सनातन हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में अमावस्या (Amavasya) तिथि का अत्यंत गहरा और पवित्र महत्व है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक चंद्रमास (Lunar Month) में 30 तिथियां होती हैं, जिन्हें 15-15 दिनों के दो पक्षों— शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष— में बांटा गया है। कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि (15वीं तिथि) को अमावस्या कहा जाता है। यह वह रात होती है जब आकाश में चंद्रमा पूर्ण रूप से अदृश्य होता है और चारों ओर घोर अंधकार छा जाता है।
धार्मिक दृष्टिकोण से अमावस्या की तिथि पितरों (पूर्वजों) की शांति, तर्पण, श्राद्ध कर्म और तंत्र-मंत्र की साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ मानी गई है। इसके अलावा, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करने से इस दिन अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में स्नान-दान और पूजा-पाठ के लिए अमावस्या की तिथियां बहुत महत्वपूर्ण हैं।
यदि आप जानना चाहते हैं कि “Amavasya 2026 Tithi Calendar: कब है कौन-सी अमावस्या? जानें Month-Wise Date & Time”, तो यह विस्तृत लेख आपके लिए ही है। इस आर्टिकल में हम आपको वर्ष 2026 में आने वाली सभी अमावस्या तिथियों का सटीक समय, उनकी पूजा विधि, वैज्ञानिक महत्व और पितृ दोष से मुक्ति के अचूक उपायों की संपूर्ण जानकारी देंगे।
अमावस्या तिथि का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व (Significance of Amavasya)
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण
शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या तिथि के स्वामी ‘पितृदेव’ (पूर्वज) माने गए हैं। जिस प्रकार पूर्णिमा के दिन देवता जाग्रत होते हैं, उसी प्रकार अमावस्या के दिन पितरों की ऊर्जा पृथ्वी के सबसे करीब होती है।
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पितृ तर्पण: इस दिन किया गया श्राद्ध और तर्पण सीधे हमारे पूर्वजों तक पहुंचता है, जिससे उन्हें मोक्ष मिलता है और वे अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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दोष निवारण: कुंडली में यदि ‘पितृ दोष’, ‘कालसर्प दोष’ या ‘चांडाल दोष’ हो, तो अमावस्या के दिन किए गए विशेष अनुष्ठानों से इन दोषों का प्रभाव कम हो जाता है।
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अध्यात्म और साधना: अमावस्या की रात को ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरम पर होती है। तांत्रिक और अघोरी साधक इस रात को दस महाविद्याओं और माँ काली की गुप्त साधना के लिए सबसे उत्तम मानते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Aspect)
विज्ञान के अनुसार, अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही सीध में (0 डिग्री पर) आ जाते हैं। इन दोनों खगोलीय पिंडों का गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Pull) पृथ्वी पर सबसे अधिक पड़ता है।
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ज्वार-भाटा (Tides): इस दिन समुद्र में सबसे ऊंची लहरें उठती हैं।
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मानसिक प्रभाव: मानव शरीर में भी 70% जल होता है। इसलिए अमावस्या के दिन मनुष्य की भावनाएं (Emotions), क्रोध और मानसिक ऊर्जा अत्यधिक तीव्र हो जाती है। जो लोग ध्यान (Meditation) करते हैं, उनके लिए यह दिन ऊर्जा को केंद्रित करने का सर्वश्रेष्ठ समय होता है।
Amavasya 2026 Tithi Calendar (Month-Wise List)
| महीना (Month) | अमावस्या का नाम | मुख्य तारीख (Date) | दिन (Day) | तिथि प्रारंभ समय | तिथि समाप्त समय | विशेष योग / महत्व |
| जनवरी | पौष अमावस्या | 18 जनवरी 2026 | रविवार | 18 जन, 04:20 AM | 19 जन, 01:21 AM | सूर्य देव पूजा, तिल दान |
| फरवरी | माघ / मौनी अमावस्या | 17 फरवरी 2026 | मंगलवार | 16 फर, 05:45 PM | 17 फर, 05:31 PM | भौमवती अमावस्या, मौन व्रत |
| मार्च | फाल्गुन अमावस्या | 18 मार्च 2026 | बुधवार | 17 मार्च, 09:10 PM | 18 मार्च, 10:53 AM | फाल्गुन स्नान, पितृ दान |
| अप्रैल | चैत्र अमावस्या | 16 अप्रैल 2026 | गुरुवार | 16 अप्रै, 01:30 PM | 17 अप्रै, 04:06 AM | हिंदू नववर्ष की पूर्व संध्या |
| मई | वैशाख अमावस्या | 16 मई 2026 | शनिवार | 15 मई, 06:15 PM | 16 मई, 07:31 PM | शनिश्चरी अमावस्या, शनि दोष शांति |
| जून | ज्येष्ठ / वट सावित्री | 14 जून 2026 | रविवार | 14 जून, 10:20 AM | 15 जून, 08:15 AM | वट सावित्री व्रत (सुहागिनों के लिए) |
| जुलाई | आषाढ़ अमावस्या | 14 जुलाई 2026 | मंगलवार | 13 जुला, 11:55 PM | 14 जुला, 06:13 PM | भौमवती अमावस्या, वृक्षारोपण |
| अगस्त | श्रावण / हरियाली | 12 अगस्त 2026 | बुधवार | 11 अग, 12:15 PM | 12 अग, 02:07 AM | शिव-पार्वती पूजा, पौधारोपण |
| सितंबर | भाद्रपद / कुशाग्रहणी | 10-11 सितंबर 2026 | गुरु/शुक्र | 10 सितं, 02:10 PM | 11 सितं, 08:56 AM | कुशा घास उखाड़ने का विधान |
| अक्टूबर | आश्विन / महालया | 10 अक्टूबर 2026 | शनिवार | 9 अक्टू, 02:30 AM | 10 अक्टू, 04:20 PM | शनिश्चरी सर्वपितृ अमावस्या (श्राद्ध) |
| नवंबर | कार्तिक / दीपावली | 8-9 नवंबर 2026 | रवि/सोम | 8 नवं, 03:15 PM | 9 नवं, 01:06 AM | दीपावली महा-पर्व, लक्ष्मी पूजा |
| दिसंबर | मार्गशीर्ष / अगहन | 8 दिसंबर 2026 | मंगलवार | 7 दिसं, 03:45 AM | 8 दिसं, 11:48 AM | भौमवती अमावस्या, सत्यनारायण पूजा |
(नोट: ऊपर दिया गया समय भारतीय मानक समय- IST के अनुसार है। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार इसमें कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है।)
Amavasya 2026 Tithi Calendar: जनवरी से दिसंबर तक की पूरी लिस्ट डिटेल मैं
वर्ष 2026 में कुल 12 अमावस्या तिथियां पड़ रही हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने की अमावस्या का अपना एक अलग नाम और विशेष महत्व होता है। आइए, Amavasya 2026 Tithi Calendar पर विस्तार से नज़र डालते हैं।
(नोट: अमावस्या तिथि का आरंभ और समापन समय पंचांग और स्थानीय सूर्योदय/चंद्रोदय के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर ले सकता है। यहाँ दिया गया समय भारतीय मानक समय- IST के अनुसार है।)
1. पौष अमावस्या (जनवरी 2026)
पौष का महीना सूर्य देव की आराधना और पितरों के श्राद्ध के लिए जाना जाता है। इस महीने की अमावस्या को पौष अमावस्या कहते हैं।
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अमावस्या तिथि: 18 जनवरी 2026 (रविवार)
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तिथि प्रारंभ: 18 जनवरी की सुबह लगभग 04:20 बजे
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तिथि समाप्त: 19 जनवरी की मध्य रात्रि 01:21 बजे
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विशेष महत्व: सर्दियों के इस महीने में गर्म वस्त्रों, तिल और अन्न का दान करना महापुण्यकारी माना जाता है। रविवार के दिन पड़ने के कारण इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष फलदायी होगा।
2. माघ / मौनी अमावस्या (फरवरी 2026)
माघ महीने की अमावस्या को ‘मौनी अमावस्या’ (Mauni Amavasya) कहा जाता है। यह साल की सबसे बड़ी और पवित्र अमावस्याओं में से एक है।
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अमावस्या तिथि: 17 फरवरी 2026 (मंगलवार)
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तिथि प्रारंभ: 16 फरवरी की शाम 05:45 बजे
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तिथि समाप्त: 17 फरवरी की शाम 05:31 बजे
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विशेष महत्व: इस दिन मौन (Silence) व्रत धारण करके संगम (प्रयागराज) या किसी पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। भौमवती (मंगलवार) अमावस्या होने के कारण इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।
3. फाल्गुन अमावस्या (मार्च 2026)
फाल्गुन का महीना उमंग और उल्लास का होता है। यह अमावस्या होली से ठीक 15 दिन पहले आती है।
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अमावस्या तिथि: 18 मार्च 2026 (बुधवार)
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तिथि प्रारंभ: 17 मार्च की रात 09:10 बजे
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तिथि समाप्त: 18 मार्च की सुबह 10:53 बजे
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विशेष महत्व: इस दिन पितरों के निमित्त कच्चा दूध, सफेद तिल और चावल का दान करना शुभ होता है।
4. चैत्र अमावस्या (अप्रैल 2026)
हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर) और चैत्र नवरात्रि से ठीक एक दिन पहले आने वाली यह अमावस्या बहुत महत्वपूर्ण है।
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अमावस्या तिथि: 16 अप्रैल 2026 (गुरुवार)
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तिथि प्रारंभ: 16 अप्रैल की दोपहर 01:30 बजे
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तिथि समाप्त: 17 अप्रैल की सुबह 04:06 बजे
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विशेष महत्व: यह अमावस्या पुराने साल की विदाई और नई ऊर्जा के स्वागत का प्रतीक है। इस दिन घर की पूरी साफ-सफाई करनी चाहिए और नकारात्मकता को बाहर निकालना चाहिए।
5. वैशाख अमावस्या (मई 2026)
वैशाख का महीना भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
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अमावस्या तिथि: 16 मई 2026 (शनिवार) – शनिश्चरी अमावस्या
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तिथि प्रारंभ: 15 मई की रात 06:15 बजे
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तिथि समाप्त: 16 मई की शाम 07:31 बजे
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विशेष महत्व: चूंकि यह अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है, इसलिए यह ‘शनिश्चरी अमावस्या’ (Shani Amavasya) कहलाएगी। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उन्हें इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
6. ज्येष्ठ / वट सावित्री अमावस्या (जून 2026)
ज्येष्ठ मास की अमावस्या को सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए ‘वट सावित्री’ (Vat Savitri Vrat) का व्रत रखती हैं।
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अमावस्या तिथि: 14 जून 2026 (रविवार)
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तिथि प्रारंभ: 14 जून की सुबह 10:20 बजे
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तिथि समाप्त: 15 जून की सुबह 08:15 बजे
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विशेष महत्व: इस दिन बरगद (वट) वृक्ष की पूजा की जाती है। सावित्री ने इसी दिन यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे।
7. आषाढ़ अमावस्या (जुलाई 2026)
यह वह समय होता है जब वर्षा ऋतु का आगमन हो चुका होता है।
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अमावस्या तिथि: 14 जुलाई 2026 (मंगलवार)
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तिथि प्रारंभ: 13 जुलाई की रात 11:55 बजे
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तिथि समाप्त: 14 जुलाई की शाम 06:13 बजे
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विशेष महत्व: मंगलवार के दिन पड़ने वाली यह ‘भौमवती अमावस्या’ है। आषाढ़ अमावस्या के दिन वृक्षारोपण (पेड़ लगाना) और किसानों को दान देना शुभ माना जाता है।
8. श्रावण / हरियाली अमावस्या (अगस्त 2026)
सावन महीने में आने वाली अमावस्या को ‘हरियाली अमावस्या’ (Hariyali Amavasya) कहा जाता है।
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अमावस्या तिथि: 12 अगस्त 2026 (बुधवार)
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तिथि प्रारंभ: 11 अगस्त की दोपहर 12:15 बजे
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तिथि समाप्त: 12 अगस्त की रात 02:07 बजे
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विशेष महत्व: इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा होती है। प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस दिन औषधीय पौधे लगाए जाते हैं।
9. भाद्रपद / कुशाग्रहणी अमावस्या (सितंबर 2026)
भाद्रपद महीने की अमावस्या को कुश (एक पवित्र घास) उखाड़ने का विधान है, इसलिए इसे कुशाग्रहणी अमावस्या कहते हैं।
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अमावस्या तिथि: 10 – 11 सितंबर 2026 (गुरुवार/शुक्रवार)
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तिथि प्रारंभ: 10 सितंबर की शाम 02:10 बजे
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तिथि समाप्त: 11 सितंबर की सुबह 08:56 बजे
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विशेष महत्व: साल भर के पूजा-पाठ और अनुष्ठानों के लिए इसी दिन कुश घास को ज़मीन से निकाला जाता है।
10. आश्विन / महालया अमावस्या (अक्टूबर 2026)
इसे ‘सर्वपितृ अमावस्या’ (Sarvapitri Amavasya) या महालया भी कहा जाता है। यह पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का अंतिम दिन होता है।
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अमावस्या तिथि: 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) – शनिश्चरी महालया
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तिथि प्रारंभ: 9 अक्टूबर की रात 02:30 बजे
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तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर की शाम 04:20 बजे
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विशेष महत्व: जिन पितरों की मृत्यु की तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है। शनिवार को महालया पड़ने से यह दिन शनि दोष और पितृ दोष दोनों से एक साथ मुक्ति पाने का महा-संयोग है।
11. कार्तिक अमावस्या / दिवाली (नवंबर 2026)
कार्तिक अमावस्या हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और प्रकाशमय त्योहार है— दीपावली (Diwali)।
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अमावस्या तिथि: 8 – 9 नवंबर 2026 (रविवार/सोमवार)
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तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर की दोपहर 03:15 बजे
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तिथि समाप्त: 9 नवंबर की मध्य रात्रि 01:06 बजे
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विशेष महत्व: इस रात महालक्ष्मी, भगवान गणेश, और कुबेर जी की पूजा की जाती है। यह एकमात्र ऐसी अमावस्या है जिस दिन अंधेरे पर प्रकाश की जीत का जश्न दीप जलाकर मनाया जाता है।
12. मार्गशीर्ष / अगहन अमावस्या (दिसंबर 2026)
मार्गशीर्ष मास भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है।
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अमावस्या तिथि: 8 दिसंबर 2026 (मंगलवार)
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तिथि प्रारंभ: 7 दिसंबर की रात 03:45 बजे
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तिथि समाप्त: 8 दिसंबर की सुबह 11:48 बजे
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विशेष महत्व: इस दिन पितरों के साथ-साथ भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा करने से पारिवारिक कलह समाप्त होती है और सुख-शांति आती है।
अमावस्या के विशेष प्रकार और उनके लाभ (Types of Amavasya)
हिंदू पंचांग में जब अमावस्या किसी विशेष दिन (वार) पर पड़ती है, तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में भी ऐसे कई शुभ योग बन रहे हैं:
1. सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya)
जब अमावस्या सोमवार (Monday) के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। यह सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत शुभ होती है। इस दिन महिलाएं पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करती हैं और धागा लपेटकर पति की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं। यह योग चंद्र दोष दूर करने के लिए अचूक है।
2. भौमवती अमावस्या (Bhaumvati Amavasya)
जब अमावस्या मंगलवार (Tuesday) को आती है, तो उसे भौमवती अमावस्या कहा जाता है। (वर्ष 2026 में माघ, आषाढ़ और मार्गशीर्ष अमावस्या मंगलवार को हैं)। यह दिन मंगल दोष, कर्जे (Debt) से मुक्ति और भूमि-भवन से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
3. शनिश्चरी अमावस्या (Shani Amavasya)
शनिवार (Saturday) को पड़ने वाली अमावस्या ‘शनिश्चरी अमावस्या’ कहलाती है। (वर्ष 2026 में वैशाख और आश्विन महालया शनिवार को हैं)। शनि देव के प्रकोप, साढ़ेसाती, ढैय्या और राहु-केतु के बुरे प्रभावों को शांत करने के लिए इस दिन का विशेष महत्व है।
अमावस्या के दिन क्या करें? (Rituals and Puja Vidhi)
“Amavasya 2026 Tithi Calendar: कब है कौन-सी अमावस्या? जानें Month-Wise Date & Time” जानने के बाद यह जानना भी जरूरी है कि इस दिन कौन से कर्म करने से अक्षय पुण्य मिलता है:
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ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: अमावस्या की सुबह सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी (गंगा, यमुना, नर्मदा) या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
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सूर्य देव को अर्घ्य: स्नान के पश्चात तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, और काले तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
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पितृ तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा, काले तिल और जल से अपने पितरों का तर्पण करें। “ॐ पितृभ्यः नमः” मंत्र का जाप करें।
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पीपल पूजा: पीपल के पेड़ में त्रिदेवों का वास माना जाता है। अमावस्या के दिन पीपल की जड़ में दूध और जल मिश्रित करके चढ़ाएं और शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
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अन्न और वस्त्र दान: किसी गरीब, ब्राह्मण या जरूरतमंद को चावल, उड़द की दाल, काला कपड़ा, और तिल का दान करें। इस दिन गाय, कुत्ता और कौवे को भोजन कराना भी अत्यंत शुभ होता है।
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दीपक जलाना: शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर और ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में दीपक अवश्य जलाएं ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।
पितृ दोष निवारण के अचूक उपाय (Remedies for Pitru Dosh)
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष (Pitru Dosh) है, तो उसे जीवन में संतान सुख में बाधा, आर्थिक संकट, और घर में बीमारियों का सामना करना पड़ता है। अमावस्या का दिन इस दोष को दूर करने का राम-बाण है:
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गीता का पाठ: अमावस्या के दिन श्रीमद्भगवद्गीता के 7वें अध्याय का पाठ करें और उसका पुण्य अपने पितरों को समर्पित करें।
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ब्राह्मण भोज: इस दिन घर में सात्विक भोजन बनाएं। भोजन का पहला हिस्सा कौवे, गाय और कुत्ते के लिए निकालें, उसके बाद किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा दें।
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रुद्राभिषेक: भगवान शिव को मृत्युंजय कहा जाता है। अमावस्या के दिन शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल और काले तिल अर्पित करने से बड़े से बड़ा पितृ दोष और कालसर्प दोष शांत हो जाता है।
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जल दान: सार्वजनिक स्थान पर राहगीरों के लिए पीने के पानी (प्याऊ) की व्यवस्था करने से पूर्वज अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
अमावस्या के दिन भूलकर भी न करें ये 7 काम (Things to Avoid)
जहाँ अमावस्या पुण्य कमाने का दिन है, वहीं इस दिन कुछ कार्यों को करना शास्त्रों में सख्त वर्जित (Prohibited) माना गया है:
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तामसिक भोजन का त्याग: इस दिन भूलकर भी मांस, मदिरा (शराब), लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए।
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शारीरिक संबंध: अमावस्या के दिन पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य (Celibacy) का पालन करना चाहिए। इस दिन गर्भधारण होने पर होने वाली संतान पर नकारात्मक ग्रहों का प्रभाव पड़ता है।
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बाल और नाखून काटना: इस दिन बाल, दाढ़ी (Shaving) और नाखून काटना आर्थिक हानि और दरिद्रता को आमंत्रण देता है।
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शुभ कार्य की शुरुआत: दीपावली (कार्तिक अमावस्या) को छोड़कर, किसी भी अन्य अमावस्या के दिन नए व्यापार, विवाह, या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य शुरू नहीं करने चाहिए।
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क्रोध और विवाद: इस दिन चंद्रमा कमजोर होता है, जिससे मन अशांत रहता है। घर में लड़ाई-झगड़ा करने या अपशब्द बोलने से पितर नाराज होकर वापस लौट जाते हैं।
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सुनसान जगह पर जाना: रात के समय किसी श्मशान, सुनसान सड़क या पीपल के पेड़ के नीचे जाने से बचना चाहिए, क्योंकि इस रात नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय होती हैं।
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देर तक सोना: अमावस्या की सुबह सूर्योदय के बाद तक सोना स्वास्थ्य और भाग्य दोनों के लिए हानिकारक माना गया है।
2026 में अमावस्या पर बनने वाले विशेष ग्रह योग
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, वर्ष 2026 की कुछ अमावस्या तिथियों पर अत्यंत दुर्लभ ग्रह योग बन रहे हैं:
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शनिश्चरी महालया (अक्टूबर 2026): सर्वपितृ अमावस्या का शनिवार के दिन आना एक महासंयोग है। इस दिन शनि देव और यमराज दोनों की कृपा एक साथ पाई जा सकती है।
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भौमवती मौनी अमावस्या (फरवरी 2026): प्रयागराज संगम तट पर स्नान के साथ-साथ मंगलवार का संयोग प्रॉपर्टी (Real Estate) और ज़मीन से जुड़े विवादों को खत्म करने का सबसे बड़ा दिन होगा।
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दीपावली (नवंबर 2026): 8-9 नवंबर की मध्य रात्रि को पड़ने वाली दीपावली पर लक्ष्मी-नारायण योग और गजकेसरी योग का अद्भुत संयोग बनेगा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यक्तिगत धन-धान्य के लिए अत्यंत शुभ संकेत है।
भारतीय पंचांग में अमावस्या कोई अशुभ दिन नहीं है, बल्कि यह वह खाली कैनवस है जहाँ से शुक्ल पक्ष का प्रकाश जन्म लेता है। यह दिन रुकने, विचार करने, अपने पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने और अपने भीतर की ऊर्जा को संतुलित करने का है।
इस विस्तृत लेख “Amavasya 2026 Tithi Calendar: कब है कौन-सी अमावस्या? जानें Month-Wise Date & Time” के माध्यम से हमने आपको वर्ष 2026 की सभी 12 अमावस्या तिथियों की सटीक जानकारी दी है। आप इस कैलेंडर को सेव करके रख सकते हैं ताकि हर महीने आने वाली अमावस्या पर आप अपने पितरों के निमित्त सही समय पर तर्पण और दान कर सकें।
याद रखें, सच्ची श्रद्धा और पवित्र मन से अमावस्या के दिन किया गया एक छोटा सा पुण्य कर्म भी आपके जीवन के सभी कष्टों को मिटा सकता है और आपके परिवार को पूर्वजों के आशीर्वाद से भर सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: वर्ष 2026 की सबसे बड़ी अमावस्या कौन सी है?
उत्तर: वर्ष 2026 की सबसे बड़ी अमावस्याओं में ‘मौनी अमावस्या’ (17 फरवरी 2026), ‘महालया/सर्वपितृ अमावस्या’ (10 अक्टूबर 2026), और ‘कार्तिक अमावस्या / दीपावली’ (8-9 नवंबर 2026) शामिल हैं।
प्रश्न 2: क्या अमावस्या के दिन व्रत (Fast) रखना चाहिए?
उत्तर: जी हाँ, अमावस्या के दिन व्रत रखना शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। जो लोग पितृ दोष से पीड़ित हैं, उन्हें इस दिन निर्जला या फलाहारी व्रत रखकर अपने पितरों की शांति की प्रार्थना करनी चाहिए।
प्रश्न 3: अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, पीपल के पेड़ के मूल (जड़) में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्र भाग में भगवान शिव का वास होता है। अमावस्या के दिन पीपल में पितरों का भी वास माना गया है, इसलिए इसकी परिक्रमा और पूजा करने से सभी देवताओं और पितरों का एक साथ आशीर्वाद मिलता है।
प्रश्न 4: अमावस्या और पूर्णिमा में क्या मुख्य अंतर है?
उत्तर: हिंदू महीने के कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या (No Moon Day) कहते हैं, जब आसमान में चांद बिल्कुल नहीं दिखाई देता। वहीं, शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा (Full Moon Day) कहते हैं, जब चांद अपने पूरे और भव्य आकार में दिखाई देता है। पूर्णिमा देवताओं की तिथि है, जबकि अमावस्या पितरों की।
प्रश्न 5: क्या अमावस्या के दिन पैदा हुआ बच्चा अशुभ होता है?
उत्तर: यह एक भ्रम है। अमावस्या के दिन जन्म लेने वाला बच्चा अशुभ नहीं होता। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही अंश पर होते हैं, जिससे चंद्रमा (मन का कारक) अस्त हो जाता है। ऐसे बच्चों के लिए बाद में ‘चंद्र शांति’ की पूजा कराई जाती है, लेकिन वे जीवन में बहुत आध्यात्मिक और गहरी सोच वाले बनते हैं।