इन्द्र सूक्तम् (संस्कृत) | Indra Suktam Lyrics in SanskritIt takes 1 minutes... to read this article !

इन्द्र सूक्तम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। यह वैदिक सूक्त इन्द्र देव को समर्पित है, जिसमें उनकी शक्ति, पराक्रम, विजय और दुष्टों के संहारक रूप की स्तुति की गई है।

इन्द्र सूक्तम् ऋग्वेद का एक महत्वपूर्ण वैदिक सूक्त है, जो देवताओं के राजा इन्द्र को समर्पित है। इसमें इन्द्र देव की शक्ति, पराक्रम, विजय और दुष्ट शक्तियों के नाशक स्वरूप का वर्णन किया गया है। इस लेख में इन्द्र सूक्तम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।

इन्द्र सूक्तं  | Indra Suktam

प्रधान्वस्य महतो महानि सत्य सत्यस्य करणानि वोचम् ।
त्रिकट केस्वपिवत् सतस्यास्य मदे अहिमिन्द्रो जघान ॥1॥

अवंशे धामस्तभायद्ब्रहन्तमा रोदसी अपृणदन्तरिक्षम् स ।
धारयत्पृथिवीं पप्रथच्च सोमस्य ता मद इन्द्रश्चकार ॥2॥

सद्येव प्राचो वि मियाय मानैर्वज्रेण खान्यतृणन्नदीनाम् ।
वथासृजत्पथिभिदीर्धमाथैः सोमस्य ता मद इन्द्रश्चकार ॥3॥

स प्रवोळहुन् परिगत्या दभीतेर्विश्वमधागायघमिद्धे अग्नौ ।
सं गोभिरश्वैरसृजद्रथेभिः सोमसय ता मद इन्द्रश्चकार ॥4॥

स ई महीं धुनिमेतोररम्णात्सौ अस्नात नृपारयत्स्वस्ति ।
त उत्सनाय रयिमभि प्रतस्थुः सोमस्य ता मद इन्द्रश्चकार ॥5॥

सोदञ्चं सिन्धुमरिणान्महित्वा वज्रेणान उषसः सं पिपेष ।
अजवसो जविनीभिर्विवृश्चन्त्सोमस्य ता मद इन्द्रश्चकार ॥6॥

स विद्धां अपगोहं कनीनामा विर्भवन्नुदतिष्ठत्परावृक ।
प्रति श्रोणः सथाद् व्यनगचष्ट सोमस्य ता मद इन्द्रष्चकार ॥7॥

भिनद्वमगिरोभिर्गुणानो विपर्वतस्य द्वंहितान्यैरत् ।
रिणग्रोधासि कृत्रिमाण्येषां सोमस्य ता मद इन्द्रश्चकार ॥8॥

स्वन्पेनाभ्युप्या चुमुरि धुनिञ्च जघन्थ दस्युं प्रदभीतिभावः ।
रम्भी चिदत्र विविदे हिरण्यं सोमस्य ता मद इन्द्रश्चकार ॥9॥

नूनं सा ते प्रति वरं जरिगे दहीयदिन्द्र दक्षिणा मधोनी ।
शिक्षा स्तोतृभ्यो माति घग्भगो नो बृहद्वदेम विदथे सुवीराः ॥10॥

॥ इति इन्द्र सूक्तं संपूर्ण ॥

इस प्रकार इन्द्र सूक्तम् वैदिक परंपरा में शक्ति, विजय और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा और निष्ठा के साथ इसके पाठ से जीवन में साहस, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

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