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गुप्त नवरात्रि में किस देवी की पूजा किस दिन करें? जानें पूरी लिस्ट (Ashadha Gupt Navratri 2026)It takes 12 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू धर्म में माता जगदम्बा की आराधना के लिए नवरात्रि का पर्व सबसे पवित्र और फलदायी माना जाता है। वर्ष में कुल चार नवरात्रियां आती हैं, जिनमें से दो ‘प्रकट’ (चैत्र और शारदीय) होती हैं और दो ‘गुप्त’ (माघ और आषाढ़)। प्रकट नवरात्रि में माता के 9 सात्विक स्वरूपों (नवदुर्गा) की पूजा सार्वजनिक रूप से की जाती है, जबकि ‘गुप्त नवरात्रि’ पूरी तरह से तांत्रिक साधना, 10 महाविद्याओं की रहस्यमयी पूजा और एकांत तपस्या का पर्व है।

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026 (बुधवार) से हो रहा है और इसका समापन 23 जुलाई 2026 (गुरुवार) को नवमी तिथि के साथ होगा।

जो लोग तंत्र-मंत्र, ज्योतिष या आध्यात्मिक साधनाओं में रुचि रखते हैं, उनके मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि “Ashadha Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में किस देवी की पूजा किस दिन करें?”। क्योंकि गुप्त नवरात्रि में नवदुर्गा की नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली 10 तांत्रिक देवियों (दस महाविद्याओं) की पूजा की जाती है।

इस विस्तृत लेख में हम आपको डे-बाय-डे (दिन के अनुसार) बताएंगे कि आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के 9 दिनों में किस महाविद्या की पूजा की जाती है, उनका स्वरूप कैसा है, पूजा से क्या लाभ मिलता है और उनका सिद्ध मंत्र क्या है।

9 दिन की नवरात्रि में 10 देवियों की पूजा कैसे?

इससे पहले कि हम दिन के अनुसार पूजा का विवरण जानें, यह समझना आवश्यक है कि नवरात्रि 9 दिन की होती है, लेकिन महाविद्याएं 10 हैं। ऐसे में 10 देवियों की पूजा कैसे संपन्न होती है?

शास्त्रों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में प्रतिपदा (पहले दिन) से लेकर अष्टमी (आठवें दिन) तक क्रमशः एक-एक महाविद्या की पूजा की जाती है। इसके बाद नवमी तिथि (नौवें दिन) को माता के अंतिम दो स्वरूपों (मां मातंगी और मां कमला) की पूजा एक साथ या नवमी-दशमी के संधिकाल में की जाती है। इस प्रकार 9 रातों की इस गुप्त साधना में 10 महाविद्याओं की आराधना पूर्ण हो जाती है।

Ashadha Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में किस देवी की पूजा किस दिन करें? (Day-by-Day Guide)

आइए विस्तार से जानते हैं 15 जुलाई 2026 से शुरू होने वाली इस गुप्त नवरात्रि में तिथियों के अनुसार 10 महाविद्याओं की साधना का क्रम:

पहला दिन (15 जुलाई 2026 – प्रतिपदा): मां काली की पूजा (Maa Kali)

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ब्रह्मांड की सबसे प्रथम और उग्र शक्ति ‘मां काली’ की साधना की जाती है।

  • स्वरूप और महत्व: मां काली समय, काल और मृत्यु की स्वामिनी हैं। इनका स्वरूप गहरा काला और भयानक है। अकाल मृत्यु के भय को दूर करने, काले जादू (Black Magic) को काटने और भयंकर से भयंकर शत्रुओं का नाश करने के लिए पहले दिन मां काली की गुप्त पूजा की जाती है।

  • क्या भोग लगाएं: माता को गुड़, काले तिल और लौंग का भोग अत्यंत प्रिय है।

  • शुभ रंग: लाल या काला (गृहस्थों को पूजा के समय काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए, वे लाल पहन सकते हैं)।

  • सिद्ध मंत्र: ॐ क्रीं कालिकायै नमः

दूसरा दिन (16 जुलाई 2026 – द्वितीया): मां तारा की पूजा (Maa Tara)

गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन दस महाविद्याओं में दूसरी शक्ति ‘मां तारा’ की उपासना की जाती है।

  • स्वरूप और महत्व: मां तारा का स्वरूप भी मां काली के समान ही उग्र है, लेकिन इनका वर्ण (रंग) नीला है। श्मशान में निवास करने वाली मां तारा साधक को हर प्रकार के घोर आर्थिक संकट और भयंकर कर्ज से मुक्ति (तारने) दिलाती हैं। वाक्-सिद्धि (बोली गई बात का सच होना) प्राप्त करने के लिए मां तारा की साधना अचूक है।

  • क्या भोग लगाएं: मां तारा को नारियल, मिश्री और सात्विक दूध की खीर का भोग लगाएं।

  • शुभ रंग: नीला या सफेद।

  • सिद्ध मंत्र: ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट

तीसरा दिन (17 जुलाई 2026 – तृतीया): मां त्रिपुर सुंदरी / षोडशी (Maa Shodashi)

तीसरे दिन माता के सबसे सुंदर और सौम्य तांत्रिक स्वरूप ‘मां त्रिपुर सुंदरी’ (जिन्हें षोडशी भी कहा जाता है) की पूजा होती है।

  • स्वरूप और महत्व: यह 16 वर्ष की अत्यंत खूबसूरत देवी हैं, जो तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) की सुंदरता और ऐश्वर्य का प्रतिनिधित्व करती हैं। शारीरिक आकर्षण, प्रेम विवाह में सफलता, सुखी दांपत्य जीवन और जीवन में हर प्रकार की सुख-सुविधा (Luxury) पाने के लिए इनकी साधना की जाती है।

  • क्या भोग लगाएं: माता को पंचामृत, शहद और लाल रंग के फलों (जैसे अनार, सेब) का भोग लगाएं।

  • शुभ रंग: गुलाबी या लाल।

  • सिद्ध मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः

चौथा दिन (18 जुलाई 2026 – चतुर्थी): मां भुवनेश्वरी की पूजा (Maa Bhuvaneshwari)

चतुर्थी तिथि के दिन संपूर्ण ब्रह्मांड की स्वामिनी ‘मां भुवनेश्वरी’ की आराधना की जाती है।

  • स्वरूप और महत्व: ‘भुवन’ का अर्थ है ब्रह्मांड। यह संपूर्ण सृष्टि का पालन करने वाली माता हैं। जिन लोगों को अपना मकान बनाना हो, अपार संपत्ति खरीदनी हो या राजनीति/नौकरी में सर्वोच्च पद और मान-सम्मान पाना हो, उनके लिए चौथे दिन की साधना अत्यंत फलदायी है।

  • क्या भोग लगाएं: माता को मखाने की खीर, मालपुआ और मिश्री का भोग अर्पित करें।

  • शुभ रंग: पीला या सफेद।

  • सिद्ध मंत्र: ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः

पांचवां दिन (19 जुलाई 2026 – पंचमी): मां छिन्नमस्ता की पूजा (Maa Chhinnamasta)

गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन माता के सबसे रहस्यमयी स्वरूप ‘मां छिन्नमस्ता’ की तांत्रिक साधना की जाती है।

  • स्वरूप और महत्व: इस स्वरूप में माता ने स्वयं अपना ही मस्तक (सिर) काट कर अपने बाएं हाथ में पकड़ा हुआ है और उनके कटे हुए गले से रक्त की धाराएं निकल रही हैं। यह स्वरूप अहंकार और काम-वासना (Lust) के नाश का प्रतीक है। कुण्डलिनी शक्ति को जाग्रत करने और नौकरी/व्यापार में आ रही भयंकर रुकावटों को जड़ से उखाड़ने के लिए अघोरी और साधक इनकी पूजा करते हैं।

  • क्या भोग लगाएं: गुड़, तिल के लड्डू और बताशे।

  • शुभ रंग: लाल या गहरा नारंगी।

  • सिद्ध मंत्र: श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हुं हुं फट् स्वाहा

छठा दिन (20 जुलाई 2026 – षष्ठी): मां त्रिपुर भैरवी की पूजा (Maa Tripura Bhairavi)

षष्ठी तिथि को विनाश और विध्वंस की देवी ‘मां त्रिपुर भैरवी’ की गुप्त पूजा की जाती है।

  • स्वरूप और महत्व: यह मां काली का ही एक रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप हैं। जिन लोगों के मन में हमेशा अनजाना डर (Phobia) रहता है, आत्मविश्वास की कमी है, या जिन्हें हमेशा दुर्घटनाओं का भय सताता है, उन्हें छठे दिन भैरवी माता की साधना करनी चाहिए। यह साधक को असीम साहस और निडरता प्रदान करती हैं।

  • क्या भोग लगाएं: माता को जलेबी, शहद और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।

  • शुभ रंग: लाल।

  • सिद्ध मंत्र: ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा

सातवां दिन (21 जुलाई 2026 – सप्तमी): मां धूमावती की पूजा (Maa Dhumavati)

सप्तमी तिथि के दिन दस महाविद्याओं की सातवीं शक्ति ‘मां धूमावती’ की आराधना का विधान है।

  • स्वरूप और महत्व: यह 10 महाविद्याओं में एकमात्र ऐसी देवी हैं जिनका कोई शिव (भैरव) नहीं है। यह ‘विधवा’ स्वरूप में पूजी जाती हैं और कौवे की सवारी करती हैं। जीवन से दरिद्रता, घोर दुर्भाग्य, बुरी नजर और असाध्य रोगों (गंभीर बीमारियों) का नाश करने के लिए मां धूमावती की साधना की जाती है।

  • क्या भोग लगाएं: माता को नमकीन चीजें, उड़द की दाल की खिचड़ी या पकौड़े का भोग लगाया जाता है (यह स्वरूप मीठे से अधिक नमकीन पसंद करता है)।

  • शुभ रंग: सलेटी (Grey) या काला।

  • सिद्ध मंत्र: धूं धूं धूमावती ठः ठः

आठवां दिन (22 जुलाई 2026 – अष्टमी): मां बगलामुखी की पूजा (Maa Bagalamukhi)

गुप्त नवरात्रि की महाअष्टमी के दिन स्तंभन की अधिष्ठात्री देवी ‘मां बगलामुखी’ की पूजा की जाती है। यह दिन तंत्र साधना के लिए सबसे विशेष होता है।

  • स्वरूप और महत्व: इन्हें ‘पीताम्बरा माता’ (पीले वस्त्रों वाली देवी) भी कहा जाता है। यदि आप पर कोई झूठा मुकदमा (Court case) चल रहा हो, दुश्मन हावी हो रहे हों, या आप राजनीति में विरोधियों को परास्त करना चाहते हैं, तो मां बगलामुखी की पूजा ‘ब्रह्मास्त्र’ का काम करती है। यह दुश्मनों की जुबान को ‘स्तंभित’ (बंद) कर देती हैं।

  • क्या भोग लगाएं: माता को केवल पीले रंग का भोग (जैसे बेसन का हलवा, केले, पीली मिठाई, पीले लड्डू) ही अर्पित करें।

  • शुभ रंग: पूर्ण रूप से पीला (Yellow)।

  • सिद्ध मंत्र: ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय, जिह्वां कीलय, बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा

नौवां दिन (23 जुलाई 2026 – नवमी): मां मातंगी और मां कमला की पूजा

नवमी तिथि (अंतिम दिन) गुप्त नवरात्रि का समापन दिवस होता है। इस दिन महाविद्या की 9वीं शक्ति ‘मां मातंगी’ और 10वीं शक्ति ‘मां कमला’ दोनों की आराधना की जाती है।

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मां मातंगी (Maa Matangi):

  • महत्व: इन्हें तांत्रिक सरस्वती या ‘चांडालिनी’ भी कहा जाता है। संगीत, कला, वाक्-चातुर्य, सम्मोहन (Vashikaran) और समाज में अपनी बातों का प्रभाव छोड़ने की सिद्धि पाने के लिए इनकी पूजा की जाती है।

  • भोग और मंत्र: माता को जूठे भोजन (उच्छिष्ट) या प्रसाद का भोग लगता है। मंत्र: ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा

मां कमला (Maa Kamala):

  • महत्व: यह माता लक्ष्मी का ही सर्वोच्च तांत्रिक स्वरूप हैं। जो व्यक्ति पीढ़ियों की दरिद्रता झेल रहा हो, यदि वह नवमी के दिन मां कमला की साधना कर ले, तो उसे छप्पर फाड़कर धन, व्यापार में वृद्धि और अखंड ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

  • भोग और मंत्र: मखाने की खीर और कमलगट्टे का हलवा। मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः

आम गृहस्थ 10 महाविद्याओं की पूजा कैसे करें? (Safe Puja Vidhi for Householders)

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है। 10 महाविद्याएं अत्यंत उग्र देवियां हैं। अघोरी और तांत्रिक इनकी पूजा ‘वामाचार’ (श्मशान में, बलि देकर) विधि से करते हैं, जो गृहस्थों के लिए सख्त वर्जित और खतरनाक है।

एक आम गृहस्थ को 15 जुलाई से शुरू हो रही गुप्त नवरात्रि में ‘दक्षिणाचार’ (सात्विक मार्ग) से इन देवियों की आराधना करनी चाहिए:

  1. नवार्ण मंत्र का जाप: 10 महाविद्याओं के अलग-अलग बीज मंत्रों के उच्चारण में यदि गलती हो जाए तो नुकसान हो सकता है। इसलिए गृहस्थों को 9 दिनों तक 10 महाविद्याओं का ध्यान करते हुए केवल एक ही मंत्र— “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का लाल चंदन की माला से जाप करना चाहिए। यह पूरी तरह सुरक्षित और 100% फलदायी है।

  2. दुर्गा सप्तशती का पाठ: प्रतिदिन रात के समय एकांत में बैठकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। यदि समय न हो तो केवल ‘सिद्ध कुंजिका स्तोत्र’ का पाठ करें।

  3. रात की पूजा (निशिता काल): गुप्त नवरात्रि में दिन के बजाय रात की पूजा का महत्व अधिक होता है। रात 10 बजे से लेकर 1 बजे के बीच पूजा और मंत्र जाप करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

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गुप्त नवरात्रि के 5 कड़े नियम (5 Strict Rules to Follow)

चूंकि आपने यह जान लिया है कि “Ashadha Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में किस देवी की पूजा किस दिन करें?”, तो अब आपको इसके कड़े नियमों को भी जान लेना चाहिए, अन्यथा पूजा खंडित हो सकती है:

  1. संपूर्ण गोपनीयता (Absolute Secrecy): तंत्र साधना का पहला नियम है कि आपकी पूजा, आपके मंत्र और आपके व्रत के बारे में आपके परिवार के बाहर किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए। दिखावा (Show-off) करने से सारी तांत्रिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।

  2. ब्रह्मचर्य का पालन: 15 जुलाई से 23 जुलाई तक शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है।

  3. सात्विक भोजन: इन 9 दिनों में घर के अंदर लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा (शराब) और अंडे का प्रवेश पूर्ण रूप से प्रतिबंधित होना चाहिए।

  4. क्रोध और चुगली से बचें: मंत्र जाप से शरीर में तीव्र ऊर्जा (Heat) पैदा होती है। यदि आप दिन में किसी पर क्रोध करते हैं या गालियां देते हैं, तो वह ऊर्जा नष्ट हो जाती है। मौन रहने का प्रयास करें।

  5. नाखून और बाल काटना वर्जित: पूरे गुप्त नवरात्रि के दौरान बाल काटना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटना शास्त्रों में अशुभ माना गया है।

“Ashadha Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में किस देवी की पूजा किस दिन करें?” — इस विस्तृत जानकारी के माध्यम से अब आपके सामने 9 दिनों की तांत्रिक साधना का पूरा रोडमैप स्पष्ट हो गया है।

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आषाढ़ मास की यह गुप्त नवरात्रि (15 जुलाई – 23 जुलाई 2026) आपके जीवन के सभी दुखों, बीमारियों, कर्ज और शत्रुओं को हमेशा के लिए समाप्त करने का एक ईश्वरीय अवसर है। आपको किसी श्मशान या तंत्र-मंत्र के खतरनाक मार्ग पर जाने की आवश्यकता नहीं है। अपने घर के एकांत में, पूर्ण पवित्रता और अखंड विश्वास के साथ, माता जगदम्बा के इन 10 स्वरूपों का सात्विक ध्यान करें। आपकी गुप्त और निस्वार्थ साधना से माता की असीम कृपा आप पर बरसेगी और आपके जीवन के हर असंभव कार्य संभव हो जाएंगे।

जय माता दी! जय दश महाविद्या!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 की शुरुआत किस तारीख से हो रही है?

साल 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई (बुधवार) को कलश स्थापना के साथ शुरू हो रही है और इसका समापन 23 जुलाई (गुरुवार) को होगा।

2. सामान्य नवरात्रि और गुप्त नवरात्रि में मुख्य अंतर क्या है?

सामान्य नवरात्रि में माता के 9 सात्विक स्वरूपों (नवदुर्गा) की सार्वजनिक पूजा होती है। जबकि गुप्त नवरात्रि में माता के 10 उग्र तांत्रिक स्वरूपों (दस महाविद्याओं) की पूजा पूरी तरह एकांत और रहस्यमयी (गुप्त) तरीके से की जाती है।

3. क्या मुझे 10 महाविद्याओं के अलग-अलग मंत्रों का जाप करना चाहिए?

यदि आपने किसी सिद्ध गुरु से दीक्षा ली है, तभी आपको महाविद्याओं के विशेष तांत्रिक बीज मंत्रों का जाप करना चाहिए। यदि आप सामान्य गृहस्थ हैं, तो आपको सभी 10 महाविद्याओं का ध्यान करते हुए केवल ‘नवार्ण मंत्र’ (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) का जाप करना चाहिए। यह पूरी तरह सुरक्षित है।

4. मां बगलामुखी की पूजा गुप्त नवरात्रि में किस दिन की जाती है?

दस महाविद्याओं की सूची में आठवें स्थान पर विराजमान स्तंभन की देवी मां बगलामुखी की पूजा गुप्त नवरात्रि के आठवें दिन (महाअष्टमी) को पीले वस्त्र पहनकर और पीला भोग लगाकर की जाती है।

5. क्या गुप्त नवरात्रि में भी नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है?

जी हां, किसी भी नवरात्रि का पूर्ण फल कन्या पूजन के बिना प्राप्त नहीं होता। 22 या 23 जुलाई (अष्टमी या नवमी) के दिन 9 छोटी कन्याओं को सात्विक भोजन कराकर और उन्हें दक्षिणा व श्रृंगार सामग्री भेंट कर अपना व्रत खोलना चाहिए।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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