Home Blog

निर्जला एकादशी 2026 पर इन 6 जगहों पर जलाएं दीपक, मां लक्ष्मी भर देंगी धन-धान्य से घरIt takes 13 minutes... to read this article !

सनातन धर्म में व्रतों के राजा ‘एकादशी’ का स्थान सबसे सर्वोच्च है और जब बात ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की ‘निर्जला एकादशी’ (Nirjala Ekadashi) की हो, तो इसका महत्व अनंत गुना बढ़ जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कल यानी 25 जून 2026 (गुरुवार) को यह महाव्रत रखा जाएगा।

इस एकादशी को ‘भीमसेनी एकादशी’ या ‘पांडव एकादशी’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति साल भर की 24 एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, यदि वह केवल इस एक निर्जला एकादशी का उपवास पूर्ण श्रद्धा से कर ले, तो उसे सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। यह व्रत भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है, लेकिन शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि जहां भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं, वहां धन और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी स्वयं दौड़ी चली आती हैं।

धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, एकादशी की शाम (गोधूलि बेला) तंत्र-मंत्र, साधना और धन प्राप्ति के उपायों के लिए सबसे सिद्ध समय होता है। यदि आप आर्थिक तंगी (Financial Crisis), कर्ज या व्यापार में घाटे से परेशान हैं, तो आज का यह विशेष लेख आपके लिए है।

ज्योतिष शास्त्र में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि निर्जला एकादशी पर इन 6 जगहों पर जलाएं दीपक, मां लक्ष्मी भर देंगी धन-धान्य से घर। इस विस्तृत लेख में, हम आपको बताएंगे कि वे 6 पवित्र स्थान कौन से हैं, दीपक किस दिशा में जलाना चाहिए, किस तेल या घी का प्रयोग करना चाहिए और दीपक जलाने के अचूक नियम क्या हैं।

निर्जला एकादशी पर ‘दीपक’ जलाने का इतना महत्व क्यों है?

सनातन धर्म में अग्नि (Fire) को अत्यंत पवित्र और देवताओं का मुख माना गया है। दीपक की लौ अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान, सकारात्मकता और ऊर्जा का प्रकाश फैलाती है।

  • सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश: गोधूलि बेला (शाम का समय) वह समय होता है जब दिन और रात मिल रहे होते हैं। इस समय नकारात्मक शक्तियां हावी होने का प्रयास करती हैं। घर में दीपक जलाने से एक सुरक्षा चक्र (Aura) बन जाता है जो दरिद्रता (Poverty) को घर में प्रवेश नहीं करने देता।

  • माता लक्ष्मी का आगमन: माता लक्ष्मी को प्रकाश अत्यंत प्रिय है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस घर के मुख्य द्वार और आंगन में एकादशी की शाम को दीपक जलता है, माता लक्ष्मी उस घर को अपना स्थायी निवास बना लेती हैं।

  • पितरों का आशीर्वाद: एकादशी पर जलाया गया दीपक न केवल देवताओं को बल्कि हमारे पूर्वजों (पितरों) को भी मार्ग दिखाता है, जिससे उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।

निर्जला एकादशी पर इन 6 जगहों पर जलाएं दीपक, मां लक्ष्मी भर देंगी धन-धान्य से घर (The 6 Sacred Places)

आइए विस्तार से जानते हैं घर और आस-पास की उन 6 विशेष जगहों के बारे में, जहां 25 जून 2026 की शाम को आपको दीपक अवश्य जलाना चाहिए:

1. घर का मुख्य द्वार (Main Entrance) – सौभाग्य का प्रवेश द्वार

घर का मुख्य द्वार केवल आपके और अतिथियों के प्रवेश का मार्ग नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा और माता लक्ष्मी के आगमन का भी सबसे मुख्य मार्ग है।

  • कैसे जलाएं: एकादशी की शाम सूर्यास्त के समय घर के मुख्य दरवाजे को अच्छी तरह साफ करें (वहां पानी का छिड़काव करें)।

  • दरवाजे के दोनों ओर (दाएं और बाएं) गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल के दो दीपक जलाएं।

  • दिशा और बत्ती: दीपक की लौ पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होनी चाहिए। धन वृद्धि के लिए हमेशा ‘लंबी बत्ती’ (लंबे सूत की बत्ती) का प्रयोग करें।

  • क्या लाभ होगा: मुख्य द्वार पर दीपक देखकर माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर में प्रवेश करती हैं। यह आपके घर से दरिद्रता और दुर्भाग्य को हमेशा के लिए बाहर कर देता है।

2. तुलसी का पौधा (Tulsi Plant) – भगवान विष्णु की प्राण वल्लभा

सनातन धर्म में कोई भी एकादशी बिना तुलसी दल और तुलसी की पूजा के पूर्ण नहीं मानी जाती। माता तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं और उन्हें साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है।

  • कैसे जलाएं: शाम के समय तुलसी के पौधे (तुलसी चौरे) के पास सफाई करके एक आसन बिछाएं और उस पर एक शुद्ध घी का दीपक जलाएं।

  • ध्यान रखने योग्य नियम: दीपक को कभी भी सीधे जमीन पर या तुलसी के गमले के बिल्कुल अंदर न रखें। दीपक के नीचे थोड़े से साबुत चावल (अक्षत) या फूलों की पंखुड़ियां अवश्य रखें। एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को स्पर्श करना वर्जित होता है, इसलिए दूर से ही दीपक दिखाकर आरती करें।

  • क्या लाभ होगा: तुलसी के पास दीपक जलाने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और भगवान श्री हरि विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी का अखंड आशीर्वाद प्राप्त होता है।

3. पीने के पानी का स्थान (Near the Earthen Pot/Water Source)

‘निर्जला एकादशी’ का मुख्य तत्व ही ‘जल’ (पानी) का त्याग है। इस व्रत में बिना पानी पिए तपस्या की जाती है, इसलिए इस दिन ‘जल तत्व’ और जल के स्थान का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। वास्तु शास्त्र में जल के स्थान को चंद्रमा और माता लक्ष्मी का स्थान माना गया है।

  • कैसे जलाएं: आपके घर में जहां भी पीने का पानी रखा जाता है (जैसे मटका, सुराही, या किचन में पानी का फिल्टर), वहां शाम के समय एक तिल के तेल का दीपक जलाएं।

  • क्या लाभ होगा: जल के स्थान पर प्रकाश करने से राहु और केतु के दोष शांत होते हैं। यह घर के सदस्यों को गंभीर बीमारियों से बचाता है और आपके घर में अन्न तथा धन की कभी कमी नहीं होने देता।

4. घर का मंदिर (Pooja Room / Isht Devata)

घर का पूजा स्थल वह जगह है जहां से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Vibrations) का संचार होता है। निर्जला एकादशी की शाम अपने इष्ट देवता और भगवान विष्णु-लक्ष्मी के सामने विशेष दीपक जलाना अनिवार्य है।

  • कैसे जलाएं: घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने ‘गाय के शुद्ध घी’ का एक बड़ा दीपक जलाएं (जो कम से कम 2-3 घंटे तक जले)।

  • इस दीपक की बत्ती ‘गोल’ (Gol Bati) होनी चाहिए, जो ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

  • विशेष उपाय: इस दीपक में चुटकी भर ‘हल्दी’ या थोड़ी सी ‘केसर’ डाल दें। विष्णु जी को पीला रंग प्रिय है।

  • क्या लाभ होगा: यह दीपक सीधे बैकुंठ लोक तक आपकी प्रार्थना पहुंचाता है। आपके व्यापार और नौकरी में आ रही हर रुकावट चमत्कारिक रूप से दूर हो जाती है।

5. पीपल का वृक्ष (Under the Peepal Tree)

सनातन धर्म में पीपल के वृक्ष को देववृक्ष माना गया है। गीता में भगवान कृष्ण ने स्वयं कहा है— “वृक्षों में मैं पीपल हूं”। मान्यता है कि पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास होता है, और शनिवार तथा एकादशी के दिन माता लक्ष्मी स्वयं पीपल के वृक्ष पर निवास करती हैं।

  • कैसे जलाएं: 25 जून को शाम के समय किसी नजदीक के मंदिर या सार्वजनिक स्थान पर लगे पीपल के पेड़ के पास जाएं।

  • जड़ में थोड़ा सा मीठा जल (जल में चीनी या बताशा डालकर) अर्पित करें और वहां सरसों के तेल या तिल के तेल का एक दीपक जलाएं।

  • क्या लाभ होगा: पीपल के नीचे दीपक जलाने से पितृ दोष, शनि दोष और जीवन के सभी प्रकार के कष्ट शांत हो जाते हैं। जो धन कई सालों से फंसा हुआ है, वह वापस मिल जाता है और घर में अपार धन-संपदा का आगमन होता है।

6. घर का ईशान कोण (Northeast Corner)

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) देवताओं और विशेषकर भगवान कुबेर (धन के देवता) और भगवान शिव का स्थान माना जाता है।

  • कैसे जलाएं: घर के उत्तर-पूर्व कोने को अच्छी तरह साफ करें। एक छोटी सी रंगोली बनाएं या स्वास्तिक बनाएं।

  • इसके ऊपर एक लाल कपड़े का छोटा सा टुकड़ा बिछाएं, थोड़े से चावल रखें और उस पर ‘गाय के घी’ का चौमुखी दीपक (चार बत्तियों वाला दीपक) जलाएं।

  • क्या लाभ होगा: चारों दिशाओं में जलने वाला यह दीपक घर की नकारात्मक ऊर्जा को भस्म कर देता है। यह उपाय घर में छप्पर फाड़कर पैसा लाता है और घर के सदस्यों को उनके कार्यक्षेत्र (Career) में अप्रत्याशित (Unexpected) सफलता दिलाता है।

ये भी पढ़ें:  How to Check Original Tulsi Mala: असली तुलसी माला की पहचान कैसे करें? इन 8 तरीकों से पहचानें कहीं आप ठग तो नहीं रहे!

दीपक जलाते समय भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां (Strict Rules for Lighting Diyas)

यह बात सत्य है कि “निर्जला एकादशी पर इन 6 जगहों पर जलाएं दीपक, मां लक्ष्मी भर देंगी धन-धान्य से घर”, लेकिन यदि आप दीपक जलाते समय वास्तु और शास्त्रों के नियमों का पालन नहीं करते, तो इसका फल प्राप्त नहीं होता। इन नियमों का कड़ाई से पालन करें:

1. खंडित दीपक का प्रयोग वर्जित (Do not use broken Diyas)

दीपक कभी भी टूटा या चटका (Cracked) हुआ नहीं होना चाहिए। टूटा हुआ दीपक दरिद्रता का प्रतीक है और इससे पूजा खंडित मानी जाती है। हमेशा साबुत और साफ मिट्टी के दीपक, पीतल, या चांदी के दीपक का ही प्रयोग करें। यदि मिट्टी का दीपक इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसे पहले पानी में भिगोकर सुखा लें।

2. दीपक के नीचे आसन (Base for the Lamp)

दीपक को कभी भी सीधे खाली जमीन या फर्श पर नहीं रखना चाहिए। यह अपशकुन माना जाता है। दीपक के नीचे हमेशा किसी न किसी चीज का ‘आसन’ दें— जैसे अक्षत (साबुत चावल), गेंदे या गुलाब के फूलों की पंखुड़ियां, या गेहूं के दाने।

3. बत्ती का सही चुनाव (Long Wick vs. Round Wick)

  • गोल बत्ती (Round Wick): गोल बत्ती का प्रयोग हमेशा ब्रह्मा, विष्णु, महेश, इष्ट देवता और तुलसी माता के लिए किया जाता है। यह स्थिरता का प्रतीक है।

  • लंबी बत्ती (Long Wick): लंबी बत्ती का प्रयोग धन वृद्धि के लिए किया जाता है। माता लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा और मुख्य द्वार पर हमेशा लंबी बत्ती (रुई या कलावे की) ही लगानी चाहिए।

4. लौ की दिशा (Direction of the Flame)

दीपक की लौ की दिशा का विशेष महत्व होता है:

  • पूर्व (East) की ओर: लौ पूर्व दिशा की ओर रखने से आयु बढ़ती है और बीमारियों का नाश होता है।

  • उत्तर (North) की ओर: लौ उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) की ओर रखने से अपार धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।

  • दक्षिण (South) की ओर: यह यम की दिशा है। एकादशी के दिन घर के अंदर लौ दक्षिण दिशा की ओर भूलकर भी नहीं रखनी चाहिए (यह केवल पितृ पक्ष में या विशेष तांत्रिक पूजा में रखी जाती है)।

5. एक दीपक से दूसरा दीपक न जलाएं

कई बार लोग सुविधा के लिए एक जलते हुए दीपक से दूसरा दीपक जला लेते हैं। शास्त्रों में इसे बहुत बड़ा दोष माना गया है। ऐसा करने से व्यक्ति कर्जे में डूब जाता है। हर दीपक को माचिस की अलग तीली या एक अलग मोमबत्ती (अगरबत्ती) की मदद से ही जलाना चाहिए।

दीपक जलाते समय इस महा-मंत्र का करें जाप (Mantra for Lighting Diya)

जब भी आप एकादशी की शाम घर में या बाहर दीपक जलाएं, तो अपने मन को शांत रखें, माता लक्ष्मी का ध्यान करें और दीपक प्रज्वलित करते समय इस पवित्र वैदिक मंत्र का उच्चारण अवश्य करें:

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥

(अर्थ: हे दीप ज्योति! आप शुभ करने वाली, कल्याण करने वाली, आरोग्य और धन-संपदा देने वाली हैं। मेरे शत्रुओं की बुरी बुद्धि का विनाश करने वाली दीप ज्योति को मेरा नमस्कार है। दीप ज्योति परब्रह्म और जनार्दन (विष्णु) स्वरूप है। मेरे सभी पापों का हरण करने वाली दीप ज्योति को मैं नमन करता हूँ।)

निर्जला एकादशी पर धन प्राप्ति के 3 अचूक टोटके (Secret Remedies for Wealth)

दीपक जलाने के अलावा, यदि आप 25 जून 2026 की रात को इन 3 सरल ‘महा-उपायों’ को कर लें, तो आपकी आर्थिक स्थिति रातों-रात बदल सकती है:

  1. लौंग और कपूर का उपाय: एकादशी की रात 10 बजे के आसपास एक मिट्टी के दीये में 2 टिकिया कपूर और 2 साबुत लौंग (फूल वाली) रखकर जलाएं। इसका धुआं पूरे घर में घुमाएं। यह घर से हर प्रकार के वास्तु दोष, नजर दोष और दरिद्रता को जलाकर खाक कर देता है।

  2. पीली कौड़ी का उपाय: घर के मंदिर में 5 पीली कौड़ियां और 5 गोमती चक्र माता लक्ष्मी के सामने रखें। इन पर केसर का तिलक करें। रात भर इन्हें वहीं रहने दें। अगले दिन सुबह (पारण के समय) इन्हें एक लाल रंग के रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी (Cash box) या अलमारी में रख दें। धन का प्रवाह तेज हो जाएगा।

  3. श्री सूक्तम का पाठ: जो व्यक्ति निर्जला एकादशी की रात 11 से 12 बजे के बीच एकांत में बैठकर घी का दीपक जलाता है और माता लक्ष्मी के सामने ‘श्री सूक्तम’ (Sri Suktam) का 11 बार पाठ करता है, उसकी सात पीढ़ियां कभी गरीबी नहीं देखतीं।

सनातन धर्म में हमारे ऋषि-मुनियों ने जो नियम बनाए हैं, वे केवल कर्मकांड नहीं हैं, बल्कि उनके पीछे गहरा विज्ञान और ब्रह्मांड की ऊर्जा का रहस्य छिपा है।

इस लेख का मूल विषय “निर्जला एकादशी पर इन 6 जगहों पर जलाएं दीपक, मां लक्ष्मी भर देंगी धन-धान्य से घर” इसी आध्यात्मिक विज्ञान पर आधारित है। 25 जून 2026 की इस निर्जला एकादशी को एक साधारण दिन न समझें। यह आपके तप, त्याग और भगवान श्री हरि के प्रति आपके समर्पण की परीक्षा का दिन है।

जब आप भयंकर गर्मी में बिना जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं और शाम के समय पूर्ण पवित्रता के साथ इन 6 स्थानों (मुख्य द्वार, तुलसी, जल स्थान, मंदिर, पीपल और ईशान कोण) पर दीपक प्रज्वलित करते हैं, तो आपकी वह आध्यात्मिक ऊर्जा ब्रह्मांड को प्रज्वलित कर देती है। माता लक्ष्मी आपके द्वार पर खींची चली आती हैं। इस पावन अवसर पर बताए गए नियमों के अनुसार दीपक जलाएं, और देखें कि कैसे आपके जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और आपका घर सुख, शांति और अपार धन-धान्य से भर जाता है।

जय श्री हरि! जय माता लक्ष्मी!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. साल 2026 में निर्जला एकादशी कब मनाई जाएगी?

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में ज्येष्ठ मास की निर्जला (भीमसेनी) एकादशी का महाव्रत 25 जून (गुरुवार) को रखा जाएगा।

2. मुख्य द्वार पर दीपक किस समय जलाना सबसे उत्तम होता है?

मुख्य द्वार पर दीपक जलाने का सबसे उत्तम समय ‘गोधूलि बेला’ (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय, लगभग शाम 6:30 से 7:30 बजे के बीच) होता है। इसी समय माता लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं।

3. क्या हम सरसों के तेल का दीपक घर के अंदर जला सकते हैं?

घर के मंदिर में या इष्ट देवता के सामने मुख्य रूप से ‘गाय के घी’ या ‘तिल के तेल’ का ही दीपक जलाना चाहिए। सरसों के तेल का दीपक मुख्य रूप से शनिदेव, भैरव बाबा या पीपल के वृक्ष के नीचे जलाया जाता है। मुख्य द्वार पर भी आप तिल के तेल का दीपक जला सकते हैं।

4. यदि घर में पीपल का पेड़ न हो तो क्या करें?

पीपल का पेड़ आमतौर पर घरों में नहीं लगाया जाता। आपको दीपक जलाने के लिए अपने घर के आस-पास किसी भी मंदिर या सार्वजनिक स्थान पर लगे पीपल के वृक्ष के पास जाना चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो आप घर के ईशान कोण में शिवजी का ध्यान कर दीपक जला सकते हैं।

5. क्या मासिक धर्म (Periods) में महिलाएं एकादशी पर दीपक जला सकती हैं?

शास्त्रों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को भगवान की प्रतिमा, मंदिर या तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए। इस दौरान घर का कोई अन्य सदस्य इन 6 जगहों पर दीपक जला सकता है। महिलाएं दूर बैठकर केवल भगवान के मंत्रों का मानसिक जाप कर सकती हैं।

6. चौमुखी दीपक (4 बत्तियों वाला दीया) जलाने का क्या अर्थ है?

ईशान कोण में जलाए जाने वाले चौमुखी दीपक का अर्थ है कि माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की कृपा चारों दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) से घर में प्रवेश करे। यह उपाय धन को तेजी से आकर्षित करने के लिए किया जाता है।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

error: Content is protected !!