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Chaturthi 2026 Calendar: साल 2026 की सभी विनायक और संकष्टी चतुर्थी Dates & चंद्रोदय का TimeIt takes 16 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू धर्म में किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य का आरंभ प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश (Lord Ganesha) की स्तुति के बिना नहीं किया जाता। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति और संकटमोचन कहा जाता है। हिंदू पंचांग (Hindu Calendar) के अनुसार, भगवान गणेश को समर्पित सबसे पवित्र तिथि ‘चतुर्थी’ (Chaturthi) होती है। हर चंद्र मास (Lunar Month) में दो चतुर्थी तिथियां आती हैं— एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में।

कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ‘संकष्टी चतुर्थी’ (Sankashti Chaturthi) कहा जाता है, जिसका अर्थ है संकटों को हरने वाली चतुर्थी। वहीं शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ‘विनायक चतुर्थी’ (Vinayaka Chaturthi) या वरद चतुर्थी कहा जाता है, जो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।

जो भक्त नियमित रूप से हर महीने इन दोनों चतुर्थियों का उपवास रखते हैं, उनके जीवन में कभी भी कोई विघ्न या दरिद्रता नहीं टिक पाती। वर्ष 2026 भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ है। यदि आप भी नए साल में बप्पा के इन पवित्र व्रतों को रखने का संकल्प ले रहे हैं, तो आपके लिए शुभ तिथियों और चंद्रोदय (Moonrise) के समय की सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है।

इस बेहद विस्तृत, शोधपरक और प्रामाणिक लेख में हम आपके लिए लेकर आए हैं— “Chaturthi 2026 Calendar: साल 2026 की सभी विनायक और संकष्टी चतुर्थी Dates & Moonrise Time”। इस आर्टिकल में हम आपको साल 2026 की सभी 24 से अधिक चतुर्थी तिथियों, चंद्रोदय के समय, पूजा की शास्त्र-सम्मत विधि, व्रत के नियम और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे।

Chaturthi 2026 List (विनायक और संकष्टी चतुर्थी सूची)

पाठकों की सुविधा के लिए यहाँ वर्ष 2026 की दोनों चतुर्थियों की एक संयुक्त टेबल दी गई है:

महीना (Month) संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण पक्ष) विनायक चतुर्थी (शुक्ल पक्ष)
जनवरी 2026 7 जनवरी (बुधवार) 22 जनवरी (गुरुवार)
फरवरी 2026 6 फरवरी (शुक्रवार) 21 फरवरी (शनिवार)
मार्च 2026 7 मार्च (शनिवार) 22 मार्च (रविवार)
अप्रैल 2026 6 अप्रैल (सोमवार) 21 अप्रैल (मंगलवार)
मई 2026 5 मई (मंगलवार) – अंगारकी 20 मई (बुधवार)
जून 2026 4 जून (गुरुवार) 19 जून (शुक्रवार)
जुलाई 2026 3 जुलाई (शुक्रवार) 18 जुलाई (शनिवार)
अगस्त 2026 2 अगस्त & 31 अगस्त 16 अगस्त (रविवार)
सितंबर 2026 (अगस्त में कवर) 15 सितंबर (गणेश चतुर्थी)
अक्टूबर 2026 29 अक्टूबर (करवा चौथ) 15 अक्टूबर (गुरुवार)
नवंबर 2026 28 नवंबर (शनिवार) 13 नवंबर (शुक्रवार)
दिसंबर 2026 27 दिसंबर (रविवार) 12 दिसंबर (शनिवार)

(नोट: चंद्र मास और अंग्रेजी कैलेंडर के दिनों की संख्या में अंतर होने के कारण अगस्त महीने में दो संकष्टी तिथियां पड़ रही हैं।)

1. विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी में क्या मुख्य अंतर है?

महीने में आने वाली इन दोनों चतुर्थियों के व्रत, नियम और पूजा विधि में बहुत बड़ा अंतर होता है, जिसे समझना हर व्रतधारी के लिए आवश्यक है:

संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi)

  • पक्ष: यह पूर्णिमा के बाद आने वाले ‘कृष्ण पक्ष’ की चतुर्थी को मनाई जाती है।

  • उद्देश्य: जीवन के संकटों, बीमारियों, कर्जों और शत्रुओं से मुक्ति पाने के लिए।

  • पारण (व्रत खोलना): इस व्रत में पूरे दिन उपवास रखा जाता है और रात के समय चंद्रमा (Moon) को देखने और उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही अन्न या फलाहार ग्रहण किया जाता है। इसमें चंद्र दर्शन अनिवार्य है।

  • विशेष योग: जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे ‘अंगारकी चतुर्थी’ (Angarki Chaturthi) कहा जाता है।

विनायक चतुर्थी (Vinayaka Chaturthi)

  • पक्ष: यह अमावस्या के बाद आने वाले ‘शुक्ल पक्ष’ की चतुर्थी को मनाई जाती है।

  • उद्देश्य: ज्ञान, बुद्धि, ऐश्वर्य, संतान सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए।

  • पारण (व्रत खोलना): विनायक चतुर्थी की मुख्य पूजा दोपहर (Mid-day) के समय की जाती है। इसमें चंद्रमा की पूजा नहीं होती। वास्तव में, विनायक चतुर्थी (विशेषकर भाद्रपद माह की) के दिन चंद्र दर्शन वर्जित (Prohibited) माना जाता है।

2. Sankashti Chaturthi 2026 Calendar: संकष्टी चतुर्थी की Dates & Moonrise Time

संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन पर निर्भर करता है। वर्ष 2026 में आने वाली सभी संकष्टी चतुर्थियों की संभावित तिथियां, गणेश जी के विशिष्ट स्वरूप और चंद्रोदय (Moonrise) का अनुमानित समय इस प्रकार है:

(नोट: चंद्रोदय का सटीक समय आपके शहर की भौगोलिक स्थिति- Longitude/Latitude के अनुसार कुछ मिनट भिन्न हो सकता है। यहाँ दिया गया समय भारतीय मानक समय- IST के अनुसार अनुमानित है।)

1. अखुरथ संकष्टी चतुर्थी (जनवरी 2026)

  • व्रत की तारीख: 7 जनवरी 2026 (बुधवार)

  • हिंदू मास: पौष, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 08:45 PM से 09:10 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: महा-गणपति

  • महत्व: साल की शुरुआत इस व्रत से होती है। यह शत्रुओं पर विजय और कार्यों की निर्विघ्न शुरुआत के लिए किया जाता है।

2. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी (फरवरी 2026)

  • व्रत की तारीख: 6 फरवरी 2026 (शुक्रवार)

  • हिंदू मास: माघ, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 09:15 PM से 09:35 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: द्विजप्रिय गणेश

  • महत्व: यह व्रत शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी है। विद्यार्थियों के लिए यह सर्वश्रेष्ठ है।

3. भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी (मार्च 2026)

  • व्रत की तारीख: 7 मार्च 2026 (शनिवार)

  • हिंदू मास: फाल्गुन, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 09:30 PM से 09:50 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: भालचंद्र गणेश

  • महत्व: यह व्रत मन की शांति, मानसिक अवसाद को दूर करने और चंद्र दोष की शांति के लिए किया जाता है।

4. विकट संकष्टी चतुर्थी (अप्रैल 2026)

  • व्रत की तारीख: 6 अप्रैल 2026 (सोमवार)

  • हिंदू मास: चैत्र, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 09:45 PM से 10:10 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: विकट गणेश

  • महत्व: यह व्रत भयंकर संकटों और अचानक आने वाली दुर्घटनाओं से परिवार की रक्षा करता है।

5. एकदंत संकष्टी / अंगारकी चतुर्थी (मई 2026)

  • व्रत की तारीख: 5 मई 2026 (मंगलवार) – महा-मंगलकारी अंगारकी चतुर्थी

  • हिंदू मास: वैशाख, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 10:00 PM से 10:25 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: एकदंत गणेश

  • महत्व: मंगलवार को पड़ने के कारण यह ‘अंगारकी चतुर्थी’ है। यह साल भर की चतुर्थियों का पुण्य एक साथ दिलाती है। कर्जों से मुक्ति का यह राम-बाण उपाय है।

6. कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी (जून 2026)

  • व्रत की तारीख: 4 जून 2026 (गुरुवार)

  • हिंदू मास: ज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 10:10 PM से 10:30 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: कृष्णपिंगल गणेश

  • महत्व: यह शारीरिक रोगों को दूर कर आरोग्य और लंबी आयु प्रदान करता है।

7. गजानन संकष्टी चतुर्थी (जुलाई 2026)

  • व्रत की तारीख: 3 जुलाई 2026 (शुक्रवार)

  • हिंदू मास: आषाढ़, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 09:50 PM से 10:15 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: गजानन

  • महत्व: परिवार में सुख, शांति और दांपत्य जीवन में मधुरता के लिए यह व्रत बहुत शुभ है।

8. हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी (अगस्त 2026)

  • व्रत की तारीख: 2 अगस्त 2026 (रविवार)

  • हिंदू मास: श्रावण (सावन), कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 09:20 PM से 09:45 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: हेरम्ब महागणपति

  • महत्व: सावन के महीने में शिव और गणेश जी की एक साथ आराधना करने से व्यापार में अपार सफलता मिलती है।

9. विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी (अगस्त/सितंबर 2026)

  • व्रत की तारीख: 31 अगस्त 2026 (सोमवार)

  • हिंदू मास: भाद्रपद, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 08:50 PM से 09:15 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: विघ्नराज गणेश

  • महत्व: यह व्रत फंसा हुआ धन वापस पाने और संपत्ति विवादों को सुलझाने में सहायक है।

10. वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी / करवा चौथ (अक्टूबर 2026)

  • व्रत की तारीख: 29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)

  • हिंदू मास: आश्विन/कार्तिक, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 08:15 PM से 08:40 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: वक्रतुंड गणेश

  • महत्व: उत्तर भारत में सुहागिन महिलाएं इसी दिन पति की लंबी आयु के लिए ‘करवा चौथ’ का महान व्रत रखती हैं।

11. गणाधिप संकष्टी चतुर्थी (नवंबर 2026)

  • व्रत की तारीख: 28 नवंबर 2026 (शनिवार)

  • हिंदू मास: मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 08:20 PM से 08:45 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: गणाधिप गणेश

  • महत्व: संतान प्राप्ति और घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए यह व्रत किया जाता है।

12. अखुरथ संकष्टी चतुर्थी (दिसंबर 2026)

  • व्रत की तारीख: 27 दिसंबर 2026 (रविवार)

  • हिंदू मास: पौष, कृष्ण पक्ष

  • चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 08:35 PM से 09:00 PM के बीच

  • गणेश स्वरूप: महा-गणपति

  • महत्व: यह वर्ष 2026 की अंतिम संकष्टी है। यह पुराने सभी संकटों का नाश करती है।

(अधिक मास होने की स्थिति में एक ‘विभुवन पावन संकष्टी चतुर्थी’ का व्रत भी पंचांग में जुड़ सकता है।)

3. Vinayaka Chaturthi 2026 Calendar: विनायक चतुर्थी की तिथियां

विनायक चतुर्थी का व्रत दोपहर (मध्याह्न) की पूजा पर आधारित होता है। वर्ष 2026 में आने वाली विनायक चतुर्थी तिथियां इस प्रकार हैं:

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1. पौष विनायक चतुर्थी (जनवरी 2026)

  • व्रत की तारीख: 22 जनवरी 2026 (गुरुवार)

  • महत्व: नववर्ष में सद्बुद्धि और कार्यसिद्धि के लिए।

2. माघ विनायक / तिलकुंद चतुर्थी (फरवरी 2026)

  • व्रत की तारीख: 21 फरवरी 2026 (शनिवार)

  • महत्व: इसे तिलकुंद चतुर्थी भी कहते हैं। इस दिन तिल का दान और भगवान गणेश को तिल के लड्डू का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है।

3. फाल्गुन विनायक चतुर्थी (मार्च 2026)

  • व्रत की तारीख: 22 मार्च 2026 (रविवार)

  • महत्व: पारिवारिक क्लेश को दूर करने के लिए यह व्रत उत्तम है।

4. चैत्र विनायक चतुर्थी (अप्रैल 2026)

  • व्रत की तारीख: 21 अप्रैल 2026 (मंगलवार)

  • महत्व: यह हिंदू नववर्ष की पहली विनायक चतुर्थी है। मंगलवार होने के कारण यह अत्यंत मंगलकारी है।

5. वैशाख विनायक चतुर्थी (मई 2026)

  • व्रत की तारीख: 20 मई 2026 (बुधवार)

  • महत्व: बुधवार गणेश जी का अपना दिन है। इस दिन का व्रत व्यापार में भारी लाभ देता है।

6. ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी (जून 2026)

  • व्रत की तारीख: 19 जून 2026 (शुक्रवार)

  • महत्व: सुख, ऐश्वर्य और वैभव की प्राप्ति के लिए।

7. आषाढ़ विनायक चतुर्थी (जुलाई 2026)

  • व्रत की तारीख: 18 जुलाई 2026 (शनिवार)

  • महत्व: चातुर्मास के दौरान भगवान गणेश की स्तुति कर मनोकामना पूर्ति के लिए।

8. श्रावण विनायक चतुर्थी (अगस्त 2026)

  • व्रत की तारीख: 16 अगस्त 2026 (रविवार)

  • महत्व: सावन के महीने में भगवान शिव के साथ गणेश पूजा का विशेष पुण्य।

9. भाद्रपद विनायक / गणेश चतुर्थी (सितंबर 2026)

  • व्रत की तारीख: 15 सितंबर 2026 (मंगलवार)

  • महत्व: यह साल की सबसे बड़ी चतुर्थी है— गणेश उत्सव का आरंभ! इसी दिन बप्पा घर-घर में विराजते हैं। इसे ‘कलंक चतुर्थी’ भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन चंद्र दर्शन करने से झूठा कलंक लगता है।

10. आश्विन विनायक चतुर्थी (अक्टूबर 2026)

  • व्रत की तारीख: 15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)

  • महत्व: नवरात्रि के ठीक बाद आने वाली यह चतुर्थी शक्ति और ज्ञान दोनों प्रदान करती है।

11. कार्तिक विनायक चतुर्थी (नवंबर 2026)

  • व्रत की तारीख: 13 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

  • महत्व: दिवाली के आस-पास यह व्रत लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त कृपा दिलाता है।

12. मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी (दिसंबर 2026)

  • व्रत की तारीख: 12 दिसंबर 2026 (शनिवार)

  • महत्व: वर्ष की अंतिम विनायक चतुर्थी, जो आने वाले समय को संकट-मुक्त करती है।

4. संकष्टी चतुर्थी की पूजा और चंद्र अर्घ्य विधि (Puja Vidhi)

संकष्टी चतुर्थी का पूर्ण फल तभी मिलता है जब पूजा शास्त्रों में बताई गई सही विधि से की जाए।

सुबह की पूजा का संकल्प

  1. ब्रह्म मुहूर्त स्नान: चतुर्थी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें। स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।

  2. संकल्प: घर के मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने हाथ में जल और अक्षत (चावल) लेकर व्रत का संकल्प लें।

  3. स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें। कुमकुम, अक्षत और चंदन से तिलक करें।

  4. दूर्वा अर्पण: भगवान गणेश को 21 ‘दूर्वा’ (हरी घास) की गांठें अर्पित करें। यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है।

  5. भोग: मोदक, बेसन के लड्डू या गुड़-तिल का भोग लगाएं।

रात की पूजा और चंद्र दर्शन (Moonrise Arghya)

संकष्टी का व्रत बिना चंद्र दर्शन के अधूरा है:

  1. रात के समय पंचांग के अनुसार जब चंद्रोदय (Moonrise) हो जाए, तो चंद्रमा की ओर मुख करके खड़े हों।

  2. एक चांदी या तांबे के कलश में शुद्ध जल लें। उसमें थोड़ा कच्चा दूध, सफेद चंदन, चावल और सफेद फूल डालें।

  3. चंद्रमा को इस जल से अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जाप करें:

    “गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥”

  4. इसके बाद भगवान गणेश की कपूर से आरती करें और फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करके अपना व्रत खोलें (पारण करें)।

5. विनायक चतुर्थी की पूजा विधि (Vinayaka Chaturthi Puja)

चूंकि विनायक चतुर्थी में चंद्र दर्शन नहीं होता, इसलिए इसकी पूजा का समय और तरीका अलग होता है:

  1. मध्याह्न पूजा: विनायक चतुर्थी की मुख्य पूजा दोपहर (मध्याह्न) के समय की जाती है।

  2. गणेश स्थापना: लाल कपड़े पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें जनेऊ (Yagnopavit) पहनाएं।

  3. लाल सिंदूर: भगवान गणेश को लाल सिंदूर अत्यंत प्रिय है। उन्हें सिंदूर का चोला या तिलक लगाएं।

  4. मोदक का भोग: 21 मोदकों का भोग लगाएं। ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।

  5. पारण: दोपहर की पूजा और आरती संपन्न होने के बाद आप अपना व्रत खोल सकते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

6. चतुर्थी व्रत के कड़े नियम और सावधानियां (Vrat Rules)

“Chaturthi 2026 Calendar: साल 2026 की सभी विनायक और संकष्टी चतुर्थी Dates” जानने के साथ-साथ व्रत के अनुशासन का पालन करना भी अनिवार्य है:

क्या खाएं? (What to Eat)

  • फलाहार: दिन के समय आप सेब, केला, संतरा जैसे ताजे फल और फलों का रस ले सकते हैं।

  • डेयरी: दूध, दही और छाछ का सेवन किया जा सकता है।

  • शाम का भोजन: व्रत खोलने के बाद साबूदाने की खिचड़ी, सिंघाड़े के आटे की पूरी, मखाने की खीर और सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है।

क्या न करें? (Strictly Avoid)

  • तुलसी का प्रयोग वर्जित: भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग पूर्ण रूप से वर्जित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी जी ने गणेश जी को विवाह का प्रस्ताव दिया था जिसे ठुकराने पर दोनों ने एक-दूसरे को श्राप दिया था।

  • तामसिक भोजन: लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन घर में भी नहीं होना चाहिए।

  • काले कपड़े: पूजा करते समय काले या गहरे नीले रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है।

  • दिन में सोना: शास्त्रों के अनुसार किसी भी व्रत के दौरान दिन में सोना (Day sleeping) वर्जित है।

7. अंगारकी चतुर्थी (Angarki Chaturthi) का रहस्य क्या है?

वर्ष 2026 के कैलेंडर में 5 मई को ‘अंगारकी चतुर्थी’ पड़ रही है। जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है, तो वह ‘अंगारकी चतुर्थी’ कहलाती है।

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पौराणिक कथा:

मत्स्य पुराण के अनुसार, ऋषि भारद्वाज के पुत्र ‘मंगल’ (अंगारक) ने भगवान गणेश की कठोर तपस्या की थी। जब गजानन प्रकट हुए, तो मंगल ने उनसे वरदान मांगा कि उनका नाम हमेशा भगवान गणेश के साथ जुड़ा रहे।

तब गणेश जी ने आशीर्वाद दिया कि— “आज मंगलवार है और चतुर्थी तिथि है। जो भी भक्त मंगलवार को पड़ने वाली इस ‘अंगारकी चतुर्थी’ का व्रत करेगा, उसके जीवन के सबसे बड़े संकट नष्ट हो जाएंगे। इस एक व्रत को करने से उसे साल भर की चतुर्थियों का पुण्य प्राप्त हो जाएगा।”

इसलिए यदि आप हर महीने व्रत नहीं कर पाते हैं, तो 5 मई 2026 की अंगारकी चतुर्थी का व्रत अवश्य रखें। यह भारी कर्जों (Debts) से मुक्ति दिलाने और मंगल दोष को शांत करने का अमोघ उपाय है।

8. भाद्रपद गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों वर्जित है? (The Curse of the Moon)

विनायक चतुर्थी, विशेषकर भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (Ganesh Chaturthi – 15 सितंबर 2026) के दिन चंद्रमा को देखना बहुत अशुभ माना जाता है। इसे ‘कलंक चतुर्थी’ भी कहते हैं।

कथा:

एक बार भगवान गणेश अपने वाहन मूषक (चूहे) पर सवार होकर जा रहे थे। अचानक चूहा एक सांप को देखकर डर गया और उछल पड़ा, जिससे गणेश जी का संतुलन बिगड़ गया और वे गिर पड़े। आसमान से यह दृश्य देखकर चंद्रदेव (Moon) जोर-जोर से हंसने लगे और गणेश जी के रूप का उपहास उड़ाने लगे।

क्रोधित होकर भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया कि— “तुम्हें अपने रूप का बहुत घमंड है। आज से तुम्हारा प्रकाश नष्ट हो जाएगा और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जो भी व्यक्ति तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर झूठा कलंक (False Allegation) लगेगा।”

यही कारण है कि गणेश चतुर्थी के दिन आसमान की तरफ देखना और चंद्रमा के दर्शन करना वर्जित है। यदि भूलवश चंद्र दर्शन हो जाए, तो ‘स्यमंतक मणि’ की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए, ताकि कलंक का प्रभाव कम हो सके।

9. चतुर्थी व्रत का वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व

यह व्रत केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी शरीर के लिए फायदेमंद है:

  1. चंद्रमा और मन का संतुलन: ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। संकष्टी चतुर्थी पूर्णिमा के ठीक 4 दिन बाद आती है, जब चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी पर बहुत सक्रिय होता है। उपवास रखने से शरीर का जल-तत्व संतुलित रहता है और मानसिक तनाव (Anxiety/Depression) दूर होता है।

  2. केतु ग्रह की शांति: भगवान गणेश ‘केतु’ ग्रह के अधिपति देवता हैं। कुंडली में केतु खराब होने पर काम अचानक बिगड़ जाते हैं। गणेश जी की पूजा करने से केतु के दुष्ट प्रभाव शांत होते हैं और स्थिरता आती है।

  3. पाचन तंत्र की शुद्धि (Detoxification): हर 15 दिन में एक बार अन्न का त्याग करने से हमारी आंतों को आराम मिलता है। शरीर खुद को रिपेयर करता है (ऑटोफैगी), जिससे इम्यूनिटी बढ़ती है और रोग दूर होते हैं।

भारतीय वैदिक पंचांग की चतुर्थी तिथि कोई साधारण तिथि नहीं है; यह प्रथम पूज्य भगवान गणेश के प्रति हमारे अटूट विश्वास, धैर्य और समर्पण का प्रतीक है।

इस अत्यंत विस्तृत लेख “Chaturthi 2026 Calendar: साल 2026 की सभी विनायक और संकष्टी चतुर्थी Dates & Moonrise Time” के माध्यम से हमने आपको वर्ष 2026 के पूरे व्रत-चक्र की सटीक जानकारी देने का प्रयास किया है।

चाहे आप जीवन में विद्या प्राप्ति की कामना कर रहे हों (विनायक चतुर्थी), या फिर अपने ऊपर आए संकटों और कर्जों से मुक्ति पाना चाहते हों (संकष्टी चतुर्थी), भगवान गणेश की आराधना कभी खाली नहीं जाती। 2026 में आप इन तिथियों को अपने डायरी या मोबाइल में सेव कर लें ताकि कोई भी व्रत छूटे नहीं। पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ गणपति बप्पा का ध्यान करें, वे अदृश्य रक्षक बनकर आपके सभी विघ्नों को हर लेंगे।

॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥

॥ गणपति बाप्पा मोरया ॥

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: वर्ष 2026 में सबसे बड़ी ‘गणेश चतुर्थी’ (Ganesh Chaturthi) कब है?

उत्तर: साल 2026 में 10 दिनों तक चलने वाला सबसे बड़ा पर्व ‘गणेश चतुर्थी’ (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी) 15 सितंबर 2026 (मंगलवार) को मनाया जाएगा। इसी दिन घरों और पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना होती है।

प्रश्न 2: यदि बारिश या कोहरे के कारण रात को चंद्रमा दिखाई न दे, तो संकष्टी व्रत कैसे खोलें?

उत्तर: यदि मौसम खराब होने के कारण चंद्र दर्शन न हो पाएं, तो आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। अपने शहर के पंचांग में दिए गए ‘चंद्रोदय समय’ (Moonrise Time) पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके चंद्रमा का मानसिक ध्यान करें और अर्घ्य दे दें। भगवान आपकी भावना देखते हैं। इसके बाद आप भोजन कर सकते हैं।

प्रश्न 3: क्या गर्भवती महिलाएं (Pregnant Women) चतुर्थी का व्रत रख सकती हैं?

उत्तर: हिंदू धर्म में गर्भवती महिलाओं को कठोर (निराहार) व्रत रखने की मनाही है। वे फलाहारी (फल और दूध) के साथ यह व्रत रख सकती हैं, लेकिन उन्हें भूखा रहकर अपने स्वास्थ्य और शिशु को कष्ट नहीं देना चाहिए। केवल मन से पूजा कर लेना ही पर्याप्त है।

प्रश्न 4: विनायक चतुर्थी में चंद्रमा की पूजा क्यों नहीं होती?

उत्तर: विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष में आती है, जो सूर्य के प्रभाव का समय होता है। इसकी मुख्य पूजा मध्याह्न (दोपहर) में की जाती है। इसके अलावा, भाद्रपद मास की विनायक चतुर्थी को चंद्रमा ने गणेश जी का उपहास किया था, जिसके श्राप के कारण शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर चंद्र दर्शन और पूजा को निषेध माना गया है।

प्रश्न 5: चतुर्थी व्रत में भगवान गणेश को ‘दूर्वा’ (घास) क्यों चढ़ाई जाती है?

उत्तर: कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश ने अनलासुर नामक भयंकर राक्षस को निगल लिया था, जिससे उनके शरीर में अत्यधिक जलन होने लगी। तब सभी देवी-देवताओं ने उनके शरीर पर 21 दूर्वा (घास) की गांठे रखीं, जो बहुत शीतल होती है। इससे उनकी जलन शांत हुई। तभी से दूर्वा गणेश जी को अत्यंत प्रिय हो गई और इसके बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।

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