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Masik Shivratri 2026 Calender: कब है मासिक शिवरात्रि? जानें Month-Wise Date & Nishita TimeIt takes 13 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू धर्म में भगवान शिव (Lord Shiva) को कालों का काल ‘महाकाल’ कहा जाता है। शिव की आराधना के बिना इस सृष्टि की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में एक बार ‘महाशिवरात्रि’ (Maha Shivratri) का महापर्व मनाया जाता है, लेकिन शिव भक्तों के लिए हर महीने भी शिवरात्रि आती है, जिसे ‘मासिक शिवरात्रि’ (Masik Shivratri) कहा जाता है।

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, प्रत्येक चंद्र मास (Lunar Month) के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (14वें दिन) को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। यह वह पावन रात है जब ब्रह्मांड की ऊर्जा अपने चरम पर होती है और भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती के साथ पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ हर महीने इस व्रत को करता है, उसके जीवन से बड़े से बड़े संकट, बीमारियां, दरिद्रता और विवाह में आ रही बाधाएं हमेशा के लिए नष्ट हो जाती हैं।

वर्ष 2026 शिव भक्तों के लिए और भी अधिक विशेष होने वाला है, क्योंकि पंचांग में ‘अधिक मास’ (Adhik Maas) का योग बन रहा है। इस कारण से वर्ष 2026 में 12 के बजाय कुल 13 मासिक शिवरात्रि व्रत रखे जाएंगे।

यदि आप भी भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा पाना चाहते हैं और वर्ष 2026 में मासिक शिवरात्रि के व्रत शुरू करने का संकल्प ले रहे हैं, तो यह विस्तृत लेख आपके लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है। यहाँ हम आपके लिए लेकर आए हैं— “Masik Shivratri 2026 Calender: कब है मासिक शिवरात्रि? जानें Month-Wise Date & Nishita Time”

इस आर्टिकल में हम साल 2026 की सभी मासिक शिवरात्रि तिथियों, ‘निशिता काल’ (Nishita Kaal) का महत्व, पूजा की सटीक विधि, व्रत के नियम और इससे जुड़े आध्यात्मिक रहस्यों पर गहराई से चर्चा करेंगे।

Masik Shivratri 2026 Calender (Quick Reference Table)

पाठकों की सुविधा के लिए यहाँ वर्ष 2026 की सभी शिवरात्रि तिथियों की एक विस्तृत टेबल दी गई है:

महीना (Month) शिवरात्रि का नाम व्रत की तारीख (Date) दिन (Day)
जनवरी माघ / पौष शिवरात्रि 17 जनवरी 2026 शनिवार
फरवरी महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) 15 फरवरी 2026 रविवार
मार्च चैत्र शिवरात्रि 18 मार्च 2026 बुधवार
अप्रैल वैशाख शिवरात्रि 16 अप्रैल 2026 गुरुवार
मई ज्येष्ठ शिवरात्रि 16 मई 2026 शनिवार
जून अधिक मास (मलमास) शिवरात्रि 14 जून 2026 रविवार
जुलाई आषाढ़ शिवरात्रि 14 जुलाई 2026 मंगलवार
अगस्त सावन (श्रावण) शिवरात्रि 12 अगस्त 2026 बुधवार
सितंबर भाद्रपद शिवरात्रि 10 सितंबर 2026 गुरुवार
अक्टूबर आश्विन शिवरात्रि 9 अक्टूबर 2026 शुक्रवार
नवंबर कार्तिक शिवरात्रि 8 नवंबर 2026 रविवार
दिसंबर मार्गशीर्ष शिवरात्रि 7 दिसंबर 2026 सोमवार

(नोट: शिवरात्रि का पारण हमेशा अगले दिन (अमावस्या की सुबह) किया जाता है। निशिता काल की पूजा के बाद आप रात में भी फलाहार ग्रहण कर सकते हैं।)

1. मासिक शिवरात्रि क्या है और इसका महत्व क्या है?

‘शिवरात्रि’ का शाब्दिक अर्थ है— ‘शिव की महान रात’। हिंदू धर्मग्रंथों (विशेषकर शिव महापुराण) के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय है।

धार्मिक मान्यताएं:

  • लिंग रूप में प्रकटीकरण: मान्यता है कि इसी मध्य रात्रि (निशिता काल) के समय भगवान शिव पहली बार एक विशाल, अनंत और प्रकाशमान ‘ज्योतिर्लिंग’ (Jyotirlinga) के रूप में प्रकट हुए थे।

  • शिव-शक्ति का मिलन: मासिक शिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन की रात माना जाता है। जो अविवाहित कन्याएं इस दिन उपवास रखती हैं, उन्हें मनचाहा और सुयोग्य जीवनसाथी (Husband) प्राप्त होता है।

  • इच्छा पूर्ति का दिन: यह व्रत असंभव को संभव बनाने की शक्ति रखता है। जिन लोगों के काम लंबे समय से रुके हुए हैं या जो गंभीर बीमारियों (Health issues) से जूझ रहे हैं, उन्हें मासिक शिवरात्रि का व्रत अवश्य करना चाहिए।

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2. ‘निशिता काल’ (Nishita Kaal) क्या होता है?

मासिक शिवरात्रि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी मुख्य पूजा दिन में नहीं, बल्कि रात के अंधेरे में की जाती है। इस विशेष समय को ‘निशिता काल’ (Nishita Kaal) कहा जाता है।

निशिता काल का अर्थ:

हिंदू पंचांग में रात्रि के समय को कई मुहूर्तों में बांटा गया है। मध्य रात्रि (Midnight) के 8वें मुहूर्त को निशिता काल कहते हैं। यह समय आमतौर पर रात 11:45 बजे से लेकर 12:35 बजे के बीच का होता है (लगभग 45 से 50 मिनट की अवधि)।

क्यों है यह समय इतना खास?

अध्यात्म और तंत्र शास्त्र के अनुसार, रात के ठीक 12 बजे के आस-पास प्रकृति बिल्कुल शांत हो जाती है। इस समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) सीधे पृथ्वी पर आती है। जब एक साधक इस निशिता काल में जागकर शिवलिंग का रुद्राभिषेक करता है, तो उसकी प्रार्थना सीधे शिव तक पहुंचती है। शिवरात्रि का व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब चतुर्दशी तिथि निशिता काल को स्पर्श कर रही हो।

3. Masik Shivratri 2026 Calender: साल 2026 की सभी 13 तिथियों की सूची

वर्ष 2026 में अधिक मास (Adhik Maas) के कारण 13 शिवरात्रियां आएंगी। आइए महीने-दर-महीने (Month-Wise) सभी तिथियों पर विस्तार से नज़र डालते हैं।

(नोट: शिवरात्रि का व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन मध्य रात्रि- निशिता काल में चतुर्दशी तिथि व्याप्त हो। स्थानीय सूर्यास्त के कारण आपके शहर में तिथियों में मामूली अंतर हो सकता है।)

1. माघ / पौष मासिक शिवरात्रि – जनवरी 2026

  • व्रत की तारीख: 17 जनवरी 2026 (शनिवार)

  • निशिता काल समय: 17 जनवरी की रात 11:50 PM से 12:40 AM तक।

  • महत्व: साल की पहली मासिक शिवरात्रि। शनिवार का दिन होने के कारण यह शिव और शनिदेव दोनों की कृपा दिलाएगी।

2. महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) – फरवरी 2026

  • व्रत की तारीख: 15 फरवरी 2026 (रविवार)

  • निशिता काल समय: 15 फरवरी की रात 11:55 PM से 12:45 AM तक।

  • महत्व: यह साल की सबसे बड़ी ‘महाशिवरात्रि’ है। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की इस रात को पूरी दुनिया में शिव पूजा का महापर्व मनाया जाता है। चारों प्रहर की पूजा का विधान है।

3. चैत्र मासिक शिवरात्रि – मार्च 2026

  • व्रत की तारीख: 18 मार्च 2026 (बुधवार)

  • निशिता काल समय: 18 मार्च की रात 11:50 PM से 12:38 AM तक।

  • महत्व: हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर) से पहले आने वाली यह शिवरात्रि पिछले वर्ष के सारे पापों और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है।

4. वैशाख मासिक शिवरात्रि – अप्रैल 2026

  • व्रत की तारीख: 16 अप्रैल 2026 (गुरुवार)

  • निशिता काल समय: 16 अप्रैल की रात 11:45 PM से 12:35 AM तक।

  • महत्व: यह व्रत ज्ञान और शिक्षा में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष फलदायी है।

5. ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि – मई 2026

  • व्रत की तारीख: 16 मई 2026 (शनिवार)

  • निशिता काल समय: 16 मई की रात 11:40 PM से 12:30 AM तक।

  • महत्व: ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में शिवलिंग पर शीतल जल चढ़ाने से मन को असीम शांति प्राप्त होती है।

6. अधिक मास (मलमास) शिवरात्रि – जून 2026

  • व्रत की तारीख: 14 जून 2026 (रविवार)

  • निशिता काल समय: 14 जून की रात 11:45 PM से 12:30 AM तक।

  • महत्व: वर्ष 2026 में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) लग रहा है। 3 साल में एक बार आने वाली इस शिवरात्रि का व्रत करने से 10 गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।

7. आषाढ़ मासिक शिवरात्रि – जुलाई 2026

  • व्रत की तारीख: 14 जुलाई 2026 (मंगलवार)

  • निशिता काल समय: 14 जुलाई की रात 11:45 PM से 12:35 AM तक।

  • महत्व: चातुर्मास की शुरुआत के समय पड़ने वाली यह शिवरात्रि मोक्ष प्रदान करने वाली है। मंगलवार को होने के कारण यह कर्ज मुक्ति (Debt relief) का महा-संयोग है।

8. सावन (श्रावण) मासिक शिवरात्रि – अगस्त 2026

  • व्रत की तारीख: 12 अगस्त 2026 (बुधवार)

  • निशिता काल समय: 12 अगस्त की रात 11:50 PM से 12:40 AM तक।

  • महत्व: महाशिवरात्रि के बाद ‘सावन शिवरात्रि’ को सबसे पवित्र माना जाता है। इसी दिन कांवड़िये (Kanwariyas) अपनी कांवड़ का जल शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। यह मनोकामना पूर्ति का सबसे बड़ा दिन है।

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9. भाद्रपद मासिक शिवरात्रि – सितंबर 2026

  • व्रत की तारीख: 10 सितंबर 2026 (गुरुवार)

  • निशिता काल समय: 10 सितंबर की रात 11:40 PM से 12:30 AM तक।

  • महत्व: गुरु ग्रह और शिवजी के इस संयोग में पूजा करने से जीवन के सभी रुके हुए मांगलिक कार्य पूर्ण होते हैं।

10. आश्विन मासिक शिवरात्रि – अक्टूबर 2026

  • व्रत की तारीख: 9 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार)

  • निशिता काल समय: 9 अक्टूबर की रात 11:35 PM से 12:25 AM तक।

  • महत्व: यह शिवरात्रि पितृ पक्ष के समापन और नवरात्रि की शुरुआत के समय आती है। यह तंत्र बाधाओं और बुरी नजर से बचाती है।

11. कार्तिक मासिक शिवरात्रि – नवंबर 2026

  • व्रत की तारीख: 8 नवंबर 2026 (रविवार)

  • निशिता काल समय: 8 नवंबर की रात 11:35 PM से 12:25 AM तक।

  • महत्व: दिवाली के आस-पास पड़ने वाली इस शिवरात्रि पर शिव जी के साथ धन के देवता कुबेर की पूजा करने से अपार धन-संपत्ति मिलती है।

12. मार्गशीर्ष मासिक शिवरात्रि – दिसंबर 2026

  • व्रत की तारीख: 7 दिसंबर 2026 (सोमवार)

  • निशिता काल समय: 7 दिसंबर की रात 11:40 PM से 12:35 AM तक।

  • महत्व: सोमवार का संयोग इस शिवरात्रि को बहुत खास बनाता है। यह चंद्र दोष को दूर कर मानसिक शांति देती है।

(वर्ष 2026 के पंचांग चक्र के अनुसार, अगली शिवरात्रि जनवरी 2027 के पहले सप्ताह में पड़ेगी।)

4. मासिक शिवरात्रि पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

मासिक शिवरात्रि का फल तभी मिलता है जब पूजा निशिता काल में शास्त्र-सम्मत विधि से की जाए। यहाँ पूजा की संपूर्ण विधि दी गई है:

चरण 1: सुबह का संकल्प

  • चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी (सूर्योदय से पूर्व) उठकर स्नान करें। सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।

  • हाथ में जल और बेलपत्र लेकर व्रत का संकल्प लें: “हे महादेव! मैं आज निराहार/फलाहार रहकर आपकी मासिक शिवरात्रि का व्रत करूंगा, कृपया मेरे व्रत को निर्विघ्न पूर्ण करें।”

  • पूरे दिन मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें।

चरण 2: निशिता काल (मध्य रात्रि) की पूजा

  • रात 11:30 बजे के आस-पास दोबारा स्नान करें या हाथ-मुंह धोकर स्वच्छ हो जाएं।

  • घर के मंदिर या शिवालय में उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा की ओर मुख करके बैठें।

  • एक थाली में पूजा की सामग्री रखें— कच्चा दूध, दही, घी, शहद, चीनी (पंचामृत), गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, सफेद चंदन, इत्र और भस्म।

चरण 3: शिवलिंग का रुद्राभिषेक

  • सबसे पहले भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा करें।

  • इसके बाद शिवलिंग पर सबसे पहले गंगाजल से अभिषेक करें।

  • फिर ‘पंचामृत’ (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से शिवलिंग का अभिषेक करें। इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र या शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।

  • अंत में फिर से शुद्ध जल चढ़ाएं।

चरण 4: श्रृंगार और आरती

  • शिवलिंग पर भस्म और सफेद चंदन का त्रिपुंड बनाएं (कुमकुम या हल्दी न लगाएं)।

  • 11 या 21 बिना कटे-फटे बेलपत्र (जिन पर चंदन से ‘राम’ लिखा हो) शिवलिंग पर उलटे करके चढ़ाएं।

  • धतूरा, भांग और आंकड़े के फूल अर्पित करें।

  • गाय के घी का दीपक जलाएं, शिव जी की आरती करें और मासिक शिवरात्रि की कथा पढ़ें।

  • पूजा के बाद क्षमा प्रार्थना करें।

5. मासिक शिवरात्रि व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं? (Vrat Diet Rules)

यह व्रत शरीर और आत्मा दोनों की शुद्धि के लिए है। व्रत के नियम इस प्रकार हैं:

क्या खा सकते हैं:

  • यह व्रत मुख्यतः फलाहार पर आधारित है। आप ताजे फल (सेब, केला, पपीता) खा सकते हैं।

  • डेयरी उत्पाद जैसे दूध, छाछ, दही और पनीर ले सकते हैं।

  • रात की पूजा संपन्न होने के बाद आप साबूदाना की खिचड़ी, सिंघाड़े के आटे की पूरी, मखाने और सेंधा नमक (Rock Salt) का सेवन कर सकते हैं।

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क्या बिल्कुल न खाएं:

  • इस दिन अन्न (गेहूं, चावल, दाल) का सेवन पूर्ण रूप से वर्जित है।

  • सफेद नमक, लाल मिर्च, गरम मसाले, लहसुन और प्याज से दूर रहें।

  • मांस-मदिरा का सेवन तो इस व्रत को खंडित कर देता है।

6. शिव पूजा के 5 महा-नियम (Things strictly prohibited in Shiva Puja)

भोलेनाथ की पूजा बहुत सरल है, लेकिन शिव पुराण के अनुसार उनकी पूजा में इन 5 चीजों का प्रयोग वर्जित है, अन्यथा पूजा का फल नहीं मिलता:

  1. केतकी का फूल: भगवान शिव की पूजा में केतकी के फूल का इस्तेमाल कभी नहीं किया जाता, क्योंकि शिवजी ने इसे अपनी पूजा से वर्जित करने का श्राप दिया था।

  2. तुलसी के पत्ते: तुलसी (वृंदा) भगवान विष्णु की प्रिया हैं। जालंधर (तुलसी के पति) का वध शिवजी ने किया था, इसलिए शिवलिंग पर तुलसी कभी नहीं चढ़ाई जाती।

  3. हल्दी और कुमकुम: हल्दी और कुमकुम को स्त्री सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि शिवलिंग एक वैरागी स्वरूप है। इसलिए शिवलिंग पर हमेशा सफेद चंदन या भस्म लगाई जाती है।

  4. शंख से जल: शंखचूड़ नामक असुर का वध महादेव ने किया था, इसलिए शंख से शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

  5. नारियल का पानी: शिवलिंग पर साबुत नारियल चढ़ाया जा सकता है, लेकिन नारियल का पानी (Coconut water) अभिषेक के लिए वर्जित है।

7. मासिक शिवरात्रि व्रत के चमत्कारी लाभ (Spiritual and Astrological Benefits)

मासिक शिवरात्रि का व्रत आपके जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकता है:

  • विवाह में आ रही बाधाएं (Marriage Issues): जिन लड़के-लड़कियों की शादी में अड़चन आ रही है, उन्हें लगातार 16 मासिक शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। इससे शिव-पार्वती की कृपा से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।

  • कर्ज और आर्थिक संकट (Financial Debts): निशिता काल में शिवलिंग पर गन्ने का रस (Sugarcane juice) चढ़ाने से घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है और भारी कर्ज उतर जाता है।

  • स्वास्थ्य और रोग मुक्ति: महामृत्युंजय मंत्र के जाप के साथ रुद्राभिषेक करने से पुराने और असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है।

  • मानसिक शांति: शिव (महाकाल) को चंद्रमा (मन का कारक) अपने मस्तक पर धारण करने वाला माना गया है। यह व्रत डिप्रेशन (Depression) और एंग्जायटी को खत्म कर मन को असीम शांति प्रदान करता है।

भारतीय पंचांग और वैदिक संस्कृति में चतुर्दशी की यह काली रात कोई साधारण रात नहीं है। जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब एक सच्चा शिव भक्त जागकर उस परमसत्ता से जुड़ता है।

इस अत्यंत विस्तृत लेख “Masik Shivratri 2026 Calender: कब है मासिक शिवरात्रि? जानें Month-Wise Date & Nishita Time” के माध्यम से हमने आपको वर्ष 2026 के पूरे व्रत-चक्र और ‘निशिता काल’ के गहरे विज्ञान के बारे में जानकारी दी है। वर्ष 2026 में अधिक मास के संयोग के कारण आपको शिव भक्ति का एक अतिरिक्त अवसर प्राप्त हो रहा है।

कलियुग में भगवान शिव ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो मात्र एक लोटा जल और सच्चे भाव से पिघल जाते हैं। आप भी साल 2026 में इस व्रत को शुरू करें। रात के सन्नाटे में जब आप “ॐ नमः शिवाय” का उच्चारण करेंगे, तो आप महसूस करेंगे कि ब्रह्मांड की सारी सकारात्मक ऊर्जा आपके भीतर प्रवाहित हो रही है। महादेव आपके जीवन के सारे कष्ट हरें और आपको सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दें।

हर हर महादेव! जय शिव शम्भू!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि कब है?

उत्तर: हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी 2026 (रविवार) को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा।

प्रश्न 2: मासिक शिवरात्रि में ‘निशिता काल’ (Nishita Kaal) का समय क्या होता है?

उत्तर: निशिता काल मध्य रात्रि का वह समय है जब भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। यह समय आमतौर पर रात 11:45 बजे से लेकर 12:35 बजे के बीच (लगभग 40 से 50 मिनट) होता है। शिवरात्रि की मुख्य पूजा इसी समय करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

प्रश्न 3: क्या महिलाएं (स्त्रियां) शिवलिंग को स्पर्श कर सकती हैं?

उत्तर: हाँ, शिव पुराण के अनुसार महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग का अभिषेक कर सकती हैं और उसे स्पर्श कर सकती हैं। केवल मासिक धर्म (Periods) के दौरान महिलाओं को पूजा के बर्तन या शिवलिंग को नहीं छूना चाहिए, इस दौरान वे मानसिक रूप से मंत्रों का जाप कर सकती हैं।

प्रश्न 4: मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत में क्या अंतर है?

उत्तर: प्रदोष व्रत त्रयोदशी (13वीं) तिथि को शाम के समय (प्रदोष काल) रखा जाता है, जबकि मासिक शिवरात्रि चतुर्दशी (14वीं) तिथि को मध्य रात्रि (निशिता काल) में रखी जाती है। प्रदोष व्रत में पूजा सूर्यास्त के समय होती है और शिवरात्रि में रात के 12 बजे।

प्रश्न 5: क्या मासिक शिवरात्रि के व्रत में सोना (Sleeping) मना है?

उत्तर: शिवरात्रि के व्रत का एक अहम नियम ‘रात्रि जागरण’ है। जो भक्त पूर्ण फल की इच्छा रखते हैं, वे निशिता काल की पूजा के बाद रात भर सोते नहीं हैं और शिव भजनों या मंत्रों का जाप करते हैं। हालांकि, यदि स्वास्थ्य ठीक न हो तो पूजा के पश्चात विश्राम किया जा सकता है।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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