सनातन धर्म और शाक्त परंपरा में आदि शक्ति माता दुर्गा को संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी, पालनकर्त्री और संहारकर्त्री माना गया है। जब-जब पृथ्वी पर असुरों, दानवों और नकारात्मक शक्तियों का अत्याचार बढ़ा, तब-तब माता ने अपने उग्र और सौम्य रूप धारण कर धर्म की रक्षा की है। महिषासुर मर्दिनी माता दुर्गा केवल शक्ति का ही प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे करुणा, बुद्धि, लक्ष्मी और मोक्ष की भी अधिष्ठात्री हैं।
मनुष्य के जीवन में कई बार ऐसे क्षण आते हैं जब हर तरफ से निराशा घेर लेती है, शत्रु हावी हो जाते हैं, असाध्य रोग ग्रस लेते हैं और भाग्य बिल्कुल साथ नहीं देता। ऐसे घोर संकट के समय में ‘श्री दुर्गा सहस्रनामावली’ (Shri Durga Sahasranamavali) का पाठ एक अचूक ब्रह्मास्त्र का कार्य करता है। ‘सहस्रनामावली’ का अर्थ है माता दुर्गा के एक हजार (1000) अत्यंत पवित्र, शक्तिशाली और जाग्रत नामों की माला। तंत्र और आगम शास्त्रों में यह माना गया है कि माता का प्रत्येक नाम एक सिद्ध मंत्र है, जिसके उच्चारण मात्र से ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा साधक के शरीर और घर में प्रवेश कर जाती है।
इस अत्यंत विस्तृत और ज्ञानवर्धक लेख में हम माता दुर्गा के इस परम शक्तिशाली स्तोत्र की महिमा, Shri Durga Sahasranamavali Lyrics in Sanskrit के आध्यात्मिक रहस्य, इसके 1000 नामों का पाठ (अर्चन) करने के अकल्पनीय लाभ और इसकी प्रामाणिक सिद्ध विधि पर गहराई से चर्चा करेंगे।
श्री दुर्गा सहस्रनामावली क्या है और इसका क्या महत्व है?
‘सहस्र’ का अर्थ है हजार (1000) और ‘नामावली’ का अर्थ है नामों की श्रृंखला। जब हम माता के नामों को स्तोत्र (श्लोक) के रूप में पढ़ते हैं, तो उसे ‘सहस्रनाम स्तोत्र’ कहा जाता है। परंतु जब हम पूजा, हवन या अर्चन करते हैं, तो प्रत्येक नाम के आगे ‘ॐ’ और अंत में ‘नमः’ लगाकर (जैसे- ॐ दुर्गायै नमः, ॐ महालक्ष्म्यै नमः) माता को पुष्प या कुमकुम अर्पित करते हैं। इसे ही ‘सहस्रनामावली’ कहा जाता है।
संस्कृत भाषा का प्रत्येक शब्द ध्वनि विज्ञान (Phonetics) के अनुसार एक विशेष ‘तरंग’ (Vibration) उत्पन्न करता है। माता दुर्गा के 1000 नामों में उनके अनंत स्वरूपों, उनके अस्त्र-शस्त्रों, उनके द्वारा किए गए असुरों के वध और उनके वात्सल्य रूप का वर्णन है। जब साधक इन नामों का एक लय में उच्चारण करता है, तो उसके भीतर सोई हुई कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत होने लगती है और उसके आभामंडल (Aura) में एक ऐसा सुरक्षा चक्र बन जाता है जिसे दुनिया की कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।
स्कंद पुराण और कूर्म पुराण जैसे महान ग्रंथों में स्पष्ट लिखा है कि जो व्यक्ति नवरात्रि के दिनों में या प्रत्येक शुक्रवार व अष्टमी तिथि को माता के इन 1000 नामों का पाठ करता है, वह इस पृथ्वी पर चक्रवर्ती राजा के समान सभी सुखों को भोगकर अंत में देवी लोक (मोक्ष) को प्राप्त करता है।
Shri Durga Sahasranamavali | (श्री दुर्गा सहस्रनामावली – 1000 नामों का पवित्र संग्रह: Lyrics in Sanskrit)
(शास्त्रों के नियमानुसार माता दुर्गा के 1000 सिद्ध नामों का पाठ ‘सहस्रार्चन’ विधि से किया जाता है। साधक ध्यान, न्यास और विनियोग के पश्चात् माता के इन 1000 संस्कृत नामों का उच्चारण करते हुए माता को लाल पुष्प या कुमकुम अर्पित करते हैं। प्रत्येक नाम अपने आप में एक पूर्ण बीज मंत्र है।)
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ उमायै नमः ।
ॐ रमायै नमः ।
ॐ शक्त्यै नमः ।
ॐ अनन्तायै नमः ।
ॐ निष्कलायै नमः ।
ॐ अमलायै नमः ।
ॐ शान्तायै नमः ।
ॐ माहेश्वर्यै नमः ।
ॐ नित्यायै नमः ।
ॐ शाश्वतायै नमः ।
ॐ परमायै नमः ।
ॐ क्षमायै नमः ।
ॐ अचिन्त्यायै नमः ।
ॐ केवलायै नमः ।
ॐ अनन्तायै नमः ।
ॐ शिवात्मने नमः ।
ॐ परमात्मिकायै नमः ।
ॐ अनादये नमः ।
ॐ अव्ययायै नमः । २०
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ सर्वज्ञायै नमः ।
ॐ सर्वगायै नमः ।
ॐ अचलायै नमः ।
ॐ एकानेकविभागस्थायै नमः ।
ॐ मायातीतायै नमः ।
ॐ सुनिर्मलायै नमः ।
ॐ महामाहेश्वर्यै नमः ।
ॐ सत्यायै नमः ।
ॐ महादेव्यै नमः ।
ॐ निरञ्जनायै नमः ।
ॐ काष्ठायै नमः ।
ॐ सर्वान्तरस्थायै नमः ।
ॐ चिच्छक्त्यै नमः ।
ॐ अत्रिलालितायै नमः ।
ॐ सर्वायै नमः ।
ॐ सर्वात्मिकायै नमः ।
ॐ विश्वायै नमः ।
ॐ ज्योतीरूपायै नमः ।
ॐ अक्षरायै नमः । ४०
ॐ अमृतायै नमः ।
ॐ शान्तायै नमः ।
ॐ प्रतिष्ठायै नमः ।
ॐ सर्वेशायै नमः ।
ॐ निवृत्तये नमः ।
ॐ अमृतप्रदायै नमः ।
ॐ व्योममूर्तये नमः ।
ॐ व्योमसंस्थायै नमः ।
ॐ व्योमाधारायै नमः ।
ॐ अच्युतायै नमः ।
ॐ अतुलायै नमः ।
ॐ अनादिनिधनायै नमः ।
ॐ अमोघायै नमः ।
ॐ कारणात्मकलाकुलायै नमः ।
ॐ ऋतुप्रथमजायै नमः ।
ॐ अनाभये नमः ।
ॐ अमृतात्मसमाश्रयायै नमः ।
ॐ प्राणेश्वरप्रियायै नमः ।
ॐ नम्यायै नमः ।
ॐ महामहिषघातिन्यै नमः । ६०
ॐ प्राणेश्वर्यै नमः ।
ॐ प्राणरूपायै नमः ।
ॐ प्रधानपुरुषेश्वर्यै नमः ।
ॐ सर्वशक्तिकलायै नमः ।
ॐ अकामायै नमः ।
ॐ महिषेष्टविनाशिन्यै नमः ।
ॐ सर्वकार्यनियन्त्र्यै नमः ।
ॐ सर्वभूतेश्वरेश्वर्यै नमः ।
ॐ अङ्गदादिधरायै नमः ।
ॐ मुकुटधारिण्यै नमः ।
ॐ सनातन्यै नमः ।
ॐ महानन्दायै नमः ।
ॐ आकाशयोनये नमः ।
ॐ चित्प्रकाशस्वरूपायै नमः ।
ॐ महायोगेश्वरेश्वर्यै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ सुदुष्पारायै नमः ।
ॐ मूलप्रकृत्यै नमः ।
ॐ ईशिकायै नमः ।
ॐ संसारयोनये नमः । ८०
ॐ सकलायै नमः ।
ॐ सर्वशक्तिसमुद्भवायै नमः ।
ॐ संसारपारायै नमः ।
ॐ दुर्वारायै नमः ।
ॐ दुर्निरीक्षायै नमः ।
ॐ दुरासदायै नमः ।
ॐ प्राणशक्त्यै नमः ।
ॐ सेव्यायै नमः ।
ॐ योगिन्यै नमः ।
ॐ परमायै कलायै नमः ।
ॐ महाविभूत्यै नमः ।
ॐ दुर्दर्शायै नमः ।
ॐ मूलप्रकृतिसम्भवायै नमः ।
ॐ अनाद्यनन्तविभवायै नमः ।
ॐ परार्थायै नमः ।
ॐ पुरुषारणये नमः ।
ॐ सर्गस्थित्यन्तकृते नमः ।
ॐ सुदुर्वाच्यायै नमः ।
ॐ दुरत्ययायै नमः ।
ॐ शब्दगम्यायै नमः । १००
ॐ शब्दमायायै नमः ।
ॐ शब्दाख्यानन्दविग्रहायै नमः ।
ॐ प्रधानपुरुषातीतायै नमः ।
ॐ प्रधानपुरुषात्मिकायै नमः ।
ॐ पुराण्यै नमः ।
ॐ चिन्मयायै नमः ।
ॐ पुंसामिष्टदायै नमः ।
ॐ पुष्टिरूपिण्यै नमः ।
ॐ पूतान्तरस्थायै नमः ।
ॐ कूटस्थायै नमः ।
ॐ महापुरुषसञ्ज्ञितायै नमः ।
ॐ जन्ममृत्युजरातीतायै नमः ।
ॐ सर्वशक्तिस्वरूपिण्यै नमः ।
ॐ वाञ्छाप्रदायै नमः ।
ॐ अनवच्छिन्नप्रधानानुप्रवेशिन्यै नमः ।
ॐ क्षेत्रज्ञायै नमः ।
ॐ अचिन्त्यशक्त्यै नमः ।
ॐ अव्यक्तलक्षणायै नमः ।
ॐ मलापवर्जितायै नमः ।
ॐ अनादिमायायै नमः । १२०
ॐ त्रितयतत्त्विकायै नमः ।
ॐ प्रीत्यै नमः ।
ॐ प्रकृत्यै नमः ।
ॐ गुहावासायै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ नगोत्पन्नायै नमः ।
ॐ तामस्यै नमः ।
ॐ ध्रुवायै नमः ।
ॐ व्यक्ताव्यक्तात्मिकायै नमः ।
ॐ कृष्णायै नमः ।
ॐ रक्तायै नमः ।
ॐ शुक्लायै नमः ।
ॐ अकारणायै नमः ।
ॐ कार्यजनन्यै नमः ।
ॐ नित्यप्रसवधर्मिण्यै नमः ।
ॐ सर्गप्रलयमुक्तायै नमः ।
ॐ सृष्टिस्थित्यन्तधर्मिण्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मगर्भायै नमः ।
ॐ चतुर्विंशस्वरूपायै नमः ।
ॐ पद्मवासिन्यै नमः । १४०
ॐ अच्युताह्लादिकायै नमः ।
ॐ विद्युते नमः ।
ॐ ब्रह्मयोन्यै नमः ।
ॐ महालयायै नमः ।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।
ॐ समुद्भावभावितात्मने नमः ।
ॐ महेश्वर्यै नमः ।
ॐ महाविमानमध्यस्थायै नमः ।
ॐ महानिद्रायै नमः ।
ॐ सकौतुकायै नमः ।
ॐ सर्वार्थधारिण्यै नमः ।
ॐ सूक्ष्मायै नमः ।
ॐ अविद्धायै नमः ।
ॐ परमार्थदायै नमः ।
ॐ अनन्तरूपायै नमः ।
ॐ अनन्तार्थायै नमः ।
ॐ पुरुषमोहिन्यै नमः ।
ॐ अनेकानेकहस्तायै नमः ।
ॐ कालत्रयविवर्जितायै नमः ।
ॐ ब्रह्मजन्मने नमः । १६०
ॐ हरप्रीतायै नमः ।
ॐ मत्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मशिवात्मिकायै नमः ।
ॐ ब्रह्मेशविष्णुसम्पूज्यायै नमः ।
ॐ ब्रह्माख्यायै नमः ।
ॐ ब्रह्मसञ्ज्ञितायै नमः ।
ॐ व्यक्तायै नमः ।
ॐ प्रथमजायै नमः ।
ॐ ब्राह्म्यै नमः ।
ॐ महारात्र्यै नमः ।
ॐ ज्ञानस्वरूपायै नमः ।
ॐ वैराग्यरूपायै नमः ।
ॐ ऐश्वर्यरूपिण्यै नमः ।
ॐ धर्मात्मिकायै नमः ।
ॐ ब्रह्ममूर्त्यै नमः ।
ॐ प्रतिश्रुतपुमर्थिकायै नमः ।
ॐ अपाम्योनये नमः ।
ॐ स्वयम्भूतायै नमः ।
ॐ मानस्यै नमः ।
ॐ तत्त्वसम्भवायै नमः । १८०
ॐ ईश्वरस्य प्रियायै नमः ।
ॐ शङ्करार्धशरीरिण्यै नमः ।
ॐ भवान्यै नमः ।
ॐ रुद्राण्यै नमः ।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।
ॐ अम्बिकायै नमः ।
ॐ महेश्वरसमुत्पन्नायै नमः ।
ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ सर्वेश्वर्यै नमः ।
ॐ सर्ववन्द्यायै नमः ।
ॐ नित्यमुक्तायै नमः ।
ॐ सुमानसायै नमः ।
ॐ महेन्द्रोपेन्द्रनमितायै नमः ।
ॐ शाङ्कर्यै नमः ।
ॐ ईशानुवर्तिन्यै नमः ।
ॐ ईश्वरार्धासनगतायै नमः ।
ॐ महेश्वरपतिव्रतायै नमः ।
ॐ संसारशोषिण्यै नमः ।
ॐ पार्वत्यै नमः ।
ॐ हिमवत्सुतायै नमः । २००
ॐ परमानन्ददात्र्यै नमः ।
ॐ गुणाग्र्यायै नमः ।
ॐ योगदायै नमः ।
ॐ ज्ञानमूर्त्यै नमः ।
ॐ सावित्र्यै नमः ।
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ श्रियै नमः ।
ॐ कमलायै नमः ।
ॐ अनन्तगुणगम्भीरायै नमः ।
ॐ उरोनीलमणिप्रभायै नमः ।
ॐ सरोजनिलयायै नमः ।
ॐ गङ्गायै नमः ।
ॐ योगिध्येयायै नमः ।
ॐ असुरार्दिन्यै नमः ।
ॐ सरस्वत्यै नमः ।
ॐ सर्वविद्यायै नमः ।
ॐ जगज्ज्येष्ठायै नमः ।
ॐ सुमङ्गलायै नमः ।
ॐ वाग्देव्यै नमः ।
ॐ वरदायै नमः । २२०
ॐ वर्यायै नमः ।
ॐ कीर्त्यै नमः ।
ॐ सर्वार्थसाधिकायै नमः ।
ॐ वागीश्वर्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मविद्यायै नमः ।
ॐ महाविद्यायै नमः ।
ॐ सुशोभनायै नमः ।
ॐ ग्राह्यविद्यायै नमः ।
ॐ वेदविद्यायै नमः ।
ॐ धर्मविद्यायै नमः ।
ॐ आत्मभावितायै नमः ।
ॐ स्वाहायै नमः ।
ॐ विश्वम्भरायै नमः ।
ॐ सिद्ध्यै नमः ।
ॐ साध्यायै नमः ।
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ धृत्यै नमः ।
ॐ कृत्यै नमः ।
ॐ सुनीत्यै नमः ।
ॐ सङ्कृत्यै नमः । २४०
ॐ नरवाहिन्यै नमः ।
ॐ पूजाविभाविन्यै नमः ।
ॐ सौम्यायै नमः ।
ॐ भोग्यभाजे नमः ।
ॐ भोगदायिन्यै नमः ।
ॐ शोभावत्यै नमः ।
ॐ शाङ्कर्यै नमः ।
ॐ लोलायै नमः ।
ॐ मालाविभूषितायै नमः ।
ॐ परमेष्ठिप्रियायै नमः ।
ॐ त्रिलोकसुन्दर्यै नमः ।
ॐ नन्दायै नमः ।
ॐ सन्ध्यायै नमः ।
ॐ कामधात्र्यै नमः ।
ॐ महादेव्यै नमः ।
ॐ सुसात्त्विकायै नमः ।
ॐ महामहिषदर्पघ्न्यै नमः ।
ॐ पद्ममालायै नमः ।
ॐ अघहारिण्यै नमः ।
ॐ विचित्रमुकुटायै नमः । २६०
ॐ रामायै नमः ।
ॐ कामदात्र्यै नमः ।
ॐ पिताम्बरधरायै नमः ।
ॐ दिव्यविभूषणविभूषितायै नमः ।
ॐ दिव्याख्यायै नमः ।
ॐ सोमवदनायै नमः ।
ॐ जगत्संसृष्टिवर्जितायै नमः ।
ॐ निर्यन्त्रायै नमः ।
ॐ यन्त्रवाहस्थायै नमः ।
ॐ नन्दिन्यै नमः ।
ॐ रुद्रकालिकायै नमः ।
ॐ आदित्यवर्णायै नमः ।
ॐ कौमार्यै नमः ।
ॐ मयूरवरवाहिन्यै नमः ।
ॐ पद्मासनगतायै नमः ।
ॐ गौर्यै नमः ।
ॐ महाकाल्यै नमः ।
ॐ सुरार्चितायै नमः ।
ॐ अदित्यै नमः ।
ॐ नियतायै नमः । २८०
ॐ रौद्र्यै नमः ।
ॐ पद्मगर्भायै नमः ।
ॐ विवाहनायै नमः ।
ॐ विरूपाक्षायै नमः ।
ॐ केशिवाहायै नमः ।
ॐ गुहापुरनिवासिन्यै नमः ।
ॐ महाफलायै नमः ।
ॐ अनवद्याङ्ग्यै नमः ।
ॐ कामरूपायै नमः ।
ॐ सरिद्वरायै नमः ।
ॐ भास्वद्रूपायै नमः ।
ॐ मुक्तिदात्र्यै नमः ।
ॐ प्रणतक्लेशभञ्जनायै नमः ।
ॐ कौशिक्यै नमः ।
ॐ गोमिन्यै नमः ।
ॐ रात्र्यै नमः ।
ॐ त्रिदशारिविनाशिन्यै नमः ।
ॐ बहुरूपायै नमः ।
ॐ सुरूपायै नमः ।
ॐ विरूपायै नमः । ३००
ॐ रूपवर्जितायै नमः ।
ॐ भक्तार्तिशमनायै नमः ।
ॐ भव्यायै नमः ।
ॐ भवभावविनाशिन्यै नमः ।
ॐ सर्वज्ञानपरीताङ्ग्यै नमः ।
ॐ सर्वासुरविमर्दिकायै नमः ।
ॐ पिकस्वन्यै नमः ।
ॐ सामगीतायै नमः ।
ॐ भवाङ्कनिलयायै नमः ।
ॐ प्रियायै नमः ।
ॐ दीक्षायै नमः ।
ॐ विद्याधर्यै नमः ।
ॐ दीप्तायै नमः ।
ॐ महेन्द्राहितपातिन्यै नमः ।
ॐ सर्वदेवमयायै नमः ।
ॐ दक्षायै नमः ।
ॐ समुद्रान्तरवासिन्यै नमः ।
ॐ अकलङ्कायै नमः ।
ॐ निराधारायै नमः ।
ॐ नित्यसिद्धायै नमः । ३२०
ॐ निरामयायै नमः ।
ॐ कामधेनवे नमः ।
ॐ बृहद्गर्भायै नमः ।
ॐ धीमत्यै नमः ।
ॐ मौननाशिन्यै नमः ।
ॐ निःसङ्कल्पायै नमः ।
ॐ निरातङ्कायै नमः ।
ॐ विनयायै नमः ।
ॐ विनयप्रदायै नमः ।
ॐ ज्वालामालायै नमः ।
ॐ सहस्राढ्यायै नमः ।
ॐ देवदेव्यै नमः ।
ॐ मनोमयायै नमः ।
ॐ सुभगायै नमः ।
ॐ सुविशुद्धायै नमः ।
ॐ वसुदेवसमुद्भवायै नमः ।
ॐ महेन्द्रोपेन्द्रभगिन्यै नमः ।
ॐ भक्तिगम्यायै नमः ।
ॐ परावरायै नमः ।
ॐ ज्ञानज्ञेयायै नमः । ३४०
ॐ परातीतायै नमः ।
ॐ वेदान्तविषयायै नमः ।
ॐ दक्षिणायै नमः ।
ॐ दाहिकायै नमः ।
ॐ दह्यायै नमः ।
ॐ सर्वभूतहृदिस्थितायै नमः ।
ॐ योगमायायै नमः ।
ॐ विभागज्ञायै नमः ।
ॐ महामोहायै नमः ।
ॐ गरीयस्यै नमः ।
ॐ सन्ध्यायै नमः ।
ॐ सर्वसमुद्भूतायै नमः ।
ॐ ब्रह्मवृक्षाश्रयायै नमः ।
ॐ अदित्यै नमः ।
ॐ बीजाङ्कुरसमुद्भूतायै नमः ।
ॐ महाशक्त्यै नमः ।
ॐ महामत्यै नमः ।
ॐ ख्यात्यै नमः ।
ॐ प्रज्ञावत्यै नमः ।
ॐ सञ्ज्ञायै नमः । ३६०
ॐ महाभोगीन्द्रशायिन्यै नमः ।
ॐ हीङ्कृत्यै नमः ।
ॐ शङ्कर्यै नमः ।
ॐ शान्त्यै नमः ।
ॐ गन्धर्वगणसेवितायै नमः ।
ॐ वैश्वानर्यै नमः ।
ॐ महाशूलायै नमः ।
ॐ देवसेनायै नमः ।
ॐ भवप्रियायै नमः ।
ॐ महारात्र्यै नमः ।
ॐ परानन्दायै नमः ।
ॐ शच्यै नमः ।
ॐ दुःस्वप्ननाशिन्यै नमः ।
ॐ ईड्यायै नमः ।
ॐ जयायै नमः ।
ॐ जगद्धात्र्यै नमः ।
ॐ दुर्विज्ञेयायै नमः ।
ॐ सुरूपिण्यै नमः ।
ॐ गुहाम्बिकायै नमः ।
ॐ गणोत्पन्नायै नमः । ३८०
ॐ महापीठायै नमः ।
ॐ मरुत्सुतायै नमः ।
ॐ हव्यवाहायै नमः ।
ॐ भवानन्दायै नमः ।
ॐ जगद्योनये नमः ।
ॐ जगन्मात्रे नमः ।
ॐ जगन्मृत्यवे नमः ।
ॐ जरातीतायै नमः ।
ॐ बुद्धिदायै नमः ।
ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः ।
ॐ रत्नगर्भायै नमः ।
ॐ रत्नगर्भाश्रयायै नमः ।
ॐ परायै नमः ।
ॐ दैत्यहन्त्र्यै नमः ।
ॐ स्वेष्टदात्र्यै नमः ।
ॐ मङ्गलैकसुविग्रहायै नमः ।
ॐ पुरुषान्तर्गतायै नमः ।
ॐ समाधिस्थायै नमः ।
ॐ तपस्विन्यै नमः ।
ॐ दिविस्थितायै नमः । ४००
ॐ त्रिणेत्रायै नमः ।
ॐ सर्वेन्द्रियमनोधृत्यै नमः ।
ॐ सर्वभूतहृदिस्थायै नमः ।
ॐ संसारतारिण्यै नमः ।
ॐ वेद्यायै नमः ।
ॐ ब्रह्मणे नमः ।
ॐ विवेद्यायै नमः ।
ॐ महालीलायै नमः ।
ॐ ब्राह्मण्यै नमः ।
ॐ बृहत्यै नमः ।
ॐ ब्राह्म्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मभूतायै नमः ।
ॐ अघहारिण्यै नमः ।
ॐ हिरण्मय्यै नमः ।
ॐ महादात्र्यै नमः ।
ॐ संसारपरिवर्तिकायै नमः ।
ॐ सुमालिन्यै नमः ।
ॐ सुरूपायै नमः ।
ॐ भास्विन्यै नमः ।
ॐ धारिण्यै नमः । ४२०
ॐ उन्मूलिन्यै नमः ।
ॐ सर्वसमायै नमः ।
ॐ सर्वप्रत्ययसाक्षिण्यै नमः ।
ॐ सुसौम्यायै नमः ।
ॐ चन्द्रवदनायै नमः ।
ॐ ताण्डवासक्तमानसायै नमः ।
ॐ सत्त्वशुद्धिकर्यै नमः ।
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ मलत्रयविनाशिन्यै नमः ।
ॐ जगत्त्रय्यै नमः ।
ॐ जगन्मूर्त्यै नमः ।
ॐ त्रिमूर्त्यै नमः ।
ॐ अमृताश्रयायै नमः ।
ॐ विमानस्थायै नमः ।
ॐ विशोकायै नमः ।
ॐ शोकनाशिन्यै नमः ।
ॐ अनाहतायै नमः ।
ॐ हेमकुण्डलिन्यै नमः ।
ॐ काल्यै नमः ।
ॐ पद्मवासायै नमः । ४४०
ॐ सनातन्यै नमः ।
ॐ सदाकीर्त्यै नमः ।
ॐ सर्वभूतशयायै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ सतां प्रियायै नमः ।
ॐ ब्रह्ममूर्तिकलायै नमः ।
ॐ कृत्तिकायै नमः ।
ॐ कञ्जमालिन्यै नमः ।
ॐ व्योमकेशायै नमः ।
ॐ क्रियाशक्त्यै नमः ।
ॐ इच्छाशक्त्यै नमः ।
ॐ परायै गत्यै नमः ।
ॐ क्षोभिकायै नमः ।
ॐ खण्डिकाभेद्यायै नमः ।
ॐ भेदाभेदविवर्जितायै नमः ।
ॐ अभिन्नायै नमः ।
ॐ भिन्नसंस्थानायै नमः ।
ॐ वशिन्यै नमः ।
ॐ वंशधारिण्यै नमः ।
ॐ गुह्यशक्त्यै नमः । ४६०
ॐ गुह्यतत्त्वायै नमः ।
ॐ सर्वदायै नमः ।
ॐ सर्वतोमुख्यै नमः ।
ॐ भगिन्यै नमः ।
ॐ निराधारायै नमः ।
ॐ निराहारायै नमः ।
ॐ निरङ्कुशपदोद्भूतायै नमः ।
ॐ चक्रहस्तायै नमः ।
ॐ विशोधिकायै नमः ।
ॐ स्रग्विण्यै नमः ।
ॐ पद्मसम्भेदकारिण्यै नमः ।
ॐ परावरविधानज्ञायै नमः ।
ॐ महापुरुषपूर्वजायै नमः ।
ॐ परावरज्ञायै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ विद्युज्जिह्वायै नमः ।
ॐ जिताश्रयायै नमः ।
ॐ विद्यामय्यै नमः ।
ॐ सहस्राक्ष्यै नमः ।
ॐ सहस्रवदनात्मजायै नमः । ४८०
ॐ सहस्ररश्म्यै नमः ।
ॐ सत्वस्थायै नमः ।
ॐ महेश्वरपदाश्रयायै नमः ।
ॐ ज्वालिन्यै नमः ।
ॐ सन्मयायै नमः ।
ॐ व्याप्तायै नमः ।
ॐ चिन्मयायै नमः ।
ॐ पद्मभेदिकायै नमः ।
ॐ महाश्रयायै नमः ।
ॐ महामन्त्रायै नमः ।
ॐ महादेवमनोरमायै नमः ।
ॐ व्योमलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ सिंहरथायै नमः ।
ॐ चेकितानायै नमः ।
ॐ अमितप्रभायै नमः ।
ॐ विश्वेश्वर्यै नमः ।
ॐ भगवत्यै नमः ।
ॐ सकलायै नमः ।
ॐ कालहारिण्यै नमः ।
ॐ सर्ववेद्यायै नमः । ५००
ॐ सर्वभद्रायै नमः ।
ॐ गुह्यायै नमः ।
ॐ गूढायै नमः ।
ॐ गुहारण्यै नमः ।
ॐ प्रलयायै नमः ।
ॐ योगधात्र्यै नमः ।
ॐ गङ्गायै नमः ।
ॐ विश्वेश्वर्यै नमः ।
ॐ कामदायै नमः ।
ॐ कनकायै नमः ।
ॐ कान्तायै नमः ।
ॐ कञ्जगर्भप्रभायै नमः ।
ॐ पुण्यदायै नमः ।
ॐ कालकेशायै नमः ।
ॐ भोक्त्र्यै नमः ।
ॐ पुष्करिण्यै नमः ।
ॐ सुरेश्वर्यै नमः ।
ॐ भूतिदात्र्यै नमः ।
ॐ भूतिभूषायै नमः ।
ॐ पञ्चब्रह्मसमुत्पन्नायै नमः । ५२०
ॐ परमार्थायै नमः ।
ॐ अर्थविग्रहायै नमः ।
ॐ वर्णोदयायै नमः ।
ॐ भानुमूर्त्यै नमः ।
ॐ वाग्विज्ञेयायै नमः ।
ॐ मनोजवायै नमः ।
ॐ मनोहरायै नमः ।
ॐ महोरस्कायै नमः ।
ॐ तामस्यै नमः ।
ॐ वेदरूपिण्यै नमः ।
ॐ वेदशक्त्यै नमः ।
ॐ वेदमात्रे नमः ।
ॐ वेदविद्याप्रकाशिन्यै नमः ।
ॐ योगेश्वरेश्वर्यै नमः ।
ॐ मायायै नमः ।
ॐ महाशक्त्यै नमः ।
ॐ महामय्यै नमः ।
ॐ विश्वान्तःस्थायै नमः ।
ॐ वियन्मूर्त्यै नमः ।
ॐ भार्गव्यै नमः । ५४०
ॐ सुरसुन्दर्यै नमः ।
ॐ सुरभ्यै नमः ।
ॐ नन्दिन्यै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ नन्दगोपतनूद्भवायै नमः ।
ॐ भारत्यै नमः ।
ॐ परमानन्दायै नमः ।
ॐ परावरविभेदिकायै नमः ।
ॐ सर्वप्रहरणोपेतायै नमः ।
ॐ काम्यायै नमः ।
ॐ कामेश्वरेश्वर्यै नमः ।
ॐ अनन्तानन्दविभवायै नमः ।
ॐ हृल्लेखायै नमः ।
ॐ कनकप्रभायै नमः ।
ॐ कूष्माण्डायै नमः ।
ॐ धनरत्नाढ्यायै नमः ।
ॐ सुगन्धायै नमः ।
ॐ गन्धदायिन्यै नमः ।
ॐ त्रिविक्रमपदोद्भूतायै नमः ।
ॐ चतुरास्यायै नमः । ५६०
ॐ शिवोदयायै नमः ।
ॐ सुदुर्लभायै नमः ।
ॐ धनाध्यक्षायै नमः ।
ॐ धन्यायै नमः ।
ॐ पिङ्गललोचनायै नमः ।
ॐ शान्तायै नमः ।
ॐ प्रभास्वरूपायै नमः ।
ॐ पङ्कजायतलोचनायै नमः ।
ॐ इन्द्राक्ष्यै नमः ।
ॐ हृदयान्तःस्थायै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ मात्रे नमः ।
ॐ सत्क्रियायै नमः ।
ॐ गिरिजायै नमः ।
ॐ सुगूढायै नमः ।
ॐ नित्यपुष्टायै नमः ।
ॐ निरन्तरायै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ कात्यायन्यै नमः ।
ॐ चण्ड्यै नमः । ५८०
ॐ चन्द्रिकायै नमः ।
ॐ कान्तविग्रहायै नमः ।
ॐ हिरण्यवर्णायै नमः ।
ॐ जगत्यै नमः ।
ॐ जगद्यन्त्रप्रवर्तिकायै नमः ।
ॐ मन्दराद्रिनिवासायै नमः ।
ॐ शारदायै नमः ।
ॐ स्वर्णमालिन्यै नमः ।
ॐ रत्नमालायै नमः ।
ॐ रत्नगर्भायै नमः ।
ॐ व्युष्ट्यै नमः ।
ॐ विश्वप्रमाथिन्यै नमः ।
ॐ पद्मानन्दायै नमः ।
ॐ पद्मनिभायै नमः ।
ॐ नित्यपुष्टायै नमः ।
ॐ कृतोद्भवायै नमः ।
ॐ नारायण्यै नमः ।
ॐ दुष्टशिक्षायै नमः ।
ॐ सूर्यमात्रे नमः ।
ॐ वृषप्रियायै नमः । ६००
ॐ महेन्द्रभगिन्यै नमः ।
ॐ सत्यायै नमः ।
ॐ सत्यभाषायै नमः ।
ॐ सुकोमलायै नमः ।
ॐ वामायै नमः ।
ॐ पञ्चतपसां वरदात्र्यै नमः ।
ॐ वाच्यवर्णेश्वर्यै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ दुर्जयायै नमः ।
ॐ दुरतिक्रमायै नमः ।
ॐ कालरात्र्यै नमः ।
ॐ महावेगायै नमः ।
ॐ वीरभद्रप्रियायै नमः ।
ॐ भद्रकाल्यै नमः ।
ॐ जगन्मात्रे नमः ।
ॐ भक्तानां भद्रदायिन्यै नमः ।
ॐ करालायै नमः ।
ॐ पिङ्गलाकारायै नमः ।
ॐ कामभेत्त्र्यै नमः ।
ॐ महामनसे नमः । ६२०
ॐ यशस्विन्यै नमः ।
ॐ यशोदायै नमः ।
ॐ षडध्वपरिवर्तिकायै नमः ।
ॐ शङ्खिन्यै नमः ।
ॐ पद्मिन्यै नमः ।
ॐ सङ्ख्यायै नमः ।
ॐ साङ्ख्ययोगप्रवर्तिकायै नमः ।
ॐ चैत्राद्यै नमः ।
ॐ वत्सरारूढायै नमः ।
ॐ जगत्सम्पूरण्यै नमः ।
ॐ इन्द्रजायै नमः ।
ॐ शुम्भघ्न्यै नमः ।
ॐ खेचराराध्यायै नमः ।
ॐ कम्बुग्रीवायै नमः ।
ॐ बलीडितायै नमः ।
ॐ खगारूढायै नमः ।
ॐ महैश्वर्यायै नमः ।
ॐ सुपद्मनिलयायै नमः ।
ॐ विरक्तायै नमः ।
ॐ गरुडस्थायै नमः । ६४०
ॐ जगतीहृद्गुहाश्रयायै नमः ।
ॐ शुम्भादिमथनायै नमः ।
ॐ भक्तहृद्गह्वरनिवासिन्यै नमः ।
ॐ जगत्त्रयारण्यै नमः ।
ॐ सिद्धसङ्कल्पायै नमः ।
ॐ कामदायै नमः ।
ॐ सर्वविज्ञानदात्र्यै नमः ।
ॐ अनल्पकल्मषहारिण्यै नमः ।
ॐ सकलोपनिषद्गम्यायै नमः ।
ॐ दुष्टदुष्प्रेक्ष्यसत्तमायै नमः ।
ॐ सद्वृतायै नमः ।
ॐ लोकसंव्याप्तायै नमः ।
ॐ तुष्ट्यै नमः ।
ॐ पुष्ट्यै नमः ।
ॐ क्रियावत्यै नमः ।
ॐ विश्वामरेश्वर्यै नमः ।
ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ धृतायै नमः ।
ॐ लोहिताक्ष्यै नमः । ६६०
ॐ सर्पमालाविभूषणायै नमः ।
ॐ निरानन्दायै नमः ।
ॐ त्रिशूलासिधनुर्बाणादिधारिण्यै नमः ।
ॐ अशेषध्येयमूर्त्यै नमः ।
ॐ देवतानां देवतायै नमः ।
ॐ वरायै नमः ।
ॐ अम्बिकायै नमः ।
ॐ गिरेः पुत्र्यै नमः ।
ॐ निशुम्भविनिपातिन्यै नमः ।
ॐ सुवर्णायै नमः ।
ॐ स्वर्णलसितायै नमः ।
ॐ अनन्तवर्णायै नमः ।
ॐ सदाधृतायै नमः ।
ॐ शाङ्कर्यै नमः ।
ॐ शान्तहृदयायै नमः ।
ॐ अहोरात्रविधायिकायै नमः ।
ॐ विश्वगोप्त्र्यै नमः ।
ॐ गूढरूपायै नमः ।
ॐ गुणपूर्णायै नमः ।
ॐ गार्ग्यजायै नमः । ६८०
ॐ गौर्यै नमः ।
ॐ शाकम्भर्यै नमः ।
ॐ सत्यसन्धायै नमः ।
ॐ सन्ध्यात्रयीधृतायै नमः ।
ॐ सर्वपापविनिर्मुक्तायै नमः ।
ॐ सर्वबन्धविवर्जितायै नमः ।
ॐ साङ्ख्ययोगसमाख्यातायै नमः ।
ॐ अप्रमेयायै नमः ।
ॐ मुनीडितायै नमः ।
ॐ विशुद्धसुकुलोद्भूतायै नमः ।
ॐ बिन्दुनादसमादृतायै नमः ।
ॐ शम्भुवामाङ्कगायै नमः ।
ॐ शशितुल्यनिभाननायै नमः ।
ॐ वनमालाविराजन्त्यै नमः ।
ॐ अनन्तशयनादृतायै नमः ।
ॐ नरनारायणोद्भूतायै नमः ।
ॐ नारसिंह्यै नमः ।
ॐ दैत्यप्रमाथिन्यै नमः ।
ॐ शङ्खचक्रपद्मगदाधरायै नमः ।
ॐ सङ्कर्षणसमुत्पन्नायै नमः । ७००
ॐ अम्बिकायै नमः ।
ॐ सज्जनाश्रयायै नमः ।
ॐ सुवृतायै नमः ।
ॐ सुन्दर्यै नमः ।
ॐ धर्मकामार्थदायिन्यै नमः ।
ॐ मोक्षदायै नमः ।
ॐ भक्तिनिलयायै नमः ।
ॐ पुराणपुरुषादृतायै नमः ।
ॐ महाविभूतिदायै नमः ।
ॐ आराध्यायै नमः ।
ॐ सरोजनिलयायै नमः ।
ॐ असमायै नमः ।
ॐ अष्टादशभुजायै नमः ।
ॐ अनादये नमः ।
ॐ नीलोत्पलदलाक्षिण्यै नमः ।
ॐ सर्वशक्तिसमारूढायै नमः ।
ॐ धर्माधर्मविवर्जितायै नमः ।
ॐ वैराग्यज्ञाननिरतायै नमः ।
ॐ निरालोकायै नमः ।
ॐ निरिन्द्रियायै नमः । ७२०
ॐ विचित्रगहनाधारायै नमः ।
ॐ शाश्वतस्थानवासिन्यै नमः ।
ॐ ज्ञानेश्वर्यै नमः ।
ॐ पीतचेलायै नमः ।
ॐ वेदवेदाङ्गपारगायै नमः ।
ॐ मनस्विन्यै नमः ।
ॐ मन्युमात्रे नमः ।
ॐ महामन्युसमुद्भवायै नमः ।
ॐ अमन्यवे नमः ।
ॐ अमृतास्वादायै नमः ।
ॐ पुरन्दरपरिष्टुतायै नमः ।
ॐ अशोच्यायै नमः ।
ॐ भिन्नविषयायै नमः ।
ॐ हिरण्यरजतप्रियायै नमः ।
ॐ हिरण्यजनन्यै नमः ।
ॐ भीमायै नमः ।
ॐ हेमाभरणभूषितायै नमः ।
ॐ विभ्राजमानायै नमः ।
ॐ दुर्ज्ञेयायै नमः ।
ॐ ज्योतिष्टोमफलप्रदायै नमः । ७४०
ॐ महानिद्रासमुत्पत्तये नमः ।
ॐ अनिद्रायै नमः ।
ॐ सत्यदेवतायै नमः ।
ॐ दीर्घायै नमः ।
ॐ ककुद्मिन्यै नमः ।
ॐ पिङ्गजटाधारायै नमः ।
ॐ मनोज्ञधिये नमः ।
ॐ महाश्रयायै नमः ।
ॐ रमोत्पन्नायै नमः ।
ॐ तमःपारे प्रतिष्ठितायै नमः ।
ॐ त्रितत्त्वमात्रे नमः ।
ॐ त्रिविधायै नमः ।
ॐ सुसूक्ष्मायै नमः ।
ॐ पद्मसंश्रयायै नमः ।
ॐ शान्त्यतीतकलायै नमः ।
ॐ अतीतविकारायै नमः ।
ॐ श्वेतचेलिकायै नमः ।
ॐ चित्रमायायै नमः ।
ॐ शिवज्ञानस्वरूपायै नमः ।
ॐ दैत्यमाथिन्यै नमः । ७६०
ॐ काश्यप्यै नमः ।
ॐ कालसर्पाभवेणिकायै नमः ।
ॐ शास्त्रयोनिकायै नमः ।
ॐ त्रयीमूर्त्यै नमः ।
ॐ क्रियामूर्त्यै नमः ।
ॐ चतुर्वर्गायै नमः ।
ॐ दर्शिन्यै नमः ।
ॐ नारायण्यै नमः ।
ॐ नरोत्पन्नायै नमः ।
ॐ कौमुद्यै नमः ।
ॐ कान्तिधारिण्यै नमः ।
ॐ कौशिक्यै नमः ।
ॐ ललितायै नमः ।
ॐ लीलायै नमः ।
ॐ परावरविभाविन्यै नमः ।
ॐ वरेण्यायै नमः ।
ॐ अद्भुतमाहात्म्यायै नमः ।
ॐ वडवायै नमः ।
ॐ वामलोचनायै नमः ।
ॐ सुभद्रायै नमः । ७८०
ॐ चेतनाराध्यायै नमः ।
ॐ शान्तिदायै नमः ।
ॐ शान्तिवर्धिन्यै नमः ।
ॐ जयादिशक्तिजनन्यै नमः ।
ॐ शक्तिचक्रप्रवर्तिकायै नमः ।
ॐ त्रिशक्तिजनन्यै नमः ।
ॐ जन्यायै नमः ।
ॐ षट्सूत्रपरिवर्णितायै नमः ।
ॐ सुधौतकर्मणाराध्यायै नमः ।
ॐ युगान्तदहनात्मिकायै नमः ।
ॐ सङ्कर्षिण्यै नमः ।
ॐ जगद्धात्र्यै नमः ।
ॐ कामयोन्यै नमः ।
ॐ किरीटिन्यै नमः ।
ॐ ऐन्द्र्यै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यनमितायै नमः ।
ॐ वैष्णव्यै नमः ।
ॐ परमेश्वर्यै नमः ।
ॐ प्रद्युम्नजनन्यै नमः ।
ॐ बिम्बसमोष्ठ्यै नमः । ८००
ॐ पद्मलोचनायै नमः ।
ॐ मदोत्कटायै नमः ।
ॐ हंसगत्यै नमः ।
ॐ प्रचण्डायै नमः ।
ॐ चण्डविक्रमायै नमः ।
ॐ वृषाधीशायै नमः ।
ॐ परात्मने नमः ।
ॐ विन्ध्यपर्वतवासिन्यै नमः ।
ॐ हिमवन्मेरुनिलयायै नमः ।
ॐ कैलासपुरवासिन्यै नमः ।
ॐ चाणूरहन्त्र्यै नमः ।
ॐ नीतिज्ञायै नमः ।
ॐ कामरूपायै नमः ।
ॐ त्रयीतनवे नमः ।
ॐ व्रतस्नातायै नमः ।
ॐ धर्मशीलायै नमः ।
ॐ सिंहासननिवासिन्यै नमः ।
ॐ वीरभद्रादृतायै नमः ।
ॐ वीरायै नमः ।
ॐ महाकालसमुद्भवायै नमः । ८२०
ॐ विद्याधरार्चितायै नमः ।
ॐ सिद्धसाध्याराधितपादुकायै नमः ।
ॐ श्रद्धात्मिकायै नमः ।
ॐ पावन्यै नमः ।
ॐ मोहिन्यै नमः ।
ॐ अचलात्मिकायै नमः ।
ॐ महाद्भुतायै नमः ।
ॐ वारिजाक्ष्यै नमः ।
ॐ सिंहवाहनगामिन्यै नमः ।
ॐ मनीषिण्यै नमः ।
ॐ सुधावाण्यै नमः ।
ॐ वीणावादनतत्परायै नमः ।
ॐ श्वेतवाहनिषेव्यायै नमः ।
ॐ लसन्मत्यै नमः ।
ॐ अरुन्धत्यै नमः ।
ॐ हिरण्याक्ष्यै नमः ।
ॐ महानन्दप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ वसुप्रभायै नमः ।
ॐ सुमाल्याप्तकन्धरायै नमः ।
ॐ पङ्कजाननायै नमः । ८४०
ॐ परावरायै नमः ।
ॐ वरारोहायै नमः ।
ॐ सहस्रनयनार्चितायै नमः ।
ॐ श्रीरूपायै नमः ।
ॐ श्रीमत्यै नमः ।
ॐ श्रेष्ठायै नमः ।
ॐ शिवनाम्न्यै नमः ।
ॐ शिवप्रियायै नमः ।
ॐ श्रीप्रदायै नमः ।
ॐ श्रितकल्याणायै नमः ।
ॐ श्रीधरार्धशरीरिण्यै नमः ।
ॐ श्रीकलायै नमः ।
ॐ अनन्तदृष्ट्यै नमः ।
ॐ अक्षुद्रायै नमः ।
ॐ अरातिसूदन्यै नमः ।
ॐ रक्तबीजनिहन्त्र्यै नमः ।
ॐ दैत्यसङ्घविमर्दिन्यै नमः ।
ॐ सिंहारूढायै नमः ।
ॐ सिंहिकास्यायै नमः ।
ॐ दैत्यशोणितपायिन्यै नमः । ८६०
ॐ सुकीर्तिसहितायै नमः ।
ॐ छिन्नसंशयायै नमः ।
ॐ रसवेदिन्यै नमः ।
ॐ गुणाभिरामायै नमः ।
ॐ नागारिवाहनायै नमः ।
ॐ निर्जरार्चितायै नमः ।
ॐ नित्योदितायै नमः ।
ॐ स्वयञ्ज्योतिषे नमः ।
ॐ स्वर्णकायायै नमः ।
ॐ वज्रदण्डाङ्कितायै नमः ।
ॐ अमृतसञ्जीविन्यै नमः ।
ॐ वज्रच्छन्नायै नमः ।
ॐ देवदेव्यै नमः ।
ॐ वरवज्रस्वविग्रहायै नमः ।
ॐ माङ्गल्यायै नमः ।
ॐ मङ्गलात्मने नमः ।
ॐ मालिन्यै नमः ।
ॐ माल्यधारिण्यै नमः ।
ॐ गन्धर्व्यै नमः ।
ॐ तरुण्यै नमः । ८८०
ॐ चान्द्र्यै नमः ।
ॐ खड्गायुधधरायै नमः ।
ॐ सौदामिन्यै नमः ।
ॐ प्रजानन्दायै नमः ।
ॐ भृगूद्भवायै नमः ।
ॐ एकायै नमः ।
ॐ अनङ्गायै नमः ।
ॐ शास्त्रार्थकुशलायै नमः ।
ॐ धर्मचारिण्यै नमः ।
ॐ धर्मसर्वस्ववाहायै नमः ।
ॐ धर्माधर्मविनिश्चयायै नमः ।
ॐ धर्मशक्त्यै नमः ।
ॐ धर्ममयायै नमः ।
ॐ धार्मिकानां शिवप्रदायै नमः ।
ॐ विधर्मायै नमः ।
ॐ विश्वधर्मज्ञायै नमः ।
ॐ धर्मार्थान्तरविग्रहायै नमः ।
ॐ धर्मवर्ष्मायै नमः ।
ॐ धर्मपूर्वायै नमः ।
ॐ धर्मपारङ्गतान्तरायै नमः । ९००
ॐ धर्मोपदेष्ट्र्यै नमः ।
ॐ धर्मात्मने नमः ।
ॐ धर्मगम्यायै नमः ।
ॐ धराधरायै नमः ।
ॐ कपालिन्यै नमः ।
ॐ शाकलिन्यै नमः ।
ॐ कलाकलितविग्रहायै नमः ।
ॐ सर्वशक्तिविमुक्तायै नमः ।
ॐ कर्णिकारधरायै नमः ।
ॐ अक्षरायै नमः ।
ॐ कंसप्राणहरायै नमः ।
ॐ युगधर्मधरायै नमः ।
ॐ युगप्रवर्तिकायै नमः ।
ॐ त्रिसन्ध्यायै नमः ।
ॐ ध्येयविग्रहायै नमः ।
ॐ स्वर्गापवर्गदात्र्यै नमः ।
ॐ प्रत्यक्षदेवतायै नमः ।
ॐ आदित्यायै नमः ।
ॐ दिव्यगन्धायै नमः ।
ॐ दिवाकरनिभप्रभायै नमः । ९२०
ॐ पद्मासनगतायै नमः ।
ॐ खड्गबाणशरासनायै नमः ।
ॐ शिष्टायै नमः ।
ॐ विशिष्टायै नमः ।
ॐ शिष्टेष्टायै नमः ।
ॐ शिष्टश्रेष्ठप्रपूजितायै नमः ।
ॐ शतरूपायै नमः ।
ॐ शतावर्तायै नमः ।
ॐ विततायै नमः ।
ॐ रासमोदिन्यै नमः ।
ॐ सूर्येन्दुनेत्रायै नमः ।
ॐ प्रद्युम्नजनन्यै नमः ।
ॐ सुष्ठुमायिन्यै नमः ।
ॐ सूर्यान्तरस्थितायै नमः ।
ॐ सत्प्रतिष्ठितविग्रहायै नमः ।
ॐ निवृत्तायै नमः ।
ॐ ज्ञानपारगायै नमः ।
ॐ पर्वतात्मजायै नमः ।
ॐ कात्यायन्यै नमः ।
ॐ चण्डिकायै नमः । ९४०
ॐ चण्ड्यै नमः ।
ॐ हैमवत्यै नमः ।
ॐ दाक्षायण्यै नमः ।
ॐ सत्यै नमः ।
ॐ भवान्यै नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलायै नमः ।
ॐ धूम्रलोचनहन्त्र्यै नमः ।
ॐ चण्डमुण्डविनाशिन्यै नमः ।
ॐ योगनिद्रायै नमः ।
ॐ योगभद्रायै नमः ।
ॐ समुद्रतनयायै नमः ।
ॐ देवप्रियङ्कर्यै नमः ।
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ भक्तभक्तिप्रवर्धिन्यै नमः ।
ॐ त्रिनेत्रायै नमः ।
ॐ चन्द्रमुकुटायै नमः ।
ॐ प्रमथार्चितपादुकायै नमः ।
ॐ अर्जुनाभीष्टदात्र्यै नमः ।
ॐ पाण्डवप्रियकारिण्यै नमः ।
ॐ कुमारलालनासक्तायै नमः । ९६०
ॐ हरबाहूपधानिकायै नमः ।
ॐ विघ्नेशजनन्यै नमः ।
ॐ भक्तविघ्नस्तोमप्रहारिण्यै नमः ।
ॐ सुस्मितेन्दुमुख्यै नमः ।
ॐ नम्यायै नमः ।
ॐ जयाप्रियसख्यै नमः ।
ॐ अनादिनिधनायै नमः ।
ॐ प्रेष्ठायै नमः ।
ॐ चित्रमाल्यानुलेपनायै नमः ।
ॐ कोटिचन्द्रप्रतीकाशायै नमः ।
ॐ कूटजालप्रमाथिन्यै नमः ।
ॐ कृत्याप्रहारिण्यै नमः ।
ॐ मारणोच्चाटन्यै नमः ।
ॐ सुरासुरप्रवन्द्याङ्घ्रये नमः ।
ॐ मोहघ्न्यै नमः ।
ॐ ज्ञानदायिन्यै नमः ।
ॐ षड्वैरिनिग्रहकर्यै नमः ।
ॐ वैरिविद्राविण्यै नमः ।
ॐ भूतसेव्यायै नमः ।
ॐ भूतदात्र्यै नमः । ९८०
ॐ भूतपीडाविमर्दिकायै नमः ।
ॐ नारदस्तुतचारित्रायै नमः ।
ॐ वरदेशायै नमः ।
ॐ वरप्रदायै नमः ।
ॐ वामदेवस्तुतायै नमः ।
ॐ कामदायै नमः ।
ॐ सोमशेखरायै नमः ।
ॐ दिक्पालसेवितायै नमः ।
ॐ भव्यायै नमः ।
ॐ भामिन्यै नमः ।
ॐ भावदायिन्यै नमः ।
ॐ स्त्रीसौभाग्यप्रदात्र्यै नमः ।
ॐ भोगदायै नमः ।
ॐ रोगनाशिन्यै नमः ।
ॐ व्योमगायै नमः ।
ॐ भूमिगायै नमः ।
ॐ मुनिपूज्यपदाम्बुजायै नमः ।
ॐ वनदुर्गायै नमः ।
ॐ दुर्बोधायै नमः ।
ॐ महादुर्गायै नमः । १०००
इति श्री दुर्गा सहस्रनामावली ॥
मूल उच्चारण विधि: सहस्रनामावली का आरंभ माता के मुख्य स्वरूपों के नमन से होता है। इसका प्रत्येक नाम संस्कृत में ‘चतुर्थी विभक्ति’ (जैसे ‘दुर्गा’ का ‘दुर्गायै’) में होता है, जिसका अर्थ है “मैं माता को नमस्कार करता हूँ।”
साधना का बीज मंत्र: सहस्रनामावली आरंभ करने से पूर्व माता के नवार्ण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का कम से कम 108 बार जाप करना पाठ की शक्ति को हजारों गुना बढ़ा देता है।
श्री दुर्गा सहस्रनामावली पाठ के अचूक और चमत्कारी लाभ (Benefits)
माता दुर्गा के 1000 नामों का अर्चन एक ‘महा-अनुष्ठान’ है। यह कोई सामान्य पूजा नहीं है, बल्कि यह सीधे आदिशक्ति से जुड़ने का मार्ग है। इसके नियमित या विशेष तिथियों पर किए गए पाठ से साधक को निम्नलिखित अकल्पनीय लाभ प्राप्त होते हैं:
1. भयंकर शत्रुओं और विरोधियों का सर्वनाश (Victory over Enemies)
माता दुर्गा को ‘दुर्गतिनाशिनी’ (दुर्गति का नाश करने वाली) और ‘शत्रुमर्दिनी’ कहा गया है। यदि आपके जीवन में अकारण शत्रु उत्पन्न हो गए हैं, कोई आपको कोर्ट-कचहरी या झूठे मुकदमों में फंसा रहा है, तो इन 1000 नामों का पाठ आपके शत्रुओं के मन में भय उत्पन्न कर देगा। माता के नामों की ऊर्जा विरोधियों के सभी षड्यंत्रों को विफल कर देती है और साधक को हर क्षेत्र में विजय दिलाती है।
2. तंत्र-मंत्र, काला जादू और बुरी नज़र से पूर्ण सुरक्षा (Protection from Black Magic)
यदि आपको लगता है कि आपके घर, परिवार या व्यापार पर किसी ने तंत्र-मंत्र का प्रयोग किया है या बुरी नज़र (Evil Eye) का साया है, तो दुर्गा सहस्रनामावली एक अभेद्य ‘कवच’ का कार्य करती है। माता दुर्गा की उग्र शक्तियों के आगे बड़े से बड़ा तांत्रिक प्रयोग भी जलकर भस्म हो जाता है। घर में इसका पाठ करने से भूत-पिशाच और नकारात्मक ऊर्जा का तुरंत नाश होता है।
3. नवग्रह शांति और राहु-केतु दोष का निवारण
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माता दुर्गा छाया ग्रहों (राहु और केतु) की अधिष्ठात्री देवी हैं। जिन व्यक्तियों की कुंडली में राहु-केतु का भारी दोष हो, शनि की साढ़ेसाती चल रही हो या कोई भी ग्रह मारक अवस्था में हो, उन्हें तुरंत दुर्गा जी के 1000 नामों का पाठ शुरू कर देना चाहिए। माता की कृपा से सभी ग्रह अपना अशुभ फल देना बंद कर देते हैं।
4. असाध्य रोगों और शारीरिक कष्टों से मुक्ति
“रोगानशेषानपहंसि तुष्टा…” दुर्गा सप्तशती का यह श्लोक कहता है कि माता जब प्रसन्न होती हैं तो सभी रोगों का नाश कर देती हैं। यदि परिवार में कोई सदस्य लंबे समय से बीमार है और दवाइयां असर नहीं कर रही हैं, तो उनके नाम से संकल्प लेकर दुर्गा सहस्रनामावली का पाठ (कुशा के आसन पर बैठकर) करने से चमत्कारी रूप से स्वास्थ्य में सुधार होने लगता है।
5. अखंड धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति
माता दुर्गा के 1000 नामों में माता महालक्ष्मी के भी अनेकों नामों का समावेश है। यह पाठ घर से कंगाली, दरिद्रता और आर्थिक संकटों को हमेशा के लिए बाहर कर देता है। जो व्यापारी या गृहस्थ इसका नित्य पाठ करता है, उसके घर के भंडार कभी खाली नहीं रहते और धन आगमन के नए और अकल्पनीय स्रोत खुल जाते हैं।
6. निर्भयता, आत्मविश्वास और मोक्ष की प्राप्ति
कई लोग अकारण भय (Phobia) और डिप्रेशन (अवसाद) का शिकार रहते हैं। माता के 1000 नाम मन से मृत्यु और असफलता के भय को जड़ से मिटा देते हैं। व्यक्ति मानसिक रूप से फौलाद बन जाता है। जीवन भर सभी सुखों को भोगने के बाद साधक को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) मिल जाती है।
श्री दुर्गा सहस्रनामावली की प्रामाणिक अर्चन और पाठ विधि (Authentic Puja Vidhi)
माता दुर्गा की पूजा जितनी फलदायी है, उसके नियम भी उतने ही पवित्र हैं। पूर्ण लाभ और माता की त्वरित कृपा प्राप्त करने के लिए इसे ‘सहस्रार्चन’ विधि से करना सबसे उत्तम माना जाता है:
1. उत्तम दिन, तिथि और मुहूर्त
सहस्रनामावली का पाठ आरंभ करने के लिए चैत्र या शारदीय नवरात्रि सबसे उत्तम समय है। इसके अलावा किसी भी महीने की अष्टमी (विशेषकर दुर्गा अष्टमी), नवमी, मंगलवार या शुक्रवार के दिन इसे किया जा सकता है। पूजा का सबसे शुभ समय प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) या गोधूलि बेला (सूर्यास्त का समय) होता है।
2. आसन, दिशा और वस्त्र की शुद्धि
स्नान करके पूर्णतः शुद्ध हो जाएं। माता दुर्गा की पूजा में लाल रंग का विशेष महत्व है, इसलिए लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें और लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठें। अपना मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर रखें।
3. पूजन सामग्री और कलश स्थापना
एक लकड़ी की चौकी (पाटे) पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर (जिसमें वे शेर पर सवार हों और अष्टभुजाधारी हों) स्थापित करें। गाय के शुद्ध घी का या तिल के तेल का एक अखंड दीपक प्रज्वलित करें। माता को लाल चुनरी, सिंदूर, और अक्षत (बिना टूटे हुए चावल) अर्पित करें।
4. संकल्प (Sankalpa) अत्यंत आवश्यक है
किसी भी बड़े पाठ का फल तभी मिलता है जब उसका संकल्प लिया जाए। दाएँ हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और एक लाल फूल लेकर अपने नाम, गोत्र और स्थान का उच्चारण करें। फिर माता से अपनी मनोकामना कहें (जैसे- हे माता, मैं रोग मुक्ति या शत्रु नाश के लिए आपके 1000 नामों का पाठ/अर्चन कर रहा हूँ)। इसके बाद जल धरती पर छोड़ दें।
5. सहस्रार्चन की विधि (1000 आहुतियां/पुष्पांजलि)
केवल 1000 नामों को पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। सबसे चमत्कारी तरीका यह है कि आप अपने पास 1000 लाल गुलाब की पंखुड़ियां, गुड़हल (Hibiscus) के फूल, लाल चंदन, या सिंदूर/कुमकुम रख लें। माता का एक नाम बोलें (जैसे- ॐ जगदम्बायै नमः) और एक पंखुड़ी या कुमकुम की बिंदी माता के चरणों में या श्री यंत्र पर अर्पित करें। 1000 नामों के साथ 1000 बार अर्पण करने की इस विधि को ‘सहस्रार्चन’ कहते हैं। यह ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली तांत्रिक और वैदिक उपाय है।
6. भोग और क्षमा प्रार्थना
पाठ संपन्न होने के बाद माता को हलवा, पूरी, चना, बताशे या लाल फलों (जैसे अनार, सेब) का भोग लगाएं। कर्पूर से माता की भव्य आरती करें। सबसे अंत में “अपराध सहस्राणि क्रियन्ते अहर्निशं मया…” (दुर्गा क्षमा प्रार्थना स्तोत्र) पढ़ें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।
पाठ के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण नियम (Rules & Precautions)
माता आदि शक्ति हैं। उनकी पूजा में कोई भी अशुद्धि या लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कृपया इन नियमों का कड़ाई से पालन करें:
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पूर्ण सात्विकता: जिस दिन या जिन दिनों में (जैसे नवरात्रि) आप यह अनुष्ठान कर रहे हैं, उन दिनों मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और किसी भी प्रकार के नशे का पूर्णतया त्याग करें। आपका आहार सात्विक होना चाहिए।
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ब्रह्मचर्य का पालन: अनुष्ठान के दिनों में शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
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स्त्रियों का सम्मान: माता दुर्गा स्वयं मातृ शक्ति हैं। जिस घर में स्त्रियों (माता, बहन, पत्नी, बेटी) का अपमान होता है या उन्हें कष्ट दिया जाता है, वहाँ 1000 नामों का पाठ भी फलित नहीं होता। माता उस घर से तुरंत रूठ कर चली जाती हैं।
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उच्चारण की शुद्धता: ‘Shri Durga Sahasranamavali Lyrics in Sanskrit’ का उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए। यदि संस्कृत पढ़ने में कठिनाई हो, तो किसी योग्य ब्राह्मण द्वारा इसका पाठ करवाएं या पहले नामों को धीरे-धीरे पढ़कर अभ्यास करें। भाव शुद्ध होना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
Shri Durga Sahasranamavali केवल शब्दों का संग्रह नहीं है; यह एक ऐसा जाग्रत मंत्र-समूह है जो आपके जीवन की हर बाधा को चीर कर आपको सफलता के शिखर पर पहुँचा सकता है। जब जीवन में हर तरफ से रास्ते बंद हो जाएं और मनुष्य खुद को निहत्था महसूस करे, तब इन 1000 नामों का सहारा उसे अजेय बना देता है।
माता दुर्गा अपने भक्तों की एक सच्ची पुकार पर दौड़ी चली आती हैं। आप राजा हों या रंक, माता के लिए सभी उनकी संतान हैं। पूर्ण विश्वास, अटूट श्रद्धा और आंसुओं के साथ माता को पुकारें और विधि-विधान से उनके 1000 नामों की स्तुति करें। आप स्वयं देखेंगे कि कैसे आपके जीवन के दुख सुख में बदल जाते हैं, बीमारियां स्वास्थ्य में बदल जाती हैं और शत्रु आपके सामने नतमस्तक हो जाते हैं। जय माता दी! जय भवानी!
श्री दुर्गा सहस्रनामावली: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. दुर्गा सहस्रनामावली और दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्र में क्या अंतर है?
‘सहस्रनाम स्तोत्र’ में माता के 1000 नामों को श्लोकों (छंदों) के रूप में गूंथा गया होता है, जिसे केवल पढ़ा जाता है। जबकि ‘सहस्रनामावली’ में हर नाम अलग-अलग होता है, जिसके आगे ‘ॐ’ और पीछे ‘नमः’ लगा होता है (जैसे ॐ दुर्गायै नमः)। इसका प्रयोग माता को 1000 बार पुष्प, कुमकुम या बेलपत्र अर्पित (अर्चन) करने के लिए किया जाता है।
2. दुर्गा सहस्रनामावली का पाठ करने का सबसे अच्छा दिन कौन सा है?
इस परम शक्तिशाली पाठ को करने के लिए चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिन सबसे श्रेष्ठ माने गए हैं। इसके अलावा आप हर महीने की अष्टमी, नवमी तिथि, या प्रत्येक शुक्रवार और मंगलवार को भी इसका पाठ कर सकते हैं।
3. माता दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए पाठ के समय कौन सा पुष्प अर्पित करना चाहिए?
माता दुर्गा को लाल रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए सहस्रनामावली का पाठ करते समय प्रत्येक नाम के साथ लाल गुड़हल (Hibiscus), लाल गुलाब या लाल कनेर का पुष्प अर्पित करना चाहिए। यदि फूल उपलब्ध न हों, तो लाल कुमकुम (सिंदूर) या अक्षत का प्रयोग किया जा सकता है।
4. क्या इस पाठ के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है?
यह सत्य है कि संस्कृत के श्लोकों का सही उच्चारण पूर्ण ध्वनि ऊर्जा (Vibrations) उत्पन्न करता है। परंतु यदि आपको संस्कृत नहीं आती है, तो आप धीरे-धीरे इसका अभ्यास कर सकते हैं। ईश्वर के दरबार में ‘भाव’ सर्वोपरि है। यदि आपका हृदय शुद्ध है और भक्ति सच्ची है, तो माता उच्चारण की छोटी-मोटी त्रुटियों को क्षमा कर देती हैं।
5. क्या पुरुष भी माता दुर्गा की सहस्रनामावली का पाठ कर सकते हैं?
जी हाँ, बिल्कुल! आदि शक्ति माता दुर्गा संपूर्ण चराचर जगत की माता हैं। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए स्त्री, पुरुष, वृद्ध या बच्चे—कोई भी व्यक्ति पूर्ण सात्विकता और पवित्रता के साथ इस सहस्रनामावली का पाठ कर सकता है।