमः ।
ॐ कनकाय नमः । ४४०
ॐ होतृभागिने नमः ।
ॐ खवासाय नमः ।
ॐ खचराय नमः ।
ॐ खगाय नमः ।
ॐ गणकाय नमः ।
ॐ गुणनिर्दुष्टाय नमः ।
ॐ गुणत्यागिने नमः ।
ॐ कुशाधिपाय नमः ।
ॐ पाटलाय नमः ।
ॐ पत्रधारिणे नमः ।
ॐ पलाशाय नमः ।
ॐ पुत्रवर्धनाय नमः ।
ॐ पितृसच्चरिताय नमः ।
ॐ प्रेष्ठवे नमः ।
ॐ पापभस्मने नमः ।
ॐ पुनः शुचये नमः ।
ॐ फालनेत्राय नमः ।
ॐ फुल्लकेशाय नमः ।
ॐ फुल्लकल्हारभूषिताय नमः ।
ॐ फणिसेव्याय नमः । ४६०
ॐ पट्टभद्राय नमः ।
ॐ पटवे नमः ।
ॐ वाग्मिने नमः ।
ॐ वयोऽधिकाय नमः ।
ॐ चोरनाट्याय नमः ।
ॐ चोरवेषाय नमः ।
ॐ चोरघ्नाय नमः ।
ॐ चौर्यवर्धनाय नमः ।
ॐ चञ्चलाक्षाय नमः ।
ॐ चामरकाय नमः ।
ॐ मरीचये नमः ।
ॐ मदगामिकाय नमः ।
ॐ मृडाभाय नमः ।
ॐ मेषवाहाय नमः ।
ॐ मैथिल्याय नमः ।
ॐ मोचकाय नमः ।
ॐ मनसे नमः ।
ॐ मनुरूपाय नमः ।
ॐ मन्त्रदेवाय नमः ।
ॐ मन्त्रराशये नमः । ४८०
ॐ महादृढाय नमः ।
ॐ स्थूपिज्ञाय नमः ।
ॐ धनदात्रे नमः ।
ॐ देववन्द्याय नमः ।
ॐ तारणाय नमः ।
ॐ यज्ञप्रियाय नमः ।
ॐ यमाध्यक्षाय नमः ।
ॐ इभक्रीडाय नमः ।
ॐ इभेक्षणाय नमः ।
ॐ दधिप्रियाय नमः ।
ॐ दुराधर्षाय नमः ।
ॐ दारुपालाय नमः ।
ॐ दनूजघ्ने नमः ।
ॐ दामोदराय नमः ।
ॐ दामधराय नमः ।
ॐ दक्षिणामूर्तिरूपकाय नमः ।
ॐ शचीपूज्याय नमः ।
ॐ शङ्खकर्णाय नमः ।
ॐ चन्द्रचूडाय नमः ।
ॐ मनुप्रियाय नमः । ५००
ॐ गुडरूपाय नमः ।
ॐ गुडाकेशाय नमः ।
ॐ कुलधर्मपरायणाय नमः ।
ॐ कालकण्ठाय नमः ।
ॐ गाढगात्राय नमः ।
ॐ गोत्ररूपाय नमः ।
ॐ कुलेश्वराय नमः ।
ॐ आनन्दभैरवाराध्याय नमः ।
ॐ हयमेधफलप्रदाय नमः ।
ॐ दध्यन्नासक्तहृदयाय नमः ।
ॐ गुडान्नप्रीतमानसाय नमः ।
ॐ घृतान्नासक्तहृदयाय नमः ।
ॐ गौराङ्गाय नमः ।
ॐ गर्वभञ्जकाय नमः ।
ॐ गणेशपूज्याय नमः ।
ॐ गगनाय नमः ।
ॐ गणानां पतये नमः ।
ॐ ऊर्जिताय नमः ।
ॐ छद्महीनाय नमः ।
ॐ शशिरदाय नमः । ५२०
ॐ शत्रूणां पतये नमः ।
ॐ अङ्गिरसे नमः ।
ॐ चराचरमयाय नमः ।
ॐ शान्ताय नमः ।
ॐ शरभेशाय नमः ।
ॐ शतातपाय नमः ।
ॐ वीराराध्याय नमः ।
ॐ वक्रगमाय नमः ।
ॐ वेदाङ्गाय नमः ।
ॐ वेदपारगाय नमः ।
ॐ पर्वतारोहणाय नमः ।
ॐ पूष्णे नमः ।
ॐ परमेशाय नमः ।
ॐ प्रजापतये नमः ।
ॐ भावज्ञाय नमः ।
ॐ भवरोगघ्नाय नमः ।
ॐ भवसागरतारणाय नमः ।
ॐ चिदग्निदेहाय नमः ।
ॐ चिद्रूपाय नमः ।
ॐ चिदानन्दाय नमः । ५४०
ॐ चिदाकृतये नमः ।
ॐ नाट्यप्रियाय नमः ।
ॐ नरपतये नमः ।
ॐ नरनारायणार्चिताय नमः ।
ॐ निषादराजाय नमः ।
ॐ नीहाराय नमः ।
ॐ नेष्ट्रे नमः ।
ॐ निष्ठुरभाषणाय नमः ।
ॐ निम्नप्रियाय नमः ।
ॐ नीलनेत्राय नमः ।
ॐ नीलाङ्गाय नमः ।
ॐ नीलकेशकाय नमः ।
ॐ सिंहाक्षाय नमः ।
ॐ सर्वविघ्नेशाय नमः ।
ॐ सामवेदपरायणाय नमः ।
ॐ सनकादिमुनिध्येयाय नमः ।
ॐ शर्वरीशाय नमः ।
ॐ षडाननाय नमः ।
ॐ सुरूपाय नमः ।
ॐ सुलभाय नमः । ५६०
ॐ स्वर्गाय नमः ।
ॐ शचीनाथेन पूजिताय नमः ।
ॐ काकिनाय नमः ।
ॐ कामदहनाय नमः ।
ॐ दग्धपापाय नमः ।
ॐ धराधिपाय नमः ।
ॐ दामग्रन्थिने नमः ।
ॐ शतस्त्रीशाय नमः ।
ॐ तन्त्रीपालाय नमः ।
ॐ तारकाय नमः ।
ॐ ताम्राक्षाय नमः ।
ॐ तीक्ष्णदंष्ट्राय नमः ।
ॐ तिलभोज्याय नमः ।
ॐ तिलोदराय नमः ।
ॐ माण्डुकर्णाय नमः ।
ॐ मृडाधीशाय नमः ।
ॐ मेरुवर्णाय नमः ।
ॐ महोदराय नमः ।
ॐ मार्ताण्डभैरवाराध्याय नमः ।
ॐ मणिरूपाय नमः । ५८०
ॐ मरुद्वहाय नमः ।
ॐ माषप्रियाय नमः ।
ॐ मधुपानाय नमः ।
ॐ मृणालाय नमः ।
ॐ मोहिनीपतये नमः ।
ॐ महाकामेशतनयाय नमः ।
ॐ माधवाय नमः ।
ॐ मदगर्विताय नमः ।
ॐ मूलाधाराम्बुजावासाय नमः ।
ॐ मूलविद्यास्वरूपकाय नमः ।
ॐ स्वाधिष्ठानमयाय नमः ।
ॐ स्वस्थाय नमः ।
ॐ स्वस्तिवाक्याय नमः ।
ॐ स्रुवायुधाय नमः ।
ॐ मणिपूराब्जनिलयाय नमः ।
ॐ महाभैरवपूजिताय नमः ।
ॐ अनाहताब्जरसिकाय नमः ।
ॐ ह्रीङ्काररसपेशलाय नमः ।
ॐ भ्रूमध्यवासाय नमः ।
ॐ भ्रूकान्ताय नमः । ६००
ॐ भरद्वाजप्रपूजिताय नमः ।
ॐ सहस्राराम्बुजावासाय नमः ।
ॐ सवित्रे नमः ।
ॐ सामवाचकाय नमः ।
ॐ मुकुन्दाय नमः ।
ॐ गुणातीताय नमः ।
ॐ गुणपूज्याय नमः ।
ॐ गुणाश्रयाय नमः ।
ॐ धन्याय नमः ।
ॐ धनभृते नमः ।
ॐ दाहाय नमः ।
ॐ धनदानकराम्बुजाय नमः ।
ॐ महाशयाय नमः ।
ॐ महातीताय नमः ।
ॐ मायाहीनाय नमः ।
ॐ मदार्चिताय नमः ।
ॐ माठराय नमः ।
ॐ मोक्षफलदाय नमः ।
ॐ सद्वैरिकुलनाशनाय नमः ।
ॐ पिङ्गलाय नमः । ६२०
ॐ पिञ्छचूडाय नमः ।
ॐ पिशिताशपवित्रकाय नमः ।
ॐ पायसान्नप्रियाय नमः ।
ॐ पर्वपक्षमासविभाजकाय नमः ।
ॐ वज्रभूषाय नमः ।
ॐ वज्रकायाय नमः ।
ॐ विरिञ्चाय नमः ।
ॐ वरवक्षणाय नमः ।
ॐ विज्ञानकलिकाबृन्दाय नमः ।
ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः ।
ॐ डम्भघ्नाय नमः ।
ॐ दमघोषघ्नाय नमः ।
ॐ दासपालाय नमः ।
ॐ तपौजसाय नमः ।
ॐ द्रोणकुम्भाभिषिक्ताय नमः ।
ॐ द्रोहिनाशाय नमः ।
ॐ तपातुराय नमः ।
ॐ महावीरेन्द्रवरदाय नमः ।
ॐ महासंसारनाशनाय नमः ।
ॐ लाकिनीहाकिनीलब्धाय नमः । ६४०
ॐ लवणाम्भोधितारणाय नमः ।
ॐ काकिलाय नमः ।
ॐ कालपाशघ्नाय नमः ।
ॐ कर्मबन्धविमोचकाय नमः ।
ॐ मोचकाय नमः ।
ॐ मोहनिर्भिन्नाय नमः ।
ॐ भगाराध्याय नमः ।
ॐ बृहत्तनवे नमः ।
ॐ अक्षयाय नमः ।
ॐ अक्रूरवरदाय नमः ।
ॐ वक्रागमविनाशनाय नमः ।
ॐ डाकिनाय नमः ।
ॐ सूर्यतेजस्विने नमः ।
ॐ सर्पभूषाय नमः ।
ॐ सद्गुरवे नमः ।
ॐ स्वतन्त्राय नमः ।
ॐ सर्वतन्त्रेशाय नमः ।
ॐ दक्षिणादिगधीश्वराय नमः ।
ॐ सच्चिदानन्दकलिकाय नमः ।
ॐ प्रेमरूपाय नमः । ६६०
ॐ प्रियङ्कराय नमः ।
ॐ मिथ्याजगदधिष्ठानाय नमः ।
ॐ मुक्तिदाय नमः ।
ॐ मुक्तिरूपकाय नमः ।
ॐ मुमुक्षवे नमः ।
ॐ कर्मफलदाय नमः ।
ॐ मार्गदक्षाय नमः ।
ॐ कर्मठाय नमः ।
ॐ महाबुद्धाय नमः ।
ॐ महाशुद्धाय नमः ।
ॐ शुकवर्णाय नमः ।
ॐ शुकप्रियाय नमः ।
ॐ सोमप्रियाय नमः ।
ॐ स्वरप्रीताय नमः ।
ॐ पर्वाराधनतत्पराय नमः ।
ॐ अजपाय नमः ।
ॐ जनहंसाय नमः ।
ॐ हलपाणिप्रपूजिताय नमः ।
ॐ अर्चिताय नमः ।
ॐ वर्धनाय नमः । ६८०
ॐ वाग्मिने नमः ।
ॐ वीरवेषाय नमः ।
ॐ विधुप्रियाय नमः ।
ॐ लास्यप्रियाय नमः ।
ॐ लयकराय नमः ।
ॐ लाभालाभविवर्जिताय नमः ।
ॐ पञ्चाननाय नमः ।
ॐ पञ्चगूढाय नमः ।
ॐ पञ्चयज्ञफलप्रदाय नमः ।
ॐ पाशहस्ताय नमः ।
ॐ पावकेशाय नमः ।
ॐ पर्जन्यसमगर्जनाय नमः ।
ॐ पापारये नमः ।
ॐ परमोदाराय नमः ।
ॐ प्रजेशाय नमः ।
ॐ पङ्कनाशनाय नमः ।
ॐ नष्टकर्मणे नमः ।
ॐ नष्टवैराय नमः ।
ॐ इष्टसिद्धिप्रदायकाय नमः ।
ॐ नागाधीशाय नमः । ७००
ॐ नष्टपापाय नमः ।
ॐ इष्टनामविधायकाय नमः ।
ॐ सामरस्याय नमः ।
ॐ अप्रमेयाय नमः ।
ॐ पाषण्डिने नमः ।
ॐ पर्वतप्रियाय नमः ।
ॐ पञ्चकृत्यपराय नमः ।
ॐ पात्रे नमः ।
ॐ पञ्चपञ्चातिशायिकाय नमः ।
ॐ पद्माक्षाय नमः ।
ॐ पद्मवदनाय नमः ।
ॐ पावकाभाय नमः ।
ॐ प्रियङ्कराय नमः ।
ॐ कार्तस्वराङ्गाय नमः ।
ॐ गौराङ्गाय नमः ।
ॐ गौरीपुत्राय नमः ।
ॐ धनेश्वराय नमः ।
ॐ गणेशाश्लिष्टदेहाय नमः ।
ॐ शीतांशवे नमः ।
ॐ शुभदीधितये नमः । ७२०
ॐ दक्षध्वंसाय नमः ।
ॐ दक्षकराय नमः ।
ॐ वराय नमः ।
ॐ कात्यायनीसुताय नमः ।
ॐ सुमुखाय नमः ।
ॐ मार्गणाय नमः ।
ॐ गर्भाय नमः ।
ॐ गर्वभङ्गाय नमः ।
ॐ कुशासनाय नमः ।
ॐ कुलपालपतये नमः ।
ॐ श्रेष्ठाय नमः ।
ॐ पवमानाय नमः ।
ॐ प्रजाधिपाय नमः ।
ॐ दर्शप्रियाय नमः ।
ॐ निर्विकाराय नमः ।
ॐ दीर्घकायाय नमः ।
ॐ दिवाकराय नमः ।
ॐ भेरीनादप्रियाय नमः ।
ॐ बृन्दाय नमः ।
ॐ बृहत्सेनाय नमः । ७४०
ॐ सुपालकाय नमः ।
ॐ सुब्रह्मणे नमः ।
ॐ ब्रह्मरसिकाय नमः ।
ॐ रसज्ञाय नमः ।
ॐ रजताद्रिभासे नमः ।
ॐ तिमिरघ्नाय नमः ।
ॐ मिहिराभाय नमः ।
ॐ महानीलसमप्रभाय नमः ।
ॐ श्रीचन्दनविलिप्ताङ्गाय नमः ।
ॐ श्रीपुत्राय नमः ।
ॐ श्रीतरुप्रियाय नमः ।
ॐ लाक्षावर्णाय नमः ।
ॐ लसत्कर्णाय नमः ।
ॐ रजनीध्वंसिसन्निभाय नमः ।
ॐ बिन्दुप्रियाय नमः ।
ॐ अम्बिकापुत्राय नमः ।
ॐ बैन्दवाय नमः ।
ॐ बलनायकाय नमः ।
ॐ आपन्नतारकाय नमः ।
ॐ तप्ताय नमः । ७६०
ॐ तप्तकृच्छ्रफलप्रदाय नमः ।
ॐ मरुद्वृधाय नमः ।
ॐ महाखर्वाय नमः ।
ॐ चीरवासाय नमः ।
ॐ शिखिप्रियाय नमः ।
ॐ आयुष्मते नमः ।
ॐ अनघाय नमः ।
ॐ दूताय नमः ।
ॐ आयुर्वेदपरायणाय नमः ।
ॐ हंसाय नमः ।
ॐ परमहंसाय नमः ।
ॐ अवधूताश्रमप्रियाय नमः ।
ॐ आशुवेगाय नमः ।
ॐ अश्वहृदयाय नमः ।
ॐ हयधैर्यफलप्रदाय नमः ।
ॐ सुमुखाय नमः ।
ॐ दुर्मुखाय नमः ।
ॐ अविघ्नाय नमः ।
ॐ निर्विघ्नाय नमः ।
ॐ विघ्ननाशनाय नमः । ७८०
ॐ आर्याय नमः ।
ॐ नाथाय नमः ।
ॐ अर्यमाभासाय नमः ।
ॐ फल्गुणाय नमः ।
ॐ फाललोचनाय नमः ।
ॐ अरातिघ्नाय नमः ।
ॐ घनग्रीवाय नमः ।
ॐ ग्रीष्मसूर्यसमप्रभाय नमः ।
ॐ किरीटिने नमः ।
ॐ कल्पशास्त्रज्ञाय नमः ।
ॐ कल्पानलविधायकाय नमः ।
ॐ ज्ञानविज्ञानफलदाय नमः ।
ॐ विरिञ्चारिविनाशनाय नमः ।
ॐ वीरमार्ताण्डवरदाय नमः ।
ॐ वीरबाहवे नमः ।
ॐ पूर्वजाय नमः ।
ॐ वीरसिंहासनाय नमः ।
ॐ विज्ञाय नमः ।
ॐ वीरकार्याय नमः ।
ॐ अस्तदानवाय नमः । ८००
ॐ नरवीरसुहृद्भ्रात्रे नमः ।
ॐ नागरत्नविभूषिताय नमः ।
ॐ वाचस्पतये नमः ।
ॐ पुरारातये नमः ।
ॐ संवर्ताय नमः ।
ॐ समरेश्वराय नमः ।
ॐ उरुवाग्मिने नमः ।
ॐ उमापुत्राय नमः ।
ॐ उडुलोकसुरक्षकाय नमः ।
ॐ शृङ्गाररससम्पूर्णाय नमः ।
ॐ सिन्दूरतिलकाङ्किताय नमः ।
ॐ कुङ्कुमाङ्कितसर्वाङ्गाय नमः ।
ॐ कालकेयविनाशनाय नमः ।
ॐ मत्तनागप्रियाय नमः ।
ॐ नेत्रे नमः ।
ॐ नागगन्धर्वपूजिताय नमः ।
ॐ सुस्वप्नबोधकाय नमः ।
ॐ बोधाय नमः ।
ॐ गौरीदुःस्वप्ननाशनाय नमः ।
ॐ चिन्ताराशिपरिध्वंसिने नमः । ८२०
ॐ चिन्तामणिविभूषिताय नमः ।
ॐ चराचरजगत्स्रष्ट्रे नमः ।
ॐ चलत्कुण्डलकर्णयुजे नमः ।
ॐ मुकुरास्याय नमः ।
ॐ मूलनिधये नमः ।
ॐ निधिद्वयनिषेविताय नमः ।
ॐ नीराजनप्रीतमनसे नमः ।
ॐ नीलनेत्राय नमः ।
ॐ नयप्रदाय नमः ।
ॐ केदारेशाय नमः ।
ॐ किराताय नमः ।
ॐ कालात्मने नमः ।
ॐ कल्पविग्रहाय नमः ।
ॐ कल्पान्तभैरवाराध्याय नमः ।
ॐ काकपत्रशरायुधाय नमः ।
ॐ कलाकाष्ठास्वरूपाय नमः ।
ॐ ऋतुवर्षादिमासवते नमः ।
ॐ दिनेशमण्डलावासाय नमः ।
ॐ वासवादिप्रपूजिताय नमः ।
ॐ बहुलस्तम्बकर्मज्ञाय नमः । ८४०
ॐ पञ्चाशद्वर्णरूपकाय नमः ।
ॐ चिन्ताहीनाय नमः ।
ॐ चिदाक्रान्ताय नमः ।
ॐ चारुपालाय नमः ।
ॐ हलायुधाय नमः ।
ॐ बन्धूककुसुमप्रख्याय नमः ।
ॐ परगर्वविभञ्जनाय नमः ।
ॐ विद्वत्तमाय नमः ।
ॐ विराधघ्नाय नमः ।
ॐ सचित्राय नमः ।
ॐ चित्रकर्मकाय नमः ।
ॐ सङ्गीतलोलुपमनसे नमः ।
ॐ स्निग्धगम्भीरगर्जिताय नमः ।
ॐ तुङ्गवक्त्राय नमः ।
ॐ स्तवरसाय नमः ।
ॐ अभ्राभाय नमः ।
ॐ भ्रमरेक्षणाय नमः ।
ॐ लीलाकमलहस्ताब्जाय नमः ।
ॐ बालकुन्दविभूषिताय नमः ।
ॐ लोध्रप्रसवशुद्धाभाय नमः । ८६०
ॐ शिरीषकुसुमप्रियाय नमः ।
ॐ त्रासत्राणकराय नमः ।
ॐ तत्त्वाय नमः ।
ॐ तत्त्ववाक्यार्थबोधकाय नमः ।
ॐ वर्षीयसे नमः ।
ॐ विधिस्तुत्याय नमः ।
ॐ वेदान्तप्रतिपादकाय नमः ।
ॐ मूलभूताय नमः ।
ॐ मूलतत्त्वाय नमः ।
ॐ मूलकारणविग्रहाय नमः ।
ॐ आदिनाथाय नमः ।
ॐ अक्षयफलपाणये नमः ।
ॐ जन्मापराजिताय नमः ।
ॐ गानप्रियाय नमः ।
ॐ गानलोलाय नमः ।
ॐ महेशाय नमः ।
ॐ विज्ञमानसाय नमः ।
ॐ गिरिजास्तन्यरसिकाय नमः ।
ॐ गिरिराजवरस्तुताय नमः ।
ॐ पीयूषकुम्भहस्ताब्जाय नमः । ८८०
ॐ पाशत्यागिने नमः ।
ॐ चिरन्तनाय नमः ।
ॐ सुधालालसवक्त्राब्जाय नमः ।
ॐ सुरद्रुमफलेप्सिताय नमः ।
ॐ रत्नहाटकभूषाङ्गाय नमः ।
ॐ रावणादिप्रपूजिताय नमः ।
ॐ कनत्कालेशसुप्रीताय नमः ।
ॐ क्रौञ्चगर्वविनाशनाय नमः ।
ॐ अशेषजनसम्मोहाय नमः ।
ॐ आयुर्विद्याफलप्रदाय नमः ।
ॐ अवबद्धदुकूलाङ्गाय नमः ।
ॐ हारालङ्कृतकन्धराय नमः ।
ॐ केतकीकुसुमप्रीताय नमः ।
ॐ कलभैः परिवारिताय नमः ।
ॐ केकाप्रियाय नमः ।
ॐ कार्तिकेयाय नमः ।
ॐ सारङ्गनिनदप्रियाय नमः ।
ॐ चातकालापसन्तुष्टाय नमः ।
ॐ चमरीमृगसेविताय नमः ।
ॐ आम्रकूटाद्रिसञ्चारिणे नमः । ९००
ॐ आम्नायफलदायकाय नमः ।
ॐ अक्षसूत्रधृतपाणये नमः ।
ॐ अक्षिरोगविनाशनाय नमः ।
ॐ मुकुन्दपूज्याय नमः ।
ॐ मोहाङ्गाय नमः ।
ॐ मुनिमानसतोषिताय नमः ।
ॐ तैलाभिषिक्तसुशिरसे नमः ।
ॐ तर्जनीमुद्रिकायुताय नमः ।
ॐ तटातकामनः प्रीताय नमः ।
ॐ तमोगुणविनाशनाय नमः ।
ॐ अनामयाय नमः ।
ॐ अनादर्शाय नमः ।
ॐ अर्जुनाभाय नमः ।
ॐ हुतप्रियाय नमः ।
ॐ षाड्गुण्यपरिसम्पूर्णाय नमः ।
ॐ सप्ताश्वादिग्रहैः स्तुताय नमः ।
ॐ वीतशोकाय नमः ।
ॐ प्रसादज्ञाय नमः ।
ॐ सप्तप्राणवरप्रदाय नमः ।
ॐ सप्तार्चिषे नमः । ९२०
ॐ त्रिनयनाय नमः ।
ॐ त्रिवेणीफलदायकाय नमः ।
ॐ कृष्णवर्त्मने नमः ।
ॐ वेदमुखाय नमः ।
ॐ दारुमण्डलमध्यगाय नमः ।
ॐ वीरनूपुरपादाब्जाय नमः ।
ॐ वीरकङ्कणपाणिमते नमः ।
ॐ विश्वमूर्तये नमः ।
ॐ शुद्धमुखाय नमः ।
ॐ शुद्धभस्मानुलेपनाय नमः ।
ॐ शुम्भध्वंसिनीसम्पूज्याय नमः ।
ॐ रक्तबीजकुलान्तकाय नमः ।
ॐ निषादादिस्वरप्रीताय नमः ।
ॐ नमस्कारफलप्रदाय नमः ।
ॐ भक्तारिपञ्चतादायिने नमः ।
ॐ सज्जीकृतशरायुधाय नमः ।
ॐ अभयङ्करमन्त्रज्ञाय नमः ।
ॐ कुब्जिकामन्त्रविग्रहाय नमः ।
ॐ धूम्रास्त्राय नमः ।
ॐ उग्रतेजस्विने नमः । ९४०
ॐ दशकण्ठविनाशनाय नमः ।
ॐ आशुगायुधहस्ताब्जाय नमः ।
ॐ गदायुधकराम्बुजाय नमः ।
ॐ पाशायुधसुपाणये नमः ।
ॐ कपालायुधसद्भुजाय नमः ।
ॐ सहस्रशीर्षवदनाय नमः ।
ॐ सहस्रद्वयलोचनाय नमः ।
ॐ नानाहेतिर्धनुष्पाणये नमः ।
ॐ नानास्रग्भूषणप्रियाय नमः ।
ॐ आश्यामकोमलतनवे नमः ।
ॐ आरक्तापाङ्गलोचनाय नमः ।
ॐ द्वादशाहक्रतुप्रीताय नमः ।
ॐ पौण्डरीकफलप्रदाय नमः ।
ॐ आप्तोर्यामक्रतुमयाय नमः ।
ॐ चयनादिफलप्रदाय नमः ।
ॐ पशुबन्धस्यफलदाय नमः ।
ॐ वाजपेयात्मदैवताय नमः ।
ॐ आब्रह्मकीटजननावनात्मने नमः ।
ॐ चम्पकप्रियाय नमः ।
ॐ पशुपाशविभागज्ञाय नमः । ९६०
ॐ परिज्ञानप्रदायकाय नमः ।
ॐ कल्पेश्वराय नमः ।
ॐ कल्पवर्याय नमः ।
ॐ जातवेदसे नमः ।
ॐ प्रभाकराय नमः ।
ॐ कुम्भीश्वराय नमः ।
ॐ कुम्भपाणये नमः ।
ॐ कुङ्कुमाक्तललाटकाय नमः ।
ॐ शिलीध्रपत्रसङ्काशाय नमः ।
ॐ सिंहवक्त्रप्रमर्दनाय नमः ।
ॐ कोकिलक्वणनाकर्णिने नमः ।
ॐ कालनाशनतत्पराय नमः ।
ॐ नैय्यायिकमतघ्नाय नमः ।
ॐ बौद्धसङ्घविनाशनाय नमः ।
ॐ हेमाब्जधृतपाणये नमः ।
ॐ होमसन्तुष्टमानसाय नमः ।
ॐ पितृयज्ञस्यफलदाय नमः ।
ॐ पितृवज्जनरक्षकाय नमः ।
ॐ पदातिकर्मनिरताय नमः ।
ॐ पृषदाज्यप्रदायकाय नमः । ९८०
ॐ महासुरवधोद्युक्ताय नमः ।
ॐ स्वास्त्रप्रत्यस्त्रवर्षकाय नमः ।
ॐ महावर्षतिरोधानाय नमः ।
ॐ नागाधृतकराम्बुजाय नमः ।
ॐ नमः स्वाहा वषट् वौषट् पल्लवप्रतिपादकाय नमः ।
ॐ महिरसदृशग्रीवाय नमः ।
ॐ महिरसदृशस्तवाय नमः ।
ॐ तन्त्रीवादनहस्ताग्राय नमः ।
ॐ सङ्गीतप्रीतमानसाय नमः ।
ॐ चिदंशमुकुरावासाय नमः ।
ॐ मणिकूटाद्रिसञ्चराय नमः ।
ॐ लीलासञ्चारतनुकाय नमः ।
ॐ लिङ्गशास्त्रप्रवर्तकाय नमः ।
ॐ राकेन्दुद्युतिसम्पन्नाय नमः ।
ॐ यागकर्मफलप्रदाय नमः ।
ॐ मैनाकगिरिसञ्चारिणे नमः ।
ॐ मधुवंशविनाशनाय नमः ।
ॐ तालखण्डपुरावासाय नमः ।
ॐ तमालनिभतेजसे नमः ।
श्रीपूर्णापुष्कलाम्बा समेत श्रीहरिहरपुत्रस्वामिने नमः ॥ १०००
इति श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली ॥
श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली पाठ के अचूक और चमत्कारी लाभ (Benefits)
भगवान अय्यप्पा कलियुग के सबसे जाग्रत और शीघ्र फल देने वाले देवता हैं। जो भी साधक पूर्ण निष्ठा और नियमों का पालन करते हुए उनके 1000 नामों का पाठ या अर्चन करता है, उसे जीवन में निम्नलिखित अकल्पनीय लाभ प्राप्त होते हैं:
1. शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से पूर्ण मुक्ति (Shani Dosha Nivaran)
भगवान अय्यप्पा की पूजा का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ शनि ग्रह की शांति है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान अय्यप्पा ने स्वयं शनि देव को अपने नियंत्रण में लिया था और शनि देव ने वचन दिया था कि जो भी भक्त अय्यप्पा स्वामी की शरण में आएगा और उनका व्रत/पाठ करेगा, शनि देव उसे कभी कष्ट नहीं देंगे। साढ़ेसाती के भयंकर कष्टों को दूर करने के लिए हरिहरपुत्र सहस्रनामावली ब्रह्मांड का सबसे अचूक उपाय है।
2. भयंकर संकटों और शत्रुओं का सर्वनाश
भगवान अय्यप्पा हाथों में धनुष-बाण और तलवार धारण करते हैं। वे वीरों के वीर हैं। यदि आपके जीवन में गुप्त शत्रु बढ़ गए हैं, कोई बिना कारण आपको परेशान कर रहा है या आप कानूनी मामलों में उलझ गए हैं, तो इन 1000 नामों की ऊर्जा आपके शत्रुओं का स्तम्भन कर देती है।
3. तंत्र-मंत्र और भूत-प्रेत बाधा से सुरक्षा
भगवान अय्यप्पा का एक नाम ‘भूतनाथ’ (Bhutanatha) भी है। वे सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं, भूत-पिशाच और बुरी शक्तियों के स्वामी और नियंत्रक हैं। जिस घर में नित्य श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली का पाठ होता है, वहाँ कोई भी तांत्रिक प्रयोग (Black Magic) या बुरी नज़र प्रवेश नहीं कर सकती।
4. विवाह, संतान और दांपत्य सुख की प्राप्ति
हालांकि भगवान अय्यप्पा स्वयं नैष्ठिक ब्रह्मचारी (Eternal Celibate) हैं, परंतु वे अपने गृहस्थ भक्तों को सभी प्रकार के पारिवारिक सुख प्रदान करते हैं। जिन लोगों के विवाह में अकारण देरी हो रही है या जिन्हें सुयोग्य संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है, उन्हें भगवान हरिहरपुत्र की आराधना से शीघ्र ही अनुकूल परिणाम मिलते हैं।
5. अकाल मृत्यु से रक्षा और आरोग्य की प्राप्ति
जो व्यक्ति लंबे समय से किसी असाध्य रोग से पीड़ित है या जिसे दुर्घटना (Accidents) का अज्ञात भय सताता रहता है, उसे भगवान अय्यप्पा के इस सहस्रनाम का अर्चन करना चाहिए। स्वामी अय्यप्पा अपने भक्तों की रक्षा एक ढाल बनकर करते हैं।
6. ज्ञान, एकाग्रता और मोक्ष (Spiritual Awakening)
हरिहरपुत्र सहस्रनामावली का पाठ मन को सांसारिक मोह-माया से हटाकर वैराग्य और ईश्वर प्रेम की ओर ले जाता है। विद्यार्थियों के लिए यह स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने का अचूक मंत्र है। अंत समय में यह पाठ जीव को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कर हरि-हर के धाम (मोक्ष) में स्थान दिलाता है।
श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली की प्रामाणिक अर्चन और पाठ विधि (Authentic Puja Vidhi)
भगवान अय्यप्पा की पूजा में श्रद्धा के साथ-साथ पवित्रता (Purity) का बहुत अधिक महत्व है। यदि आप घर पर 1000 नामों का अर्चन (सहस्रार्चन) करना चाहते हैं, तो इस प्रामाणिक विधि का पालन करें:
1. उत्तम दिन, समय और मास (Best Time)
भगवान अय्यप्पा की उपासना के लिए शनिवार (Saturday) और बुधवार (Wednesday) का दिन सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। वैसे तो इसका पाठ कभी भी किया जा सकता है, परंतु कार्तिक, मार्गशीर्ष और पौष मास (Mandala Makaravilakku season – मध्य नवंबर से मध्य जनवरी तक) में इसका पाठ करना अनंत गुना फल देता है। पाठ का समय शाम (सूर्यास्त के बाद) या प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त होना चाहिए।
2. आसन, वस्त्र और दिशा
स्नान करके पूर्ण रूप से शुद्ध हो जाएं। भगवान अय्यप्पा की पूजा में काले, नीले या भगवा (Saffron) रंग के वस्त्र धारण करना बहुत शुभ होता है। अपना मुख पूर्व (East) दिशा की ओर रखें। ऊनी या कुशा के आसन का प्रयोग करें। गले में तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनना श्रेष्ठ है।
3. पूजन सामग्री और स्थापना
एक लकड़ी की चौकी पर नया कपड़ा बिछाकर भगवान अय्यप्पा का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। यदि आपके पास स्वामी अय्यप्पा का ‘यंत्र’ हो तो उसे भी रख लें। गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार, भगवान अय्यप्पा को ‘नीरांजनम’ (नारियल के आधे हिस्से में घी डालकर दीपक जलाना) अत्यंत प्रिय है।
4. संकल्प (Sankalpa) और गुरु वंदना
दाएँ हाथ में थोड़ा सा जल और अक्षत लेकर अपने नाम, गोत्र और पाठ का उद्देश्य (जैसे शनि दोष शांति या कार्य सिद्धि) बोलकर संकल्प लें। इसके बाद भगवान गणेश, भगवान शिव, भगवान विष्णु और अपने गुरु का ध्यान करें।
5. सहस्रार्चन की चमत्कारी विधि (1000 आहुतियां/पुष्पांजलि)
अपने पास 1000 तुलसी के पत्ते, नीले फूल (Blue flowers), पारिजात के फूल या चंदन/भस्म रख लें। अब सहस्रनामावली का एक-एक नाम (जैसे ॐ हरिहरपुत्राय नमः) पढ़ें और एक फूल या तुलसी दल भगवान के चित्र पर अर्पित करें। 1000 नामों के साथ 1000 बार अर्पण करने की यह विधि ‘सहस्रार्चन’ कहलाती है।
6. भोग (नैवेद्य) और आरती
भगवान अय्यप्पा को अरवण पयसम (Aravana Payasam – गुड़ और चावल की खीर) सबसे अधिक प्रिय है। यदि यह संभव न हो तो गुड़, केले या सादी खीर का भोग लगाएं। अंत में स्वामी अय्यप्पा की आरती (हरिवरासनम) गाएं और “स्वामी शरणम् अय्यप्पा” का उद्घोष करें।
भगवान अय्यप्पा की पूजा के कठोर नियम (Rules & Precautions)
स्वामी अय्यप्पा की उपासना में ‘व्रतम’ (अनुशासन) का विशेष महत्व है। जो भी इस सहस्रनामावली का पाठ कर रहा हो, उसे इन नियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए:
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पूर्ण ब्रह्मचर्य: भगवान अय्यप्पा नैष्ठिक ब्रह्मचारी हैं। जब तक आप उनके सहस्रनाम का अनुष्ठान कर रहे हैं (विशेषकर 41 दिन के मंडलम व्रत के दौरान), पूर्ण रूप से शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का पालन करें।
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सात्विकता का सर्वोच्च स्तर: लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और किसी भी प्रकार के नशे का स्वप्न में भी विचार नहीं आना चाहिए। आहार पूर्णतः सात्विक होना चाहिए।
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पैरों में जूते-चप्पल का त्याग: व्रत के दौरान और विशेषकर पूजा कक्ष में प्रवेश करते समय पैरों में चमड़े की कोई वस्तु या जूते-चप्पल नहीं होने चाहिए।
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क्षमा और नम्रता: पूजा काल के दौरान अकारण क्रोध करना, किसी को अपशब्द कहना या झूठ बोलना आपके पाठ के फल को शून्य कर सकता है। हर व्यक्ति में ‘स्वामी’ का रूप देखें (इसलिए अय्यप्पा भक्तों को ‘स्वामी’ कहकर ही संबोधित किया जाता है)।
निष्कर्ष
Shri Hariharaputra Sahasranamavali केवल संस्कृत के 1000 नामों का संग्रह नहीं है; यह शैव और वैष्णव परंपरा के संगम का वह अलौकिक महामंत्र है, जो इंसान के जन्म-जन्मांतर के पापों को भस्म कर देता है। कलियुग में जहां कदम-कदम पर छल, कपट और संकट है, वहां भगवान अय्यप्पा ‘धर्म शास्ता’ बनकर अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदा तत्पर रहते हैं।
जब भी आपको लगे कि शनि देव के प्रकोप ने आपको चारों ओर से घेर लिया है, या जीवन में अब कोई उम्मीद नहीं बची है, तो एक बार सच्चे हृदय से ‘स्वामी शरणम् अय्यप्पा’ बोलकर इन 1000 नामों का पाठ आरंभ करें। हरि और हर के इस दिव्य पुत्र की कृपा से आपके जीवन का हर अंधेरा मिट जाएगा और सफलता व शांति के नए मार्ग स्वतः ही खुल जाएंगे। स्वामीये शरणम् अय्यप्पा!
श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. भगवान हरिहरपुत्र कौन हैं और उन्हें यह नाम क्यों दिया गया?
भगवान हरिहरपुत्र स्वयं स्वामी अय्यप्पा हैं। राक्षसी महिषी के वध के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था। शिव (हर) और मोहिनी रूपी विष्णु (हरि) के मिलन से जिस दिव्य पुत्र का प्राकट्य हुआ, उन्हें हरिहरपुत्र (हरि + हर + पुत्र) कहा गया।
2. श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली का पाठ करने का सबसे अच्छा दिन कौन सा है?
भगवान अय्यप्पा की आराधना और उनके सहस्रनाम का पाठ करने के लिए शनिवार (Saturday) का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। शनिवार का दिन भगवान अय्यप्पा को समर्पित है क्योंकि वे शनि दोष को दूर करने वाले परम देव हैं।
3. क्या श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली के पाठ से शनि दोष (साढ़ेसाती) दूर होता है?
जी हाँ, शत-प्रतिशत। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान अय्यप्पा ने शनि देव को अपने नियंत्रण में कर लिया था। शनि देव ने यह वचन दिया है कि जो भी भक्त अय्यप्पा स्वामी की पूजा, व्रत या सहस्रनामावली का पाठ करेगा, उसे शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या में कभी कोई कष्ट नहीं होगा।
4. सहस्रनामावली और सहस्रनाम स्तोत्र में क्या मूल अंतर है?
‘सहस्रनाम स्तोत्र’ में भगवान के 1000 नामों को श्लोकों (छंदों) के रूप में पिरोया जाता है जिसे सिर्फ पढ़ा या सुना जाता है। जबकि ‘सहस्रनामावली’ में प्रत्येक नाम स्वतंत्र होता है (जैसे ॐ हरिहरपुत्राय नमः) और इसका उपयोग मुख्य रूप से भगवान को 1000 बार पुष्प, तुलसी या कुमकुम अर्पित करने (अर्चन विधि) के लिए किया जाता है।
5. क्या महिलाएं घर पर श्री हरिहरपुत्र सहस्रनामावली का पाठ कर सकती हैं?
जी हाँ। यद्यपि शबरीमाला मंदिर की तीर्थयात्रा के लिए महिलाओं के प्रवेश (आयु वर्ग के अनुसार) को लेकर कुछ विशेष पारंपरिक नियम हैं, परंतु घर पर बैठकर पूरी श्रद्धा, सात्विकता और पवित्रता के साथ कोई भी स्त्री या पुरुष भगवान अय्यप्पा की पूजा और सहस्रनामावली का पाठ कर सकता है। केवल मासिक धर्म के दिनों में पूजा पाठ से दूर रहना चाहिए।