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Pitru Paksha 2026 Calendar: किस तिथि पर करें किसका श्राद्ध? जानें Complete Tithi ListIt takes 15 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू धर्म में माता-पिता और पूर्वजों की सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। यह सेवा केवल उनके जीवित रहने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके शरीर त्यागने (मृत्यु) के बाद भी एक पुत्र या वंशज का यह नैतिक और धार्मिक कर्तव्य होता है कि वह अपने पितरों (पूर्वजों) की आत्मा की शांति के लिए कर्म करे। हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष में एक पूरा पखवाड़ा (15-16 दिन की अवधि) केवल हमारे दिवंगत पूर्वजों को समर्पित होता है। इस अत्यंत पवित्र और संवेदनशील समय को ‘पितृ पक्ष’ (Pitru Paksha) या ‘श्राद्ध पक्ष’ (Shradh Paksha) कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं और गरुड़ पुराण (Garuda Purana) के अनुसार, पितृ पक्ष के इन 15 दिनों में यमराज (मृत्यु के देवता) सभी आत्माओं को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे पृथ्वी लोक (Bhu-Loka) पर आकर अपने वंशजों (परिवार वालों) से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान ग्रहण कर सकें। माना जाता है कि जो परिवार अपने पितरों का विधि-विधान से श्राद्ध नहीं करते, उनके पितर निराश होकर वापस लौट जाते हैं, जिससे परिवार को ‘पितृ दोष’ (Pitru Dosh) का सामना करना पड़ता है।

यदि आप वर्ष 2026 में अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म करने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके मन में यह सवाल अवश्य होगा कि किस दिन कौन सा श्राद्ध किया जाएगा। इस बेहद विस्तृत और प्रामाणिक लेख “Pitru Paksha 2026 Calendar: किस तिथि पर करें किसका श्राद्ध? जानें Complete Tithi List” में हम आपको साल 2026 की सभी श्राद्ध तिथियों, श्राद्ध के नियमों, पंचबलि कर्म और तर्पण की पूरी विधि के बारे में विस्तार से बताएंगे।

1. पितृ पक्ष 2026 कब से कब तक है? (Pitru Paksha 2026 Dates)

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या/महालया) तक चलता है।

वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को ‘पूर्णिमा श्राद्ध’ के साथ हो रही है और इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को ‘सर्वपितृ अमावस्या’ (महालया) के दिन होगा।

2. किस तिथि पर करें किसका श्राद्ध? (Which Tithi for Whom?)

श्राद्ध पक्ष में कुल 16 तिथियां होती हैं (पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तक)। सबसे बड़ा नियम यह है कि पूर्वज की मृत्यु हिंदू पंचांग की जिस तिथि को हुई हो, उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाना चाहिए। (उदाहरण: यदि किसी की मृत्यु द्वितीया तिथि को हुई है, तो उनका श्राद्ध द्वितीया को ही होगा, चाहे मृत्यु किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष में हुई हो या कृष्ण पक्ष में)।

हालांकि, हिंदू शास्त्रों में कुछ विशेष परिस्थितियों और मृत्यु के कारणों के आधार पर श्राद्ध के लिए कुछ विशेष तिथियां (Special Tithis) निर्धारित की गई हैं। आइए जानते हैं कि किस तिथि पर किसका श्राद्ध करना चाहिए:

I. पूर्णिमा श्राद्ध (Purnima Shraddha)

जिन लोगों की मृत्यु किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध पितृ पक्ष के आरंभ (पूर्णिमा श्राद्ध) के दिन किया जाता है।

II. प्रतिपदा से चतुर्थी श्राद्ध (Pratipada to Chaturthi)

जिन पूर्वजों की मृत्यु प्रतिपदा (पहली), द्वितीया, तृतीया या चतुर्थी तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध इन संबंधित तिथियों पर किया जाता है। यदि नाना-नानी के परिवार में कोई श्राद्ध करने वाला (पुत्र) न हो, तो नाती (बेटी का बेटा) प्रतिपदा तिथि के दिन उनका श्राद्ध कर सकता है।

III. कुंवारा पंचमी (Kuwara Panchami Shraddha)

पंचमी तिथि का श्राद्ध उन पारिवारिक सदस्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिनकी मृत्यु अविवाहित (Unmarried) अवस्था में हो गई हो। चाहे वह कोई कुंवारा लड़का हो या लड़की, यदि वे विवाह से पहले संसार छोड़ गए हैं, तो उनका श्राद्ध पंचमी तिथि (भरणी पंचमी) को ही किया जाता है।

IV. मातृ नवमी / अविधवा नवमी (Matri Navami Shraddha)

नवमी तिथि को ‘मातृ नवमी’ या ‘अविधवा नवमी’ कहा जाता है। यह तिथि सुहागिन महिलाओं (Married Women) को समर्पित है। यदि परिवार में किसी महिला (माता, दादी, पत्नी, चाची) की मृत्यु उस समय हुई हो जब उनके पति जीवित थे (यानी वे सुहागिन अवस्था में परलोक सिधारी हों), तो उनका श्राद्ध नवमी तिथि को किया जाता है। इस दिन परिवार की सभी मृत माताओं का विशेष तर्पण किया जाता है।

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V. संन्यासी श्राद्ध (Dwadashi / Trayodashi Shraddha)

द्वादशी (12वीं) और त्रयोदशी (13वीं) तिथि का श्राद्ध उन लोगों के लिए किया जाता है जिन्होंने अपने जीवन में संन्यास (Asceticism) ले लिया हो, या जो बैरागी और साधु-संत की अवस्था में शरीर त्याग गए हों।

VI. घट चतुर्दशी / घायल चतुर्दशी (Chaturdashi Shraddha)

चतुर्दशी (14वीं) तिथि का श्राद्ध सामान्य मृत्यु वालों के लिए नहीं किया जाता। यह तिथि उन लोगों के लिए आरक्षित है जिनकी अकाल मृत्यु (Unnatural Death) हुई हो। जैसे— किसी दुर्घटना (Accident) में मृत्यु, आत्महत्या (Suicide), आग में जलने से, डूबने से, अस्त्र-शस्त्र से, या किसी जानवर (जैसे सांप के काटने) से मृत्यु। ऐसे पूर्वजों की आत्मा को शांति दिलाने के लिए चतुर्दशी तिथि को उनका विशेष श्राद्ध किया जाता है।

VII. सर्वपितृ अमावस्या / महालया (Sarva Pitru Amavasya)

यह पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। ‘सर्वपितृ’ का अर्थ है— सभी पितरों का दिन।

  • किसका श्राद्ध करें? यदि आपको अपने किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि याद नहीं है, या आप किसी कारणवश उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करना भूल गए हैं, तो आप उनका श्राद्ध ‘सर्वपितृ अमावस्या’ के दिन कर सकते हैं।

  • इस दिन घर के उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का तर्पण किया जाता है, जिनका हमें स्मरण नहीं है। इसी दिन पितर पृथ्वी से विदा लेकर वापस अपने लोक (Pitru Loka) चले जाते हैं।

3. Pitru Paksha 2026 Calendar (Complete Tithi List)

आइए, अब वर्ष 2026 की सभी 16 श्राद्ध तिथियों को एक व्यापक कैलेंडर (Table) के माध्यम से देखते हैं। आप इस सूची को सेव कर सकते हैं ताकि सही दिन पर सही अनुष्ठान किया जा सके।

श्राद्ध की तिथि (Shradh Tithi) 2026 में तारीख (Date) दिन (Day) किसका श्राद्ध करें? (Significance)
पूर्णिमा श्राद्ध 25 सितंबर 2026 शुक्रवार जिनकी मृत्यु पूर्णिमा को हुई हो
प्रतिपदा श्राद्ध 26 सितंबर 2026 शनिवार जिनकी मृत्यु प्रतिपदा (एकम) को हुई हो / नाना-नानी
द्वितीया श्राद्ध 27 सितंबर 2026 रविवार जिनकी मृत्यु द्वितीया (दूज) को हुई हो
तृतीया श्राद्ध 28 सितंबर 2026 सोमवार जिनकी मृत्यु तृतीया (तीज) को हुई हो
चतुर्थी श्राद्ध 29 सितंबर 2026 मंगलवार जिनकी मृत्यु चतुर्थी को हुई हो
पंचमी श्राद्ध (कुंवारा पंचमी) 30 सितंबर 2026 बुधवार अविवाहित (कुंवारे) मृतकों के लिए
षष्ठी श्राद्ध 1 अक्टूबर 2026 गुरुवार जिनकी मृत्यु षष्ठी (छठ) को हुई हो
सप्तमी श्राद्ध 2 अक्टूबर 2026 शुक्रवार जिनकी मृत्यु सप्तमी को हुई हो
अष्टमी श्राद्ध 3 अक्टूबर 2026 शनिवार जिनकी मृत्यु अष्टमी को हुई हो
नवमी श्राद्ध (मातृ नवमी) 4 अक्टूबर 2026 रविवार सुहागिन महिलाओं (माताओं) के लिए
दशमी श्राद्ध 5 अक्टूबर 2026 सोमवार जिनकी मृत्यु दशमी को हुई हो
एकादशी श्राद्ध 6 अक्टूबर 2026 मंगलवार जिनकी मृत्यु एकादशी को हुई हो
द्वादशी श्राद्ध 7 अक्टूबर 2026 बुधवार जिनकी मृत्यु द्वादशी को हुई हो
त्रयोदशी श्राद्ध 8 अक्टूबर 2026 गुरुवार संन्यासियों और साधु-संतों के लिए
चतुर्दशी श्राद्ध (घायल चतुर्दशी) 9 अक्टूबर 2026 शुक्रवार अकाल मृत्यु (दुर्घटना, विष, शस्त्र से) वालों के लिए
सर्वपितृ अमावस्या (महालया) 10 अक्टूबर 2026 शनिवार भूले-बिसरे और सभी ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के लिए

(नोट: श्राद्ध कर्म के लिए तिथि का निर्णय ‘कुतुप मुहूर्त’ और ‘अपराह्न काल’ (दोपहर का समय) के आधार पर किया जाता है। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार तिथियों के समय में मामूली बदलाव आ सकता है।)

4. श्राद्ध और तर्पण का सही मुहूर्त (Auspicious Timings for Shradh)

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ अक्सर सुबह (ब्रह्म मुहूर्त) में किए जाते हैं, लेकिन श्राद्ध कर्म कभी भी सुबह या शाम को नहीं किया जाता। पितरों का समय दोपहर का माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, श्राद्ध कर्म हमेशा ‘कुतुप मुहूर्त’, ‘रौहिण मुहूर्त’ या ‘अपराह्न काल’ में ही संपन्न किया जाना चाहिए।

  1. कुतुप मुहूर्त (Kutup Muhurat): दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) को 15 मुहूर्तों में बांटा गया है। इसमें से 8वां मुहूर्त ‘कुतुप मुहूर्त’ कहलाता है। यह आमतौर पर दोपहर 11:45 AM से 12:35 PM के बीच होता है। ‘कु’ का अर्थ है पाप, और ‘तुप’ का अर्थ है नष्ट करना। इस समय श्राद्ध करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

  2. रौहिण मुहूर्त (Rohina Muhurat): कुतुप के ठीक बाद रौहिण मुहूर्त आता है (लगभग 12:35 PM से 1:24 PM)। यह भी श्राद्ध के लिए अति उत्तम है।

  3. अपराह्न काल (Aparahna Kaal): दोपहर 1:24 PM से लेकर 3:48 PM तक का समय अपराह्न काल कहलाता है। यह तर्पण और ब्राह्मण भोज के लिए सबसे अनुकूल समय है।

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(चेतावनी: सूर्यास्त के बाद या रात के समय श्राद्ध या तर्पण करना सख्त वर्जित है, क्योंकि रात का समय राक्षसों और नकारात्मक शक्तियों का माना जाता है।)

5. श्राद्ध कर्म की संपूर्ण विधि (Step-by-Step Shradh Vidhi)

श्राद्ध केवल एक कर्मकांड नहीं है, यह श्रद्धा का प्रतीक है (“श्रद्धया क्रियते यत् तत् श्राद्धम्”)। यदि आपके पास बहुत धन नहीं है, तब भी आप साधारण विधि से पितरों को तृप्त कर सकते हैं। श्राद्ध के मुख्य रूप से 3 अंग होते हैं: तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज।

चरण 1: तर्पण (Water Offering)

तर्पण का अर्थ है जल देकर तृप्त करना।

  • दोपहर के समय स्नान करके स्वच्छ श्वेत (सफेद) वस्त्र धारण करें।

  • दक्षिण दिशा (South direction) की ओर मुख करके बैठें, क्योंकि दक्षिण को यमराज और पितरों की दिशा माना गया है।

  • एक तांबे या पीतल के बर्तन में शुद्ध जल, कच्चा दूध, काले तिल (Black Sesame), जौ और कुशा (एक प्रकार की पवित्र घास) डाल लें।

  • हाथ में कुशा लेकर उस जल को अंजलि (दोनों हाथों से) में भरकर तीन-तीन बार अंगूठे के सहारे (पितृ तीर्थ से) नीचे बर्तन में गिराएं। जल गिराते समय अपने पूर्वजों का नाम और गोत्र लें और कहें “तस्मै स्वधा नमः”

चरण 2: पंचबलि कर्म (The 5 Offerings)

ब्राह्मणों को भोजन कराने से पहले घर में बने सात्विक भोजन (खीर, पूरी, सब्जी आदि) के पांच हिस्से निकाले जाते हैं। इसे ‘पंचबलि’ कहा जाता है:

  1. गौ बलि (Cow): गाय में सभी देवताओं का वास होता है। भोजन का पहला हिस्सा गाय के लिए निकाला जाता है।

  2. श्वान बलि (Dog): कुत्ता यमराज का दूत माना जाता है। दूसरा हिस्सा कुत्ते को खिलाया जाता है।

  3. काक बलि (Crow): पितृ पक्ष में कौवे को पितरों का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि पितर कौवे का रूप धारण करके भोजन ग्रहण करने आते हैं। तीसरा हिस्सा छत पर कौवों के लिए रखा जाता है।

  4. देव बलि (Deities): चौथा हिस्सा अग्नि देव और अन्य देवताओं के निमित्त निकाला जाता है (अग्नि में आहुति दी जाती है)।

  5. पिपीलिका बलि (Ants/Insects): पांचवा हिस्सा चींटियों और छोटे कीड़े-मकोड़ों के लिए ज़मीन पर रखा जाता है।

चरण 3: ब्राह्मण भोज (Feeding the Brahmins)

  • पंचबलि निकालने के बाद, घर बुलाए गए योग्य ब्राह्मण (पुजारी) को सम्मानपूर्वक आसन पर बिठाएं।

  • उन्हें सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज का) परोसें। भोजन में खीर (Kheer) का होना अत्यंत आवश्यक है।

  • भोजन के बाद उन्हें अपनी क्षमता अनुसार दक्षिणा, वस्त्र (धोती-कुर्ता), छाता या जूते दान करें।

  • उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें और उन्हें सम्मान के साथ विदा करें।

(नोट: यदि ब्राह्मण उपलब्ध न हो, तो आप किसी गरीब, असहाय या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं, या अनाथालय में सीधा राशन (Dry Ration) दान कर सकते हैं।)

6. पितृ दोष क्या है और इसके लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Pitru Dosh)

भारतीय ज्योतिष (Vedic Astrology) में ‘पितृ दोष’ को सबसे कष्टकारी दोषों में से एक माना गया है। यदि परिवार के लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध नहीं करते, या कोई पूर्वज असंतुष्ट होकर शरीर त्यागता है, तो परिवार की कुंडली में पितृ दोष लग जाता है (विशेषकर यदि राहु-केतु का सूर्य या चंद्रमा के साथ खराब संबंध हो)।

पितृ दोष के प्रमुख लक्षण:

  • संतान सुख में बाधा: परिवार में वंश वृद्धि रुक जाना, संतान न होना या बच्चों का बार-बार बीमार पड़ना।

  • आर्थिक संकट (Financial Ruin): कड़ी मेहनत के बावजूद पैसा न टिकना, अचानक भारी नुकसान होना या हमेशा कर्ज (Debt) में डूबे रहना।

  • पारिवारिक कलह: घर में बिना किसी बड़ी वजह के हमेशा अशांति, झगड़े और तनाव का माहौल रहना।

  • विवाह में अड़चन: घर के युवाओं की शादी में लगातार रुकावटें आना या शादी तय होकर टूट जाना।

उपाय: पितृ दोष का सबसे बड़ा और अचूक उपाय यही है कि पितृ पक्ष (Shradh 2026) के दौरान 15 दिन लगातार तर्पण किया जाए और सर्वपितृ अमावस्या (Mahalaya) के दिन गया (Gaya, Bihar) या त्र्यंबकेश्वर (Trimbakeshwar) जैसे तीर्थ स्थानों पर जाकर ‘नारायण नागबलि’ या ‘त्रिपिंडी श्राद्ध’ करवाया जाए।

7. पितृ पक्ष के दौरान क्या न करें? (Strictly Avoid These in Shradh)

चूंकि यह पखवाड़ा शोक, स्मरण और तपस्या का होता है, इसलिए शास्त्रों में इन 15 दिनों के लिए कुछ कड़े नियम बनाए गए हैं:

  1. मांगलिक कार्य वर्जित: पितृ पक्ष के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, और नया व्यापार शुरू करना पूरी तरह से वर्जित है।

  2. नई खरीदारी न करें: इस दौरान नए कपड़े, नई गाड़ी (Vehicle), आभूषण (Jewelry) या नई प्रॉपर्टी (Real Estate) खरीदने से बचना चाहिए।

  3. तामसिक भोजन का त्याग: पूरे 15 दिन घर में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, अंडा और बासी भोजन नहीं बनना चाहिए। इसके अलावा चना, मसूर की दाल, सरसों का साग, और जीरा भी श्राद्ध के भोजन में वर्जित माने गए हैं।

  4. बाल और नाखून काटना: जो व्यक्ति (कर्ता) श्राद्ध कर रहा है, उसे पूरे 15 दिनों तक बाल (Haircut), दाढ़ी (Shaving) और नाखून नहीं काटने चाहिए। यह शोक का प्रतीक है।

  5. क्रोध और विवाद: पितृ पक्ष में घर में शांति बनाए रखें। किसी से झगड़ा करना, झूठ बोलना, या दरवाजे पर आए किसी भिखारी/जानवर को मारकर भगाना घोर पाप माना जाता है; क्योंकि पितर किसी भी रूप में आपके द्वार पर आ सकते हैं।

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8. वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण (The Science behind Pitru Paksha)

आधुनिक पीढ़ी अक्सर पूछती है कि क्या मरे हुए लोग सच में भोजन खाने आते हैं? इसका उत्तर मनोविज्ञान और विज्ञान दोनों में छिपा है:

  • कृतज्ञता (Gratitude) का भाव: पितृ पक्ष ‘Thanksgiving’ का भारतीय स्वरूप है। आज हम जो कुछ भी हैं— हमारा शरीर, हमारा धन, हमारी पहचान— वह हमारे पूर्वजों की ही देन है। श्राद्ध कर्म हमें अहंकार (Ego) से मुक्त करता है और अपनी जड़ों (Roots) के प्रति कृतज्ञ होना सिखाता है।

  • डीएनए (DNA) और आनुवंशिकी: विज्ञान मानता है कि हमारे भीतर हमारे पूर्वजों का DNA मौजूद है। जब हम श्राद्ध के दौरान ध्यान लगाते हैं, मंत्र पढ़ते हैं और शांति का अनुभव करते हैं, तो हमारे भीतर की जेनेटिक मेमोरी शांत होती है, जिसका सीधा असर हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।

  • प्रकृति संरक्षण: काक बलि (कौवे को भोजन), गौ बलि और पिपीलिका बलि देकर हम वास्तव में इको-सिस्टम (Eco-system) और पर्यावरण (Environment) का संरक्षण कर रहे होते हैं। यह मनुष्य को प्रकृति के अन्य जीवों के साथ जोड़ता है।

“Pitru Paksha 2026 Calendar: किस तिथि पर करें किसका श्राद्ध? जानें Complete Tithi List” नामक इस लेख का मूल उद्देश्य आपको केवल तारीखें बताना नहीं, बल्कि श्राद्ध के पीछे छिपी उस महान करुणा और श्रद्धा भाव से जोड़ना है, जो सनातन धर्म की नींव है।

भागदौड़ भरी इस आधुनिक ज़िंदगी में हम अक्सर उन लोगों को भूल जाते हैं जिन्होंने हमारे भविष्य के लिए अपना वर्तमान कुर्बान कर दिया था। वर्ष 2026 में 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाला यह पितृ पक्ष आपको एक अवसर दे रहा है— थोड़ा रुकने का, पीछे मुड़कर देखने का, और उन अदृश्य शक्तियों को नमन करने का जो आज भी सितारों के बीच से हमें आशीर्वाद दे रही हैं।

यदि आप किसी कारणवश 15 दिन श्राद्ध न कर पाएं, तो केवल 10 अक्टूबर 2026 (सर्वपितृ अमावस्या) के दिन घर के दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाकर, गरीबों को भोजन करा दें और हाथ जोड़कर पितरों से क्षमा मांग लें। विश्वास मानिए, वे आप पर अपनी कृपा की बारिश कर देंगे।

ॐ पितृभ्यो नमः ॥

ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः॥

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: वर्ष 2026 में पितृ पक्ष (Shradh) कब से शुरू हो रहे हैं? उत्तर: वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को ‘पूर्णिमा श्राद्ध’ से हो रही है। हालांकि, प्रतिपदा का श्राद्ध 26 सितंबर को होगा। यह अवधि 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगी।

प्रश्न 2: यदि किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि याद न हो, तो श्राद्ध कब करें? उत्तर: यदि आपको अपने माता, पिता या किसी भी पूर्वज की मृत्यु की हिंदू तिथि या दिन याद नहीं है, तो शास्त्रों के अनुसार उनका श्राद्ध पितृ पक्ष के अंतिम दिन यानी ‘सर्वपितृ अमावस्या’ (महालया – 10 अक्टूबर 2026) को किया जाना चाहिए। इसे सभी भूले-बिसरे पितरों के लिए सार्वभौमिक (Universal) श्राद्ध का दिन माना जाता है।

प्रश्न 3: क्या महिलाएं (स्त्रियां) अपने पितरों का श्राद्ध या तर्पण कर सकती हैं? उत्तर: जी हाँ। गरुड़ पुराण और धर्मसिंधु जैसे ग्रंथों के अनुसार, यदि घर में कोई पुत्र या पुरुष सदस्य (Karta) न हो, तो घर की कन्या, पत्नी या बहू भी अपने पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान पूरे अधिकार के साथ कर सकती है। वाल्मीकि रामायण में माता सीता द्वारा राजा दशरथ का पिंडदान करने का उल्लेख मिलता है।

प्रश्न 4: श्राद्ध में काले तिल (Black Sesame Seeds) का ही प्रयोग क्यों किया जाता है? उत्तर: पौराणिक मान्यता है कि काले तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है। काले तिल को अत्यंत पवित्र माना जाता है और यह नकारात्मक शक्तियों (Negative Energies) को दूर भगाता है। मान्यता है कि जल में काले तिल मिलाकर तर्पण करने से पितरों को वह जल अमृत के समान प्राप्त होता है और उन्हें अनंत काल तक तृप्ति मिलती है।

प्रश्न 5: क्या पितृ पक्ष (Kanagat) के दौरान यात्रा (Traveling) की जा सकती है? उत्तर: पितृ पक्ष में सामान्य दैनिक यात्राएं और नौकरी/व्यापार के लिए की जाने वाली यात्राएं वर्जित नहीं हैं। आप आराम से यात्रा कर सकते हैं। हालांकि, तीर्थ यात्रा के अलावा कोई भी ‘आनंद-प्रमोद’ (Pleasure Trip/Vacation) की यात्रा टालने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह समय उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि पितरों के प्रति शोक और श्रद्धा व्यक्त करने का होता है।

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