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Bheru Poonam 2026: कब है भेरू पूनम? जानें Date, Puja Vidhi & Religious SignificanceIt takes 12 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू धर्म में ‘पूर्णिमा’ (Purnima) की तिथि को अत्यंत शुभ, पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है, जो मन की शांति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है। इसी कड़ी में, जब बात भगवान शिव के रुद्रावतार ‘भैरव नाथ’ (जिन्हें लोकभाषा में भेरू बाबा या भेरू जी कहा जाता है) की आती है, तो उनके भक्तों के लिए पूर्णिमा का दिन किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होता। इस विशेष दिन को ‘भेरू पूनम’ (Bheru Poonam) के नाम से जाना जाता है।

राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा के कई हिस्सों में भेरू बाबा को कुलदेवता (Kuldevta) या ग्राम देवता के रूप में पूजा जाता है [4]। नाकोड़ा भेरूजी (Nakoda Bheruji), कुहाड़ा (कोटपूतली) के भेरू बाबा, उज्जैन के काल भैरव और रेवाड़ी के बासदूदा भैरव मंदिर में हर पूर्णिमा पर भक्तों का विशाल जनसैलाब उमड़ता है [2, 3, 4]। जो लोग भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र की बाधाओं, व्यापार में घाटे या अनजाने भय से परेशान हैं, उनके लिए ‘भेरू पूनम’ का व्रत और दर्शन संजीवनी का कार्य करता है।

यदि आप भी भेरू बाबा के भक्त हैं और यह जानना चाहते हैं कि “Bheru Poonam 2026: कब है भेरू पूनम? जानें Date, Puja Vidhi & Religious Significance”, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। इस विस्तृत और ज्ञानवर्धक लेख में हम आपको साल 2026 में पड़ने वाली भेरू पूनम की सभी तिथियों, पूजा की सटीक विधि, शक्तिशाली मंत्रों और इसके गहरे धार्मिक महत्व के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे।

1. भेरू पूनम क्या है? (What is Bheru Poonam?)

हिंदू पंचांग के अनुसार, एक वर्ष में 12 (या अधिक मास होने पर 13) पूर्णिमा तिथियां आती हैं। वैसे तो भगवान भैरव की मुख्य पूजा ‘कालभैरव अष्टमी’ (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी) को होती है, लेकिन लोक परंपराओं और विशेष रूप से राजस्थान व गुजरात के मंदिरों में हर महीने की पूर्णिमा को भेरू बाबा के दरबार में विशेष ‘जागरण’, ‘हवन’ और ‘महाप्रसादी’ का आयोजन होता है [4]।

पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की रोशनी अंधकार को मिटाती है, ठीक उसी प्रकार भेरू बाबा अपने भक्तों के जीवन से भय, दरिद्रता और संकटों का अंधकार मिटाते हैं। इसलिए हर महीने की पूर्णिमा को ‘भेरू पूनम’ (Bhairav Purnima) के रूप में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। कई भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर भेरू पूनम के दिन पैदल यात्रा (Paidal Yatra) करके मंदिर पहुंचते हैं और ध्वजा (निशान) चढ़ाते हैं।

2. Bheru Poonam 2026 Date: साल 2026 में कब-कब है भेरू पूनम?

चूंकि हर महीने की पूर्णिमा को भेरू पूनम के रूप में मनाया जाता है, इसलिए साल 2026 में भेरू बाबा के भक्तों के लिए कई शुभ अवसर आएंगे। वर्ष 2026 का पूर्णिमा कैलेंडर (Purnima Calendar 2026) इस प्रकार है:

  • पौष पूर्णिमा: 3 जनवरी 2026 (शनिवार)

  • माघ पूर्णिमा: 1 फरवरी 2026 (रविवार)

  • फाल्गुन पूर्णिमा (होली): 3 मार्च 2026 (मंगलवार)

  • चैत्र पूर्णिमा: 2 अप्रैल 2026 (गुरुवार) — (चैत्र महीने की इस पूनम पर भेरू मंदिरों में सबसे विशाल लक्खी मेले लगते हैं)

  • वैशाख पूर्णिमा: 1 मई 2026 (शुक्रवार)

  • ज्येष्ठ पूर्णिमा: 31 मई 2026 (रविवार)

  • आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा): 29 जून 2026 (सोमवार)

  • श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन): 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)

  • भाद्रपद पूर्णिमा: 26 सितंबर 2026 (शनिवार)

  • आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा): 25 अक्टूबर 2026 (रविवार)

  • कार्तिक पूर्णिमा: 24 नवंबर 2026 (मंगलवार) — (यह दिन दीपदान और भेरू पूजा के लिए अत्यंत चमत्कारी माना जाता है)

  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा: 23 दिसंबर 2026 (बुधवार)

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नोट: इनमें से चैत्र पूनम (2 अप्रैल 2026) और कार्तिक पूनम (24 नवंबर 2026) को सबसे बड़ी ‘भेरू पूनम’ माना जाता है। इन तिथियों पर आप अपने घर या पास के किसी भी भैरव मंदिर में विशेष अनुष्ठान कर सकते हैं।

3. भेरू पूनम का धार्मिक महत्व (Religious Significance of Bheru Poonam)

भगवान शिव ने अपने अंश से भैरव को उत्पन्न किया था। शिव पुराण के अनुसार, भैरव को काशी का कोतवाल (रक्षक) कहा गया है। “Bheru Poonam 2026: कब है भेरू पूनम? जानें Date, Puja Vidhi & Religious Significance” के इस खंड में आइए समझते हैं कि आखिर भेरू पूनम का इतना अधिक महत्व क्यों है:

I. भय और अकाल मृत्यु से रक्षा (Protection from Fear & Death)

भैरव शब्द का अर्थ ही है— ‘भय का हरण करने वाला’। भेरू पूनम के दिन जो भक्त बाबा के दर्शन करता है और उन्हें मीठे रोट (Roath) या चूरमे का भोग लगाता है, उसके जीवन से अज्ञात भय, दुर्घटनाओं का डर और अकाल मृत्यु का संकट हमेशा के लिए टल जाता है।

II. व्यापार और आर्थिक उन्नति (Business & Prosperity)

नाकोड़ा भेरूजी (जैन और हिंदू दोनों धर्मों में पूजनीय) के दरबार में हर पूनम को व्यापारियों की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि भेरू पूनम के दिन बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने और प्रसाद चढ़ाने से व्यापार में आ रही सभी रुकावटें दूर होती हैं, और धन का भंडार कभी खाली नहीं होता।

III. तंत्र-मंत्र और बुरी नजर से मुक्ति (Removal of Black Magic)

पूर्णिमा की रात को नकारात्मक शक्तियां (Negative Energies) सक्रिय होने का प्रयास करती हैं। लेकिन भेरू बाबा को तंत्र का अधिपति माना गया है। भेरू पूनम के दिन उनके निमित्त सरसों के तेल का चौमुखा (चार मुख वाला) दीपक जलाने से घर के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बन जाता है, जिसे कोई भी बुरी नजर, टोना-टोटका या तांत्रिक क्रिया भेद नहीं सकती।

IV. मुंडन और जात-जडूला संस्कार

राजस्थान और हरियाणा के ग्रामीण अंचलों में भेरू बाबा कुलदेवता के रूप में पूजे जाते हैं। जब घर में बच्चे का जन्म होता है या विवाह होता है, तो सबसे पहली ‘जात’ (नवदंपति का दर्शन) और बच्चे का ‘जडूला’ (पहला मुंडन) भेरू पूनम के दिन ही बाबा के मंदिर में जाकर किया जाता है [4]।

4. भेरू पूनम पूजा विधि (Bheru Poonam Puja Vidhi)

भेरू बाबा की पूजा अत्यंत सरल है; वे केवल भक्तों के सच्चे भाव के भूखे हैं। यदि आप 2026 की भेरू पूनम पर घर पर या मंदिर में पूजा करना चाहते हैं, तो शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार यह ‘पूजा विधि’ अपनाएं:

पूजा की तैयारी और सामग्री (Puja Samagri)

  • भेरू बाबा की तस्वीर या मूर्ति (गृहस्थों को हमेशा ‘बटुक भैरव’ यानी उनके बाल स्वरूप की ही तस्वीर रखनी चाहिए)।

  • एक लकड़ी की चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल या काला कपड़ा।

  • सरसों का तेल या तिल का तेल और रूई की बत्ती।

  • सिंदूर (चमेली के तेल में मिला हुआ), कुमकुम, अक्षत (चावल) और लाल फूल (गुलाब या गुड़हल)।

  • भोग के लिए: चूरमा, मीठे पुए (मालपुआ), जलेबी, इमरती, या गुड़-चने का प्रसाद।

  • काले तिल, उड़द की दाल और एक नींबू।

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घर पर पूजा करने की चरणबद्ध विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

  1. स्नान और पवित्रीकरण: भेरू पूनम की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (लाल या पीले रंग के) धारण करें।

  2. मूर्ति स्थापना: पूजा स्थल या पूर्व दिशा की ओर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भेरू बाबा की तस्वीर स्थापित करें। साथ में भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर अवश्य रखें, क्योंकि शिव की आज्ञा के बिना भैरव की पूजा पूर्ण नहीं होती।

  3. दीपक प्रज्वलित करना: बाबा के सामने सरसों के तेल का एक बड़ा ‘चौमुखा दीपक’ (जिसमें चारों दिशाओं में बत्ती हो) जलाएं। यह दीपक घर की चारों दिशाओं से रक्षा का प्रतीक है।

  4. तिलक और पुष्पांजलि: भेरू जी को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला (या केवल तिलक) अर्पित करें। लाल फूल और अक्षत चढ़ाएं।

  5. भोग अर्पण: भेरू बाबा को मीठा बहुत पसंद है। घर में शुद्ध घी से बना चूरमा, बाटी या जलेबी का भोग लगाएं।

  6. मंत्र जाप और चालीसा: रुद्राक्ष की माला से बाबा के मंत्रों का जाप करें (मंत्र नीचे दिए गए हैं)। इसके बाद पूरी श्रद्धा से ‘भैरव चालीसा’ (Bhairav Chalisa) का पाठ करें।

  7. आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में कर्पूर और दीपक से बाबा की आरती उतारें। पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और अपने परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।

5. भेरू बाबा के शक्तिशाली मंत्र (Powerful Mantras for Bheru Poonam)

भेरू पूनम के दिन मंत्रों का जाप करने से उनकी सिद्धि बहुत जल्दी प्राप्त होती है। गृहस्थ लोगों को हमेशा सात्विक और सरल मंत्रों का ही जाप करना चाहिए:

  1. भैरव मूल मंत्र (सभी संकटों के नाश के लिए):

    “ॐ काल भैरवाय नमः” (Om Kaal Bhairavaya Namah)

  2. बटुक भैरव मंत्र (शीघ्र कृपा और धन प्राप्ति के लिए):

    “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा”

  3. शत्रु बाधा निवारण मंत्र:

    “ॐ भ्रं कालभैरवाय फट्”

नियम: इन मंत्रों का जाप भेरू पूनम की शाम को सूर्यास्त के बाद (प्रदोष काल या रात्रि में) रुद्राक्ष की माला से कम से कम 108 बार (एक माला) करना सर्वोत्तम रहता है।

6. घर पर सात्विक पूजा या तांत्रिक पूजा? (Sattvic vs Tantric Worship)

भेरू बाबा को लेकर समाज में कई भ्रांतियां हैं। कुछ मंदिरों (जैसे उज्जैन के काल भैरव या रेवाड़ी के बासदूदा मेले में) भेरू बाबा को मदिरा (शराब) और तामसिक चीजों का भोग लगाया जाता है [2, 4]। लेकिन आपको यह समझना होगा कि वह ‘वामाचार’ या तांत्रिक विधि है, जो केवल विशेष मंदिरों, अघोरियों और सिद्ध पुजारियों तक सीमित है।

एक आम गृहस्थ (Family person) को भूलकर भी अपने घर में भेरू बाबा को मदिरा (शराब) या कोई भी तामसिक वस्तु नहीं चढ़ानी चाहिए। गृहस्थों को भगवान भैरव के ‘बटुक भैरव’ (बालक रूप) की ‘दक्षिणाचार’ (सात्विक) विधि से पूजा करनी चाहिए। सात्विक पूजा में बाबा को केवल पंचामृत, दूध, फल, फूल, चूरमा, जलेबी और सात्विक भोजन का ही भोग लगता है। बाबा बालक रूप में इसी सात्विक भोग से सर्वाधिक प्रसन्न होते हैं।

7. भेरू पूनम पर किए जाने वाले विशेष और अचूक उपाय (Special Remedies)

यदि आपके जीवन में कोई विशेष समस्या चल रही है, तो 2026 की भेरू पूनम पर आप ये छोटे लेकिन अचूक उपाय (Upay) कर सकते हैं:

  • रोग और बीमारी से मुक्ति के लिए: भेरू पूनम की शाम को सवा किलो जलेबी या इमरती लें और उसे किसी काले कुत्ते (Black Dog) को खिला दें। कुत्ता भेरू बाबा का वाहन माना जाता है। इसे खिलाने से असाध्य रोग भी ठीक होने लगते हैं।

  • भय और नजर दोष दूर करने के लिए: एक काला धागा लें। भेरू पूनम के दिन उसे बाबा के चरणों में रखें, उस पर थोड़ा सा सिंदूर लगाएं, और फिर उसे अपने या अपने बच्चे के दाहिने हाथ या गले में बांध लें। यह धागा एक अभेद्य सुरक्षा कवच बन जाता है।

  • अटके हुए काम पूरे करने के लिए: भेरू पूनम के दिन एक साबुत नींबू (बिना दाग वाला) लें। उस पर कुमकुम से अपनी मनोकामना लिखें और उसे भेरू जी के मंदिर में अर्पित कर दें। आपका अटका हुआ काम जल्द ही बन जाएगा।

  • आर्थिक तंगी दूर करने के लिए: पूर्णिमा की रात को अपने घर के मुख्य दरवाजे के बाहर (चौखट पर) सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश वर्जित हो जाता है और माता लक्ष्मी का आगमन होता है।

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8. भारत में भेरू बाबा के प्रसिद्ध मंदिर और मेले (Famous Bheru Temples & Melas)

भेरू पूनम का असली रंग भारत के इन प्रसिद्ध मंदिरों में देखने को मिलता है। यदि आप 2026 में दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो यहाँ अवश्य जाएं:

  1. नाकोड़ा भेरूजी (Nakoda, Rajasthan): बाड़मेर जिले में स्थित यह मंदिर चमत्कारों से भरा है। यहाँ हर पूनम को लाखों भक्त बाबा को ‘मालपुआ’ और मीठे का भोग लगाने आते हैं।

  2. काल भैरव मंदिर (Ujjain, Madhya Pradesh): क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित यह विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, जहां बाबा को प्रसाद के रूप में मदिरा पिलाई जाती है (जिसे बाबा साक्षात ग्रहण करते हैं)।

  3. कुहाड़ा कोटपूतली लक्खी मेला (Rajasthan): कोटपूतली के कुहाड़ा गांव में भेरू बाबा का विशाल लक्खी मेला लगता है, जहां संतान प्राप्ति की मन्नत लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं [3]।

  4. बासदूदा भैरव मेला (Rewari, Haryana): रेवाड़ी के बासदूदा गांव में बाबा भैरव का विशाल मेला लगता है, जहां नवविवाहित जोड़े गठजोड़े की जात लगाने और बच्चों का मुंडन संस्कार कराने आते हैं [4]।

इस अत्यंत विस्तृत लेख के माध्यम से हमने “Bheru Poonam 2026: कब है भेरू पूनम? जानें Date, Puja Vidhi & Religious Significance” विषय के हर पहलू को गहराई से समझा।

पूर्णिमा का दिन केवल चंद्रमा की सुंदरता निहारने का दिन नहीं है, बल्कि यह अपनी आत्मा को शिव और शक्ति के प्रचंड स्वरूप ‘भैरव’ से जोड़ने का एक सिद्ध अवसर है। भगवान भैरव बाहर से देखने में भले ही उग्र और भयानक लगते हों, लेकिन अपने भक्तों के लिए वे एक पिता के समान अत्यंत दयालु और रक्षक हैं।

साल 2026 में आने वाली किसी भी भेरू पूनम (विशेषकर चैत्र या कार्तिक पूर्णिमा) के दिन अपने घर में एक दीपक जलाएं, शुद्ध हृदय से उन्हें पुकारें और उनका सात्विक भोग लगाएं। भेरू बाबा की असीम कृपा आपके जीवन के हर कर्ज, रोग, दुश्मन और अज्ञानता के अंधकार को समाप्त कर देगी।

जय भेरू नाथ! जय काल भैरव!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. साल 2026 में भेरू पूनम कब है?

भेरू बाबा के भक्त हर महीने की पूर्णिमा को भेरू पूनम के रूप में मनाते हैं। साल 2026 में 2 अप्रैल (चैत्र पूर्णिमा), 28 अगस्त (श्रावण पूर्णिमा) और 24 नवंबर (कार्तिक पूर्णिमा) को सबसे बड़ी भेरू पूनम के रूप में मनाया जाएगा।

2. क्या महिलाएं भेरू बाबा की पूजा कर सकती हैं?

जी हाँ, महिलाएं भेरू बाबा के बाल स्वरूप ‘बटुक भैरव’ की पूजा पूरे अधिकार और श्रद्धा के साथ कर सकती हैं। वे घर पर दीपक जला सकती हैं और चालीसा पढ़ सकती हैं। हालांकि, कुछ प्राचीन मंदिरों के गर्भगृह में महिलाओं का मूर्ति को स्पर्श करना वर्जित होता है, वे बाहर से दर्शन कर सकती हैं।

3. भेरू पूनम पर भेरू बाबा को क्या भोग (प्रसाद) चढ़ाना सबसे अच्छा है?

गृहस्थ भक्तों को भेरू बाबा को हमेशा सात्विक भोग ही चढ़ाना चाहिए। उन्हें शुद्ध घी का चूरमा, जलेबी, इमरती, मालपुआ, और गुड़-चने का प्रसाद सबसे अधिक प्रिय है।

4. बटुक भैरव और काल भैरव में क्या अंतर है?

‘बटुक भैरव’ भगवान शिव का बाल (बच्चे का) स्वरूप हैं, जो अत्यंत सौम्य, दयालु और सात्विक हैं; गृहस्थ लोग इन्हीं की पूजा करते हैं। जबकि ‘काल भैरव’ उनका उग्र, रक्षक और तामसिक स्वरूप है, जिनकी पूजा मुख्य रूप से तांत्रिक, अघोरी या विशेष सिद्ध मंदिरों में की जाती है।

5. भेरू बाबा का वाहन क्या है?

भगवान भैरव का वाहन ‘श्वान’ (कुत्ता) है, विशेष रूप से काला कुत्ता। यही कारण है कि भेरू पूनम के दिन काले कुत्ते को जलेबी, दूध या रोटी खिलाने से भैरव बाबा अत्यंत प्रसन्न होते हैं और कुंडली के राहु-केतु के दोष शांत हो जाते हैं।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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