Shri Dattatreya Sahasranamavali (श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली): Lyrics in Sanskrit, अचूक पाठ विधि और लाभIt takes 31 minutes... to read this article !

सनातन धर्म में गुरु की महिमा को सर्वोपरि माना गया है और जब बात ‘आदि गुरु’ (प्रथम गुरु) की आती है, तो सभी का शीश भगवान श्री दत्तात्रेय (Lord Dattatreya) के चरणों में स्वतः ही झुक जाता है। भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) — इन तीनों देवों के सम्मिलित और साक्षात अवतार हैं। जो साधक अपने जीवन में एक सच्चे गुरु की तलाश में हैं, या जो घोर सांसारिक कष्टों, पितृ दोष और नकारात्मक ऊर्जाओं से घिरे हुए हैं, उनके लिए ‘दत्त गुरु’ की उपासना एक कल्पवृक्ष के समान है।

तंत्र शास्त्र, दत्त संप्रदाय और नाथ परंपरा में भगवान दत्तात्रेय की उपासना को अत्यंत चमत्कारी और शीघ्र फलदायी माना गया है। जीवन के ऐसे घोर संकट जिनका समाधान किसी भी उपाय से नहीं हो रहा हो, वे ‘श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली’ (Shri Dattatreya Sahasranamavali) के पाठ से चुटकियों में हल हो जाते हैं। ‘सहस्रनामावली’ का अर्थ है भगवान दत्तात्रेय के 1000 अत्यंत पवित्र, शक्तिशाली और जाग्रत नामों की माला।

इस अत्यंत विस्तृत और ज्ञानवर्धक लेख में हम आदि गुरु भगवान दत्तात्रेय के स्वरूप का रहस्य, Shri Dattatreya Sahasranamavali Lyrics in Sanskrit की आध्यात्मिक महिमा, इन 1000 नामों का अर्चन करने के अकल्पनीय लाभ, पितृ दोष निवारण में इसकी भूमिका और इसकी प्रामाणिक सिद्ध विधि पर गहराई से चर्चा करेंगे।

भगवान दत्तात्रेय: त्रिदेवों का अवतार और उनका अद्भुत स्वरूप

श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली के रहस्य को समझने से पूर्व, भगवान दत्तात्रेय के स्वरूप को समझना अत्यंत आवश्यक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि अत्रि और माता अनसूया की घोर तपस्या और सतीत्व की परीक्षा लेने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश भिक्षुक बनकर उनके आश्रम आए थे। माता अनसूया ने अपने सतीत्व के तपोबल से तीनों देवों को नवजात शिशु बना दिया। बाद में देवताओं के अनुरोध पर तीनों देवों ने अपने संयुक्त अंश से एक पुत्र के रूप में जन्म लिया, जिसे ‘दत्तात्रेय’ कहा गया।

दत्त स्वरूप का रहस्य (Symbolism):

  • तीन सिर (Three Heads): ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतीक हैं, जो सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार का बोध कराते हैं।

  • छह हाथ (Six Hands): इनमें डमरू, चक्र, शंख, त्रिशूल, कमंडल और जप माला सुशोभित हैं, जो तीनों देवों की शक्तियों का संगम हैं।

  • चार कुत्ते (Four Dogs): भगवान दत्तात्रेय के साथ हमेशा चार कुत्ते रहते हैं, जो ‘चार वेदों’ (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) के प्रतीक हैं। यह दर्शाता है कि ज्ञान हमेशा उनके चरणों में निवास करता है।

  • गौ माता (Cow): उनके पीछे खड़ी गाय ‘कामधेनु’ है, जो साधक की सभी भौतिक और आध्यात्मिक इच्छाओं को पूर्ण करने का प्रतीक है।

सहस्रनामावली का महत्व: 1000 नामों की अमोघ शक्ति

‘सहस्रनामावली’ और ‘सहस्रनाम स्तोत्र’ में एक सूक्ष्म अंतर है। स्तोत्र में 1000 नामों को श्लोकों के रूप में पढ़ा जाता है। लेकिन ‘सहस्रनामावली’ में भगवान के हर एक नाम को एक स्वतंत्र बीज मंत्र की तरह उपयोग किया जाता है। इसके हर नाम के आगे ‘ॐ’ और अंत में ‘नमः’ लगा होता है (जैसे- ॐ दत्तात्रेयाय नमः)।

संस्कृत भाषा का प्रत्येक शब्द ध्वनि विज्ञान (Cymatics) के अनुसार एक विशेष तरंग (Vibration) पैदा करता है। जब साधक दत्तात्रेय जी के 1000 नामों का उच्चारण करते हुए उन्हें फूल या कुमकुम अर्पित करता है, तो उसके शरीर के सातों चक्र जाग्रत होने लगते हैं। भगवान दत्तात्रेय ‘स्मर्तृगामी’ हैं, अर्थात् वे केवल सच्चे मन से स्मरण करने मात्र से ही भक्त के पास दौड़े चले आते हैं। इन 1000 नामों में उनकी अनंत लीलाओं, शक्तियों और उनके परम गुरु स्वरूप का संपूर्ण वर्णन है।

Shri Dattatreya Sahasranamavali | (श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली – 1000 नामों का पवित्र संग्रह: Lyrics in Sanskrit)

(शास्त्रों के नियमानुसार और दत्त संप्रदाय की परंपरा को बनाए रखने के लिए, भगवान दत्तात्रेय के 1000 सिद्ध नामों का पूर्ण पाठ गुरु के सानिध्य में या प्रामाणिक धार्मिक पुस्तक से किया जाना चाहिए। साधक स्नान-ध्यान के पश्चात् इन 1000 नामों का उच्चारण करते हुए भगवान दत्तात्रेय को पीले पुष्प या तुलसी दल अर्पित करते हैं।)

ॐ दत्तात्रेयाय नमः ।
ॐ महायोगिने नमः ।
ॐ योगेशाय नमः ।
ॐ अमरप्रभवे नमः ।
ॐ मुनये नमः ।
ॐ दिगम्बराय नमः ।
ॐ बालाय नमः ।
ॐ मायामुक्ताय नमः ।
ॐ मदापहाय नमः ।
ॐ अवधूताय नमः ।
ॐ महानाथाय नमः ।
ॐ शङ्कराय नमः ।
ॐ अमरवल्लभाय नमः ।
ॐ महादेवाय नमः ।
ॐ आदिदेवाय नमः ।
ॐ पुराणप्रभवे नमः ।
ॐ ईश्वराय नमः ।
ॐ सत्त्वकृते नमः ।
ॐ सत्त्वभृते नमः ।
ॐ भावाय नमः । २०

ॐ सत्त्वात्मने नमः ।
ॐ सत्त्वसागराय नमः ।
ॐ सत्त्वविदे नमः ।
ॐ सत्त्वसाक्षिणे नमः ।
ॐ सत्त्वसाध्याय नमः ।
ॐ अमराधिपाय नमः ।
ॐ भूतकृते नमः ।
ॐ भूतभृते नमः ।
ॐ भूतात्मने नमः ।
ॐ भूतसम्भवाय नमः ।
ॐ भूतभावाय नमः ।
ॐ भवाय नमः ।
ॐ भूतविदे नमः ।
ॐ भूतकारणाय नमः ।
ॐ भूतसाक्षिणे नमः ।
ॐ प्रभूतये नमः ।
ॐ भूतानां परमायै गतये नमः ।
ॐ भूतसङ्गविहीनात्मने नमः ।
ॐ भूतात्मने नमः ।
ॐ भूतशङ्कराय नमः । ४०

ॐ भूतनाथाय नमः ।
ॐ महानाथाय नमः ।
ॐ आदिनाथाय नमः ।
ॐ महेश्वराय नमः ।
ॐ सर्वभूतनिवासात्मने नमः ।
ॐ भूतसन्तापनाशनाय नमः ।
ॐ सर्वात्माय नमः ।
ॐ सर्वभृते नमः ।
ॐ सर्वाय नमः ।
ॐ सर्वज्ञाय नमः ।
ॐ सर्वनिर्णयाय नमः ।
ॐ सर्वसाक्षिणे नमः ।
ॐ बृहद्भानवे नमः ।
ॐ सर्वविदे नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलाय नमः ।
ॐ शान्ताय नमः ।
ॐ सत्याय नमः ।
ॐ समाय नमः ।
ॐ पूर्णाय नमः ।
ॐ एकाकिने नमः । ६०

ॐ कमलापतये नमः ।
ॐ रामाय नमः ।
ॐ रामप्रियाय नमः ।
ॐ विरामाय नमः ।
ॐ रामकारणाय नमः ।
ॐ शुद्धात्मने नमः ।
ॐ पावनाय नमः ।
ॐ अनन्ताय नमः ।
ॐ प्रतीताय नमः ।
ॐ परमार्थभृते नमः ।
ॐ हंससाक्षिणे नमः ।
ॐ विभवे नमः ।
ॐ प्रभवे नमः ।
ॐ प्रलयाय नमः ।
ॐ सिद्धात्मने नमः ।
ॐ परमात्मने नमः ।
ॐ सिद्धानां परमायै गतये नमः ।
ॐ सिद्धिसिद्धाय नमः ।
ॐ साध्याय नमः ।
ॐ साधनाय नमः । ८०

ॐ उत्तमाय नमः ।
ॐ सुलक्षणाय नमः ।
ॐ सुमेधाविने नमः ।
ॐ विद्यावते नमः ।
ॐ विगतान्तराय नमः ।
ॐ विज्वराय नमः ।
ॐ महाबाहवे नमः ।
ॐ बहुलानन्दवर्धनाय नमः ।
ॐ अव्यक्तपुरुषाय नमः ।
ॐ प्राज्ञाय नमः ।
ॐ परज्ञाय नमः ।
ॐ परमार्थदृशे नमः ।
ॐ परापरविनिर्मुक्ताय नमः ।
ॐ युक्ताय नमः ।
ॐ तत्त्वप्रकाशवते नमः ।
ॐ दयावते नमः ।
ॐ भगवते नमः ।
ॐ भाविने नमः ।
ॐ भावात्मने नमः ।
ॐ भावकारणाय नमः । १००

ॐ भवसन्तापनाशाय नमः ।
ॐ पुष्पवते नमः ।
ॐ पण्डिताय नमः ।
ॐ बुधाय नमः ।
ॐ प्रत्यक्षवस्तवे नमः ।
ॐ विश्वात्मने नमः ।
ॐ प्रत्यग्ब्रह्मसनातनाय नमः ।
ॐ प्रमाणविगताय नमः ।
ॐ प्रत्याहारनियोजकाय नमः ।
ॐ प्रणवाय नमः ।
ॐ प्रणवातीताय नमः ।
ॐ प्रमुखाय नमः ।
ॐ प्रलयात्मकाय नमः ।
ॐ मृत्युञ्जयाय नमः ।
ॐ विविक्तात्मने नमः ।
ॐ शङ्करात्मने नमः ।
ॐ परस्मै वपुषे नमः ।
ॐ परमाय नमः ।
ॐ तनुविज्ञेयाय नमः ।
ॐ परमात्मनि संस्थिताय नमः । १२०

 

ॐ प्रबोधकलनाधाराय नमः ।
ॐ प्रभावप्रवरोत्तमाय नमः ।
ॐ चिदम्बराय नमः ।
ॐ चिद्विलासाय नमः ।
ॐ चिदाकाशाय नमः ।
ॐ चिदुत्तमाय नमः ।
ॐ चित्तचैतन्यचित्तात्मने नमः ।
ॐ देवानां परमायै गतये नमः ।
ॐ अचेत्याय नमः ।
ॐ चेतनाधाराय नमः ।
ॐ चेतनाचित्तविक्रमाय नमः ।
ॐ चित्तात्मने नमः ।
ॐ चेतनारूपाय नमः ।
ॐ लसत्पङ्कजलोचनाय नमः ।
ॐ परस्मै ब्रह्मणे नमः ।
ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः ।
ॐ परस्मै धाम्ने नमः ।
ॐ परस्मै तपसे नमः ।
ॐ परस्मै सूत्राय नमः ।
ॐ परस्मै तन्त्राय नमः । १४०

ॐ पवित्राय नमः ।
ॐ परमोहवते नमः ।
ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः ।
ॐ क्षेत्रगाय नमः ।
ॐ क्षेत्राय नमः ।
ॐ क्षेत्राधाराय नमः ।
ॐ पुरञ्जनाय नमः ।
ॐ क्षेत्रशून्याय नमः ।
ॐ लोकसाक्षिणे नमः ।
ॐ क्षेत्रवते नमः ।
ॐ बहुनायकाय नमः ।
ॐ योगेन्द्राय नमः ।
ॐ योगपूज्याय नमः ।
ॐ योग्याय नमः ।
ॐ आत्मविदां शुचये नमः ।
ॐ योगमायाधराय नमः ।
ॐ स्थाणवे नमः ।
ॐ अचलाय नमः ।
ॐ कमलापतये नमः ।
ॐ योगेशाय नमः । १६०

ॐ योगनिर्मात्रे नमः ।
ॐ योगज्ञानप्रकाशनाय नमः ।
ॐ योगपालाय नमः ।
ॐ लोकपालाय नमः ।
ॐ संसारतमनाशनाय नमः ।
ॐ गुह्याय नमः ।
ॐ गुह्यतमाय नमः ।
ॐ गुप्ताय नमः ।
ॐ मुक्ताय नमः ।
ॐ युक्ताय नमः ।
ॐ सनातनाय नमः ।
ॐ गहनाय नमः ।
ॐ गगनाकाराय नमः ।
ॐ गम्भीराय नमः ।
ॐ गणनायकाय नमः ।
ॐ गोविन्दाय नमः ।
ॐ गोपतये नमः ।
ॐ गोप्त्रे नमः ।
ॐ गोभागाय नमः ।
ॐ भावसंस्थिताय नमः । १८०

ॐ गोसाक्षिणे नमः ।
ॐ गोतमारये नमः ।
ॐ गान्धाराय नमः ।
ॐ गगनाकृतये नमः ।
ॐ योगयुक्ताय नमः ।
ॐ भोगयुक्ताय नमः ।
ॐ शङ्कामुक्तसमाधिमते नमः ।
ॐ सहजाय नमः ।
ॐ सकलेशानाय नमः ।
ॐ कार्तवीर्यवरप्रदाय नमः ।
ॐ सरजाय नमः ।
ॐ विरजसे नमः ।
ॐ पुंसे नमः ।
ॐ पावनाय नमः ।
ॐ पापनाशनाय नमः ।
ॐ परावरविनिर्मुक्ताय नमः ।
ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः ।
ॐ पुरातनाय नमः ।
ॐ नानाज्योतिषे नमः ।
ॐ अनेकात्मने नमः । २००

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ॐ स्वयं‍ज्योतये नमः ।
ॐ सदाशिवाय नमः ।
ॐ दिव्यज्योतिर्मयाय नमः ।
ॐ सत्यविज्ञानभास्कराय नमः ।
ॐ नित्यशुद्धाय नमः ।
ॐ पराय नमः ।
ॐ पूर्णाय नमः ।
ॐ प्रकाशाय नमः ।
ॐ प्रकटोद्भवाय नमः ।
ॐ प्रमादविगताय नमः ।
ॐ परेशाय नमः ।
ॐ परविक्रमाय नमः ।
ॐ योगिने नमः ।
ॐ योगाय नमः ।
ॐ योगपाय नमः ।
ॐ योगाभ्यासप्रकाशनाय नमः ।
ॐ योक्त्रे नमः ।
ॐ मोक्त्रे नमः ।
ॐ विधात्रे नमः ।
ॐ त्रात्रे नमः । २२०

ॐ पात्रे नमः ।
ॐ निरायुधाय नमः ।
ॐ नित्यमुक्ताय नमः ।
ॐ नित्ययुक्ताय नमः ।
ॐ सत्याय नमः ।
ॐ सत्यपराक्रमाय नमः ।
ॐ सत्त्वशुद्धिकराय नमः ।
ॐ सत्त्वाय नमः ।
ॐ सत्त्वभृतां गतये नमः ।
ॐ श्रीधराय नमः ।
ॐ श्रीवपुषे नमः ।
ॐ श्रीमते नमः ।
ॐ श्रीनिवासाय नमः ।
ॐ अमरार्चिताय नमः ।
ॐ श्रीनिधये नमः ।
ॐ श्रीपतये नमः ।
ॐ श्रेष्ठाय नमः ।
ॐ श्रेयस्काय नमः ।
ॐ चरमाश्रयाय नमः ।
ॐ त्यागिने नमः । २४०

ॐ त्यागार्थसम्पन्नाय नमः ।
ॐ त्यागात्मने नमः ।
ॐ त्यागविग्रहाय नमः ।
ॐ त्यागलक्षणसिद्धात्मने नमः ।
ॐ त्यागज्ञाय नमः ।
ॐ त्यागकारणाय नमः ।
ॐ भोगाय नमः ।
ॐ भोक्त्रे नमः ।
ॐ भोग्याय नमः ।
ॐ भोगसाधनकारणाय नमः ।
ॐ भोगिने नमः ।
ॐ भोगार्थसम्पन्नाय नमः ।
ॐ भोगज्ञानप्रकाशनाय नमः ।
ॐ केवलाय नमः ।
ॐ केशवाय नमः ।
ॐ कृष्णाय नमः ।
ॐ कंवाससे नमः ।
ॐ कमलालयाय नमः ।
ॐ कमलासनपूज्याय नमः ।
ॐ हरये नमः । २६०

ॐ अज्ञानखण्डनाय नमः ।
ॐ महात्मने नमः ।
ॐ महदादये नमः ।
ॐ महेशोत्तमवन्दिताय नमः ।
ॐ मनोबुद्धिविहीनात्मने नमः ।
ॐ मानात्मने नमः ।
ॐ मानवाधिपाय नमः ।
ॐ भुवनेशाय नमः ।
ॐ विभूतये नमः ।
ॐ धृतये नमः ।
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ स्मृतये नमः ।
ॐ दयायै नमः ।
ॐ दुःखदावानलाय नमः ।
ॐ बुद्धाय नमः ।
ॐ प्रबुद्धाय नमः ।
ॐ परमेश्वराय नमः ।
ॐ कामघ्ने नमः ।
ॐ क्रोधघ्ने नमः ।
ॐ दम्भदर्पमदापहाय नमः । २८०

ॐ अज्ञानतिमिरारये नमः ।
ॐ भवारये नमः ।
ॐ भुवनेश्वराय नमः ।
ॐ रूपकृते नमः ।
ॐ रूपभृते नमः ।
ॐ रूपिणे नमः ।
ॐ रूपात्मने नमः ।
ॐ रूपकारणाय नमः ।
ॐ रूपज्ञाय नमः ।
ॐ रूपसाक्षिणे नमः ।
ॐ नामरूपाय नमः ।
ॐ गुणान्तकाय नमः ।
ॐ अप्रमेयाय नमः ।
ॐ प्रमेयाय नमः ।
ॐ प्रमाणाय नमः ।
ॐ प्रणवाश्रयाय नमः ।
ॐ प्रमाणरहिताय नमः ।
ॐ अचिन्त्याय नमः ।
ॐ चेतनाविगताय नमः ।
ॐ अजराय नमः । ३००

ॐ अक्षराय नमः ।
ॐ अक्षरमुक्ताय नमः ।
ॐ विज्वराय नमः ।
ॐ ज्वरनाशनाय नमः ।
ॐ विशिष्टाय नमः ।
ॐ वित्तशास्त्रिणे नमः ।
ॐ दृष्टाय नमः ।
ॐ दृष्टान्तवर्जिताय नमः ।
ॐ गुणेशाय नमः ।
ॐ गुणकायाय नमः ।
ॐ गुणात्मने नमः ।
ॐ गुणभावनाय नमः ।
ॐ अनन्तगुणसम्पन्नाय नमः ।
ॐ गुणगर्भाय नमः ।
ॐ गुणाधिपाय नमः ।
ॐ गणेशाय नमः ।
ॐ गुणनाथाय नमः ।
ॐ गुणात्मने नमः ।
ॐ गणभावनाय नमः ।
ॐ गणबन्धवे नमः । ३२०

ॐ विवेकात्मने नमः ।
ॐ गुणयुक्ताय नमः ।
ॐ पराक्रमिणे नमः ।
ॐ अतर्क्याय नमः ।
ॐ क्रतवे नमः ।
ॐ अग्नये नमः ।
ॐ कृतज्ञाय नमः ।
ॐ सफलाश्रयाय नमः ।
ॐ यज्ञाय नमः ।
ॐ यज्ञफलदाय नमः ।
ॐ यज्ञाय नमः ।
ॐ इज्याय नमः ।
ॐ अमरोत्तमाय नमः ।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः ।
ॐ श्रीगर्भाय नमः ।
ॐ खगर्भाय नमः ।
ॐ कुणपेश्वराय नमः ।
ॐ मायागर्भाय नमः ।
ॐ लोकगर्भाय नमः ।
ॐ स्वयम्भुवे नमः । ३४०

ॐ भुवनान्तकाय नमः ।
ॐ निष्पापाय नमः ।
ॐ निबिडाय नमः ।
ॐ नन्दिने नमः ।
ॐ बोधिने नमः ।
ॐ बोधसमाश्रयाय नमः ।
ॐ बोधात्मने नमः ।
ॐ बोधनात्मने नमः ।
ॐ भेदवैतण्डखण्डनाय नमः ।
ॐ स्वाभाव्याय नमः ।
ॐ भावनिर्मुक्ताय नमः ।
ॐ व्यक्ताय नमः ।
ॐ अव्यक्तसमाश्रयाय नमः ।
ॐ नित्यतृप्ताय नमः ।
ॐ निराभासाय नमः ।
ॐ निर्वाणाय नमः ।
ॐ शरणाय नमः ।
ॐ सुहृते नमः ।
ॐ गुह्येशाय नमः ।
ॐ गुणगम्भीराय नमः । ३६०

ॐ गुणदोषनिवारणाय नमः ।
ॐ गुणसङ्गविहीनाय नमः ।
ॐ योगारेर्दर्पनाशनाय नमः ।
ॐ आनन्दाय नमः ।
ॐ परमानन्दाय नमः ।
ॐ स्वानन्दसुखवर्धनाय नमः ।
ॐ सत्यानन्दाय नमः ।
ॐ चिदानन्दाय नमः ।
ॐ सर्वानन्दपरायणाय नमः ।
ॐ सद्रूपाय नमः ।
ॐ सहजाय नमः ।
ॐ सत्याय नमः ।
ॐ स्वानन्दाय नमः ।
ॐ सुमनोहराय नमः ।
ॐ सर्वाय नमः ।
ॐ सर्वान्तराय नमः ।
ॐ पूर्वात्पूर्वतराय नमः ।
ॐ खमयाय नमः ।
ॐ खपराय नमः ।
ॐ खादये नमः । ३८०

ॐ खं‍ब्रह्मणे नमः ।
ॐ खतनवे नमः ।
ॐ खगाय नमः ।
ॐ खवाससे नमः ।
ॐ खविहीनाय नमः ।
ॐ खनिधये नमः ।
ॐ खपराश्रयाय नमः ।
ॐ अनन्ताय नमः ।
ॐ आदिरूपाय नमः ।
ॐ सूर्यमण्डलमध्यगाय नमः ।
ॐ अमोघाय नमः ।
ॐ परमामोघाय नमः ।
ॐ परोक्षाय नमः ।
ॐ परदाय नमः ।
ॐ कवये नमः ।
ॐ विश्वचक्षुषे नमः ।
ॐ विश्वसाक्षिणे नमः ।
ॐ विश्वबाहवे नमः ।
ॐ धनेश्वराय नमः ।
ॐ धनञ्जयाय नमः । ४००

ॐ महातेजसे नमः ।
ॐ तेजिष्ठाय नमः ।
ॐ तैजसाय नमः ।
ॐ सुखिने नमः ।
ॐ ज्योतिषे नमः ।
ॐ ज्योतिर्मयाय नमः ।
ॐ जेत्रे नमः ।
ॐ ज्योतिषां ज्योतिरात्मकाय नमः ।
ॐ ज्योतिषामपि ज्योतिषे नमः ।
ॐ जनकाय नमः ।
ॐ जनमोहनाय नमः ।
ॐ जितेन्द्रियाय नमः ।
ॐ जितक्रोधाय नमः ।
ॐ जितात्मने नमः ।
ॐ जितमानसाय नमः ।
ॐ जितसङ्गाय नमः ।
ॐ जितप्राणाय नमः ।
ॐ जितसंसारवासनाय नमः ।
ॐ निर्वासनाय नमः ।
ॐ निरालम्बाय नमः । ४२०

ॐ निर्योगक्षेमवर्जिताय नमः ।
ॐ निरीहाय नमः ।
ॐ निरहङ्काराय नमः ।
ॐ निराशिषे निरुपाधिकाय नमः ।
ॐ नित्यबोधाय नमः ।
ॐ विविक्तात्मने नमः ।
ॐ विशुद्धोत्तमगौरवाय नमः ।
ॐ विद्यार्थिने नमः ।
ॐ परमार्थिने नमः ।
ॐ श्रद्धार्थिने नमः ।
ॐ साधनात्मकाय नमः ।
ॐ प्रत्याहारिणे नमः ।
ॐ निराहारिणे नमः ।
ॐ सर्वाहारपरायणाय नमः ।
ॐ नित्यशुद्धाय नमः ।
ॐ निराकाङ्क्षिणे नमः ।
ॐ पारायणपरायणाय नमः ।
ॐ अणोरणुतराय नमः ।
ॐ सूक्ष्माय नमः ।
ॐ स्थूलाय नमः । ४४०

ॐ स्थूलतराय नमः ।
ॐ एकाय नमः ।
ॐ अनेकरूपाय नमः ।
ॐ विश्वरूपाय नमः ।
ॐ सनातनाय नमः ।
ॐ नैकरूपाय नमः ।
ॐ विरूपात्मने नमः ।
ॐ नैकबोधमयाय नमः ।
ॐ नैकनाममयाय नमः ।
ॐ नैकविद्याविवर्धनाय नमः ।
ॐ एकाय नमः ।
ॐ एकान्तिकाय नमः ।
ॐ नानाभावविवर्जिताय नमः ।
ॐ एकाक्षराय नमः ।
ॐ बीजाय नमः ।
ॐ पूर्णबिम्बाय नमः ।
ॐ सनातनाय नमः ।
ॐ मन्त्रवीर्याय नमः ।
ॐ मन्त्रबीजाय नमः ।
ॐ शास्त्रवीर्याय नमः । ४६०

ॐ जगत्पतये नमः ।
ॐ नानावीर्यधराय नमः ।
ॐ शक्रेशाय नमः ।
ॐ पृथिवीपतये नमः ।
ॐ प्राणेशाय नमः ।
ॐ प्राणदाय नमः ।
ॐ प्राणाय नमः ।
ॐ प्राणायामपरायणाय नमः ।
ॐ प्राणपञ्चकनिर्मुक्ताय नमः ।
ॐ कोशपञ्चकवर्जिताय नमः ।
ॐ निश्चलाय नमः ।
ॐ निष्कलाय नमः ।
ॐ असङ्गाय नमः ।
ॐ निष्प्रपञ्चाय नमः ।
ॐ निरामयाय नमः ।
ॐ निराधाराय नमः ।
ॐ निराकाराय नमः ।
ॐ निर्विकाराय नमः ।
ॐ निरञ्जनाय नमः ।
ॐ निष्प्रतीताय नमः । ४८०

ॐ निराभासाय नमः ।
ॐ निरासक्ताय नमः ।
ॐ निराकुलाय नमः ।
ॐ निष्ठासर्वगताय नमः ।
ॐ निरारम्भाय नमः ।
ॐ निराश्रयाय नमः ।
ॐ निरन्तराय नमः ।
ॐ सर्वगोप्त्रे नमः ।
ॐ शान्ताय नमः ।
ॐ दान्ताय नमः ।
ॐ महामुनये नमः ।
ॐ निःशब्दाय नमः ।
ॐ सुकृताय नमः ।
ॐ स्वस्थाय नमः ।
ॐ सत्यवादिने नमः ।
ॐ सुरेश्वराय नमः ।
ॐ ज्ञानदाय नमः ।
ॐ ज्ञानविज्ञानिने नमः ।
ॐ ज्ञानात्मने नमः ।
ॐ आनन्दपूरिताय नमः । ५००

ॐ ज्ञानयज्ञविदां दक्षाय नमः ।
ॐ ज्ञानाग्नये नमः ।
ॐ ज्वलनाय नमः ।
ॐ बुधाय नमः ।
ॐ दयावते नमः ।
ॐ भवरोगारये नमः ।
ॐ चिकित्साचरमागतये नमः ।
ॐ चन्द्रमण्डलमध्यस्थाय नमः ।
ॐ चन्द्रकोटिसुशीतलाय नमः ।
ॐ यन्त्रकृते नमः ।
ॐ परमाय नमः ।
ॐ यन्त्रिणे नमः ।
ॐ यन्त्रारूढापराजिताय नमः ।
ॐ यन्त्रविदे नमः ।
ॐ यन्त्रवासाय नमः ।
ॐ यन्त्राधाराय नमः ।
ॐ धराधराय नमः ।
ॐ तत्त्वज्ञाय नमः ।
ॐ तत्त्वभूतात्मने नमः ।
ॐ महत्तत्त्वप्रकाशनाय नमः । ५२०

ॐ तत्त्वसङ्ख्यानयोगज्ञाय नमः ।
ॐ साङ्ख्यशास्त्रप्रवर्तकाय नमः ।
ॐ अनन्तविक्रमाय नमः ।
ॐ देवाय नमः ।
ॐ माधवाय नमः ।
ॐ धनेश्वराय नमः ।
ॐ साधवे नमः ।
ॐ साधुवरिष्ठात्मने नमः ।
ॐ सावधानाय नमः ।
ॐ अमरोत्तमाय नमः ।
ॐ निःसङ्कल्पाय नमः ।
ॐ निराधाराय नमः ।
ॐ दुर्धराय नमः ।
ॐ आत्मविदे नमः ।
ॐ पतये नमः ।
ॐ आरोग्यसुखदाय नमः ।
ॐ प्रवराय नमः ।
ॐ वासवाय नमः ।
ॐ परेशाय नमः ।
ॐ परमोदाराय नमः । ५४०

ॐ प्रत्यक्चैतन्यदुर्गमाय नमः ।
ॐ दुराधर्षाय नमः ।
ॐ दुरावासाय नमः ।
ॐ दूरत्वपरिनाशनाय नमः ।
ॐ वेदविदे नमः ।
ॐ वेदकृते नमः ।
ॐ वेदाय नमः ।
ॐ वेदात्मने नमः ।
ॐ विमलाशयाय नमः ।
ॐ विविक्तसेविने नमः ।
ॐ संसारश्रमनाशनाय नमः ।
ॐ ब्रह्मयोनये नमः ।
ॐ बृहद्योनये नमः ।
ॐ विश्वयोनये नमः ।
ॐ विदेहवते नमः ।
ॐ विशालाक्षाय नमः ।
ॐ विश्वनाथाय नमः ।
ॐ हाटकाङ्गदभूषणाय नमः ।
ॐ अबाध्याय नमः ।
ॐ जगदाराध्याय नमः । ५६०

ॐ जगदार्जवपालनाय नमः ।
ॐ जनवते नमः ।
ॐ धनवते नमः ।
ॐ धर्मिणे नमः ।
ॐ धर्मगाय नमः ।
ॐ धर्मवर्धनाय नमः ।
ॐ अमृताय नमः ।
ॐ शाश्वताय नमः ।
ॐ साध्याय नमः ।
ॐ सिद्धिदाय नमः ।
ॐ सुमनोहराय नमः ।
ॐ खलुब्रह्मखलुस्थानाय नमः ।
ॐ मुनीनां परमायै गतये नमः ।
ॐ उपद्रष्ट्रे नमः ।
ॐ श्रेष्ठाय नमः ।
ॐ शुचिभूताय नमः ।
ॐ अनामयाय नमः ।
ॐ वेदसिद्धान्तवेद्याय नमः ।
ॐ मानसाह्लादवर्धनाय नमः ।
ॐ देहादन्याय नमः । ५८०

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ॐ गुणादन्याय नमः ।
ॐ लोकादन्याय नमः ।
ॐ विवेकविदे नमः ।
ॐ दुष्टस्वप्नहराय नमः ।
ॐ गुरवे नमः ।
ॐ गुरुवरोत्तमाय नमः ।
ॐ कर्मिणे नमः ।
ॐ कर्मविनिर्मुक्ताय नमः ।
ॐ संन्यासिने नमः ।
ॐ साधकेश्वराय नमः ।
ॐ सर्वभावविहीनाय नमः ।
ॐ तृष्णासङ्गनिवारकाय नमः ।
ॐ त्यागिने नमः ।
ॐ त्यागवपुषे नमः ।
ॐ त्यागाय नमः ।
ॐ त्यागदानविवर्जिताय नमः ।
ॐ त्यागकारणत्यागात्मने नमः ।
ॐ सद्गुरवे नमः ।
ॐ सुखदायकाय नमः ।
ॐ दक्षाय नमः । ६००

ॐ दक्षादिवन्द्याय नमः ।
ॐ ज्ञानवादप्रवर्तकाय नमः ।
ॐ शब्दब्रह्ममयात्मने नमः ।
ॐ शब्दब्रह्मप्रकाशवते नमः ।
ॐ ग्रसिष्णवे नमः ।
ॐ प्रभविष्णवे नमः ।
ॐ सहिष्णवे नमः ।
ॐ विगतान्तराय नमः ।
ॐ विद्वत्तमाय नमः ।
ॐ महावन्द्याय नमः ।
ॐ विशालोत्तमवाचे मुनये नमः ।
ॐ ब्रह्मविदे नमः ।
ॐ ब्रह्मभावाय नमः ।
ॐ ब्रह्मर्षये नमः ।
ॐ ब्राह्मणप्रियाय नमः ।
ॐ ब्रह्मणे नमः ।
ॐ ब्रह्मप्रकाशात्मने नमः ।
ॐ ब्रह्मविद्याप्रकाशनाय नमः ।
ॐ अत्रिवंशप्रभूतात्मने नमः ।
ॐ तापसोत्तमवन्दिताय नमः । ६२०

ॐ आत्मवासिने नमः ।
ॐ विधेयात्मने नमः ।
ॐ अत्रिवंशविवर्धनाय नमः ।
ॐ प्रवर्तनाय नमः ।
ॐ निवृत्तात्मने नमः ।
ॐ प्रलयोदकसन्निभाय नमः ।
ॐ नारायणाय नमः ।
ॐ महागर्भाय नमः ।
ॐ भार्गवप्रियकृत्तमाय नमः ।
ॐ सङ्कल्पदुःखदलनाय नमः ।
ॐ संसारतमनाशनाय नमः ।
ॐ त्रिविक्रमाय नमः ।
ॐ त्रिधाकाराय नमः ।
ॐ त्रिमूर्तये नमः ।
ॐ त्रिगुणात्मकाय नमः ।
ॐ भेदत्रयहराय नमः ।
ॐ तापत्रयनिवारकाय नमः ।
ॐ दोषत्रयविभेदिने नमः ।
ॐ संशयार्णवखण्डनाय नमः ।
ॐ असंशयाय नमः । ६४०

ॐ असम्मूढाय नमः ।
ॐ अवादिने नमः ।
ॐ राजवन्दिताय नमः ।
ॐ राजयोगिने नमः ।
ॐ महायोगिने नमः ।
ॐ स्वभावगलिताय नमः ।
ॐ पुण्यश्लोकाय नमः ।
ॐ पवित्राङ्घ्रये नमः ।
ॐ ध्यानयोगपरायणाय नमः ।
ॐ ध्यानस्थाय नमः ।
ॐ ध्यानगम्याय नमः ।
ॐ विधेयात्मने नमः ।
ॐ पुरातनाय नमः ।
ॐ अविज्ञेयाय नमः ।
ॐ अन्तरात्मने नमः ।
ॐ मुख्यबिम्बसनातनाय नमः ।
ॐ जीवसञ्जीवनाय नमः ।
ॐ जीवाय नमः ।
ॐ चिद्विलासाय नमः ।
ॐ चिदाश्रयाय नमः । ६६०

ॐ महेन्द्राय नमः ।
ॐ अमरमान्याय नमः ।
ॐ योगेन्द्राय नमः ।
ॐ योगवित्तमाय नमः ।
ॐ योगधर्माय नमः ।
ॐ योगाय नमः ।
ॐ तत्त्वाय नमः ।
ॐ तत्त्वविनिश्चयाय नमः ।
ॐ नैकबाहवे नमः ।
ॐ अनन्तात्मने नमः ।
ॐ नैकनामपराक्रमाय नमः ।
ॐ नैकाक्षिणे नमः ।
ॐ नैकपादाय नमः ।
ॐ नाथनाथाय नमः ।
ॐ उत्तमोत्तमाय नमः ।
ॐ सहस्रशीर्ष्णे नमः ।
ॐ पुरुषाय नमः ।
ॐ सहस्राक्षाय नमः ।
ॐ सहस्रपादे नमः ।
ॐ सहस्ररूपदृशे नमः । ६८०

ॐ सहस्रारमयोद्धवाय नमः ।
ॐ त्रिपादपुरुषाय नमः ।
ॐ त्रिपादूर्ध्वाय नमः ।
ॐ त्र्यम्बकाय नमः ।
ॐ महावीर्याय नमः ।
ॐ योगवीर्यविशारदाय नमः ।
ॐ विजयिने नमः ।
ॐ विनयिने नमः ।
ॐ जेत्रे नमः ।
ॐ वीतरागिणे नमः ।
ॐ विराजिताय नमः ।
ॐ रुद्राय नमः ।
ॐ रौद्राय नमः ।
ॐ महाभीमाय नमः ।
ॐ प्राज्ञमुख्याय नमः ।
ॐ सदाशुचये नमः ।
ॐ अन्तर्ज्योतिषे नमः ।
ॐ अनन्तात्मने नमः ।
ॐ प्रत्यगात्मने नमः ।
ॐ निरन्तराय नमः । ७००

ॐ अरूपाय नमः ।
ॐ आत्मरूपाय नमः ।
ॐ सर्वभावविनिर्वृताय नमः ।
ॐ अन्तःशून्याय नमः ।
ॐ बहिःशून्याय नमः ।
ॐ शून्यात्मने नमः ।
ॐ शून्यभावनाय नमः ।
ॐ अन्तःपूर्णाय नमः ।
ॐ बहिःपूर्णाय नमः ।
ॐ पूर्णात्मने नमः ।
ॐ पूर्णभावनाय नमः ।
ॐ अन्तस्त्यागिने नमः ।
ॐ बहिस्त्यागिने नमः ।
ॐ त्यागात्मने नमः ।
ॐ सर्वयोगवते नमः ।
ॐ अन्तर्योगिने नमः ।
ॐ बहिर्योगिने नमः ।
ॐ सर्वयोगपरायणाय नमः ।
ॐ अन्तर्भोगिने नमः ।
ॐ बहिर्भोगिने नमः । ७२०

ॐ सर्वभोगविदुत्तमाय नमः ।
ॐ अन्तर्निष्ठाय नमः ।
ॐ बहिर्निष्ठाय नमः ।
ॐ सर्वनिष्ठामयाय नमः ।
ॐ बाह्यान्तरविमुक्ताय नमः ।
ॐ बाह्यान्तरविवर्जिताय नमः ।
ॐ शान्ताय नमः ।
ॐ शुद्धाय नमः ।
ॐ विशुद्धाय नमः ।
ॐ निर्वाणाय नमः ।
ॐ प्रकृतेः पराय नमः ।
ॐ अकालाय नमः ।
ॐ कालनेमिने नमः ।
ॐ कालकालाय नमः ।
ॐ जनेश्वराय नमः ।
ॐ कालात्मने नमः ।
ॐ कालकर्त्रे नमः ।
ॐ कालज्ञाय नमः ।
ॐ कालनाशनाय नमः ।
ॐ कैवल्यपददात्रे नमः । ७४०

ॐ कैवल्यसुखदायकाय नमः ।
ॐ कैवल्यकलनाधाराय नमः ।
ॐ निर्भराय नमः ।
ॐ हर्षवर्धनाय नमः ।
ॐ हृदयस्थाय हृषीकेशाय नमः ।
ॐ गोविन्दाय नमः ।
ॐ गर्भवर्जिताय नमः ।
ॐ सकलागमपूज्याय नमः ।
ॐ निगमाय नमः ।
ॐ निगमाश्रयाय नमः ।
ॐ परायै शक्तये नमः ।
ॐ परायै कीर्तये नमः ।
ॐ परायै वृत्तये नमः ।
ॐ निधिस्मृतये नमः ।
ॐ परविद्याय नमः ।
ॐ परायै क्षान्तये नमः ।
ॐ विभक्तये नमः ।
ॐ युक्तसद्गतये नमः ।
ॐ स्वप्रकाशाय नमः ।
ॐ प्रकाशात्मने नमः । ७६०

ॐ परसंवेदनात्मकाय नमः ।
ॐ स्वसेव्याय नमः ।
ॐ स्वविदां स्वात्मने नमः ।
ॐ स्वसंवेद्याय नमः ।
ॐ अनघाय नमः ।
ॐ क्षमिणे नमः ।
ॐ स्वानुसन्धानशीलात्मने नमः ।
ॐ स्वानुसन्धानगोचराय नमः ।
ॐ स्वानुसन्धानशून्यात्मने नमः ।
ॐ स्वानुसन्धानकाश्रयाय नमः ।
ॐ स्वबोधदर्पणाय नमः ।
ॐ अभङ्गाय नमः ।
ॐ कन्दर्पकुलनाशनाय नमः ।
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः ।
ॐ ब्रह्मवेत्त्रे नमः ।
ॐ ब्राह्मणाय नमः ।
ॐ ब्रह्मवित्तमाय नमः ।
ॐ तत्त्वबोधाय नमः ।
ॐ सुधावर्षाय नमः ।
ॐ पावनाय नमः । ७८०

ॐ पापपावकाय नमः ।
ॐ ब्रह्मसूत्रविधेयात्मने नमः ।
ॐ ब्रह्मसूत्रार्थनिर्णयाय नमः ।
ॐ आत्यन्तिकाय नमः ।
ॐ महाकल्पाय नमः ।
ॐ सङ्कल्पावर्तनाशनाय नमः ।
ॐ आधिव्याधिहराय नमः ।
ॐ संशयार्णवशोषकाय नमः ।
ॐ तत्त्वात्मज्ञानसन्देशाय नमः ।
ॐ महानुभवभाविताय नमः ।
ॐ आत्मानुभवसम्पन्नाय नमः ।
ॐ स्वानुभावसुखाश्रयाय नमः ।
ॐ अचिन्त्याय नमः ।
ॐ बृहद्भानवे नमः ।
ॐ प्रमदोत्कर्षनाशनाय नमः ।
ॐ अनिकेतप्रशान्तात्मने नमः ।
ॐ शून्यावासाय नमः ।
ॐ जगद्वपुषे नमः ।
ॐ चिद्गतये नमः ।
ॐ चिन्मयाय नमः । ८००

ॐ चक्रिणे नमः ।
ॐ मायाचक्रप्रवर्तकाय नमः ।
ॐ सर्ववर्णविदारम्भिणे नमः ।
ॐ सर्वारम्भपरायणाय नमः ।
ॐ पुराणाय नमः ।
ॐ प्रवराय नमः ।
ॐ दात्रे नमः ।
ॐ सुन्दराय नमः ।
ॐ कनकाङ्गदिने नमः ।
ॐ अनसूयात्मजाय नमः ।
ॐ दत्ताय नमः ।
ॐ सर्वज्ञाय नमः ।
ॐ सर्वकामदाय नमः ।
ॐ कामजिते नमः ।
ॐ कामपालाय नमः ।
ॐ कामिने नमः ।
ॐ कामप्रदागमाय नमः ।
ॐ कामवते नमः ।
ॐ कामपोषाय नमः ।
ॐ सर्वकामनिवर्तकाय नमः । ८२०

ॐ सर्वकर्मफलोत्पत्तये नमः ।
ॐ सर्वकामफलप्रदाय नमः ।
ॐ सर्वकर्मफलैः पूज्याय नमः ।
ॐ सर्वकर्मफलाश्रयाय नमः ।
ॐ विश्वकर्मणे नमः ।
ॐ कृतात्मने नमः ।
ॐ कृतज्ञाय नमः ।
ॐ सर्वसाक्षिकाय नमः ।
ॐ सर्वारम्भपरित्यागिने नमः ।
ॐ जडोन्मत्तपिशाचवते नमः ।
ॐ भिक्षवे नमः ।
ॐ भिक्षाकराय नमः ।
ॐ भैक्षाहारिणे नमः ।
ॐ निराश्रमिणे नमः ।
ॐ अकूलाय नमः ।
ॐ अनुकूलाय नमः ।
ॐ विकलाय नमः ।
ॐ अकलाय नमः ।
ॐ जटिलाय नमः ।
ॐ वनचारिणे नमः । ८४०

ॐ दण्डिने नमः ।
ॐ मुण्डिने नमः ।
ॐ गण्डिने नमः ।
ॐ देहधर्मविहीनात्मने नमः ।
ॐ एकाकिने नमः ।
ॐ सङ्गवर्जिताय नमः ।
ॐ आश्रमिणे नमः ।
ॐ अनाश्रमारम्भाय नमः ।
ॐ अनाचारिणे नमः ।
ॐ कर्मवर्जिताय नमः ।
ॐ असन्देहिने नमः ।
ॐ सन्देहिने नमः ।
ॐ न किञ्चिन्न च किञ्चनाय नमः ।
ॐ नृदेहिने नमः ।
ॐ देहशून्याय नमः ।
ॐ नाभाविने नमः ।
ॐ भावनिर्गताय नमः ।
ॐ नाब्रह्मणे नमः ।
ॐ परब्रह्मणे नमः ।
ॐ स्वयमेव निराकुलाय नमः । ८६०

ॐ अनघाय नमः ।
ॐ अगुरवे नमः ।
ॐ नाथनाथोत्तमाय नमः ।
ॐ गुरवे नमः ।
ॐ द्विभुजाय नमः ।
ॐ प्राकृताय नमः ।
ॐ जनकाय नमः ।
ॐ पितामहाय नमः ।
ॐ अनात्मने नमः ।
ॐ न च नानात्मने नमः ।
ॐ नीतये नमः ।
ॐ नीतिमतां वराय नमः ।
ॐ सहजाय नमः ।
ॐ सदृशाय नमः ।
ॐ सिद्धाय नमः ।
ॐ एकाय नमः ।
ॐ चिन्मात्राय नमः ।
ॐ न कर्त्रे नमः ।
ॐ कर्त्रे नमः ।
ॐ भोक्त्रे नमः । ८८०

ॐ भोगविवर्जिताय नमः ।
ॐ तुरीयाय नमः ।
ॐ तुरीयातीताय नमः ।
ॐ स्वच्छाय नमः ।
ॐ सर्वमयाय नमः ।
ॐ सर्वाधिष्ठानरूपाय नमः ।
ॐ सर्वध्येयविवर्जिताय नमः ।
ॐ सर्वलोकनिवासात्मने नमः ।
ॐ सकलोत्तमवन्दिताय नमः ।
ॐ देहभृते नमः ।
ॐ देहकृते नमः ।
ॐ देहात्मने नमः ।
ॐ देहभावनाय नमः ।
ॐ देहिने नमः ।
ॐ देहविभक्ताय नमः ।
ॐ देहभावप्रकाशनाय नमः ।
ॐ लयस्थाय नमः ।
ॐ लयविदे नमः ।
ॐ लयाभावाय नमः ।
ॐ बोधवते नमः । ९००

ॐ लयातीताय नमः ।
ॐ लयस्यान्ताय नमः ।
ॐ लयभावनिवारणाय नमः ।
ॐ विमुखाय नमः ।
ॐ प्रमुखाय नमः ।
ॐ प्रत्यङ्मुखवदाचरिणे नमः ।
ॐ विश्वभुजे नमः ।
ॐ विश्वधृषे नमः ।
ॐ विश्वाय नमः ।
ॐ विश्वक्षेमकराय नमः ।
ॐ अविक्षिप्ताय नमः ।
ॐ अप्रमादिने नमः ।
ॐ परर्धये नमः ।
ॐ परमार्थदृशे नमः ।
ॐ स्वानुभावविहीनाय नमः ।
ॐ स्वानुभावप्रकाशनाय नमः ।
ॐ निरिन्द्रियाय नमः ।
ॐ निर्बुद्धये नमः ।
ॐ निराभासाय नमः ।
ॐ निराकृताय नमः । ९२०

ॐ निरहङ्काररूपात्मने नमः ।
ॐ निर्वपुषे नमः ।
ॐ सकलाश्रयाय नमः ।
ॐ शोकदुःखहराय नमः ।
ॐ भोगमोक्षफलप्रदाय नमः ।
ॐ सुप्रसन्नाय नमः ।
ॐ सूक्ष्माय नमः ।
ॐ शब्दब्रह्मार्थसङ्ग्रहाय नमः ।
ॐ आगमापायशून्याय नमः ।
ॐ स्थानदाय नमः ।
ॐ सताङ्गतये नमः ।
ॐ अकृताय नमः ।
ॐ सुकृताय नमः ।
ॐ कृतकर्मणे नमः ।
ॐ विनिर्वृताय नमः ।
ॐ भेदत्रयहराय नमः ।
ॐ देहत्रयविनिर्गताय नमः ।
ॐ सर्वकाममयाय नमः ।
ॐ सर्वकामनिवर्तकाय नमः ।
ॐ सिद्धेश्वराय नमः । ९४०

ॐ अजराय नमः ।
ॐ पञ्चबाणदर्पहुताशनाय नमः ।
ॐ चतुरक्षरबीजात्मने नमः ।
ॐ स्वभुवे नमः ।
ॐ चित्कीर्तिभूषणाय नमः ।
ॐ अगाधबुद्धये नमः ।
ॐ अक्षुब्धाय नमः ।
ॐ चन्द्रसूर्याग्निलोचनाय नमः ।
ॐ यमदंष्ट्राय नमः ।
ॐ अतिसंहर्त्रे नमः ।
ॐ परमानन्दसागराय नमः ।
ॐ लीलाविश्वम्भराय नमः ।
ॐ भानवे नमः ।
ॐ भैरवाय नमः ।
ॐ भीमलोचनाय नमः ।
ॐ ब्रह्मचर्माम्बराय नमः ।
ॐ कालाय नमः ।
ॐ अचलाय नमः ।
ॐ चलनान्तकाय नमः ।
ॐ आदिदेवाय नमः । ९६०

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ॐ जगद्योनये नमः ।
ॐ वासवारिविमर्दनाय नमः ।
ॐ विकर्मकर्मकर्मज्ञाय नमः ।
ॐ अनन्यगमकाय नमः ।
ॐ अगमाय नमः ।
ॐ अबद्धकर्मशून्याय नमः ।
ॐ कामरागकुलक्षयाय नमः ।
ॐ योगान्धकारमथनाय नमः ।
ॐ पद्मजन्मादिवन्दिताय नमः ।
ॐ भक्तकामाय नमः ।
ॐ अग्रजाय नमः ।
ॐ चक्रिणे नमः ।
ॐ भावनिर्भावभावकाय नमः ।
ॐ भेदान्तकाय नमः ।
ॐ महाते नमः ।
ॐ अग्र्याय नमः ।
ॐ निगूहाय नमः ।
ॐ गोचरान्तकाय नमः ।
ॐ कालाग्निशमनाय नमः ।
ॐ शङ्खचक्रपद्मगदाधराय नमः । ९८०

ॐ दीप्ताय नमः ।
ॐ दीनपतये नमः ।
ॐ शास्त्रे नमः ।
ॐ स्वच्छन्दाय नमः ।
ॐ मुक्तिदायकाय नमः ।
ॐ व्योमधर्माम्बराय नमः ।
ॐ भेत्त्रे नमः ।
ॐ भस्मधारिणे नमः ।
ॐ धराधराय नमः ।
ॐ धर्मगुप्ताय नमः ।
ॐ अन्वयात्मने नमः ।
ॐ व्यतिरेकार्थनिर्णयाय नमः ।
ॐ एकानेकगुणाभासाभासनिर्भासवर्जिताय नमः ।
ॐ भावाभावस्वभावात्मने नमः ।
ॐ भावाभावविभावविदे नमः ।
ॐ योगिहृदयविश्रामाय नमः ।
ॐ अनन्तविद्याविवर्धनाय नमः ।
ॐ विघ्नान्तकाय नमः ।
ॐ त्रिकालज्ञाय नमः ।
ॐ तत्त्वात्मज्ञानसागराय नमः । १०००

इति श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली ।

साधना का महामंत्र: सहस्रनामावली आरंभ करने से पूर्व भगवान दत्तात्रेय के सिद्ध मंत्र “ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः” अथवा “दिगम्बरा दिगम्बरा श्रीपाद वल्लभ दिगम्बरा” का एक माला (108 बार) जाप करना पाठ की ऊर्जा को अनंत गुना बढ़ा देता है।

श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली पाठ के अचूक और चमत्कारी लाभ (Benefits)

भगवान दत्तात्रेय की उपासना तुरंत फल देने वाली मानी गई है। जो साधक पूरी निष्ठा और विश्वास के साथ उनके 1000 नामों का अर्चन करता है, उसके जीवन में निम्नलिखित अकल्पनीय चमत्कार होते हैं:

1. पितृ दोष (Ancestral Afflictions) का समूल नाश

यह दत्तात्रेय सहस्रनामावली का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में भयंकर पितृ दोष है, घर में अकाल मृत्यु हुई है या पूर्वजों की शांति नहीं हुई है, तो ऐसे परिवार में कभी बरकत नहीं होती और वंश वृद्धि रुक जाती है। भगवान दत्तात्रेय पितरों के भी गुरु हैं। इनके 1000 नामों के पाठ से अतृप्त आत्माओं को मोक्ष मिलता है और घर से पितृ दोष हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।

2. तंत्र-मंत्र, काला जादू और अघोरी बाधाओं से रक्षा

दत्त गुरु स्वयं तंत्र, अघोर और योग के परम ज्ञाता हैं। कई अघोरी और तांत्रिक भगवान दत्तात्रेय को अपना आदि गुरु मानते हैं। इसलिए, यदि आपके ऊपर या आपके परिवार पर किसी ने तंत्र-मंत्र (Black Magic), बुरी नज़र या किसी बुरी शक्ति का प्रयोग किया है, तो दत्तात्रेय सहस्रनामावली का पाठ एक अभेद्य ‘सुरक्षा कवच’ बना देता है, जिसे दुनिया की कोई तांत्रिक शक्ति नहीं भेद सकती।

3. गुरु ग्रह (Jupiter) की शांति और शिक्षा में सफलता

जिन विद्यार्थियों का पढ़ाई में मन नहीं लगता, एकाग्रता की कमी है, या जिन लोगों की कुंडली में ‘गुरु चांडाल दोष’ है, उन्हें भगवान दत्तात्रेय का यह पाठ अवश्य करना चाहिए। वे ‘जगत गुरु’ हैं, अतः इनकी उपासना से ज्ञान, सद्बुद्धि और स्मरण शक्ति में असीम वृद्धि होती है।

4. असाध्य रोगों और मानसिक तनाव से मुक्ति

“रोगानशेषानपहंसि…” भगवान दत्तात्रेय की शरण में जाने से पुराने से पुराने और असाध्य रोग भी ठीक होने लगते हैं। जो लोग लंबे समय से मानसिक तनाव, डिप्रेशन (अवसाद), या अज्ञात भय से ग्रसित हैं, उन्हें 1000 नामों का उच्चारण मानसिक शांति और आंतरिक ऊर्जा प्रदान करता है।

5. दरिद्रता का नाश और अखंड ऐश्वर्य की प्राप्ति

दत्तात्रेय जी के साथ ‘कामधेनु’ गाय रहती है, जो इच्छा पूर्ति का प्रतीक है। जब आप भगवान के 1000 नामों से उन्हें पुकारते हैं, तो कामधेनु की कृपा से आपके घर में स्थिर धन का वास होता है। नौकरी और व्यापार में आ रही सभी रुकावटें चमत्कारिक रूप से दूर हो जाती हैं।

श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली की प्रामाणिक अर्चन और पाठ विधि (Authentic Puja Vidhi)

दत्त गुरु की आराधना बहुत ही सरल है, वे केवल सच्चे भाव के भूखे हैं। लेकिन पूर्ण और त्वरित फल प्राप्ति के लिए शास्त्रों में बताई गई इस ‘सहस्रार्चन’ विधि का पालन करना सर्वोत्तम है:

1. उत्तम दिन, तिथि और मुहूर्त

भगवान दत्तात्रेय की साधना के लिए गुरुवार (Thursday) का दिन सबसे उत्तम है। इसके अलावा ‘दत्त जयंती’ (मार्गशीर्ष पूर्णिमा), गुरु पूर्णिमा, या किसी भी पूर्णिमा के दिन यह पाठ आरंभ करना अत्यंत शुभ होता है। पाठ का समय प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकाल होना चाहिए।

2. आसन, दिशा और वस्त्र की शुद्धि

स्नान करके शुद्ध हो जाएं। दत्तात्रेय जी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए पीले वस्त्र धारण करें और पीले रंग के ऊनी आसन पर बैठें। अपना मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर रखें।

3. पूजन सामग्री और स्थान

यदि आपके घर के आस-पास गूलर का पेड़ (Audumbar Tree) है, तो वहाँ बैठकर पाठ करना करोड़ों गुना फल देता है (क्योंकि गूलर के पेड़ में भगवान दत्तात्रेय का वास माना जाता है)। यदि ऐसा संभव न हो, तो घर के मंदिर में पीले कपड़े पर दत्त गुरु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गाय के शुद्ध घी का एक अखंड दीपक जलाएं और धूप/अगरबत्ती प्रज्वलित करें।

4. संकल्प (Sankalpa) और गुरु वंदना

हाथ में जल, अक्षत (हल्दी से रंगे हुए पीले चावल) और पीला फूल लेकर अपना नाम, गोत्र और पाठ का उद्देश्य (मनोकामना) बोलें। जल नीचे छोड़ दें। इसके बाद अपने गुरु (यदि हैं तो) और भगवान गणेश का स्मरण करें।

5. सहस्रार्चन की चमत्कारी विधि (1000 आहुतियां)

अपने पास 1000 पीले फूल (जैसे गेंदा, कनेर), पीले रंगे हुए अक्षत, या तुलसी के पत्ते रख लें। भगवान दत्तात्रेय का एक नाम बोलें (जैसे- ॐ महायोगिने नमः) और एक फूल या कुछ अक्षत उनके चरणों में अर्पित करें। इसी प्रकार 1000 नामों का उच्चारण करते हुए 1000 बार अर्पण करें। इसे ही ‘सहस्रार्चन’ कहते हैं।

6. भोग और क्षमा प्रार्थना

पाठ संपन्न होने के बाद दत्त गुरु को बेसन के लड्डू, चने की दाल और गुड़, या केले का भोग (नैवेद्य) लगाएं। कर्पूर से आरती करें और अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

पाठ के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण नियम (Rules & Precautions)

भगवान दत्तात्रेय की साधना पूर्णतः सात्विक होती है। इनकी कृपा पाने के लिए इन नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है:

  • पूर्ण सात्विकता: दत्तात्रेय जी की पूजा के दौरान और सामान्य जीवन में भी मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और किसी भी प्रकार के नशे का पूर्णतया त्याग करें।

  • पशुओं की सेवा: दत्त गुरु के साथ चार कुत्ते और एक गाय रहती है। अतः जिस दिन आप सहस्रनामावली का पाठ करें, उस दिन गौ माता को चारा और कुत्तों को रोटी या बिस्किट अवश्य खिलाएं। इससे दत्तात्रेय जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

  • ब्रह्मचर्य: अनुष्ठान के दिनों में पूर्ण शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का पालन करें।

  • अहंकार का त्याग: दत्त गुरु स्वयं ‘दिगंबर’ (वस्त्रहीन और मोह-मुक्त) हैं। उनकी पूजा करते समय अपने धन, पद और ज्ञान के अहंकार को दरवाजे के बाहर छोड़कर ही आसन पर बैठें।

Shri Dattatreya Sahasranamavali कोई साधारण स्तोत्र नहीं है; यह एक ऐसा जाग्रत और अलौकिक महामंत्र है, जो आपके जीवन के सबसे बड़े अंधकार को चीरकर ज्ञान और सफलता का प्रकाश ला सकता है। जब जीवन में कोई मार्ग न सूझे, पितृ दोष के कारण वंश वृद्धि रुक जाए, या चारों ओर से निराशा घेर ले, तब ‘दिगम्बरा दिगम्बरा श्रीपाद वल्लभ दिगम्बरा’ की धुन और इन 1000 नामों का पाठ इंसान को भवसागर से पार लगा देता है।

एक अबोध बालक की तरह भगवान दत्तात्रेय के चरणों में पूर्ण समर्पण कर दें। वे आदि गुरु हैं, वे न केवल आपके लौकिक जीवन (संसार) के कष्टों को दूर करेंगे, बल्कि आपके पारलौकिक (आध्यात्मिक) जीवन को भी संवार कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करेंगे। शुभ गुरुवार का दिन देखकर इस पवित्र सहस्रनामावली का पाठ आरंभ करें और दत्त गुरु के चमत्कारों को अपने जीवन में साक्षात अनुभव करें। जय गुरु देव दत्त! अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त!

श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली का पाठ करने का सबसे उत्तम दिन कौन सा है?

भगवान दत्तात्रेय को ‘गुरु’ रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके किसी भी पाठ या मंत्र जाप के लिए गुरुवार (Thursday) का दिन सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा ‘दत्त जयंती’, गुरु पूर्णिमा, और मार्गशीर्ष मास में इसका पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।

2. पितृ दोष निवारण के लिए दत्तात्रेय जी की पूजा क्यों की जाती है?

शास्त्रों के अनुसार, भगवान दत्तात्रेय पितरों के परम गुरु और मार्गदर्शक हैं। जिन आत्माओं को मोक्ष नहीं मिलता या जिनके कारण परिवार में पितृ दोष लगता है, वे भगवान दत्तात्रेय के 1000 नामों के उच्चारण और पूजा से तृप्त हो जाते हैं और साधक को आशीर्वाद देकर परम गति को प्राप्त करते हैं।

3. क्या स्त्रियां श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली का पाठ कर सकती हैं?

जी हाँ, बिल्कुल। सनातन धर्म में ईश्वर आराधना पर किसी का विशेषाधिकार नहीं है। स्त्रियां पूर्ण सात्विकता और पवित्रता के साथ दत्त गुरु के 1000 नामों का पाठ कर सकती हैं। केवल मासिक धर्म (Periods) के दौरान पूजा स्थान पर जाने और पाठ करने से बचना चाहिए।

4. पाठ करते समय दत्त गुरु को कौन सा पुष्प अर्पित करना चाहिए?

भगवान दत्तात्रेय को पीला रंग सर्वाधिक प्रिय है। सहस्रार्चन (1000 नामों का पाठ) करते समय प्रत्येक नाम के साथ पीले रंग के पुष्प (जैसे कनेर, गेंदा), तुलसी दल, या हल्दी से रंगे हुए चावल (अक्षत) अर्पित करना बहुत चमत्कारी परिणाम देता है।

5. गूलर के पेड़ (Audumbar Tree) का दत्तात्रेय पूजा में क्या महत्व है?

दत्त संप्रदाय की मान्यताओं के अनुसार, भगवान दत्तात्रेय का सूक्ष्म रूप से वास ‘औदुंबर’ (गूलर) के वृक्ष में होता है। यही कारण है कि दत्तात्रेय जी के अधिकतर मंदिर इसी वृक्ष के नीचे होते हैं। यदि गूलर के पेड़ के नीचे बैठकर दत्तात्रेय सहस्रनामावली का पाठ किया जाए, तो सिद्धि शीघ्र प्राप्त होती है।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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