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Bhadli Navami 2026: कब है भड़ली नवमी? जानें Date, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्वIt takes 12 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू पंचांग और वैदिक ज्योतिष में समय, तिथि और मुहूर्त का अत्यंत गहरा महत्व है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य— जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करने से पहले पंडितों द्वारा एक शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। लेकिन, हमारे धर्म शास्त्रों में साल के कुछ ऐसे विशेष दिन भी बताए गए हैं, जो अपने आप में इतने शुभ और पवित्र होते हैं कि उन दिनों पंचांग देखने या किसी पंडित से मुहूर्त पूछने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इन विशेष दिनों को ‘अबूझ मुहूर्त’ (Abujh Muhurat) या ‘स्वयंसिद्ध मुहूर्त’ कहा जाता है।

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ने वाली ‘भड़ली नवमी’ (Bhadli Navami) भी साल के इन्हीं गिने-चुने अबूझ मुहूर्तों में से एक है। इसे भड्डल नवमी (Bhaddal Navami) और कंदर्प नवमी (Kandarp Navami) के नाम से भी जाना जाता है।

जो लोग किसी कारणवश पूरे साल अपने विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं निकाल पाते, उनके लिए भड़ली नवमी किसी वरदान से कम नहीं होती। यह दिन इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि भड़ली नवमी के ठीक दो दिन बाद ‘देवशयनी एकादशी’ (Devshayani Ekadashi) आ जाती है, जिसके बाद चातुर्मास (Chaturmas) शुरू हो जाता है और अगले चार महीनों के लिए सभी शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। यानी, भड़ली नवमी शुभ कार्य करने का ‘आखिरी मौका’ होती है।

यदि आप साल 2026 में विवाह, गृह प्रवेश या कोई बड़ा मांगलिक कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि “Bhadli Navami 2026: कब है भड़ली नवमी? जानें Date, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व”। इस विस्तृत और प्रामाणिक लेख में हम आपको भड़ली नवमी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी प्रदान करेंगे।

1. Bhadli Navami 2026 Date: कब है भड़ली नवमी? (तिथि और शुभ मुहूर्त)

हिंदू पंचांग के अनुसार, भड़ली नवमी का पावन पर्व हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में यह तिथि जुलाई के महीने में पड़ रही है।

भड़ली नवमी 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां और समय (पंचांग के अनुसार):

विवरण (Details) तिथि और समय (Date & Time)
भड़ली नवमी 2026 की मुख्य तारीख 23 जुलाई 2026 (गुरुवार)
आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि का आरंभ 22 जुलाई 2026, शाम 04:30 बजे से
आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि का समापन 23 जुलाई 2026, शाम 06:15 बजे तक

(नोट: हिंदू धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार को उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के आधार पर मनाया जाता है। चूँकि 23 जुलाई 2026 को नवमी तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त रहेगी, इसलिए भड़ली नवमी 23 जुलाई को ही मनाई जाएगी और सभी मांगलिक कार्य इसी दिन संपन्न किए जाएंगे।)

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (23 जुलाई 2026)

भले ही भड़ली नवमी का पूरा दिन ही अबूझ और शुभ होता है, फिर भी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा के लिए कुछ मुहूर्त अत्यधिक फलदायी माने जाते हैं:

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 बजे से 12:52 बजे तक (यह किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत या पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है)।

  • गोधूलि बेला (संध्या मुहूर्त): शाम 07:05 बजे से 07:30 बजे तक।

2. भड़ली नवमी क्या है? (What is Bhadli Navami?)

“Bhadli Navami 2026: कब है भड़ली नवमी? जानें Date, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व” के इस खंड में आइए समझते हैं कि आखिर यह दिन इतना विशेष क्यों है।

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भड़ली नवमी उत्तर भारत, विशेषकर मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बहुत ही धूमधाम और आस्था के साथ मनाई जाती है। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। इसे आषाढ़ गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) का अंतिम दिन (महानवमी) भी माना जाता है।

गुप्त नवरात्रि के पूरे 9 दिनों तक गुप्त रूप से दस महाविद्याओं और माता दुर्गा की उपासना की जाती है, और भड़ली नवमी के दिन इसका समापन (पारण) और हवन होता है। इसलिए इस दिन माता जगदम्बा की असीम ऊर्जा पृथ्वी पर व्याप्त होती है, जो इस तिथि को और भी अधिक पवित्र और दोष-मुक्त बना देती है।

कंदर्प नवमी का रहस्य

कुछ प्राचीन धर्म ग्रंथों और पंचांगों में भड़ली नवमी को ‘कंदर्प नवमी’ भी कहा गया है। कंदर्प, कामदेव (प्रेम और आकर्षण के देवता) का ही एक नाम है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से दांपत्य जीवन (Married Life) में कामदेव और माता रति की कृपा से असीम प्रेम, आकर्षण और सुख-शांति बनी रहती है। यही कारण है कि विवाह के लिए यह दिन अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के समान ही श्रेष्ठ माना गया है।

3. भड़ली नवमी को ‘अबूझ मुहूर्त’ क्यों कहा जाता है? (The Concept of Abujh Muhurat)

हिंदू धर्म में कुल चार तिथियों को ‘स्वयंसिद्ध’ या ‘अबूझ’ मुहूर्त की श्रेणी में रखा गया है। ‘अबूझ’ का अर्थ है जिसे बूझने (पूछने) की आवश्यकता न हो। ये चार मुहूर्त हैं:

  1. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा/नव संवत्सर)

  2. वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया)

  3. आश्विन शुक्ल दशमी (विजयादशमी / दशहरा)

  4. आषाढ़ शुक्ल नवमी (भड़ली नवमी)

ग्रहों के दोषों का प्रभाव शून्य होना: जब किसी व्यक्ति के विवाह के लिए कुंडलियों का मिलान किया जाता है, तो कई बार भद्रा, पंचक, राहुकाल, या गुरु-शुक्र तारे के अस्त होने के कारण विवाह का मुहूर्त नहीं निकल पाता। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भड़ली नवमी का दिन इतना प्रभावशाली होता है कि इस दिन ग्रहों के सभी प्रकार के दोष, मलमास का प्रभाव या कोई भी अशुभ योग स्वतः ही प्रभावहीन (शून्य) हो जाते हैं।

यदि किसी लड़के या लड़की की शादी में बार-बार अड़चन आ रही है, या उनके ग्रहों का मिलान सही से नहीं हो पा रहा है, तो बिना कोई पंचांग देखे भड़ली नवमी (23 जुलाई 2026) के दिन उनका विवाह संपन्न कराया जा सकता है। यह विवाह अत्यंत सफल और सौभाग्यशाली सिद्ध होता है।

4. चातुर्मास (Chaturmas) और भड़ली नवमी का गहरा संबंध

भड़ली नवमी का सबसे बड़ा सामाजिक और धार्मिक महत्व ‘चातुर्मास’ से जुड़ा हुआ है।

भड़ली नवमी (आषाढ़ शुक्ल नवमी) के ठीक दो दिन बाद आषाढ़ शुक्ल एकादशी आती है, जिसे ‘देवशयनी एकादशी’ (Devshayani Ekadashi) कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर पूरे 4 महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं।

भगवान विष्णु के शयन काल (सोने के समय) को ‘चातुर्मास’ (चार महीने का समय) कहा जाता है, जो कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) तक चलता है। चूंकि भगवान विष्णु शुभ कार्यों के अधिष्ठाता (मुख्य देवता) हैं, इसलिए उनके सो जाने पर पृथ्वी पर सभी प्रकार के मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, और नए व्यापार का शुभारंभ) पूरी तरह से वर्जित हो जाते हैं।

विवाह का अंतिम अवसर: भड़ली नवमी, देवशयनी एकादशी से ठीक पहले आती है। इसलिए यह चातुर्मास लगने से पहले शुभ कार्य करने का ‘आखिरी और सबसे बड़ा अवसर’ होती है। जो परिवार गर्मियों (मई-जून) के लगन में अपने बच्चों की शादी नहीं कर पाते, वे भड़ली नवमी के दिन विवाह का आयोजन करते हैं। इसके बाद सीधे नवंबर या दिसंबर में देवउठनी एकादशी के बाद ही शहनाइयां बजती हैं।

5. भड़ली नवमी का धार्मिक महत्व (Religious Significance of Bhadli Navami)

“Bhadli Navami 2026: कब है भड़ली नवमी? जानें Date, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व”— इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए, आइए इस दिन के गहरे आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व को समझते हैं:

  1. गुप्त नवरात्रि की महानवमी: आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का समापन भड़ली नवमी के दिन होता है। जो साधक तंत्र-मंत्र, अष्ट-सिद्धियों या कुण्डलिनी जागरण की साधना करते हैं, उनके लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन हवन और कन्या पूजन करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं और रोग दूर हो जाते हैं।

  2. श्री हरि विष्णु की कृपा: चातुर्मास में जाने से पूर्व भगवान विष्णु अपने भक्तों की प्रार्थनाएं अत्यंत शीघ्र सुनते हैं। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से जीवन में ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति होती है।

  3. पापों का नाश: पद्म पुराण के अनुसार, भड़ली नवमी के दिन पवित्र नदी में स्नान करने और दान करने से मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के उपरांत उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  4. अखंड सौभाग्य की प्राप्ति: जो सुहागिन महिलाएं भड़ली नवमी के दिन माता पार्वती और माता लक्ष्मी की पूजा करती हैं, उनके पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है।

6. भड़ली नवमी पर क्या-क्या शुभ कार्य किए जा सकते हैं? (Auspicious Activities)

चूंकि यह एक अबूझ मुहूर्त है, इसलिए भड़ली नवमी 2026 (23 जुलाई 2026) के दिन आप बिना किसी झिझक के निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं:

  • विवाह और सगाई: यह विवाह के लिए साल का सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है।

  • गृह प्रवेश (Griha Pravesh): यदि आपका नया घर बनकर तैयार है, तो भड़ली नवमी के दिन गृह प्रवेश करना घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाता है।

  • मुंडन और उपनयन संस्कार (जनेऊ): बच्चों के ये संस्कार इस दिन किए जा सकते हैं।

  • संपत्ति या वाहन की खरीदारी: कोई नई जमीन (Property), फ्लैट, दुकान या नया वाहन (Car/Bike) खरीदने के लिए यह अत्यंत शुभ दिन है।

  • नए व्यापार की शुरुआत: यदि आप कोई नया बिजनेस, स्टार्टअप या दुकान शुरू करना चाहते हैं, तो इस दिन उद्घाटन करना व्यापार में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की दिलाता है।

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7. भड़ली नवमी की सरल पूजा विधि (Bhadli Navami Puja Vidhi)

यदि आपके घर में कोई मांगलिक कार्य नहीं भी है, तो भी आपको भड़ली नवमी के दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और माता दुर्गा की विशेष पूजा अवश्य करनी चाहिए। घर पर पूजा करने की सरल विधि इस प्रकार है:

चरण 1: स्नान और संकल्प

  • 23 जुलाई 2026 की सुबह जल्दी (ब्रह्म मुहूर्त में) उठें।

  • स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

  • स्वच्छ पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करें।

  • सूर्य देव को अर्घ्य दें और दिनभर व्रत या सात्विक रहने का संकल्प लें।

चरण 2: पूजा की तैयारी

  • घर के मंदिर या किसी साफ जगह पर एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें।

  • चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर रखें। साथ ही माता दुर्गा (या नवदुर्गा) की तस्वीर भी रखें।

  • देसी घी का एक दीपक प्रज्वलित करें।

चरण 3: पंचोपचार पूजा

  • सबसे पहले भगवान गणेश का आह्वान करें।

  • फिर भगवान विष्णु को पीले फूल, पीला चंदन, हल्दी और तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) अर्पित करें। (ध्यान रहे, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसके बिना उनकी पूजा अधूरी है)।

  • माता लक्ष्मी और माता दुर्गा को लाल पुष्प, कुमकुम, और सुहाग का सामान (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर) अर्पित करें।

चरण 4: भोग और मंत्र जाप

  • भगवान को पीले रंग की मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू), पंचामृत और ऋतुफल का भोग लगाएं।

  • अपने स्थान पर बैठकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप करें।

  • दुर्गा सप्तशती के सिद्ध कुंजिका स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

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चरण 5: आरती और कन्या पूजन (यदि संभव हो)

  • पूजा के अंत में भगवान विष्णु और माता दुर्गा की आरती करें।

  • चूँकि यह गुप्त नवरात्रि की नवमी है, इसलिए यदि संभव हो तो छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उन्हें सात्विक भोजन (हलवा-चना) कराएं और उपहार देकर विदा करें।

  • अंत में दान (ब्राह्मणों या गरीबों को अन्न और धन) अवश्य दें।

8. भड़ली नवमी पर करें ये 3 विशेष उपाय (Special Remedies)

भड़ली नवमी के सिद्ध मुहूर्त का लाभ उठाकर आप अपने जीवन की परेशानियों को दूर करने के लिए ये ज्योतिषीय उपाय कर सकते हैं:

  1. शीघ्र विवाह के लिए उपाय: जिन युवक-युवतियों के विवाह में देरी हो रही है, वे भड़ली नवमी के दिन पानी में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर स्नान करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती को एक साथ पीले फूलों की माला और पीला वस्त्र अर्पित करें। विवाह के योग शीघ्र बन जाएंगे।

  2. आर्थिक तंगी दूर करने के लिए: भड़ली नवमी की शाम को सूर्यास्त के बाद तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का एक दीपक जलाएं और माता लक्ष्मी के मंत्र “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:” का जाप करें। धन से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी।

  3. करियर और व्यापार में सफलता के लिए: इस दिन किसी भी विष्णु मंदिर में जाकर एक पीला ध्वज (झंडा) दान करें और ब्राह्मणों को चने की दाल और गुड़ का दान दें। इससे व्यापार और नौकरी में आ रही बाधाएं तुरंत समाप्त होती हैं।

इस अत्यंत विस्तृत लेख के माध्यम से हमने “Bhadli Navami 2026: कब है भड़ली नवमी? जानें Date, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व” के हर छोटे-बड़े पहलू को गहराई से समझा।

“यह दिन इतना सिद्ध है कि बिना पंचांग देखे किए जा सकते हैं मांगलिक कार्य और गृह प्रवेश जैसे बड़े अनुष्ठान किए जा सकते हैं।”

भड़ली नवमी केवल पंचांग की एक तारीख नहीं है, बल्कि यह हिंदू धर्म की उस वैज्ञानिक और ज्योतिषीय व्यवस्था का हिस्सा है, जो मनुष्य के जीवन को सरल और मंगलमय बनाती है। 23 जुलाई 2026 का यह दिन चातुर्मास के 4 महीनों के लंबे विश्राम से पहले प्रकृति द्वारा दिया गया एक ऐसा ‘सुपर-मुहूर्त’ है, जिसमें किया गया कोई भी कार्य कभी असफल नहीं होता।

चाहे आप किसी नए रिश्ते (विवाह) में बंधने जा रहे हों, नए घर की नींव रख रहे हों, या केवल आध्यात्मिक उन्नति की कामना कर रहे हों— भड़ली नवमी का पावन दिन आपके लिए सफलता, समृद्धि और सौभाग्य के नए द्वार खोलने की क्षमता रखता है। भगवान विष्णु और माता जगदम्बा की कृपा आप पर सदैव बनी रहे।

“विभिन्न क्षेत्रों में भड़ली नवमी का धार्मिक महत्व इतना अधिक है कि इसे कंदर्प नवमी के नाम से भी जाना जाता है।”

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: साल 2026 में भड़ली नवमी कब है?

उत्तर: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में भड़ली नवमी का पावन पर्व 23 जुलाई (गुरुवार) को मनाया जाएगा।

प्रश्न 2: भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त क्यों कहा जाता है?

उत्तर: भड़ली नवमी का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से इतना शुद्ध और शक्तिशाली होता है कि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों के सभी दोष प्रभावहीन हो जाते हैं। इसलिए इस दिन विवाह या किसी भी मांगलिक कार्य के लिए पंचांग देखकर मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती, यह स्वतः ही अबूझ (स्वयंसिद्ध) मुहूर्त है।

प्रश्न 3: भड़ली नवमी के बाद शादी-विवाह क्यों बंद हो जाते हैं?

उत्तर: भड़ली नवमी के ठीक दो दिन बाद ‘देवशयनी एकादशी’ आती है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा (शयन) में चले जाते हैं। भगवान के सो जाने के कारण चातुर्मास शुरू हो जाता है और विवाह जैसे सभी शुभ कार्यों पर चार महीने के लिए रोक लग जाती है।

प्रश्न 4: क्या भड़ली नवमी को कंदर्प नवमी भी कहते हैं?

उत्तर: जी हाँ, कई धर्म ग्रंथों में इसे कंदर्प नवमी कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा करने से दांपत्य जीवन में अपार प्रेम और सुख की प्राप्ति होती है।

प्रश्न 5: भड़ली नवमी के दिन कौन सी नवरात्रि का समापन होता है?

उत्तर: भड़ली नवमी के दिन आषाढ़ मास की ‘गुप्त नवरात्रि’ की नवमी तिथि (महानवमी) होती है। इसी दिन 9 दिनों तक चलने वाली तांत्रिक और महाविद्याओं की साधना का समापन और हवन किया जाता है।

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