आ नो भद्राः सूक्तम् (संस्कृत) | Aa No Bhadrah Suktam Lyrics in SanskritIt takes 2 minutes... to read this article !

आ नो भद्राः सूक्तम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। यह वैदिक सूक्त ऋग्वेद से लिया गया है, जिसमें ईश्वर से शुभ विचार, कल्याणकारी बुद्धि और समृद्ध जीवन की प्रार्थना की गई है।

आ नो भद्राः सूक्तम् ऋग्वेद का एक अत्यंत प्रसिद्ध वैदिक सूक्त है, जिसमें ईश्वर से उत्तम विचार, कल्याणकारी दृष्टि और जीवन में शुभता की प्रार्थना की जाती है। यह सूक्त भारतीय वैदिक परंपरा में शांति और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इस लेख में आ नो भद्राः सूक्तम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।

आ नो भद्राः सूक्तं | Aano Bhadra: Suktam

आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः ।
देवा नोयथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवेदिवे ॥

देवानां भद्रा सुमतिर्ऋजूयतां देवानां रातिरभि नो नि वर्तताम् ।
देवानां सख्यमुप सेदिमा वयं देवा न आयुः प्र तिरन्तु जीवसे ॥

तान् पूर्वयानिविदाहूमहे वयंभगं मित्रमदितिं दक्षमस्रिधम् ।
अर्यमणंवरुणंसोममश्विना सरस्वती नः सुभगा मयस्करत् ।।

तन्नो वातो मयोभु वातु भेषजं तन्माता पृथिवी तत् पिता द्यौः ।
तद् ग्रावाणः सोमसुतो मयोभुवस्तदश्विना शृणुतं धिष्ण्या युवम् ॥

तमीशानं जगतस्तस्थुषस्पतिं धियंजिन्वमवसे हूमहे वयम् ।
पूषा नो यथा वेदसामसद् वृधे रक्षिता पायुरदब्धः स्वस्तये ॥

स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥

पृषदश्वा मरुतः पृश्निमातरः शुभंयावानो विदथेषु जग्मयः ।
अग्निजिह्वा मनवः सूरचक्षसो विश्वे नो देवा अवसा गमन्निह ॥

भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ।
स्थिरैरंगैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः ॥

शतमिन्नु शरदो अन्ति देवा यत्रा नश्चक्रा जरसं तनूनाम ।
पुत्रासो यत्र पितरो भवन्ति मा नो मध्या रीरिषतायुर्गन्तोः ॥

अदितिर्द्यौरदितिरन्तरिक्षमदितिर्माता स पिता स पुत्रः ।
विश्वेदेवा अदितिः पंचजना अदितिर्जातमदितिर्जनित्वम ॥

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:, पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: ।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि ॥

ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥

॥ इति आ नो भद्राः सूक्तं सम्पूर्ण ॥

इस प्रकार आ नो भद्राः सूक्तम् वैदिक साहित्य का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो जीवन में सकारात्मकता, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। श्रद्धा के साथ इसके पाठ से मन, बुद्धि और जीवन में शुभता का संचार होता है।

 
 

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