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Chaturmas 2026 Calendar: देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक, जानें Full Date ListIt takes 14 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति में समय की गणना केवल कैलेंडर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं, ग्रहों के गोचर और ईश्वर की दिव्य चेतना से जुड़ी हुई है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में एक ऐसा समय आता है, जब संपूर्ण सृष्टि की बाहरी गतिविधियां कुछ समय के लिए थम जाती हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा आंतरिक विकास की ओर मुड़ जाती है। इस पवित्र और अलौकिक चार महीने की अवधि को ‘चातुर्मास’ (Chaturmas) कहा जाता है।

चातुर्मास का आरंभ आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की ‘देवशयनी एकादशी’ (Devshayani Ekadashi) से होता है और इसका समापन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की ‘देवउठनी एकादशी’ (Devuthani Ekadashi) को होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु (Lord Vishnu) क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर ‘योग निद्रा’ (Divine Sleep) में चले जाते हैं। भगवान विष्णु के विश्राम काल में जाने के कारण इस दौरान विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत, और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक व शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है।

हालांकि, मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित होने के बावजूद, आध्यात्मिक दृष्टि से चातुर्मास को वर्ष का सबसे शक्तिशाली और पवित्र समय माना गया है। यह समय तप, जप, साधना, व्रत, दान और आत्म-शुद्धि के लिए कल्पवृक्ष के समान है। संन्यासी और ऋषि-मुनि इन चार महीनों में यात्राएं बंद करके एक ही स्थान पर रहकर कठिन साधना करते हैं।

यदि आप वर्ष 2026 में चातुर्मास के नियमों का पालन करना चाहते हैं, अपनी आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं या व्रत-त्योहारों की योजना बना रहे हैं, तो यह विस्तृत लेख आपके लिए ही है। इस आर्टिकल में हम आपको “Chaturmas 2026 Calendar: देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक, जानें Full Date List” की पूरी जानकारी देंगे, जिसमें सटीक तिथियां, वर्जित कार्य, खान-पान के नियम और इसका वैज्ञानिक आधार शामिल हैं।

1. चातुर्मास क्या है? इसका पौराणिक और आध्यात्मिक रहस्य

‘चातुर्मास’ दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘चातुर’ (चार) और ‘मास’ (महीने)। यह आषाढ़, श्रावण (सावन), भाद्रपद (भादो), और आश्विन (क्वार) के महीनों को मिलाकर बनता है। कार्तिक मास के शुरुआती ग्यारह दिन भी इसी के अंतर्गत आते हैं।

पौराणिक कथा और योग निद्रा का रहस्य

शिव महापुराण और श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, राजा बलि ने अपनी दानवीरता और कठिन तपस्या से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। देवराज इंद्र और अन्य देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने ‘वामन अवतार’ (Vamana Avatar) लिया और तीन पग में राजा बलि से सब कुछ दान में मांग लिया।

भगवान विष्णु ने दो पग में धरती और स्वर्ग को नाप लिया और तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान बलि की इस भक्ति और दानवीरता से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया। जब भगवान ने बलि से वरदान मांगने को कहा, तो बलि ने मांग लिया कि “हे प्रभु! आप सदैव मेरे साथ पाताल लोक में निवास करें।”

वचनबद्ध होने के कारण भगवान विष्णु को पाताल लोक जाना पड़ा, जिससे वैकुंठ सूना हो गया। माता लक्ष्मी अत्यंत व्याकुल हो गईं। तब माता लक्ष्मी ने एक गरीब स्त्री का रूप धारण किया और पाताल लोक जाकर राजा बलि को रक्षा सूत्र (राखी) बांधा। जब बलि ने उपहार देने की बात कही, तो माता लक्ष्मी ने अपने वास्तविक रूप में आकर भगवान विष्णु को वापस मांग लिया।

राजा बलि ने भगवान को विदा तो कर दिया, लेकिन वे दुखी हो गए। तब भगवान विष्णु ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा कि “हे बलि! तुम दुखी मत हो। मैं हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक (चार महीने) तुम्हारे पास पाताल लोक में निवास करूंगा और सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव को सौंप दूंगा।”

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तभी से इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है, जहाँ भगवान विष्णु विश्राम करते हैं और पूरी पृथ्वी का संचालन महादेव (Lord Shiva) के हाथों में आ जाता है। यही कारण है कि चातुर्मास का पहला महीना सावन पूरी तरह से शिव जी को समर्पित होता है।

2. Chaturmas 2026 Calendar: देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक की Full Date List

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में चातुर्मास की समय अवधि बहुत महत्वपूर्ण रहने वाली है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 (शनिवार) को पड़ रही है। इसी दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाएंगे और चातुर्मास का आरंभ हो जाएगा।

चातुर्मास का समापन कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी को 21 नवंबर 2026 (शनिवार) को होगा, जब भगवान विष्णु जागेंगे और तुलसी विवाह के साथ ही देश भर में दोबारा शहनाइयां बजनी शुरू हो जाएंगी।

आइए, Chaturmas 2026 Calendar की मुख्य तिथियों को एक व्यापक तालिका (Table) के माध्यम से देखते हैं, ताकि आप अपनी साधना और व्रत की रूपरेखा तैयार कर सकें:

Chaturmas 2026 Full Date List & Calendar

चातुर्मास घटना / मुख्य तिथि 2026 में सटीक तारीख (Date) दिन (Day) हिंदू पंचांग तिथि
चातुर्मास आरंभ (देवशयनी एकादशी) 25 जुलाई 2026 शनिवार आषाढ़ शुक्ल एकादशी
श्रावण (सावन) महीना आरंभ 30 जुलाई 2026 गुरुवार श्रावण कृष्ण प्रतिपदा
सावन शिवरात्रि (कांवड़ जल अर्पण) 12 अगस्त 2026 बुधवार श्रावण कृष्ण चतुर्दशी
रक्षाबंधन (सावन पूर्णिमा) 28 अगस्त 2026 शुक्रवार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 शुक्रवार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी
गणेश चतुर्थी (गणेशोत्सव आरंभ) 15 सितंबर 2026 मंगलवार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
पितृ पक्ष (श्राद्ध काल) आरंभ 27 सितंबर 2026 रविवार भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा
सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष समाप्त) 10 अक्टूबर 2026 शनिवार आश्विन कृष्ण अमावस्या
शारदीय नवरात्रि (घटस्थापना) 11 अक्टूबर 2026 रविवार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा
विजयदशमी (दशहरा) 19 अक्टूबर 2026 सोमवार आश्विन शुक्ल दशमी
करवा चौथ व्रत 29 अक्टूबर 2026 गुरुवार कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
धनतेरस पूजा 6 नवंबर 2026 शुक्रवार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी
दीपावली (महालक्ष्मी पूजा) 8 नवंबर 2026 रविवार कार्तिक कृष्ण अमावस्या
छठ पूजा (संध्या अर्घ्य) 14 नवंबर 2026 शनिवार कार्तिक शुक्ल षष्ठी
चातुर्मास समाप्त (देवउठनी एकादशी) 21 नवंबर 2026 शनिवार कार्तिक शुक्ल एकादशी

3. चातुर्मास के 4 महीनों के विशिष्ट व्रत और त्याग नियम

चातुर्मास के दौरान केवल मानसिक साधना ही नहीं की जाती, बल्कि हमारे ऋषियों ने शरीर को निरोगी रखने के लिए ‘महीनेवार खान-पान के त्याग’ (Dietary Renunciation) का एक अद्भुत वैज्ञानिक नियम बनाया है। चातुर्मास के इन चार महीनों में अलग-अलग खाद्य पदार्थों का त्याग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बनी रहती है:

I. पहला महीना: श्रावण (सावन) मास — हरी सब्जियों का त्याग

  • अवधि: 30 जुलाई 2026 से 28 अगस्त 2026 तक।

  • त्याग नियम: सावन के महीने में हरी पत्तेदार सब्जियों (Green Leafy Vegetables) जैसे पालक, मेथी, बथुआ, गोभी आदि का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना गया है।

  • वैज्ञानिक कारण: सावन मानसून का पहला और सबसे भारी बारिश का महीना होता है। इस समय वातावरण में अत्यधिक नमी के कारण हरी सब्जियों पर कीड़े, बैक्टीरिया और फंगस बहुत तेजी से पनपते हैं। इन्हें खाने से पेट की बीमारियां, गैस और इंफेक्शन होने का खतरा सर्वाधिक होता है।

II. दूसरा महीना: भाद्रपद (भादो) मास — दही का त्याग

  • अवधि: 29 अगस्त 2026 से 26 सितंबर 2026 तक।

  • त्याग नियम: भाद्रपद के महीने में दही (Curd) और दही से बनी चीजों (जैसे रायता, कढ़ी, लस्सी) का सेवन शास्त्रों में वर्जित बताया गया है।

  • वैज्ञानिक कारण: भादो के महीने में मौसम में उमस (Humidity) बढ़ जाती है और हमारा पाचन तंत्र (Digestive system) साल के सबसे कमजोर दौर में होता है। दही की तासीर कफ बढ़ाने वाली और पचने में भारी होती है। इस मौसम में दही खाने से जोड़ों का दर्द, कफ विकार और पेट में कीड़े होने की समस्या बढ़ सकती है।

III. तीसरा महीना: आश्विन (क्वार) मास — दूध का त्याग

  • अवधि: 27 सितंबर 2026 से 26 अक्टूबर 2026 तक।

  • त्याग नियम: आश्विन मास में कच्चा दूध (Milk) या दूध का अत्यधिक सेवन टालना चाहिए।

  • वैज्ञानिक कारण: यह शरद ऋतु (सर्दियों की शुरुआत) का संधिकाल होता है। इस समय गाय और भैंस जो चारा चरती हैं, उनमें कीड़े मकोड़ों का अंश होने की संभावना रहती है, जिससे दूध के दूषित होने का खतरा रहता है। साथ ही इस मौसम में वात-पित्त का संतुलन बिगड़ता है, जिसे दूध और अधिक बढ़ा सकता है।

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IV. चौथा महीना: कार्तिक मास — प्याज, लहसुन और दालों का त्याग

  • अवधि: 27 अक्टूबर 2026 से 21 नवंबर 2026 तक।

  • त्याग नियम: कार्तिक के महीने में प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन और कुछ विशेष दालों (जैसे उड़द, मसूर और द्विदल अनाज) का त्याग किया जाता है। इस महीने में मूली और बैंगन खाना भी वर्जित माना गया है।

  • धार्मिक कारण: कार्तिक का महीना पूर्ण रूप से सात्विकता और भगवान विष्णु तथा कृष्ण की भक्ति का महीना है। इस महीने में लोग सूर्योदय से पहले उठकर कार्तिक स्नान करते हैं, इसलिए शरीर को पूरी तरह पवित्र और सात्विक रखना अनिवार्य होता है।

4. चातुर्मास में कौन से कार्य करने चाहिए? (Do’s during Chaturmas)

चूंकि इन चार महीनों में शुभ मांगलिक कार्य बंद रहते हैं, इसलिए इस समय का उपयोग आत्म-साक्षात्कार और पुण्य कमाने के लिए करना चाहिए:

  1. भूमि पर शयन (Sleeping on the Floor): चातुर्मास के नियमों के अनुसार साधक को आरामदायक गद्दों और पलंग का त्याग करके ज़मीन पर चटाई या पतले बिछौने पर सोना चाहिए। यह शरीर में आलस्य को कम करता है और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है।

  2. ब्रह्मचर्य का पालन (Celibacy): इन 4 महीनों में पूर्ण रूप से शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। मन में किसी के प्रति दुर्भावना, काम, क्रोध या वासना के विचार नहीं आने देने चाहिए।

  3. एक समय भोजन (One Meal a Day): यदि आपका स्वास्थ्य अनुमति दे, तो चातुर्मास में केवल दिन में एक बार (सूर्यास्त से पहले) सात्विक भोजन करने का नियम लें। इसे ‘एकभुक्त व्रत’ कहा जाता है। यह पाचन क्रिया को रीस्टार्ट करने का अचूक तरीका है।

  4. मंत्र जाप और स्वाध्याय: इन चार महीनों में गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, या भगवान विष्णु के नवार्ण मंत्रों का जाप नियमित रूप से करना चाहिए। श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम और शिव पुराण जैसे ग्रंथों का स्वाध्याय (Reading) करना महापुण्यकारी है।

  5. मौन व्रत (Practice of Silence): दिन में कम से कम 1 या 2 घंटे मौन रहने का संकल्प लें। मौन रहने से हमारी आंतरिक ऊर्जा (Energy) नष्ट होने से बचती है और एकाग्रता बढ़ती है।

  6. दीपदान का महत्व: चातुर्मास के दौरान, विशेषकर कार्तिक के महीने में, शाम के समय तुलसी के पौधे के पास, घर के मुख्य द्वार पर और किसी पवित्र नदी या मंदिर में घी का दीपक जलाने (दीपदान) से घर की दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।

5. चातुर्मास में कौन से कार्य भूलकर भी न करें? (Don’ts during Chaturmas)

धार्मिक दृष्टिकोण से चातुर्मास में कुछ कार्यों को करना सख्त वर्जित (Strictly Prohibited) माना गया है, क्योंकि इस समय ब्रह्मांडीय स्थितियां सांसारिक सुखों के अनुकूल नहीं होतीं:

  • मांगलिक कार्य वर्जित: विवाह (Marriage), सगाई, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत, मुंडन संस्कार, जनेऊ संस्कार और नव-वधू का गृह प्रवेश इन 4 महीनों में पूर्णतः बंद रहता है।

  • तामसिक भोजन का त्याग: मांस, मदिरा (शराब), अंडा, लहसुन, प्याज, और बहुत अधिक तीखा या तला-भुना भोजन घर में भी नहीं बनना चाहिए।

  • अशुद्ध तेल का त्याग: इस दौरान शरीर पर या भोजन में सरसों के तेल का अत्यधिक प्रयोग करने से बचना चाहिए। बालों को काटने या शेविंग (Shaving) करने की भी मनाही होती है, विशेषकर व्रत रखने वालों के लिए।

  • कांस्य और पलाश के बर्तनों का निषेध: शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास के दौरान कांसे (Bronze) के बर्तनों में भोजन नहीं करना चाहिए। पलाश के पत्तों पर भोजन करना शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ बर्तनों का निषेध है।

  • दूसरों की निंदा: किसी की चुगली करना, अपशब्द बोलना, झूठ बोलना या किसी असहाय व्यक्ति का उपहास उड़ाने से चातुर्मास के सारे व्रतों का फल तत्काल नष्ट हो जाता है।

6. चातुर्मास का वैज्ञानिक और चिकित्सा दृष्टिकोण (Scientific Logic)

हमारे सनातन धर्म का कोई भी नियम अंधविश्वास पर आधारित नहीं है। चातुर्मास के पीछे एक बहुत बड़ा चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) छिपा हुआ है, जिसे आज के आधुनिक डॉक्टर्स भी स्वीकार करते हैं:

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  1. धीमा पाचन तंत्र (Metabolism): चातुर्मास का समय पूरी तरह से वर्षा ऋतु (मानसून) और शरद ऋतु के संधिकाल का होता है। इस मौसम में सूरज की रोशनी कम मिलती है और आसमान में बादल छाए रहते हैं। सूर्य की रोशनी कम होने से हमारे शरीर की जठराग्नि (Digestive fire) मंद हो जाती है। यदि हम इस दौरान भारी भोजन (मांस, गरिष्ठ अन्न) खाएंगे, तो वह पचेगा नहीं और टॉक्सिन्स (जहर) बनकर शरीर को बीमार कर देगा। इसलिए इन दिनों हल्का और सात्विक भोजन खाने का नियम बनाया गया।

  2. बैक्टीरिया और वायरस का प्रकोप: मानसून के मौसम में नमी के कारण हवा और पानी में बैक्टीरिया, फंगस और वायरस बहुत तेजी से फैलते हैं। यही वह समय होता है जब डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, और हैजा जैसी महामारियां फैलती हैं। व्रत रखने और गर्म, ताजा व सात्विक भोजन करने से हमारा इम्यून सिस्टम (Immune System) मजबूत रहता है।

  3. जीव-जंतुओं का प्रजनन काल: प्रकृति के दृष्टिकोण से, यह समय छोटे कीड़े-मकोड़ों, सांपों और पशु-पक्षियों का प्रजनन काल (Breeding Season) होता है। प्राचीन काल में संत-महात्मा इन चार महीनों में यात्राएं इसलिए रोक देते थे ताकि पैदल चलते समय अनजाने में उनके पैरों के नीचे आकर किसी छोटे जीव या अजन्मे भ्रूण की हत्या न हो जाए। यह जीवों के प्रति दया और पर्यावरण संतुलन का एक महान संदेश है।

भारतीय पंचांग का यह चार महीने का व्रत-चक्र हमारे जीवन को एक सुंदर अनुशासन में बांधने की दिव्य कला है।

इस विस्तृत और शोधपरक लेख “Chaturmas 2026 Calendar: देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक, जानें Full Date List” के माध्यम से हमने जाना कि चातुर्मास केवल मांगलिक कार्यों पर रोक लगाने का समय नहीं है, बल्कि यह खुद को भीतर से साफ करने, अपनी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को रिचार्ज करने का एक आध्यात्मिक अवसर है।

वर्ष 2026 में 25 जुलाई से शुरू हो रहे इस पावन चातुर्मास में आप भी अपनी क्षमता के अनुसार कोई एक छोटा संकल्प (जैसे रोज़ाना गीता का एक अध्याय पढ़ना, मौन रहना या किसी एक पसंदीदा तामसिक वस्तु का त्याग करना) अवश्य लें। जब आप कार्तिक मास में देवउठनी एकादशी पर इस व्रत को समाप्त करेंगे, तो आप स्वयं को शारीरिक रूप से अधिक निरोगी और मानसिक रूप से अत्यधिक शांत व ऊर्जावान पाएंगे। भगवान श्री हरि विष्णु और देवाधिदेव महादेव की असीम कृपा आपके और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे।

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ॥॥ हर हर महादेव ॥

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: वर्ष 2026 में चातुर्मास कब से शुरू और कब समाप्त हो रहा है?

उत्तर: वर्ष 2026 में चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026 (शनिवार) को देवशयनी एकादशी से होगा और इसका समापन 21 नवंबर 2026 (शनिवार) को देवउठनी एकादशी के दिन होगा। यह कुल 119 दिनों की अवधि होगी।

प्रश्न 2: चातुर्मास के दौरान शादियां और मुंडन जैसे कार्य क्यों नहीं किए जाते?

उत्तर: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु पाताल लोक में योग निद्रा में रहते हैं। उनकी अनुपस्थिति में शुभ कार्यों के साक्षी देवताओं की ऊर्जा कमजोर होती है, इसलिए इस दौरान किए गए मांगलिक कार्यों का शुभ फल प्राप्त नहीं होता। ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस समय सूर्य और चंद्रमा की स्थितियां गृहस्थ सुख के अनुकूल नहीं होतीं।

प्रश्न 3: क्या चातुर्मास के व्रत में नमक (Salt) खा सकते हैं?

उत्तर: यह आपके व्रत के संकल्प पर निर्भर करता है। यदि आप पूर्ण निराहार या फलाहारी व्रत रख रहे हैं, तो साधारण सफेद नमक वर्जित होता है, आप केवल सेंधा नमक (Rock Salt) का उपयोग शाम के भोजन में कर सकते हैं। कई लोग चातुर्मास में पूरे चार महीने के लिए साधारण नमक का त्याग कर देते हैं, जिसे ‘अलोन व्रत’ कहा जाता है।

प्रश्न 4: चातुर्मास के दौरान संन्यासी और साधु संत यात्रा क्यों बंद कर देते हैं?

उत्तर: इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला वैज्ञानिक व पर्यावरण संबंधी— बारिश के मौसम में ज़मीन पर अनगिनत सूक्ष्म जीव और कीड़े-मकोड़े पैदा हो जाते हैं। यात्रा करने से पैरों के नीचे आकर उनकी मृत्यु का भय रहता है। दूसरा आध्यात्मिक— वर्षा ऋतु में एक स्थान पर रुककर एकाग्रता के साथ कठिन ध्यान और साधना करना आसान होता है।

प्रश्न 5: यदि चातुर्मास के दौरान किसी नए घर की रजिस्ट्री करानी हो या वाहन खरीदना हो, तो क्या वह भी वर्जित है?

उत्तर: चातुर्मास में केवल ‘मांगलिक संस्कार’ (जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश) वर्जित हैं। व्यावसायिक या व्यावहारिक कार्य जैसे वाहन खरीदना, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराना, सोना खरीदना या नया सामान घर लाना वर्जित नहीं है। हालांकि, नए घर में रहने के लिए जो ‘गृह प्रवेश पूजा’ होती है, वह देवउठनी एकादशी के बाद ही करानी चाहिए।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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